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जाट आरक्षण: सोमवार को NCR में नहीं चलेगी मेट्रो, दिल्ली के 12 स्टेशन भी बंद रहेंगे

जाट आरक्षण: सोमवार को NCR में नहीं चलेगी मेट्रो, दिल्ली के 12 स्टेशन भी बंद रहेंगे

Last Updated: March 19 2017, 11:33 AM

नई दिल्ली. 20 मार्च सोमवार को मेट्रो के जरिए एनसीआर से दिल्ली आने वाले लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इस दिन मेट्रो दिल्ली से बाहर नहीं जाएगी। जाट आरक्षण की मांग लेकर दिल्ली घेराव को देखते हुए पुलिस ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) से कहा है कि सोमवार को दिल्ली बार्डर से बाहर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुड़गांव में मेट्रो नहीं चलाई जाए। सेंट्रल दिल्ली के 12 स्टेशन बंद रहेंगे... - न्यूज एजेंसी ने DMRC के एक अफसर के हवाले से बताया कि दिल्ली पुलिस की अपील पर रविवार रात 11:30 बजे से मेट्रो सर्विस सिर्फ दिल्ली में ही रहेगी। - वहीं सेंट्रल सेक्रेटेरियट, पटेल चौक और राजीव चौक समेत सेंट्रल दिल्ली के 12 स्टेशन रविवार रात 8 बजे से अगले ऑर्डर तक बंद रहेंगे। - जाट आंदोलन के मद्देनजर लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति को बरकरार रखने के लिए यह फैसला किया गया है। - इस इंटरिम अरेंजमेंट के तहत येलो लाइन पर गुड़गांव, ब्लू लाइन पर नोएडा, गाजियाबाद और वॉयलेट लाइन पर फरीदाबाद से मेट्रो ऑपरेशन बंद रहेगा। - सेंट्रल दिल्ली के राजीव चौक, पटेल चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरियट, उद्योग भवन, लोककल्याण मार्ग, जनपथ, मंडी हाउस, बाराखंभा रोड, आरके आश्रम मार्ग, प्रगति मैदान, खान मार्केट और शिवाजी स्टेडियम बंद रहेंगे। हालांकि, इन स्टेशनों से इंटरचेंज फैसिलिटी बहाल रहेगी। 20 मार्च को दिल्ली के एंट्री प्वाइंट्स पर होगा प्रोटेस्ट - जाट समुदाय के लोगों को नौकरियों में रिजर्वेशन देने की मांग को लेकर आंदोलन कर रही जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने 20 मार्च को संसद का घेराव करने के साथ दिल्ली के एंट्री प्वाइंट्स से जुड़े हाईवेज पर चक्का जाम करेगी। - अधिकारी ने बताया कि घेराव के बाद लॉ एंड ऑर्डर को लेकर दिल्ली पुलिस की ग्रीन सिग्नल मिलने पर ही मेट्रो की नॉर्मल सर्विस बहाल हो सकेगी।

धरने की परमिशन नहीं मिली तो ये जाट नेता बोले-जूते मारो हमें मजा आएगा

धरने की परमिशन नहीं मिली तो ये जाट नेता बोले-जूते मारो हमें मजा आएगा

Last Updated: February 01 2017, 11:17 AM

पानीपत। अखिल भारतीय जाट आरक्षण समिति को प्रस्तावित धरने के लिए पंचायत और ग्रामीणों ने जमीन नहीं दी। इस पर प्रशासन समिति को तीन विकल्पों के साथ जाटल, मतलौडा और भापरा स्टेडियम में धरना देने की अनुमति देने को तैयार था, लेकिन समिति उग्राखेड़ी पर ही अड़ी रही। आखिर बिना अनुमति चौपाल में धरना शुरू हो गया। जाट नेता बोले-जूते मारो, हमें जूते खाकर मजा आएगा... - रविवार को यहां समिति के पदाधिकारी प्रताप दहिया की अगुवाई में उग्राखेड़ी की चौपाल में बिना प्रशासनिक अनुमति के ही धरनेपर बैठ गए। इससे पहले काफी बहस भी हुई। - इस दौरान चौपाल में धरना देने पहुंचे जाट पानीपत में प्रदर्शन की अगुवाई करने पहुंचे जाट नेता प्रताप दहिया ने पंचायत के सामने अपने जूते उठाकर कह डाला कि ये लो हमें जूते मारो, हमें जूते खाकर मजा आएगा। आधा गांव हमारे साथ है, धरना देंगे तो यहीं पर। - एसडीएम विवेक चौधरी और डीएसपी हेडक्वार्टर जगदीप दूहन ने कहा कि समिति ने उग्राखेड़ी के स्टेडियम में स्थान प्रस्तावित किया था। वहां की पंचायत और ग्रामीणों से बात की तो पंचायत ने लिखित में प्रस्ताव दिया कि हमारे गांव में धरने की मंजूरी नहीं दी जाए। इससे हमारे गांव का माहौल खराब हो सकता है। - एसडीएम ने कहा कि इस पर समिति के सदस्यों ने काला आम्ब रोड पर ग्रामीण ओम कुमार की जमीन प्रस्तावित की, जिसमें उसका भी सहमति पत्र था, लेकिन कुछ समय बाद ही जमीन के मालिक ने प्रशासन को पत्र भेजा कि वह धरने के लिए जगह नहीं देना चाहता। इसको देखते हुए प्रशासन ने मंजूरी नहीं दी है। - एसडीएम के मुताबिक प्रशासन ने समिति से कहा था कि उग्राखेड़ी ही क्या कहीं से भी धरने की अनुमति लेकर आएं, वह मंजूरी देने को तैयार हैं, लेकिन किसी ने अनुमति नहीं दी। समिति को जाटल, मतलौडा और भापरा स्टेडियम के रूप में तीन विकल्प दिए गए, लेकिन ये लोग उग्राखेड़ी पर ही अड़े हुए हैं। - आखिर इसी विरोध के बीच धरना शुरू हो गया और फिर पंचायत के लोग किनारा करते दिखाई दिए और सूचना पाकर प्रशासनिक अधिकारी गांव के बाहर पहुंच गए। खबर लिखे जाने तक अधिकारी धरनास्थल पर नहीं पहुंचे थे। फोटोज: नवीन मिश्रा, वीडियो: राजेश खोखर आगे की स्लाइड्स में देखें और फोटोज............

जाट आंदोलन को लेकर प्रशासन तैयार, अफसरों की छुटि्टयां कैंसिल

जाट आंदोलन को लेकर प्रशासन तैयार, अफसरों की छुटि्टयां कैंसिल

Last Updated: January 29 2017, 06:25 AM

फरीदाबाद | डीसी समीर पाल सरो ने शनिवार को जाट आंदोलन के मद्देनजर लघु सचिवालय में अधिकारियों की मीटिंग लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। मीटिंग में एडीसी जितेंद्र दहिया, बल्लभगढ़ के एसडीएम पार्थ गुप्ता, नगराधीश सतवीर मान मौजूद थे। डीसी ने कहा कि सभी अधिकारी अपने-अपने विभाग से संबंधित चल एवं अचल संपत्ति की सुरक्षा के प्रबंध करें ताकि किसी प्रकार का सरकार का नुकसान न हो। उन्होंने कहा यदि कोई अप्रिय घटना घटित होने का अंदेशा होता है तो तुरंत सुरक्षा के लिए कार्रवाई करना सुनिश्चित करें और इस संबंध में अपने उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराएं। डीसी ने बताया कि बिना परमिशन के कोई भी धरना नहीं होगा और परमिशन के बाद भी अगर कोई झगड़ा होता है तो उसकी जिम्मेदारी परमिशन लेने वाले की होगी। डीसी ने कहा कि इस आंदोलन को लेकर सभी अधिकारियों की छुट्टी भी कैंसिल की जाती है। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि बिना परमिशन के किसी प्रकार का कोई धरना नहीं होगा अगर कोई भी धरना या आंदोलन करता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मौके पर संबंधित अधिकारी मौजूद थे। खेड़ी और जाजरू पहुंचे डीसी-सीपी जाट आंदोलन की सुगबुगाहट के चलते शनिवार को प्रशासन के उच्चाधिकारियों ने खेड़ी व जाजरू गांव का दौरा किया। इस दौरान डीसी समीरपाल सरो व पुलिस कमिश्नर हनीफ कुरैशी ने ग्रामीणों से जाट आरक्षण को लेकर आह्वान किया कि जिले में अमन, शांति, सौहार्द व आपसी भाईचारे की भावना को किसी भी रूप में प्रभावित न होने दें। जिससे किसी भी अप्रिय घटना से होने वाले जान-माल का नुकसान न हो। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात कहने का सबको अधिकार है। इस विषय पर जो बात कहें वह लोकतान्त्रिक रूप से आमजन के हितों को ध्यान में रख कर कहें ताकि आमजन को किसी भी सूरत में कोई नुकसान न होने पाए। जान बूझकर जाट आंदोनल की आड़ में अमन, शांति व सौहार्द को प्रभावित करने वाले असामाजिक तत्वों से पूरी सख्ती के साथ निपटा जाएगा। इस मौके पर एडीसी जितेन्द्र दहिया, एसडीएम बल्लभगढ़ पार्थ गुप्ता सहित संबंधित विभागों के अधिकारी व दोनों गांवों के सरपंच मौजूद थे।

सरकार जाट आंदोलन के सभी मृतकों के आश्रितों को नौकरी देने पर राजी, मलिक गुट धरने पर अड़ा

सरकार जाट आंदोलन के सभी मृतकों के आश्रितों को नौकरी देने पर राजी, मलिक गुट धरने पर अड़ा

Last Updated: January 28 2017, 07:07 AM

पानीपत. जाट आंदोलन के दौरान मारे गए सभी युवकों के एक-एक आश्रित को नौकरी देने पर सरकार राजी हो गई है। सांगवान गुट के साथ शुक्रवार को बातचीत में इस पर सहमति बनी। सरकार की ओर से भरोसा दिलाया गया है कि आवेदन मिलने के 15 दिन में योग्यतानुसार नौकरी दे दी जाएगी। वहीं मुकदमों को लेकर आममाफी संबंधी दूसरी मांग पर सरकार ने कहा है कि वह कानूनी रास्ता देखकर विचार करेगी। उन्हें जल्दी ही इस बारे में अवगत करवा दिया जाएगा। पहले सरकार ने निर्दोष मारे गए 9 युवकों के परिजनों को ही मुआवजा व नौकरी देने का फैसला किया था। बाद में सभी के लिए मुआवजा घोषित किया गया था। इसके बाद हरियाणा की तमाम खाप पंचायतों व जाट प्रतिनिधियों ने 29 से शुरू हो रहे धरनों से दूरी बना ली है। ये धरने अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति (यशपाल मलिक) गुट के आह्वान पर शुरू हो रहे हैं। चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री मनोहर लाल से उनके निवास पर हुई बातचीत पर जाट प्रतिनिधियों ने संतोष जताया है। साथ ही समाज के युवाओं से अपील की है कि वे फिलहाल मलिक गुट के धरनों में शामिल न हों। वहीं मलिक गुट धरने पर अड़ा हुआ है। रोहतक में जाट जागृति सेना ने धरना शुरू कर दिया है। मलिक गुट को बातचीत से रखा दूर पहले की तरह इस बार भी सरकार ने यशपाल मलिक गुट को बातचीत से दूर रखा है। जबकि धरनों का आह्वान मलिक गुट ने ही किया है। पिछले साल आंदोलन से पहले भी सरकार ने जाट और खाप पंचायतों के 84 प्रतिनिधियों से बातचीत की थी। उस दौरान सहमति भी बन गई थी, लेकिन बाद में हवासिंह सांगवान ने ही बयान दिया कि आंदोलन युवाओं के हाथ में है, हमारे कंट्रोल में नहीं हैं। इसके बाद आंदोलन हिंसक हो गया था। अब इस सवाल पर हवा सिंह सांगवान कहते हैं कि पहले हालात अलग थे, इस बार ऐसा नहीं है। पिछली बार भाजपा सांसद राजकुमार सैनी की बयानबाजी और रोहतक में समाज के युवाओं को पीटने की घटना से आक्रोश बढ़ा था। हम युवाओं से अपील कर रहे हैं कि वे फिलहाल आंदोलन में शामिल न हों। इधर तैयारी भी...दो जिलों में धारा-144, पैरामिलिट्री की कंपनियां पहुंची शासन-प्रशासन आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों में जुटा हुआ है। कई जिलों में केंद्रीय सुरक्षा बलों की कंपनियां पहुंच चुकी हैं। रोहतक और झज्जर में धारा-144 लागू कर दी गई है। हिसार, हांसी, सोनीपत और जींद में रैपिड एक्शन पुलिस फोर्स की टुकड़ियों ने शुक्रवार को फ्लैग मार्च किया। कई जिलों में पुलिस और होमगार्ड्स के जवानों ने भी दंगाइयों ने निपटने के लिए ड्रिल किया। वहीं सीएमओ का कहना है बातचीत एक विकल्प है, लेकिन आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए इस बार सरकार पूरी तरह सजग है। हर तरह की तैयारियां की जा रही हैं। वैसे आंदोलन का अब कोई औचित्य नहीं है। ै, क्योंकि जाट समाज की लगभग सभी मांगें मानी जा चुकी हैं। सभी मृतकों के आश्रितों को मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है। नौकरी देने की मांग भी मान ली गई है। आरक्षण सरकार अपनी ओर से दे चुकी है, लेकिन यह मसला कोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए उन्हें फैसले का इंतजार करना चाहिए। सभी मृतकों के एक परिजन को नौकरी मिलेगी: भूपेंद्र पिछले साल जाट आंदोलन के दौरान मारे गए सभी युवाओं के परिवार में एक सदस्य को नौकरी देने की मांग सरकार ने मान ली है। आवेदन के बाद 15 दिन में नौकरी लगाने की शर्त पूरी की जाएगी। बातचीत बहुत ही अच्छे माहौल में हुई है। बैठक में जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष हवा सिंह सांगवान और कई खाप नेताओं समेत 84 जाट प्रतिनिधि मौजूद थे। भूपेंद्र सिंह, ओएसडी टू सीएम सीएम के साथ हुई बातचीत से हम संतुष्ट हैं: हवासिंह आम माफी संबंधी दूसरी मांग पर भी सरकार ने 15 दिन में विचार करने को कहा है। हमने 26 फरवरी को जींद में मीटिंग बुलाई है। मांगें नहीं मानी गईं तो अगली रणनीति का खुलासा करेंगे। यशपाल मलिक विश्वसनीय नहीं है। इसीलिए उन्हें आरक्षण संघर्ष समिति से निकाला गया था। वे मुझे हुड्डा का भी एजेंट बताते थे, लेकिन मलिक खुद किसी के एजेंट निकलेंगे। हवा सिंह सांगवान, अध्यक्ष जाट आरक्षण संघर्ष समिति धरने होंगे, सरकार ने अपने लोगों से ही बात की: मलिक जिन लोगों से बात हुई है, वे सरकार के अपने आदमी, बल्कि कार्यकर्ता हैं। पहले भी सरकार ने इन्हीं से बात की थी। मृतकों के परिजनों को नौकरी देने की ही अकेली मांग नहीं हैं, हमारी और भी कई मांगें हैं। हमारा 29 जनवरी से शांतिपूर्ण तरीके से अनिश्चितकालीन धरने शुरू करने का कार्यक्रम यथावत है। धरने शुरू होंगे।बातचीत के लिए हमें सरकार से कोई न्योता मिला है। यशपाल मलिक, अध्यक्ष अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति

पंजाब में आतंकवाद से भी बुरा था जाट आंदोलन का दौर, हाईकोर्ट ने की तल्ख टिप्पणी

पंजाब में आतंकवाद से भी बुरा था जाट आंदोलन का दौर, हाईकोर्ट ने की तल्ख टिप्पणी

Last Updated: September 25 2016, 05:13 AM

चंडीगढ़। हाईकोर्ट ने हरियाणा के जाट आरक्षण आंदोलन के दौर की तुलना पंजाब में आतंकवाद के दौर से की है। कोर्ट का कहना है कि पंजाब हरियाणा में दोबारा ऐसा कभी नहीं होने दिया जाएगा। शनिवार को हाईकोर्ट में जाट आंदोलन से जुड़े मामले की सुनवाई थी। जस्टिस एसएस सारौं और जस्टिस लीजा गिल की बेंच ने इस दौरान कहा कि उन्होंने अपनी जिंदगी में इससे बुरा दौर नहीं देखा। हरियाणा में जो हालत थी, वह पंजाब में आतंकवाद के दौर से भी बदतर थी। पूरे देश ने शायद 1947 के बाद ऐसा नजारा कभी नहीं देखा होगा। हाईकोर्ट ने कहा सीसीटीवी फुटेज, वीडियो, फोटो में जो लोग आतंक मचाते दिख रहे हैं उनकी पहचान करके कार्रवाई क्यों नहीं की गई है।

जाट आंदोलन मामले में दर्ज एफआईआर की जांच क्यों न सीबीआई को दे दी जाए: हाईकोर्ट

जाट आंदोलन मामले में दर्ज एफआईआर की जांच क्यों न सीबीआई को दे दी जाए: हाईकोर्ट

Last Updated: September 22 2016, 18:13 PM

चंडीगढ़. जाट आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन के दौरान दर्ज दो हजार से ज्यादा एफआईआर के मामले में सुनवाई करते हुए गुरुवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पूछा कि क्यों न इन मामलों की जांच सीबीआई के हवाले कर दी जाए। जस्टिस एसएस सारों व जस्टिस लीजा गिल की खंडपीठ ने इस मामले में सीबीआई को भी नोटिस जारी कर जांच पर उनका जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा कि जांच सीबीआई को दिए जाने पर हरियाणा सरकार अपना पक्ष स्पष्ट करे। हाईकोर्ट ने इसके लिए दो दिन का समय देते हुए शनिवार के लिए सुनवाई तय की है। सुनवाई के दौरान हरियाणा के वित्त मंत्री के भाई सतपाल सिंधू की तरफ से आंदोलनकारियों को बचाने के संबंध में दिए बयान का भी हवाला दिया गया। आंदोलन के दौरान बिजनेस व संपत्ति का नुकसान झेलने वालों की तरफ से कोर्ट में वरिष्ठ वकील आरएस राय ने कहा कि पुलिस आंदोलनकारियों को गिरफ्तार करने में असफल रही जबकि उनकी संपत्ति जलाकर खाक कर दी गई। एक मामले में एक्स सरपंच आरोपी था लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।

संसद के शीतकालीन सत्र के साथ ही की जाएगी जाट आंदोलन की घोषणा : मलिक

संसद के शीतकालीन सत्र के साथ ही की जाएगी जाट आंदोलन की घोषणा : मलिक

Last Updated: September 14 2016, 05:33 AM

हिसार. नवंबर में शुरू होने वाले संसद सत्र के साथ ही जाट आरक्षण के लिए आंदोलन की घोषणा कर दी जाएगी। इससे पूर्व प्रदेश की सभी जिला कमेटियां जिलावार एक-एक धरना स्थल का चयन करेंगी। अक्टूबर माह के प्रथम सप्ताह में इन धरना स्थलों के नामों का ऐलान कर उनके प्रचार-प्रसार के लिए टीमों का गठन कर दिया जाएगा। यह ऐलान जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने मय्यड़ में मंगलवार को आयोजित श्रद्धांजलि सभा में किया। आरक्षण आंदोलन के दौरान सात साल पहले पुलिस गोली से जान गंवाने वाले सुनील श्योराण को श्रद्धांजलि देने के लिए यह रैली हुई थी। मलिक ने कहा कि अगर केन्द्र सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करती तो 2017 में उत्तरप्रदेश, पंजाब व उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा का विरोध किया जाएगा। चुनाव के दौरान जाट संकल्प रैलियां व जाट आरक्षण संदेश यात्राएं निकाल कर भाजपा का विरोध करने के लिए जाट समाज काे जागरूक किया जाएगा। मलिक ने पूर्ववर्ती हुड्डा सरकार पर भी निशाना साधा। बोले-भाजपा सरकार ने ही नहीं बल्कि पहले दस साल तक राज करने वाली सरकार ने भी जाटों के साथ ईमानदारी नहीं की। अगर पूर्व की सरकार ईमानदारी करती तो इतना बवाल ना होता।; उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने दंगा भड़काने के लिए एक साजिश के तहत जाति का सहयोग लिया। जब तक आरक्षण नहीं मिलता जाट समाज शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करते रहेंगे, वहीं अगर किसी ने आंदोलन को रोकने का प्रयास किया तो लाठी-गोली भी जाटों को नहीं रोक पाएगी। रैली में हुड्डा खाप, जाटू 84 खाप, तपा खाप, बिनैण खाप, दहिया खाप, दिनौदा खाप, बैनीवाल खाप के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। रैली में पहुंचे हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एचएसजीपीसी) के अध्यक्ष जगदीश झींडा ने जाट समाज की मांगों का समर्थन किया। शहीद परिवारों व यशपाल मलिक को सिरोपा भेंटकर उनका सहयोग करने का भरोसा दिलाया। श्रद्धांजलि सभा में पास किए प्रस्ताव - प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल सरकार से मिलेगा। मानी गई मांगों पर बात होगी। - अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में सभी जिलो के धरना स्थलों व आंदोलन की तारीख की घोषणा। - अगर सरकार ने समझौते को लेकर विश्वासघात किया तो आपातकालीन बैठक बुलाकर 72 घंटे के नोटिस पर आंदोलन की शुरुआत। - जेलाें में बंद समाज के लोगों की पैरवी के लिए जिला स्तरीय कमेटियों का गठन होगा।

दंगों में नुकसान : 17 ने मांगा पूरा मुआवजा, सात से रिकवरी की तैयारी

दंगों में नुकसान : 17 ने मांगा पूरा मुआवजा, सात से रिकवरी की तैयारी

Last Updated: August 31 2016, 04:33 AM

रोहतक. फरवरी में हुए दंगों में नुकसान के बावजूद कम मुआवजा मिलने को लेकर मंगलवार को क्लेम कमिश्नर रिटायर्ड जस्टिस केसी पुरी के सामने व्यापारियों ने अपनी व्यथा सुनाई। कैनाल रेस्ट हाउस में कलानौर और शहर से आए करीब 17 व्यापारियों ने कम मुआवजा मिलने के आरोप लगाए। जस्टिस पुरी ने 30 सितंबर तक नए क्लेम व आपत्तियों के लिए समय दिया। वहीं, दूसरी ओर जिला प्रशासन ने ज्यादा वसूली करने वाले लोगों की पहचान कर ली है। अभी तक सात नाम सामने आए हैं। इनमें दो एक करोड़ से ऊपर के नुकसानधारक हैं। वहीं पांच एक करोड़ से नीचे के नुकसानधारक हैं। अब इनसे रिकवरी के लिए तैयारी हो चुकी है। 15 सितंबर से प्रशासन द्वारा नोटिस जारी कर दिए जाएंगे। कम मुआवजा मिलने की बात कह रहे लोगों के लिए प्रदेश सरकार द्वारा क्लेम कमीशन बनाया गया है, जो 30 सितंबर तक नए क्लेम व आपत्तियों को ले सकेगा। इसके लिए जिले में नगर निगम के ज्वाइंट कमिश्नर अजय चोपड़ा को नोडल आफिसर तैनात किया गया है। बता दें कि अभी तक 98 फीसदी पुराने क्लेम सैटल किए जा चुके हैं। मंगलवार को दोपहर बाद कैनाल रेस्ट हाउस में कलानौर और शहर से आए कुछ व्यापारियों ने क्लेम कमिश्नर जस्टिस केसी पुरी के सामने कम मुआवजा मिलने का भी मामला उठाया। व्यापारियों ने एक बार तो चेतावनी भरे लहजे में धरना देने की भी बात कही, लेकिन बाद में पीड़ा बताते हुए कहा कि उनके मामले में पूरा मुआवजा देने के लिए आदेश दिए जा चुके हैं, लिस्ट भी बनी हुई है, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। पालिका बाजार व्यापारी एसोसिएशन के प्रधान गुलशन निझावन ने इन व्यापारियों की पैरवी कर उन्हें पूरा मुआवजा दिलाने की बात की। 31 ने जताई थी आपत्ति 17 पाए गए थे पात्र गुलशन निझावन ने जस्टिस पुरी को दी शिकायत में बताया कि दंगों में नुकसान का पूरा मुआवजा न मिलने पर 31 व्यापारियों ने सीएम को ज्ञापन दिया था। सीएम के आदेश पर 17 व्यापारियों के कम मुआवजा मिलने का मामला पाया गया, लेकिन नगर निगम के अधिकारियों के द्वारा उन सभी फाइलों पर मुआवजा निर्धारित करने के बाद में दोबारा से काट दिया। ज्यादा मुआवजा लेने पर इनसे की जानी है रिकवरी केस एक : पावर हाउस पर एक नामी फास्ट फूड कंपनी की ओर से करीब 3 करोड़ रुपए का मुआवजा जिला प्रशासन से क्लेम किया गया। प्रशासन की ओर से शुरुआती चरण में दी जा रही अंतरिम राशि में से करीब 10 लाख दे दिए गए। बाद में कंपनी की ओर से बीमा कंपनी से भी राशि ले ली गई। इस पर संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन ने रिकवरी की सूची में डाला है। केस दो : पावर हाउस के सामने एक जूता कंपनी के शोरूम में 20 लाख रुपए के नुकसान का मुआवजा मांगा गया। जिला प्रशासन की ओर से सर्वेयर को भेजकर पड़ताल करवाई गई तो इसमें भी गोलमाल पाया गया। इस पीड़ित को भी करीब एक लाख 38 हजार रुपए की राशि दी जा चुकी है। अब इस मामले में रिकवरी की जाएगी। अधिकारियों के साथ की बैठक जस्टिस पुरी ने दोपहर में जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर मुआवजा संबंधी कार्य की समीक्षा भी की। बैठक में एडीसी प्रदीप कुमार, सीटीएम महेंद्रपाल, निगम के संयुक्त आयुक्त अजय चोपड़ा, तहसीलदार गुलाब सिंह और निगम के सहायक नगर योजनाकार केके वार्ष्णेय आदि उपस्थित रहे। - जिले में दंगों के लिए ज्यादा मुआवजा लिए जाने के मामले में 15 सितंबर से नोटिस जारी किए जाएंगे। उसके बाद रिकवरी की तैयारी होगी। - अतुल कुमार, डीसी, रोहतक।

पांचवें दिन में पहुंचा जाट आंदोलन, दोबारा बढ़ने लगी आंदोलनकारियों की संख्या

पांचवें दिन में पहुंचा जाट आंदोलन, दोबारा बढ़ने लगी आंदोलनकारियों की संख्या

Last Updated: June 09 2016, 18:12 PM

जींद। जाट आंदोलन गुरुवार को पांचवे दिन में प्रवेश कर गया। अभी तक आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। वहीं आंदोलनकारियों की संख्या जो पहले दिन कम हो गई थी अब दोबारा बढ़नी शुरू हो गई है। वहीं सोनीपत, रोहतक में धरना प्रदर्शन के साथ-साथ क्रमिक अनशन भी शुरू किया गया है। सिरसा में धरना प्रदर्शन न करने का किया एेलान... - सिरसा में गुरुवार को जाट समुदाय के लोगों ने जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर धरना प्रदर्शन न करने का ऐलान किया है। गौरतलब है कि बुधवार को सिरसा के रामपुरा ढिल्लों गांव में धरना प्रदर्शन होना था, वहां के गांव वालों ने इसका विरोध किया था। इसके बाद सिरसा में धरना प्रदर्शन की जगह नहीं मिल पाई थी। महिलाएं भी बड़ी संख्या में जुट रही धरने में - प्रशासनिक अधिकारी हर जिले में जाट आंदोलन की गतिविधि पर नजर रख रहे हैं और धरना स्थलों के इर्दगिर्द सुरक्षा बलों के जवान मुस्तैद हैं। - धरने में अब तक युवाओं की उपस्थिति कम ही नजर आ रही थी, लेकिन गुरुवार को धरने पर युवाओं की भी पर्याप्त भागीदारी रही। - महिलाएं भी धरनास्थलों पर काफी संख्या में पहुंच रही हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें अन्य फोटो..........

जाट आंदोलन का दूसरा दिन, संयमित जुबान व 36 बिरादरी के भाईचारे का ऐलान

जाट आंदोलन का दूसरा दिन, संयमित जुबान व 36 बिरादरी के भाईचारे का ऐलान

Last Updated: June 07 2016, 06:11 AM

रोहतक। फरवरी माह में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुए दंगों को लेकर बदनामी झेल चुके आरक्षण समर्थक रविवार से शुरू हुए दूसरे आंदोलन में पॉजीटिव मोड लेकर उतरे हैं। न तो किसी को भड़काऊ भाषण देने का अधिकार है और न ही किसी जाति या वर्ग को निशाना बनाने का। यहां तक कि सोमवार को दूसरे दिन जाट नेताओं ने अपने संबोधन में आपसी भाईचारे पर बल देते हुए 36 बिरादरी की एकजुटता की बात कही। दो टूक कहा कि उन्हें किसी अन्य जाति के आरक्षण से कोई ऐतराज नहीं है। वे सिर्फ अपने हक की लड़ाई शांतिपूर्वक तरीके से लड़ रहे हैं। धरने को संबोधित करने वाले डेढ़ दर्जन से अधिक जाट नेताओं के भाषण में कुछ इसी तरह का मजमून देखने को मिला। ये रहे मुख्य वक्ता अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष आजाद सिंह लाकड़ा, प्रदेश उपाध्यक्ष जगवीर शौकीन, युवा प्रदेश अध्यक्ष भगत सिंह सहरावत, युवा उपाध्यक्ष यशवंत दहिया, महासचिव कुलदीप डबास, युवा महासचिव जितेंद्र डबास, नजफगढ़ जिलाध्यक्ष जयवीर गुलिया, युवा कार्यकर्ता हेमंत डबास, दिल्ली महासचिव हरीश कुमार सहरावत सहित दर्जनभर जाट नेताओं ने धरने में शिरकत की। स्थानीय नेताओं में जिलाध्यक्ष अशोक बलहारा, देवेंद्र जसिया, सीरी घिलौड़, भीम सिंह दलाल, जोगेंद्र सिंह पहलवान, उम्मेद पूर्व सरपंच, सुमित सरपंच, जिला परिषद सदस्य सतीश भालौठ, आनंद प्रधान, कलकल खाप के प्रधान राजू, जाट आरक्षण संघर्ष समिति के खिड़वाली से धर्मबीर हुड्डा, कृष्ण लाल हुड्डा, सोमबीर जसिया, पवन हुड्डा, सुदर्शन धरनास्थल पर मुख्य वक्ताओं में शामिल रहे। जो जाट हित की बात करेगा, वही देश पर राज करेगा जाट आरक्षण संघर्ष समिति के दिल्ली प्रदेश के महासचिव हरीश सहरावत ने कहा कि जाट समुदाय का मकसद किसी को नुकसान या मान-सम्मान को ठेस पहुंचाना नहीं। मकसद सिर्फ अपना उद्देश्य हासिल करना है। उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि वादाखिलाफी ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगी। जाटों को आरक्षण देना ही पड़ेगा। उन्होंने नारा दिया कि जो जाट हित की बात करेगा, वही देश पर राज करेगा। धरने पर बैठे आंदोलन समर्थकों ने इस नारे का भरपूर समर्थन दिया। हक मांग रहे हैं और लेकर रहेंगे आरक्षण की मांग को लेकर जाट समुदाय शांतिपूर्वक तरीके से निर्णायक लड़ाई के मूड में आ गया है। उन्होंने एेलान कर दिया है कि जब तक इस मामले में सकारात्मक परिणाम सामने नहीं जाता आंदोलन जारी रहेगा। लेकिन साथ ही दावा यह भी है कि आंदोलन शांतिपूर्वक रहेगा। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष अशोक बलहारा ने कहा कि सरकार उनकी मांगों को लेकर सकारात्मक कदम नहीं उठा रही है। इस बार जब तक सरकार के नुमाइंदे धरनास्थल पर आकर लिखित आश्वासन नहीं देंगे धरना जारी रहेगा। गांव-गोहांड व खापों से मांगा सहयोग धरना शुरू होने के दौरान आरक्षण समर्थकों की संख्या को देखते हुए कुछ वक्ताओं ने कहा कि गांव-गोहांड के लोगों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में आकर धरने को सफल बनाना होगा। यह धरना जसिया गांव का नहीं, बल्कि पूरे जिले का है, लिहाजा लोगों को इसे सफल बनाना होगा। इसके अलावा वक्ताओं ने कहा कि आरक्षण लेने वाली अन्य जातियों को भी सहयोग करना चाहिए, क्योंकि जाट समुदाय उनके आरक्षण को लेकर कोई ऐतराज नहीं जता रहा।

शहर में बिगड़ने लगा माहौल, परीक्षा का हवाला दे खाली कराया जाट भवन

शहर में बिगड़ने लगा माहौल, परीक्षा का हवाला दे खाली कराया जाट भवन

Last Updated: June 07 2016, 05:27 AM

रोहतक। आरक्षण को लेकर शहर में माहौल बिगड़ने न पाए इसके लिए इस बार जाट भवन को पहले ही जाट भवन प्रबंधन ने खाली करवा लिया है। साथ ही जाट सभा ने पुलिस की सुरक्षा की मांग की है। एसपी को दी गई लिखित शिकायत में जाट सभा ने स्पष्ट तौर पर युवा जाट एकता मंच द्वारा की गई कार्रवाई से कोई सरोकार न होने की बात कही है। साथ ही परीक्षा की तैयारी में जुटे बच्चों की पढ़ाई में बाधा पड़ने का भी कारण बताया है। बता दें कि एमडीयू में बीएड की परीक्षा देने के लिए पश्चिम बंगाल से आए स्टूडेंट्स ने दो जून से 14 जून तक जाट भवन के 21 कमरों को बुक करवाया है। करीब 63 स्टूडेंट्स यहां पर पढ़ाई करने के लिए आए हुए हैं और 14 जून तक परीक्षा भी देंगे। इस मामले में जाट भवन के प्रबंधक रघुबीर सिंह अहलावत का कहना है कि दोबारा से एसपी से मुलाकात कर इस मामले में संज्ञान लेने की बात कही है। यहां पर परीक्षा देने आए विद्यार्थियों की पढ़ाई भी मंच के कार्यक्रमों से बाधित होती है। जाट भवन का दुरुपयोग न्याय मंच के प्रवक्ता कैप्टन जगपाल सिंह का कहना है कि जाट समाज के नाम का दुरुपयोग कर अब जाट भवन में राजनीति करने वाले लोगों का जमावड़ा गलत है। यह सेक्टर और पूरे शहर के लिए उचित नहीं है। आए दिन सिर्फ बयानबाजी कर यहां पर माहौल को गर्म करने का प्रयास किया जाता है, जिससे आमजन में दहशत बढ़ती है। इससे कुछ हासिल नहीं होने वाला। यदि इन लोगों को सच में कुछ काम करना है तो सीधे सरकार और प्रशासन से मिलकर अपनी बात रखें, न कि आए दिन राजनीतिक बयान जारी कर शहरवासियों में दहशत बनाने की। प्रशासन द्वारा इसे सील कर दिया जाना चाहिए। यहां पर प्रदर्शन और धरना करने वालों को रासुका में बंद कर दिया जाए। किसी को राजनीति की इजाजत नहीं जाट भवन में सभा के नियम अनुसार किसी को राजनीति करने की इजाजत नहीं दी जाती है। हालांकि चौ. भूपेंद्र हुड्डा ने 87 लाख रुपए दिए थे और चौ. ओपी चौटाला ने जमीन दी थी। उनकी पार्टी भी सत्ता में रही, लेकिन कभी राजनीतिक कार्यक्रम की इजाजत नहीं दी गई। यह एक सामाजिक संस्था है। इसे राजनीतिक तौर पर प्रयोग नहीं किया जा सकता है। -मेजर चंद्र सिंह, प्रधान, जाट सभा। असामाजिक तत्व को नहीं शामिल होने देंगे धरने में समिति के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष आजाद सिंह लाकड़ा ने कहा कि जाट समुदाय को यह कहकर बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं कि जाट अन्य जातियों का आरक्षण छीनना चाहते हैं। लाकड़ा ने कहा कि जाट 35 नहीं, बल्कि 36 बिरादरियों की एकता चाहते हैं। उन्हें किसी जाति के आरक्षण से कोई परहेज नहीं है। शांतिपूर्वक धरना देकर वे सिर्फ अपना हक मांग रहे हैं। नहीं पहुंचे यशपाल मलिक समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष व जाट नेता यशपाल मलिक के धरने में शामिल होने की सूचना पर पुलिस फोर्स बढ़ा दी गई, लेकिन रिश्तेदारी में मौत होने के चलते मलिक नहीं पहुंच सके। यूपी के मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और बुलंदशहर में मंगलवार से धरने शुरू किए जाएंगे, जिसमें मलिक के शामिल होने की संभावना है।

आंदोलन को लेकर बढ़ाई सुरक्षा, चेकिंग में कारों से पुलिस ने बरामद किए डंडे

आंदोलन को लेकर बढ़ाई सुरक्षा, चेकिंग में कारों से पुलिस ने बरामद किए डंडे

Last Updated: June 07 2016, 05:15 AM

रोहतक। आरक्षण को लेकर दोबारा से आंदोलन शुरू होने के बाद पुलिस प्रशासन भी इस बार चौकस हैं। किसी भी वक्त परिस्थिति बदल सकती है, लिहाजा स्टेप वाइस सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। अगर जाम लगाने की कोशिश हुई तो यह योजना, आंदोलन हिंसक हुआ तो वह योजना। इन आशंकाओं के मद्देनजर पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने हालातों से निपटने के लिए अलग-अलग योजनाएं बनाई हैं। वहीं, अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक के आने की सूचना पर जसिया धरना-स्थल पर फोर्स बढ़ा दी गई। हालांकि मलिक के न पहुंच सकने की जानकारी मिलने पर राहत की सांस ली। दो वाटर कैनन भी धरना स्थल पर पहुंचाईं रोहतक-पानीपत हाईवे पर सुरक्षा के इंतजामों की बात करें तो सबसे पहले पठानिया पब्लिक स्कूल के पास बीएसएफ ने बंकर बनाया हुआ है। इसके अलावा मकड़ौली टोल प्लाजा पर तीन वाटर कैनन, एक अग्निशमन गाड़ी व फोर्स तैनात की गई थी। सोमवार को जैसे ही यशपाल मलिक के जसिया में आने की सूचना मिली तो अधिकारियों ने तत्काल रणनीति बदलते हुए धरनास्थल पर फोर्स बढ़ा दी और टोल प्लाजा पर खड़ी तीन में दो वाटर कैनन जसिया पहुंचा दीं। नाकों पर सख्त चेकिंग सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर शहर से जुड़ने वाले रास्तों पर 11 जगह नाके लगाए गए हैं। इन नाकों पर बीएसएफ के जवान स्थानीय पुलिस के साथ वाहनों व संदिग्ध लोगों को चेकिंग कर रहे हैं। सोमवार को मकड़ौली टोल प्लाजा, झज्जर बाईपास व आईएमटी चौक नाके पर चेकिंग के दौरान कई कारों से डंडे बरामद हुए। पुलिस ने पूछताछ व नाम-पता नोट करने के बाद इन डंडों को जब्त कर लिया। किसी भी नाके पर संदिग्ध व आपत्तिजनक चीज बरामद नहीं हुई। डीएसपी ने डाला डेरा, रात में भी फोर्स तैनात सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एसपी ने पुलिस को दिशा-निर्देश जारी किए। वहीं, धरनास्थल पर डीएसपी ने भी फोर्स के साथ डेरा डाल दिया है। डीएसपी व ड्यूटी मजिस्ट्रेट एक कंपनी आरएएफ व स्थानीय पुलिस के साथ धरनास्थल से 100 मीटर दूर ड्यूटी दे रहे हैं। शांतिपूर्वक धरने के अलावा कोई और फैसला न ले लिया जाए, इसके लिए अधिकारी पूरी तरह चौकस हैं। रात के वक्त धरना स्थल पर विशेष चौकसी बरती जा रही है।

न कोई धरना, न कोई ज्ञापन, सबकुछ रहा शांत, मुस्तैदी से डटी रही पुलिस

न कोई धरना, न कोई ज्ञापन, सबकुछ रहा शांत, मुस्तैदी से डटी रही पुलिस

Last Updated: June 06 2016, 04:56 AM

फरीदाबाद. जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर रविवार को 42 डिग्री तापमान में जिले के सभी पुलिस अफसर और कर्मचारी चिलचिलाती धूप में मुस्तैदी से सुरक्षा ड्यूटी में तैनात रहे। यहां न किसी तरह का धरना दिया गया और न ज्ञापन। इससे यहां शांति बनी रही। दरअसल, अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने हरियाणा भवन में ही यह फैसला ले लिया था कि रविवार की बजाय 6 जून को जाट नेता जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन सौंपेंगे। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश महासचिव रामकिशन मलिक ने जाट आरक्षण मसले को लेकर ज्ञापन सौंपे जाने की सूचना पुलिस के व्हाट्स एप नंबर 9999150000 पर दी। इसके तहत 6 जून (आज) को सुबह 11 बजे सेक्टर-12 स्थित लघु सचिवालय परिसर में जिला उपायुक्त को जाट नेता ज्ञापन सौंपेंगे। प्रमुख मार्गों पर तैनात था पुलिस बल जाट आरक्षण मामले को लेकर जिले भर में पुलिस बल राष्ट्रीय राजमार्ग समेत प्रमुख राज्यीय मार्गों पर तैनात रही। पुलिस कर्मियों के साथ हलके के पुलिस अधिकारी, डीसीपी भी पल-पल की रिपोर्ट लेते रहे। सीपी हनीफ कुरैशी के निर्देश पर डीसीपी और एसीपी शनिवार रातभर गश्त करते रहे। पुलिस कंट्रोल रूम को हिदायत दी गई थी कि हर आने वाली कॉल पर तुरंत संज्ञान लिया जाए। हालांकि जाट आरक्षण से संबंधित एक भी कॉल पुलिस कंट्रोल रूम में नहीं पहुंची।

जाट आंदोलन के दौरान की हैं ये वायरल Photos, तब हरियाणा में ऐसे थे हालात

जाट आंदोलन के दौरान की हैं ये वायरल Photos, तब हरियाणा में ऐसे थे हालात

Last Updated: June 04 2016, 06:20 AM

पानीपत. हरियाणा में जाटों के संगठन ने 5 जून से एक बार फिर आंदोलन की धमकी दी है। इस बार सरकार अलर्ट है। कई जिलों में पहले ही पैरामिलिट्री फोर्स तैनात कर दी गई है। आंदोलन की धमकी के बाद फिर से पुराने मंजर की चर्चा हो रही है। आज भी लोग लूट-पाट, आगजनी और हिंसा की घटनाओं को भूले नहीं हैं। उस वक्त आंदोलन के दौरान की कई फोटोज सोशल मीडिया में वायरल हो गईं थीं। बता दें कि उस वक्त किसी का घर-दुकान जला दिया गया था तो किसी का शो-रूम लूट लिया गया था। इसलिए पहले ही लगा दी गई है धारा 144... - सोनीपत, कैथल, जींद, झज्जर, रोहतक, बहादुरगढ़ जैसे इलाकों में जो जातों के गढ़ हैं, वहां धारा-144 लगा दी गई है। - पहले जिन जिलों में उपद्रव हुआ था वहां की सिक्युरिटी कड़ी कर दी गई है। - फरवरी में हुए हिंसक आंदोलन के दौरान हरियाणा पूरी तरह से जल उठा था। - आंदोलन के दौरान ना ही महिलाएं सुरक्षित थी और ना ही बच्चे। उपद्रवियों ने आम लोगों को भी खासा नुकसान पहुंचाया था। - आंदोलन के दौरान नेशनल हाईवे पर कुछ महिलाओं के साथ गैंगरेप की घटना भी सामने आई। - आंदोलन में कई लोगों की जानें गई सो अलग। इन वजहों से हरियाणा सरकार की काफी किरकिरी हुई। - इतना ही नहीं एसोचैम की रिपोर्ट की मानें तो सरकार को कुल 34,000 करोड़ का नुकसान आंदोलन की वजह से झेलना पड़ा था। आंदोलन के दौरान शादियों पर भी लग गया था ग्रहण - आंदोलन का असर हरियाणा में होने वाली कई शादियों पर भी पड़ा था। सारे रास्ते बंद थे। - रास्ते बंद होने की वजह से हेलिकॉप्टर से बारात लेकर जाना पड़ा। - एक और दिलचस्प बारात का मामला भी सामना आया था। इसमें मरीज बनकर एम्बुलेंस से बाराती पहुंचे थे। आगे की स्लाइड्स पर देखे फरवरी में हुए हिंसक आंदोलन के दौरान की चुनिंदा वायरल फोटोज...

जाट आंदोलन को लेकर दबाव में है मुख्यमंत्री : कैप्टन अजय यादव

जाट आंदोलन को लेकर दबाव में है मुख्यमंत्री : कैप्टन अजय यादव

Last Updated: June 03 2016, 05:53 AM

झज्जर | पूर्व बिजली मंत्री कैप्टन अजय यादव ने कहा कि प्रदेश के सीएम जाट आंदोलन काे लेकर दबाव में काम कर रहे हैं। वे बोले कि सीएम मनोहरलाल खट्टर की यशपाल मलिक से बातचीत कानून के खिलाफ है। झज्जर की ब्राह्मण धर्मशाला में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कैप्टन यादव ने प्रकाश रिपोर्ट पर भी सवाल खड़े किए। पूर्व बिजली मंत्री कैप्टन अजय यादव का कहना है कि वो हैरान है कि सीएम यशपाल मलिक जिस पर देशद्रोह का मामला दर्ज है ऐसे व्यक्ति से बातचीत कर रहे है, जबकि कानून के अनुसार होना ये चाहिए कि यशपाल मलिक को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजना चाहिए। इतना ही नहीं उनका आरोप है कि सीएम दबाव में काम कर रहे है। उन्होंने सीएम की यशपाल मलिक के साथ बातचीत को कानून के खिलाफ बताया है।

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