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MCD एक्जिट पोल सही हुए तो EVM में गड़बड़ी के खिलाफ आंदोलन करेंगे: केजरी

MCD एक्जिट पोल सही हुए तो EVM में गड़बड़ी के खिलाफ आंदोलन करेंगे: केजरी

Last Updated: April 25 2017, 09:43 AM

नई दिल्ली. दिल्ली की तीन नगर निगमों के एक्जिट पोल में बीजेपी को 200+ सीटें मिलने से आम आदमी पार्टी में खलबली मची है। सोमवार को अरविंद केजरीवाल ने पार्टी नेताओं के साथ मीटिंग की। उन्होंने कहा, अगर सर्वे सही हुआ तो साबित हो जाएगा कि पंजाब, यूपी, मुंबई, भिंड और धौलपुर की तरह यहां के इलेक्शन में भी धांधली हुई। हम आंदोलन से निकले हैं, यहां सत्ता की मलाई खाने के लिए नहीं बैठे हैं। फिर से आंदोलन की शुरूआत करेंगे। बता दें कि एमसीडी के 270 वार्डों के नतीजे 26 अप्रैल को आएंगे। कैंडिडेट्स के निधन के चलते दो वार्ड की वोटिंग बाद में होगी। हार-जीत से फर्क नहीं पड़ता... - केजरीवाल ने कहा, हार-जीत से कोई फर्क नहीं पड़ता। बड़ी बात ये है कि देशभर में ईवीएम मशीनों में छेड़छाड़ और गड़बड़ी की जा रही है। पिछले इलेक्शन में तो पंजाब के एक गांव में आप को सिर्फ दो वोट मिले। जबकि वहां के लोग अकालियों को उखाड़ फेंकना चाहते थे। - रविवार को वोटिंग के दौरान केजरीवाल ने कहा, दिल्ली के कई इलाकों से मशीनों में खराबी की शिकायतें मिल रही हैं। पर्ची होने के बाद भी लोगों को वोट नहीं डालने दिया गया। - बता दें कि सीएम केजरीवाल समेत आप के कई नेता ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायत करते आए हैं। एमसीडी इलेक्शन में इस्तेमाल मशीनों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। EVM की चली तो बीजेपी जीतेगी: राय - दिल्ली के मंत्री गोपाल राय ने कहा- अगर ईवीएम की चलती है तो सर्वे सही, बल्कि हमारी हालत इससे भी बुरी हो सकती है, लेकिन जनता की चली तो आप नंबर-1 होगी और हम बड़े मार्जिन से चुनाव जीतेंगे। - गोपाल राय ने वोटिंग के बाद ट्वीट किया- क्योंकि आप का कॉम्पिटीशन ईवीएम+बीजेपी+कांग्रेस से है। इसीलिए हर एक वोट कीमती है। मैंने वोट डाल दिया है, आपको भी करना चाहिए। - आप नेता कुमार विश्वास ने ट्विटर पर लिखा- अगर आप जो चाहते हैं, उसके लिए नहीं लड़े तो फिर उसे हारने पर क्या रोना। क्या कहते हैं एक्जिट पोल? - एबीपी न्यूज और आजतक के एक्जिट पोल में तीनों नगर निगमों (ईस्ट, नॉर्थ, साउथ) में बीजेपी के तीसरी बार सत्ता में आने का दावा किया गया है। एमसीडी में 10 सालों से बीजेपी का कब्जा है। - एक्जिट पोल के मुताबिक, आप दूसरे और कांग्रेस तीसरे नंबर पर है। ABP न्यूज-सी वोटर के पोल में बीजेपी को 218 सीट दी गईं। वहीं, इंडिया टुडे- एक्सिस के पोल में 200 से 220 सीट मिली हैं। आम आदमी पार्टी को 23-35 और कांग्रेस को 19-31 के बीच सीट मिलने का अनुमान है।

वोटर अपने दिए गए वोट की देख सकेगा पर्ची, VVPAT मशीन EVM से जुड़ेगी

वोटर अपने दिए गए वोट की देख सकेगा पर्ची, VVPAT मशीन EVM से जुड़ेगी

Last Updated: April 20 2017, 08:28 AM

नई दिल्ली. अगले लोकसभा चुनाव में हर वोटर अपने दिए गए वोट की पर्ची देख सकेगा। उसके जरिए वो यह जान या देख सकेगा कि उसने जिस उम्मीदवार को वोट दिया है, वह उसी को मिला है या नहीं। इसके लिए चुनाव आयोग ईवीएम के साथ लगने वाली वीवीपैट खरीदेगा। आयोग ने इसके लिए सरकार से 3,174 करोड़ रुपए मांगे थे। बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे मंजूरी दे दी। पिछले दिनों ईवीएम से छेड़छाड़ की संभावनाओं पर विवाद के बाद चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखी थी और 2019 के लोकसभा चुनाव में वीवीपैट मशीनों के इस्तेमाल की याद दिलाई थी। इस खरीद के बाद हर ईवीएम के साथ वीवीपैट मशीन जोड़ी जाएगी। चुनाव आयोग ने जून 2014 में तय किया किया था कि 2019 के चुनाव में सभी मतदान केंद्रों पर वीवीपैट का इस्तेमाल किया जाएगा। यह फैसला देश में चुनाव सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। क्योंकि वीवीपैट मशीनों के इस्तेमाल से लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पूरी तरह पारदर्शिता आने की उम्मीद है। बीईएल ने बनाई वीवीपैट, 4 साल पहले हुआ था इस्तेमाल देश में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड ने वीवीपैट मशीन 2013 में डिजाइन की। सबसे पहले इसका इस्तेमाल नगालैंड के चुनाव में 2013 में हुआ था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपैट मशीन बनाने और इसके लिए पैसे मुहैया कराने के आदेश केंद्र सरकार को दिए। 7 सेकंड तक दिखेगी वीवीपैट की पर्ची ईवीएम में कोई भी बटन दबाने के बाद उससे जुड़ी वीवीपैट पर्ची निकलेगी। यह सात सैकंड तक वोट देने वाले को दिखेगी। वह देख सकेगा कि जो बटन उसने दबाया है वोट उसी को मिला है या नहीं। जिसे वोट दिया है वीवीपैट पर उसका नाम और चुनाव चिन्ह छप कर निकलेगा। क्या होगा इस पर्ची से : -मतगणना के समय ईवीएम में खराबी की शिकायत मिलती है या मतगणना में गड़बड़ी की शिकायत होती है तो इन पर्चियों को गिना जाएगा। - बीईएल ने 2016 में 33,500 वीवीपैट मशीनें बनाईं। इनका इस्तेमाल इसी साल गोवा विधानसभा चुनाव में किया गया। - हाल में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में 52,000 वीवीपैट का इस्तेमाल किया गया। - यूपी की 403 विधानसभा सीटों में से 20 पर वीवीपैट वाली ईवीएम के जरिए मतदान हुआ था। 5 राज्यों में चुनावी नतीजों के बाद हुआ था विवाद पिछले दिनों पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद विपक्षी दलों ने ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायत की थी। उन्होंने भविष्य में बैलट पेपर के जरिए चुनाव की मांग भी की थी। कांग्रेस ने कहा था कि सरकार को वीवीपैट के लिए जल्द ही चुनाव आयोग को रकम जारी करनी चाहिए और जब तक सभी ईवीएम के साथ वीवीपैट नहीं लग जाते, तब तक चुनाव के लिए बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। कांग्रेस के रुख का समर्थन आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने भी किया है। 2019 में 16 लाख वीवीपैट की जरूरत पड़ेगी देश में लोकसभा चुनाव के दौरान करीब 16 लाख ईवीएम की जरूरत पड़ती है। लिहाजा इतनी ही वीवीपैट मशीनों की जरूरत भी होगी। इसी के लिए चुनाव आयोग ने सरकार से 3,174 करोड़ रुपए की मांग की थी। अभी चुनाव आयोग के पास कितनी वीवीपैट मशीनें हैं, इसकी जानकारी नहीं है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भारतीय चुनाव आयोग और दिल्ली राज्य चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर दो दिन में वीवीपैट की उपलब्धता की जानकारी मांगी है।

2019 तक मिलेंगी EVM से पर्ची निकालने वाली 16 लाख मशीनें, 3000 Cr मंजूर

2019 तक मिलेंगी EVM से पर्ची निकालने वाली 16 लाख मशीनें, 3000 Cr मंजूर

Last Updated: April 19 2017, 17:41 PM

नई दिल्ली. इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी के आरोपों के बाद कैबिनेट ने नई वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) मशीनें खरीदने के लिए फंड को मंजूरी दे दी। इसके लिए इलेक्शन कमीशन ने सरकार को प्रपोजल भेजा था। फाइनेंस मिनिस्टर ने बुधवार को बताया कि सरकार ने 3173 करोड़ रुपए फंड अप्रूव किया है, जिससे 16.15 लाख नई मशीनें खरीदी जाएंगी। VVPAT के प्रोडक्शन पर नजर रखेगा EC... - EC ने कहा कि नई मशीनें मुहैया कराने के लिए ECIL और BEL कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट किया है। कंपनियों को इस काम के लिए 30 महीने लगेंगे। - EC खुद VVPATs के प्रोडक्शन पर नजर रखेगा ताकि उसे ये मशीनें 2019 के जनरल इलेक्शन से पहले मिल सकें। साथ ही कमीशन ये भी निश्चित करेगा कि 2019 इलेक्शन में सभी ईवीएम में VVPATs लगी हों और SC के निर्देश पूरे किए जाएं। चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने लिखा था सरकार को लेटर - 16 अप्रैल को चीफ इलेक्शन कमिश्नर नसीम जैदी ने कहा था कि माहौल को देखते हुए VVPAT के लिए सरकार जल्द फंड जारी करे। कमीशन चाहता है कि 2019 के लोकसभा इलेक्शन से पहले मशीनें उसे मिल जाएं। - लेटर में कमीशन ने EVM के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई का जिक्र किया। कमीशन ने कहा था- SC ने ये पूछा है कि इलेक्शन कमीशन VVPAT कब तक लाएगा। ईसी ने सरकार को 11 रिमाइंडर भेजे थे - जून, 2014 से ईसी ने मशीनों के लिए करीब 11 रिमाइंडर सरकार को भेजे। जैदी ने पिछले साल नरेंद्र मोदी को लेटर भी लिखा था। - पिछले दिनों SC ने जल्द सभी इलेक्शन में VVPAT मशीनों के इस्तेमाल की बात कमीशन से कही थी। - 5 राज्यों में असेंबली इलेक्शन के बाद बीएसपी, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस समेत 16 अपोजिशन पार्टियों ने ईवीएम में छेड़छाड़ की शिकायत इलेक्शन कमीशन से की थी। क्या है VVPAT? - यह वोटिंग के वक्त वोटर्स को फीडबैक देने का एक तरीका है। इसके तहत ईवीएम से प्रिंटर की तरह एक मशीन अटैच की जाती है। वोट डालने के 7 सेकंड बाद इसमें से एक रसीद निकलती है। इस पर सीरियल नंबर, नाम और उस कैंडिडेट का इलेक्शन सिम्बल होता है, जिसको आपने वोट डाला है। - ये रसीद मशीन से निकलने के बाद उसमें लगे एक बॉक्स में चली जाती है। ये वोटर को नहीं दी जाती।

ईवीएम के विरोध में शिवसेना भी, भारत मुक्ति मोर्चा के साथ 21 को रैली

ईवीएम के विरोध में शिवसेना भी, भारत मुक्ति मोर्चा के साथ 21 को रैली

Last Updated: April 19 2017, 13:26 PM

नागपुर. ईवीएम के विरोध में भारत मुक्ति मोर्चा 21 अप्रैल को देशभर में 550 जिलों में रैली निकालेगा। नागपुर में सुबह 10 बजे जयताला से रैली की शुरुआत होगी। शिवसेना भी इस आंदोलन में साथ रहेगी। विविध सामाजिक तथा राजनीतिक संगठनों को साथ लेकर लड़ाई लड़ने का नियोजन किए जाने की जानकारी भारत मुक्ति मोर्चा के जिलाध्यक्ष कमलेश सोरते ने मंगलवार को पत्र परिषद में दी। रैली में 500 मोटरसाइकिल तथा 50 से अधिक चार पहिया वाहनों को शामिल किया जाएगा। शिवसेना के उपजिला प्रमुख बंडू तलवेकर ने बताया कि मनपा चुनाव में पराजित हुए शिवसेना के 100 से अधिक प्रत्याशी इस रैली में सहभागी होंगे। दोपहर 3 बजे पटवर्धन मैदान पहुंचने पर रैली का समापन किया जाएगा। इसके बाद पटवर्धन मैदान से पैदल रैली निकाली जाएगी। इसमें 2000 से अधिक महिला-पुरुषों के सहभागी होने का दावा किया गया। अंत में पांच कार्यकर्ताओं का प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मिलकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपेगा। ज्ञापन में भविष्य में होने वाले सभी चुनाव बैलट पेपर से कराने की मांग की जाएगी। पत्र परिषद में रविकांत मेश्राम व अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

दुनिया हमसे चाहती है निष्पक्ष चुनाव की ट्रेनिंग, राजनीतिक स्वार्थ पहुंचा रहे नुकसान: चुनाव आयुक्त ओपी रावत

दुनिया हमसे चाहती है निष्पक्ष चुनाव की ट्रेनिंग, राजनीतिक स्वार्थ पहुंचा रहे नुकसान: चुनाव आयुक्त ओपी रावत

Last Updated: April 18 2017, 07:53 AM

ग्वालियर. जिस देश का दुनिया के 19 देशों से इस बात का MOU हुआ है कि उन्हें निष्पक्ष चुनाव कराना सिखाया जाए। उसी देश के लोग यहां की चुनाव प्रणाली पर सवाल उठाएं ये ठीक नहीं है, इससे दुनिया के सामने गलत संदेश जाता है। एक दिन के निजी दौरे पर ग्वालियर आए चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने चर्चा में इस बात पर दुख जताया कि राजनीतिक स्वार्थों के चलते दुनिया के सबसे बड़े डेमोक्रेटिक सिस्टम पर सवाल उठाए जा रहे हैं। EVM पर विवाद से दुनिया के सामने हम होंगे बैकफुट पर.... - रविवार शाम चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने बताया कि हाल ही में दुनिया के 19 देशों ने भारत के साथ MOU साइन किया है, जिसके तहत ये हमारी एजेंसियों से निष्पक्ष चुनाव कराना सीखेंगे, लेकिन EVM पर राजनीतिक स्वार्थों के तहत उठाए गए सवाल ग्लोबल प्लेटफार्म पर देश को बैकफुट पर ले जा रहे हैं। - रावत ने बताया कि EVM की Hi-Quality टेस्टिंग होती है। इसमें किसी एक दल के पक्ष में ही वोटिंग होने जैसी गड़बड़ी संभव ही नहीं है। भारत निर्वाचन आयोग कई मंचों पर इस बात को स्पष्ट भी कर चुका है। - चुनाव आयुक्त रावत ने भिंड में सलीना सिंह की मीडिया को मजाक में ही सही थाने में बैठाने की धमकी को गलत बताया, उन्होंने कहा कि आयोग का काम कोई मजाक नहीं है। चुनाव आयोग के अधिकारियों को मजाक में भी इस तरह का मजाक नहीं करना चाहिए। चुनाव आयोग हर स्टेज पर अपने निर्वाचन आयुक्तों से गंभीर व्यवहार की उम्मीद करता है। 120 करोड़ के सेंटर में 19 देशों के अफसरों को ट्रेनिंग - चुनाव आयुक्त के मुताबिक अफगानिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, मालदीव, बांग्लादेश, मलेशिया, इंडोनेशिया, म्यांमार, फिलिपींस, सहित साउथ एशिया के 10 देशों, और ऑस्ट्रेलिया, फिजी, न्यूजीलैंड, इक्वाडोर सहित लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के कुछ देशों को मिलाकर कुल 19 देशों के निर्वाचन आयुक्तों को EMV और बैलेट पेपर दोनों से ही निष्पक्ष चुनाव कराने की ट्रेनिंग इंडिया में देना हैं। - MOU के मुताबिक इन देशों के निर्वाचन आयुक्त हमारे देश में होने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों को देखने आएंगे और हम भी अपने निर्वाचन आयुक्तों को इनके देशों में भेजेंगे। दिल्ली के द्वारका में 120 करोड़ स्र्पए की लागत से भारत निर्वाचन आयोग ने एक ट्रेनिंग सेंटर खोला है। यहीं इन देशों के अधिकारियों को ट्रेनिंग देना शुरू किया गया है। - चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने बताया कि हमारे देश के मुख्य चुनाव आयुक्त बीते साल ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री चुनाव में ऑब्जर्वर के रूप में गए थे। दुनिया के कई देश भारत के निर्वाचन आयुक्तों को बुलाते हैं। भारत निर्वाचन आयोग के इसी दबदबे की वजह से दुनिया निर्वाचन प्रणाली को लेकर हमारी ओर देख रही है।

EVM से होगा UP में नगर निगम का चुनाव, MP से मंगाई जाएंगी मशीनें

EVM से होगा UP में नगर निगम का चुनाव, MP से मंगाई जाएंगी मशीनें

Last Updated: April 17 2017, 23:17 PM

लखनऊ. यूपी में नगर निगम का चुनाव ईवीएम से होगा। इसके लिए केन्द्रीय चुनाव आयोग के माध्यम से यूपी चुनाव आयोग मध्य प्रदेश से मशीने लेंगी। ये जानकारी राज्य निर्वाचन आयोग ने सोमवार को जानकारी दी। इससे पहले खबर आ रही थी कि इस साल यूपी में नगर निगम का चुनाव बैलेट पेपर से होंगे। -बता दें, पहले केंद्रीय चुनाव आयोग ने नगर निगमों के चुनाव में 2006 से पहले की इन पुरानी ईवीएम को देने से इनकार कर दिया था, इसलिए राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के 14 नगर निगमों के चुनाव ईवीएम के बजाए बैलेट पेपर से करवाने की तैयारी शुरू कर दी थी। -अब केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने राज्य निर्वाचन आयोग से मध्य प्रदेश से संपर्क करने को कहा है। -जानकारी के अनुसर, यूपी में 25 हजार कंट्रोल यूनिट और 50 हजार बैलेट यूनिट की मांग की गई है। वहीं, मध्य प्रदेश से ईवीएम मंगवाने की कार्रवाई भी शुरुकर दी गई है। -ईवीएम के आवंटन को देखते हुए यूपी नगरीय निकाय सामान्य निर्वाचन ईवीएम से जून महीने में प्रस्तावित है। -निकाय चुनाव, जसिमें महापौर और पार्षदों के लिए चुनाव होना है। सपा और बसपा ने बैलट से चुनाव कराने की मांग की थी। 1# मायावती-हरीश रावत ने उठाए सवाल, केजरी बोले- बैलेट से हो MCD इलेक्शन - मायावती ने यूपी इलेक्शन में हार के बाद कहा कि चुनाव जनता ने नहीं, ईवीएम ने हराया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 325 सीट जीतकर भी बनावटी मुस्कराहट से साफ होता है कि चुनाव धांधली कराकर जीता है। - उत्तराखंड में हार के बाद हरीश रावत ने कहा कि मोदी क्रांति और ईवीएम के चमत्कार को सलाम करता हूं। - वहीं, केजरीवाल ने कहा कि पंजाब में AAP का 20 से 25% वोट ईवीएम के जरिए अकालियों को ट्रांसफर हो गया। मेरा मानना है कि हम जीत रहे थे और ईवीएम में गड़बडी के असली कारण क्या थे, इसका मुझे पता नहीं है। अगर ईवीएम में गड़बड़ी की जाती है तो चुनावों का क्या मतलब। हमें पंजाब में सत्ता से बाहर रखने के लिए सारा खेल किया गया। 2# डेमोक्रेसी एट रिस्क बुक में सवाल उठा- क्या ईवीएम पर भरोसा कर सकते हैं? - 2010 में बीजेपी लीडर जीवीएल नरसिम्हा राव की बुक डेमोक्रेसी एट रिस्क-कैन वी ट्रस्ट इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन? आई। इस बुक की प्रस्तावना आडवाणी ने लिखी। - आडवाणी ने लिखा था, टेक्नोलॉजी के नजरिए से मैं जर्मनी को मोस्ट एडवांस्ड देश समझता हूं। वहां भी ईवीएम के इस्तेमाल पर बैन लगा चुका है। आज अमेरिका के 50 में से 32 स्टेट में ईवीएम पर बैन है। मुझे लगता है कि अगर हमारा इलेक्शन कमीशन भी ऐसा करता है, तो इससे लोकतंत्र मजबूत होगा। 3# पहली बार कब ईवीएम के इस्तेमाल पर उठा सवाल? - 1982 में केरल असेंबली इलेक्शन में EC ने पैरावूर विधानसभा के 84 में से 50 पोलिंग स्टेशन पर ईवीएम का ट्रायल रन किया। - इलेक्शन से पहले सीपीएम के सिवान पिल्लई ने हाईकोर्ट में ईवीएम के इस्तेमाल के खिलाफ पिटीशन दायर की थी। - EC ने हाईकोर्ट के सामने ईवीएम का डिमॉन्स्ट्रेशन किया, जिसके बाद कोर्ट ने मामले में दखल से इनकार कर दिया। - इलेक्शन में पिल्लई ने कांग्रेस के एसी जोस को 123 वोट से हरा दिया। फिर जोस ने हाईकोर्ट में अपील कर दी। हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया तो मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। इसके बाद बैलेट पेपर से ही चुनाव करवाए गए। इनमें जोस को जीत मिली। 4# पूरे देश में आम चुनाव में ईवीएम का इस्तेमाल कब से हो रहा है? - 1977 में ट्रांसपेरेंसी के लिए इलेक्शन कमीशन ने इलेक्ट्रॉनिक मेकैनिज्म बनाने के लिए कहा। तब जाकर ईवीएम बनी। 6 अगस्त 1980 को आयोग ने राजनीतिक दलों को ईवीएम दिखाई। सभी पक्षों पर गौर करने के बाद सभी दलों ने पॉजिटिव फीडबैक दिया। - भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को ईवीएम बनाने की जिम्मेदारी मिली। सबसे पहले 1982 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर केरल में ईवीएम से वोटिंग हुई। - पीपुल्स रिप्रेजेंटेशन (RP) एक्ट 1951 में अमेंडमेंट के बाद नवंबर 1998 में EC ने एक्सपेरिमेंट के तौर पर देश की 16 विधानसभा सीटों पर ईवीएम का इस्तेमाल किया। इनमें 5 मध्य प्रदेश, 5 राजस्थान और 6 दिल्ली की सीटें थीं। इसके बाद 2004 से पूरे देश में चुनाव के दौरान ईवीएम का इस्तेमाल किया जाने लगा। यानी 24 साल लग गए ईवीएम को वोटिंग प्रॉसेस का हिस्सा बनाने में। 5# इस्तेमाल शुरू होने के बाद कब-कब उठे ईवीएम पर सवाल? - 2004 में इस्तेमाल शुरू होते ही ईवीएम पर सवाल उठने लगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2009 में खुद बीजेपी ने ही ईवीएम को लेकर धांधली का आरोप लगाया। 2009 में ही हुए विधानसभा चुनावों में ईवीएम पर सवाल उठा। तमिलनाडु में AIADMK ने ईवीएम की जगह बैलेट से चुनाव की मांग की। 2014 में भी विपक्षी दलों ने ईवीएम के जरिए धांधली होने का मसला उठाया। 6# रियलिटी टेस्ट कब हुआ? - अगस्त 2009 में इलेक्शन कमीशन ने उन लोगों के सामने ईवीएम को डिमॉन्स्ट्रेट किया, जो उस पर सवाल उठाते थे। - 10 राज्यों में इस्तेमाल की गई 100 ईवीएम को डिमॉन्स्ट्रेशन के लिए रखा गया। सवाल उठाने वाला कोई भी व्यक्ति उसमें गड़बड़ी नहीं निकाल पाया। कुछ ने तो इस डिमॉन्स्ट्रेशन से ही इनकार कर दिया। - इसके बाद EC ने कहा, ईवीएम को रिप्रोग्राम्ड नहीं किया जा सकता और ना उसे किसी बाहरी डिवाइस से कंट्रोल किया जा सकता है। ये वोटर को केवल एक बार वोट डालने के लिए डिजाइन की गई है। 7# कैसे काम करती है EVM? - EC की वेबसाइट पर ईवीएम के बारे में सवालों के जवाब दिए गए हैं। ईवीएम में दो यूनिट होती हैं। पहली कंट्रोल यूनिट, दूसरी बैलेट यूनिट। दोनों को 5 मीटर केबल से जोड़ा जाता है। कंट्रोल यूनिट पोलिंग ऑफिसर के पास होती है और बैलेट यूनिट कम्पार्टमेंट में रखी होती है। पोलिंग अफसर के बैलेट बटन दबाने के बाद वोटर अपना वोट डालता है। इसके लिए कैंडिडेट के सिंबल के सामने लगा नीला बटन दबाना होता है। - ईवीएम की वोट कैपिसिटी 3840 है, जबकि एक पोलिंग स्टेशन पर वोटर्स की संख्या 1500 के आसपास होती है। अगर किसी इलाके में पावर कनेक्शन नहीं है, तो वहां भी ईवीएम काम कर सकती है, क्योंकि ये 6 वोल्ट की सिंपल बैटरी से चल सकती है। 8# किन हालात में नहीं हो सकता है ईवीएम का इस्तेमाल - ईवीएम में एक बार में 64 कैडिंडेट्स के लिए वोट दिए जा सकते हैं। एक बैलेटिंग यूनिट की कैपिसिटी 16 कैंडिडेट्स की होती है। ऐसे में, दूसरे बैलेटिंग यूनिट्स को जोड़ा जाता है। लेकिन कैंडिडेट्स 64 से ज्यादा होते हैं, तो बैलेट पेपर का इस्तेमाल करना पड़ता है। 9# ईवीएम इस्तेमाल के फायदे क्या? - ईवीएम में 1 मिनट में 5 वोट ही डाले जा सकते हैं, यानी 30 मिनट में केवल 150। पोलिंग ऑफिसर के पास वोटिंग बंद करने का भी ऑप्शन होता है। ऐसे में, बूथ कैप्चरिंग जैसे हालात में ईवीएम बैलेट पेपर से ज्यादा सेफ है। - मशीन में इस्तेमाल की गई माइक्रोचिप में वोटिंग का डाटा 10 साल से ज्यादा वक्त तक सेफ रहता है। ईवीएम के इस्तेमाल से करोड़ों बैलेट पेपर की प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्टेशन और डिस्ट्रिब्यूशन में काफी कमी आ जाती है। इसके अलावा काउंटिंग के बाद रिजल्ट कुछ ही घंटों में दिए जा सकते हैं। 10# आयोग का क्या कहना है? - चुनाव आयोग का कहना है कि भारतीय ईवीएम की तुलना दूसरों देशों की ईवीएम से करना गलत है, क्योंकि दूसरे देशों में पर्सनल कम्प्यूटर वाले ईवीएम का इस्तेमाल होता है जो ऑपरेटिंग सिस्टम से चलती हैं। इसलिए उन्हें हैक किया जा सकता है। जबकि हमारी ईवीएम किसी दूसरे नेटवर्क से कनेक्ट नहीं हो सकती। न ही उसमें अलग से कोई इनपुट डाला जा सकता है। 11# किन देशों में लगी है रोक? यूरोप और अमेरिका में ईवीएम के इस्तेमाल पर रोक लगाई जा चुकी है। नीदरलैंड भी ट्रांसपेरेंसी की कमी का हवाला देते हुए पाबंदी लगा चुका है। आयरलैंड ने 3 साल और करीब 350 करोड़ रुपए रिसर्च पर खर्च करने के बाद ट्रांसपेरेंसी का हवाला देकर ईवीएम पर रोक लगा दी। इटली ने भी कहा कि इससे नतीजे बदले जा सकते हैं और वापस बैलेट पर आ गए। 12# आगे क्या होगा? - इलेक्शन कमीशन ने 2014 के लोकसभा चुनाव के वक्त से EVM में बटन दबाने के बाद वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) की शुरुआत की थी। अभी 100% पोलिंग बूथ पर इसका इस्तेमाल शुरू नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर पर ट्रांसपेरेंसी के लिए ईवीएम में तीसरी यूनिट VVPAT भी जोड़ी है। - VVPAT से फायदा यह है कि जब भी वोटर बटन दबाता है तो ईवीएम के पास रखी मशीन से एक स्लिप निकलती है। एटीएम की तर्ज पर यह पर्ची निकलती है। इस पर प्रिंट रहता है कि वोट किसे गया। इसे बैलेट बाक्स में रख लिया जाता है। ये बॉक्स आयोग के पास होते हैं। इस तरह वोटर आश्वस्त हो जाता है कि उसका वोट दर्ज हो गया है। - इस बार पूरे गोवा, पंजाब की 20 और यूपी की 30 सीटों पर इस टेक्नीक के साथ चुनाव हुआ है। - अब चुनाव आयोग ट्रांसपेरेंसी को साबित करने के लिए इन पर्चियों की गिनती करा सकता है। - केजरीवाल ने भी VVPAT पर भरोसा जताया है। उन्होंने मांग की है कि पंजाब में जिन जगहों पर VVPAT का इस्तेमाल हुआ है, वहां के वोटों के ट्रेन्ड की बाकी जगहों के वोटों की तुलना करके देखा जाए। - 2019 के लोकसभा चुनाव में ट्रांसपेरेंसी के लिए VVPAT टेक्नीक को जोड़ा जाएगा।

EVM गड़बड़ीः विवाद के बाद हटाए गए भिंड के IAS और IPS को वापस सौंपी जिम्मेदारी

EVM गड़बड़ीः विवाद के बाद हटाए गए भिंड के IAS और IPS को वापस सौंपी जिम्मेदारी

Last Updated: April 17 2017, 10:40 AM

भोपाल। दो सप्ताह बाद ही इलैया राजा टी और अनिल सिंह कुशवाह की भिंड में वापसी हो गई है। राज्य शासन ने छुट्टी के दिन रविवार को आदेश जारी कर इलैया राजा को भिंड का कलेक्टर और कुशवाह को एसपी पदस्थ कर दिया। पढ़ें पूरी खबर... -अटेर (भिंड) में उपचुनाव के दौरान कांग्रेस की शिकायत पर इन दोनों को भिंड से हटा दिया गया था। इनकी जगह वी किरण गोपाल को कलेक्टर और सुशांत कुमार सक्सेना को एसपी पदस्थ किया गया था। उपचुनाव का रिजल्ट 13 अप्रैल को आने के बाद शासन ने इनकी वापसी कर दी। -आधिकारिक जानकारी के अनुसार भिंड के पुलिस अधीक्षक सुशांत कुमार सक्सेना को शहडोल पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। वहीं, पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक के पद पर पदस्थ अनिल सिंह कुशवाह को भिंड का नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है। -अटेर उपचुनाव के पहले इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में कथित गड़बड़ी की शिकायत के बाद भिंड के पुलिस अधीक्षक अनिल सिंह कुशवाह को वहां से हटाकर पुलिस मुख्यालय भोपाल में सहायक महानिरीक्षक के पद पर पदस्थ किया गया था। उनके स्थान पर शहडोल पुलिस अधीक्षक सुशांत कुमार सक्सेना को भिंड का नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया था। गोपाल फिर एनआरएचएम के संचालक बने निर्वाचन आयोग निर्देश पर चुनाव के दौरान भिंड कलेक्टर बनाए गए 2008 बैच के आईएएस अधिकारी वी किरण गोपाल को फिर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का संचालक व अपर प्रबंध संचालक एमपी ट्राइफेक पदस्थ कर दिया गया है। इसी तरह सुशांत कुमार सक्सेना को भिंड एसपी से हटाकर उन्हें शहडोल एसपी बनाया गया है। इसलिए गहराया था विवाद ईवीएम गड़बड़ी मामले में भिंड कलेक्टर और एसपी सहित एक दर्जन से अधिक अधिकारियों को हटाने के निर्देश दिए गए थे। उल्लेखनीय है कि परीक्षण के दौरान ईवीएम में से पंजा का निशान दबाने के बाद भी कमल की पर्ची निकलने के बाद विवाद गहरा गया था।

मोदी सरकार वादे पूरे करने में फेल, BJP अब सांप्रदायिकता फैलाएगी: दिग्विजय

मोदी सरकार वादे पूरे करने में फेल, BJP अब सांप्रदायिकता फैलाएगी: दिग्विजय

Last Updated: April 16 2017, 15:55 PM

नई दिल्ली. कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी दिग्विजय सिंह ने मोदी सरकार पर वादों को पूरा करने में फेल होने का आरोप लगाया है। उन्होंने रविवार को कहा, बीजेपी वादे पूरे न होने से नाराज लोगों को शांत करने के लिए अब देश में सांप्रदायिकता फैलाएगी। नहीं सुधर रहे आर्थिक हालात... - न्यूज एजेंसी के मुताबिक दिग्विजय सिंह ने कहा, देश के आर्थिक हालात सुधर नहीं रहे हैं। कोई निवेश भी नहीं हो रहा है। विनिर्माण क्षेत्र (मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर) में बढ़ोतरी भी काफी नहीं है। छोटे बिजनेस बंद हो रहे हैं, लोगों को नौकरियां भी नहीं मिल रही हैं, जो काम कर रहे थे, उनकी भी नौकरी चली गई है। काला धन भी देश में लाया नहीं जा सका है। - सिंह बोले, लोग इस सबसे बेहद नाराज हैं, जल्द ही बीजेपी के पास कोई एजेंडा नहीं होगा और तब वह लोगों को शांत करने के लिए सांप्रदायिकता का सहारा लेगी। पाक से जंग भी कर सकते हैं मोदी - एक प्राइवेट फंक्शन में शिरकत करने जोधपुर पहुंचे दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा, वादे पूरे नहीं होने पर 2019 का चुनाव जीतना बीजेपी के लिए मुश्किल है। इसलिए सत्ता में वापसी के लिए मोदी पाकिस्तान से जंग पर भी विचार कर सकते हैं। मोदी सरकार इसके लिए माहौल बना सकती है। कश्मीर नीति पर उठाए सवाल - सिंह ने मोदी सरकार की कश्मीर नीति पर भी सवाल उठाया। ट्विटर पर लिखा, मैं मानता हूं कि अगर आप कश्मीर चाहते हैं तो पहले आपको कश्मीरियों को जीतना होगा। पीडीपी और बीजेपी के बीच बुनियादी मुद्दों पर विरोधाभास है, जिससे कश्मीरी लोगों का उनमें भरोसा नहीं बन सकता। ईवीएम पर EC को भी आड़े हाथों लिया - ईवीएम से छेड़छाड़ के मसले पर सिंह इलेक्शन कमीशन को भी आड़े हाथों लिया। ट्वीट कर कहा, ईसी ने ईवीएम हैकिंग के एतराज को हल्के में लिया है। उसे सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़ की संभावना की जांच की इजाजत देनी चाहिए। सिंह ने दावा किया कि उनसे एक ऐसा शख्स मिला था, जिसने 2 करोड़ रुपए के बदले में एक विधानसभा चुनाव के नतीजे बदलने की पेशकश की थी। - इस पर बीजेपी के स्पोक्सपर्सन सुधांशू त्रिवेदी ने कहा, दिग्विजय सिंह के बयान को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए, इन्होंने ही कहा था कि मुंबई हमले में आरएसएस का हाथ है।

मुलायम की जगह लेने में जुटे अखिलेश, होर्डिंग से भी हटाए गए सपा संरक्षक

मुलायम की जगह लेने में जुटे अखिलेश, होर्डिंग से भी हटाए गए सपा संरक्षक

Last Updated: April 16 2017, 11:05 AM

लखनऊ. अखिलेश यादव ने शनिवार को पार्टी ऑफिस में सपा के मेंबरशिप कैम्पेन की शुरुआत की। इस प्रोग्राम से सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव पूरी तरह गायब रहे। मौजूदगी तो दूर की बात है, होर्डिंग​-पोस्टर में भी मुलायम की तस्वीर नजर नहीं आई। जबकि पोस्टर पर लोहिया और जनेश्वर की फोटो थीं। सपा में इस बदलाव पर पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स ने DainikBhaskar.com से कहा कि अखिलेश अब नेशनल लेवेल पर मुलायम की जगह लेना चाहते हैं। अखिलेश ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस... - अखिलेश यादव ने मेंबरशिप कैम्पेन की शुरूआत करने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। इस दौरान उनके पीछे डेमो पर्ची की होर्डिंग लगाई गई थी। होर्डिंग पर जनेश्वर मिश्र, राम मनोहर लोहिया को सबसे ऊपर रखा गया था, लेकिन मुलायम को जगह नहीं दी गई थी। नेशनल लेवेल पर खुद को प्राेजेक्ट करने की कोशिश - पॉलिटिकल एक्सपर्ट रतन मणि लाल ने कहा, अखिलेश यादव अब पूरी तरह से पार्टी पर अपना कब्जा जमा चुके हैं। वो किसी भी तरह से अपने किए फैसलों से पीछे नहीं हटना चाहते हैं। अखिलेश पार्टी में और वर्कर्स के बीच पहले ही ये मैसेज दे चुके हैं कि अब वो ही पार्टी के सबकुछ हैं। - अब इसी बात को वो नेशनल लेवेल पर अन्य पार्टियों के नेताओं को भी बताना चाहते हैं। एक तरह से अखिलेश खुद को मुलायम की जगह नेशनल लेवेल पर प्रोजेक्ट कर रहे हैं। तीसरे मोर्चे का लीडर बनना चाहते हैं - रतन मणि लाल ने कहा, जिस तरह से अखिलेश तीसरे मोर्चे की पहल कर रहे हैं। पहले यही काम मुलायम सिंह यादव किया करते थे। उन्हीं के नक्शे कदम पर अखिलेश चल रहे हैं। इस बार के तीसरे मोर्चे में अखिलेश यादव खुद को लीडर बताने में लगे हैं। यही वजह है कि वो अब अपने पिता की तस्वीर को भी मेंबरशिप की पर्चियों से हटा रहे हैं। मुलायम वाला रुतबा हासिल होना मुश्किल - सीनियर जर्नलिस्ट हेमन्त तिवारी ने कहा, अखिलेश अपने पिता मुलायम को पूरी पार्टी से अलग-थलग कर चुके हैं। उन्हें कहने भर के लिए संरक्षक बनाया हुआ है। अखिलेश काम तो मुलायम की तरह ही कर रहे हैं, लेकिन मुलायम वाला रुतबा वो शायद ही हासिल कर पाएं, क्योंकि ममता बनर्जी, नीतीश कुमार, शरद पवार, एआईडीएमके और सबसे अहम मायावती कभी भी तीसरे मोर्चे का हेड अखिलेश यादव को नहीं बनने देंगे। - अखिलेश पारी तो बहुत लम्बी खेलना चाहते हैं, लेकिन मुलायम को एक झटके में पार्टी से बाहर कर दिया। इससे गलत मैसेज गया है। जिस तरह से अखिलेश यादव मायावती से हाथ मिलाने को बेचैन दिख रहे हैं, वो पूरी सपा के लिए भारी पड़ेगा।

धोखा देकर बनी योगी सरकार, BJP के खिलाफ अलायंस को तैयार: अखिलेश

धोखा देकर बनी योगी सरकार, BJP के खिलाफ अलायंस को तैयार: अखिलेश

Last Updated: April 15 2017, 16:25 PM

लखनऊ. अखिलेश यादव ने शनिवार को पार्टी ऑफिस में समाजवादी पार्टी के मेंबरशिप कैम्पेन की शुरुआत की। इस मौके पर उन्होंने बीजेपी की योगी सरकार, एंटी-रोमियो स्क्वॉड और ईवीएम का मुद्दा फिर उठाया। उन्होंने कहा कि सपा का वोट बीजेपी को चला गया। हम चाहते हैं कि भविष्य में इलेक्शन बैलेट के जरिए हों। यह सरकार धोखा देकर बनी है। बीजेपी के झूठ के खिलाफ अलायंस बनाने के लिए तैयार हैं। अखिलेश बोले कि बीजेपी वाले तो हमें हिंदू ही नहीं समझते। अब तो ऐसा है कि मंदिर जाऊं तो पहले फोटो ट्वीट कर दूं। हमें तो बीजेपी से पूछना पड़ेगा कि हम हिंदू हैं या नहीं। अखिलेश बोले- किसी से भी गठबंधन को तैयार... - अखिलेश यादव ने बीजेपी के खिलाफ गठबंधन को लेकर कहा, आने वाले समय में देश में जो भी गठबंधन बनेगा समाजवादी पार्टी उसमें अहम भूमिका निभाएगी। हमारी पार्टी किसी के भी साथ में अलायंस करने के लिए तैयार है। - बता दें कि मायावती ने भी शुक्रवार को अम्बेडकर जयंती के मौके पर कहा था- ईवीएम के मुद्दे पर बीजेपी विरोधी पार्टियों से हाथ मिलाने में परहेज नहीं है। - उधर, यूपी सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने कहा- बुआ और बुआ जी का भतीजा अपनी हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ना चाहते हैं। अखिलेश बोले- EVM पर भरोसा नहीं किया जा सकता - अखिलेश ने आगे कहा- ईवीएम पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोग अभी भी भरोसा नहीं कर पा रहे कि उनका वोट कहां गया। बटन साइकिल पर दबाया होगा, वोट बीजेपी पर चला गया होगा। ये इलेक्शन कमीशन को बताना चाहिए कि मशीन कैसे खराब हो जाती है? ईवीएम में सॉफ्टवेयर कौन बना रहा है? - गरीब कह रहे हैं कि हमने तो वोट सपा को ही दिया था, लेकिन सपा को वोट मिला क्यों नहीं? - ईवीएम कब खराब हो जाए, सॉफ्टवेयर कब खराब हो जाए, कुछ नहीं कहा जा सकता। मशीन पर कोई भरोसा नहीं किया जा सकता। हमें बैलेट पर 100 फीसदी भरोसा है। आगे के इलेक्शन बैलेट के जरिए कराए जाएं। अखिलेश ने कहा- कानून व्यवस्था पर क्या कहें, लोग जिंदा जला दिए जा रहे हैं - अखिलेश ने योगी सरकार के 24 घंटे बिजली देने के प्लान पर कहा- बिजली पर मेरी सरकार ने बहुत काम किया है। बिजली पर अभी हमारी सरकार का बजट खर्च हो रहा है। अभी समाजवादी सरकार की योजनाएं चल रही हैं। - वहीं उन्होंने लॉ एंड ऑर्डर पर कमेंट करते हुए कहा- कानून व्यवस्था पर क्या कहें। लोग जिंदा जला दिए जा रहे हैं, फांसी पर लटका दिए जा रहे हैं। यही अगर समाजवादी सरकार में होता तो आपके चैनल से इतनी आग निकलती कि हम घरों में नहीं बैठ पाते। रोमियो को बदनाम नहीं करना चाहिए। - अखिलेश ने एंटी रोमियो स्क्वॉड पर कहा- रोमियो के नाम पर लोग पिट रहे हैं, बदनाम हो रहे हैं। कम से कम रोमियो कि असली कहानी बता देते आप (योगी सरकार) लोग। - जो लोग स्क्वॉड चला रहे हैं, उन्हें रोमियो को बदनाम नहीं करना चाहिए। रोमियो की कहानी तो पता होगी आपको? रोमियो ने जहर खा लिया था, उसे चिट्ठी वक्त पर नहीं मिली थी। इसके नाम पर लोग घरों में घुसे जा रहे हैं।

यहां गिल्ली-डंडा खेलते नजर आए एक्टर राज बब्बर, देखें PHOTOS

यहां गिल्ली-डंडा खेलते नजर आए एक्टर राज बब्बर, देखें PHOTOS

Last Updated: April 15 2017, 15:14 PM

लुधियाना. एक्टर और राजनेता राज बब्बर दिल से बच्चों जैसे ही हैं। यह बात तब सामने आई, जब वह यहां ग्रीनलैंड कान्वेंट स्कूल में उड़ान प्रोग्राम में चीफ गेस्ट बनकर पहुंचे। स्कूल ग्राउंड में ट्रेडिशन खेलों का प्रदर्शन करते स्टूडेंट्स से गिल्ली-डंडा लेकर राज बब्बर ने ऐसे शाट जमाए कि देखने वाले भी हैरान हो गए। बोले, मक्की की रोटी, सरसों का साग खा कर भूला हुआ स्वाद याद गया... - इस दौरान राज बब्बर ने कहा कि मक्की की रोटी और सरसों का साग खाकर भूला हुआ स्वाद फिर से याद गया। - बच्चों ने पंजाबियत के इस कार्यक्रम में छोटी सी झलक दिखा कर पुराने पंजाब की याद दिला दी है। - जालंधर बाईपास स्थित ग्रीन लैंड सीनियर सेकेंडरी स्कूल में सिल्वर जुबली कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए राज बब्बर स्कूल पहुंचे थे। उड़ान नाम के कार्यक्रम में 25 सालों में हासिल की गई सफलता के बारे में स्टूडेंट्स ने शानदार कार्यक्रम पेश किया। यूपी की हार पर बोलें, जो हुआ बुरा हुआ... - स्टूडेंट्स द्वारा विभिन्न तरह के कार्यक्रम पेश किए गए। स्कूल के ग्राउंड में स्टूडेंट्स ने गिल्ली डंडा, गतका, गिद्दा और भंगड़ा की परफॉर्मेंस भी दिखाई। - इस मौके पर राज बब्बर ने गिल्ली डंडा भी खेला। गतका, गिद्दा, भंगड़ा की उन्होंने जमकर सराहना की। - राजनीति से जुड़े सवाल भी इस मौके पर राज बब्बर से पूछे गए। जिसमें ईवीएम मशीनों पर उठ रहे सवाल पर उन्होंने कहा कि चुनावों पर हर किसी को भरोसा होता है। - चाहे वो हाथ उठा कर हो या जैसे भी। अगर सवाल उठे हैं तो इन्हें सेटिस्फाई करना भी काफी अहम है। - अगर सब ठीक है तब फिर कोई बात ही नहीं। यूपी में मायावती द्वारा कांग्रेस को समर्थन देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वक्त बताएगा क्या होगा। - समर्थन के लिए पार्टियों की एक सी सोच काफी मायने रखता है। यूपी में कांग्रेस की हार के कारण पर उन्होंने कहा कि हार के कई कारण होते हैं। - सपा के साथ समर्थन करने के कारण कहीं ये हार नहीं हुई इस पर बब्बर बोले कि जो हुआ बुरा हुआ। लेकिन इसके साथ हमें चलना ही होगा। अगर हम जीतते तो भी यही होता। - प्रियंका के कांग्रेस में आने और प्रतिनिधित्व करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सब चीजें खुद ही क्लियर हो जाएंगी। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें... फोटो: कुलदीप काला

EVM मुद्दे पर BJP विरोधी पार्टियों से हाथ मिलाने में परहेज नहीं: मायावती

EVM मुद्दे पर BJP विरोधी पार्टियों से हाथ मिलाने में परहेज नहीं: मायावती

Last Updated: April 14 2017, 16:34 PM

लखनऊ. मायावती ईवीएम मुद्दे पर बीजेपी विरोधी पार्टियों से हाथ मिलाने को तैयार हैं। यहां डॉ. भीमराव आंबेडकर की 126वीं जयंती पर हुए कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही। बता दें कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में हाल ही में हुए असेंबली इलेक्शन में मायावती ने ईवीएम से छेड़छाड़ किए जाने का आरोप लगाया था। मैं यूपी को पाकिस्तान नहीं बनने दूंगी... - मायावती ने कहा, मोदी ने योगी को सीएम बनाकर दलितों, ब्राह्मणों, पिछडों के साथ धोखा किया है। - यूपी चुनावों के दौरान हमारे ऊपर सबसे ज्यादा मुसलमानों को टिकट देने का आरोप लगाकर दुष्प्रचार किया गया। कहा गया कि ऐसे तो उत्तर प्रदेश पाकिस्तान बन जाएगा। - लेकिन जब हमारी सरकार पूर्ण बहुमत के साथ बनी थी, तब भी कई मुसलमान जीत कर आए थे। तब भी हमने यूपी को पाकिस्तान नहीं बनने नहीं दिया था। - उन्होंने कहा, मैं सबको आश्वस्त करती हूं कि आगे भी मैं यूपी को पाकिस्तान नहीं बनने दूंगी। सभी दल अपने फायदे के लिए मना रहे बाबा साहब की जयंती - मायावती ने आगे कहा, वोट और स्वार्थ में सभी दल बाबा साहब की जयंती मना रहे हैं। उनके नाम पर कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। जब तक डॉ. अाम्बेडकर जीवित रहे, विरोधियों ने खूब रोड़े पैदा किए। - कुछ सालों से भाजपा कह रही है कि वो दलितों की सबसे बड़ी हितैषी है, जो कि कोरा झूठ है। - बीजेपी ने यूपी में ब्राह्मण प्रदेश अध्यक्ष को हटाकर बैकवर्ड क्लास को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। - जब चुनाव जीतकर आए तो बैकवर्ड क्लास को सीएम नहीं बनाया गया। इससे बीजेपी ने ब्राह्मणों को भी धोखा दिया और बैकवर्ड क्लास को भी। पढ़कर स्पीच देने की वजह बताई - मायावती पर पढ़कर स्पीच देने के लिए निशाना साधा जाता रहा है। शुक्रवार को हुए इस प्रोग्राम में उन्होंने इसकी वजह बताई। - उन्होंने कहा कि 1996 में उनका ऑपरेशन हुआ था, जिसमें गले की दो में से एक ग्लैंड निकाल दी गई थी। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें जोर से बोलने को मना किया था। पढ़कर स्पीच देने से गले पर जोर नहीं पड़ता इसलिए वो ऐसा करती हैं। भाई को बनाया पार्टी उपाध्यक्ष - इस दौरान मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार को पार्टी का उपाध्यक्ष बनाने का एलान किया। - मायावती ने कहा कि आनंद हमेशा बिना स्वार्थ के पार्टी के लिए काम करेंगे और कभी भी एमपी, एमएलए, मिनिस्टर या सीएम नहीं बनेंगे। भाई को जेल जानें से बचाने के लिए किया पार्टी में शामिल - इसपर dainikbhaskar.com के पाॅलिटिकल एक्सपर्ट रणविजय सिंह का कहना है, अपने भाई को जेल जाने से बचाने के लिए मायावती ने ये फैसला लिया है, क्योंकि योगी सरकार पिछली सरकारों के कामों की जांच करवाने का एलान कर चुके है। जिसमें स्मारक, पार्क भी शामिल हैं। - बता दें, कई बार मायावती के भाई के ऊपर स्मारक-पार्क बनवाने को लेकर के अरबों रू के घोटाले के आरोप लगे हैं। इसीलिए अब इन्हें पाॅलिटिकल प्रोटेक्शन दिया जा रहा है। - इससे पार्टी इनका बचाव करेगी और दलितो की सिम्पैथी भी मिलेगी। मायावती के बाद अब ये दूसरी पोजीशन पर आ गए हैं। क्या कहना है एक्सपर्ट आदित्य सिंह का ? - सीनियर जर्नलिस्ट आदित्य सिंह का कहना है, मायावती एक बार फिर से पूरे विपक्ष के|ईवीएम के खिलाफ लामबंद करने में जुटी हैं, सबसे बड़ी बात ये हैं कि इस बार कांग्रेस ने इससे दूरी बनाई हुई है। - अब ऐसी स्थित में जब मुलायम अपनी ही पार्टी से बाहर हैं, कांग्रेस ने ईवीएम के वोट बैंक से किनारा किया हुआ है। ऐसे में मायावती विपक्ष के सामने एक बड़ी नेता के रूप में सामने आ रही हैं। अब वो दिन भी जल्दी ही देखने को मिलेगा जब ममता बैनर्जी मायावती विपक्ष में मुख्य भूमिका में नजर आएंगी।

22 साल से थाने के कैंपस में बदहाल हालत में खड़े हैं बाबा साहेब, पढ़े पूरा मामला

22 साल से थाने के कैंपस में बदहाल हालत में खड़े हैं बाबा साहेब, पढ़े पूरा मामला

Last Updated: April 14 2017, 15:48 PM

शाहजहांपुर. पूरे प्रदेश में बाबा साहेब डॉ. भीम राव अंबेडकर की जयंती मनाई जा रही है। सभी पॉलिटिकल पार्टियां उनके सम्मान में कसीदे गढ़ रहे हैं, लेकिन हकीकत कुछ अलग ही दिख रही है। यूपी के शाहजहांपुर में थाने के कैंपस में पिछले 22 साल से अंबेडकर की मूर्ति बदहाल हालत में सजा काट रही है, लेकिन उन्हें आजाद कराने वाला कोई नहीं है। आगे पढ़िए थाने में कैसे पहुंची अंबेडकर मूर्ति& - दरअसल, 29 जुलाई 1995 में जब प्रदेश में पहली बार बीएसपी सरकार बनी तो अंबेडकर के अनुयाईयों ने इस मूर्ति को कटरा के चौराहे पर स्थापित किया था। जब कुछ लोगों ने विरोध किया तो तत्कालीन तहसीलदार और सीओ ने प्रतिमा को चौराहे से उठवाकर थाने के मालखाने में रखवा दिया। - इसके बाद से डॉ. अंबेडकर की ये मूर्ति लावारिस हालत में थाने के कैंपस में सजा काट रही है। पिछले 22 सालों से गंदगी और कचरे के बीच ये मूर्ति रखी हुई है। BSP ने भी नहीं दिया ध्यान - बीएसपी जिला अध्यक्ष उदयवीर सिंह का कहना है, कैंपस में रखी प्रतिमा को कहीं अच्छी जगह स्थापित करने की कोशिशें जारी है, लेकिन जिला प्रशासन साथ नहीं दे रहा है। - हम कोशिश कर रहे हैं। जल्द ही प्रतिमा को वहां से निकालकर कोई अच्छी जगह चिंहित करवाएंगे। - बता दें, पिछली बार भी इस मामले पर जिला अध्यक्ष ने यही कहा था, लेकिन अभी तक उन्हे सफलता नहीं मिली। क्या कहते हैं लोग? -स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉ. भीम राव अंबेडकर की मूर्ति को इस हाल में देखकर शर्म आती है। बाबा साहब के नाम पर नेता सिर्फ पॉलिटिक्स करते हैं, चाहे वो बसपा सहित किसी पार्टी के क्यों न हों। आगे की स्लाइड की 3 फोटोज देखिए डॉ. भीम राव अंबेडकर की बदहाल हालत में खड़ी है मूर्ति...

UP राज्य न‍िर्वाचन आयोग ने इलेक्शन कमीशन को ल‍िखा, EVM से नहीं कराया जा सकता नगरपाल‍िका चुनाव

UP राज्य न‍िर्वाचन आयोग ने इलेक्शन कमीशन को ल‍िखा, EVM से नहीं कराया जा सकता नगरपाल‍िका चुनाव

Last Updated: April 13 2017, 20:39 PM

लखनऊ. यूपी राज्य निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को नेशनल इलेशन कमीशन को लिखा है कि तकनीकी फॉल्ट के कारण प्रदेश में आगामी नगरपालिका का चुनाव ईवीएम से नहीं कराया जा सकता है। राज्य निर्वाचन आयोग ने 2006 में ईवीएम मशीन से हुए टेक्निकल फॉल्ट का हवाला दिया है। इसलिए या तो नई मशीनें आए या बैलेट चुनाव पेपर पर कराई जाए। आगे पढ़िए यूपी चुनाव आयोग के एसीईओ पीके पांडे ने क्या कहा... - यूपी चुनाव आयोग के एसीईओ पीके पांडे ने बताया कि निकाय चुनावों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल होगा। - बैलेट पेपर का इस्तेमाल निकाय चुनावों में पहले से होता रहा है, इसमें कोई बड़ी बात नहीं है। ईवीएम मशीनों का इस्तेमाल नेशनल इलेक्शन कमीशन के निर्देष पर ही होगा। हालांकि, हमें ऐसा कोई भी निर्देश अभी नहीं मिला है। मायावती ने मोदी सरकार पर ईवीएम से छेड़छाड़ का लगाया है आरोप - बता दें, बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने मोदी सरकार पर इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। उन्होंने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की शरण भी ली थी। - साथ ही मायावती ने इस मुद्दे को राज्यसभा में भी उठाया था। राज्यसभा में मायावती ने बीजेपी को बेईमान पार्टी बताया था। - बीएसपी अब इस मुद्दे पर सड़क पर उतर गई है। इसी कड़ी में मंगलवार को बीएसपी विरोध के स्वरूप काला दिवस मनाई थी। - गौरतलब है कि यूपी इलेक्शन 2012 में 80 सीट जीतने वाली बसपा को 2017 के विधानसभा चुनाव में महज 19 सीट ही मिली है। 16 विपक्षी दल ने EC से कहा- EVM पर भरोसा नहीं - बता दें, पांच राज्यों (यूपी, पंजाब, गोवा, उत्तराखंड, मणिपुर) में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद से ही ईवीएम को लेकर सवाल उठने शुरू हुए। कांग्रेस, आप, बीएसपी और सपा के नेताओं ने जोर-शोर से ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगाया। - इसी कड़ी में इस मामले को लेकर कांग्रेस समेत 16 विपक्षी दलों का एक डेलीगेशन सोमवार (10 अप्रैल) को इलेक्शन कमीशन के दफ्तर पहुंचा। - डेलीगेशन ने ईसी ऑफिशियल्स से कहा कि उनका अब ईवीएम पर भरोसा नहीं है। सभी दलों ने बैलेट पेपर के पुराने सिस्टम को बहाल करने की मांग की। - सभी विपक्षी दलों ने यह तय किया कि ईसी के सामने इस साल आगे होने वाले चुनावों (गुजरात, हिमाचल प्रदेश) में 50% कॉन्स्टिट्वेंसीज में VVPAT (वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल) और बैलेट पेपर के इस्तेमाल की मांग रखी जाए। - हालांकि, 9 अप्रैल को ही चीफ इलेक्शन कमिशनर नसीम जैदी ने फैक्ट्स जारी कर यह दोहराया कि EVM पूरी तरह टेम्पर प्रूफ है, इसे बनाने वाली कंपनियां भी छेड़छाड़ नहीं कर सकती है। क्या है VVPAT? - इलेक्शन कमीशन ने 2014 के लोकसभा चुनाव के वक्त से EVM में बटन दबाने के बाद वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) की शुरुआत की थी। अभी 100% पोलिंग बूथ पर इसका इस्तेमाल शुरू नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर पर ट्रांसपेरेंसी के लिए ईवीएम में तीसरी यूनिट VVPAT भी जोड़ी है। - VVPAT से फायदा यह है कि जब भी वोटर बटन दबाता है तो ईवीएम के पास रखी मशीन से एक स्लिप निकलती है। एटीएम की तर्ज पर यह पर्ची निकलती है। इस पर प्रिंट रहता है कि वोट किसे गया। इसे बैलेट बॉक्स में रख लिया जाता है। ये बॉक्स आयोग के पास होते हैं। इस तरह वोटर आश्वस्त हो जाता है कि उसका वोट दर्ज हो गया है। - इस बार पूरे गोवा, पंजाब की 20 और यूपी की 30 सीटों पर इस टेक्निक के साथ चुनाव हुआ था। किन देशों में लगी है EVM पर रोक? - यूरोप और अमेरिका में ईवीएम के इस्तेमाल पर रोक लगाई जा चुकी है। नीदरलैंड भी ट्रांसपेरेंसी की कमी का हवाला देते हुए पाबंदी लगा चुका है। आयरलैंड ने 3 साल और करीब 350 करोड़ रुपए रिसर्च पर खर्च करने के बाद ट्रांसपेरेंसी का हवाला देकर ईवीएम पर रोक लगा दिया। इटली ने भी कहा कि इससे नतीजे बदले जा सकते हैं और वापस बैलेट पर आ गए।

EVM से छेड़छाड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से मांगा जवाब

EVM से छेड़छाड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से मांगा जवाब

Last Updated: April 13 2017, 17:27 PM

लखनऊ. इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (EVM) से छेड़छाड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। दरअसल, यूपी चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही मायावती ईवीएम मशीन में छेड़छाड़ की बात कह रही थीं। इसको लेकर उनकी पार्टी (BSP) ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दाखिल की थी। मामले की अगली सुनवाई 8 मई को होगी। कोर्ट ने कहा- EVM से चुनाव प्रणाली की बहुत बुराइयां दूर हुईं - बीएसपी ने कोर्ट से भविष्य में बैलेट पेपर से चुनाव कराने या ईवीएम में VVPAT का इस्तेमाल अनिवार्य करने की मांग की है। पार्टी की तरफ से वरिष्ठ वकील पी. चिदंबरम ने साफ कर दिया है कि वो यूपी/उत्तराखंड में दोबारा मतदान की मांग पर जोर नहीं देना चाहते। - बीएसपी के अलावा मामले पर कोर्ट ने सपा नेता अताउर रहमान की भी याचिका पर सुनवाई की। नेता की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल कोर्ट में पेश हुए। कांग्रेस और टीएमसी ने भी पक्ष बनने की अर्जी लगाई। - सुनवाई के दौरान जस्टिस जे चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली बेंच ने पूछा, आपको ईवीएम से क्या दिक्कत है? आप जो कह रहे हैं, उसका आधार क्या है? इसका जवाब देते हुए कपिल सिब्बल ने कहा- ज्यादातर डेवलप देशों में ईवीएम का इस्तेमाल नहीं होता। इस सिस्टम में गड़बड़ी की आशंका है। कोर्ट ने वोटिंग के बाद मशीन से पर्ची निकलने की व्यवस्था बनाने को कहा था, उस दिशा में भी ज्यादा काम नहीं हुआ। - इस पर बेंच ने कपिल सिब्बल से पूछा, ईवीएम सिस्टम उसी पार्टी की सरकार ने लागू नहीं किया, जिसके आप सदस्य हैं? हमें इस बात में दिलचस्पी नहीं है कि कौन से देश EVM का इस्तेमाल करते हैं और कौन नहीं। ईवीएम से चुनाव प्रणाली की बहुत सी बुराइयां दूर हुई हैं। - राजनीतिक पार्टियां किसी सिस्टम की शिकायत कर सकती हैं, लेकिन कोर्ट उनकी शिकायत से ज्यादा तरजीह इस बात को देगा कि तकनीकी विशेषज्ञ इस मसले पर क्या राय रखते हैं।

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