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Isolate Pakistan

  • भारत की PAK को वॉर्निंग: हमारे जवानों को छुआ भी तो बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी
    Last Updated: October 23 2016, 17:10 PM

    जम्मू. भारत ने कहा है कि अगर पाकिस्तान ने हमारे किसी भी जवान को अब छुआ भी तो इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। बीएसएफ के एडिशनल डीजी अरुण कुमार ने रविवार को शहीद जवान गुरनाम सिंह को श्रद्धांजलि देने के बाद कहा- 24 घंटे से बॉर्डर पर शांति है। लेकिन हम जानते हैं कि ये कभी भी खत्म हो सकती है। इसके लिए हम तैयार भी हैं। बेहतर है वो सबक लें.... - 21 अक्टूबर को पाकिस्तानी रेंजर्स के साथ मुठभेड़ में जख्मी होने के बाद गुरनाम को जम्मू के गवर्नमेंट हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया था। उन्हें सिर में गोली लगी थी। तीन दिन इलाज के बाद भी गुरनाम को बचाया नहीं जा सका। गुरनाम ने पाकिस्तानी घुसपैठ को नाकाम किया था। - अरुण कुमार ने गुरनाम को श्रद्धांजलि देने के बाद मीडिया से बात की। एडीजी से मीडिया ने पूछा कि क्या बॉर्डर पर शांति को तूफान के पहले की शांति माना जाना चाहिए? इस सवाल पर कुमार ने कहा, फिलहाल, मैं इस पर कुछ नहीं कहूंगा। लेकिन हम किसी भी हालात का सामना करने के लिए तैयार हैं। - हम पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दे रहे हैं। लेकिन मैं एक बात साफ कर देना चाहता हूं। अगर हमारे किसी भी जवान को छुआ भी गया तो फिर पड़ोसी को इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। - कुमार ने कहा- अगर उनकी तरफ से अब कोई भी हरकत होती है तो उन्हें वैसा ही जवाब मिलेगा, जैसा पहले भी दिया गया है। शहीद के पिता बोले- हमें जंग चाहिए - शहीद गुरनाम के पिता कुलबीर सिंह ने कहा- मोदी सरकार से अपील है कि हमें जंग चाहिए। गुरनाम बेहद साधारण परिवार से थे। उनके पिता स्कूल बस ड्राइवर हैं। - शनिवार देर रात बीएसएफ के आईजी डीके उपाध्याय ने कहा, उन्होंने बहादुरी के साथ दुश्मनों का सामना किया, हमने अपना बहादुर जवान खोया है। - बता दें कि गुरनाम रेजीमेंट 173 बीएसएफ (ई कंपनी) में तैनात थे। उन्हें सिर में गोली लगी थी। गुरनाम का जम्मू में इलाज चल रहा था। कैसे जख्मी हुए थे गुरनाम ? - 19-20 अक्टूबर के रात जम्मू के हीरानगर सेक्टर के बोबिया पोस्ट पर गुरनाम तैनात थे। रात में उन्होंने सरहद पर हलचल देखी। - करीब 150 मीटर दूर कुछ धुंधले चेहरे नजर आए। उन्होंने बिना देर किए साथियों को अलर्ट किया और ललकारने पर पता चला कि वह आतंकी है। - इसके बाद दोनों ओर से फायरिंग हुई। आतंकी वापस भाग खड़े हुए। - रिपोर्ट्स के मुताबिक 21 अक्टूबर को सुबह पाकिस्तानी रेंजर्स ने स्नाइपर रायफल्स से गुरनाम पर फायर किया। सिर में गोली लगने से वे जख्मी हो गए थे। साथी की बॉडी घसीटकर ले गए थे आतंकी - कठुआ के हीरानगर इलाके में बुधवार रात को गुरनाम के साथ बीएसएफ जवानों ने पाकिस्तानी घुसपैठ को नाकाम किया था। - इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया। इसमें एक आतंकी जख्मी साथी की बॉडी को घसीटते देखा गया। - बीएसएफ आईजी (जम्मू) डीके उपाध्याय ने बताया था- कठुआ सेक्टर के हीरानगर इलाके में कुछ मूवमेंट नजर आई थी। पता चला कि 6 आतंकी भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। - बीएसएफ जवानों ने इन्हें रोकने की कोशिश की। दोनों तरफ से फायरिंग हुई। आगे की स्लाइड में पढ़ें: सर्जिकल स्ट्राइक के बाद कहां-कहां हुए आतंकी हमले...

  • LoC पार हमला करना सही, भारत को अपनी हिफाजत का पूरा हक : US एम्बेसडर
    Last Updated: October 19 2016, 12:39 PM

    नई दिल्ली. अमेरिका ने एलओसी क्रॉस करके सर्जिकल स्ट्राइक किए जाने को बिल्कुल सही कदम बताया है। उसने ये भी कहा है कि आतंकवाद के मुद्दे पर अमेरिका हमेशा भारत के साथ खड़ा रहेगा। भारत में अमेरिकी एम्बेसडर रिचर्ड वर्मा ने एक इंटरव्यू में कहा कि उड़ी हमले के बाद से ही दोनों देश टच में थे। अमेरिका हालात पर नजर बनाए हुए था। उन्होंने कहा कि अमेरिका पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद 73% कम कर चुका है। अमेरिका से फौरन भारत लौटना पड़ा... - अंग्रेजी अखबार द हिंदू; को दिए इंटरव्यू में रिचर्ड वर्मा ने कई मुद्दों पर बात की। वर्मा ने माना कि उड़ी हमले के वक्त वो अमेरिका में थे और उन्हें नाजुक हालात को देखते हुए फौरन भारत लौटना पड़ा था। - वर्मा ने कहा कि हमले के बाद से ही भारत और अमेरिका के एनएसए और फॉरेन मिनिस्टर्स टच में थे। अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसियों ने भारत को पूरा सपोर्ट देने का वादा किया था। हम जानते हैं कि भारत क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म का शिकार है। - रिचर्ड ने कहा कि हाल के महीनों में भारत और अमेरिका ने आंतकवाद के खिलाफ एक्शन लेने के लिए काफी इन्फॉर्मेशन शेयर की हैं। अमेरिका ने भारत के 2500 अफसरों को साइबर ऑपरेशन की भी ट्रेनिंग दी है। पाकिस्तान पर सख्त रहेंगे - एक सवाल के जवाब में वर्मा ने कहा कि प्रेसिडेंट ओबामा, फॉरेन और डिफेंस मिनिस्टर्स के अलावा अमेरिका के एनएसए भी पाकिस्तान पर सख्ती दिखा रहे हैं। हमने साफ कहा है कि पाकिस्तान में आतंकियों की पनाहगाहें फौरन खत्म की जानी चाहिए। इसलिए हम भारत का समर्थन करते हैं। सवाल जो टाल गए - वर्मा से पूछा गया कि क्या अजीत डोभाल और उनकी अमेरिकी काउंटरपार्ट सुसैन राइस की बातचीत में सर्जिकल स्ट्राइक का मुद्दा उठा था या क्या अमेरिका को पहले से पता था कि भारत सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने जा रहा है। - इस सवाल का साफ जवाब वर्मा ने नहीं दिया। उन्होंंने कहा कि दोनों एनएसए के बीच बातचीत प्राइवेट थी। इसलिए इस बारे में कुछ नहीं कहेंगे। लेकिन हम ये भी साफ कर देना चाहते हैं कि भारत को अपनी हिफाजत का पूरा हक है और इसके लिए वो जरूरी कदम उठा सकता है। - हालांकि, अमेरिकी एम्बेसडर ने ये साफ तौर पर माना कि सर्जिकल स्ट्राइक के एक दिन पहले भी डोभाल और सुसैन राइस के बीच लंबी बातचीत हुई थी। पाकिस्तान को 73% मदद कम कर दी - वर्मा से सवाल किया गया कि अमेरिका के दबाव का असर पाकिस्तान पर दिखता क्यों नहीं है। वहां जैश और लश्कर जैसे आतंकी संगठन लगातार एक्टिव हैं। - जवाब में रिचर्ड ने कहा- 2011 के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद 73% कम कर दी है, क्योंकि पाकिस्तान सरकार आतंकवाद पर सख्त कार्रवाई नहीं कर रही है। एफ-16 जेट फाइटर भी अब उन्हें नहीं मिलेंगे।

  • मोदी जिद के पक्के, हमारा मुल्क दुनिया में अलग-थलग होने के कगार पर :PAK मीडिया
    Last Updated: October 17 2016, 15:25 PM

    इस्लामाबाद. एक हफ्ते में दूसरी बार पाकिस्तान सरकार और आर्मी के करीबी अखबार ने इन दोनों को वॉर्निंग दी है। द नेशन; ने नरेंद्र मोदी को जिद का पक्का बताते हुए कहा- मोदी की वजह से पाकिस्तान दुनिया में अलग-थलग पड़ने के कगार पर पहुंच गया है। मोदी ने पाकिस्तान में होने वाली सार्क समिट कैंसल करा दी। हमारे आर्टिस्ट को भारत में बैन करा दिया। वो किसी भी इंटरनेशनल फोरम पर हमारे मुल्क को नहीं छोड़ रहे। अखबार ने नवाज सरकार और आर्मी के लिए लिखा- मुल्क में अब भी अच्छे और बुरे आतंकियों में फर्क किया जा रहा है। चीन भी हमारे खिलाफ होने लगा... - सोमवार को द नेशन; में पब्लिश आर्टिकल में गोवा में रविवार को खत्म हुई ब्रिक्स समिट का जिक्र किया गया। - इसमें लिखा गया- मोदी ने बिना नाम लिए पाकिस्तान को आतंकवाद पैदा करने वाला मुल्क बता दिया। खास बात ये है कि मोदी के बयान से चीन भी सहमत दिखा और उसने भी टेररिज्म के खिलाफ पुख्ता एक्शन पर जोर दिया। - आर्टिकल के मुताबिक, नई दिल्ली पाकिस्तान को अलग-थलग करने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रख रही है। इसके नतीजे भी दिख रहे हैं। मोदी के चलते पाकिस्तान में नवंबर में होने वाली सार्क समिट कैंसल कर दी गई। भारत में पाकिस्तानी कलाकारों को बायकॉट कर दिया गया। अब हालात ये हैं कि किसी भी इंटरनेशनल फोरम पर मोदी पाकिस्तान को छोड़ नहीं रहे हैं। ना देश में सुनता कोई और ना विदेश में - अखबार ने आगे लिखा है, पाकिस्तान तो अमेरिका में बैठे डिप्लोमैट्स को अपना पक्ष समझाने की कोशिश करता है। लेकिन देश और विदेश में हमें क्रिटिसाइज किया जा रहा है। - आर्टिकल के मुताबिक, हालात ये हो गए हैं कि नवाज की पार्टी के ही सांसद राणा मोहम्मद अफजल नॉन स्टेट एक्टर्स के खिलाफ एक्शन ना होने की बात पब्लिकली कह रहे हैं। यही बात तो मोदी भी कह रहे हैं कि पाकिस्तान आतंकवाद को स्पॉन्सर कर रहा है। - राणा ने साफ कहा है कि वो जब फ्रांस गए तो वहां के लोगों ने उनसे पूछा कि आपका मुल्क हाफिज सईद जैसे आतंकी सरगनाओं पर एक्शन क्यों नहीं लेता? - हैरानी की बात ये है कि सरकार और सेना बजाए आतंकियों पर सख्ती दिखाने के अपनी ताकत मीडिया पर आजमा रही है। जर्नलिस्ट को देश से बाहर जाने से रोका जा रहा है। अब भी सुधर जाओ - आर्टिकल के आखिरी हिस्से में पाकिस्तान सरकार को सलाह देते हुए लिखा गया, पॉलिसी साफ होनी चाहिए। एक्शन दिखना चाहिए। पाकिस्तान को अब ये सोचना ही होगा कि देश के हित में क्या है? - आतंकवाद को जड़ से खत्म करना होगा और इस काम में अच्छे या बुरे का फर्क नहीं होना चाहिए। आर्मी और सरकार को फैसला लेना होगा। अमेरिका हम पर दबाव डालता ही जा रहा है। चीन भी ये मांग कर सकता है। - पाकिस्तान दुनिया में कभी भी अलग-थलग नहीं होना चाहेगा, क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो नतीजे बेहद खतरनाक होंगे। आगे की स्लाइड में पढ़ें: पाक मीडिया ने कहा, आतंकी कभी कश्मीर नहीं दिला सकेंगे, दुनिया में अलग-थलग पड़ गए हैं हम....

  • PAK आर्मी को शक, नवाज ने ही लीक कराई सेना और सरकार के मतभेद की खबरें
    Last Updated: October 15 2016, 11:44 AM

    इस्लामाबाद. सेना और नवाज शरीफ सरकार के बीच मतभेद की खबरें सामने आने पर पाकिस्तान आर्मी ने पहली बार रिएक्शन दिया है। शुक्रवार को आर्मी कमांडर्स की मीटिंग के बाद जारी बयान में लीक जैसे शब्द का इस्तेमाल किया गया। आर्मी ने कहा है कि मीडिया में झूठी खबरें आने से पाकिस्तान की नेशनल सिक्युरिटी को खतरा है। बता दें कि पीओके में भारत की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान के अखबार द डॉन ने पहले पेज पर एक खबर दी थी। इसमें कहा गया था कि नवाज शरीफ ने आर्मी से दो टूक कहा है कि या तो आतंकियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करो या फिर दुनिया में अलग-थलग पड़ जाने के लिए तैयार रहो। क्या कहा पाकिस्तान आर्मी ने... - पाकिस्तान के अखबार द नेशन के मुताबिक, शुक्रवार की मीटिंग में द डॉन अखबार की उस खबर पर ज्यादा माथापच्ची होती रही, जिसमें सेना और सरकार के बीच मतभेदों की जानकारी दी गई थी। बता दें कि जिस मीटिंग की बातें लीक होने का जिक्र किया गया, वो सर्जिकल स्ट्राइक के फौरन बाद नवाज के घर हुई थी। इस मीटिंग के अगले ही दिन द डाॅन ने सेना और सरकार के बीच मतभेद की खबर छापी थी। - आर्मी के तमाम कॉर्प्स कमांडर शुक्रवार की मीटिंग में मौजूद थे। आर्मी चीफ राहिल शरीफ ने नेशनल और इंटरनेशनल सिक्युरिटी पर चर्चा की। - मीटिंग के बाद जारी बयान में कहा गया- सभी कमांडर्स इस बात को लेकर बेहद चिंतित थे कि झूठी और मनगढ़ंत खबरें फैलाई जा रही हैं। इससे नेशनल सिक्युरिटी को खतरा पैदा हो रहा है। - मीटिंग में भारत के 29 सितंबर को किए गए सर्जिकल स्ट्राइक को भी गलत बताया गया है। ये भी कहा गया कि कश्मीर में किए जा रहे जुल्म से ध्यान हटाने के लिए भारत इस तरह की खबरें फैला रहा है। भारत का नाम लिए बिना कहा गया कि अगर दुश्मन ने कोई भी गलत हरकत करने की कोशिश की, तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा। - बयान में भारत पर सीजफायर वॉयलेशन का भी आरोप लगाया गया है। क्या है विवाद की जड़? - उड़ी हमले के बाद भारतीय सेना के कमांडोज ने पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक की। इसमें 38 आतंकी और तीन पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। - घटना के बाद नवाज ने आर्मी के साथ मीटिंग की। नवाज ने इसमें कहा- आर्मी आतंकियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। अगर ऐसा नहीं होता तो पाकिस्तान दुनिया में अलग-थलग पड़ जाएगा। - ये खबर द डॉन ने फ्रंट पेज पर सूत्रों के हवाले से छापी। इसके रिपोर्टर सेरिल अलमीडा के देश छोड़ने पर पाबंदी लगा दी गई। बाद में इंटरनेशनल प्रेशर पड़ा तो बैन हटा लिया गया। - पाकिस्तान सरकार और सेना खबर को झूठा बताने की कोशिश कर रही है, लेकिन अखबार का कहना है कि उसने जो खबर छापी थी, वो बिल्कुल सही थी।

  • अब पूर्व गृहमंत्री शिंदे ने कहा: UPA काल में 2-3 बार हए थे सर्जिकल स्ट्राइक
    Last Updated: October 13 2016, 18:10 PM

    मुंबई: सर्जिकल स्ट्राइक पर सियासत रुकने का नाम नहीं ले रही है। अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने दावा किया है कि यूपीए के शासनकाल में भी 2-3 सर्जिकल स्ट्राइक किए गए थे। पवार भी कर चुके हैं दावा...     - एक समाचार एजेंसी से बात करते हुए शिंदे ने कहा कि, यूपीए शासन में भी सर्जिकल स्ट्राइक किए गए थे लेकिन इसके बारे में तथ्यों का खुलासा नहीं किया गया और ना ही किया जाना चाहिए। - इनसे पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष शरद पवार ने कहा था कि, उनके रक्षा मंत्री रहते 4 बार सर्जिकल स्ट्राइक किए गए थे।   रक्षामंत्री ने खारिज किया यह दावा   - सर्जिकल स्ट्राइक के 13 दिन बाद बुधवार को मनोहर पर्रिकर ने कांग्रेस और एनसीपी के दावों को खारिज करते हुए कहा था,- 'मैं 2 साल से ज्यादा वक्त से डिफेंस मिनिस्टर हूं और जहां तक मुझे पता है कि इससे पहले कभी सर्जिकल स्ट्राइक नहीं हुआ।' - 'दुश्मन ने हमें हजार घाव दिए, देश के 127 करोड़ लोगों पर यह एक बोझ था।' - डिफेंस मिनिस्टर ने यह भी कहा कि, 'इस बारे में फैसला करने और इसकी योजना बनाने का ज्यादा क्रेडिट पीएम को जाता है। मैंने तो सिर्फ उनका साथ दिया।' - 'पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक कर आतंकी ठिकानों को खत्म करने का क्रेडिट आर्मी को जरूर मिलना चाहिए।' - 'जिन लोगों को सर्जिकल स्ट्राइक पर शक है, वह भी इसका क्रेडिट ले सकते हैं, मुझे देश के हर नागरिक से क्रेडिट शेयर करने में कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि सर्जिकल स्ट्राइक को हमारी आर्म्ड फोर्सेज ने अंजाम दिया, न कि किसी पॉलिटिकल पार्टी ने। मेरे बयान से ज्यादातर लोगों को संतुष्टि मिल जानी चाहिए।' - पर्रिकर ने यह भी कहा था कि- 'ऑफिशियल ऑर्डर लिए बगैर और सरकार की मंजूरी लिए बिना ऑपरेशन पहले किए जाते रहे हैं। लोकल कमांडर उन्हें किसी की जानकारी में लाए बिना अंजाम देते रहे हैं।'  - 'लेकिन इस बार सर्जिकल स्ट्राइक किया गया, पहले इसका फैसला किया गया और फिर बाद में इसकी जानकारी भी दी गई। यह एक ऐसा ऑपरेशन था जिससे साफ तौर पर सरकार और देश के इरादे का पता चला।'

  • हाफिज बोला- US नहीं, भारत से रिश्ते बेहतर करे PAK; अजहर की धमकी- जंग ही है रास्ता
    Last Updated: October 13 2016, 16:26 PM

    नई दिल्ली. मुंबई में 10 आतंकी भेजकर 26/11 हमले काे अंजाम देने वाला मास्टरमाइंड हाफिज सईद अब भारत से अच्छे रिश्ते चाहता है। उसने नवाज शरीफ सरकार से कहा है कि पाकिस्तान को अमेरिका के करीब जाने के बजाय भारत से रिश्ते मजबूत करने चाहिए। उसने अमेरिका को पाकिस्तान का दुश्मन नंबर-वन बताया है। वहीं, पठानकोट और उड़ी हमलों के लिए जिम्मेदार जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर ने नवाज सरकार को कमजोर बताते हुए कश्मीर की आजादी के लिए जंग को ही महज एक रास्ता बताया है। कश्मीर हासिल करने का ऐतिहासिक मौका... - इंडियन एक्सप्रेस ने मसूद अजहर के जिहादी मैगजीन में लिखे आर्टिकल का हवाला देते हुए उसके बयान की जानकारी दी है। - आर्टिकल में जैश सरगना ने लिखा- भारत के खिलाफ जिहादी हमले तेज होने चाहिए। पाकिस्तान ने कश्मीर हासिल करने का ऐतिहासिक मौका इसलिए गंवा दिया, क्योंकि हुक्मरान आखिरी फैसला नहीं ले पाए। - अजहर ने लिखा, अगर पाकिस्तान सरकार जरा भी हिम्मत दिखाती तो कश्मीर और पानी का विवाद हमेशा के लिए हल हो गया होता। - इस आतंकी सरगना ने आगे लिखा, अगर सरकार ये नहीं कर पा रही है तो फिर मुजाहिदीनों के लिए रास्ता खोल देना चाहिए। 1971 की कड़वी यादों को हम 2016 में खुशनुमा जीत में बदल देंगे। सईद को चाहिए भारत से बेहतर रिश्ते - मसूद अजहर से उलट मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद ने भारत से बेहतर रिश्तों की बात कहकर चौंका दिया है। - इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सईद ने कहा, अमेरिका की जगह पाकिस्तान सरकार को भारत से बेहतर ताल्लुकात बनाने चाहिए। हालांकि, इसमें अमेरिका ही रुकावट डालता है। - सईद ने कहा, कश्मीरी रोज जान दे रहे हैं। लेकिन दिक्कत हमारी सरकार के साथ है। सरकार को जनता ने ही चुना है, लेकिन वो ही मसले के हल में अड़ंगा डालती है। इसकी वजह ये है कि हमारी सरकार अमेरिका की तरह सोचती है। अमेरिका ने कहा- आतंकी के बयान पर रिएक्शन नहीं देते - अमेरिका ने पाकिस्तान को फिर फटकार लगाई है। स्टेट डिपार्टमेंट के स्पोक्सपर्सन जॉन किर्बी ने कहा- मैं किसी आतंकी के कमेंट पर रिएक्शन देकर उसे इज्जत नहीं देना चाहता। - किर्बी ने कहा- हम चाहते हैं कि पाकिस्तान अपने देश के अंदर मौजूद आतंकियों पर सख्त कार्रवाई करे। मुंबई हमले के गुनहगारों को सजा मिले। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें: PAK मीडिया ने पूछा- सरकार और सेना अजहर-सईद पर कार्रवाई क्यों नहीं करती...

  • PAK मीडिया ने पूछा- सरकार और सेना अजहर-सईद पर कार्रवाई क्यों नहीं करती
    Last Updated: October 13 2016, 12:38 PM

    इस्लामाबाद. पाकिस्तान के अखबार ‘द नेशन’ ने सरकार और आर्मी से पूछा है कि जमात-उद-दावा के सरगना हाफिज सईद और जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के खिलाफ एक्शन क्यों नहीं लिया जाता, जबकि दोनों नेशनल सिक्युरिटी के लिए खतरा हैं। अखबार ने अपने एडिटोरियल में सरकार और सेना को लेकर कई सवाल उठाए हैं। वक्त के लिहाज से अहम है ये आर्टिकल...       - एक दिन पहले ही पाकिस्तान के अखबार 'द नेशन' ने अपने आर्टिकल में नवाज सरकार और आर्मी से सवाल पूछा था कि जमात-उद-दावा के सरगना हाफिज सईद और जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के खिलाफ एक्शन क्यों नहीं लिया जाता। - अखबार ने सईद और अजहर को नेशनल सिक्युरिटी के लिए खतरा बताया था। - इस हफ्ते ये दूसरा मौका था जब पाकिस्तान के किसी बड़े अखबार ने सेना और सरकार के फैसलों और पॉलिसीज पर सवालिया निशान लगाए।  - कुछ दिन पहले ‘द डॉन’ अखबार ने खबर दी थी कि दुनिया में अलग-थलग पड़ने के डर से नवाज ने आर्मी को हर आतंकी संगठन के खिलाफ सख्त एक्शन लेने को कहा था। ये तमाम कवायद भारत की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद हुई।  - ‘द डॉन’ के आर्टिकल के बाद नवाज सरकार ने इसके जर्नलिस्ट सेरिल अलमीडा के देश छोड़ने पर पाबंदी लगा दी। लेकिन बुधवार को इस अखबार ने साफ कर दिया कि उसने सेना और सरकार के बीच मतभेद की जो खबर दी थी, वो सच थी और अखबार उस पर कायम है।    मीडिया को लेक्चर क्यों?  - ‘द नेशन’ ने बुधवार को सवाल उठाया, सरकार और आर्मी मसूद अजहर और हाफिज सईद पर तो कोई एक्शन लेती नहीं। उल्टे मीडिया को लेक्चर दे रही है।  - मसूद अजहर पठानकोट जबकि हाफिज सईद 2008 के मुंबई हमले का मास्टरमाइंड है।  - ये दोनों आतंकी सरगना पाकिस्तान में खुलेआम घूमते हैं। अखबार के मुताबिक, दोनों को ही आर्मी का प्रोटेक्शन हासिल है।  - अखबार ने लिखा, ये अफसोस वाली बात है कि सरकार और सेना मीडिया को उसका काम सिखाने की कोशिश कर रही है।    सिर्फ बयानबाजी - ‘द डॉन’ की खबर का सरकार और सेना तीन बार खंडन कर चुकी हैं। बार-बार ये जताने की कोशिश की जा रही है कि नवाज और आर्मी के बीच कोई दरार या मतभेद नहीं हैं। - मंगलवार को चौथी बार सेना और सरकार के अफसर सामने आए। इन लोगों ने मीडिया से कहा- देश के हित में कैसी रिपोर्टिंग की जानी चाहिए? ये मीडिया हाउसेज को समझने की जरूरत है।    बड़ा सवाल ये - ‘द नेशन’ ने एडिटोरियल में कहा- द डॉन के रिपोर्टर सेरिल अलमीडा की खबर को झूठा बताया जा रहा है। लेकिन ये समझ नहीं आता कि सरकार और सेना उन संगठनों के खिलाफ एक्शन क्यों नहीं ले पा रही हैं, जिन्हें पहले ही बैन किया जा चुका है।  - अखबार ने पूछा, ये साफ किया जाना चाहिए कि अजहर और सईद पर एक्शन लेने से नेशनल सिक्युरिटी कैसे खतरे में पड़ जाएगी। इससे पाकिस्तान के अलग-थलग पड़ने का   खतरा क्यों बढ़ जाएगा?   - आर्टिकल में नवाज और आर्मी को फटकार लगाते हुए कहा गया- जिस हिम्मत से हमें अपना काम सिखाया जा रहा है। जिस हिम्मत से एक रिपोर्टर को क्रिमिनल की तरह ट्रीट किया जा रहा है। उसी हिम्मत से हमें नेशनल इंट्रेस्ट सिखाने की कोशिश हो रही है।  - अखबार ने अलमीडा के साथ एकजुटता भी दिखाई है। ‘द नेशन’ ने लिखा, ‘अलमीडा हम आपके साथ हैं। आपकी कलम की ताकत बढ़ाने के लिए। मीडया आपके साथ है।’   आगे की स्लाइड्स में पढ़ें: मसूद अजहर ने कहा सरकार छूट दे तो कश्मीर पर कब्जा कर लेंगे...

  • पहले नहीं हुआ सर्जिकल स्ट्राइक, हजार जख्म मिले, 127 Cr लोगों पर एक बोझ था: पर्रिकर
    Last Updated: October 12 2016, 22:01 PM

    मुंबई. सर्जिकल स्ट्राइक के 13 दिन बाद बुधवार को मनोहर पर्रिकर ने नया बयान दिया। बोले- मैं 2 साल से ज्यादा वक्त से डिफेंस मिनिस्टर हूं और जहां तक मुझे पता है कि इससे पहले कभी सर्जिकल स्ट्राइक नहीं हुआ। दुश्मन ने हमें हजार घाव दिए, देश के 127 करोड़ लोगों पर यह एक बोझ था। डिफेंस मिनिस्टर ने यह भी कहा कि, इस बारे में फैसला करने और इसकी योजना बनाने का ज्यादा क्रेडिट पीएम को जाता है। मैंने तो सिर्फ उनका साथ दिया। बता दें कि अपोजिशन के कई नेताओं ने इस मामले में सरकार पर क्रेडिट लेने का आरोप लगाया है। और क्या बोले पर्रिकर... - मुंबई में MET 2016 (मटीरियल्स इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी) कॉन्फ्रेंस में पर्रिकर ने कहा- पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक कर आतंकी ठिकानों को खत्म करने का क्रेडिट आर्मी को जरूर मिलना चाहिए। - जिन लोगों को सर्जिकल स्ट्राइक पर शक है, वह भी इसका क्रेडिट ले सकते हैं, मुझे देश के हर नागरिक से क्रेडिट शेयर करने में कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि सर्जिकल स्ट्राइक को हमारी आर्म्ड फोर्सेज ने अंजाम दिया, न कि किसी पॉलिटिकल पार्टी ने। मेरे बयान से ज्यादातर लोगों को संतुष्टि मिल जानी चाहिए। सर्जिकल स्ट्राइक से सरकार और देश के इरादे का पता चला - पर्रिकर ने कहा- ऑफिशियल ऑर्डर लिए बगैर और सरकार की मंजूरी लिए बिना ऑपरेशन पहले किए जाते रहे हैं। लोकल कमांडर उन्हें किसी की जानकारी में लाए बिना अंजाम देते रहे हैं। - लेकिन इस बार सर्जिकल स्ट्राइक किया गया, पहले इसका फैसला किया गया और फिर बाद में इसकी जानकारी भी दी गई। यह एक ऐसा ऑपरेशन था जिससे साफ तौर पर सरकार और देश के इरादे का पता चला। - इससे पहले पिछले हफ्ते गुरुवार को लखनऊ में पर्रिकर ने कहा था- हमारी फोर्सेज की बहादुरी पर कभी किसी को शक नहीं रहा, लेकिन पहली बार कुछ लोगों ने शक जताया है, इसे लेकर एक रेस दिखाई पड़ रही है। - कुछ लोग सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत मांग रहे हैं, उन्हें डर है कि मोदी की इमेज इससे और स्ट्रॉन्ग होगी। दोस्ती के हाथ को कमजोरी समझा जा रहा था - पर्रिकर ने भारत की रक्षा क्षमताओं की मजबूती प्रोग्राम में कहा- दुश्मन ने हमें हजार घाव दिए, 127 करोड़ लोगों और 13.5 लाख आर्मी के लोगों पर यह एक बोझ था। - देश के 127 करोड़ लोगों और आर्म्ड फोर्सेज ही इसके क्रेडिट के लायक हैं। - पीएम मोदी ने बेहतर रिश्ते बनाने का पड़ोसी को मौका दिया था। हमारी दोस्ती के हाथ को हमारी कमजोरी समझा जा रहा था और अब उन्हें (पाक) जवाब दे दिया गया है। 30 साल का गुस्सा 29 सितंबर को निकला - डिफेंस मिनिस्टर बोले- हमें खुद को उस लेवेल तक मजबूत करना चाहिए जहां कोई हमें चुनौती देने की हिम्मत न कर सके। - आतंकवाद एक मुद्दा है, मुझे लगता है कि यह नॉन स्टेट एक्टर की तरफ से चलाया जा रहा एक प्रॉक्सी वॉर है, एक गुप्त ऑपरेशन जैसा है। सर्जिकल स्ट्राइक से हमारे दुश्मनों की मानसिकता बदलेगी, अब वे सोचेंगे कि भारत के बारे में पहले से कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता। - 30 साल का गुस्सा 29 सितंबर को निकला, उस दिन हमने जो किया, उससे दुश्मन को पता चल गया कि भारत अब बर्दाश्त नहीं करेगा। ताकतवर बनना युद्ध टालने की शर्त - पर्रिकर ने कहा- देश को यह समझने की जरूरत है कि ताकतवर बनना युद्ध टालने की शर्त है। शांति और युद्ध टालने के इस तरीके को कमजोरी नहीं बनाना चाहिए। - हमें युद्ध पसंद नहीं है, क्योंकि इससे आर्थिक दिक्कतें पैदा होती हैं। हालांकि भारत ने बाकी देशों के रूल को कभी पसंद नहीं किया और यही हमारी महानता है। कांग्रेस ने पहले क्या किया था दावा? - आर्मी की तरफ से पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में खुलासा होने के बाद कांग्रेस स्पोक्सपर्सन रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा था कि- यूपीए सरकार के दौरान भी 3 बार सर्जिकल स्ट्राइक हुए थे। लेकिन उस वक्त सरकार ने देश की सुरक्षा के हित में इसका दावा नहीं किया था। - हमें गर्व है कि सेना ने 1 सितंबर 2011, 28 जुलाई 2013 और 14 जनवरी 2014 को इन सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था। अपोजिशन बोला- माफी मांगें पर्रिकर - पर्रिकर के बयान पर कांग्रेस स्पोक्सपर्सन रणदीप सुरजेवाला ने बुधवार को कहा- सेना की कार्रवाई का श्रेय लेने के बयान पर पर्रिकर माफी मांगें। - वह झूठ बोल रहे हैं। आर्म्ड फोर्सेज ने 1947, 1966, 1971 के युद्ध में भी सर्जिकल स्ट्राइक किया था। 2011 का ऑपरेशन जिंजर भी सर्जिकल स्ट्राइक था। - बीजेपी ने राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दे का राजनीतिकरण कर दिया है। - देश का कोई रक्षा मंत्री ऐसा बयान कैसे दे सकता है, यह अपने आप में आश्चर्यचकित करने वाला है। - कांग्रेस लीडर मनीष तिवारी ने कहा- पर्रिकर का व्यवहार एक मिनिस्टर जैसा नहीं है। वे रक्षा मंत्री की पोस्ट के लायक नहीं हैं। - आप लीडर आशुतोष ने ट्वीट कर कहा- पर्रिकर को झूठ नहीं बोलना चाहिए। उन्हें सर्जिकल स्ट्राइक का क्रेडिट आर्मी से छीनने के लिए माफी मांगनी चाहिए। राहुल, केजरीवाल ने क्या कहा था? - राहुल गांधी ने सर्जिकल स्ट्राइक के बाद नरेंद्र मोदी पर शहीदों के खून की दलाली करने का आरोप लगाया था। - राहुल ने कहा था- हमारे जवानों ने अपना खून दिया है जम्मू-कश्मीर में। जिन्होंने हिंदुस्तान के लिए सर्जिकल स्ट्राइक किया है, उनके खून के पीछे आप छुपे हुए हो। उनकी आप दलाली कर रहे हो। ये बिल्कुल गलत है। हिंदुस्तान की सेना ने हिंदुस्तान का काम किया है। आप अपना काम कीजिए। - कांग्रेस के दो और नेताओं ने भी बयान दिए थे। संजय निरुपम ने कहा- हर भारतीय चाहता है कि पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक हो, लेकिन फर्जी नहीं, जैसा कि बीजेपी ने सियासी फायदे के लिए किया है। - दिग्विजय सिंह ने कहा- सेना की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है। सरकार सबूत दे। - दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा था- जर्नलिस्ट्स को एलओसी पर ले जाकर पाकिस्तान दिखा रहा है कि देखो, सर्जिकल स्ट्राइक हुआ ही नहीं है। पीएम से अपील है कि इसके सबूत देकर पाक के झूठे कैम्पेन को बेनकाब करें। मोदी ने पार्टी नेताओं को पीठ थपथपाने से किया था मना - नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपनी पार्टी के नेताओं से सर्जिकल स्ट्राइक पर बयानबाजी करने और पोस्टर लगाकर पीठ थपथपाने से मना किया था। - इसके पहले, राजनाथ सिंह ने कहा था- पीएम मोदी ने दुनिया को दिखा दिया है कि भारत कमजोर देश नहीं है। - अमित शाह ने कहा था- पीएम मोदी की राजनीतिक दृढ़ इच्छाशक्ति की वजह से यह स्ट्राइक 100 फीसदी परफेक्ट रही। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, पीओके में क्या कार्रवाई की थी इंडियन आर्मी ने...

  • सार्क जैसा अलायंस बनाने की कोशिश में PAK, ब्रिक्स में कर सकता है उसकी पैरवी
    Last Updated: October 12 2016, 19:50 PM

    वॉशिंगटन. दुनिया में अलग-थलग करने की भारत की स्ट्रैटजी का जवाब देने के लिए पाकिस्तान नए रास्ते खोज रहा है। उड़ी हमले के बाद भारत समेत 5 देशों ने नवंबर में इस्लामाबाद में होने वाली सार्क समिट का बायकाॅट कर दिया था। इसके बाद पाकिस्तान अब भारत के दबदबे वाले सार्क के मुकाबले नया इकोनॉमिक ग्रुप बनाना चाहता है। इसमें चीन उसका साथ दे सकता है। उधर, पाकिस्तानी मीडिया में खबर है कि चीन दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने के लिए ब्रिक्स समिट में पाकिस्तान की पैरवी कर सकता है। बता दें कि यह समिट 15 और 16 अक्टूबर को गोवा में होने वाली है। चीनी प्रेसिडेंट मोदी से कर सकते हैं बात... - पाकिस्तान के अखबार द ट्रिब्यून ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि चीनी प्रेसिडेंट शी जिनपिंग और नरेंद्र मोदी के बीच इस मुद्दे पर बातचीत हो सकती है। - अखबार ने बीजिंग में डिपार्टमेंट ऑफ एशियन अफेयर्स के अफसर शियाओ क्वियान के हवाले से लिखा कि चीन भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित है। - शियाओ क्वियान ने बताया- चीन दोनों देशों के बीच रिलेशन को सामान्य बनाने की कोशिश करेगा। भारत और पाकिस्तान को अपने विवादों को बातचीत के जरिए निपटाना चाहिए। और दोनों को जंग की बात करने से बचना चाहिए। - बता दें कि ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, चीन, इंडिया और साउथ अफ्रीका देश शामिल हैं। क्या है पाकिस्तान का आइडिया - साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल को-ऑपरेशन (SAARC) 8 देशों का ग्रुप है। इसमें भारत का दबदबा है। पाकिस्तान अब इसके मुकाबले में चीन के साथ साउथ एशियन इकोनॉमिक अलायंस (SAEA) बनाना चाहता है। - पाकिस्तान के अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, साउथ एशियन रीजन में इस नए फ्रंट को खड़ा करने की तैयारियों का खुलासा न्यूयॉर्क में मौजूद पाकिस्तान के पार्लियामेंट्री डेलिगेशन ने किया। - पाकिस्तानी सांसद मुशाहिद हुसैन सैयद ने कहा- दुनिया में साउथ एशिया उभर रहा है। इसमें चीन, ईरान और आसपास के पडोसी देश शामिल हैं। ऐसे में, सभी देशों को साथ लाया जा सकता है। - पाक के एक अन्य डिप्लोमैट ने बताया, ये प्लानिंग पाक को दुनिया से अलग-थलग करने की भारत की स्ट्रैटजी को काउंटर करने के लिए है। इससे नवाज सरकार को काफी मदद मिलने की उम्मीद है। क्या तर्क दे रहा है पाकिस्तान - हुसैन ने बताया- चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर साउथ एशिया को सेंट्रल एशिया के साथ जोड़ने का अहम रूट है। ग्वादर पोर्ट इसमें अहम रोल निभा सकता है। हम चाहते हैं कि भारत भी इसे ज्वाइन करे। - भारत के एक अफसर ने इस ऑफर को नामंजूर कर दिया। भारत सार्क के साथ रहना चाहता है। ऐसा क्यों कर रहा है पाकिस्तान - उड़ी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को दुनिया में अलग-थलग करने की स्ट्रैटजी अपनाई थी। इसमें भारत को कामयाबी भी मिली थी। - यूएन में दुनिया के बड़े देश यूएस, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और रूस ने इस हमले की निंदा की थी। - इस्लामाबाद में 15 और 16 नवंबर में होने वाले सार्क सम्मेलन में भारत ने शामिल होने से मना कर दिया था। - इसके बाद, सार्क संगठन के आठ में से पांच देशों ने भी इसमें शामिल नहीं होने का फैसला किया था। इसमें भारत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान शामिल थे। भारत के बढ़ते कद से चीन भी परेशान - वॉशिंगटन में मौजूद डिप्लोमैटिक ऑब्जर्वर्स ने कहा- प्रपोज्ड अरेंजमेंट चीन के फेवर में है। चीन भी साउथ एशिया रीजन में भारत के बढ़ते प्रभाव से परेशान और चिंतित है। - पाकिस्तानी सांसदों का मानना है कि इस फोरम को बनाने में चीन अहम रोल निभा सकता है। खासकर ईरान और सेंट्रल एशिया के देशों को इससे जोड़ने में। - उधर, पाक को सार्क देशों को लेकर एक चिंता भी है। उसका मानना है कि ये देश इस फोरम को लेकर कम इंटरेस्ट दिखा सकते हैं, क्योंकि बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका को इस रूट से ज्यादा फायदा नहीं होगा। - वहीं, सेंट्रल एशिया के कई देशों के साथ भारत के अच्छे रिलेशन हैं, जिसमें ईरान भी शामिल है।

  • 'LoC पार बैठा दुश्मन शिकार, हम शिकारी': आर्मी ने अपने स्नाइपर्स को दिया यही मंत्र
    Last Updated: October 12 2016, 14:53 PM

    नौशेरा (कश्मीर). आर्मी ने एलओसी पर तैनात अपने स्नाइपर्स को एक नया मंत्र दिया है। जवानों से कहा गया है, दुश्मन शिकार है और हम शिकारी। प्लाईबोर्ड पर लिखे ये स्लोगन एलओसी के पास भारतीय सीमा पर लगे पेड़ों पर देखे जा सकते हैं। सीजफायर वॉयलेशन का जवाब देने के लिए दिया गया मंत्र... - सर्जिकल स्ट्राइक के बाद एलओसी पर तैनात जवानों और स्नाइपर्स (निशानेबाजों) में जबरदस्त उत्साह है। - जवानों से साफ कहा गया है कि सीजफायर वॉयलेशन होने पर और पाक की तरफ से घुसपैठ करने वाले आतंकियों पर जमकर फायरिंग करें। - एक न्यूज एजेंसी की खबर के मुताबिक, एलओसी के पास लगे पेड़ों पर दुश्मन शिकार, हम शिकारी लिखे बोर्ड लगाए गए हैं। - एक स्नाइपर राम सिंह (बदला हुआ नाम) के मुताबिक, दुश्मन लक्ष्मण रेखा (एलओसी) के पार बैठा है। वो मेरा शिकार है और मैं शिकारी। कोई भी सीमा पार करेगा तो उसका शिकार होगा, हमारा यही मोटो है। - सिंह ये भी बताते हैं कि भारत के सारे स्नाइपर्स काफी ट्रेन्ड हैं और उनका निशाना अचूक है। कोई भी बॉर्डर पार करके आएगा तो बचेगा नहीं। पैट्रोलिंग कर रहे जवानों के लिए भी यही मैसेज - दुश्मन शिकार और हम शिकारी वाला मोटो केवल स्नाइपर्स के लिए ही नहीं है, बल्कि ये पैट्रोलिंग टीम और एलओसी से सटी पोस्ट्स के लिए भी है। एलओसी से सटे नौशेरा सेक्टर में इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट्स के जरिए निगरानी की जाती है। - बता दें कि नौशेरा में घने पेड़, गहरी खाइयां और ऊंचे पहाड़ हैं, जहां से पाक फौज आसानी से निशाना बना सकती है। नौशेरा सेक्टर को घुसपैठ के लिहाज से सबसे मुफीद और बड़े इलाकों में से एक माना जाता है।

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