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  • जानें उस ऑपरेशन को जिससे भारत ने PAK में घुस आतंकियों का किया खात्मा
    Last Updated: September 29 2016, 16:26 PM

    जोधपुर। उड़ी हमले के 10 दिन बाद इंडियन आर्मी ने आखिरकार हर भारतीय की इच्छा पूरी कर ही दी। भारत ने पहली बार लाइन ऑफ कंट्रोल पार की और पाक के कब्जे वाले कश्मीर में घुसकर आतंकियों के लॉन्च पैड्स को तबाह कर दिया। इनको तबाह करने की मांग सालों से उठ रही थी। सर्जिकल कमांडो स्ट्राइक में अब तक कुल 38 अातंकी मारे जाने की खबर है। ये आंकड़ा और भी ज्यादा हो सकता है। भारत के हिस्से वाले POK के 2 KM अंदर 7 आतंकी कैम्प्स को भारतीय सेना के जाबाज कमांडो ने तबाह कर दिया है। पाकिस्तान के दो सैनिक मारे गए हैं। गुरुवार दोपहर जब सर्जीकल आपरेशन की खबर जैसे ही मीडिया पर आई तो देशवासियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। सभी के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिरकार क्या होता है सर्जिकल स्ट्राइक। सेना की तरफ से अपने किसी लक्ष्य पर सौ फीसदी सटीक हमला बोल दुश्मन को संभलने का मौका प्रदान किए बगैर उसे ढेर कर देती है। आगे की स्लाइड्स में जानें- कैसे होता है सर्जिकल स्ट्राइक...

  • भारत की 9 स्पेशल कमांडो फोर्स, पलक झपकते ही दुश्मन का कर देती हैं सफाया
    Last Updated: September 30 2016, 16:20 PM

    इंटरनेशनल डेस्क. उड़ी हमले के बाद लाइन ऑफ कंट्रोल पर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है। डीजीएमओ के बयान के मुताबिक, एलओसी पर कुछ आतंकियों के मौजूद होने की जानकारी मिली थी। उनका मकसद भारत में घुसपैठ कर आतंकी हमलों को अंजाम देना था। इसके बाद भारतीय सेना ने कल रात वहां सर्जिकल स्ट्राइक की। कहा जा रहा है कि एक घंटे से भी कम वक्त में सेना ने वहां 38 आतंकी मार गिराए। सेना के ऐसे स्पेशल ऑपरेशंस में आमतौर पर भारत की स्पेशल फोर्सेज काम करती हैं। स्पेशल फोर्सेज में कमांडोज की भर्ती से लेकर ट्रेनिंग तक सभी कुछ बहुत सख्त होता है। हाईटेक हथियारों से लैस ये कमांडो रात के अंधेरे में भी दुश्मनों को पहचान उनका खात्मा करने के लिए ट्रेंड होते हैं। मार्कोस, गरुड़, कोबरा जैसी इन फोर्सेस के कमांडोज की गिनती दुनिया के बेस्ट कमांडोज में होती है।आगे की स्लाइड्स में जानें इन 9 स्पेशल कमांडो फोर्सेज के बारे में... <a href='http://www.bhaskar.com/news-campaign/surgical-strike/?dhpsurgicalstrike'>सर्जिकल स्ट्राइक का महा-कवरेज, सारी खबरें पढ़ें एक जगह</a>

  • श्रीश्री ने भक्तों को दिया आशीर्वाद, गूंज उठा...जय गुरुदेव...जय गुरुदेव...
    Last Updated: March 02 2017, 13:00 PM

    भोपाल। संस्था आर्ट ऑफ लिविंग के बैनर तले मंगलवार को टीटी नगर दशहरा मैदान में आयोजित फागोत्सव में धर्म, अध्यात्म व संस्कृति के रंग बिखरे। उत्सव में शामिल संत श्रीश्री रविशंकर महाराज ने भक्ति और आस्था के आनंद को योग और ध्यान से जोड़ते हुए लोगों को स्वस्थ रहने के गुर भी सिखाए। पढ़ें पूरी खबर... नशा मुक्ति के दिशा में करेंगे काम अपने अमृत वचनों में उन्होंने कहा कि मप्र का सौभाग्य है कि पुण्य सलिला का उद्गम स्थल इसी प्रदेश में है। राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई नर्मदा सेवा यात्रा की सराहना करते हुए उन्होंने सभी को संकल्प दिलाया कि वे भी नर्मदा को प्रदूषण से मुक्त कराने आगे आकर हाथ बटाएंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने श्रीश्री महाराज को आश्वस्त किया कि वे प्रदेश को नशा मुक्त बनाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब नर्मदा तट से पांच-पांच किमी दूर तक शराब दुकान नहीं खुलेगी। नशाबंदी कानून से नहीं वे लोगों को कन्वेंस कर कराना चाहते हैं। सीएम के बारे में कहा... आध्यात्मिक गुरु ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण ही परमेश्वर की पूजा है। इस कड़ी में नर्मदा सेवा यात्रा प्रशंसनीय है। सबको इससे जुड़ना चाहिए। आदि शंकराचार्य को नर्मदा किनारे गुरु मिले थे। समाज को सहेजने का जैसा काम आदि शंकराचार्य ने वर्षों पहले किया था वैसा ही मुख्यमंत्री चौहान आधुनिक समय में कर रहे हैं। राजनीति में रहते हुए संतों जैसे काम करना अपने आप में अनूठा है। नर्मदा तटों से पांच किमी दूर तक शराब दुकानें बंद कराएंगे: शिवराज मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु श्रीश्री पूरी दुनिया को जीने की कला सिखा रहे हैं। वे अपने वचनों व रचनात्मक कार्यों से लोगों को शांति का संदेश दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि संतों के आशीर्वाद और नर्मदा सेवा यात्रा के माध्यम से सरकार प्रदेश के उद्धार व विकास में जुटीं है। नर्मदा के तटों पर शराब की दुकानें बंद कर दी जाएंगी। नशाबंदी सिर्फ कानून बनाकर लागू नहीं हो सकती। लोगों को समझाकर बंद कराना ज्यादा अच्छा है। वे नशे की अन्य वस्तुओं के खिलाफ भी कार्ययोजना बनाएंगे। कार्यक्रम में वृंदावन के वेदाचार्य पुंडरीक महाराज, कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन, मंत्री विश्वास सारंग और बड़ी संख्या में साधक उपस्थित थे। ...मामा की कमी दूर की संत श्रीश्री ने कहा कि राजनीति में काका, बाबा, बहनजी, अम्मा आदि सभी हैं, कमी मामा की थी, जिसे शिवराज ने पूरा कर दिया। वे मामा का रिश्ता निभा रहे हैं। ऐसे व्यक्ति ही आनंद मंत्रालय बनाने की पहल कर सकते हैं। उन्होंने लोगों को तनाव मुक्त करने के लिए इस विभाग का गठन किया, जो सराहनीय है। नशामुक्ति के लिए समय निकालें श्रीश्री के दर्शन करने पहुंचे लोगों से मैदान खचाखच भरा था। फाग-गीत और नृत्य के बाद उन्होंने लोगों से ध्यान व योग कराकर स्वस्थ रहने के टिप्स भी दिए। उन्होंने साधकों से आह्वान किया कि वे नशा मुक्त समाज बनाने के लिए एक घंटा निकालें। गांवों में जाएं और लोगों को नशे से दूर रहने के लिए समझाएं। आगे की स्लाइड्स पर देखें तस्वीरें...

  • रोशनी से जगमगाते भोपाल मेले में रोजाना पहुंच रहे हैं 50 हजार से ज्यादा लोग
    Last Updated: January 30 2017, 11:14 AM

    भोपाल। टीटी नगर दशहरा मैदान में आयोजित भोपाल उत्सव मेला शाम होते ही बहुरंगी छठा बिखेरने लगता है। मेला समिति ने 26वें वर्ष में मेले में खास विद्युत सजावट की है, जो लोगों को भा रही है। मेला अंतिम चरण में है। शनिवार व रविवार को यहां पहुंचने वाली भीड़ देखते ही बनती है। गणतंत्र दिवस पर तो मेले में पहुंचने वालों की संख्या 80 हजार को पार कर गई थी। लगातार बढ़ रही भीड़ को देखते हुए अवकाश के दिनों में मेला दोपहर 12 बजे से शुरू करना पड़ रहा है। मेले में रोज 50 हजार से ज्यादा लोग पहुंच रहे हैं।

  • पटना में हुए तीन हादसे में गई 75 लोगों की जानें, लेकिन नहीं हो पायी किसी पर कोई कार्रवाई
    Last Updated: January 17 2017, 11:13 AM

    पटना. राजधानी में हुए नाव हादसे की जांच अब दो सदस्यीय टीम करेगी। सरकार की ओर से इससे पहले भी पर्व के अवसर पर हुए हादसे के लिए टीम गठित की गयी थी। लेकिन, अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जबकि कमेटी ने अपनी रिपोर्ट कई माह पहले ही सौंप दी थी। पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना... - बिहार में इससे पहले पर्व पर हादसे हो चुके हैं। - पहली घटना 19 नवंबर 2012 में छठ घाट पर हुई थी। - घाट पर हुए इस भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो गयी थी। - 03 अक्तूबर 2014 में पटना में रावण दहन के बाद भगदड़ मच गयी थी। - इस भगदड़ में 33 लोगों की मौत हो गयी थी। - इन दोनों मामले की जांच तत्कालीन नीतीश सरकार ने दी थी। - लेकिन इसपर अभी तक क्या कार्रवाई हुई इसका जवाब सरकार के पास नहीं है। ये थे तब अफसर -छठ हादसे के लिए तब पटना जिला प्रशासन को जिम्मेवार बताया गया था। -हादसे के लिए पहली नजर में दोषी पाए गए डीएम फिलहाल दूसरे कैडर में हैं। - तत्कालीन एसपी कुंदन कृष्णा फिलहाल सरकार के महत्वपूर्ण विभाग के आईजी हैं। - इसी प्रकार दशहरा हादसे के लिए जिम्मेवार डीएम और एसएसपी फिलहाल महत्वपूर्ण पदों पर हैं। - तत्कालीन पटना के एसएसपी मनु महराज अभी भी पटना के एसएसपी के पद पर हैं। - तत्कालीन डीएम मनीष वर्मा फिलहाल सीएम के साथ हैं। लालू ने कहा- दूध की रखवाली का जिम्मा बिल्ली को नहीं दें - मकर संक्रांति के दौरान प्रशासनिक लापरवाही से 25 लोगों की मौत हो गई। - इस दुर्घटना में शुरुआती दौर से पटना जिला प्रशासन कठघरे में है। - इसके बाद टीम में पटना के डीएम संजय अग्रवाल को भी रखा गया। - लेकिन, महागठबंधन के नेता लालू प्रसाद यादव हस्तक्षेप के बाद डीएम को जांच कमेटी से बाहर का रस्ता दिखाया गया। - लालू प्रसाद ने इसपर नीतीश कुमार से कहा कि दूध की रखवाली का जिम्मा बिल्ली को नहीं दें। - अब इस मामले की जांच पटना सेंट्रल रेंज के डीआईजी शालीन और आपदा प्रबंधन के सचिव प्रत्यय अमृत्य को दी गयी। - लेकिन, जांच की रिपोर्ट कब तक देना है, इसपर अभी तक कोई स्पष्ट निर्देश जांच टीम को नहीं दी गयी है। - पहले इस जांच की जिम्मेवाली 3 लोगों को दी गयी थी। घटना के दो घंटे बाद मिली सीएम को सूचना - सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि हमें घटना के दो घंटे बाद सूचना मिली। - दियारा में ऐसी कोई घटना हो रही है, इसकी भी हमें सूचना नहीं थी? - अखबार में कोई विज्ञापन आ रहे हैं इस बात पर मेरी नजर नहीं गयी। -लेकिन पूरे मामले की जांच की जायेगी, जो लोग दोषी होंगे उनपर कार्रवाई होगी। आगे की स्लाइड्स में देखें कुछ और तस्वीरें...

  • झलक पाने को बेताब भीड़, आते ही हजारों ठिठुरते हाथों से बजने लगी तालियां
    Last Updated: January 15 2017, 11:40 AM

    कोटा. शहर के दशहरा मैदान में हजारों लोगों की उमड़ी भी आधात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर की एक झलक पाने के लिए बैचेन थी। शनिवार की शाम को हर किसी इंतजार था उन्हें देखने और सुनने का। छह बजे जैसे ही श्रीश्री मंच पर पहुंचे तो ठंड में सिकुड़ रहे हजारों हाथों की तालियों की गड़गड़ाहट गूंज पड़ी। कोई दुपट्टा तो कोई मुकुट लेकर पहुंचा... शाम 4 बजे से ही दशहरा मैदान में लोगों का आना शुरू हो गया था, 5 बजे तक आधे से ज्यादा मैदान भर चुका था। जैसे ही शाम 6 बजे श्रीश्री रविशंकर मंच पर पहुंचे जय गुरुदेव का जयघोष होने लगा। रैंप के दोनों तरफ लोग गुरुदेव की झलक पाने और उनसे मुखातिब होने के लिए लालायित थे। कोई उनके लिए मुकुट लेकर आया था तो कोई दुपट्टा। 6.39 बजे जैसे ही गुरुदेव ने माइक संभाला तो सर्दी में ठिठुर रहे हाथ खुले और तालियां बजने लगीं। भारत में देवी-देवता को जगाते और सुलाते हैं। जब हम विदेशों में जाते हैं लोग इसका लाजिक पूछते हैं। ये गलत नहीं हैं इसका लॉजिक है कि जड़त्व से पहले मनुष्यत्व जागता है और मनुष्य जागता तो है तो देवत्व जागता है। ये उत्सव है। जीवन को भी उत्सव बनाओ। ये साधना, सेवा और सत्संग से ही संभव है। जब जीवन को उत्सव बनाओगे तो उमंगता आएगी। जब भी हमें परेशानी आती है तो उससे हम उबर जाते हैं, लेकिन भविष्य को लेकर चिंता करते रहते हैं। इससे मुक्ति के लिए ज्ञान की शरण में आना पड़ेगा आस्था और श्रद्धा हमारे भीतर ही है। आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर ने ये बात शनिवार को दशहरे मैदान में आयोजित उमंग कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि अहंकार का वजन इंसान को ऊपर उठने नहीं देता है। ये दोनों हमारे पास होंगे तो हम कभी पतंग नहीं बन सकते हैं। फिर हम पत्थर बन जाएंगे और पत्थर पर लोग पैर रखकर आगे बढ़ जाते हैं। जीवन को विशाल दृष्टिकोण से देखोगे तो आगे बढ़ोगे। छात्रों की आत्महत्या का कारण आत्मबल में कमी छात्रों द्वारा आत्महत्या करने का बड़ा कारण उनके आत्मबल में कमी होना है। बच्चों के आत्मबल को बढ़ाने के लिए आर्ट ऑफ लिविंग के स्प्रेडिंग स्माइल कैंपेन के तहत कई काम किए जा रहे हैं। राजस्थान तो वीरों और शूरवीरों की धरती है। बच्चाें का आत्मबल बढ़ाने के लिए ही रविवार को बच्चों से बात की जाएगी। यह बात श्रीश्री ने कार्यक्रम से पहले पत्रकारों से कही। मकर संक्रांति देती तीन संदेश -तिल बताता है कि मैं सबसे छोटा होकर भी बांधने का काम करता हूं। इसलिए जीवन में लोगों को बांधने का काम करो। -गन्ना बताता है कि मधुर रहे और मजबूत भी रहे। अक्सर जो लोग मधुर होते हैं वो कमजोर हो जाते हैं। इसलिए गन्ने की तरह बनो मधुरता के साथ मजबूती। -चावल- दाल इस दिन चावल-दाल की खिचड़ी बांटी जाती है। जिसका अर्थ है नई फसल आई है। उसे बांटो और उत्सव मनाओ। सवाल-जवाब : स्प्रिचुअल शॉपिंग नहीं करें, सत्य की ओर चलना ही आध्यात्म Q: आध्यात्म का सही अर्थ क्या है। क्या गुरु का होना जरूरी है? श्रीश्री: सत्य की ओर चलना ही आध्यात्म है। आत्मीयता और अपनापन आध्यात्म है। गुरु के माध्यम से एनर्जी से कनेक्ट होते हैं। Q: वासुधैव कुटुम्बकम की बात कर रहे हैं, लेकिन घरों को नहीं बचा पा रहे? श्रीश्री: विशालता अगर हमारे मन में हो, तो परिवार क्यों टूटेंगे। एक दूसरे का सम्मान नहीं करते, इसीलिए परिवार टूट रहे हैं। Q: जिंदगी का मकसद क्या पैसे कमाना रह गया है? श्रीश्री: सिर्फ पैसा कमाने वाले दुख पाते हैं। मर जाते हैं और उनके मरने क बाद घर वाले पैसों के लिए लड़ते हैं। कोर्ट में कई ऐसे मामले चल रहे हैं। Q: बच्चे पढ़ाई की जगह कंप्यूटर और मोबाइल में लगे रहते हैं? श्रीश्री: अब तो पढ़ाई भी कंप्यूटर पर हाे रही है। रोज दो घंटे मोबाइल बंद रखे या फिर एक समय निश्चित कर लें कि इस समय से पहले वह मोबाइल पर मैसेज चेक नहीं करेंगे। हमें टेक्नोलॉजी का गुलाम नहीं हाेना है। Q: शिक्षण संस्थानों का चयन कैसे करें ? श्रीश्री: संस्कारों के लिए शिक्षक संस्थानों के साथ परिवार की भी बड़ी जिम्मेदारी है। घर के संस्कार ही स्कूलों में काम आएंगे। Q: छात्र विदेशों में नौकरियां के लिए जा रहे हैं। ऐसे में देश प्रेम कम नहीं हो जाएगा ? श्रीश्री: नहीं होगा। विदेश में जाएंगे और वहां सीखेंगे। देश का नाम करेंगे। हमे पूरे विश्व को अपना मानना चाहिए। Q: एक बार गुरु दक्षिणा देने के बाद क्या गुरु बदलना चाहिए? श्रीश्री: गुरु शिक्षक को बदलता है। सभी गुरु शिष्य की प्रगति चाहते हैं। पर स्प्रिचुअल शॉपिंग नहीं करनी चाहिए। दो दिन यहां गए-दो दिन वहां गए। ऐसा नहीं होना चाहिए। Q: समृद्धि और वैराग्य एक दूसरे के विरोधी है? श्रीश्री: नहीं-बिलकुल नहीं। भारत एक समय अपनी आध्यात्म के साथ साथ समृद्धि लिए भी जाना जाता था। यहां बैठे हर युवा को रोजगार मिले। यूथ क्रिएट वेल्थ। भास्कर खास श्रीश्री ने बताया खुशनुमा जिंदगी जीने का तरीका; इन उदाहरणों से समझें- उमंग से भरपूर है हमारा कोटा शहर 5 दिन अलग-अलग जगहों पर जाएं, सीखने को मिलेगा -कैदियों के साथ पहला दिन बिताओ। पता चल जाएगा कि अपराधियों में मनुष्यत्व होता है। - मेंटल हॉस्पिटल में दूसरा दिन बिताआे। वहां जाने के बाद समाज में कोई गाली भी देगा तो आपको असर नहीं पड़ेगा। - किसान के साथ तीसरा दिन बिताने पर पता चल जाएगा कि अन्न कितनी मेहनत से उगाया जाता है। इसके बाद आप खान बर्बाद नहीं करोगे। - स्कूल टीचर के साथ चौथा दिन बिताने पर आप सहनशीलता सीखेंगे। टीचर बार-बार मैथ्स के कई ही बार बच्चों को समझता है। - हॉस्पिटल में पांचवां दिन बिताने से समझ में आ जाएगा कि जिंदगी क्षणभंगुर है। इसके बाद आप जिंदगी से और भी प्यार करने लगेंगे। हम सीख सकते हैं ये तीन बातें... श्रीश्री ने आध्यात्म के बेसिक कॉसेप्ट को कार्यक्रम में क्लियर कर दिया। सबसे बड़ी लर्निंग यह रही है कि व्यक्ति को समाज के लिए काम आना चाहिए। पांच दिन अलग-अलग लोगों से साथ बिताएंगे तो जिंदगी का फलसफा समझ में आ जाएगा। -प्रो. एनपी कौशिक, वीसी, आरटीयू बच्चे अगर बाहर जाकर नौकरी करना चाहते हैं तो उनको करने दो। इस बात की उमंग बच्चों में होती है कि वह बाहर जाकर नाम कमाए। बच्चों की सफलता में कोई अवरोध नहीं होना चाहिए। यह बात भी ठीक है बाहर जाकर देशप्रेम कम हो जाता है।-डॉ. सीएस सुशील, पूर्व अधीक्षक, नया अस्पताल तिल के समान कुछ नहीं समझे और गन्ने की मिठास की तरह मीठे और उसकी बनावट के अनुसार मजबूत रहे। ऐसा ही जीवन में अपनाने की कोशिश करेंगे। -संजय फतेहपुरिया, कारोबारी -2 घंटे 8 मिनट श्रद्धालुओं के सामने रहे श्रीश्री आगे की स्लाइड में पल-पल बदलती श्रीश्री की भावभंगिमाएं और सम्मोहित सी भीड़ के फोटोज...

  • दशहरा मेले की नहीं नगर निगम काॅलोनी की जमीन नीलाम की जाएगी : महापौर
    Last Updated: January 13 2017, 05:28 AM

    कोटा। दशहरा मेला की जमीन की नीलामी के संबंध में महापौर महेश विजय ने स्पष्ट किया है कि मेले की भूमि से कोई छेड़छाड़ नहीं की जा रही है। जिस भूमि की नीलामी का प्रस्ताव है वह दशहरा मेले का हिस्सा नहीं है। इस संबंध में महापौर ने गुरुवार को उपमहापौर सुनीता व्यास की उपस्थित में उपायुक्त राजेंद्र सिंह चारण व राजेश डागा, मुख्य लेखाधिकारी टीपी मीणा, वरिष्ठ नगर नियोजक अनिल माथुर, संयुक्त विधि परामर्शी विनोद अग्रवाल, एईएन एक्यू कुरैशी से विस्तृत चर्चा की। इसके बाद कहा कि दशहरा मेला लगभग 18 हेक्टेयर क्षेत्र में भरवाया जाता है। निगम ने प्रगति मैदान की तर्ज पर क्षेत्र को विकसित करने के लिए यहां वर्षों से हो रहे अतिक्रमणों को हटाया। इसके बाद अब मेला भरवाने के लिए उपलब्ध भूमि बढ़कर करीब 35 हेक्टेयर से अधिक हो गई है। दूसरी ओर जिस भूमि की नीलामी की योजना है वहां निगम कर्मचारियों की आशापुरा कॉलोनी है जो कभी दशहरा मेला का हिस्सा नहीं रही। काॅलोनी के मकान जर्जर हो चुके हैं। कर्मचारी इसकी मरम्मत की मांग कर रहे थे। ऐसे में किशोरपुरा धार का अखाड़ा के पास स्थित निगम की जगह पर कर्मचारियों की नई कॉलोनी प्रस्तावित कर दी गई है। इसके नक्शे तैयार हो चुके हैं तथा निर्माण कार्य प्रारंभ करने की प्रक्रिया की जा रही है। नई कॉलोनी बनने के बाद ये काॅलोनी बेकार हो जाएगी। इसी भूमि को आवासीय भूखंडों के लिए नीलाम करने का प्रस्ताव है। भूमि की नीलामी से प्राप्त आय का उपयोग प्रगति मैदान के विकास में किया जाएगा। महापौर ने कहा बोर्ड पूर्ण संकल्पित है कि दशहरा मेला की भूमि से एक इंच की भी कमी नहीं होगी। बल्कि पूर्व की तुलना में मेला के लिए अधिक भूमि उपलब्ध करवाई जाएगी।

  • इस ऐतिहासिक मैदान पर होटल-शोरूम निर्माण को मंजूरी, सरकार बेचेगी जमीन
    Last Updated: January 11 2017, 06:09 AM

    जयपुर/कोटा. दशहरा मैदान का ऐतिहासिक स्वरूप बिगड़ने वाला है। राज्य सरकार ने इसके एक बड़े हिस्से पर मास्टर प्लान को दरकिनार करके होटल, शोरूम, दुकानें और आवासीय निर्माण की मंजूरी दे दी है। भूखंडों की नीलामी होगी। कोटा के मास्टर प्लान में दशहरा मैदान को खुला क्षेत्र रखने व किसी भी प्रकार के निर्माण की मनाही के बावजूद राज्य स्तरीय लैंडयूज कमेटी की पिछले दिनों हुई बैठक में 28,263 वर्ग मीटर जमीन का भू-उपयोग बदल दिया गया। सरकार के इस फैसले को ऐतिहासिक दशहरा मैदान के स्वरूप के लिए घातक माना जा रहा है। शहर के बीचोंबीच खुले क्षेत्र के तौर पर घोषित इस जमीन पर भविष्य में निर्माण का रास्ता खुल गया है। इसके लिए नगर निगम के कमिश्नर शिवप्रसाद एम नकाते ने सरकार को दशहरा मैदान की जमीन का उपयोग बदलने का प्रस्ताव भेजा था। इसके लिए तर्क दिया गया है कि दशहरा मैदान के विकास के लिए पैसे की जरूरत है। मास्टर प्लान 2023 में दशहरा मैदान को भविष्य में इसे खुला क्षेत्र रखने का प्रावधान किया हुआ है। मास्टर प्लान 2031 के ड्राफ्ट में भी दशहरा मेला के लिए आरक्षित बताते हुए यहां किसी भी निर्माण को प्रतिबंधित किया हुआ है। मौजूदा और भविष्य के मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में यह साफ कहा गया है कि कोटा की बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए इस खुले क्षेत्र की आवश्यकता और अधिक हो गई है। ऐसे में दशहरा मैदान पर किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं दी जाए और इस पर हो रहे अतिक्रमणों को हटाया जाए। 7 नवंबर को बैठक में राजपालसिंह ने हस्ताक्षर से किया मना, कृपलानी ने दी मंजूरी राज्य स्तरीय भू-उपयोग परिवर्तन समिति की 7 नवंबर 2016 को हुई बैठक में यह फैसला हुआ था। लेकिन, तत्कालीन नगरीय विकास मंत्री राजपालसिंह इससे संतुष्ट नहीं थे, इसलिए साइन नहीं किए। समिति का फैसला तभी लागू होता है जब नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री फाइल पर साइन करे और बैठक के मिनिट्स जारी हों। मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद इस पद पर आए श्रीचंद कृपलानी ने पिछले दिनों इस फैसले का अनुमोदन कर दिया। इसके बाद 3 जनवरी को बैठक के मिनिट्स भी जारी हो गए। स्वायत्त शासन विभाग के प्रमुख सचिव मनजीत सिंह ने बताया कि कोटा के मास्टर प्लान 2031 का अभी ड्राफ्ट बना है, इसे मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में इस जमीन का कोई भी उपयोग हो सकता है। वैसे भी हम तो 15 प्रतिशत से भी कम जमीन को कवर करेंगे। बाकी तो खुला ही रहेगा। दशहरा मैदान पर बनने वाला प्रोजेक्ट इंटरनेशनल स्तर का होगा। निगम आयुक्त शिवप्रसाद एम नकाते ने बताया कि दशहरा मैदान को पीपीपी मोड पर विकसित किया जाएगा। इसमें होटल, व्यावसायिक व आवासीय के लिए भूखण्ड आरक्षित किए गए हैं। इनका ही भू उपयोग परिवर्तन करवाया गया है। इन्हें नीलाम किया जाएगा, इससे मिलने वाली राशि मैदान के विकास की योजना पर खर्च होगी।

  • भेल दशहरा मैदान पर 25 दिन रहेगा समाज-संस्कृति का संगम
    Last Updated: December 03 2016, 06:40 AM

    भोपाल. महाराजा भोज की स्मृति में भेल दशहरा मैदान में 25 दिवसीय भोजपाल महोत्सव 24 नवंबर से शुरू हो चुका है। इस महोत्सव में मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक महत्व के साथ मौज- मस्ती, धूम धड़ाके का भी संगम है। मेले में एशिया के सबसे बड़े झूले से लेकर दुनिया का सबसे तेज भागने वाला झूला दर्शकों को लुभा रहा है। किले के आकार का प्रवेश द्वार, एशिया का सबसे तेज चलने वाला झूला स्वींग ईट 15 फीट ऊंची महाराजा भोज की प्रतिमा 25 दिन तक लगातार चलेगा महोत्सव 40 छोटे-बड़े झूले हैं इस मेले में 03 प्रदर्शनियाें को प्रस्तुत किया गया 200 दुकानंे लगी हैं मेले में 02 सीसीटीवी से लैस पार्किंग 07 डी शो मेले का मुख्य आर्कषण

  • निगम कर्मियों को राहत, पहले मकान बनेंगे फिर टूटेंगी पुरानी कॉलोनियां
    Last Updated: November 22 2016, 06:29 AM

    कोटा। दशहरा मैदान के जीर्णोद्धार की योजना में इसके आसपास बनी नगर निगम की जिन दो कॉलोनियों को तोड़ा जाना है, उन्हें अब दूसरे फेज में तोड़ा जाएगा। निगम अब पहले नए मकान बनाएगा। इसके लिए दशहरे मैदान से लगे हुए एसटीपी के पास की उस जमीन को चिह्नित किया गया है, जो कुछ समय पूर्व अतिक्रमण से मुक्त करवाई गई थी। योजना के मुताबिक अब यहां 100 से अधिक नए फ्लैट बनाए जाएंगे, जबकि तोड़े जाने वाले मकान करीब 50 हैं। नगर निगम ने दशहरे मेले के जीर्णोद्धार का जो नक्शा बनाया है, उसमें निगम कर्मचारियों की आशापुरा माताजी मंदिर के निकट स्थित कॉॅलोनी तथा निगम प्रशासनिक भवन के पीछे स्थित फायर कॉॅलोनी के मकानों की जमीन को भी शामिल किया गया है। इसके लिए इन मकानों को तोड़ा जाना है। इस बात का पता चलते ही नगर निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजेश मित्तल, मुकेश बोहरा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने आयुक्त शिवप्रसाद एम नकाते से मुलाकात कर बताया था। एकाएक मकान तोड़ने से यहां रहने वाले निगम कर्मचारियों के सामने संकट आ जाएगा। इसलिए पहले मकान बनाए जाएं और फिर इन्हें तोड़ा जाए। इस पर निगम ने योजना बनाई है कि कॉलोनियों को तोड़ने का काम सेकंड फेज में किया जाएगा। उससे पहले किशोरपुरा सामुदायिक भवन के सामने तथा एसटीपी के बीच की जगह पर 3 मल्टीस्टोरी बनाई जाएंगी। जिसमें 100 से अधिक फ्लैट बनाए जाएंगे। हर स्तर के कर्मचारियों के लिए बनेंगे नई कॉलोनी में मकान नई कॉलोनी में अलग-अलग टाइप के मकान बनाए जाएंगे। जिसमें एलडीसी, यूडीसी व अन्य कर्मचारियों के अलावा जेईएन, एईएन व एक्सईएन तक के लिए मकान बनाए जाएंगे। मौजूदा कॉलोनियां काफी पुरानी भी हो चुकी हैं और इनमें काफी मरम्मत की जरूरत है। ऐसे में कर्मचारियों व अधिकारियों को नए मकान भी मिल जाएंगे और दशहरे मैदान के जीर्णोद्धार की योजना भी साकार हो जाएगी।

  • कॉमेडियन और एक्टर राजपाल यादव अजमेर में, होगा बॉलीवुड का धमाल कार्यक्रम
    Last Updated: October 17 2016, 06:25 AM

    मदनगंज-किशनगढ़. दशहरा मेला कमेटी की ओर से सोमवार रात 9 बजे रविंद्र रंगमंच पर बॉलीवुड का धमाल कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसमें बॉलीवुड के फेमस कॉमेडियन राजपाल यादव आकर्षण का केंद्र होंगे। विनोद पाटनी, रामेश्वर सोलंकी ने बताया कि कार्यक्रम में राजपाल यादव के साथ सारेगामा सिंगर राहुल जोशी, स्टैंड अप कॉमेडियन हिरेन त्रिवेदी, हैरतअंगेज कारनामे करने वाले विशाल देसाई अपनी प्रस्तुति देंगे। दिल्ली से आ रहे आर्केस्ट्रा पार्टी व सोलो कलाकार, हास्य कलाकार व गायक अपने कार्यक्रमों की प्रस्तुति से लोगों को मनोरंजन करेंगे। कमेटी के सत्य स्वरूप अग्रवाल व मोहित ने बताया कि बॉलीवुड का धमाल कार्यक्रम में मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष युवा कांग्रेस एडवोकेट राकेश शर्मा, सभापति सीताराम साहू, भाजयुमो अध्यक्ष राजू शर्मा, गंगासिंह शेखावत, सुरेंद्र सिंह महणोत, एनसी भुरट, एसएल मीणा, रामदेव गुर्जर तथा रतन यादव होंगे।

  • ये है शिवाजी की 42 KG की तलवार, इस खास दिन दांत से उठाने की है परंपरा
    Last Updated: October 15 2016, 10:45 AM

    पुणे: महाराष्ट्र के जेजुरी खंडोबा मंदिर में हल्दी उत्सव का आयोजन किया गया। इस उत्सव में हल्दी से रंग खेलने और अपने दांत से 42 किलो की तलवार उठाने की विशेष परंपरा है। इस जगह शिवाजी महाराज अपने पिता से मिलते थे और युद्ध की रणनीति बनाते थे। डेढ़ लाख लोग हुए शामिल.. - उत्सव के दौरान हल्दी से पूरा मंदिर सोने की तरह चमक उठा। जेजुरी का यह उत्सव पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। - विदेशों से लोग इस उत्सव में शामिल होने के लिए जेजुरी आते हैं। - इस उत्सव को मनाने के लिए मंदिर परिसर में डेढ़ लाख से ज्यादा लोग जमा हुए थे। - सभी ने एक दूसरे पर हल्दी फेंक कर यह उत्सव मनाया। उत्सव से पहले खंडोबा भगवान की शोभायात्रा निकाली गई। - खंडोबा को भगवान शिव का अवतार माना जाता है। यह मंदिर एक छोटी सी पहाड़ी पर है। यहां पहुंचने के लिए भक्तों को करीब 200 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। - चढ़ाई करते समय मंदिर के प्रांगण में स्थित दीपमाला का मनमोहक दृश्य देखने को मिलता है। यहां पिता से मिलते थे शिवाजी महाराज - जेजुरी ऐतिहासिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है। शिवाजी महाराज अक्सर इसी मंदिर में अपने पिता शहाजी राजे भोसले से अकेले में मुलाकात करते थे। - यहीं दोनों मिलकर मुगलों के विरुद्ध युद्ध की रणनीति तैयार करते थे। जेजुरी मध्यप्रदेश के होल्कर राजवंश के कुलदेवता माने जाते हैं। - शिवाजी महाराज के सम्मान में आज भी उनकी 42 किलो की तलवार को दांत से उठाने की परंपरा यहां जारी है। - हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र, मार्गशीर्ष, पौष और माघ मास में यहां विशेष यात्रा का आयोजन किया जाता है। - इस यात्रा के दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए यहां आते हैं। मुख्य द्वार पर पीतल का कछुआ - मंदिर को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया गया है। पहला भाग मंडप कहलाता है, जहां श्रद्धालु एकत्रित होकर पूजा करते हैं। - दूसरा भाग गर्भगृह है जहां खंडोबा की प्रतिमा विद्यमान है। हेमड़ा पंथी शैली में बने इस मंदिर में 28 फीट आकार का पीतल से बना कछुआ भी है। - इसे एक वाद्ययंत्र के रूप में भजन, कीर्तन और नृत्य के लिए उपयोग किया जाता था। कैसे पहुंचे जेजुरी? - पुणे से इस स्थान की दूरी तकरीबन 40 किलोमीटर है। यहां सड़क और रेल मार्ग से पहुंचा जा सकता है। पुणे से हर घंटे पर जेजुरी के लिए स्टेट ट्रांसपोर्ट की बस है। आगे की स्लाइड्स में देखिए हल्दी उत्सव की कुछ और PHOTOS ....

  • दशहरा मेले में प्रदर्शनी का उद्घाटन, मॉडल बता रहा कि कहां पर क्या बनेगा
    Last Updated: October 15 2016, 06:00 AM

    कोटा। दशहरे मेले में शुक्रवार को नगर निगम और रेलवे की प्रदर्शनी का उद्घाटन हुआ। नगर निगम की प्रदर्शनी में दशहरा मैदान के विकास का मॉडल रखा गया। इस मॉडल के माध्यम से जनता को बताया जाएगा कि दशहरा मैदान किस तरह का बनेगा। उसमें किस स्थान पर क्या सुविधा होगी, बाजार कैसे लगेंगे, मनोरंजन के लिए झूला ग्राउंड, फूड कोर्ट, रंगमंच किस तरह के होंगे। सामान्य दिनों में आम जनता की सुविधा के लिए सिटी पार्क व सामुदायिक भवन कहां बनेंगे, ये बताया गया है। प्रदर्शनी का उद्घाटन महापौर महेश विजय व आयुक्त शिवप्रसाद एम नकाते ने किया। रेलवे की प्रदर्शनी स्थल पर ही मिलेंगे टिकट, होगा रिजर्वेशन मेले में रेलवे द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी में इस बार भी टिकट के लिए काउंटर खोले गए हैं। यहां सामान्य टिकट व रिजर्वेशन टिकट मिलेंगे। इसके अलावा हाईस्पीड ट्रेन टैल्गो, श्रीनगर व जलंधरी स्टेशन के बीच बनी टनल का मॉडल रख गया है। यहां इटारसी से डीजल इंजन भी मंगवाकर रखा गया है। प्रदर्शनी का उद्घाटन डीआरएम सीमा कुमार ने किया। (मेले की खबरें पढ़ें पेज|8 पर)

  • JNU ने दिए आदेश, मोदी के चेहरे वाला रावण जलाए जाने के मामले की होगी जांच
    Last Updated: October 13 2016, 15:36 PM

    नई दिल्ली. दशहरे के दिन जेएनयू में जलाए गए पीएम,अमित शाह और रामदेव के पुतले जलाने के मामले के जांच के आदेश यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने दे दिए हैं। मंगलवार रात को जिन पुतलों को जलाया गया उनमें से एक पर जेएनयू के वाइस चांसलर जगदेश कुमार की तस्वीर भी लगाई गई थी। रावण के मुख्य सिर पर लगाया गया नरेंद्र मोदी का फोटो... -दशहरे पर जेएनयू कैंपस में जो रावण जलाया गया, उसके मुख्य सिर की जगह नरेंद्र मोदी का फोटो लगाया गया। रावण के 10 सिर माने जाते हैं। -यहां बाकी नौ सिरों की जगह अमित शाह, नाथूराम गोडसे, रामदेव, महंत आदित्यनाथ, आसाराम और साध्वी प्राची आदि के चेहरे लगाए गए थे। -स्टूडेंट्स ने कार्ड पर स्लोगन लिखे- बुराई पर सत्य की जीत होकर रहेगी। इस दौरान मोदी और बाकी चेहरों के खिलाफ नारेबाजी भी हुई। मुस्लिम स्टूडेंट्स को निशाना बनाने का आरोप - पीएम और बाकी नेताओं का पुतला मंगलवार रात को जेएनयू कैंपस में सरस्वती ढाबा के पास जलाया गया। - जेएनयू में NSUI के प्रेसिडेंट कैंडिडेट रह चुके सनी धीमान ने bhaskar.com से कहा, हमने जुमलों, झूठ और फरेब के रावण का पुतला फूंका है। हम बीजेपी की तरह नहीं जो मनमोहन सिंह को गालियां देते थे, पीएम पद का सम्मान करते हैं इसलिए उन्हें मोदीजी बुलाते हैं। - लेकिन मोदी लगातार झूठ बोल रहे हैं। कहते हैं कि दलितों को मत मारो, मुझे मारो। क्या देश में कानून का राज नहीं है? - धीमान ने कहा, वीसी के जरिए जेएनयू में मुस्लिम स्टूडेंट्स को निशाना बनाया जा रहा है। हमने विरोध के लिए विजयादशमी का दिन चुना, क्योंकि इसी दिन बाबा साहब अंबेडकर ने नागपुर में बौद्ध धर्म अपनाया था। - एनसयूआई के मेंबर मसूद ने कहा, हां, हमने ऐसा किया, ये मोदी सरकार से हमारा असंतोष दिखाता है। हमारी मांग है कि सरकार से बुराई को बाहर किया जाए और एक ऐसा सिस्टम लाया जाए जो प्रो-स्टूडेंट और प्रो-पीपल हो। ABVP ने किया विरोध, SFI ने सपोर्ट - बीजेपी की स्टूडेंट विंग के मेंबर सौरभ शर्मा ने कहा, एनएययूआई ओछी हरकतों पर उतर आई है। वो बजूद बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्हें 1984 दंगों के आरोपियों का पुतला फूंकना चाहिए था। - एसएफआई के प्रेसिडेंट वलीउल्ला खां कादरी ने कहा, हम पुतला फूंकने का सपोर्ट करते हैं। लोकतंत्र में सबको विरोध दर्ज कराने हक है। पीएम वादों को पूरा नहीं कर पाए। लोग उनसे नाराज हैं। इस साल विवादों में रहा है जेएनयू? - फरवरी में जेएनयू के लेफ्ट स्टूडेंट्स के ग्रुप्स ने संसद हमले के दोषी अफजल गुरु और जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के को-फाउंडर मकबूल भट की याद में एक प्रोग्राम ऑर्गनाइज किया था। - इसे कल्चरल इवेंट का नाम दिया गया था। इस दौरान कुछ लोगों ने देश विरोधी नारेबाजी की। लेफ्ट-एबीवीपी स्टूडेंट्स के बीच झड़प हुई। - नारेबाजी का वीडियो सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस ने कुछ लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया था। अफजल की का भी यहां विरोध हुआ था। - जेएनयू स्टूडेंट लीडर कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्वान समेत कुछ लोगों को देशद्रोह के आरोप में अरेस्ट किया गया था। बाद में इन्हें कुछ शर्तों के साथ बेल मिल गई थी।

  • इस साल शेयरों की तुलना में सोना-चांदी ने दिया दोगुना रिटर्न, 28% से ज्यादा प्रॉफिट
    Last Updated: October 13 2016, 10:19 AM

    नई दिल्ली. इस साल इन्वेस्टर्स को रिटर्न देने के मामले में सोना-चांदी ने शेयरों से बाजी मारी है। अब तक सोना-चांदी ने 28% से ज्यादा रिटर्न दिया है। जबकि शेयरों ने 8% से भी कम प्रॉफिट दिया है। साल की शुरुआत में सेंसेक्स में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शेयरों के कमजोर प्रदर्शन के बीच लोगों ने सोने को सुरक्षित जरिया मानकर इसमें इन्वेस्ट किया। 19 महीने में कितना फिसला सेंसेक्स... 19 महीने में 6.47% तक फिसला सेंसेक्स - मार्च 2015 से इस साल 10 अक्टूबर तक सेंसेक्स में 1900 से ज्यादा अंकों की गिरावट दर्ज की गई है। - 4 मार्च 2015 को सेंसेक्स अब तक की रिकॉर्ड ऊंचाई पर था। इन्वेस्ट 31 दिसंबर, 2015 10 अक्टूबर, 2016 रिटर्न सोना 25,390 रुपए/10 ग्राम 30,410 रुपए/10 ग्राम 19.77% चांदी 33,300 रुपए/किलो 42,750 रुपए/किलो 28.37% सेंसेक्स 26,117.54 28,082.34 7.52% सोना दिवाली तक हो सकता है 2000 रु. तक सस्ता - इधर, त्योहार के मौसम में सोना लगातार सस्ता होता जा रहा है। सोने का भाव तीन साल के पुराने लेवल पर पहुंच चुका है। - मंगलवार को सोना 31 हजार से 31500 के बीच था। 2013 में दशहरे के दौरान भी इसकी कीमतें 31000 रुपए थी। - एसोचैम ने मंगलवार को रिपोर्ट जारी कर बताया था कि दिवाली तक जेवराती सोना 2000 रुपए प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो सकता है। - एसोचैम के मुताबिक, इस साल सोना 25% तक महंगा हुआ, लेकिन पिछले एक हफ्ते में इसके दाम डेढ़ से 2 हजार रुपए तक नीचे आ गए। - चार दिन में कीमतें 1010 रुपए तक कम हो गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक हफ्ते में मार्केट में सोने की बिक्री 45 से 50% तक गिरी है। (यहां क्लिक कर पढ़ें : <a href='http://www.bhaskar.com/news/UT-DEL-HMU-NEW-gold-price-on-this-diwali-festival-news-hindi-5437237-PHO.html'>3 साल पुरानी कीमतों पर पहुंचा सोना</a>)

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