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  • टाटा ग्रुप इंडस्ट्री को फॉलो नहीं, लीड करेगा: चार्ज लेने के बाद चेयरमैन चंद्रशेखरन ने कहा
    Last Updated: February 21 2017, 14:16 PM

    मुंबई. टाटा ग्रुप के 92 साल पुराने हेडक्वार्टर बॉम्बे हाउस को मंगलवार को नया बॉस मिल गया। टाटा ग्रुप के नए चेयरमैन का चार्ज लेने के बाद चंद्रशेखरन ने कहा, हम मिलकर अपने सभी बिजनेस में इंडस्ट्री को लीड करेंगे, फॉलो नहीं। चंद्रा 149 साल पुराने ग्रुप के पहले गैर पारसी चेयरमैन बने हैं। इसके लिए चौथे फ्लोर पर कार्नर रूम यानी चेयरमैन ऑफिस को चंद्रा के लिए वैसा ही डेकोरेट किया गया है, जैसा 1980 के दशक में चेयरमैन जेआरडी टाटा और उसके बाद रतन टाटा के वक्त था। 2012 में चेयरमैन बने साइरस मिस्त्री ने रूम का लेआउट बदल दिया था। मिस्त्री के बाद चेयरमैन बने चंद्रा... - चंद्रा सुबह 9.15 बजे ऑफिस पहुंचे, इसके थोड़ी देर बाद ही रतन टाटा भी पहुंचे। उन्होंने चंद्रा को चेयरमैन का कार्यभार सौंपा। - टाटा सन्स के चेयरमैन पद से 24 अक्टूबर 2016 को मिस्त्री को हटाया गया था। तब रतन टाटा खेमे ने कहा था कि मिस्त्री के फैसले टाटा की परंपराओं से मेल नहीं खाते। - ऐसे में, चंद्रा जेआरडी टाटा के समय जैसा ऑफिस डेकोरेट कराकर यह संकेत देने की कोशिश कर रहे हैं कि वह कंपनी की परंपराओं को आगे बढ़ाएंगे। - 54 साल के चंद्रशेखरन का पॉपुलर नाम चंद्रा है। चंद्रा को टीसीएस का भी चेयरमैन बनाया गया है। उनकी जगह रजेश गोपीनाथन नए सीईओ होंगे। चुनौतियां 1. ब्रिटेन में टाटा स्टील को मंदी से निकालना - नए चेयरमैन मैराथन मैन चंद्रा के सामने सबसे पहली चुनौती तो यही है कि रतन टाटा-मिस्त्री बोर्डरूम विवाद से समूह की छवि को जो नुकसान पहुंचा है, उसकी भरपाई कैसे हो। साथ ही, कारोबार को फिर से आगे बढ़ाया जा सके। टाटा स्टील का इंग्लैंड का बिजनेस लगातार घाटे में चल रहा है। कुछ हिस्सा बेचने का भी फैसला हुआ है। चंद्रा को तय करना होगा कि कौन-सा हिस्सा बेचा जाना चाहिए और किस यूनिट को मुनाफे में लाया जा सकता है। 2. टाटा के ड्रीम प्रोजेक्ट नैनो को फिर से खड़ा करना - रतन टाटा का ड्रीम प्रोजेक्ट नैनो फेल रहा है। इसका घाटा 1,000 करोड़ रुपए को पार कर गया है। इससे पूरे टाटा मोटर्स के प्रदर्शन पर असर पड़ा। मिस्त्री इस प्रोजेक्ट के खिलाफ थे। उन्होंने टाटा पर आरोप लगाया था कि टाटा अपने अहम के चलते इस प्रोजेक्ट को बंद नहीं कर रहे हैं। अब चंद्रा को फैसला लेना होगा कि घाटे के बावजूद प्रोजेक्ट के कब तक जिंदा रखा जा सकता है। खासकर, यह देखते हुए कि टाटा मोटर्स की सभी यूनिट्स को मुनाफे में लाने का टारगेट है। बॉम्बे हाउस बनाने वाले विटेट टाटा इंजीनियरिंग के हेड भी बने थे - मुंबई में फ्लोरा फाउंटेन के पास यह 4 मंजिला बिल्डिंग है। यह मलाड पत्थरों से बनी है। - आर्किटेक्ट जार्ज विटेट ने इसे बनाया था। कंपनी की 40 बिल्डिंग डिजाइन की थी। - विटेट टाटा इंजीनियरिंग कंपनी के हेड भी बने। अब यह कंपनी टाटा मोटर्स है। ऐसा था जेआरडी टाटा का ऑफिस - रतन टाटा ने 1991 में यह ऑफिस संभाला था। कुछ साल उन्होंने इस ऑफिस में कोई बदलाव नहीं किया। - बाद में रतन टाटा ने जेआरडी टाटा की कुर्सी, टेबल और स्टेशनरी को पुणे की अर्काइव बिल्डिंग में भेजा। यहां जेआरडी के दफ्तर का रिप्लिका बनाया गया। 16 हजार करोड़ रुपए के शेयर खरीदेगी टीसीएस - आईटी कंपनी टीसीएस ने देश के सबसे बड़े शेयर बायबैक का एलान किया है। कंपनी बाजार से 16,000 करोड़ रुपए के शेयर खरीदेगी। इससे पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 2012 में 10,400 करोड़ रुपए का बायबैक किया था। - टीसीएस 2,850 रुपए के भाव पर 2.85% यानी 5.61 करोड़ शेयर खरीदेगी। बायबैक की कीमत मौजूदा शेयर भाव 2,506.50 रुपए से 13.7% ज्यादा है। बीएसई में शेयर 4.08% चढ़ गए। टीसीएस में टाटा सन्स की 73.3% होल्डिंग है। कंपनी के पास 43,169 करोड़ रुपए का कैश है। क्यों चुने गए चंद्रशेखरन? 1. देश के सबसे कामयाब ऑपरेटिंग सीईओ। वे रतन टाटा के सबसे भरोसेमंद लोगों में माने जाते हैं। 2. टाटा ग्रुप को अच्छी तरह समझते हैं। 30 साल से ग्रुप से जुड़े हैं। करियर की शुरुआत भी टाटा ग्रुप से बतौर सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर की थी। मैराथन रनर चंद्रशेखरन खुद कह चुके हैं कि वे लंबी रेस में दौड़ने जैसा सोचते हैं। 3. टाटा सन्स को उम्मीद है कि चंद्रशेखरन आईटी बैकग्राउंड होने के कारण टाटा ग्रुप का डिजिटल मेकओवर कर सकते हैं। उन्होंने 2009 में टीसीएस की कमान संभाली थी। हर साल कंपनी की कमाई बढ़ाई। मैराथन और फोटोग्राफी के शौकीन हैं चंद्रशेखरन - चंद्रशेखरन का जन्म तमिलनाडु के मोहनुर में हुआ था। फिलहाल, वे मुंबई में रहते हैं। पत्नी का नाम ललिता और बेटे का नाम प्रणव है। - वे बेहतरीन फोटोग्राफर हैं। इसके अलावा एम्सटर्डम, बोस्टन, शिकागो और मुंबई समेत कई जगह मैराथन में हिस्सा ले चुके हैं। - चंद्रशेखरन 5 मार्च 2016 से RBI के नॉन ऑफिशियल डायरेक्टर भी हैं। - वे रोज सुबह रनिंग जरूर करते हैं, क्योंकि उनकी फैमिली में डायबिटीक हिस्ट्री है। - चंद्रा के पिता का नाम श्रीनिवासन नटराजन है। वे वकील थे, लेकिन ज्यादातर वक्त खेती में गुजारते थे।

  • चंद्रशेखरन कल संभालेंगे टाटा ग्रुप की कमान, बोर्डरूम की लड़ाई खत्म करना होगी चुनौती
    Last Updated: February 20 2017, 16:31 PM

    मुंबई. टाटा ग्रुप का मंगलवार से एक नया युग शुरू होगा। नटराजन चंद्रशेखरन कल ग्रुप की चेयरमैन पोस्ट संभालेंगे। उम्मीद की जा रही है कि साइरस मिस्त्री को टाटा संस की चेयरमैन पोस्ट से हटाने के बाद ग्रुप में शुरू हुई बोर्डरूम की लड़ाई को चंद्रशेखरन खत्म करने में सफल रहेंगे। चंद्रशेखरन का पॉपुलर नाम चंद्रा... - न्यूज एजेंसी के मुताबिक चंद्रशेखरन का पॉपुलर नाम चंद्रा है। 54 साल के चंद्रा ग्रुप की 149 साल की हिस्ट्री में पहले गैर-पारसी चेयरमैन होंगे। - चंद्रा को भारत के सबसे बड़े सॉफ्टवेयर एक्सपोर्टर TCS को यहां तक पहुंचाने का श्रेय हासिल है। - चंद्रा के पास टाटा संस के नए चेयरमैन का चार्ज होगा, जो ग्रुप की कई कंपनियों की प्रमोटर फर्म है। ए वेरी बिग जॉब - पिछले हफ्ते चंद्रशेखरन ने अपने नए असाइनमेंट को ए वेरी बिग जॉब कहा था। - उन्होंने इसे एक बड़ा कैनवास कहा था, जहां चुनौतियां और अवसर दोनों हैं। - चंद्रा ने कहा था, मुझे उम्मीद है कि मैं कुछ अलग कर सकूंगा और एक प्रभाव छोड़ने में सफल रहूंगा। कई अहम मुद्दों से तुरंत होगा सामना - माना जा रहा है कि मंगलवार को जब चंद्रा 103 अरब डॉलर के इस ग्रुप की कमान संभालेंगे तो कई अहम मुद्दों से उनका तुरंत सामना होगा। - इनमें पहला, टाटा स्टील के यूरोप में, खासकर यूके में ऑपरेशंस हैं। Corus के विफल अधिग्रहण (unsuccessful acquisition) के बाद ग्रुप वहां से अपने कदम खींच रहा है। - टाटा स्टील ने पहले से ही यूके में अपने एसेट्स बेचने शुरू कर दिए हैं, चंद्रा को यह तय करना होगा कि खासकर Brexit के चलते कितना एसेट्स ब्लॉक किया जाए और कितने से कदम खींच लिए जाएं। - बहरहाल, चंद्रा ने जनवरी में अपने अप्वाइंटमेंट के दिन ही यह कहकर संकेत दे दिया था कि टाटा संस ने ऐसे बिजनेस किए हैं जिनसे बाकियों को दिशा मिलती है। अच्छे और बुरे दोनों वक्त में इसने बिजनेस किया। - चंद्रा के सामने दूसरी जो दिक्कत होगी, वह है रतन टाटा का ड्रीम प्रोजेक्ट नैनो, जिसे टाटा मोटर्स के नुकसान के लिए जिम्मेदार करार दिया गया है। - साइरस मिस्त्री पीपुल्स कार के प्रोजेक्ट को खत्म करना चाहते थे। चंद्रा को यह तय करना होगा कि पीपुल्स कार की जर्नी क्या जारी रखी जाए जबकि इससे 1,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का घाटा हो चुका है। क्यों चुने गए चंद्रशेखरन? 1. देश के सबसे कामयाब ऑपरेटिंग सीईओ। वे सबसे रतन टाटा के सबसे भरोसेमंद लोगों में माने जाते हैं। 2. टाटा ग्रुप को अच्छी तरह समझते हैं। 30 साल से ग्रुप से जुड़े हैं। करियर की शुरुआत भी टाटा ग्रुप से बतौर सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर की थी। मैराथन रनर चंद्रशेखरन खुद कह चुके हैं कि वे लंबी रेस में दौड़ने जैसी सोचते हैं। 3. टाटा सन्स को उम्मीद है कि चंद्रशेखरन आईटी बैकग्राउंड होने के कारण टाटा ग्रुप का डिजिटल मेकओवर कर सकते हैं। उन्होंने 2009 में टीसीएस की कमान संभाली थी। हर साल कंपनी की कमाई बढ़ाई। मैराथन और फोटोग्राफी के शौकीन हैं चंद्रशेखरन - चंद्रशेखरन का जन्म तमिलनाडु के मोहनुर में हुआ था। फिलहाल, वे मुंबई में रहते हैं। पत्नी का नाम ललिता और बेटे का नाम प्रणव है। - वे बेहतरीन फोटोग्राफर हैं। इसके अलावा एम्सटरडम, बॉस्टन, शिकागो और मुंबई समेत कई जगह मैराथन में हिस्सा ले चुके हैं। - चंद्रशेखरन 5 मार्च 2016 से RBI के नॉन ऑफिशियल डायरेक्टर भी हैं। - वे रोज सुबह रनिंग जरूर करते हैं क्योंकि उनकी फैमिली में डायबिटिक हिस्ट्री है। - चंद्रा के पिता का नाम श्रीनिवासन नटराजन है। वे वकील थे लेकिन ज्यादातर वक्त खेती में गुजारते थे।

  • टाटा संस के निदेशक पद से हटाए गए साइरस मिस्त्री
    Last Updated: February 07 2017, 05:04 AM

    मुंबई/जमशेदपुर. टाटा संस लिमिटेड के शेयरधारकों की सोमवार को असाधारण सामान्य बैठक (ईजीएम) में साइरस मिस्त्री को निदेशक पद से हटाने का प्रस्ताव बहुमत से पारित किया गया। उन्हें हटाने का प्रस्ताव पेश किया था। पिछले साल ही रतन टाटा ने साइरस मिस्त्री को अचानक टाटा ग्रुप के चेयरमैन पद से अपदस्थ कर अंतरिम चेयरमैन के तौर पर खुद पद संभाल ली थी। इसके बाद समूह की प्रमुख कंपनियों के शेयरधारकों ने उन्हें कंपनी के चेयरमैन पद से हटाने का प्रस्ताव पारित किया था। टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी ने बयान जारी कर कहा- टाटा संस के शेयरहोल्डर्स ने ईजीएम में मिस्त्री को डायरेक्टर पद से हटाने के लिए बहुमत से प्रस्ताव पारित किया। टाटा संस में रतन टाटा के नेतृत्व वाले टाटा ट्रस्ट की दो तिहाई हिस्सेदारी है। मिस्त्री परिवार के पास इस 18.4 पर्सेंट शेयर हैं। बाकी हिस्सेदारी टाटा ग्रुप की कंपनियों की हैं। 6 फरवरी को ईजीएम पर रोक लगाने के लिए साइरस ने एनसीएलएटी का दरवाजा खटखटाया था। 2006 में निदेशक बने थे साइरस मिस्त्री साइरस के पिता पलोनजी शपूरजी मिस्त्री परिवार के पहले व्यक्ति थे जिन्हें टाटा होल्डिंग कंपनी के निदेशक मंडल में 1980 में बतौर निदेशक नियुक्त किया गया था। पलोनजी 2004 में निदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए। दो साल बाद उनके बेटे साइरस को टाटा संस के निदेशक मंडल में निदेशक बनाया गया। टाटा ने कराई थी मिस्त्री की नियुक्ति रतन टाटा ने ही मिस्त्री को निदेशक मंडल में नियुक्त करने का प्रस्ताव दिया था। इससे पहले 24 अक्टूबर 2016 को टाटा संस ने साइरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटा दिया। बाद में उन्हें टाटा मोटर्स व टीसीएस से हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। मिस्त्री ने छह कंपनियों के निदेशक मंडल से इस्तीफा दे दिया। टॉप 100 कंपनियों से टाटा हुई बाहर बोर्डरूम से ट्रिब्यूनल तक जा पहुंचे साइरस मिस्त्री और रतन टाटा विवाद के कारण टाटा ग्रुप 100 कंपनियों की सूची से बाहर हाे गया है। इस विवाद के कारण 100 अरब डॉलर वाले टाटा ग्रुप की रैंक 82वें स्थान से खिसककर 103 हो गई है। ब्रांड फाइनेंस ग्लोबल-500 2017 की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।

  • 3 वजहों से टाटा सन्स के चेयरमैन चुने गए चंद्रशेखरन, 6 साल में TCS की कमाई 3 गुना बढ़ाई, अब उनके सामने 7 चुनौतियां
    Last Updated: January 13 2017, 12:23 PM

    नई दिल्ली. नटराजन चंद्रशेखरन (54) टाटा सन्स के तीसरे ऐसे चेयरमैन बनने वाले हैं जो टाटा परिवार से ताल्लुक नहीं रखते। 149 साल पुराने देश के इस सबसे प्रेस्टिजियस ग्रुप में उनकी एंट्री 1987 में हुई। चंद्रशेखरन के सामने चैलेंज है टाटा ग्रुप के कारोबार और गुडविल को संभालना जो फिलहाल कानूनी मुकदमों में उलझा है। उनसे पहले रतन टाटा ने 21 साल में ग्रुप का कारोबार 57 गुना बढ़ाया था। मिस्त्री चार साल में यह कारोबार दोगुना ही कर पाए। वहीं, चंद्रशेखर का रिकॉर्ड टीसीएस में अच्छा रहा है। उन्होंने छह साल में कंपनी की कमाई तीन गुना बढ़ाई है। नए चेयरमैन के सामने क्या होंगी चुनौतियां, पढ़ें कॉरपोरेट हिस्टोरियन और कॉलमिस्ट प्रकाश बियाणी का एनालिसिस... क्यों चुने गए चंद्रशेखरन? 1. देश के सबसे कामयाब ऑपरेटिंग सीईओ। वे सबसे रतन टाटा के सबसे भरोसेमंद लोगों में माने जाते हैं। 2. टाटा ग्रुप को अच्छी तरह समझते हैं। 30 साल से ग्रुप से जुड़े हैं। करियर की शुरुआत भी टाटा ग्रुप से बतौर सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर की थी। मैराथन रनर चंद्रशेखरन खुद कह चुके हैं कि वे लंबी रेस में दौड़ने जैसी सोचते हैं। 3. टाटा सन्स को उम्मीद है कि चंद्रशेखरन आईटी बैकग्राउंड होने के कारण टाटा ग्रुप का डिजिटल मेकओवर कर सकते हैं। उन्होंने 2009 में टीसीएस की कमान संभाली थी। हर साल कंपनी की कमाई बढ़ाई। ये 7 चुनौतियां 1. टाटा ग्रुप के लिए सोने की खदान TCS को टॉप पर बनाए रखना - जेआरडी टाटा और एफसी कोहली ने 1968 में TCS की नींव रखी थी। लेकिन कंपनी ने सबसे देरी से अगस्त 2004 में शेयर बाजार में एंट्री ली। तब TCS के चेयरमैन रामादुराई थे। - 5 साल बाद रतन टाटा के सामने चुनौती थी कि रामादुराई का उत्तराधिकारी किसे बनाया जाए। तब रतन टाटा ने चंद्रशेखरन पर भरोसा जताया। - 2009 में चंद्रशेखरन के TCS चीफ बनने के बाद से देश की यह सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा सन्स के लिए सोने की खदान बनी हुई है। - शेयर बाजार से इस कंपनी ने अथाह पैसा खींचा। आज यह प्राइवेट सेक्टर में देश की सबसे बड़ी इम्प्लॉयर है। कंपनी में 353,000 कंसल्टेंट्स हैं। - टाटा ग्रुप की टॉप-10 कंपनियों की टोटल मार्केट कैप अगर 7.53 लाख करोड़ है, तो इसमें अकेली TCS की वर्थ 4.60 लाख करोड़ है। - 2010 में टीसीएस की कमाई 30 हजार करोड़ रुपए थी। चंद्रशेखरन ने इसे 2016 तक तीन गुना बढ़ाकर 1.09 लाख करोड़ रुपए पर पहुंचा दिया। 2. TCS ही सब कुछ नहीं - रतन टाटा को लगता था कि साइरस मिस्त्री का पूरा फोकस टाटा कंसल्टेंसी सर्विस यानी टीसीएस पर है। जबकि ये कंपनी पहले ही प्रॉफिट में है और सबसे ज्यादा मजबूत है। लेकिन साइरस उन कंपनियां के लिए ज्यादा कुछ नहीं कर रहे थे जो दिक्कतों का सामना कर रही हैं। - चंद्रशेखरन को ध्यान रखना होगा कि वे मिस्त्री जैसी गलती ना करें या वैसा परसेप्शन ना बनने दें। - टाटा ग्रुप की टॉप-10 कंपनियों के मार्केट कैप से TCS को हटा दें तो बाकी कंपनियों का मार्केट कैप भी सिर्फ 3 लाख करोड़ है। - टाटा ग्रुप के ऑटोमोबाइल से लेकर रिटेल तक और पावर प्लान्ट से सॉफ्टवेयर तक, करीब 100 बिजनेस हैं। इनमें से कई कंपनियां मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। - फाइनेंशियल ईयर 2016-17 में ग्रुप की 27 लिस्टेड कंपनियों में से 9 कंपनियां नुकसान में चल रही हैं। 2014-15 में टाटा ग्रुप का टर्नओवर 108 अरब डॉलर था, जो 2015-16 में घटकर 103 अरब डॉलर रह गया। 3. कैसे बनाएंगे अपनी जिम्मेदारी, टाटा सन्स और रतन टाटा के बीच बैलेंस? - साइरस मिस्त्री का टाटा एंड सन्स के साथ एक्सपीरियंस बुरा रहा। चंद्रशेखरन को भी बहुत ज्यादा आजादी नहीं मिलेगी। इन्हें टाटा सन्स और रतन टाटा, दोनों की बात सुननी होगी। - टाटा की 15 से 20% फ्लैगशिप कंपनियां ही मुनाफा कमा रही हैं। चंद्रशेखरन का अब तक फोकस टीसीएस पर था। अब फाेकस डाइवर्ट होगा। कई कंपनियों में पहले से चेयरमैन हैं। इस वजह से चंद्रशेखरन को तुरंत काम की आजादी नहीं मिलेगी। 4. टाटा ग्रुप की खासियत बनाए रखने की चुनौती - मिस्त्री-टाटा विवाद से जिस ब्रांड लॉयल्टी के सामने खतरा पैदा हुआ है, उसे दोबारा कायम करना चंद्रशेखरन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। - टाटा ग्रुप दुनिया में दो चीजों के लिए जाना चाहता है। इथिकल-मॉरल बिजनेस और सीएसआर। टाटा जो कमाते हैं, उसका बड़ा हिस्सा ट्रस्टों के जरिए सोसाइटी को लौटा देते हैं। - टाटा समूह ने कभी उस कारोबार में एंट्री नही ली जो सोसाइटी में कॉन्ट्रोवर्शियल है, जैसे लिकर या टोबैको बिजनेस। - जमशेदजी टाटा से लेकर रतन टाटा तक टाटा समूह की जिसने भी लीडरशिप संभाली, उन्होंने ग्रुप की इमेज को सबसे ऊपर रखकर टाटा समूह को लोकल से ग्लोबल बनाया। 5. कानूनी मुकदमों से निपटना होगा - इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स टाटा ग्रुप से नाराज हैं। चेयरमैन की पोस्ट से बर्खास्त किए जाने से नाराज साइरस मिस्त्री ने भी कई केस ग्रुप पर लगा रखे हैं। - इससे पहले, इंटरनेशनल कोर्ट खासकर यूएस में टाटा समूह की खूब फजीहत हो चुकी है। इनमें सबसे ज्यादा काबिल-ए-गौर है यूएस ग्रैंड ज्यूरी की तरफ से समूह की सबसे कमाऊ कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस और टाटा अमेरिका इंटरनेशनल कॉरपोरेशन पर लगा फाइन। - दोनों कंपनियों पर ज्यूरी ने एक ट्रेड सीक्रेट मुकदमे के तहत 94 करोड़ डॉलर (करीब 6000 करोड़ रुपए) का फाइन लगाया था। - टाटा ग्रुप जापान की डोकोमो से भी टेलिकॉम ज्वाइंटर वेंचर के बंटवारे को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। डोकोमो टाटा टेलि सर्विसेस से अलग हो चुकी है। - डोकोमो ने टाटा से 1.2 बिलियन डॉलर का हर्जाना मांगा। ऐसा नहीं होने पर टाटा की ब्रिटिश प्रॉपर्टीज पर मालिकाना हक दिए जाने की मांग की। 6. कोरस और जगुआर का क्या करेंगे? - कोरस और जगुआर घाटे का सौदा साबित हुईं। ये दोनों रतन टाटा की प्रेस्टिजियस डील थीं। मिस्त्री इन्हीं के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे। - चंद्रशेखर सामने यह भी चुनौती होगी कि रतन टाटा के इन दो प्रोजेक्ट के चलते हुए घाटे का असर टाटा ग्रुप पर अब आगे नहीं हो। 7. शेयर होल्डर्स में भरोसा कायम करना हाेगा - चंद्रशेखरन को टाटा ग्रुप की कंपनियों को इन्वेस्टर्स की डार्लिंग कंपनी बनाना होगा। इन्वेस्टर सालाना उतना डिविडेंड तो चाहता ही है, जितना बैंक में पैसे रखने से मिलता है। अगर एप्रिसिएशन मिले, तो वो खुश हो जाता है। - टाटा मोटर्स के शेयरहोल्डर्स ने अगस्त 2016 में शिकायत की थी कि उन्हें एक शेयर का सिर्फ 20 पैसा डिविडेंड दिया गया। - तब मिस्त्री ने इस कदम को सही ठहराया था। उन्होंने कहा था कि अाप सभी से जुटाई पूंजी नए प्रोडक्ट्स में लगा रहे हैं। इस लंबे सफर में कमजोर दिल वालों को जगह नहीं है। - इसके बाद बीते अक्टूबर में मिस्त्री को हटाया गया और रतन टाटा इंटरिम चेयरमैन बनाए गए। - चंद्रशेखरन के सामने अब शेयर होल्डर्स को यह मैसेज देने की चुनौती होगी कि टाटा ग्रुप में अब सब कुछ ठीक है और वह दिल खोलकर डिविडेंड दे सकता है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें : टाटा परिवार से ही चुने जाते रहे हैं चेयरमैन... यह भी पढ़ें <a href='http://money.bhaskar.com/news/MON-INDU-COMP-n-chnadrasekharan-becomes-tata-sons-new-chairman-business-news-hindi-5503711-NOR.html?ref=ht'>एन. चंद्रशेखरन चुने गए टाटा सन्स के नए चेयरमैन, 21 फरवरी को संभालेंगे कमान</a>

  • मिस्त्री पर संवेदनशील सूचनाएं सार्वजनिक करने के आरोप, टाटा संस ने भेजा नोटिस
    Last Updated: December 28 2016, 05:57 AM

    नई दिल्ली। टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस ने पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री को लीगल नोटिस भेजा है। इसमें मिस्त्री पर कंपनी की संवेदनशील और गोपनीय जानकारियां सार्वजनिक करने के आरोप लगाए गए हैं। ये जानकारियां बोर्ड मीटिंग और फाइनेंशियल डाटा से संबंधित हैं। मंगलवार को टाटा संस की तरफ से लॉ फर्म शार्दुल अमरचंद मंगलदास ने नोटिस भेजा है। कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में मिस्त्री ने अपनी याचिका के साथ सुबूत के तौर पर दर्जनों कागजात लगाए हैं। टाटा संस के मुताबिक, ऐसा करके मिस्त्री अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे। उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों का उल्लंघन किया है। बिना जरूरत के उन्होंने अपनी याचिका में गोपनीय फाइनेंशियल डाटा और बिजनेस स्ट्रैटजी की प्रतियां लगा दीं। आपने टाटा संस को नुकसान पहुंचाने के लिए ऐसा किया।

  • साइरस मिस्त्री को हटाने का फैसला सही : भरत वाखलु
    Last Updated: December 26 2016, 04:55 AM

    जमशेदपुर. टाटा समूह की विभिन्न कंपनियों में शीर्ष पदों पर रहे भरत वाखलु ने कहा कि साइरस मिस्त्री को हटाने का फैसला सही है। अपनी मैनेजमेंट बुक-नेविगेटिंग द मेज के लांचिंग समारोह को लेकर जमशेदपुर आए लेखक और मैनेजमेंट गुरु वाखलु ने रविवार को पत्रकारों को बताया कि टाटा स्टील समेत टाटा संस में 30 साल काम किया। भले ही 2014 में टाटा संस के रेजिडेंट डायरेक्टर (नई दिल्ली) का पद छोड़ दिया, लेकिन आज भी टाटा का ब्रांड एम्बेसडर हूं। जमशेदपुर में 18 साल रहा। टाटा का जो वैल्यू सिस्टम है, उसका लोहा अमेरिकी कंपनियां भी मानती है।एक अमेरिकी एयर क्रॉफ्ट कंपनी के भारत में एमडी रहा। लेकिन टाटा जैसा वैल्यू सिस्टम कही नहीं मिला। पेशेवर प्रतिस्पर्धी बने भरत ने बताया कि 2016 में उन्होंने वाखलु एडवाइजरी नाम से एक कन्सल्टेंसी फॉर्म खोला है, जिसका काम वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ ही कारपोरेट वर्ल्ड को एथिकल और इको फ्रेंडली बनाना है। भारत जैसे देश में कन्सल्टेंसी की भूमिका अहम है। हमारा जोर कारपोरेट वर्ल्ड में ऐसा वर्क कल्चर बनाना है, जहां कार्य सन्तुष्ट (वर्क सैटिस्फेक्शन) सर्वोपरि हो। बकौल वाखलु, आज के भ्रष्ट माहौल में कारपोरेट के साथ ही समाज को वैल्यू बेस्ड बनाना जरूरी हो गया है। मैं फाउंडेशन ऑफ रीस्टोरेशन ऑफ नेचुरल वैल्यूज का जेनरल सेक्रेटरी भी हूं। इसके प्रेसीडेंट मेट्रो मैन डॉ.ई श्रीधरन है। यह संस्था मूल्य आधारित शिक्षा और चुनावी सुधार पर काम कर रही है। कट्टरता प्रमुख समस्या कश्मीर को नजदीक से देखने वाले वाखलु ने कहा कि कश्मीर कभी भी राजनीतिक समस्या नहीं रहा। दिल्ली में बैठे लोगों को कश्मीर को देखने का नजरिया बदलना होगा। वाखलु 18 साल रहे हैं जमशेदपुर में कश्मीर के रहने वाले भरत वाखलु टाटा स्टील जमशेदपुर में 18 साल रहे। 2003 में टाटा समूह ने उन्हें अमेरिका में टाटा इंक के प्रेसीडेंट की जिम्मेवारी सौंपी। 2008 में वे टाटा संस के रेजिडेंट डायरेक्टर बनाए गये। 2014 में उन्होंने टाटा संस को छोड़ दिया।

  • साइरस मिस्त्री को हटाने टाटा की ईजीएम इसी हफ्ते, शेयर होल्डर्स करेंगे वोटिंग
    Last Updated: December 19 2016, 07:42 AM

    मुंबई. रतन टाटा बनाम साइरस मिस्त्री की लड़ाई में यह हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। टाटा समूह की चार लिस्टेड कंपनियों की ईजीएम इस हफ्ते होनी है। इनमें मिस्त्री को डायरेक्टर पद से हटाने के लिए शेयरधारक वोटिंग करेंगे। सबसे प्रमुख कंपनी है टाटा मोटर्स। ग्रुप के रेवेन्यू में टीसीएस के बाद सबसे ज्यादा योगदान इसी का है। अन्य कंपनियां हैं टाटा स्टील, इंडियन होटल्स और टाटा केमिकल्स। ईजीएम 20 से 23 दिसंबर के दरम्यान होगी। - ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज के चेयरमैन नुस्ली वाडिया टाटा स्टील, टाटा मोटर्स और टाटा केमिकल्स के स्वतंत्र निदेशक हैं। शेयरधारकों को उन्हें हटाने के प्रस्ताव पर भी वोटिंग करनी है। - अभी तक टाटा इंडस्ट्रीज, टीसीएस और टाटा टेलीसर्विसेज के शेयरहोल्डर मिस्त्री को डायरेक्टर पद से हटा चुके हैं। - इंडियन होटल्स : ईजीएम 20 दिसंबर को होगी। इसमें टाटा संस की 28.01% होल्डिंग है। लेकिन प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप की कुल होल्डिंग 38.65% है। - टाटा के पक्ष में टीसीएस की ईजीएम में अनुपस्थित रहने वाले एलआईसी की इस कंपनी में 8.76% हिस्सेदारी है। मिस्त्री के पास 1,28,625 शेयर हैं। टाटा स्टील : ईजीएम 21 दिसंबर को होगी। इसमें टाटा संस की 29.75% और एलआईसी की 13.62% होल्डिंग है। प्रमोटर-प्रमोटर ग्रुप की कुल हिस्सेदारी 31.35% है। टाटा मोटर्स : ईजीएम 22 दिसंबर को। टाटा संस की 26.51%, प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप की 33.00% और एलआईसी की 5.11% होल्डिंग है। मिस्त्री के पास कंपनी के 14,500 शेयर हैं। टाटा केमिकल्स : ईजीएम 23 दिसंबर को होनी है। टाटा संस की होल्डिंग 19.35% लेकिन प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप की 30.80% है। एलआईसी के पास भी कंपनी के 3.33% शेयर हैं। मिस्त्री के पास 16,000 शेयर हैं। टाटा पावर : ईजीएम 26 दिसंबर को होगी। इसमें टाटा संस की 31.05% और प्रमोटर-प्रमोटर ग्रुप की होल्डिंग 33.02% है। एलआईसी के पास 13.12% शेयर हैं। मिस्त्री के पास भी 72,960 शेयर हैं। नुस्ली वाडिया पर प्रॉक्सी फर्म ने बदला रुख - प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर एडवाइजरी सर्विसेज ने अपना रुख बदलते हुए नुस्ली वाडिया को टाटा मोटर्स और टाटा स्टील के डायरेक्टर पद से हटाने के प्रस्ताव का समर्थन किया है। - फर्म ने इसे टाटा समूह के हित में बताया है। पहले इसने शेयरधारकों को मिस्त्री के खिलाफ वोटिंग की सलाह दी थी, पर वाडिया का समर्थन किया था, लेकिन टाटा के खिलाफ वाडिया ने 3,000 करोड़ रु. का मानहानि मुकदमा किया तो फर्म उनके भी खिलाफ हो गई है।

  • MP के पूर्व CM ने किया अगस्ता घोटाले में फंसे सिंह का सपोर्ट, कहा- ईमानदार और तेज
    Last Updated: December 13 2016, 12:47 PM

    भोपाल। विजय सिंह के सपोर्ट में आए मप्र के पूर्व सीएम बाबूलाल गौर ने साइरस मिस्त्री के उन आरोपों को निराधार बताया है, जिसमें उन्होंने अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर घोटाले में सिंह की अहम भूमिका होने की बात कही थी। गौर ने एक मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि, सिंह एक साफ-सुधरी छवि के व्यक्ति हैं। मैं उन्हें सन 1979 से जानता हूं, जब वे भोपाल के कलेक्टर हुआ करते थे। जानें और क्या बोले गौर... दी अपनी व्यक्तिगत राय गौर ने आगे कहा कि मेरे कार्यकाल के दौरान सिंह नगरीय प्रशासन विभाग में चीफ सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत थे। गौर ने यह भी कहा कि मुझे अगस्ता घोटाले में सिंह की भूमिका के बारे में कोई जानकारी नहीं है, हालांकि मैं उनको जितना जानता हूं वे बहुत ही ईमानदार और तेज ऑफिसर थे। वे अक्टूबर 2004 में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव बने तथा जनवरी 2006 तक इस पद पर बने रहे। इसके बाद वे भारत सरकार के आयुष विभाग के सचिव पद पर रहे और बाद में सड़क परिवहन व महामार्ग विभाग में सचिव रहे। इसके बाद अगस्त 2007 में वे रक्षा सचिव नियुक्त किए गए। जबकि, अगस्ता घोटाला रक्षा मंत्रालय में उनके कार्यकाल के पहले ही हो चुका था। विजय सिंह उस वक्त चर्चा में आए थे, जब सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सीएम का पद संभालते ही उन्हें पद से हटा दिया था। उन्होने अप्रैल 2013 तक संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य के रूप में अपनी भूमिका निभाई। केन्द्र में उन्होंने सांस्कृतिक विभाग में निदेशक, स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त निदेशक व वित्तीय सलाहकार, रसायन व खाद मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव तथा वित्तीय सलाहकार तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव आदि पद संभाले हैं। यह है आरोप गौरतलब है कि टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री ने आरोप लगाया था कि टाटा कंपनी के डायरेक्टर विजय सिंह ने 3,600 करोड़ रुपए के अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर घोटाले में अहम भूमिका निभाई। मिस्त्री ने एक बयान में कहा कि साल 2010 में विजय सिंह रक्षा सचिव थे। अगस्ता वेस्टलैंड को कॉन्ट्रेक्ट दिलाने में उनकी अहम भूमिका रही। घूसखोरी के आरोप सामने आने के बाद सरकार ने 1 जनवरी 2014 को करार रद्द कर दिया था। मिस्त्री का आरोप मिस्त्री ने आरोप लगाया कि उन्हें हटाने के मामले में खुद को बचाने के लिए भी विजय सिंह झूठी कहानियां गढ़ रहे हैं। टाटा संस की जिस बोर्ड मीटिंग में मिस्त्री को हटाया गया था, विजय सिंह ने उसकी अध्यक्षता की थी। सिंह ने टाटा ट्रस्ट पर मिस्त्री के आरोपों की भी हंसी उड़ाई थी। मिस्त्री ने कहा, विजय सिंह के बयानों की असलियत जानने के लिए उनका ट्रैक रिकॉर्ड देखना जरूरी है।

  • टाटा इंस्टीट्यूशन एक शख्स का नहीं, पूरे भारत का: मिस्त्री, रतन टाटा से संबंधों पर बोले- मैं उनके लिए लिफ्ट के पास खड़ा रहता था
    Last Updated: December 11 2016, 10:50 AM

    मुंबई. टाटा सन्स के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री का कहना है कि टाटा इंस्टीट्यूशन किसी एक शख्स का नहीं, बल्कि पूरे भारत का है। इसकी 66% ओनरशिप चेरिटेबल ट्रस्ट के पास है, फैमिली चेरिटेबल ट्रस्ट के पास नहीं। साइरस ने शनिवार को चुनिंदा पत्रकारों के साथ कई मुद्दों पर बातचीत की। रतन टाटा से संबंधों पर उन्होंने कहा, संबंध हमेशा सम्मानजनक रहा, कम से कम 24 अक्टूबर तक, जब वे (टाटा) ऑफिस आते थे, तो मैं लिफ्ट के पास खड़ा रहता था। और जब वे जाते थे तो उन्हें नीचे तक छोड़ने जाता था। साइरस मिस्त्री ने दिए इन सवालों के जवाब... सवालः टाटा से विवाद की शुरुआत कैसे हुई? - मैं जब चेयरमैन बना, तो सिर्फ चेयरमैन ही नहीं बदला, बल्कि टाटा ग्रुप की एक पूरी पीढ़ी बदल गई। - चेयरमैन बनने के प्रस्ताव पर मैंने फैमिली से पूछा। परिवार ने कहा, टाटा ग्रुप के इस मुश्किल वक्त में मुझे सेवाएं देनी चाहिए।; लेकिन पहली समस्या गवर्नेंस को लेकर थी। - मैंने बोर्ड के सामने यह बात रखी कि टाटा सन्स के बोर्ड का रोल क्या है और ऑपरेटिंग कंपनी के बोर्ड का रोल क्या है? और मेरा रोल क्या है? यह गवर्नेंस की बात थी, क्योंकि दो पावर सेंटर हो रहे थे। सवालः 24 अक्टूबर की मीटिंग से पांच मिनट पहले क्या हुआ था? - इस मीटिंग से पांच मिनट पहले रतन टाटा और नितिन नोहरिया मेरे रूम में आए। नोहरिया ने कहा, आपका और टाटा का नहीं जम रहा है। या तो मैं चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दूं या फिर मुझे हटा दिया जाएगा।; - चूंकि मैंने चार साल के कार्यकाल में कुछ भी गलत नहीं किया था, इसलिए हिम्मत कर दो टूक कहा, आपको जो करना है करें, मैं इस्तीफा नहीं दूंगा। सवालः आप पर इम्प्लॉइज के साथ मेलजोल में टाटा कल्चर नहीं अपनाने का आरोप है? - आप रतन टाटा से पूछें कि 10 साल में वे कितने प्लांट में गए थे। मैं उनसे ज्यादा बार ग्रुप के अलग-अलग प्लांट में कर्मचारियों के पास गया हूं। - उन्हें पुणे का टाटा मोटर्स का प्लांट पसंद है यह सभी जानते हैं। - वे कितनी बार जमशेदपुर, कलिंगनगर, मुंद्रा, चेन्नई गए? कनाडा में शून्य से 30 डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान में कर्मचारी काम कर रहे हैं। क्या वे कभी वहां गए हैं। - मैं ब्रिटेन गया हूं। वे वहां के एक भी स्टील प्लांट में नहीं गए हैं। सवालः आने वाली एजीएम को लेकर काफी लेटरबाजी हुई है। क्या कहना है? - यदि कंपनी के लिए कोई गलत निर्णय हो रहा है, तो मैं निश्चित ही आवाज उठाऊंगा। लेकिन यदि उनका निर्णय होगा और वह सही होगा तो मुझे खुशी ही होगी। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में फंडिंग को लेकर आपके बीच मतभेद थे? - टाटा समूह में चुनावी फंडिंग के लिए एक ट्रस्ट बना हुआ है। किसको, कितना और कैसे फंड देना है उस पर मेरा या ट्रस्टी, किसी का भी कंट्रोल नहीं है। फार्मूले के हिसाब से ही फंड दिया जाता है।

  • एसयूवी के शौकीन हैं साइरस मिस्त्री, जानिए कहां गुजारते हैं सबसे ज्यादा वक्त
    Last Updated: October 30 2016, 03:34 AM

    नई दिल्ली. टाटा ग्रुप में चेयरमैन की पोस्ट से हटाए गए साइरस मिस्त्री को काफी फूडी माना जाता है। उन्हें घूमना भी पसंद है और यूरोप पसंदीदा है। बता दें कि पुणे के अलावा मुंबई और लंदन में भी साइरस का घर है। उन्हें साल 2011 में टाटा ग्रुप का चेयरमैन चुना गया था। उन्हें पहले डिप्टी चेयरमैन बनाया गया था। बता दें कि लाल रंग की जगुआर साइरस की फेवरेट एसयूवी है। जानिए कैसी है मिस्त्री की पर्सनल लाइफ... - 4 जुलाई 1968 को जन्में साइरस मिस्त्री टाटा ग्रुप की बागडोर संभालने वाले छठे चेयरमैन बने थे। - उनकी स्कूली शिक्षा मुंबई के कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल से हुई। उन्होंने लंदन के इंपीरियल काॅलेज से सिविल इंजीनियरिंग में ग्रैजुएशन और लंदन बिजनेस स्कूल से मैनेजमेंट में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री हासिल की। ऐसी है फैमिली लाइफ - 48 साल के साइरस कंस्ट्रक्शन बिजनेस के दिग्गज पालोनजी मिस्त्री के छोटे बेटे हैं। जिनका परिवार टाटा ग्रुप की सर्वाधिक 18.8 परसेंट हिस्सेदारी रखने वाला परिवार है। - उनका परिवार आयरलैंड के सबसे अमीर भारतीय परिवारों में से एक है। उन्होंने वकील इकबाल छागला की बेटी और मशहूर एमसी छागला की पोती रोहिका छागला से शादी की है। - पूरी जिंदगी शादी न करने वाले टाटा से ठीक उलट मिस्त्री एक फैमिली पर्सन हैं और अपनी वाइफ रोहिका और दो बच्चों के साथ काफी वक्त गुजारते हैं। ये हैं साइरस के शौक - वे फूडी हैं और टाइम मिलते ही यूरोप में छुट्टियां बिताने निकल जाते हैं। मिस्त्री को अक्सर गोल्फ कोर्स में गोल्फ खेलते देखा जा सकता है। - इतना ही नहीं, उन्हें घुड़सवारी बेहद पसंद है, इसलिए वह अक्सर पुणे में मौजूद अपने मंजरी स्टड फार्म में देखे जाते हैं। - उनके परिवार वालों का कहना है कि वे यूरोप में हॉलिडे पर जाना और दुनियाभर की अलग-अलग डिशेश को टेस्ट करना पसंद है। - वे एसयूवी चलाने के बहुत शौकीन हैं। लाल रंग की 1971 जगुआर ई टाइप कार से चलते हैं। ये हैं साइरस के बारे में खास बातें - वे खुले कॉलर की शर्ट में आना पसंद करते हैं। - वे बहुत जरूरी होने पर ही बड़ी मुश्किल से ही किसी पब्लिक प्रोग्राम में बोलते हैं। - आंकड़ों के खिलाड़ी मिस्त्री कारोबार को बहुत ही संजीदगी से लेते हैं और चुनौतियां स्वीकार करने के लिए हरदम तैयार रहते हैं।  - उनके दोस्तों का कहना है कि वे ऐेसे सुशील व्यक्ति हैं जो अपने मातहतों को भी चर्चा में आने का मौका देते हैं। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, शापूरजी पलोनजी ग्रुप को दी नई ऊंचाइयां...

  • DB Interview: टाटा संस के पूर्व डायरेक्टर ने कहा - चेयरमैन कोई भी हो कल्चर टाटा का ही रहेगा
    Last Updated: October 29 2016, 04:12 AM

    जमशेदपुर. टाटा संस के पूर्व डायरेक्टर और रतन टाटा के करीबी डॉ. जेजे ईरानी ने मौजूदा बदलाव और भविष्य में चेयरमैन के सिलेक्शन को लेकर कहा - चेयरमैन कोई भी हो कल्चर टाटा का ही रहेगा। सिद्धांत और प्रोग्राम टाटा का है। अभी टाटा स्टील के एमडी नरेंद्रन हैं, पहले ईरानी थे। कोई फर्क नहीं पड़ता। टाटा परिवार ने काम करने की जो कल्चर डेवलप की है, उसी के मुताबिक सबको आगे बढ़ना होगा। एक आदमी पर सब कुछ डिपेंड नहीं है। फैसले में 5 लाख लोगों की भागीदारी... - बता दें कि टाटा समूह में पांच लाख लोग हैं। किसी भी फैसले में सबकी भागीदारी होती है। साइरस मिस्त्री को जैसे ही चेयरमैन पोस्ट से हटाया गया, डॉ. ईरानी मुंबई पहुंचे। - वहां इंटरिम चेयरमैन रतन टाटा से मुलाकात की। भास्कर से खास मुलाकात में उन्होंने कहा, टाटा परिवार की सोच सबके जीवन स्तर को ऊपर उठाने और बेहतर बनाने की रही है। - टाटा समूह के फाउंडर जमशेदजी टाटा ने लेटर में लिखा था कि कर्मचारी के लिए फैसिलिटी होनी चाहिए, कंपनी होने का फायदा मिलना चाहिए। ऐसी होती है कंपनी की जिंदगी - डा. ईरानी ने कहा कि किसी कंपनी की जिंदगी भी आदमी की तरह होती है। आदमी की तरह कंपनी का जन्म होता है, फिर वह बूढ़ी होती है और मर जाती है। - 20 साल पहले टायो रोल्स फायदा देने वाली कंपनी थी। लगातार कई साल तक नुकसान होता रहा। शायद इसीलिए उसे बंद करने का फैसला हुआ। इन सवालों पर बोलेन ईरानी... #1. स्टील में चीन से मिल रही चुनौती पर - टाटा स्टील में उत्पादन बढ़ा है। इस्पात बनाने में चीन सरकार बहुत मदद करती है। वहां प्रोडक्शन लागत कम पड़ती है। कायदे से देखे तो चीन का स्टील कारोबार अनफेयर प्रेक्टिस है। - फिर, चीन की चुनौती सिर्फ भारत नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए है। मोदी सरकार ने ड्यूटी बढ़ाई है। इससे हिंदुस्तान की सभी स्टील कंपनियों को राहत मिली है। - टाटा स्टील के मैनेजमेंट को यही कहूंगा कि प्रोडक्शन लागत कम करें। #2. टाटा मोटर्स के फ्यूचर पर - ईरानी ने कहा टाटा मोटर्स को हिलाना किसी के लिए आसान नहीं होगा। जगुआर और लैंडरोवर भी टाटा मोटर्स का हिस्सा है। - एक जमाने में सरकार ने किसी और कंपनी को अनुमति नहीं थी। यही वजह है कि टाटा मोटर्स और लीलैंड ही भारी वाहन बनाते थे। - अब सबके लिए मौका है। फिर भी हैवी व्हीकल इंडस्ट्री में टाटा मोटर्स आगे बढ़ता रहेगा। विदेशों में भी प्रोडक्शन बढ़ेगा। #3. जीएसटी पर - ईरानी ने कहा मोदी सरकार ने जीएसटी कानून बनाया है। इससे देश और तेजी से आगे बढ़ेगा। इस बात की निराशा जरूर है कि अभी तक यह कानून लागू नहीं हो सका है। - जितनी जल्दी लागू होगा, उतना अच्छा रहेगा। इससे उद्योगों को लाभ होगा और उपभोक्ताओं को भी। कौन हैं डॉ. ईरानी - डॉ. ईरानी टाटा संस के डायरेक्टर रह चुके हैं। वे रतन टाटा के बेहद करीबी माने जाते हैं। 1992 में टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक बने। - 1998 से 2001 तक टाटा संस के डायरेक्टर रहे। वे उस दौर में टाटा स्टील के एमडी बने थे जब मुक्त अर्थव्यवस्था की शुरूआत हुई थी। - टाटा स्टील को नई दिशा दी। कंपनी का प्रोडक्शन बढ़ाया। उनसे पहले रूसी मोदी टाटा स्टील के एमडी सह चेयरमैन थे। - रुसी मोदी से विवाद हुआ था तो वे रतन टाटा के साथ थे। टाटा समूह में उनकी खास हैसियत है। भारत सरकार से उन्हें पद्म भूषण सम्मान भी मिला।

  • एक हैं क्विक, दूसरे हैं Cool, ऐसी है सायरस और टाटा की लीडरशिप स्टाइल
    Last Updated: October 28 2016, 18:10 PM

    सेल्फ हेल्प डेस्क। हाल ही में सायरस मिस्त्री को टाटा एंड संस के चेयरमैन पद से हटाया गया है। समूह की बागडोर एक बार फिर से रतन टाटा ने संभाल ली है। केवल 44 साल की उम्र में टाटा की चेयरमैनशिप संभालने वाले सायरस मिस्त्री की अपनी क्वालिटीज है तो रतन टाटा की अपनी। इन दोनों की लीडरशिप क्वालिटीज में क्या बेसिक अंतर हैं, इसको जानने के लिए dainikbhaskar.com ने IIM-Indore के डायरेक्टर ऋषिकेश टी कृष्णन और इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (IMS) के डायरेक्टर पीएन मिश्रा से बात की। आगे की स्लाइड्स में इन दोनों एक्सपर्ट्स के हवाले से जानते हैं सायरस मिस्त्री और रतन टाटा की लीडरशिप क्वालिटी की 4-4 बाते&

  • सायरस के सपोर्ट में सुप्रिया सुले, बोली- मिस्त्री को हटाना सैद्धांतिक रुप से गलत
    Last Updated: October 28 2016, 12:14 PM

    मुंबई. टाटा संस के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री को पद हटाने का निर्णय सैंद्धातिक रुप से गलत है। यह कहना है एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले का। सुले ने खुलकर मिस्त्री का समर्थन करने से राजनीतिक और उद्योग जगत में चर्चा जोरों पर हैं। और क्या कहा सुप्रिया सुले ने..... टाटा समूह की कंपनियां सार्वजनिक रुप से सुचीबद्ध हैं। यहां पर हर फैसला पारदर्शी होता है, लेकिन मिस्त्री को पद से हटाना गलत था। -बोर्ड ने जो कदम उठाया है वह अधिकार उसके पास है लेकिन जिस तरीके से काम किया गया उस पर मुझे आपत्ति है। -जिस प्रकार यह सारी हलचलें हुई है इससे कंपनी की इमेज पर काफी परिणाम हो सकता है। -बताया जाता है कि, मिस्त्री की पत्नी रोहिगा सुप्रिया सुले की नजदीकी सहेलियों में से एक हैं। -वहीं एक राजनीतिक व्यक्तित्व के तौर पर सुप्रिया द्वारा दिए गए इस बयान को लेकर राजनीतिक क्षेत्र में चर्चा हो रहा है।

  • मिस्त्री ने कहा- एक बार ठुकरा दिया था टाटा ग्रुप से मिला ऑफर, दूसरी बार रतन टाटा ने रिक्वेस्ट की तो चेयरमैन बना
    Last Updated: October 27 2016, 19:55 PM

    मुंबई. चेयरमैन पोस्ट से हटाए गए साइरस मिस्त्री ने टाटा संस बोर्ड को पांच पेज का लेटर लिखा है। इसमें रतन टाटा का नाम सिर्फ एक बार लिखा गया है। साइरस साफ लिखते हैं, 2011 में जब सर्च कमेटी टाटा ग्रुप के चेयरमैन की खोज कर रही थी तो मुझे रतन टाटा और लॉर्ड भट्टाचार्य ने अप्रोच किया था। लेकिन तब मैंने पोस्ट लेने से मना कर दिया था। इसके बाद भी सर्च कमेटी को कोई शख्स नहीं मिला। टाटा ने मुझसे ज्वाइन करने की रिक्वेस्ट की। इसके बाद मैंने अपनी फैमिली से बात की, ग्रुप के बारे में जानकारी जुटाई और ज्वाइन कर लिया। बोर्ड मीटिंग में जो हुआ, उसको लेकर शॉक्ड हूं... - साइरस ने अपने लेटर में लिखा कि 24 अक्टूबर को बोर्ड मीटिंग में जो हुआ, उसको लेकर मैं शॉक्ड हूं। मैं कहना चाहता हूं कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स अपने सम्मान को बचा नहीं पाए। - अपने बचाव में एक शब्द कहने का मौका न देते हुए चेयरमैन को हटा दिया जाना कॉर्पोरेट वर्ल्ड में अपने तरह का अलग किस्म का मामला है। इस तरह एक्शन लिए जाने से मैं दुखी हूं। इसी के चलते कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। इस कार्यवाही ने मेरी और टाटा ग्रुप की रेप्युटेशन खराब की है। - आज बाहर होने के बाद भी मैं टाटा ग्रुप और वहां काम कर रहे हजारों इम्प्लॉइज की काफी इज्जत करता हूं। मैं बोर्ड को ये लेटर इसलिए लिख रहा हूं कि ताकि कमियों की ओर ध्यान दिला सकूं। साथ ही मैं टाटा ग्रुप में चेयरमैन के रूप में अपनी जर्नी के बारे में भी बताना चाहता हूं। - 2011 में जब सर्च कमेटी चेयरमैन की खोज कर रही थी उसी दौरान मुझे रतन टाटा और लॉर्ड भट्टाचार्य ने अप्रोच किया। लेकिन मैंने तब पोस्ट लेने से मना कर दिया। इसकी वजह ये थी कि मैं खुद अपना बिजनेस सैटल कर रहा था। - चूंकि कमेटी को चेयरमैन के लिए कोई दूसरा शख्स नहीं मिल रहा था। लिहाजा रिक्वेस्ट कर मुझसे ही पोस्ट लेने को कहा गया। मैंने अपनी फैमिली से बात की, टाटा ग्रुप के इंटरेस्ट के बारे में जानकारी हासिल की और अपने पूर्व फैसले को छोड़ते हुए टाटा ग्रुप का चेयरमैन बनना तय किया। पहले ही कहा था- मुझे फ्री हैंड देना होगा - साइरस लिखते हैं, अप्वाइंटमेंट्स से पहले ही मैंने कह दिया था कि उन्हें मुझे फ्री हैंड देना होगा। - मुझसे पहले के चेयरमैन, पोस्ट छोड़ चुके थे। बताया गया कि जरूरत पड़ने पर सुझाव देने के लिए वे मौजूद रहेंगे। - मेरा अप्वाइंटमेंट होने के बाद टाटा ट्रस्ट, टाटा संस बोर्ड, चेयरमैन और ऑपरेटिंग कंपनीज से जुड़े नियमों में बदलाव हुए। - मैं इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हूं कि किसी बोर्ड मेंबर और ट्रस्टीज ने मेरी बताई समस्याओं से चिंता जताई। हालांकि इसके लिए मैं उन्हें दोषी नहीं मान रहा। एक नॉन-एग्जीक्यूटिव डाइरेक्टर होने के नाते मैं इश्यूज की ग्रेविटी का सही आकलन नहीं कर पाया। टाटा ग्रुप में मेरी एंट्री के वक्त जो बड़े चैलेंजेस थे, उनके बारे में जरूर बताऊंगा। - सभी का जानकारी के लिए बता दूं कि एक्वीजिशन स्ट्रैटजी में जीएलआर और टेटली को छोड़ दें तो बाकी में काफी कर्ज हो गया था। - आईएचसीएल की कई फॉरेन प्रॉपर्टीज और ओरिएंट होटल की कई होल्डिंग्स घाटे में बेची गई थीं। टाटा केमिकल के यूके-केन्या ऑपरेशंस को लेकर भी कड़े फैसले लेने की जरूरत है। टाटा के टेलिकॉम बिजनेस की हालत ठीक नहीं - मिस्त्री के मुताबिक, टाटा के टेलिकॉम बिजनेस की हालत लगातार खराब हो रही है। अगर हम इसे बेचते या बंद कर देते तो भी इसकी कॉस्ट 4-5 बिलियन आती। डोकोमो का पेआउट एक बिलियन डॉलर से ज्यादा है। - टाटा पावर ने कम कीमत वाले इंडोनेशियाई कोयले के लिए मूंदड़ा प्रोजेक्ट के लिए बोली लगाई। नियम चेंज होने के चलते 2013-14 में 1500 करोड़ का नुकसान हुआ। - टाटा मोटर्स के सामने भी काफी चुनौतियां हैं। एनपीए 40 हजार करोड़ तक बढ़ चुका है। नैनो कार के एक लाख रुपए में बनाए जाने की बात कही गई थी लेकिन इसकी लागत हमेशा एक लाख से ज्यादा रही। इसमें भी करीब 1 हजार करोड़ का घाटा हुआ। - 2011-15 के बीच आईएचसीएल, टाटा मोटर्स पीवी, टाटा स्टील यूरोप, टाटा पावर मूंदड़ा और टेलीसर्विसेज का कैपिटल (घाटे और इंटरेस्ट के बावजूद) 1 लाख 32 हजार करोड़ से 1 लाख 96 हजार तक बढ़ गया। - इन चुनौतियों के बाद भी मैंने कई कड़े फैसले लिए। मेरे टेन्योर में कैश फ्लो बढ़ा - मिस्त्री कहते हैं, तमाम बातों के बावजूद मेरे टेन्योर में ग्रुप का कैश फ्लो 31% सालाना की रेट से बढ़ा। - टाटा संस की नेटवर्थ करीब 26 हजार करोड़ से 42 हजार करोड़ बढ़ गई। इससे हमारी बैलेंस शीट्स मजबूत होने के साथ झटके सहन करने की ताकत भी बढ़ी। - मुझे यकीन नहीं होता कि मुझे नॉन-परफॉर्मर होने के चलते हटाया गया। अगर आपको पता हो कि नॉमिनेशन एंड रेम्युनरेशन कमेटी के विजय सिंह, फरीदा खंबाटा, रोनेन सेन, इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स (इनमें से दो ने मुझे हटाने के लिए वोट किया था) ने मेरे काम की तारीफ की थी। - मैंने इम्प्लॉइज के बीच हमेशा टाटा ग्रुप की वैल्यूज को बनाए रखा। लेकिन इन सबके बावजूद मुझे कमजोर चेयरमैन बनाने की कोशिश की गई। मैं सिर्फ दिखावे के लिए चेयरमैन था। - उम्मीद है कि मेरी बातों से आप सहमत होंगे। ग्रुप में मेरी ख्वाहिश एक इफेक्टिव फ्यूचर गवर्नेंस बनाने की थी। मैं मानता हूं कि मैंने ईमानदारी और ग्रुप के हितों के लिए काम किया।

  • मिस्त्री ने टाटा ग्रुप से कहा- इमोशन्स के चलते नैनो बंद नहीं हुई, मैं तो कागजी चेयरमैन था
    Last Updated: October 27 2016, 12:19 PM

    मुंबई. टाटा ग्रुप के चेयरमैन पोस्ट से हटाए जाने के बाद पहली बार <a href='http://www.bhaskar.com/news-campaign/cyrus-mistry'>साइरस मिस्त्री</a> ने टाटा बोर्ड को एक ईमेल किया है। इसमें उन्होंने रतन टाटा समेत बोर्ड पर कई आरोप लगाए हैं। मिस्त्री ने कहा है कि ग्रुप में उन्हें फ्री हैंड यानी काम की आजादी नहीं थी। मिस्त्री के मुताबिक, उन्हें सिर्फ कागजी या नाम का चेयरमैन बनाकर रखा गया था। मिस्त्री ने वॉर्निंग दी है कि उन्हें हटाए जाने की वजह से ग्रुप को 1.18 लाख करोड़ का घाटा हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि नैनो के 1000 करोड़ रुपए का घाटा उठाने के बावजूद इमोशनल कारणों के चलते उसका प्रोडक्शन बंद करने का फैसला नहीं किया जा सका। मिस्त्री ने ईमेल में क्या लिखा... - मिस्त्री ने मेल में साफ तौर पर लिखा है कि वो ग्रुप में थे जरूर, लेकिन डिसीजन मेकिंग में उनका रोल कम कर दिया गया था। उनके मुताबिक, उनका रोल कम करने के लिए ग्रुप में डिसीजन मेकिंग के लिए अल्टरनेटिव पावर सेंटर बनाए गए। - मिस्त्री के मुताबिक, दिसंबर 2012 में जब उन्हें चेयरमैन बनाया गया था, तो काम करने की पूरी आजादी देने का वादा किया गया था। लेकिन बाद में शर्तों को बदल दिया गया। टाटा फैमिली बोर्ड्स और टाटा सन्स के रूल्स में बदलाव किया गया। - मिस्त्री ने वॉर्निंग दी है कि पांच घाटे वाले बिजनेस चलाने की वजह से ग्रुप को 1.18 लाख करोड़ का घाटा हो सकता है। क्यों 1.18 लाख करोड़ के घाटे का दावा कर रहे हैं मिस्त्री - मिस्त्री ने लिखा - इंडियन होटल्स कंपनी, पैसेंजर व्हीकल्स और घाटे में चल रही स्टील की यूरोपियन यूनिट अब भी ग्रुप के लिए खास बनी हुई हैं। उन्होंने टेलिकॉम वेंचर्स और पावर प्लान्ट को भी इसी फेहरिस्त में रखा है। बता दें कि जिन बिजनेस को लेकर मिस्त्री सवाल उठा रहे हैं, वे सभी घाटे में हैं। - टाटा टेलिकॉम जापनी कंपनी डोकोमो के हटने के बाद घाटे से नहीं उबर सकी। यूरोपियन स्टील यूनिट पहले ही घाटे में थी और ब्रिटेन के यूरोपियन यूनियन से अलग होने के बाद इसका घाटा काफी ज्यादा बढ़ गया। डोकोमो ने तो टाटा टेलिकॉम से हर्जाना भी मांगा है। नैनो के बारे में क्या बोले मिस्त्री - मिस्त्री ने लिखा, मैंने नैनो को बंद करने की सिफारिश की। नैनो का नुकसान 1000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। - नैनो की लागत 1 लाख रुपए से ज्यादा हो गई थी। इमोशनल कारणों से नैनो प्रोजेक्ट को बंद करने से हम पीछे हट रहे थे। नैनो को बंद करने की जरूरत थी। - नैनो के लिए प्रॉफिटेबिलटी नही है। टाटा मोटर्स की सूरत बदलने के लिए अगर स्ट्रैटजी बनानी है तो नैनो को बंद करना होगा। इमोशनल कारणों के चलते हम कभी ये बड़ा फैसला कर ही नहीं पाए। मुझसे सफाई तो मांगते - मेल में मिस्त्री ने लिखा, बोर्ड मेंबर्स और भारत की सबसे बड़ी कंपनी ने मुझे हटाने का फैसला करते वक्त मुझसे सफाई में एक शब्द भी नहीं पूछा। कम से कम उन्हें अपनी बात रखने का मौका तो मिलना ही चाहिए था। ये कॉरपोरेट हिस्ट्री में अपने तरह की इकलौती घटना ही होगी कि आप अपने चेयरमैन को बिना उसका पक्ष जाने हटा देते हैं। - दो बोर्ड डायरेक्टर्स का नाम लिए बिना मिस्त्री ने लिखा, मुझे नहीं लगता कि मुझे नॉन परफॉर्मर होने की वजह से हटाया गया है। बात रखने का मौका ही नहीं दिया - मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिस्त्री ने लिखा है, इस फैसले से वे शॉक्ड हैं। उन्हें अपनी बात रखने का मौका तक नहीं दिया गया। बोर्ड ने अपनी साख के मुताबिक काम नहीं किया। - मिस्त्री ने लिखा, टाटा सन्स और ग्रुप कंपनियों के स्टेकहोल्डर्स के प्रति जिम्मेदारी निभाने में डायरेक्टर्स विफल रहे और कॉरपोरेट गवर्नेंस का कोई ख्याल नहीं रखा गया। - कॉरपोरेट स्ट्रैटजी नहीं होने के आरोप के जवाब में मिस्त्री ने कहा कि टाटा सन्स बोर्ड को उन्होंने 2025 तक की स्ट्रैटजी सौंप दी थी। - मिस्त्री ने कहा, उन्होंने शुरुआत में रतन टाटा और लॉर्ड भट्टाचार्या का ग्रुप को लीड करने का ऑफर ठुकरा दिया था, लेकिन कैंडिडैट्स नहीं होने चलते उन्हें आगे लागा गया। साथ ही, यह भरोसा दिया गया था कि उन्हें काम करने की पूरी फ्रीडम होगी। इसमें रतन टाटा की भूमिका सलाहकार और गाइड की होगी। - लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अप्वाइंटमेंट के बाद टाटा ट्रस्ट ने एसोसिएशन्स के आर्टिकल में संशोधन किया। इसमें ट्रस्ट, टाटा सन्स बोर्ड और चेयरमैन के बीच इंगेजमेंट के टर्म को बदला गया। - नियमों में बदलाव के जरिए टाटा सन्स के चेयरमैन को रोल को कम किया गया और एक अल्टरनेटिव पावर स्ट्रक्चर तैयार किया गया। - मिस्त्री ने दावा किया, ट्रस्ट की तरफ से नॉमिनेटेड डायरेक्टर नितिन नोहरिया और विजय सिंह, को महज पोस्टमैन बना दिया गया। - जानकारी के मुताबिक, बोर्ड मीटिंग के दौरान भी खुद को हटाए जाने को लेकर मिस्त्री ने कहा था कि यह गैरकानूनी तरीका है। क्या है मामला? - इसके पीछे कोई कारण नहीं बताया गया था। लेकिन माना गया कि सिर्फ मुनाफे वाली कंपनियों पर ही फोकस करने और टाटा की कंपनियों के कई कानूनी मामलों में फंसने के चलते बोर्ड मिस्त्री से नाखुश है। - बोर्ड ने मिस्त्री की जगह 78 साल के रतन टाटा को चार महीने के लिए इंटरिम चेयरमैन बनाया है। - टाटा ग्रुप के 148 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि किसी चेयरमैन को बर्खास्त किया गया। शुरू हो चुकी है कानूनी लड़ाई - मंगलवार को दोनों की तरफ से एक-दूसरे के खिलाफ कैविएट दायर होने की खबरें आईं। - टाटा ग्रुप ने साफ किया कि वह मिस्त्री की बर्खास्तगी के मामले में कोर्ट से कोई एकतरफा ऑर्डर नहीं चाहता। लिहाजा उसने सुप्रीम कोर्ट, बॉम्बे हाईकोर्ट और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में कैविएट दायर की है। - मिस्त्री की तरफ से भी ट्रिब्यूनल में चार कैविएट दायर करने की खबरें आईं। लेकिन बाद में मिस्त्री के ऑफिस ने इससे इनकार कर दिया। मिस्त्री के ई-मेल पर BSE-NSE ने मांगा क्लैरिफिकेशन - बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों से सायरस मिस्त्री द्वारा टाटा बोर्ड को भेजे गए ईमेल पर क्लैरिफिकेशन मांगा है। - जिन कंपनियों से क्लैरिफिकेशन मांगी गई है, उनमें टाटा मोटर्स, इंडियन होटल्स, टाटा टेलिसर्विसेस और टाटा पावर जैसी कंपनियां शामिल हैं। - वहीं, टाटा ग्रुप में मचे घमासान पर मार्केट रेग्युलेटर सिक्युरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) की भी नजर है। - सेबी नजर रखे हुए है कि कहीं इस मामले में कॉरपोरेट गवर्नेंस नॉर्म्स और लिस्टिंग रेग्युलेशन का वॉयलेशन तो नहीं हुआ। - सेबी टाटा ग्रुप में लिस्टेड कंपनियों की ट्रेडिंग एक्टिविटीज और प्राइस मूवमेंट पर भी नजर रख रहा है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें : शापूरजी ग्रुप को क्या है एतराज...

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