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दिवाली लक्ष्मी पूजा

  • सिंगर माइली साइरस ने घर में की लक्ष्मी पूजा, दीप जलाकर हलवे का भोग लगाया
    Last Updated: February 07 2017, 14:36 PM

    लॉस एंजिलिस. हॉलीवुड सिंगर माइली साइरस ने अपने घर में लक्ष्मी-पूजा की। मां लक्ष्मी को फल और हलवे का भोग लगाया। अगरबत्ती और दीए भी जलाए। पूजन की फोटो उन्होंने सोमवार को इंस्टाग्राम पर शेयर की। फोटो में माइली के गुरु भी नजर आ रहे हैं। माइली ने ड्रॉइंग हॉल को कुशन और फूलों से सजाया और फिर विधि-विधान से पूजा की। बनवा चुकी हैं ओम टैटू... - माइली के हिंदू धर्म को अपनाने की खबरें सबसे पहले 2012 में सामने आई थीं। तब इस सिंगर ने बाएं कंधे पर ओम टैटू बनवाया था। इसके बाद उनके फैन्स ने पूछा था कि क्या आप हिंदू धर्म अपनाने जा रही हैं? कौन हैं माइली साइरस - पॉप सिंगर और सॉन्ग राइटर माइली सायरस का जन्म 23 नवंबर, 1992 को अमेरिका के फ्रेंकलिन में हुआ। - 25 साल की साइरस डिज्नी चैनल सीरीज हैना मॉन्टेना में लीड कैरेक्टर के लिए खास तौर से जानी जाती हैं। - 9 साल की उम्र से ही एक्टिंग में रुचि दिखाने लगी थीं। उन्होंने 2003 में टिम बर्टन की बिग फिश में यंग रूथी की भूमिका निभाई। वह डेस्टिनी सायरस के नाम से पॉपुलर हो गईं। - माइली को पेटा ने 2015 की सेक्सिएस्ट वेजिटेरियन सेलिब्रिटी का खिताब दिया था। साइरस ने इस लिस्ट में 100 दूसरे सेलेब्स को पीछे छोड़कर ये खिताब अपने नाम किया था। - 2008 में 25 मिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ माइली फोर्ब्स मैगजीन की 100 टॉप सेलिब्रिटी लिस्ट में 35वें नंबर पर थीं। इन फिल्मों में किया काम... बिग फिश, बोल्ट, हन्ना मोन्टाना, द लास्ट सॉन्ग, सो अंडरकवर, अ वेरी मुरे क्रिसमस, क्राइसिस इन सिक्स सीन्स। माइली के एल्बम... मीट माइली साइरस, ब्रेकआउट, कॉन्ट बी टेम्ड, बैंगर्ज, माइली साइरस एंड हर डेड पेट्ज। आगे की स्लाइड्स में देखें, माइली साइरस द्वारा किए गए लक्ष्मी-पूजन की PHOTOS...

  • ये महिला आईएएस अफसर भी रखती हैं छठ का व्रत, जानें कैसी करती हैं पूजा
    Last Updated: November 06 2016, 03:38 AM

    पटना । ये हैं डॉ. एन. विजय लक्ष्मी। 1995 बैच की बिहार कैडर की आईएएस अफसर। फिलहाल बिहार महिला विकास निगम की प्रबंध निदेशक हैं। आंध्र प्रदेश की मूल निवासी डॉ. विजयलक्ष्मी पिछले तीन बार छठ मना चुकीं हैं। यह इनका चौथा साल है। इनके पति एस. सिद्धार्थ भी बिहार कैडर के आईएएस अफसर। दोनाें दक्षिण से आते हैं, मगर छठ में इनकी आस्था इतनी प्रबल हुई कि छठ करने लगीं। पढ़िए आईएएस अफसर से हुई पूरी बातचीत.... - यह पूछने पर दक्षिण के राज्यों में तो छठ नहीं होती, आप कैसे करने लगीं? उन्होंने कहा- 21 वर्ष से बिहार में हूं। - इस दौरान बिहार की संस्कृति और परंपराओं को करीब से जाना जो काफी पसंद आई। - पहले जब विभिन्न जिलों में जिलाधिकारी थी तब छठ व्रतियों के लिए प्रशासनिक पदाधिकारी के रूप में साफ-सफाई समेत कई दूसरी व्यवस्था करती थीं। - तब लोगों की छठ के प्रति आस्था देखकर इसमें रूचि जगने लगी। सूर्य ही ऐसे देवता है जो दिखने वाले हैं और यह उनसे जुड़ा है। - ऐसे में छठ हमें प्रकृति से जुड़ने का मौका देता है। शनिवार को डॉ. विजय लक्ष्मी अपने सरकारी आवास पर खरना का प्रसाद बनाती और पूजा करती दिखीं।

  • यहां दिवाली में उल्लू 10 लाख का अवैध बाजार, एक की कीमत 6 से 15 हजार
    Last Updated: October 27 2016, 04:22 AM

    पटना. दीपावली में पटना में उल्लुओं की मांग बढ़ गई है। पक्षियों का व्यापार करने वाले उसे दो से छह हजार में बेच रहे हैं। इसके लिए वह तंत्र क्रिया करने वाले से एडवांस पैसे ले रहे हैं। दीपावली के दिन तांत्रिक तंत्र-मंत्र को जगाने का काम करते हैं। इसके लिए वह उल्लुओं की बलि देते हैं। वन अधिनियम के तहत उल्लुओं का शिकार करना दंडनीय अपराध है। इसके बाद भी पटना में उल्लुओं की खरीद-फरोख्त जारी है। दीपावली के वक्त 20 गुना बढ़ जाती है कीमत... - आमतौर पर 300 से 500 रुपए में मिलने वाले उल्लू का दाम दीपावली के वक्त 20 गुना बढ़ जाता है। दीपावली के समय उल्लू की कीमत दो से छह हजार रुपए की हो जाती है। - उल्लू के वजन, आकार, रंग, पंख के फैलाव के आधार पर उसका दाम तय किया जाता है। लाल चोंच और शरीर पर सितारा धब्बे वाले उल्लू का रेट 15 हजार रुपए से अधिक होता है। - दीपावली में उल्लू की मांग को देखते हुए शिकारी और पक्षी बिक्रेता इसके लिए एडवांस पैसे लेते हैं। पेड़ों के ऊंचे स्थान, पठार के खोडर में उल्लू अपना निवास बनाते हैं। - इसके साथ ही पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे करीमपुर, नदिया के चापरा, मुर्शीदाबाद के जंलगी, मालदा, पूर्व मेदनीपुर के हल्दिया से उल्लू की तस्करी की जाती है। संरक्षित प्रजाति है उल्लू भारतीय वन्य जीव अधिनियम,1972 की अनुसूची-एक के तहत उल्लू संरक्षित है। ये विलुप्त प्राय जीवों की श्रेणी में दर्ज है। इनके शिकार या तस्करी करने पर कम से कम 3 वर्ष या उससे अधिक सजा का प्रावधान है। रॉक आउल, ब्राउन फिश आउल, डस्की आउल, बॉर्न आउल, कोलार्ड स्कॉप्स, मोटल्ड वुड आउल, यूरेशियन आउल, ग्रेट होंड आउल, मोटल्ड आउल विलुप्त प्रजाति के रूप में चिह्नित हैं। इनके पालने और शिकार करने दोनों पर प्रतिबंध है। पूरी दुनिया में उल्लू की लगभग 225 प्रजातियां हैं। कहीं अशुभ तो कहीं बुद्धि का प्रतीक कई संस्कृतियों में उल्लू को अशुभ माना जाता है, लेकिन साथ ही संपन्नता और बुद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। यूनानी मान्यताओं में उल्लू का संबंध कला और कौशल की देवी एथेना से माना गया है और जापान में भी इसे देवताओं का संदेशवाहक समझा जाता है। यह धन की देवी लक्ष्मी उल्लू पर विराजती हैं। इससे आयुर्वेदिक इलाज होता है। इसके चोंच और नाखून को जलाकर तेल तैयार होता है जिससे गठिया ठीक होता है। इसके मांस का प्रयोग यौनवर्धक दवाओं में किया जाता है। पूजा सिद्ध करने से पहले होती है विशेष तैयारी तांत्रिक धनेश कुमार के अनुसार उल्लुओं की पूजा सिद्ध करने के लिए उसे 45 दिन पहले से मदिरा एवं मांस खिलाया जाता है। प्रायः उल्लुओं में यह प्रवृत्ति पाई जाती है कि तोता की भांति इंसानी भाषा में बात कर सकता है। इसके लिए तांत्रिक उल्लुओं के सामने नाम बदलने के साथ ही कुछ ना कुछ बोलते रहते हैं। तांत्रिकों के इसके अस्थि, मंजा, पंख, आंख, रक्त से विशेष पूजा की जाती है। इसका पैर धन अथवा गोलक में रखने से समृद्धि आती है। इसका कलेजा वशीभूत करने के काम में प्रयुक्त होता है। आंखों के बारे में माना जाता है कि यह सम्मोहित करने में सक्षम होता है तथा इसके पंखों को भोजपत्र के ऊपर यंत्र बनाकर सिद्ध करने के काम में आता है तथा चोंच इंसान की मारण क्रिया में काम आती है। इसके बारे में यह भी भ्रांति है कि यदि इसे हम किसी प्रकार का कंकड़ मारें और यह अपनी चोंच में दबाकर उड़ जाए और किसी नदी अथवा तालाब में डाल दे तो जिस प्रकार से वह कंकड़ घुलेगा उसी प्रकार कंकड़ मारने वाले का शरीर भी घुलने लगता है। वशीकरण, मारण, उच्चारण, सम्मोहन इत्यादि साधनाओं की सफलता के लिए उल्लुओं की बलि दी जाती है। इनका है कहना पटना के डीएफओ मिहिर कुमार झा ने बताया कि संरक्षित प्राणियों के व्यापार करने वालों पर वन विभाग की निगाह रहती है। गश्ती के दौरान वन सुरक्षाकर्मी लड़की कटाने के साथ ही वन जीवों के व्यापार करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई करते हैं। वहीं पंडित अरुण कुमार पाठक का कहना है कि उल्लू लक्ष्मी की सवारी है। लोग लक्ष्मी जी के उल्लू की भी पूजा करते हैं। तांत्रिक तंत्र शक्ति बढ़ाने के लिए उल्लुओं की बलि देते हैं। इसके सभी अंगों को विशेष तरीके से पूजा करते हैं। बैम्बू का यूज करके पकड़ते हैं उल्लू उल्लू पकड़ने के लिए बैम्बू पोल्स और तरह-तरह की जालियों का इस्तेमाल किया जाता है। आग जलाकर पेड़ों में छिपे उल्लुओं को निकाला जाता है। उनके बाहर निकलते ही शिकारी जाल फैलाकर उनको फंसा लेते हैं। वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट-1972 के तहत उल्लुओं के शिकार पर रोक है फिर भी चोरी- छिपे उल्लुओं का शिकार किया जाता है। नोट : सभी उल्लू की फोटो का यूज स्टोरी प्रेजेंटेशन के लिए किया गया है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें उल्लू बेचने वाले से बातचीत...

  • हस्त नक्षत्र में शुरू दीप पर्व लाएगा खुशहाली, जानिए क्या है लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त
    Last Updated: October 26 2016, 04:53 AM

    अजमेर. पांच दिवसीय दीपोत्सव का शुभारंभ हस्त नक्षत्र में शुक्रवार को अमृतमयी धनतेरस के साथ होगा। शुक्रवार से शुभारंभ होने से आने वाला समय सभी के लिए खासी शुभ रहेगा। शनिवार को रूप चौदस मनाई जाएगी। रविवार को धन की देवी लक्ष्मी माता का पूजन किया जाएगा। सोमवार को अन्नकूट महोत्सव मनाया जाएगा। मंगलवार को भैया दूज के साथ पांच दिवसीय दीपोत्सव संपन्न होगा। धनतेरस: भगवान धनवंतरी विघ्न को दूर करते हैं और आरोग्य प्रदान करते हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन सुबह और शाम प्रदोषकाल में पूजा करनी चाहिए। सुबह की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 8:01 से 10:47 बजे तक और शाम को प्रदोषकाल में 5:40 से 6:55 बजे तक रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शास्त्रों में मान्यता है कि घर में नया बर्तन आना सौभाग्य का प्रतीक है। इससे आने वाले वर्ष में धन-धान्य और संपदा बनी रहती है। धनतेरस को बर्तन के साथ अन्न या मिष्ठान लाकर उसमें भर दें। इससे माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। रूप चौदस : रूप चौदस को सूर्योदय से पहले उबटन और तेल लगाकर नहाने से काया निरोगी रहती है। कारण कि इस दिन तेल में लक्ष्मी और जल में गंगा का निवास होता है। दीपावली- ज्योतिषाचार्य के अनुसार शास्त्रों में यह भी उल्लेख है कि आने वाले वर्ष में माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए उनका पूजन उचित समय पर करने से माता की विशेष कृपा मिलती है। पं. बंशीधर ज्योतिष पंचांग के ज्योतिर्विद पं. दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि लक्ष्मी पूजन के लिए स्थिर लग्न शास्त्रों में सर्वश्रष्ठ बताए गए हैं। किस राशि के जातक किस लग्न में करें पूजा ज्योतिष के ज्ञाता पं. कैलाश नाथ दाधीच पुष्कर ने बताया कि राशि के अनुसार लग्न विशेष में लक्ष्मी पूजा करने से जातक के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी रहता है। मेष, मिथुन, कर्क, तुला, धनु- वृष लग्न में शाम 6:53 से 8:49 बजे तक। वृष, सिंह, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुंभ और मीन- रात्रि सिंह लग्न में 1:21 से 3:38 बजे तक। लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त : प्रात 8:11 से 10:28 बजे तक। प्रदोषकाल : शाम 5:33 से रात 8:17 तक। वृष लग्न : 6:53 से रात 8:49 बजे तक। सिंह लग्न : रात्रि में 1:21 से 3:38 तक।

  • दिवाली 30 को, 23 को खरीदारी के पांच संयोग, जानिए खरीदारी का महामुहूर्त
    Last Updated: October 15 2016, 04:43 AM

    पटना. सुख-समृद्धि व प्रकाश का पर्व दीपावली 30 अक्टूबर को है, जबकि धनतेरस शुक्रवार 28 अक्टूबर को पड़ रहा है। इसी दिन धनवंतरी जयंती के साथ प्रदोष व्रत व मास शिवरात्रि का उत्तम संयोग बन रहा है। इस दिन तीन व्रत अनुष्ठानों का संयोग बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्य पंडित प्रेमसागर पाण्डेय के अनुसार मास शिवरात्रि होने के कारण कुबेर सबल होते हैं एवं प्रदोष काल में दीप दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। जानिए क्या है खरीददारी का महामुहूर्त... - प्रदोष काल में अनेक प्रकार के दोषों का शमन होता है। 30 तारीख दीपावली को प्रात: काल में हनुमत दर्शन, शाम में देव दीप दान व प्रदोष काल में लक्ष्मी, गणेश, कुबेर आदि पूजन होगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार दीपावली से 8 दिन और धनतेरस से 6 दिन पहले रविवार 23 अक्टूबर को रवि पुष्य नक्षत्र का महासंयोग बन रहा है। इस महामुहूर्त के दौरान धनतेरस व दीपावली से पहले खरीददारी करना शुभ होगा। रवि पुष्य अपने आप में श्रेष्ठ नक्षत्र माना जाता है। पुष्य नक्षत्र की धातु सोना है, जिसे खरीदने से सबसे ज्यादा शुभ माना जा रहा है। 22 अक्टूबर को शनिपुष्य व 23 को रवि पुष्य का योग बनने से भूमि, भवन, वाहन व अन्य स्थाई संपत्ति में निवेश करने से भी भरपूर लाभ का योग है। सोना-चांदी, बर्तन, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक के सामान, बही खाता, महालक्ष्मी पूजन सामग्री एवं बिछाने वाली गद्दी खरीदने का भी महा मुहूर्त है। खरीदारी का महामुहूर्त - प्रातः 9 से 10.30 लाभ - प्रातः10.30 बजे से 12 बजे तक अमृत - दोपहर 1.30 से 3 बजे तक शुभ - सायं 6 से 7.30 बजे तक शुभ - सायं 7.30 से 9 बजे तक अमृत लक्ष्मी पूजा का शुभ मुर्हूत - सुबह 7.20 से 8.44 बजे तक चर का चौघड़िया - सुबह 8.44 से 10.08 बजे तक लाभ का चौघड़िया - सुबह 10.08 से 11.33 बजे तक अमृत का चौघड़िया - दिन 12.57 से 2.21 बजे तक शुभ का चौघड़िया - रात में 5.09 से 6.33 बजे तक चर का चौघड़िया - रात में 6.33 से 7.57 बजे तक लाभ का चौघड़िया - रात में 7.57 से 9.21 बजे तक अमृत का चौघड़िया - रात 10.45 से 12.09 बजे तक शुभ का चौघड़िया - मध्य रात बाद 2.57 से 4.21 बजे तक चर का चौघड़िया

  • PHOTOS: यहां लक्ष्‍मी पूजा से घर में होती है धन की बारि‍श, लगता है खास मेला
    Last Updated: September 09 2016, 16:00 PM

    वाराणसी. यहां लक्सा क्षेत्र के लक्ष्मीकुंड स्थित लक्ष्मी मंदिर में शुक्रवार से सोरहिया मेले का शुभारंभ हो गया। यह अब लगातार 16 दिनों तक चलेगा। ऐसी मान्यता है कि कुंड में स्नान कर माता लक्ष्मी का दर्शन करने से पापों का नाश होता है वहीं लगातार 16 दिनों तक दर्शन-पूजन करने से घर में धन की वर्षा भी होती है। बहुत पुरानी है मान्यता - जाने-माने ज्योतिषाचार्य और कर्मकांडी पंडित कृष्ण मुरारी दी​क्षित ने बताया कि यह मेला 16 दिन तक चलेगा। - ऐसी परंपरा है कि 16 दिन तक माता लक्ष्मी का सोलह श्रृंगार किया जाता है। - महिलाएं कच्चे सूत का 16 गांठ बांधती हैं और उसे अपने हाथ में धारण करती हैं। - लक्ष्मी माता को 16-16 बार नैवेद्य चढ़ाया जाता है। - ऐसी मान्यता है कि 16 दिन तक लगातार मां की पूजा करने से हर तरह की समस्या दूर हो जाती है। - खासकर धन की समस्या का आसानी से निदान हो जाता है। - भविष्य में मां का आशीर्वाद भी प्राप्त होता रहता है। षोडशोपचार विधि से होती है पूजा - यहां नियमित पूजन करने वाले मुन्ना गुरु ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि मां की पूजा षोडशोपचार विधि से की जाती है। - बाद में 16 प्रकार से विधिवत श्रृंगार भी किया जाता है। - आखिरी 16वां दिन जीउतिया व्रत को पड़ता है। - इसी दिन मां की पूजा के बाद मेला खत्म हो जाता है। कई स्टेट से लोग आते हैं - यहां दर्शन-पूजन और सोरहिया मेले में शामिल होने के लिए यूपी के अलावा बिहार, दक्षिण भारत और एमपी से भी श्रद्धालु आते हैं। - कुंड में डुबकी लगाने के बाद मां का विधिवत दर्शन-पूजन भी करते हैं। आगे की स्लाइड्स में देखिए खबर से संबंधित फोटो...

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