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delhi pollution

  • Funny : Pollution को लेकर केजरी का आरोप, सोशल साइट्स पर मजाक!
    Last Updated: November 09 2016, 17:57 PM

    दिल्ली के मुख्य्मंत्री अरविंद केजरीवाल ने पिछले कई दिनों से राजधानी में फैले हुए खतरनाक प्रदूषण पर लगाम के लिए अब एक प्लान बनाया है जिसके तहत कुछ दिशानिर्देश जारी किए गए हैं और इधर मसखरों ने उन्हें निशाने पर लेकर कुछ इसतरह का मजाक बनाया है। देखते हैं कि इस मसले को लेकर सोशल साइट्स पर आखिर क्या चल रहा है....

  • पॉल्यूशन पर NGT ने दिल्ली सरकार से कहा- आपकी वजह से बच्चे घर में रहने को मजबूर
    Last Updated: November 08 2016, 16:52 PM

    नई दिल्ली. पॉल्यूशन कंट्रोल पर मंगलवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कॉमन मिनिमम प्रोग्राम बनाने को कहा है। कोर्ट ने केंद्र से दो दिन यानी 48 घंटे में जवाब मांगा है। इसके पहले, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी ने इसी मुद्दे पर दिल्ली सरकार से कई सवाल किए। एनजीटी ने पूछा- ये बताएं आपने अभी तक पॉल्यूशन कंट्रोल करने के लिए क्या किया है? ट्रिब्यूनल ने कहा- ये जिंदगी और मौत का सवाल है, आपने बच्चों को घर के अंदर रहने को मजबूर कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा... - सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र से कहा कि अगर पॉल्यूशन कंट्रोल को लेकर कोई स्ट्रैट्जी है तो वो कोई को बताई जाए। - कोर्ट ने ये भी कहा कि पॉल्यूशन से निपटने के लिए कॉमन मिनिमम प्रोग्राम तैयार किया जाए। इसका जवाब 48 घंटे में कोर्ट को सौंपा जाए। मास्क से नुकसान भी हो सकता है - सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले, एनजीटी ने दिल्ली सरकार से कहा, मास्क की एक लिमिट है। पॉल्यूशन के एक लेवल पर पहुंचने के बाद मास्क नुकसानदेह भी हो सकता है।; - दिवाली और फसलों का जलाए जाने के बारे में सबको पता है। क्या आपने अगस्त और सितंबर में इस बारे मीटिंग्स की थी।; - ये जिंदगी और मौत का सवाल है, आपने बच्चों को घर के अंदर रहने के लिए मजबूर कर दिया है। क्रेन से पानी का छिड़काव क्यों कर रहे हैं हेलीकॉप्टर्स से क्यों नहीं।; हरियाणा और पंजाब से क्या कहा? - एनजीटी ने पंजाब सरकार से कहा, फसल जलाने की घटनाओं को रोकने या कम करने के लिए क्या कदम उठाए। एग्रीकलचर वेस्ट के डिस्पोजल के लिए कितनी मशीनें मुहैया कराई। अगर आप किसानों को 1000 रुपए देते तो वो एग्रीकलचर वेस्ट को इस तरह नहीं चलाते।; - ट्रिब्यूनल ने हरियाणा सरकार से कहा, आपने स्मॉग और पॉल्यूशन को कंट्रोल करने के लिए कुछ नहीं किया।; - एनजीटी ने पांचों राज्यों (यूपी, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली) कहा कि अगर जरूरत पड़े तो वे दिल्ली चीफ सेक्रेटरी के साथ कॉर्ओर्डिनेशन मीटिंग करें। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें: पाल्यूशन कंट्रोल पर क्या थे सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर...

  • दिल्‍ली का स्‍मॉग अब पहुंचा बुंदेलखंड, मुश्किलें बढ़ींं-100 मीटर से भी कम हुई विजिबिलिटी
    Last Updated: November 08 2016, 16:50 PM

    झांंसी. दिल्ली सेे चली जहरीली स्मॉग यूपी के बुंदेलखंड के कई इलाकों को चपेट में ले लिया है। सड़कों पर विजिबिलिटी कम हो गयी है। 100 मीटर दूरी पर चल रहे वाहन नहीं दिख रहे। आलम यह कि ऊंचे पहाड़ पर स्थित मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा जो कई किलोमीटर दूर से साफ़ दिखती थी, वह दिन में कुछ दूरी से भी नहीं दिख रही है। घर के बाहर निकलना हुआ मुश्किल - दिल्ली के बाद पश्चिमी यूपी में भी धुंध का असर देखने को मिल रहा है। इसके साथ ही यूपी ईस्ट में बसे बुंदेलखंड में भी धुंध का असर पहुंंच गया। - झांंसी के साथ ही बुंदेलखंड के जिला हमीरपुर, महोबा में भी इसका असर है। नेशनल हाईवे पर विजिविलटी कम हो गयी है। - ग्वालियर हाईवे से लहर की देवी इलाके की पहाड़ी पर स्थित मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा दिखना बंद हो गयी है। - यह प्रतिमा दिन में भी नहीं दिख रही है, जबकि सामान्यताः दिन में यह प्रतिमा कई किलोमीटर दूर से दिखाई देती है। क्रशर के कारण भी है धुंध - झांंसी के कुछ इलाकों में बुरी तरह से धुंध है। कानपुर रोड पर बड़ागांव व मऊरानीपुर रोड पर कई क्रशर मौजूद हैं. यहांं पत्थर तोड़ने का काम होता है। - ऐसे में यहांं बुरी तरह से धुंध उड़ती है. दिल्ली की तरह प्रदूषण व क्रशर से उत्पन्न हो रही धुंध लोगों के लिए दोहरी मुश्किल बन रही है। माह में एक दिन वाहन रहित रहेगा वैगन कारखाना - झांंसी में स्थित वैगन कारखाना में प्रदूषण की समस्या को देखते हुए माह में एक दिन वाहन रहित कैंपस रखने की मुहीम शुरू होने जा रही है। - मुख्य कारखाना प्रबंधक अतुल्य सिंहा ने बताया कि प्रदूषण को देखते हुए ये पहल की जा रही है। - वहीं, बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी में पहले ही ही व्हीकल फ्रीडे मनाया जा रहा है। - माह की पहली तारीख को यूनिवर्सिटी में कोई भी वाहन अन्दर नहीं जाने दिया जाता है। - कुलपति प्रो. सुरेन्द्र दुबे सहित सभी टीचर अपने-अपने विभाग तक पैदल जाते हैं, कई टीचर ऑटो से आते हैं। आगे की स्लाइड्स में देखिए अन्य फोटोज....

  • पाक का स्मॉग बढ़ा रहा यूपी में मुश्किलें, जहरीली धुंध 2 दिन और करेगी परेशान
    Last Updated: November 08 2016, 13:08 PM

    लखनऊ. दिल्ली समेत यूपी के अधिकांश क्षेत्रों में धुंध की छाई जहरीली चादर पाकिस्तान से आ रही है। यहीं धुंध पाकिस्तान के कई इलाकों में छाई है और उनका दावा है कि बार्डर से जुड़े पंजाब इलाके से जहरीली धुंध को भारत भेज रहा है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि धुंध हवा के साथ उत्तर-पश्चिम की तरफ से आ रही है। यह एरिया पाकिस्तान में पड़ता है। उत्तरी इलाके में नहीं है जहरीली धुंध मौसम विभाग के डायरेक्टर जेपी गुप्ता ने बताया कि यूपी के उत्तरी पश्चिमी इलाके में पिछले दो दिन से आसमान पर काले रंग की धुंध छाई हुई है। यह कोहरा नहीं बल्कि स्मॉग है। स्मॉग प्रदूषण के चलते बनता है और तापमान पर भी असर पड़ता है। यह सांस के रोगियों के साथ बुर्जुग और बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। हालांकि स्मॉग का असर उत्तरी इलाके यानि पहाड़ी क्षेत्र में बिल्कुल नहीं है। कैसे बनता है स्मॉग हवा में नमी के कारण कोहरे का बादल बनता है। प्रदूषण के चलते उस कोहरे के बादल पर कण चिपक जाते है। जिसके चलते वह स्मॉग बन जाता है। और हवा के साथ इसका स्वरुप बढ़ता जाता है। दिल्ली और यूपी के कई इलाकों में उत्तर-पश्चिम की तरफ से ही स्मॉग आ रहा है। 2 दिन तक रह सकती है मुसीबत जेपी गुप्ता ने बताया कि राजधानी समेत यूपी के उत्तरी इलाके में स्मॉग से परेशानी दो दिन तक रह सकती है। जब तक तेज हवा नहीं चलती है तब तक यह स्मॉग पूरी तरह नहीं जा सकता है। इससे तापमान पर भी असर पड़ेगा। दिल्ली में बढ़ती मुसीबत को देखते हुए दिल्ली सरकार ने स्मॉग से छुटकारा पाने के लिए अप्रकृतिक बारिश कराने के लिए केंद्र सरकार को लिखा है। राजधानी का प्रदूषण 6 से 8 गुना बढ़ा उत्तरी यूपी समेत राजधानी इलाके में स्मॉग के चलते प्रदूषण आम दिनों की अपेक्षा 6 से 8 गुना तक बढ़ गया है। जिससे सांस के रोगी समेत बुजुर्ग और बच्चों के लिए परेशानी हो सकती है। मरीजों को खासतौर से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यही नहीं आम आदमी को भी सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है। यूपी में धुंध को लेकर सीएम ने दिया निर्देश, यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगाएगा कारणों का पता सीएम अखिलेश यादव ने लखनऊ सहित प्रदेश के कई जनपदों में छाई धुंध को गम्भीरता से लेते हुए यूपी प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड और पर्यावरण विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे इस धुंध के लिए जिम्मेदार कारणों का शीघ्र पता लगाकर इसका सलूशन बताएं। उन्होंने प्रदूषण की रोकथाम के लिए बनाए गए नियमों का कड़ाई से पालन करने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कूडे़ के निस्तारण की समुचित व्यवस्था करने के साथ उसे जलाने से परहेज बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि वाहन और जनरेटर आदि प्रदूषण नियन्त्रण के निर्धारित मानकों के अधीन संचालित हों। खेतों में फसलों के अवशेष का निस्तारण इस प्रकार सुनिश्चित कराया जाए कि प्रदूषण के स्तर में बढ़ोत्तरी न हो। सीएम ने कहा है कि राज्य सरकार पर्यावरण संतुलन के प्रति बेहद संवेदनशील है। प्रदेश में ग्रीन यूपी-क्लीन यूपी कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसके तहत गत जुलाई माह में एक ही दिन में 05 करोड़ पौधों का रोपड़ किया गया है। इसके अलावा सभी जनपदों में 50 एकड़ से लेकर 1000 एकड़ तक के क्षेत्रों का चयन करके वृक्षारोपण कराया गया है तथा उनकी देखभाल सुरक्षा की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। आगे की स्लाइड्स में पढ़िए राजधानी का प्रदूषण 6 से 8 गुना बढ़ा...

  • दिल्ली को देखकर चेता पटना, प्रदूषण की जांच कर योजना बनाएगा निगम
    Last Updated: November 08 2016, 04:35 AM

    पटना. दिल्ली की हवा जहरीली होती जा रही है। वहां अनियंत्रित प्रदूषण के खतरे को देखते हुए पटना नगर निगम ने अभी से ही तैयारी शुरू कर दी है, ताकि भविष्य में राजधानी में दिल्ली जैसी नौबत न आए। क्योंकि, पटना की हवा में भी जहरीली गैस की मात्रा मानक से पांच गुनी अधिक तक पहुंच जाती है। कई मौकों पर पटना का वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण भी उच्चतम स्तर पर पहुंच जाता है। राजधानी में प्रदूषण का स्तर जांचने के लिए इंकली कंपनी के साथ एमओयू साइन किया जाएगा। पर्यावरण में मौजूद हर तरह के प्रदूषण की जांच होगी। कंपनी नियमित अंतराल पर शहर के प्रदूषण का आंकड़ा जारी करेगी। इससे सुधार के लिए गाइडलाइन तैयार किया जाएगा। नगर आयुक्त अभिषेक सिंह ने बताया कि शहर का प्रदूषण उत्सर्जन एक बड़ी चुनौती है। इसे ठीक करने के लिए स्टडी जरूरी है। एजेंसी से प्राप्त डाटा को ध्यान में रखते हुए शहर की योजनाएं बनाई जाएंगी। इससे ठोस कचरा प्रबंधन से लेकर साफ-सफाई को बेहतर करने के लिए निगम की तैयारी बेहतर होगी। शहरों की चल रही जांच इंकली कंपनी वर्तमान समय में विश्व के 15 सौ शहरों के साथ मिलकर प्रदूषण नियंत्रण के लिए काम कर रही है। भारत और बांग्लादेश को मिलाकर पटना 21 वां शहर होगा, जहां नगर निगम के माध्यम से शहर के प्रदूषण उत्सर्जन के कारण को ढूंढ़ा जाएगा। एक्सपर्ट रखेंगे राय कंपनी और नगर निगम क्लाइमेट चेंज पर 10 नवंबर को कार्यशाला का आयोजन कर रहे हैं। होटल पाटलिपुत्र में सुबह से शाम तक इस कार्यक्रम में प्रदूषण स्टडी से संबंधित वैज्ञानिक, प्रोफेसर, नगर आयुक्त और एनजीओ के प्रतिनिधि अपनी राय रखेंगे। इसी कार्यक्रम में एमओयू भी साइन होगा। ऐसे समझिए पटना में प्रदूषण पटना में सोमवार को पीएम 2.5 कणों की संख्या अिधकतम 390 व न्यूनतम 180 तक पहुंच गई, जबकि मानक 100 ही है। रविवार को रात 10 बजे से साेमवार को दाेपहर दो बजे तक पीएम 2.5 कण 18 घंटे तक 300 से ऊपर रहे। रविवार को बनारस, लखनऊ, कानपुर, गुड़गांव, फरीदाबाद, दिल्ली व आगरा पटना से अधिक प्रदूषित रहे। हालात बदलना जरूरी बिहार प्रदूषण नियंत्रण परिषद के सदस्य सचिव एस चंद्रशेखर ने बताया कि प्रदूषण को लेकर पटना का हालात बदलना जरूरी है। ठोस कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक वेस्ट प्रबंधन, भवनों के निर्माण और ध्वस्त करने के लिए केंद्र सरकार के नियम बनाए हैं। सिर्फ इसका पालन हो तो प्रदूषण के स्तर में कमी आ सकती है।

  • कांग्रेस नेताओं ने एक सुर में कहा- राहुल को बनाया जाए प्रेसिडेंट; बीमारी के चलते CWC मीटिंग में नहीं पहुंचीं सोनिया
    Last Updated: November 07 2016, 16:16 PM

    नई दिल्ली. कांग्रेस वर्किंग कमेटी की सोमवार को मीटिंग हुई। इस दौरान कमेटी मेंबर्स ने एक सुर में राहुल गांधी को पार्टी प्रेसिडेंट बनाने की मांग की। राहुल अभी पार्टी के वाइस-प्रेसिडेंट हैं। बीमार होने की वजह से सोनिया मीटिंग में नहीं पहुंचीं। बताया जा रहा है कि सोनिया का जाना तय था। घर के बाहर गाड़ी भी खड़ी थी। पर दिल्ली में स्मॉग को देखते हुए उन्होंने आखिरी वक्त में फैसला टाल दिया। राहुल ने कहा- अंधकार के दौर से गुजर रहा है लोकतंत्र... - मीटिंग में राहुल ने कहा, लोकतंत्र अंधकार के दौर से गुजर रहा है। मोदी सरकार टीवी और विरोध को दबाने में लगी हुई है। वन रैंक-वन पेंशन मसले पर झूठ बोल रही है। - मोदी सरकार विरोधियों की आवाज को दबा रही है। टीवी न्यूज चैनल पर बैन लगाया जा रहा है। - आज हमारे जवानों को मुश्किल हालात का सामना करना पड़ रहा है। एक दशक में सबसे मुश्किल दौर है। लेकिन सरकार OROP से इनकार कर उन्हें इसका इनाम दे रही है। - गरीबों को मनरेगा के तहत काम नहीं दिया जा रहा है। इसके लिए मोदी सरकार राज्यों से मिलकर लॉबिंग कर रही है। - कई राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। हम जानते हैं कि मोदी सरकार लोगों के बीच झूठ का कैम्पेन चलाएगी। ध्रुवीकरण की राजनीति की जाएगी। प्रशांत किशोर से यूपी-पंजाब के नेता नाराज - कहा जा रहा है कि पार्टी स्ट्रैटजिस्ट का काम कर रहे प्रशांत किशोर से कांग्रेस वर्कर्स और नेता नाराज हैं। - यूपी और पंजाब के अलावा गोवा, उत्तराखंड और मणिपुर में भी इलेक्शन होने वाले हैं। संसद में पार्टी के रुख पर भी चर्चा - इसी महीने की 16 तारीख से पार्लियामेंट का विंटर सेशन शुरू होने जा रहा है। - CWC की मीटिंग में इस पर भी चर्चा हुई। सरकार को घेरने के लिए पार्टी में रणनीति बनी।

  • ANALYSIS: दिल्ली में पॉल्यूशन; सरकार ने उठाए 10 कदम, फिर भी लंदन में 64 साल पहले छाए ग्रेट स्मॉग जैसे हालात
    Last Updated: November 07 2016, 14:40 PM

    नई दिल्ली. दिल्ली-एनसीआर लगातार आठ दिन से स्मॉग (पॉल्यूशन और धुंध) से परेशान है। पॉल्यूशन तय मानकों से 10 गुना बढ़ चुका है। एक्सपर्ट्स ने आगाह किया है कि अगर हालात जल्द न सुधरे तो लंदन में 1952 में हुए ग्रेट स्मॉग जैसी स्थिति बन सकती है, जिसके चलते वहां चार हजार लोगों की मौत हुई थी। दिल्ली सरकार ने राजधानी में पांच दिन कंस्ट्रक्शन, डिमोलिशन बंद करने समेत 10 बड़े फैसले लिए हैं। 14 QA में पढ़ें: दिल्ली में एकाएक हालात इतने खराब क्यों हो गए... 1. दीपावली के बाद दिल्ली में आखिर क्यों बढ़ा पॉल्यूशन? - पटाखे: चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन के मुताबिक, पटाखों से सबसे ज्यादा पॉल्यूशन फैलता है। सांप गोली, बम की लड़ी, अनार और चकरी जैसे पटाखे 2000 गुना ज्यादा पार्टिकुलेट मैटर छोड़ते हैं। एक पटाखे से 464 सिगरेट जितना धुआं निकलता है। - धुंध ने रोका धुआं: CSE साइंटिस्ट विवेक चट्टोपाध्याय का कहना है कि पटाखों का धुआं धुंध के कारण हट नहीं पाया। हवा अभी फैल नहीं रही है। - हवा का रूख जिम्मेदार: दिवाली के दिन हवा की एवरेज स्पीड 1.3 मीटर/ सेकंड थी। पिछले साल यह 3.4 मीटर/ सेकंड थी। हवा की रफ्तार धीमी है। अगले कुछ दिन ऐसा ही रहेगा। - पराली, लकड़ी और कोयला: पंजाब-हरियाणा में फसलों का कचरा जलाने और कोयले-लकड़ी के धुएं ने दिल्ली-एनसीआर में पॉल्यूशन बढ़ाया। पंजाब में 320 लाख टन फसल का कचरा जलने से और भलस्वा डंपिंग ग्राउंड में आग से दिल्ली-एनसीआर में धुंध बढ़ी। 2. कितना बढ़ा पॉल्यूशन? - हवा में दो तरह के पीएम होते हैं। - पहला: PM 2.5 होना चाहिए 60 g/m3। लेकिन दिल्ली में अभी यह 590 g/m3 है। यानी सामान्य से 10 गुना ज्यादा। - दूसरा: PM 10 होना चाहिए 100 g/m3। लेकिन दिल्ली में अभी यह 950 g/m3 है। यानी सामान्य से 9.5 गुना ज्यादा। 3. हालात कब बदतर हो गए? - आठ दिन से दिल्ली में स्मॉग है। हवा जहरीली हो गई है। रविवार का दिन सबसे पॉल्यूटेड रहा। - 200 मीटर तक देखना मुश्किल हो रहा था। इन दिनों दिल्लीवासियों ने 17 साल की सबसे ज्यादा धुंध देखी। 4. किस खतरनाक स्तर की तरफ जा रही है दिल्ली? लंदन-बीजिंग में क्या हुआ था? - सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरन्मेंट (CSE) की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनुमिता रॉय चौधरी के मुताबिक, लंदन में 1952 में स्मॉग की वजह से 4 हजार लोगों की मौत हो गई थी। तब SO2 हाई लेवल पर था। पीएम लेवल 500 माइक्रोग्राम/क्यूबिक मीटर था।;; - यहां SO2 भले ही उतना ज्यादा न हो, लेकिन दिवाली पर हवा में कई तरह की जहरीली गैसों का स्तर बढ़ा है। कुल मिलाकर अगर पॉल्यूशन का यह स्तर बरकरार रहा तो दिल्ली में भी सांस से रिलेडेट बीमारियों के कारण लोगों की मौत हो सकती है।;; - बीजिंग में इसी साल फरवरी में इतना पॉल्यूशन बढ़ा था कि रेड अलर्ट जारी करना पड़ा। 5. पीएम कणों का हमारी बॉडी पर क्या असर पड़ता है? - हवा में मौजूद पार्टिकुलेट मैटर सांस लेने के दौरान शरीर में पहुंचते हैं। - पीएम-2.5 और पीएम-10 कण फेफड़ों में पहुंच जाते हैं। ये हवा में मौजूद जहरीले कैमिकल्स को शरीर में पहुंचाते हैं। ये केमिकल फेंफड़े, हार्ट को नुकसान पहुंचाते हैं। - पीएम-10 कणों का असर खांसने, छींकने से कम हो जाता है। 6. दिल्ली सरकार ने क्या कदम उठाए? - पॉल्यूशन से लड़ने के लिए सरकार ने 10 बड़े फैसले लिए। - राजधानी में पांच दिनों के लिए कंस्ट्रक्शन और डेमोलिशन को बंद कर दिया है। लोगों को वर्क फ्रॉम होम की सलाह दी गई है। - तीन दिन के लिए स्कूल बंद रहेंगे। जनरेटर नहीं चलेंगे। ऑड-ईवन फिर से लागू करने पर विचार हो रहा है। - ऑर्टिफिशियल रेन कराने पर केंद्र से बात हो रही है। - पत्तियां जलाने पर सख्ती से रोक लगा दी गई है। निगरानी के लिए मोबाइल एप जारी होगा। एमसीडी को कूड़े के ढेरों में लगी आग फौरन बुझाने के निर्देश दिए गए हैं। - सड़कों पर पानी का छिड़काव होगा। दिल्ली में किसी भी वक्त ट्रकों के घुसने पर पाबंदी। - बदरपुर पावर प्लांट बंद रहेगा। प्लांट से फिलहाल राख उठाने पर पाबंदी लगा दी गई है। 7. कब निजात मिलेगी? - वेदर डिपार्टमेंट के मुताबिक, अच्छी बारिश और तेज हवा चलने से ही स्मॉग से निजात मिल सकती है। - 12 नवंबर तक बारिश के आसार नहीं हैं। हालांकि, सोमवार को हवा चलने की उम्मीद है। इससे दिल्ली में ठहर चुके स्मॉग से कुछ राहत मिल सकती है। 8. अब तक किसने क्या कहा? - केंद्रीय पर्यावरण मंत्री: अनिल माधव दवे ने कहा- इस हालत के लिए 80% दिल्ली सरकार जिम्मेदार है। - दिल्ली सरकार: सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा- दिल्ली पहले से ही पॉल्यूटेड है। पॉल्यूशन पंजाब-हरियाणा की वजह से हो रहा है। - नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल: NGT ने पॉल्यूशन को लेकर केंद्र-दिल्ली सरकार को फटकार लगाई। स्टेटस रिपोर्ट मांगी। - सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरन्मेंट: CSE ने कहा- हालात अभी नहीं सुधरे तो फिर संभालना मुश्किल हो जाएगा। - एक्सपर्ट्स: दिल्ली ही 80% दोषी। पंजाब-हरियाणा में फसल के जलते कचरे की पॉल्यूशन बढ़ाने में भूमिका महज 20%। 9. सरकार ने कहां की लापरवाही? - नहीं माने आदेश: सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेश नहीं माने। कोर्ट और एनजीटी ने पॉल्यूशन पर एक साल में केंद्र और दिल्ली समेत राज्य सरकारों को कई निर्देश दिए। लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। - पटाखों पर रोक: 16 अक्टूबर 2015 को कोर्ट ने सरकार को विज्ञापन निकालकर लोगों को पटाखे नहीं चलाने के लिए जागरूक करने को कहा। हकीकत ये है कि सरकार ने विज्ञापन जारी नहीं किया। - फसल का कचरा जलाने पर रोक: 20 अक्टूबर 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के फसल का कचरा जलाने पर रोक के लिए विज्ञापन निकालने को कहा। लेकिन यूपी, हरियाणा और पंजाब में सरकार किसानों को जागरूक करने में नाकाम रही। - 15 साल पुरानी गाड़ियों पर बैन: 18 जुलाई 2016 को एनजीटी ने कहा कि 15 साल पुरानी गाड़ियां पहले हटेंगी। लेकिन 90 हजार ट्रक समेत लाखों पुरानी डीजल गाड़ियां दिल्ली में दौड़ रही हैं। 10. बीजिंग-लंदन से क्या सबक ले सकते हैं? - बीजिंग में फरवरी में पॉल्यूशन बढ़ा। नौबत ऐसी आ गई कि रेड अलर्ट जारी करना पड़ गया। इसके बाद कार्बन इमिशन कम करने पर जाेर दिया गया। - चीन ने 2017 तक कोयले के इस्तेमाल में 70% कटौती करने और 2020 तक कोयला मुक्त होने का टारगेट बनाया है। - इसी के साथ चीन ने क्लाउड सीडिंग पर जोर दिया। यह आर्टिफिशियल बारिश के लिए है। इसमें सिल्वर आयोडाइड जैसे केमिकल से भरे गोले प्लेन के जरिए दागे जाते हैं। इससे आसमान पर बादलों में मौजूद पानी बरस जाता है। चीन ने यह टेक्नोलॉजी फरवरी में भारत को भी ऑफर की थी। - इसी तरह 1952 के ग्रेट लंदन स्मॉग के बाद यूके ने दो कड़े ग्रीन कानून बनाए। इसके तहत पॉल्यूशन रोकने के लिए सख्त नियम बनाए गए। वहीं, कोयले की बजाय नेचुरल गैस के इस्तेमाल पर जोर दिया गया। इस तरह कार्बन इमिशन काबू किया गया। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें : दुनिया के सबसे पॉल्यूटेड शहरों में कहां है दिल्ली? दिल्ली के लोग क्या कर रहे हैं? और नासा ने क्या कहा?

  • दिल्ली में धुंध कम करने के लिए 10 फैसले: बुधवार तक स्कूल बंद, आर्टिफिशियल रेन के लिए बात करेंगे केजरीवाल
    Last Updated: November 06 2016, 19:43 PM

    नई दिल्ली. राजधानी के लोग 17 साल के सबसे घने स्मॉग (धुंध और प्रदूषण) से बेहाल हैं। केजरीवाल सरकार ने रविवार को इस पर इमरजेंसी मीटिंग की। इसके बाद केजरीवाल ने कहा, दिल्ली की बेस लेवल पहले से ही ज्यादा था। हम पहले से ही पॉल्यूटेड थे। सरकार कुछ कदम उठा रही है, ताकि पॉल्यूशन कंट्रोल हो सके। लोगों को घर से काम करने की सलाह। ऑड-ईवन की तैयारी कर रहे हैं। स्कूल तीन दिन और बंद रहेंगे। इस बीच, दिल्ली से सटे गाजियाबाद और नोएडा में भी 2 दिन तक स्कूल बंद रखने का ऐलान हुआ है। धुंध खत्म करने के लिए दिल्ली सरकार ने क्या लिए फैसले... - केजरीवाल ने कहा, दिल्ली सरकार की तरफ से कई एक्सपर्ट्स से कंसल्ट किया। कुछ इमरजेंसी स्टेप लिए गए है। - पांच दिन डेमोलेशन, कंस्ट्रक्शन बंद रहेगा। - सड़कों पर कल से पानी का छिड़काव बड़े लेवल पर होगा। - डीजी सेट्स 10 दिन के लिए बंद होंगे। मोबाइल टावर, हॉस्पिटल वाले इससे बाहर होंगे। - बदरपुर प्लांट अगले दस दिन के लिए बंद रहेगा। राख उठाना बंद रहेगा। जिस इलाके में राख मिलेगी, वहां के अफसरों पर कार्रवाई होगी। - वैक्यूम क्लीनिंग 10 नवंबर से शुरू होगी। हर रोड हफ्ते में एक बार साफ होगी। - तीन दिन (बुधवार तक) के लिए सभी स्कूल बंद किए जाएंगे। शनिवार-रविवार को भी छुट्टी थी। - लोगों को सलाह दी गई है कि वे जितना हो सके घर से काम करें। - ऑड-ईवन को फिर लागू करने पर भी विचार हो रहा है। - एक सुझाव आर्टिफिशियल रेन का भी आया है, लेकिन इसके लिए केंद्र की इजाजत लेनी होगी। रविवार को कितना था पॉल्यूशन - दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी के मुताबिक, रविवार दोपहर आनंद विहार में PM10- 1635 और PM2.5- 813, पंजाबी बाग में PM10- 1394 और PM2.5- 792, IGI एयरपोर्ट में- PM10- 989 और PM2.5- 375 माइक्रोग्राम/ क्यूबिक मीटर रिकॉर्ड किया गया। - राजधानी के कई इलाकों में PM 2.5 भी करीब 12 गुना ज्यादा रिकॉर्ड किया गया। शनिवार को राजपथ पर विजिबलिटी 100 मीटर से भी कम रही। - एनजीटी ने 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियों पर रोक लगाई। दिल्ली-एनसीआर में मास्क की बिक्री बढ़ी। दिल्ली में क्यों बढ़ा पॉल्यूशन? - सीएसई के मुताबिक, दिवाली पर हुई आतिशबाजी के चलते एन्वायरन्मेंट में जहरीले कणों की मात्रा खतरनाक लेवल को पार कर गई। - दिल्ली में हवा की एयर क्वालिटी के खराब होने का एक कारण तेजी बढ़ते शहरीकरण को भी बताया जाता है। - एक वजह खेतों में फसलों की पराली जलाने और लकड़ी या कोयले के चूल्हों से निकलने वाले धुएं को भी माना जाता है। एनजीटी ने दिल्ली सरकार को लगाई थी फटकार - नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पॉल्यूशन को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार को फटकार लगाने के साथ स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। ट्रिब्यूनल ने केजरी सरकार से कहा, आप सिर्फ मीटिंग करने में बिजी हैं, पॉल्यूशन रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। - सीएसई ने कहा था- दिल्ली 17 साल में सबसे घनी धुंध का सामना कर रही है। इसे अब इमरजेंसी के तौर पर लिया जाना चाहिए। लोगों को घर के बुजुर्गों और अपने बच्चों को प्रोटेक्ट करने की कोशिश करनी चाहिए। - इंडियन मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने कहा- दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 2 नवंबर को 17 साल की सबसे घनी धुंध रही। इस दौरान विजिबिलिटी महज 300 से 400 मीटर थी।

  • दिल्‍ली के बाद वेस्‍ट यूपी में बढ़ा जहरीली हवा का खतरा, लोगों ने कहा- सांस लेने में हो रही दिक्‍कत
    Last Updated: November 06 2016, 11:08 AM

    बुलंदशहर. दिल्ली की जहरीली धुंध अब वेस्ट यूपी को अपने चपेट में ले रहा है। शनिवार शाम बुलंदशहर में पॉल्यूशन का असर देखने को मिला। बता दें पंजाब के खेतों के जले वेस्टेज और पटाखे के धुएं से दिल्ली में पॉल्यूशन की स्थिति भयावह हो गई है। धुंध ने बिगाड़ा मौसम का मिजाज - बुलंदशहर के लोगों ने शनिवार शाम की धुंध को बदलते मौसम की आहट समझा। - वह दिल्ली से उड़ा धुआं था जो हवा के साथ वेस्ट यूपी की तरफ रुख कर गया। - सुबह होने के बाद धुएं की चादर ने शहर को ढक लिया। - पूरे दिन आसमान में पॉल्यूशन की चादर छाए रही। आंखों में जलन की समस्या और सांस की बीमारी बढ़ी - स्थानीय निवासी नीरज शर्मा का कहना है कि नवम्बर का महीना शुरू हो गया लेकिन अभी तक ठंढ नही पड़ी है। - कल शाम से शहर में धुंध दिखाई दे रही है। इस धुंध में सांस लेने में दिक्कत हो रही है। - कारोबारी मुकुटलाल ने बताया, आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी की समस्या हो रही है। - उन्होंने बताया कि बच्चों को स्कूल भेजने में प्रॉब्लम हो रही है। दिल्ली में क्यों बढ़ा पॉल्यूशन? - सीएसई के मुताबिक, दिवाली पर हुई आतिशबाजी के चलते इन्वॉयरमेंट में जहरीले कणों की मात्रा खतरनाक लेवल को पार कर गई। - दिल्ली में हवा की एयर क्वालिटी के खराब होने का एक कारण तेजी बढ़ते शहरीकरण को भी बताया जाता है। - एक वजह खेतों में फसलों की पराली जलाने और लकड़ी या कोयले के चूल्हों से निकलने वाले धुएं को भी माना जाता है। दिवाली के बाद काफी बढ़ गया पॉल्यूशन - सीएसई की एनालिसिस ने बताया- दिवाली के दिन भी उतना पॉल्यूशन नहीं था, जितना उसके बाद देखा जा रहा है। - दिवाली के बाद पॉल्यूशन के लेवल को देखने से यह पता चलता है कि शहर में जहरीली धुंध का लेवल बहुत ज्यादा बढ़ गया है। - दिवाली के दिन के मुकाबले 2 नवंबर को हवा में पर्टिकुलेट मैटर 2 का लेवेल 62.7% रहा। अभी यह क्लीयर नहीं की ये धुंध पॉल्यूशन है या कोहरा: सीएमओ - सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी बताया कि इस प्रकार की धुंुंध कल से ही दिखाई दी है। - अभी यह कहना मुश्किल है कि यह एयर पॉल्यूशन है या ठंड की वजह से कोहरा। - बताया कि एयर पॉल्यूशन से नाक और आंखों में खुजली और खांसी जैसी परेशानी होती है। फिलहाल ऐसा अभी कोई केस नही आया है। दिल्ली के 1800 स्कूलों में कर दी गई है छुट्टी - एयर पॉल्यूशन को देखते हुए शनिवार को दिल्ली के 1800 स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई। - अगर सोमवार को भी हालात ठीक नहीं रहे तो छुट्टी बढ़ाई जा सकती है। - दिल्ली के तीनों नगर निगम ; साउथ, नॉर्थ और ईस्ट के स्कूलों में कुल दस लाख बच्चे पढ़ते हैं। - हेल्थ मिनिस्टर सत्येंद्र जैन और पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने सुबह भलस्वा डंपिंग ग्राउंड का दौरा किया। यहां आग लगने से आसपास के इलाके में धुंध बढ़ गई है। - दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने पॉल्यूशन से निपटने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है। एनजीटी सख्त, चार राज्यों के सचिवों को किया तलब - चार राज्यों के पर्यायवरण सेक्रेटरी को एनजीटी ने तलब किया है। - एनजीटी ने दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के सचिवों को बुलाया है और कहा है कि 8 नवंबर तक पर्यायवरण सचिव फसल जलाने और प्रदूषण को रोकने की रिपोर्ट भी एनजीटी में सब्मिट करें। - एनजीटी दिल्ली सरकार को कहा कि केवल दूसरे राज्यों में फसल जलाने से दिल्ली में प्रदूषण नहीं है। - दिल्ली सरकार से एनजीटी ने पूछा कि कूड़ा जलाने, दस साल पुरानी गाड़ियों को बैन करने और कंस्ट्रक्शन के काम से प्रदूषण न हो इसके लिए क्या किया गया। आगे की स्लाइड्स में देखें पॉल्यूशन ने कैसे वेस्ट यूपी को लिया अपने आगोश में...

  • दिल्ली में 17 साल की सबसे घनी धुंध, सरकार ले इमरजेंसी एक्शन: CSE
    Last Updated: November 03 2016, 21:47 PM

    नई दिल्ली. सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वार्यन्मेंट (CSE) ने गुरुवार को कहा- दिल्ली 17 साल में सबसे घनी धुंध (स्मॉग) का सामना कर रही है। इसे अब इमरजेंसी के तौर पर लिया जाना चाहिए, लोगों को घर के बुजुर्गों और अपने बच्चों को प्रोटेक्ट करने की कोशिश करनी चाहिए। ग्रीन बॉडी ने दिल्ली सरकार को हेल्थ अलर्ट जारी करने को कहा है। उधर, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने राजधानी में पॉल्यूशन पर सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। सीएसई ने और क्या कहा... - न्यूज एजेंसी के मुताबिक, सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वार्यन्मेंट (सीएसई) के एयर पॉल्यूशन एंड सस्टेनबल मोबिलिटी टीम की हेड अनुमिता रॉयचौधरी ने कहा- सांस की प्रॉब्लम और हार्ट डिजीज से परेशान लोगों और बच्चों को इससे बचाने के लिए इमरजेंसी एक्शन की जरूरत है। - सरकार को लोगों को घरों में रहने और खुले में एक्सरसाइज से बचने की सलाह देनी चाहिए। साथ ही उसे जाड़े में पॉल्यूशन के सभी सोर्सेज को कंट्रोल करने के लिए इमरजेंसी एक्शन लेना चाहिए। सिर्फ 300 से 400 मीटर रही विजिबिलिटी - इंडियन मीटियरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने कहा- दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 2 नवंबर को 17 साल की सबसे घनी धुंध रही। इस दौरान विजिबिलिटी महज 300 से 400 मीटर रही। - सुबह 11 बजे से दोपहर ढाई बजे तक एयरपोर्ट पर सबसे कम विजिबिलिटी दर्ज की गई। - दिवाली के बाद से ही विजिबिलिटी घटनी शुरू हो गई थी। फेस्टिवल के अगले दिन 30 अक्टूबर को यह 800 से 1200 मीटर रही थी। - पॉल्यूशन के अन्य सोर्सेज के साथ ही वेदर से जुड़े फैक्टर्स की वजह से ही विजिबिलिटी इस लेवेल तक गिरी। दिवाली के बाद काफी बढ़ गया पॉल्यूशन - सीएसई की एनालिसिस के मुताबिक, दिवाली के दिन भी उतना पॉल्यूशन नहीं था, जितना उसके बाद देखा जा रहा है। - दिवाली के बाद पॉल्यूशन के लेवेल को देखने से यह पता चलता है कि शहर में विषैली धुंध का लेवेल बहुत ज्यादा बढ़ गया है। - दिवाली के दिन के मुकाबले 2 नवंबर को हवा में पर्टिकुलेट मैटर 2 का लेवेल 62.7% रहा। पॉल्यूशन पर NGT ने सरकार से मांगी रिपोर्ट - दिल्ली में पॉल्यूशन की प्रॉब्लम को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रवैया अपनाया है। - ट्रिब्यूनल ने दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी को सभी संबंधित विभागों के साथ तुरंत मीटिंग करने को कहा है। साथ ही उनसे शुक्रवार तक स्टेटस रिपोर्ट देने को भी कहा है। - बता दें कि दिवाली के चार दिन बाद भी दिल्ली एक गैस चैंबर की तरह नजर आ रही है। - दिवाली के बाद पॉल्यूशन में बेतहाशा बढ़ोतरी के बाद डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने बीते मंगलवार को एक हाई लेवेल मीटिंग की थी, जिसमें पॉल्यूशन को कंट्रोल करने के लिए सड़कों की वैक्यूम क्लीनिंग करने समेत कई फैसले लिए गए।

  • खत्म होने से दूर है दिल्ली के प्रदूषण की समस्या: सीएसई
    Last Updated: June 04 2016, 07:09 AM

    नई दिल्ली. दिल्ली एनसीआर के घर एवं ऑफिस के अंदर भी हवा प्रदूषित हो गई है। ऑफिस घर में रहने वाले लगभग 34 फीसदी लोग सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। 47 फीसदी लोगों में सांस की बीमारी से जुड़े लक्षण पाए गए हैं। यह खुलासा क्लीन एयर इंडिया मूवमेंट (क्लेम) ने आर्टिमस अस्पताल के साथ हुए सर्वे में हुआ है। अप्रैल-मई में 1500 लोगों पर यह सर्वे किया गया। सर्वे में 18 कार्यालयों के 786 लोगों को और 238 घरों के 714 लोगों को शामिल किया गया। सर्वे में दिल्ली, गुड़गांव और नोएडा को शामिल किया गया। सर्वे में पाया गया कि 82 फीसदी कार्यालयों और घरों में हवा की गुणवत्ता अस्वस्थ है। बल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट के श्वसन एलर्जी एप्लाइड इम्मूनोलॉजी विभाग के हेड डॉ.राजकुमार का कहना है कि बाहरी प्रदूषण के मुकाबले अंदर की अस्वस्थ हवा भी उतनी या उससे ज्यादा खतरनाक होती है। हम लोग ज्यादातर समय अंदर बिताते हैं तो अंदरूनी हवा से जुड़े रिस्क होने की ज्यादा संभावना होती है। सर्वे में खुलासा, 34 फीसदी लोगों को सांस संबंधी समस्या सेंटरफॉर साइंस एंड एन्वायरनमेंट (सीएसई) ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली की प्रदूषण की समस्या खत्म होने से कहीं दूर है सीएसई ने यह टिप्पणी इसलिए की क्योंकि उसके विश्लेषण में यह बात सामने आई है कि हर रोज दूसरे राज्यों से राष्ट्रीय राजधानी में आने वाले वाहनों की संख्या हर साल दिल्ली में पंजीकृत होने वाले वाहनों की कुल संख्या के करीब है सीएसई की ओर से वास्तविक समय में किए गए सीमा पार यातायात सर्वेक्षण में कहा गया कि बाहर से आने वाले निजी एवं यात्री वाहन कुल प्रदूषक भार (टोटल पार्टिकुलेट लोड) के 22 फीसदी हैं जो दिल्ली में प्रदूषण पर नियंत्रण के उपायों को सिर्फ बेअसर कर रहे हैं बल्कि पार्किंग सुविधाओं के लिए जमीन की भारी मांग भी पैदा कर रहे हैं। संस्था ने कहा कि ट्रकों से होने वाले प्रदूषण पर लगाम लगाना अच्छा कदम है, लेकिन ये दिल्ली के लिए काफी नहीं है क्योंकि ये कारों के लिए एक प्रदूषण हाइवे है सीएसई ने कहा कि दिल्ली में अब भी डीजल ईंधन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में हर रोज दाखिल होने वाली डीजल कारों, टैक्सियों और एसयूवी की कुल संख्या 2014-15 के दौरान दिल्ली में पंजीकृत हुए डीजल वाहनों की संख्या का ढाई गुना है।

  • Odd Even 2: पर्यावरण पर क्या पड़ेगा असर, होगी व्यापक जांच
    Last Updated: April 09 2016, 06:38 AM

    नई दिल्ली. ऑड-ईवन के दौरान इस बार प्रदूषण पर इसके असर की व्यापक पैमाने पर मॉनिटरिंग की व्यवस्था की जा रही है। दिल्ली के परिवहन मंत्री गोपाल राय ने पड़ोसी राज्यों हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब व हिमाचल प्रदेश के परिवहन मंत्रियों और उत्तराखंड के राज्यपाल को पत्र लिखकर ऑड-ईवन योजना में सहयोग करने की अपील की है। राय ने बताया कि ऑड-ईवन पार्ट-2 के असर की मॉनिटरिंग के लिए डीपीसीसी (दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी) वायु के प्रदूषण स्तर की माप करेगी। इस दौरान 119 स्थानों पर विशेष रूप से पीएम-2.5 और पीएम-10 प्रदूषण की माप की जाएगी। 74 स्थानों पर लाइट स्केटरिंग बेस्ट टेक्नोलॉजी की मदद से वायु प्रदूषण की माप की जाएगी। यह माप एक निश्चित समय और निश्चित स्थान पर रविवार के दिन को छोड़कर प्रत्येक दिन किया जाएगा। यह माप रैंडम नमूने के माध्यम से एक छोटे समयान्तराल पर होगा, जिसका लक्ष्य वायु की गुणवत्ता की जांच करना होगा। जिन 74 स्थानों पर वायु प्रदूषण की माप होगी उनमें से 21 स्थान दिल्ली की 7 सीमाओं पर होंगे। वायु की गुणवत्ता की जांच के लिए पहला नमूना सीमा से 1 से 2 किमी. अन्दर, दूसरा सीमा पर और तीसरा संबंधित राज्य में सीमा से 1 से 2 किमी. अंदर से लिया जाएगा। 20 आवासीय स्थानों पर वायु की जांच दो बार 6 से 14 अप्रैल के बीच तथा दो बार ऑड-ईवन पार्ट-2 के दौरान की जाएगी। 15 औद्योगिक स्थानों पर भी इसी प्रकार जांच की जाएगी। परिवहन मंत्री ने बताया कि इन प्रदूषण में वाहनों के योगदान की जांच के लिए पहला नमूना 10 स्थानों पर सड़क के बीच से और दूसरा सड़क से 100-150 मीटर दूर से लिया जाएगा। यह नमूना भी दो बार 6 से 14 अप्रैल के बीच तथा दो बार ऑड-ईवन पार्ट-2 के दौरान लिया जाएगा। ऑड-ईवन के इन्फोर्समेंट की कमान संभालेंगे ये 400 पूर्व सैनिक परिवहन मंत्री गोपाल राय ने ऑड-ईवन योजना के लिए इन्फोर्समेंट विभाग में शामिल हुए 400 पूर्व सैनिकों की दिल्ली सचिवालय के बाहर हुई परेड का मुआयना किया। इस बार पुलिस और एसडीएम की जगह इन्फोर्समेंट विभाग की कमान पूर्व सैनिक संभालेंगे। राय ने बताया कि परिवहन विभाग ने इन 400 सदस्यों की 120 इन्फोर्समेंट टीमें बनाई गईं हैं। इन टीमों का मोबाइल टीम के रूप में इस्तेमाल होगा। मई में ऑड-ईवन का प्रयोग करने का भाजपा ने दिया सुझाव दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने दिल्ली से ऑड-ईवन प्रयोग की अवधि 15 से 30 अप्रैल के स्थान पर 15 से 30 मई, 2016 करने का आग्रह किया है। उपाध्याय ने कहा कि खोखले विज्ञापनों को छोड़कर सरकार के पास इस संबंध में ठोस योजना नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पिछले प्रयोग से यह अनुभव किया गया था कि इससे प्रदूषण स्तर में कोई खास कमी नहीं आई फिर भी यह सरकार ऐसा प्रयोग फिर से करना चाहती है तो इसे जनता की मूलभूत समस्याओं का समाधान करना चाहिए। करीब 25 फीसदी बच्चे निजी गाड़ियों से स्कूल आते-जाते हैं और सरकार के पास इन गाड़ियों को चलाने को लेकर कोई योजना नहीं है तो इन बच्चों के माता-पिता उन्हें किस प्रकार स्कूल पहुंचाएंगे और वापस लाएंगे। इसी प्रकार अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में अनेक कॉलेज और स्कूली प्रतियोगी परीक्षाएं होने वाली हैं। इसलिए दिल्ली सरकार को चाहिए कि वह अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में यह प्रयोग करने के स्थान पर मई के दूसरे पखवाड़े में करे तब अधिकांश शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे।

  • ओपिनियन खत्म, जनता बोली जल्द लागू हो ऑड-इवन फॉर्मूला
    Last Updated: February 08 2016, 04:29 AM

    नई दिल्ली. प्रदूषण की रोकथाम के लिए ऑड-इवन फॉर्मूला को जल्द ही एक बार फिर से लागू किया जा सकता है। फॉर्मूला को लागू करने के लिए दिल्ली के लगभग सभी विधानसभा में विधायकों ने जनसभा के माध्यम से जनता से सुझाव लिया। अधिकांश जनसभा में जनता जल्द से जल्द ऑड-इवन फॉर्मूला को लागू करने का सुझाव दिया है। खुद उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्विट करके जानकारी दी है कि जनता ने आगामी 15 फरवरी से ऑड-इवन फाॅर्मूला को लागू करने का सुझाव दिया है। अब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बुधवार, 10 फरवरी को इसके भविष्य को लेकर घोषणा करेंगे। बता दें कि ऑड-इवन फॉर्मूला को लागू करने के लिए दिल्ली सरकार बड़े पैमाने पर लोगों से बातचीत कर रही है। इस बाबत मिस कॉल, ऑनलाइन फार्म, एसएमएस के अलावा दिल्ली के प्रत्येक वार्ड (280) में जनसभा का भी आयोजन किया जा रहा है। शनिवार से शुरू जनसभा के जरिए जनप्रतिनिधियों ने दिल्लीवालों से ऑड-इवन फॉर्मूला के बारे में सुझाव एवं उनकी राय पूछी। इन जनसभाओं में उपस्थित अधिकांश लोगों ने इसे फिर से लागू करने का सुझाव दिया। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के वालंटियर्स ने गलियों, विभिन्न इलाकों में जाकर लोगों से फार्म भरवाया। इस बार हो सकती है सख्ती : माना जा रहा है कि इस बार दिल्ली सरकार फॉर्मूले में कुछ बदलाव करके इसे सख्त बना सकती है। पिछले बार की अपेक्षा इस बार इसका दायरा फैल सकता है। अमूमन पर्यावरण विशेषज्ञों का भी मानना है कि आधा-अधूरा नियम लागू करने से पर्यावरण में ज्यादा सुधार नहीं होगा। इसके लिए अन्य विकल्पों पर भी फोकस करने की जरूरत है।

  • प्रदूषण कम करने को पड़ोसी राज्यों केंद्र से दिल्ली सरकार ने मांगी मदद
    Last Updated: January 24 2016, 05:19 AM

    नई दिल्ली. साल के पहले पखवाड़े में ऑड-इवन की सफलता और उसके बाद प्रदूषण स्तर में दोबारा बढ़ोतरी के बाद दिल्ली सरकार ने इस पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार व पड़ोसी राज्यों से भी मदद की गुहार लगाई है। दिल्ली के परिवहन मंत्री गोपाल राय ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को खत लिखा है कि वे ईस्टर्न व वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के काम को जल्द से जल्द पूरा कराएं। उन्होंने हाल में ऑड-इवन लागू होने पर दिल्ली के केंद्रीय हिस्से में प्रदूषण कम करने में जरूर सफलता मिली, लेकिन सीमावर्ती इलाकों में अपेक्षित नतीजे नहीं मिले। बॉर्डर के इलाकों में प्रदूषण का स्तर कम नहीं हुआ। राय ने उत्तर प्रदेश व हरियाणा की सरकारों को भी खत लिखा है कि जब तक दोनों एक्सप्रेस-वे तैयार नहीं हो जाते तब तक वे इन वाहनों को अपनी सीमाओं के अंदर आने वाले वैकल्पिक रास्तों से जाने का प्रावधान करें। सीमा पर किसी ट्रक के आने के बाद उसे लौटाने का मतलब है कि भीषण जाम की स्थिति पैदा करना। लेकिन हरियाणा व उत्तर प्रदेश सरकार मदद करना चाहें तो गाड़ियां दिल्ली नहीं आ रही हैं तो उन्हें साइड रूट से गुजरने का मौका दे सकते हैं। परिवहन मंत्री ने केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु को भी दिल्ली की रिंग रेल व्यवस्था को दुरुस्त करने और आधुनिकीकरण करने की मांग की है। इस संबंध में सुरेश प्रभु से पिछले साल दिसंबर में अपनी मुलाकात का जिक्र करते हुए राय ने कहा कि एक समय रिंग रेल दिल्ली की सबसे बड़ी ड्रीम योजना थी। इसका बहुत बड़ा बुनियादी ढांचा है। उसके 22 स्टेशन है और वह केंद्रीय दिल्ली के प्रमुख इलाकों को जोड़ते हैं। हमारा अपना अनुभव है कि एक तो रिंग रेल की समयसारिणी और दूसरा स्टेशनों की कनेक्टिविटी बहुत खराब है। हमने रेल मंत्री से वायदा किया है कि वे रिंग रेल व्यवस्था को पुनर्जीवित करें। दिल्ली सरकार हर सवारी की लास्ट माइल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करेगा। उन्होंने कहा कि अभी हम मेट्रो के फेस-4 की बात कर रहे हैं लेकिन उसे आने में अभी तीन से चार साल लगेंगे तब तक रिंग रेल एक अच्छा साधन बन सकता है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ऑड-ईवन नहीं होगा कैंसल, पूरे शहर को करना चाहिए को-ऑपरेट
    Last Updated: January 14 2016, 16:13 PM

    नई दिल्ली. ऑड-ईवन फॉर्मूले पर सवाल खड़े करने वाले पिटीशनर को सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट फॉर्मूले पर सुनवाई के लिए तो तैयार हो गया है, लेकिन जल्द सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। जानिए, कोर्ट ने पिटिशन को क्यों बताया पब्लिसिटी स्टंट... - चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा, लोग पॉल्यूशन से मर रहे हैं और आप इस स्कीम को चैलेंज कर रहे हैं। - यहां तक कि खराब हालात के चलते सुप्रीम कोर्ट के जज भी कार पूलिंग कर रहे हैं। - पिटीशनर की अपील पब्लिसिटी स्टंट लगती है। उसका मकसद न्यूजपेपर में अपना नाम छपवाना है। - दिल्ली की हवा साफ करने के लिए सरकार ही नहीं, बल्कि हम सब को मिलकर इसका समर्थन करना होगा। - अगर कोई कमी होगी तो कोर्ट जरूर सरकार को ऑर्डर जारी करेगा। लेकिन पिटीशन पर जल्द सुनवाई की जरूरत नहीं है। - दिल्ली में इस फॉर्मूले के इस्तेमाल पर रोक नहीं लगाई जाएगी। क्या अपील की थी पिटीशनर ने? - पिटीशन में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। - इसमें कहा गया है कि ये योजना अनकॉन्स्टिटयूशनल है। - इससे लोगों के राइट्स का वॉयलेशन तो होता है। साथ ही, लोगों को परेशानियों का सामना भी करना पड़ रहा है। - ये भी कहा गया है कि अगर डीजल कार से पॉल्यूशन हो रहा है तो पेट्रोल कार पर पाबंदी क्यों? चीफ जस्टिस भी करते हैं कार पूलिंग - बता दें कि चीफ जस्टिस पहले भी केजरीवाल सरकार के इस फॉर्मूले को सपोर्ट कर चुके हैं। - वे खुद जस्टिस सीकरी के साथ कार पूल कर रहे हैं। - इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के कई जज भी कार पूलिंग कर रहे हैं। आगे की स्लाइड में देखें फोटो...

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