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कैराना पर संतों ने सौंपी रि‍पोर्ट, गवर्नर ने पूछा- हुकुम सिंह की लिस्‍ट के फर्जी होने का आधार क्‍या है

कैराना पर संतों ने सौंपी रि‍पोर्ट, गवर्नर ने पूछा- हुकुम सिंह की लिस्‍ट के फर्जी होने का आधार क्‍या है

Last Updated: June 24 2016, 16:33 PM

लखनऊ. कैराना में हिन्दुओं के पलायन का मामला उजागर होने के बाद सपा की तरफ से मौके पर भेजी गई संतों की टीम ने शुक्रवार को राजभवन पहुंच कर गवर्नर राम नाईक को रिपोर्ट सौंप दी है। संतों की टीम का नेतृत्व कल्कि पीठाधीश्वर के आचार्य प्रमोद कृष्णम कर रहे थे। राजभवन में मुलाकात के दौरान कैराना के हालात पर संतों से राम नाईक ने चर्चा की। राम नाईक ने संतों से पूछा- हुकुम सिंह की लिस्ट फर्जी बताने का आधार क्या है& -मुलाकात के दौरान संतों ने बताया कि कैराना से हिन्दुओं के पलायन की बात निराधार है। -वहां पर साम्प्रदायिकता फैलाने की कोशिश की गई। एक सांसद के तौर पर हुकुम सिंह को जनता और प्रशासन के बीच कड़ी का काम करना चाहिए था। -लेकिन हुकुम सिंह ने अपने दायित्व का पालन न कर साम्प्रदायिक विभाजन का काम किया है। -संतों की बात सुनकर गवर्नर ने सांसद हुकुम सिंह की लिस्ट को फर्जी करार दिए जाने का आधार पूछा। -जिस पर संतों ने वहां के स्थानीय नागरिकों से एकत्र किए गए तथ्यों को बताया। गवर्नर ने संतों से पूछा, क्या जनप्रतिनिधि से भी मिले -मुलाकात के दौरान राम नाईक ने संतों से जानने की कोशिश की कि क्या रिपोर्ट में विभिन्न राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों का पक्ष जानने की कोशिश की गई है। -इस पर प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि उन्होंने किसी भी जनप्रतिनिधिमंडल से न तो भेंट की और न ही उनसे इस मामले में कोई जानकारी प्राप्त की है। रिपोर्ट में ये है जिक्र -संतों की रिपोर्ट में कहा गया है कि कैराना में धार्मिक अधार पर पलायन की बात निराधार है। -एक सांसद के तौर पर बीजेपी के सांसद हुकुम सिंह को जनता और प्रशासन के बीच कड़ी के तौर पर काम करना चाहिए था। -उन्होंने अपने दायित्व का पालन न करते हुए उल्टे साम्प्रदायिक विभाजन कराने का षड्यंत्र किया। -यहीं नहीं, भड़काऊ बयान के साथ झूठे सूची जारी किया गया। -इस आरोप में हुकुम सिंह को तत्काल बर्खास्त करते हुए दंडात्मक कार्रवाई की जाए। -बीजेपी द्वारा 2017 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उसे हवा दिया गया। -हिन्दुओ को गौ, गंगा श्रीराम जन्मभूमि आदि हिन्दुत्व के मुद्दे से भटकाने का प्रयास किया गया। -कैराना में कोई सांप्रदायिक मामला नहीं हैं, बल्कि रंगदारी है जिस पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। -आचार्य प्रमोद कृष्णम के नेतृत्व में हिन्दू महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि, महामंडलेश्वर स्वामी देवेन्द्रानंद गिरि, स्वामी कल्याण देव और स्वामी चिन्मयानंद ने गवर्नर से मुलाकात की। आगे की स्लाइड्स में देखिए अन्य फोटोज...

कैराना पर सरकार को क्‍लीन चिट, संतों ने कहा- रिपोर्ट पर कार्रवाई करे CM

कैराना पर सरकार को क्‍लीन चिट, संतों ने कहा- रिपोर्ट पर कार्रवाई करे CM

Last Updated: June 23 2016, 20:02 PM

लखनऊ. बीजेपी सांसद हुकुम सिंह द्वारा एक विशेष वर्ग की वजह से कैराना में हिन्दुओं के पलायन का मामला उठाने के बाद सपा की ओर से भेजी गई संतों की टीम ने गुरुवार को अखिलेश यादव को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।रिपोर्ट में संतों ने सरकार को क्लीन चिट देते हुए पलायन की बात को निराधार बताते हुए प्रदेश में साम्प्रदायिकता फैलाने के जिम्मेदार बीजेपी सांसद के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। संतों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एक सांसद के तौर पर हुकुम सिंह को जनता और प्रशासन के बीच कड़ी का काम करना चाहिए था। लेकिन उन्होंने अपने दायित्व का पालन न कर साम्प्रदायिक विभाजन का काम किया है। 19 जून को संतों की टीम गई थी कैराना& -समाजवादी पार्टी के आग्रह पर कैराना मामले की जांच के लिए संतों की टीम 19 जून को कैराना पहुंची थी। -टीम में आचार्य प्रमोद कृष्णन, चक्रपाणि, स्वामी चिन्मयानंद, स्वामी नारायण गिरी और स्वामी कल्याण शामिल थे। -संतों की टीम ने वहां पर घर-घर जाकर लोगों से बातचीत भी की। रिपोर्ट में इसका है जिक्र -संतों की रिपोर्ट में कहा गया है कि कैराना में धार्मिक अधार पर पलायन की बात निराधार है। -एक सांसद के तौर पर बीजेपी के सांसद हुकुम सिंह को जनता और प्रशासन के बीच कड़ी के तौर पर काम करना चाहिए था। -उन्होंने अपने दायित्व का पालन न करते हुए उल्टे साम्प्रदायिक विभाजन कराने का षड्यंत्र किया और भड़काऊ बयान के साथ झूठे सूची जारी किया गया। -इस आरोप में हुकुम सिंह को तत्काल बर्खास्त करते हुए दंडात्मक कार्रवाई की जाए। -बीजेपी द्वारा 2017 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उसे हवा दिया गया और हिन्दुओं को गौ, गंगा श्रीराम जन्मभूमि आदि हिन्दूत्व के मुद्दे से भटकाने का प्रयास किया गया। -कैराना में कोई सांप्रदायिक मामला नहीं हैं, बल्कि रंगदारी है जिस पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। सीएम ने दिया आश्वासन -संतों ने अखिलेश यादव से मुलाकात कर उन्हें रिपोर्ट सौंप कर कार्रवाई की मांग रखी। -जिस पर सीएम ने उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया है।

जांच के लिए कैराना गई थी संतों की टीम, मिली जान से मारने की धमकी

जांच के लिए कैराना गई थी संतों की टीम, मिली जान से मारने की धमकी

Last Updated: June 25 2016, 12:02 PM

लखनऊ. कैराना में हिंदुओं के पलायन का मामला उजागर होने के बाद जांच के लिए सपा ने वहां संतों की टीम भेजी थी। टीम मेंबर्स को मर्डर की धमकी मिली है। हिंदू महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि ने बताया कि शुक्रवार शाम करीब 6 बजे किसी अज्ञात शख्स ने फोन कर जान से मारने की धमकी दी है। - चक्रपाणि ने बताया कि फोन करने वाले शख्स ने कहा कि आप लोगों ने कैराना की रिपोर्ट गलत दी है। इसलिए आप सभी को मार दिया जाएगा। - जिस संत के मोबाइल पर धमकी मिली है, सुरक्षा कारणों से उनके नाम का खुलासा नहीं किया गया। - अभी घटना के संदर्भ में पुलिस को तहरीर नहीं दी गई है। रिपोर्ट में क्या है - संतों की रिपोर्ट में कहा गया है कि कैराना में धार्मिक अधार पर पलायन की बात निराधार है। - सांसद के तौर पर बीजेपी के सांसद हुकुम सिंह को जनता और प्रशासन के बीच कड़ी के तौर पर काम करना चाहिए था। - उन्होंने अपने दायित्व का पालन नहीं किया और उल्टे सांप्रदायिक विभाजन कराने का षड्यंत्र रचा। भड़काऊ बयान के साथ झूठी सूची जारी की। - इस आरोप में हुकुम सिंह को तत्काल बर्खास्त करते हुए दंडात्मक कार्रवाई की जाए। - बीजेपी द्वारा 2017 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उसे हवा दी गई। - हिन्दुओं को गौ, गंगा, श्रीराम जन्मभूमि आदि हिन्दुत्व के मुद्दे से भटकाने का प्रयास किया गया। - कैराना में कोई सांप्रदायिक मामला नहीं है बल्कि रंगदारी है। उस पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। टीम में कौन-कौन संत थे - बता दें कि आचार्य प्रमोद कृष्णम के नेतृत्व में हिंदू महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि, महामंडलेश्वर स्वामी देवेन्द्रानन्द गिरि, स्वामी कल्याण देव व स्वामी चिन्मयानन्द जांच के लिए कैराना गए थे। - रिपोर्ट को शुक्रवार दोपहर में कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम के नेतृत्व में संतों ने राज्यपाल को सौंप दिया था। साथ ही कार्रवाई की मांग की थी जबकि गुरुवार को संतों ने सीएम को रिपोर्ट सौंपी थी। फोटो: स्वामी चक्रपाणि।

कांधला से पलायन का सच, जिंदा निकला सूची में दिखाया गया मृत शख्‍स

कांधला से पलायन का सच, जिंदा निकला सूची में दिखाया गया मृत शख्‍स

Last Updated: June 28 2016, 10:24 AM

शामली. कांधला से पलायन की प्रशासन की सत्यापन सूची पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन की सूची में जिस व्यक्ति को मृत बताया गया, वह जिंदा निकला और पलायन के बाद वह दिल्ली में बिजनेस कर रहा है। बता दें, बीजेपी सांसद हुकुम सिंह ने इससे पहले कैराना और कांधला से पलायन की सूची जारी की थी, जिस पर प्रशासन ने सवाल खड़ा कर सत्यापन रिपोर्ट तैयार की थी। इसके बाद प्रशासन ने खुद कांधला से पलायन की सत्यापन सूची जारी की थी। कांधला पहुंचा व्यापारी, कहा मैं जिदां हूं... - सत्यापन सूची में प्रशासन ने योगेंद्र सेठी नाम के व्यक्ति को क्रम संख्या 27 पर मृत दिखाया है। - सोमवार को दिल्ली से कांधला पहुंचे योगेंद्र सेठी ने खुद ही अपने जिंदा होने का सबूत दिया। - योगेंद्र सेठी दिल्ली से आकर पहले बीजेपी के कुछ कार्यकर्ताओं से मिला और उसके बाद वह कांधला थाने गया। - थाने पहुंच योगेंद्र ने अपने जिंदा होने की जानकारी पुलिस को दी। - योगेंद्र सेठी का कहना है कि वह इस मामले में डीएम से मिलकर जांच कर कार्रवाई की मांग करेगा। कांधला में 63 परिवारों के पलायन की दी थी सूची - कांधला से पलायन करने वाले 63 लोगों की सूची सांसद हुकुम सिंह ने 14 जून को जारी की थी। - सूची जारी करते हुए कहा गया था कि कांधला में भी कैराना जैसे हालात हैं। - यहां भी बदमाशों के खौफ के कारण परिवार पलायन कर रहे हैं। डीएम ने कराई थी जांच - कांधला की सूची सामने आने पर डीएम सुजीत कुमार के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीम ने सत्यापन का काम शुरू किया था। - सत्यापन का कार्य एसडीएम कैराना रामअवतार गुप्ता की देखरेख में हुआ। - सत्यापन के बाद डीएम सुजीत कुमार ने रिपोर्ट शासन को भेजते हुए कहा था कि पलायन बेहतर शिक्षा और रोजकार के कारण हुआ। - सत्यापन की सूची में शामिल चार लोग सतीश मित्तल कानूनगोयान, योगेन्द्र सेठी कानूनगोयान, सावन पंजाबी निवासी टीचर कांलोनी, संसार सिंह निवासी रामनगर को मृत बताया गया था। - लेकिन, प्रशासन द्वारा सत्यापान सूची में क्रम संख्या 27 पर जिस योगेंद्र सेठी को मृत बताया गया वह योगेंद्र सेठी जिंदा है। एक साल पहले किया था पलायन - कानूनगोयान निवासी योगेंद्र सेठी पुत्र मनोहर लाल सेठी का कहना है कि उसे समाचार पत्रों के माध्यम से पता लगा है कि प्रशासन ने उसे मृत दशार्या है। - योगेंद्र ने मीडिया को बताया कि करीब एक साल पहले वह कस्बे के बिगड़ते माहौल के कारण यहां से पलायन कर गया था। - इस समय वह दिल्ली में उत्तम नगर में अपने परिवार के साथ रह रहा है, और वहां कपड़े का कारोबार कर रहा है। - सत्यापन सूची को लेकर उठे सवाल पर एसडीएम रामअवतार का कहना है कि यह लापरवाही किस स्तर पर हुई इसकी जांच करायी जाएगी।

एमफिल, पीएचडी को लेकर UGC की नोटिफिकेशन पर JNUSU ने कराया रेफरेंडम

एमफिल, पीएचडी को लेकर UGC की नोटिफिकेशन पर JNUSU ने कराया रेफरेंडम

Last Updated: February 08 2017, 11:40 AM

नई दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन संघ (JNUSU) ने बुधवार को UGC की एक नोटिफिकेशन पर स्टूडेंट्स का नजरिया जानने के लिए रेफरेंडम किया। इस नोटिफिकेशन में M.Phil और Ph.D में एडमिशन के लिए वाइवा को मेजर क्राइटेरिया बनाया गया और इन सिलेबस में एडमिशन के लिए सीटें कम की गईं। दो फेज में हुई वोटिंग... -वोटिंग दो फेज में सुबह और शाम में हुई। -JNUSU जनरल सेक्रेट्री सतरूपा चक्रवर्ती ने कहा, वोटिंग के पहले फेज में करीब दो हजार स्टूडेंट्स ने वोट दिया। -UGC की पिछले साल पांच मई की नोटिफिकेशन के मुताबिक, एमफिल सिलेबस के लिए अप्लाई कर रहे उम्मीदवारों को पीजी में कम से कम 55 प्रतिशत मार्क्स लाने होंगे।

विवादों का रोड :  एलीवेटेड रोड पर कांग्रेस 15 से करवाएगी जनमत संग्रह

विवादों का रोड : एलीवेटेड रोड पर कांग्रेस 15 से करवाएगी जनमत संग्रह

Last Updated: December 01 2016, 05:27 AM

रोहतक. सहकारिता मंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट एलीवेटेड रोड को लेकर घमासान जारी है। विपक्ष में बैठे कांग्रेसी इसके विरोध में 15 से 21 दिसंबर तक जनमत संग्रह करेंगे। बुधवार को सोनीपत रोड स्थित होटल में प्रेसवार्ता कर रोहतक के पूर्व विधायक भारत भूषण बत्तरा ने कहा कि एलीवेटेड रोड बनने से व्यापार ठप हो जाएगा और शहर की सुंदरता बिगड़ेगी। इस प्रोजेक्ट को व्यापारियों व शहरवासियों को विश्वास में लिए बिना मंत्री की हठधर्मिता के बल पर स्वीकृत कराया गया, जिसे मंजूर नहीं किया जाएगा। अवैध ऑटो व कट बंद कराएं : बत्तरा ने कहा कि शहर को जाम फ्री करना है तो अवैध ऑटो व सड़कों के बीच बने अवैध कट बंद कराए जाएं और साथ ही सड़क किनारे से अतिक्रमण हटाया जाए। आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से व्यापारी पहले ही बर्बाद हैं और अगर एलीवेटेड रोड बना तो और चार वर्षों के लिए बर्बाद होंगे। उन्होंने 8 फरवरी 2016 को पुराना बस स्टैंड से अंबेडकर चौक के बीच सर्वे कराया। ओल्ड बस स्टैंड से 2594 वाहन चले, जिनमें से अंबेडकर चौक पर सिर्फ 217 ही पहुंचे। अंबेडकर चौक से 2190 वाहन चले और ओल्ड बस स्टैंड पर 139 ही पहुंचे। ऐसे में एलीवेटेड रोड का औचित्य ही नहीं बनता। अनियमित कॉलोनी के लोग कहां से देंगे विकास का पैसा : बत्तरा ने कहा कि सरकार ने अनियमित कॉलोनियों में विकास कार्य को लेकर वहां रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन बनाकर उनका एकाउंट खोलने की शर्त रखी है। इस खाते में विकास का पचास फीसदी पैसा जमा होगा, जिसके बाद नगर निगम के साथ इस खाते को जोड़कर विकास कार्य कराए जाएंगे। बत्तरा ने टिप्पणी कि आउटर स्थानों पर बनी अनियमित कॉलोनियों में आर्थिक कमजोर लोग रहते हैं। उन तक सुविधा पहुंचाने की जिम्मेदारी सरकार की होती है। वहीं बत्तरा ने बढ़ते अपराध पर कहा कि इस वर्ष स्नेचिंग की 99 वारदात हो चुकी हैं। काठमंडी और ऑटो मार्केट शिफ्टिंग पर नहीं हुआ काम बत्तरा ने कहा कांग्रेस सरकार में शहर में सात ओवरब्रिज प्रस्तावित थे, जिनमें से जरूरत के हिसाब से पांच बनाए गए। जनता के विरोध के चलते बजरंग भवन व सोनीपत रोड क्रासिंग पर प्रस्तावित ओवरब्रिज को टाल दिया गया। काठमंडी व ऑटो मार्केट शिफ्ट करने के लिए कांग्रेस सरकार में 18, 18ए, 21, 21ए सेक्टर बनाए गए, लेकिन आज तक भाजपा सरकार में इस तरफ कोई कदम नहीं बढ़ाया गया। तो पार्षद के 50 गज प्लाट को व्यवसायिक कर दें पूर्व विधायक बतरा ने पार्षद अनीता मिगलानी प्लाट विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। कहा कि 384 गज के प्लॉट में कार्यालय है, जहां मिगलानी जनसमस्याएं सुनती हैं। वहां कोई व्यवसायिक कार्य नहीं होता। अगर कार्यालय को व्यवसायिक मानना है तो 50 गज को व्यवसायिक कर दें। एलीवेटेड रोड पिलर पर बनेगा कारोबार नहीं होगा प्रभावित : ग्रोवर सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर ने कहा है कि कांग्रेस नेता एलीवेटेड रोड पर अब जनमत संग्रह कराने की बात कह रहे हैं, कांग्रेस शासन में जब शहर में फ्लाईओवर बनाए तब उन्हें जनमत संग्रह कराने की याद क्यों नहीं आई। हमारी सरकार फ्लाईओवर नहीं, पिलर पर एलीवेटेड रोड बनाएगी। इसमें एक भी दुकानदार की दुकान और कारोबार प्रभावित नहीं होगा। आगे की स्लाइड्स में देखें और फोटो

PM के विरोध में ये एक्ट्रेस, सपोर्ट न करने वालों को 'सेक्स एक्ट' का ऑफर

PM के विरोध में ये एक्ट्रेस, सपोर्ट न करने वालों को 'सेक्स एक्ट' का ऑफर

Last Updated: November 25 2016, 12:40 PM

इंटरनेशनल डेस्क. इटली में अगले महीने होने जा रहे जनमत-संग्रह को लेकर बवाल मचा हुआ है। कई लोग प्राइम मिनिस्टर मत्तेयो रेनजी के इस फैसले का विरोध भी कर रहे हैं। इसमें अब इटली की फेमस एक्ट्रेस पाओला सॉलिनो भी शामिल हो गई हैं। वहीं, पाओला ने तो जनमत-संग्रह में ना; करने वालों का समर्थन करने वालों के लिए सेक्स एक्ट परफॉर्म करने का ऑफर दे डाला है। संविधान में संशोधन के लिए होने जा रहा है जनमत-संग्रह... - इटली में संवैधानिक सुधार के मुद्दे पर आगामी 4 दिसंबर को जनमत-संग्रह होने जा रहा है। - इसमें तय होगा कि देश ही जनता संविधान में संशोधन चाहती है या नहीं। - प्राइम मिनिस्टर मत्तयो रेनजी द्वारा ही यह जनमत-संग्रह कराया जा रहा है। - इससे देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। पीएम रेनजी का विरोध भी हो रहा है। - विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा करके रेनजी ने अपना राजनीतिक करियर दांव पर लगा दिया है। - इस जनमत संग्रह का सीधा असर 2018 में होने वाले आम चुनावों पर पड़ेगा। पाओला नहीं चाहती जनमत-संग्रह - इस बारे में पाओला का कहना है कि देश में सबकुछ ठीक चल रहा है। - ऐसे में संविधान में बदलाव लाने की जरूरत ही क्यों पड़ रही है। - पाओला का कहना है कि ऐसा करके वर्तमान पार्टी अपनी पावर बढ़ाना चाहती है। - पाओला ने साफतौर पर प्राइम मिनिस्टर रेनजी पर निशाना साधते हुए कहा है कि वे अपनी डेमोक्रेटिक पार्टी की पावर बढ़ाने के लिए ही जनमत-संग्रह करवा रहे हैं। न्यूड फोटो के चलते सुर्खियों में रहती हैं पाओला - हॉलीवुड एक्ट्रेस पाओला के लिए चर्चा में रहना कोई नई बात नहीं है। - वे सोशल मीडिया में अक्सर अपनी न्यूड फोटोज शेयर करने के चलते सुर्खियों में रहती हैं। - पाओला इससे पहले भी कह चुकी हैं कि वे पब्लिकली सेक्स परफॉर्म करना चाहती हैं। - इससे पहले हॉलीवुड एक्ट्रेस और पॉप सिंगर मैडोना ने भी अमेरिकी लोगों से वादा किया था कि अगर हिलेरी क्लिंटन प्रेसिडेंट बनती हैं तो वे पब्लिकली सेक्स एक्ट परफॉर्म करेंगी। आगे की स्लाइड्स में देखें पाओला की कुछ फोटोज...

थाईलैंड की जनता ने लोकतंत्र को कहा ‘ना’, सैन्य शासन को ‘हां’

थाईलैंड की जनता ने लोकतंत्र को कहा ‘ना’, सैन्य शासन को ‘हां’

Last Updated: August 08 2016, 10:07 AM

बैंकॉक. थाईलैंड में जनता ने लोकतंत्र को नकारते हुए फौजी शासन को मंजूरी दे दी है। सेना द्वारा बनाए गए नए संविधान की मंजूरी को लेकर रविवार को पूरे देश में जनमत संग्रह हुआ। इसके पक्ष में 61.45 फीसदी वोट पड़े। सेना ने 2014 में सत्ता पर कब्जा करने के बाद पिछला संविधान रद्द कर दिया था। जनमत संग्रह के विरोध पर था प्रतिबंध... - जनमत संग्रह में दो सवाल पूछे गए थे। एक सवाल था, क्या आपको नए संविधान का मसौदा मंजूर है।; - दूसरा सवाल था, क्या निचले सदन के साथ सीनेट को भी प्रधानमंत्री के चयन में शामिल होने की इजाजत देनी चाहिए।; - जनमत संग्रह का विरोध करने पर प्रतिबंध लगाया गया था। - इसका विरोध करने के आरोप में करीब 50 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। - इन्हें 10 साल तक की जेल हो सकती है। विपक्षी दलों ने इसका बहिष्कार किया था। क्या है नए संविधान में - आम चुनाव में मतदान की ऐसी व्यवस्था की गई है कि निचले सदन में किसी भी एक राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिल सके। - संसद के उच्च सदन के सभी 250 सीटों के लिए सदस्यों को फौजी शासन मनोनीत करेगा। उनके लिए चुनाव नहीं होगा।

आजसू पार्टी स्थानीय नीति पर कराएगी जनमत संग्रह, तीन चरणों में होगा कार्यक्रम

आजसू पार्टी स्थानीय नीति पर कराएगी जनमत संग्रह, तीन चरणों में होगा कार्यक्रम

Last Updated: August 07 2016, 18:25 PM

फोटो: प्रेस कॉफ्रेंस करते आजसू सुप्रीमो सुदेश कुमार महतो। रांची। रघुवर सरकार द्वारा तय की गई स्थानीय नीति को जन भावना के विपरित करार देते हुए आजसू पार्टी अब जनमत संग्रह कराएगी। पोस्टकार्ड के माध्यम से वह लोगों का विचार आमंत्रित करके, उसे डाक द्वारा मुख्यमंत्री को भेजेगी। तीन चरणों में चलने वाले इस कार्यक्रम का शुभारंभ शहीद निर्मल महतो की शहादत दिवस 8 अगस्त से होगा। उक्त जानकारी आजसू पार्टी सुप्रीमो सुदेश कुमार महतो ने रविवार को जन की बात कार्यक्रम के लांचिग के बाद दी। उन्होंने बताया कि प्रथम चरण का कार्यक्रम 8 अगस्त से 14 अगस्त तक चलेगा तथा पूरा अभियान 15 नवंबर को संपन्न होगा। 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस पर दुमका में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित कर इसे शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 100 सेवा वाहन प्रदेश के 5 लाख लोगों के बीच जाएंगे। विभिन्न स्थानों पर शिविर लगाकर पोस्टकार्ड के माध्यम से लोगों का विचार जाना जाएगा। कुल 1 हजार पार्टी के स्वंयसेवक इस कार्य में जुटेंगे। जनभावना का अनादर कर कोई नीति-नियम नहीं बन सकता है सुदेश कुमार महतो ने कहा कि जनभावना का अनादर कर कोई नीति व नियम नहीं बन सकता है। हो सकता है कि भाजपा के लिए राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में इसका संसोधन मुश्किल हो, मगर झारखंड आंदोलन व इसके गठन के परिपेक्ष्य में वर्तमान नीति सही नही है। लोकतंत्र में कोई भी सरकार जनभावना को अनादर कर नहीं चल सकती है, आजसू यह मानती है कि यह नीति जनभावना के अनुरूप नहीं है, एक जिम्मेवार सहयोगी व जिम्मेवार झारखंडी राजनीति दल होने के नाते पार्टी इसमें संसोधन चााहती है। यही कारण है कि पूर्व में सीएम से मिलकर इसमें संसोधन की मांग की गई थी। मगर कोई पहल नहीं हुई। इसलिए पार्टी यह कदम उठाने जा रही है। उन्होंने अंतिम सर्वे रिकॉर्ड के आधार पर ही स्थानीय नीति संसोधन की मांग की। सीएनटी-एसटीपी एक्ट में संसोधन का लाभ एक खास व्यावयासिक वर्ग को होगा आजसू सुप्रीमो सुदेश कुमार महतो ने मुख्यमंत्री के नाम खुला पत्र जारी कर इसमें संसोधन को जरूरी बताया है। उन्होंने कहा कि अनुसूची जिले में शत प्रतिशत नौकरी स्थानीय के लिए आरक्षित हो गए। मगर झारखंड के 5 जिले ऐसे हैं जहां पिछड़ा वर्ग के लिए सरकारी नौकरियों में कोई आरक्षण नही है। उन्होंने सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संसोधन का भी विरोध करते हुए कहा कि इसका लाभ एक खास व्यवसायिक वर्ग को होगा। पूरे देश में यह आदिवासियों के विरूद्ध लिया गया एक बड़ा निर्णय है। इसे मान्य नहीं किया जा सकता है। उन्होंने पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग करते हुए कहा कि यह अब समय की मांग है। कानून अचड़न भी समाप्त हो चुकी है इसलिए आरक्षण का दायरा बढ़ सकता है। फोटो: कौशल आनंद।

संसद में बोले ज्योतिरादित्य सिंधिया- कश्मीर में जनमत संग्रह होना चाहिए

संसद में बोले ज्योतिरादित्य सिंधिया- कश्मीर में जनमत संग्रह होना चाहिए

Last Updated: July 23 2016, 10:16 AM

नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर में बीते 15 दिन से प्रदर्शन जारी है। इस बीच, कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लोकसभा में कहा कि कश्मीर में रायशुमारी (जनमत संग्रह) होना चाहिए। हालांकि, जब उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ तो बाद में सफाई देते हुए बोले, मैंने कभी नहीं कहा कि कश्मीर में रायशुमारी हो, मेरा मतलब सिर्फ बातचीत से था। बता दें कि आतंकी बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद घाटी में विरोध जारी है। बीजेपी-पीडीपी सरकार पर हमला बोला... - सिंधिया ने बुधवार को लोकसभा में कहा, आज कश्मीर में रायशुमारी की जरूरत है। - सिंधिया ने आरोप लगाया कि बीजेपी-पीडीपी सरकार ने भारत के मुकुट (जम्मू-कश्मीर) की बेइज्जती की है। - उन्होंने इस दौरान जम्मू-कश्मीर सरकार को भी जमकर कोसा। कहा कि घाटी में एडमिनिस्ट्रेशन बंट गया है। - सरकार कश्मीर के लोगों की हिफाजत करने की बजाय उन पर गोलियां चलवा रही है। उनके जख्म केवल मानवता से भरे जा सकते हैं। कहा- कश्मीर हर भारतीय के दिल का टुकड़ा - सिंधिया ने कहा, कश्मीर में शांति, विकास और भाईचारे का माहौल बनाए जाने की जरूरत है। - कश्मीर देश के हर नागरिक के दिल का टुकड़ा है। लेकिन आज सरकार इसकी बेइज्जती कर रही है। - उन्होंने कहा, यूपीए सरकार ने सबको साथ लेकर घाटी में अमन-चैन का माहौल बनाया था। आज कश्मीर जाएंगे राजनाथ सिंह - घाटी में हालात कुछ नॉर्मल होने के बाद होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह शनिवार को कश्मीर का दौरा करेंगे। - बता दें कि कश्मीर में कुछ दिन पहले आर्मी ने आतंक के पोस्टर ब्वॉय कहे जाने वाले बुरहान वानी का एनकाउंटर किया था। - इसके बाद से घाटी के दर्जनभर से ज्यादा जिलों में लोग सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन और सिक्युरिटी फोर्सेस पर पथराव कर रहे थे। - 15 दिन से कश्मीर के कई जिलों में कर्फ्यू लगा है। 5 दिन तक अखबारों के छापे जाने पर भी रोक लगाई गई थी। - इन प्रदर्शनों में अब तक 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। पुलिस और आर्मी के कई जवान भी गंभीर रूप से जख्मी हैं।

चीते की खाल जैसे शू कलेक्शन से चर्चित हैं ब्रिटेन की भावी प्रधानमंत्री थेरेसा

चीते की खाल जैसे शू कलेक्शन से चर्चित हैं ब्रिटेन की भावी प्रधानमंत्री थेरेसा

Last Updated: July 13 2016, 09:52 AM

थेरेसा मे (59) ब्रिटेन की नई प्रधानमंत्री होंगी। उनके नाम की घोषणा हो चुकी है। बुधवार सुबह डेविड कैमरन प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देंगे, जबकि शाम को थेरेसा शपथ लेंगी। जानिए ब्रिटेन की कद्दावर महिला नेता को- - मार्गरेट थेचर और डेविड कैमरन की तरह थेरेसा ने भी ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया है, लेकिन उन्होंने खुद को लो-प्रोफाइल बनाए रखा। सांसद बनने के पहले वे 1977-1983 के मध्य तक बैंक ऑफ इंग्लैंड के लिए काम करती थीं। 1997 में पहली बार वे सांसद बनीं। -थेरेसा मे की तुलना जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल से भी की जाती है, क्योंकि दोनों ही दृढ़ संकल्प वाली हैं। मर्केल के पिता भी चर्च से जुड़े थे और थेरेसा के पिता भी। दोनों महिला नेताओं को पहाड़ों की सैर पसंद है। -मार्गरेट थेचर के बाद थेरेसा दूसरी महिला प्रधानमंत्री होंगी। उनके करीबी कहते हैं कि थेरेसा महत्वाकांक्षी हैं, वे दूसरी मार्गरेट थेचर हो सकती हैं। थेरेसा के श्वसुर जॉन भी कहते थे कि उनकी बहू महत्वाकांक्षी है। -बेनजीर भुट्टो थेरेसा की सहेली रही हैं। बेनजीर ने ही ऑक्सफोर्ड में थेरेसा को फिलिप मे से मिलवाया था। ऑक्सफोर्ड के तीन साल बाद 1980 में दोनों ने शादी कर ली थी। -इस दंपती के परिवार में बच्चा नहीं है। इस बारे में थेरेसा ने एक इंटरव्यू में कहा था- इसके पीछे स्वास्थ्य से जुड़े कारण हैं। वे कहती है, आप हर समय परिवार की ओर देखते हैं और हमेशा ही पाते हैं कि कुछ तो ऐसा है, जो आपके पास नहीं है।; इस कारण दंपती को कई परेशानियों से जूझना पड़ा। फिलिप ज्यादा व्यथित हुए, लेकिन फिर परिवार मजबूत हुआ। थेरेसा फिलिप को द रॉक; भी कहती हैं। -थेरेसा को क्रिकेट देखना बहुत पसंद है और उनकी हॉबी में वॉकिंग और कुकिंग शामिल है। वे एक इंटरव्यू में कह चुकी हैं कि उनके घर में कुकिंग की 100 से अधिक पुस्तकें हैं। बीबीसी रेडियो को दिए अन्य इंटरव्यू में उन्होंने डान्सिंग क्वीन; गीत को पसंदीदा बताया है। -थेरेसा रोज सुबह जल्दी उठती हैं और हर मीटिंग में सबसे पहले पहुंचती हैं। उन्हें जानने वाले अफसर कहते हैं, मीटिंग में वे किसी की तुलना में पांच गुना ज्यादा जानकारी रखती हैं। -वे किसी भी मंच पर होती हैं, तो उनके सैंडल की फोटो क्लिक करने के लिए फोटोग्राफरों में भागदौड़ मचती हैं। उनके पास चीते की खाल जैसी प्रिंट वाली सैंडलों का कलेक्शन है, जिसे उनकी ड्रेस पहनने की समझ से जोड़ा जाता है। -थेरेसा निजी जीवन को ज्यादा महत्व देती हैं। वे दिखावे की राजनीति पसंद नहीं इसलिए चैनलों के दफ्तर भी नहीं जाती। वे संसद के रेस्तरां में भी नहीं जातीं। -यूरोपीय संघ को लेकर हुए जनमत संग्रह के दौरान थेरेसा मे ने खुद को प्रचार से दूर रखा, जबकि कैमरन आगे थे। लोगों को उनका यही अंदाज पसंद आया और वे प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन जुटाने में कामयाब रहीं। एक सदी बाद पहली बार कोई इतने लंबे समय तक ब्रिटेन का गृह मंत्री रहा - 2010 में कैमरन ने ही थेरेसा को गृह मंत्रालय सौंपा। तब से वे ही इस पद पर थीं और आज प्रधानमंत्री निवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट; में दाखिल होंगी। ब्रिटिश राजनीति में 1892 के बाद पहली बार इतने लंबे समय तक कोई गृह मंत्री पद पर रहा। - 2013 के मई में थेरेसा ने खुद बताया कि उन्हें टाइप-1 डाइबिटीज़ है, लेकिन इसका उनके कार्य पर असर नहीं पड़ता। वे दिन में दो बार इंसुलिन लेती हैं और कहती हैं कि कार्य के दौरान थकान भी कार्य का हिस्सा होती है, इसलिए कार्य से बचना नहीं चाहिए। - 2013 में थेरेसा ने अवैध अप्रवासियों तक संदेश पहुंचाने के लिए लंदन में दो जगहों पर घर जाओ या गिरफ्तारी का सामना करो; प्रचार वाली वैन चलवाई थी। भाषा के गलत इस्तेमाल के कारण थेरेसा की आलोचना हुई और उन्हें वैन वापस बुलानी पड़ी थी। - 2014 की गर्मियों में पासपोर्ट कार्य में देरी के कारण कई लोगों को छुटि्टयां व बिज़नेस यात्रा रद्द करनी पड़ी थी। इस्तीफे की बात होने पर थेरेसा ने संसद में माफी मांगते हुए पासपोर्ट व्यवस्था दुरुस्त करने की बात कही थी।

#Brexit: UK में विपक्ष की आधी लीडरशिप का इस्तीफा, EU का साथ चाहता है लंदन

#Brexit: UK में विपक्ष की आधी लीडरशिप का इस्तीफा, EU का साथ चाहता है लंदन

Last Updated: June 27 2016, 08:00 AM

लंदन. यूरोपियन यूनियन (ईयू) से यूके के बाहर निकलने के फैसले से ब्रिटेन की पॉलिटिक्स में हड़कंप मच गया है। सरकार चला रही कंजरवेटिव पार्टी में पीएम डेविड कैमरन की जगह लेने के लिए मशक्कत शुरू हो चुकी है। वहीं, अपोजिशन लेबर पार्टी की शैडो कैबिनेट में शामिल आधे से ज्यादा नेताओं ने रविवार को इस्तीफे दे दिए। दूसरी तरफ, दोबारा रेफरेंडम के लिए चल रहे ऑनलाइन पिटीशन कैम्पेन पर साइन करने वालों की संख्या 48 घंटे में 31 लाख पार कर गई। इस पर अब मंगलवार को हाउस ऑफ कॉमन्स की पिटीशंस सलेक्ट कमेटी विचार करेगी। वहीं, लंदन को ब्रिटेन से आजाद करने के लिए ऑनलाइन रेफरेंडम पिटीशन पर डेढ़ लाख लोग साइन कर चुके हैं। अपोजिशन लीडर्स ने क्यों दिया इस्तीफा... - अपोजिशन लेबर पार्टी भी ईयू में बने रहने के फेवर में थी। लेकिन उलट फैसला आने के बाद शेडो कैबिनेट के इस्तीफा देने वाले मंत्रियों ने अपने नेता जेरेमी कोर्बिन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। - उनका कहना है कि कोर्बिन जनता के सामने मजबूती से पक्ष नहीं रख सके। दो सांसदों ने तो उनके खिलाफ नो कॉन्फिडेंस मोशन पेश कर दिया। - कुछ सांसदों ने कोर्बिन से इस्तीफा मांगा है। - शैडो कैबिनेट के विदेश मंत्री हिलेरी बैन ने बताया, मैंने कोर्बिन से कहा कि मुझे आपकी लीडरशिप में भरोसा नहीं रहा, तो उन्होंने मुझे बर्खास्त कर दिया। - जबकि, कोर्बिन ने कहा, बैन कैबिनेट के अन्य मेंबर्स को इस्तीफे के लिए भड़का रहे थे। उन्होंने इस्तीफा देने या नो कॉन्फिडेंस मोशन का सामना करने से भी मना कर दिया। फ्रांस ईयू से निकलने के लिए फ्रेग्जिट करवाएगा? - प्रेसिडेंट फ्रांस्वा ओलांद ने इससे इनकार किया है, लेकिन 2017 में होने वाले चुनावों के कारण वे दबाव में हैं। - अपोजिशन लीडर मेरिन ले पें चाहती हैं कि ब्रिटेन जैसा रेफरेंडम फ्रांस में भी हो। फिलहाल ले पें बेहद पॉपुलर हैं। - फ्रांस यूरोपीय संघ के फाउंडर मेंबर्स में से है। लेकिन 2005 में यूरोपीय यूनियन के संविधान को फ्रांस के वोटर्स नकार चुके हैं। कैमरन की जगह लेने के लिए जोड़-तोड़ शुरू - कंजरवेटिव पार्टी में कैमरन की जगह लेने के लिए नेताओं ने जोड़-तोड़ शुरू कर दी है। - अक्टूबर में होने वाले पार्टी के सेशन में नया नेता चुना जाएगा। - लंदन के पूर्व मेयर बोरिस जॉनसन और गृहमंत्री थेरेसा मे के बीच कड़ी टक्कर लग रही है। - संडे टाइम्स के मुताबिक माइकल गोवे ने जॉनसन को समर्थन दिया है वहीं, कैमरन समर्थक मे के साथ हैं। ब्रेग्जिट के बाद लेग्जिट - ब्रेग्जिट के बाद अब लेग्जिट की मांग जोर पकड़ रही है। दरअसल, लोगों ने लंदन को ईयू में बने रहने और इसे इंडिपेंडेंट कंट्री घोषित करने के लिए यह मुहिम शुरू की है। - ब्रिटिश संसद की वेबसाइट पर ऑनलाइन पिटीशन के जरिए इसे शुरू किया गया है। ये लंदन के मेयर सादिक खान के नाम से है। - लेग्जिट पिटीशन को करीब डेढ़ लाख लोग अब तक सपोर्ट कर चुके हैं। - इसमें कहा गया है कि लंदन ईयू के साथ रहना चाहता है। - लोगों का कहना है कि लंदन वर्ल्ड का बहुत बड़ा शहर है, इसलिए इसे यूरोप में ही होना चाहिए। - उधर, मेयर सादिक खान ने कहा कि ईयू से बाहर होने के बाद हमारा मार्केट सिमट जाएगा, जिससे परेशानी बढ़ेगी। क्यों पड़ी रेफरेंडम की जरूरत - बता दें कि यूके (यूनाइटेड किंगडम) को ही ग्रेट ब्रिटेन या ब्रिटेन कहा जाता है। इसमें इंग्लैंड, वेल्स, स्कॉटलैंड और ईस्ट आयरलैंड शामिल हैं। - यूके में लंबे समय से यह दलीलें दी जा रही थीं कि यूनियन में शामिल होने की वजह से देश अपनी इकोनॉमी या फॉरेन पॉलिसी को लेकर आजादी से फैसले नहीं कर पा रहा है। उसकी डेमोक्रेसी पर असर पड़ रहा है। - यह कहा गया था कि ईयू से अलग होने पर यूके इमिग्रेशन पॉलिसी को लेकर भी खुद फैसले कर पाएगा। - पिछले इलेक्शन के बाद जब डेविड कैमरन पीएम बने तो उन्होंने वादा किया था कि वे रेफरेंडम कराएंगे। क्या आए नतीजे? - शुक्रवार को आए नतीजों में 52 फीसदी ने ईयू छोड़ने, जबकि 48 फीसदी ने इसमें बने रहने के फेवर में वोट किए। - यूथ चाहते थे EU में ही रहे UK, लेकिन बुजुर्गों की एकतरफा वोटिंग ने देश को अलग करने का फैसला दिया। - 13 लाख वोटों के चलते यस और नो के बीच 4% वोटों का अंतर पैदा हुआ। उधर, स्कॉटलैंड में भी उठी आवाज - वहीं, स्कॉटलैंड को यूके से बाहर चाहने वालों का आंकड़ा पिछली बार से 45 फीसदी ज्यादा हो गया है। - 2014 के रेफरेंडम में कई लोगों ने यूके से बाहर होने के लिए वोटिंग की थी, लेकिन यूके में बने रहने वालों की संख्या ज्यादा निकली। - पोल के मुताबिक, देश के 60 फीसदी लोग चाहते हैं कि स्कॉटलैंड यूके से बाहर हो जाए। रेफरेंडम के लिए लोग तैयार - स्कॉटलैंड की फर्स्ट मिनिस्टर निकोला स्टर्जन पहले ही कह चुकी हैं कि यूके से बाहर निकलने के लिए नया रेफरेंडम हो सकता है। - उन्होंने कहा- 2014 में हुए रेफरेंडम का अब कोई मतलब नहीं। 2014 अब कभी रिपीट नहीं होगा। - 2014 में 55 फीसदी लोगों ने यूके में रहने के लिए वोट किया था। - यूके से अलग होकर हम में वास्तव में अलग नहीं होंगे, बल्कि हमारा अस्तित्व बना रहेगा। - बता दें कि ब्रेग्जिट के दौरान स्कॉटलैंड के 62 फीसदी लोगों ने ईयू में बने रहने के लिए वोट दिया था। लेकिन यूके की वोटिंग की वजह से एेसा नहीं हो सका। इसलिए रेफरेंडम चाहता है स्कॉटलैंड - ब्रेग्जिट के बाद स्टर्जन ने कैबिनेट मीटिंग की थी। कैबिनेट ने फ्रेश रेफरेंडम के लिए प्लान बनाने की मंजूरी दे दी थी। - स्टर्जन ने कहा कि ईयू से अलग होने के बाद यूके में परेशानियां काफी बढ़ जाएंगी। - इससे इकोनॉमी के साथ-साथ कई स्तरों पर भारी नुकसान होगा। - उन्होंने कहा- मैं स्कॉटलैंड को इस नुकसान से बचाना चाहती हूं।

अब लंदन को UK से अलग करने की मांग, एक लाख लोगों ने साइन की पिटीशन

अब लंदन को UK से अलग करने की मांग, एक लाख लोगों ने साइन की पिटीशन

Last Updated: June 25 2016, 20:26 PM

लंदन/बर्लिन/पेरिस. यूरोपियन यूनियन से बाहर होने के फैसले से ब्रिटिश इंडियंस को बड़ा झटका लगा है। यहां रह रहे भारतीय मूल के ज्यादातर लोग नहीं चाहते थे कि देश EU से अलग हो जाए। कंजरवेटिव पार्टी के एमपी ऋषि सुनाक और आलोक शर्मा ने हमेशा ईयू में बने रहने का सपोर्ट किया था। शर्मा ने तो क्रॉस पार्टी तक बना ली थी। इस बीच, लंदन को ब्रिटेन से अलग करने की मांग उठने लगी है। ऐसी ऑनलाइन पिटीशन पर अब तक एक लाख से ज्यादा लोग साइन कर चुके हैं। इसमें मेयर सादिक खान से अपील की गई है कि वे लंदन को इंडीपेंडेंट स्टेट डिक्लेयर करें, ताकि लंदन EU में बना रहे। क्यों पड़ी रेफरेंडम की जरूरत, क्या आए नतीजे... - बता दें कि यूके (यूनाइटेड किंगडम) को ही ग्रेट ब्रिटेन या ब्रिटेन कहा जाता है। इसमें इंग्लैंड, वेल्स, स्कॉटलैंड और ईस्ट आयरलैंड शामिल हैं। - यूके में लंबे समय से यह दलीलें दी जा रही थीं कि यूनियन में शामिल होने की वजह से देश अपनी इकोनॉमी या फॉरेन पॉलिसी को लेकर आजादी से फैसले नहीं कर पा रहा है। उसकी डेमोक्रेसी पर असर पड़ रहा है। - यह कहा गया था कि ईयू से अलग होने पर यूके इमिग्रेशन पॉलिसी को लेकर भी खुद फैसले कर पाएगा। - पिछले इलेक्शन के बाद जब डेविड कैमरन पीएम बने तो उन्होंने वादा किया था कि वे रेफरेंडम कराएंगे। क्या आए नतीजे? - शुक्रवार को आए नतीजों में 52 फीसदी ने ईयू छोड़ने, जबकि 48 फीसदी ने इसमें बने रहने के फेवर में वोट किए। - यूथ चाहते थे EU में ही रहे UK, लेकिन बुजुर्गों की एकतरफा वोटिंग ने देश को अलग करने का फैसला दिया। - 13 लाख वोटों के चलते यस और नो के बीच 4% वोटों का अंतर पैदा हुआ। लंदन को अलग करने की मांग - रेफरेंडम में लंदन के 2,263,519 लोगों ने वोट दिया था। इनमें से वोट 1,513,232 यूरोपियन यूनियन में जाने के फेवर में थे। - अब लंदन को यूके से अलग करने की मुहिम जेम्स ओ-मैले ने शुरू की है। - उनका कहना है कि लंदन एक इंटरनेशनल सिटी है और हम यूरोप में ही रहना चाहते हैं। - उन्होंने कहा कि हम मेयर सादिक खान से अपील करते हैं लंदन को यूके से आजादी दिलवाएं, ताकि हम यूरोपियन यूनियन ज्वाइन कर सकें। क्या मिस्टर सादिक प्रेसिडेंट नहीं बनना चाहते? टाटा ग्रुप ने एक दिन में गंवाए 30 हजार करोड़ रुपए - शुक्रवार को ब्रेक्सिट का असर दुनियाभर के मार्केट्स में देखने को मिला। टाटा ग्रुप की कंपनियों का कुल मार्केट कैप सिर्फ एक दिन में करीब 30 हजार करोड़ रुपए घट गया। बता दें कि टाटा मोटर्स की टोटल इनकम का 13.4 फीसदी हिस्सा यूके से और 12 फीसदी हिस्सा बाकी यूरोप से आता है। टाटा ग्रुप की यूके में 19 कंपनियां हैं। यह ग्रुप इस देश में 60 हजार लोगों को इम्प्लॉयमेंट देता है। ग्लोबल मार्केट में इन्वेस्टर्स के डूबे 140 लाख करोड़ - शुक्रवार को दुनियाभर के स्टॉक मार्केट में तेज गिरावट की वजह से इन्वेस्टर्स के 140 लाख करोड़ रुपए डूब गए। - वहीं, इंडियन स्टॉक मार्केट करीब 2 फीसदी टूटे हैं। गिरावट की वजह से एक दिन में इन्वेस्टर्स को 1.77 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। इंडियंस ने ईयू के फेवर में वोट डाले - यूके पार्लियामेंट के मेंबर करण विलिमोरिया ने कहा, यूके में रह रहे 15 लाख ब्रिटिश इंडियन यहां का सबसे बड़ा माइनॉरिटी ग्रुप हैं। ये आर्थिक तौर पर कामयाब भी है। - इस कम्युनिटी के एक बड़े हिस्से ने यूरोपियन यूनियन के साथ बने रहने के लिए सपोर्ट किया। इसमें हर उम्र के लोग शामिल हैं। - लिबरल डेमोक्रेट्स पार्टी के डिप्टी लीडर नवनीत ढोलकिया भी इस बात से सहमत हैं कि यहां रह रहे इंडियंस ईयू का साथ न छोड़ने के सपोर्ट में थे। - ढोलकिया के मुताबिक, ज्यादातर इंडियंस आर्थिक वजहों से यूके आए हैं। आर्थिक मंदी न आए, इस डर से वे यूनियन के साथ जुड़े रहना चाहते थे। - कंजरवेटिव पार्टी के एमपी आलोक शर्मा ने तो यूनियन में बने रहने के लिए एक क्रॉस पार्टी तक बना ली थी। - ब्रिटिश इंडियन फॉर इन नाम की इस क्रॉस पार्टी ने लोगों को ईयू में बने रहने का सपोर्ट करने को कहा। कहां डाले वोट - मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स की कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटिश इंडियन आबादी वाले ज्यादातर एरिया में ईयू का हिस्सा बने रहने के लिए वोट पड़े। - इनमें वेम्बले, क्रॉएडन, साउथहॉल, हाउनस्लो, न्यूहेम, लिसेस्टर, रेडब्रिज, बार्नेट और मैनचेस्टर शामिल हैं। - वेल्स बेस्ड इंडियन एकेडमिक ने कहा कि पॉलिटिकल ऑर्गेनाइजेशन इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन ने ब्रेक्जिट के लिए वोट किया। - इसके पीछे सिक्युरिटी और सोशल सर्विस जैसी जरूरतें बताई जा रही हैं। साथ ही, बढ़ते आतंकवाद का खतरा भी अहम कारणों में से है। अब ब्रिटेन के टूटने का खतरा - यूरोपियन यूनियन से बाहर होने के ब्रिटेन के रेफरेंडम के नतीजे (Brexit) से यूरोप हिल गया है। नतीजे उम्मीद के उलट आए। सर्वे गलत साबित हुए। - अब ब्रिटेन के टूटने का खतरा पैदा हो गया है। स्कॉटलैंड-आयरलैंड ने अलग होने का इशारा कर दिया है। वहीं, ईयू में शामिल कुछ और देश भी इससे अलग हो सकते हैं। फिर उठी रेफरेंडम की मांग - यूके में दोबारा रेफरेंडम की मांग उठी है। कुछ ही घंटे में ऑनलाइन पिटीशन पर 77 हजार लोगों ने साइन किए। - इसमें कहा गया है कि हां और ना में सिर्फ चार पर्सेंट का फर्क है। इसलिए दोबारा रेफरेंडम की जरूरत है। - जो ऑर्गनाइजेशन दोबारा रेफरेंडम का कैम्पेन चला रहा है, उसकी ऑनलाइन पिटीशन पर साइन करने वाली वेबसाइट शुक्रवार को कुछ ही घंटों में क्रैश हो गई। - ब्रिटेन की स्कॉटलैंड नेशनल पार्टी (एसएनपी) की नेता निकोला स्टरजियोन ने कहा- नतीजों से साफ है कि स्कॉटलैंड की जनता यूरोपियन यूनियन में अपना भविष्य देख रही है। ऐसे में, हमारी सरकार जल्द ही स्कॉटलैंड की आजादी के लिए दूसरे रेफरेंडम का एलान करेगी। आयरलैंड ने भी ऐसी ही बात दोहराई है। EU में हुईं इमरजेंसी मीटिंग्स - रेफरेंडम के नतीजों के बाद यूरोपियन यूनियन के मजबूत देश फ्रांस में लगातार तीन इमरजेंसी मीटिंग हुई। - फ्रेंच प्रेसिडेंट फ्रांस्वा ओलांद ने फोन पर जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल और यूरोपियन यूनियन के अध्यक्ष डोनाल्ड टस्क से लंबी बात की। दूसरे देश भी जा सकते हैं बाहर - ब्रिटेन के बाहर निकलने के बाद अब फ्रांस, डेनमार्क, फिनलैंड, हंगरी जैसे दूसरे देश भी यूरोपियन यूनियन से बाहर निकल सकते हैं। कौन बन सकता है पीएम - लीव कैम्पेन के बोरिस जॉनसन पीएम रेस में आगे हैं। वे लंदन के मेयर रह चुके हैं। - फराज नाइजल भी दौड़ में हैं। उन्होंने अपने कैम्पेन में लगातार मुस्लिम इमिग्रेंट्स का मुद्दा उठाया। इकोनॉमी की जगह इस्लामोफोबिया बना मुद्दा - लीव कैम्पेन ने इमिग्रेंट्स का मुद्दा उठाया। सीरिया-इराक में आईएसआईएस के असर वाले इलाकों से आने वाले रिफ्यूजियों का विरोध किया। उन्हें खतरा बताया। - ब्रिटेन में इमिग्रेंट्स के मुद्दे को उन्होंने देश की संस्कृति, पहचान और नेशनलिटी से जोड़ दिया। - कैमरन ने जमकर रीमेन इन ईयू का प्रचार किया, लेकिन नाइजल का लीव ईयू कैम्पेन इंग्लैंड और वेल्स में कहीं ज्यादा कामयाब रहा। - माइकल गोव ने ईयू से अलग होने के बाद ब्रिटेन का एजेंडा क्या होगा, इसका मसौदा तैयार करने में समय लगाया। - ब्रिटेन हर हफ्ते ईयू को 350 मिलियन डॉलर देता है। इसका इस्तेमाल अब हेल्थ सेक्टर में होगा। सोशल मीडिया पर रिएक्शन - मैंने आज सुबह अपना वजन किया और पाया कि मैंने कई पाउंड गंवा दिए हैं। - ऋषि कपूर, एक्टर - मुझे नहीं लगता कि मैं कभी भी इस तरह का जादू चाहती थी। स्काॅटलैंड के अलग होने का खतरा पैदा हो गया है। - जे के राउलिंग, राइटर - यह जश्न मनाने का वक्त नहीं है और न ही अलग होने का। नफरत का भी नहीं...यह बदलाव का समय है। - गैरी लिनेकर, पूर्व फुटबॉलर अागे की स्लाइड्स में पढ़ें : किसने क्या कहा, अभी ब्रिटेन के बाहर होने में काफी पेंच फंसे हुए हैं, ईयू का आर्टिकल 50 क्या है और भारत पर क्या होगा असर?

यूथ चाहते थे EU में ही रहे UK, लेकिन बुजुर्गों की एकतरफा वोटिंग ने कराया अलग

यूथ चाहते थे EU में ही रहे UK, लेकिन बुजुर्गों की एकतरफा वोटिंग ने कराया अलग

Last Updated: June 25 2016, 12:24 PM

लंदन. यूके अब यूरोपियन यूनियन (EU) का हिस्सा नहीं रहेगा। ऐतिहासिक रेफरेंडम के नतीजे शुक्रवार को आए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बुजुर्गों की एकतरफा वोटिंग के चलते ब्रिटेन को 28 देशों के यूरोपियन यूनियन से अलग होना पड़ा। कुल आबादी में बुजुर्ग 18% यानी 1.12 करोड़ हैं। वे यूके की यंग जनरेशन पर भारी पड़े। बता दें, रेफरेंडम में हिस्सा लेने वाले ब्रिटेन के 18 से 29 साल के लोग EU के साथ रहना चाहते थे। क्यों पड़ी रेफरेंडम की जरूरत... - बता दें कि यूके (यूनाइटेड किंगडम) को ही ग्रेट ब्रिटेन या ब्रिटेन कहा जाता है। इसमें इंग्लैंड, वेल्स, स्कॉटलैंड और ईस्ट आयरलैंड शामिल हैं। - यूके में लंबे समय से कहा जा रहा था कि यूरोपियन यूनियन अपने सिद्धांतों से भटक गया है। - यह दलीलें दी जा रही थीं कि यूनियन में शामिल होने की वजह से यूके अपनी इकोनॉमी या फॉरेन पॉलिसी को लेकर आजादी से फैसले नहीं कर पा रहा है। उसकी डेमोक्रेसी पर असर पड़ रहा है। - पिछले इलेक्शन के बाद जब डेविड कैमरन पीएम बने तो उन्होंने वादा किया था कि वे रेफरेंडम कराएंगे। - बता दें कि यूके में इंग्लैंड, वेल्स, स्कॉटलैंड और नॉर्थ आयरलैंड शामिल हैं। - ईयू से अलग होने पर यूके इमिग्रेशन पॉलिसी को लेकर भी खुद फैसले कर पाएगा। <a href='http://www.bhaskar.com/news/INT-brexit-referendum-news-hindi-5357045-NOR.html?seq=6version=20'>(यहां क्लिक करके जानिए क्या है EU)</a> 48% लोगों ने किया ब्रिटेन के EU में बने रहने का फेवर, इनमें... - सबसे ज्यादा 18 से 29 साल एज ग्रुप के लोग थे। ब्रिटेन में इनकी संख्या 90 लाख है। यह कुल आबादी का 14% है। - इस एज ग्रुप में भी पुरुषों की तुलना में महिलाओं ने ज्यादा फेवर किया। - ग्रैजुएट या उससे ज्यादा पढ़े-लिखे वोटर्स का पर्सेंटेज ज्यादा। - मैनेजरियल और हाईक्लास प्रोफेशनल्स ने EU में बने रहने पर की वोटिंग। - हां में वोटिंग करने वालों में AB सोशल क्लास (हाई इनकम ग्रुप) के लोग ज्यादा। 52% ने कहा- अलग हो ब्रिटेन, इनमें... - 50+ एज ग्रुप वाले ज्यादा। ब्रिटेन में इनकी संख्या 2.24 करोड़ है। ये कुल आबादी का 35% है। - कम पढ़े-लिखे लोगों की संख्या सबसे ज्यादा। - इनमें भी लेबर और स्किल्ड मैनुअल वर्कर सबसे ज्यादा, जो ईयू के सख्त इमिग्रेशन नियम के खिलाफ थे। - बता दें, 17 साल से कम उम्र के लोगों को वोट देने का हक नहीं था। इनके अलावा, 30 से 49 एज ग्रुप के लोगों ने मिली-जुली वोटिंग की। ब्रिटेन की आबादी में सबसे ज्यादा 50+ वाले एज ग्रुप आबादी (करोड़ में) कुल आबादी में % 0-17 साल 1.40 22 18-29 साल 0.90 14 30-49 साल 1.87 29 50 साल से ज्यादा वाले 2.24 35 कुल 6.41 100 ब्रिटेन के पीएम ने किया इस्तीफे का एलान - इस बीच, ब्रिटेन के पीएम डेविड कैमरन ने कहा- मैं अक्टूबर तक इस्तीफा दे दूंगा। मुझे नहीं लगता कि देश जिस अगले पड़ाव पर जा रहा है, उसकी कमान मुझे संभालनी चाहिए। कंजर्वेटिव पार्टी को नया लीडर चुनना चाहिए। वहीं, यूरोपियन यूनियन ने कहा- ब्रिटेन को अब जल्द से जल्द अलग हो जाना चाहिए। पाउंड समेत दुनियाभर की करंसी पर असर - यूके के रेफरेंडम में आए नतीजों के बाद पाउंड में 31 साल की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। यूरो और रुपए में भी गिरावट आई। - ऑस्ट्रेलियन डाॅलर, न्यूजीलैंड डॉलर, मेक्सिकन पेसो, साउथ अफ्रीका के रेंड, स्विट्जरलैंड के फ्रेंक, नॉर्वे के क्रोन और पोलैंड की करंसी जोल्टी पर भी असर पड़ा। - नतीजों का भारत के शेयर बाजारों पर भी असर देखा गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स में एक हजार प्वाइंट्स की गिरावट आई। हालांकि, बाद में बाजार संभल गया और 650 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ। दुनियाभर में करंसी कमजोर हुई। EU ने क्या कहा? - रेफरेंडम के नतीजे आने के बाद यूरोपियन यूनियन ने ब्रिटेन से जल्द से जल्द अलग होने को कहा है। - यूनियन के अलग-अलग हेड्स ने ब्रेक्जिट के नतीजे आने के बाद ज्वाइंट स्टेटमेंट में कहा, हम चाहते हैं कि यूके की गवर्नमेंट जनता के इस फैसले को जल्द से जल्द लागू करे। हालांकि, ये कई लोगों के लिए दुखदायी हो सकता है। बेवजह किसी भी तरह की देर से अनिश्चितता जाहिर होगी। - ये स्टेटमेंट ईयू प्रेसिडेंट डोनाल्ड टस्क, ईयू कमीशन चीफ जीन क्लॉड जंकर, ईयू पार्लियामेंट लीडर मार्टिन शुल्ज और डच प्रीमियर मार्क रुटे ने जारी किया। भारत पर क्या होगा असर? 1# करंसी - रुपया कमजोर हो सकता है। - डॉलर के मुकाबले रुपया अगस्त 2013 में अपने सबसे निचले लेवल 68.85 पर पहुंचा था। - शुक्रवार सुबह यूके के नतीजे आने लगे तो शुरुआत में रुपया 60 पैसा लुढ़का। - जब यह 68.20 पर पहुंचा तो आरबीआई ने करंसी मार्केट में दखल दिया। फॉरेक्स डीलर्स से डॉलर की ब्रिकी शुरू कराई और रुपया रिकवर हुआ। - रुपया कमजोर होता है तो क्रूड ऑयल खरीदने की भारत की कॉस्ट बढ़ती है। हालांकि, ग्लोबल मार्केट में क्रूड सस्ता हो रहा है। इसलिए फिलहाल पेट्रोल-डीजल के महंगे होने के आसार नहीं हैं। 2# शेयर बाजार पर असर - शुक्रवार सुबह जब BREXIT के नतीजे आ रहे थे, तब शुक्रवार सुबह सेंसेक्स 1000 और निफ्टी 236 प्वाइंट तक गिरा। - दिनभर में सेंसेक्स में 604 प्वाइंट्स की गिरावट आई। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इससे भारतीय इन्वेस्टर्स का 1.79 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। - टाटा मोटर्स के शेयर्स में भी गिरावट देखी गई। टाटा की जगुआर-लैंड रोवर ब्रिटेन की सबसे बड़ी कार मेकर कंपनी है। - ब्रिटेन के ईयू से अलग होने के मायने हैं कि टाटा मोटर्स को यूरोप के बाकी देशों में टैक्स और ड्यूटी चुकानी होंगी। कीमत बढ़ने से उसकी लग्जरी कारें यूरोप के मार्केट में पिछड़ सकती हैं। 3# भारतीय कंपनियां - अगर इंडियन इकोनॉमी के लिहाज से देखें तो इसके काफी मायने हैं। - ब्रिटेन में 800 इंडियन कंपनियां हैं। यूके के ईयू से बाहर होने के बाद इनके कारोबार पर असर पड़ेगा, क्योंकि इसमें ज्यादातर यहां रहकर ओपन यूरोपियन मार्केट में बिजनेस करती हैं। ये ब्रिटेन में 1.1 लाख लोगों को इम्प्लॉइमेंट देती हैं। - इकोनॉमिस्ट डीएच पई पनंदिकर ने moneybhaskar.com को बताया कि टाटा मोटर्स, एयरटेल और भारत की फार्मा कंपनियां यूके में बेस बनाकर EU में आसानी से बिजनेस कर रही थीं। अब इन्हें यूरोपियन यूनियन के बाकी देशों में बिजनेस के लिए एक्स्ट्रा टैक्स और ड्यूटी देनी होंगी। - हालांकि, इकोनॉमिस्ट विश्वजीत धर का कहना है कि Brexit से ब्रिटेन के साथ भारत के ट्रेड पर कोई असर नहीं पड़ेगा। क्या है यूरोपियन यूनियन? - यूरोप एक कॉन्टिनेंट है, जिसमें 51 देश हैं। इनमें से ब्रिटेन समेत 28 देशों ने यूरोपियन यूनियन बनाया। यह 1993 में बना था। - यूनियन के 19 देशों की एक अलग करंसी यूरो बनाई गई। इनकी इमिग्रेशन पॉलिसी भी एक जैसी तय हुई। डिफेंस, इकोनॉमी और फॉरेन पॉलिसी पर भी एक राय में फैसले लिए जाने लगे। - एक वीजा से पूरे यूरोपियन यूनियन में एंट्री हो सकती है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें : UK को अलग होने में कितना वक्त लगेगा?

यूरोपियन यूनियन से अलग हुआ UK, ऐसा रहा वर्ल्ड मीडिया कवरेज

यूरोपियन यूनियन से अलग हुआ UK, ऐसा रहा वर्ल्ड मीडिया कवरेज

Last Updated: June 24 2016, 18:54 PM

इंटरनेशनल डेस्क। एेतिहासिक रेफरेंडम के बाद यूके यूरोपियन यूनियन (EU) का हिस्सा नहीं रहा। शुक्रवार को हुई वोटिंग में 52% लोगों ने कहा कि वे चाहते हैं कि देश EU से अलग हो जाए। 48% लोगों ने कहा कि यूके को 28 देशों के यूनियन में बने रहना चाहिए। इसे दुनियाभर के मीडिया ने अलग-अलग तरह से कवर किया। डेलीमेल के मुताबिक- वोटर्स ने राजनीतिक भूचाल ला दिया, जिससे ब्रिटिश पीएम को पद छोड़ना होगा। एेतिहासिक रेफरेंडम में ईयू को छोड़ने के लिए हुई वोटिंग के कारण ग्लोबल मार्केट में पैनिक फैल गया। आगे की स्लाइड्स में देखिए किस मीडिया ने कैसे कवर किया रेफेरेंडम...

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