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Monsoon Coverage

  • PHOTOS: जहां पड़ा था 40 साल का भयंकर सूखा, वहां आज है तबाही की बाढ़
    Last Updated: October 03 2016, 18:05 PM

    पुणे/औरंगाबाद: महाराष्ट्र के जिन इलाके में 40 साल का सबसे भयंकर सूखा पड़ा था, वे अब भयंकर बाढ़ की चपेट में हैं। लातूर और बीड जिले में बीते दो दिनों से जारी बारिश से इलाके में बाढ़ जैसे हालात हैं। राहत दलों को बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। लाखों हेक्टेयर फसल बर्बाद... - इस साल यहां औसत से करीब ढाई गुना अधिक हुई इस बारिश से दर्जनों गांव पानी में डूब गए हैं। - लातूर जिले में अब भी कुछ इलाकों में रुक-रुककर तो कहीं तेज बारिश जारी है। - 14 से 25 सितंबर के बीच 357 मिमी बारिश दर्ज की गई है। जिले में करीब छह लाख 16 हजार हेक्टेयर में फसलें बर्बाद हुई हैं। - इसमें सर्वाधिक साढ़े चार लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उगी सोयाबीन की फसल शामिल है। - बारिश से जिले के 192 छोटे-बड़े पुलों को नुकसान पहुंचा है। 46 सिंचाई तालाबों को भी क्षति हुई है। - लगभग 783 किमी सड़क खराब हो गई है। लोक निर्माण विभाग के अधीन आनेवाली 22 सड़कों और 56 पुलों को क्षति पहुंची है। हेलिकॉप्टर से मदद - लातूर जिले में बाढ़ के कारण अनेक परिवार फंसे हुए हैं। हेलिकॉप्टर के जरिए ऐसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश राहत दलों ने की है। - जिले की अहमदपुर तहसील के सावरगांव में रविवार को 20 वर्षीय युवक के बह जाने की खबर है। - इसके अलावा बाढ. में 33 पशुओं के बह जाने की जानकारी है। पानी में डूबा बीड - शनिवार देर शाम से बीड में जारी मूसलधार बारिश से समूचे जिले का जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। - आधा बीड शहर जलमग्न हो चुका है। जिला प्रशासन ने तटवर्ती इलाकों के लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की है। - सोलापुर मार्ग पर बीड. से 10 किमी की दूरी पर स्थित डोकेवाड़ा पहाड़ी पर स्थित तालाब लबालब भर गया है। - उसके पानी ने बिंदुसरा नदी के जरिए बांधक्षेत्र में प्रवेश कर लिया है। - शहर की निचली बस्तियों के सैकड़ों मकानों में पानी में घुस गया है। हैदराबाद-नांदेड़ राज्यमार्ग बंद - देगलूर तहसील में लेंडी नदी व मानयाद नदी में बाढ़ आने से कई गांवों में पानी घुस गया है। - मानयाद नदी का पानी वझरगा व अटकली गांव के बीच बहने से हैदराबाद- नांदेड़ राज्यमार्ग शनिवार की शाम 4 बजे से यातायात के लिए बंद हो गया है। - प्रशासन ने शेवाला गांव के 100 परिवारों को बिलोली तहसील में स्थानांतरित किया है। 40 साल का सबसे भयंकर सूखा - मराठवाड़ा के 15 हजार गांव सूखे की गिरफ्त में थे। - लातूर, बीड़ और औरंगाबाद जिले में हालात ज्यादा खराब थे। - केंद्र के कहने पर रेलवे की 50 और 10 वाटर टैंकर वाली कई ट्रेन लातूर भेजी गई थीं। - इसे 40 साल का सबसे भयंकर सूखा करार दिया गया था। आगे की स्लाइड्स में देखिए लातूर और बीड में आई बाढ़ की कुछ और PHOTOS..

  • 15 फोटो में देखें यहां शहर में चल रही नाव, कैसे पूरे शहर में भर गया पानी
    Last Updated: September 08 2016, 13:00 PM

    गया. पिछले तीन दिन से हो रही भारी वर्षा ने बिहार के गया में बाढ़ जैसी स्थिति ला दी है। शहर के जिन सड़कों पर पहले कारें चलती थीं आज वहां NDRF की नाव चल रही हैं। जिले के निचले इलाकों में गंभीर स्थिति है। लगातार हो रही बारिश ने बढ़ाई चिंता... सोमवार की देर शाम से लगातार हो रही भारी वर्षा के कारण बाढ़ की चपेट में आए बाईपास के निकटवर्ती इलाकों अशोक विहार कॉलोनी, मधुसूदन कॉलोनी तथा पंत नगर के नागरिकों के चेहरों पर लौटता सुकून बुधवार की देर शाम से फिर से शुरू हुई लगातार बारिश के बाद एक बार फिर से चिंता की लकीरों में बदल गया है। बारिश के बाद एक बार फिर से इन इलाकों में जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया है। दो मेडिकल टीम तैनात जलजमाव की भयावहता को देखते हुए डीएम के निर्देश पर दो मेडिकल टीम को तैनात किया गया है। प्रत्येक टीम में एक डॉक्टर, पारा मेडिकल स्टाफ एवं चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी शामिल हैं। आपात स्थिति के लिए दो एम्बुलेंस भी तैनात किए गए हैं। डीएम ने सिविल सर्जन को जीवनरक्षक दवाओं के अलावा डायरिया निरोधक, सर्दी-खांसी-बुखार, सांप काटने की दवा सहित हैलोजन टैबलेट की उपलब्धता रखने का निर्देश दिया है। आगे की स्लाइड्स में देखें बारिश ने पानी से कैसे बदतर हो गए हैं गया के हालात...

  • नदी की तेज धार में यूं बह गई महिला, देखिए कैसे चार लोगों ने बचाई जान
    Last Updated: September 05 2016, 12:15 PM

    रामगढ़(झारखंड)। यहां लगातार बारिश से रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर प्रागण में भैरवी नदी उफान पर है। नदी की तेज धार पुल के ऊपर से बह रही है। इसी पुल को कुछ श्रद्धालु पार कर रहे थे कि अचानक उनमें से एक महिला नदी में बह गई। हालांकि महिला के कुछ दूर बहने के बाद चार युवक उसके सामने फरिश्ता बनकर आए और महिला को बचा लिया। रविवार को इस घटना का वीडियो वायरल हो गया। कैसे बही महिला नदी में... -यह घटना शुक्रवार की है पर वीडियो रविवार को विभिन्न सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे एक महिला श्रद्धालु पुल पार करने के दौरान नदी में बह जाती है। -दरअसल, बिहार से आए कुछ श्रद्धालु यहां प्रसिद्ध सिद्धपीठ रजरप्पा में देवी के दर्शन के लिए पहुंचे थे। यहां लगातार बारिश से मंदिर के पास स्थित भैरवी और दामोदर नदी में बाढ़ आई हुई है। -नदी का पानी छिलका पुल के ऊपर से बह रहा है। इसी पुल को श्रद्धालु एक-दूसरे को पकड़कर पार कर रहे थे। इसी दौरान नदी की तेज धार में उनमें से एक महिला बह गई। -कुछ दूरी पर बहने के बाद महिला को चार युवकों ने बचा लिया। बताते चलें कि पिछले एक सप्ताह में ठीक उसी स्थान पर कई लोग बह चुके हैं। इनमें से बिहार की एक महिला श्रद्धालु की मौत भी हो गई थी। आगे की स्लाइड्स में देखिए कैसे महिला को बचाया गया... वीडियो : पवन कुमार।

  • VIDEO: शिवपुरी में 2 घंटे में बारिश ने तोड़ा 15 साल का रिकार्ड, बहने से बचे 2 बाइक सवार
    Last Updated: September 05 2016, 07:35 AM

    ग्वालियर। शिवपुरी में बुधवार शाम तेज बारिश से सारे चौक, चौराहे, नाले, नालियां ओवरफ्लो हो गए। महज 2घंटे में 60 mm बारिश दर्ज की गई, जो बीते 15 साल में सबसे ज्यादा है। अचानक घमासान बारिश होने से निचली बस्तियों में लोग घरों में कैद हो गए। शहर में अब तक 875 mm बारिश हो चुकी है, जबकि बारिश का औसत 820 mm है। बैडरूम किचिन तक में भर गया बारिश का पानी.... इस तरह बिगड़े शहर में हालात - शहर में शाम होते ही अचानक घिर आए काले बादलों से झमाझम बारिश होना शुरु हो गई। जो 2 घंटे लगातार चली। - लगातार मूसलाधार बारिश से शहर में हालात बिगड़ गए, कालोनियां और बस्तियां लबालब हो गईं। - बारिश से शहर का मेन ड्रेनेज नाला भी ओवर फ्लो हो गया, इस पर बने पुल के ऊपर पानी हो जाने से ट्रैफिक रुक गया। - ऐमीनेंट स्कूल के सामने से गुजरे नाले के तेज बहाव में 2 बाइक सवार बह गए, हालांकि उन्हें बचा लिया गया। - इसका पानी ठंडी सड़क बस्ती के घरों में पहुंच गया, जिससे लोग घरों में ही कैद हो गए। - पानी भरने से बिजली चली गई और टेलीफोन व मोबाइल ठप हो गए, शहर रात भर अंधेरे में घिरा रहा। गुरुवार को दोपहर तक बिजली सप्लाई बहाल हो सकी। - शहर के विष्णु मंदिर, राम पौर दरवाजा, पुरानी शिवपुरी, नवाब साहब रोड चंद्रा कॉलोनी, झांसी तिराहे व कृष्ण पुरम में पानी भरने से लोगों को आने जाने में परेशानी हुई। स्लाइड्स में देखें बारिश ने ये किया शहर का हाल....

  • कटाव ने गांव छुड़ाया, बाढ़ ने छीन ली जमीन, अब पेड़ पर टिकी जिंदगी
    Last Updated: September 03 2016, 09:05 AM

    भागलपुर. बाढ़ के दर्द को बताती यह वीडियो आदिम युग की याद दिलाती है। सबौर प्रखंड के रजंदीपुर पंचायत के बगडेर बगीचा में परमानंद मंडल पूरे परिवार के साथ एक पेड़ पर रह रहे हैं। इसी पेड़ पर चारपाई डालकर मचान बनाया है। चूल्हा भी है और पेड़ पर ही शौच की व्यवस्था भी। पूछने पर कहते हैं, जिंदगी भर की कमाई है बाबू, छोड़कर कहां जाएंगे। पूरे साल का अनाज साथ ही है। अंधेरा होने पर सताता है सांप-बिच्छू का डर... पत्नी सुनैना देवी ने बताया कि सरकार का एक आदमी नहीं आया हालचाल लेने। पुरुष टीन की बनी नाव से जाकर आवश्यक चीजें लाते हैं तो खाना बनता है। गुरुवार को बारिश हुई तो खाना बन ही नहीं सका। अंधेरा होने पर सांप-बिच्छू का भी डर सताता है। इससे पूर्व यह परिवार दियारा में रहता था। करीब दस साल पहले कटाव के कारण विस्थापित होकर इस गांव में आया है। यह खबर प्रकाशित होने के बाद शुक्रवार को डीएम ने पेड़ पर रहने वालों को जल्द मुहैया कराने का आदेश दिया। इसके साथ ही SDRF के जवानों ने बाढ़ पीड़ितों को खाने का समान और कपड़ा पहुंचाया है।

  • 12 दिनों से दरवाजे पर बैठती है ये बच्ची, जानिए क्यों नहीं जाती घर के अंदर
    Last Updated: September 03 2016, 05:52 AM

    भागलपुर. बिहार में भागलपुर जिले के सबौर ब्लॉक के एक गांव की ढाई साल की बच्ची को पिछले 12 दिनों से अपने पिता का इंतजार है। वह रोज सुबह उठकर लगातार गंगा के पानी पर नजर टिकाए बैठ जाती है। जब उसकी मां उसे घर के अंदर ले जाने लगती है तो वह कहती है, नहीं जाना... पापा आएंगे और टॉफी भी ले आएंगे। जानिए क्यों है बच्ची को इंतजार और कहां हैं उसके पापा... - भागलपुर के रंजदीपुर गांव के अलावा कई ऐसे गांव हैं जिनमें गंगा के बाढ़ के पानी ने सबकुछ बर्बाद कर दिया। - कई लोगों के घर डूब गए तो कई लोगों की जान चली गई। इनमें से एक हैं ढाई साल की बच्ची शिवानी के पिता दिलीप रजक। - दिलीप की मौत भी गंगा में डूबने से हो गई थी। गांव चारों ओर पानी से घिरा लेकिन घर छोड़ने को तैयार नहीं है शिवानी - शिवानी का गांव पिछले 15 दिनों से चारों तरफ से पानी से घिरा है। - गांव में पानी आया तो बेघर लोगों ने सबौर हाईस्कूल में शऱण ली। - पानी बढ़ता रहा पर ढाई साल की बच्ची शिवानी गांव छोड़ने को तैयार नहीं हुई। - शिवानी को इंतजार था... अपने पापा का। पापा जाते वक्त कह गए थे कि जब वापस आऊंगा तो टॉफी लाऊंगा। - शिवानी मां पिंकी को भी घर के अंदर नहीं जाने देती। जिस रास्ते उसके पापा गए थे, वो उसी रास्ते में पानी में ताकती रहती है। - पिंकी तो सच जान चुकी है पर उसे समझ नहीं आता कि मासूम बच्ची को वो कैसे समझाए कि उसके पापा अब कभी नहीं आएंगे। 20 अगस्त को काम से निकला था दिलीप - पिंकी ने बताया कि 20 अगस्त को जब दिलीप काम के लिए निकल रहा था तो शिवानी रो रही थी। घर के चारों ओर पानी था। - पिंकी ने बताया कि उन दोनों की एक ही बेटी है। दिलीप शिवानी को जान से भी ज्यादा मानता था। शिवानी भी उसके साथ साए की तरह रहती थी। - जब भी दिलीप घर से निकलता शिवानी छोड़ना नहीं चाहती। पापा से लिपटकर खूब रोती। - आखिरी बार जाते हुए दिलीप ने शिवानी को चुप करने के लिए टॉफी लाने का वादा किया था। - लेकिन दिलीप के जाते ही कुछ देर बाद उसकी मौत की खबर आई। पिंकी ने बताया कि प्रशासन की तरफ से बस अंतिम संस्कार के लिए तीन हजार रुपए मिले हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें पिंकी और शिवानी की चुनिंदा फोटोज...

  • श्राद्धकर्म के बाद आधी रात को प्रशासन ने बांटा मुआवजा, उठे ये तीन बड़े सवाल
    Last Updated: September 03 2016, 04:02 AM

    भागलपुर. बाढ़ के पानी में डूबे मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने के प्रति शुक्रवार की शाम तक जिला प्रशासन लापरवाह बना रहा। मृतकों के परिजनों के पास श्राद्धकर्म के लिए भी पैसे नहीं थे। दैनिक भास्कर ने इस संबंध में 30 अगस्त को खबर प्रकाशित भी की थी। बावजूद इसके जिला प्रशासन ने पीड़ितों की परेशानी का संज्ञान नहीं लिया। प्रशासन की नींद शुक्रवार आधी रात तब टूटी, जब खबर का संज्ञान लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय से इस संबंध में जवाब-तलब किया गया। इसके बाद डीएम ने आनन-फानन में रात 12 बजे प्रेस कांफ्रेंस बुलाई और मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा की। डीएम आदेश तितरमारे ने आधी रात को मुआवजा देने के सवाल पर कहा कि सबौर के अंचलाधिकारी अवकाश पर थे। इस वजह से उन्हें यह सूचना नहीं मिल पायी थी कि वहां दो लोगों को बाढ़ के पानी में डूबने से मौत हुई है। शुक्रवार की शाम सूचना मिली तो एक-एक लाख रुपए का भुगतान कर दिया गया था, बाकी तीन-तीन लाख रुपए का चेक देर रात जारी कर दिया गया। डीएम ने कहा कि संवेदनशील मामला है, इसलिए आधी रात को दफ्तर खोलकर आप लोगों को सूचना दी गयी, जिससे सुबह तक लोगों को मालूम हो जाए कि प्रशासन ने गंभीरता दिखायी है। डीएम ने कहा कि दोनों युवकों का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया था, इस वजह से भी यह समस्या आयी। जब बाद में पता चला तो हमलोगों ने इस पर एक्शन लिया। उन्होंने बताया कि अभी तक बाढ़ में मरे दस लोगों के परिजनों को चार-चार लाख रुपए का मुआवजा दिया जा चुका है। राहत कैंपों में जन्म लेने वाले बच्चों की मां को भी अस्पताल से दस और पंद्रह हजार रुपए दिए जा रहे हैं। सदर अस्पताल में मरीज का आॅपरेशन नहीं होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि प्राइवेट में भी सर्जरी से बच्चे ने जन्म लिया है, तब भी महिला को धन दिया जाएगा। जिनका घर बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुआ है, उनका सर्वे शुरू कर दिया गया है। उन्हें भी मुआवजा दिया जाएगा। देर रात प्रशासन की इस कवायद से उठे तीन बड़े सवाल - जब बाढ़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी अधिकारियों-कर्मचारियों का अवकाश रद्द किया था फिर अंचलाधिकारी अवकाश पर कैसे थे ? - यदि अंचलाधिकारी अवकाश पर थे तो क्या सर्किल इंस्पेक्टर की जिम्मेदारी नहीं थी कि वह बाढ़ से मौत की सूचना डीएम को दें ? - सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रशासन को बाढ़ से मौत की सूचना नहीं थी फिर कबीर अंत्येष्टि योजना से परिजनों को कैसे दे दिया दो-दो हजार ?

  • पटना में सीढ़ियों से उतरी गंगा : जलस्तर खतरे के निशान से नीचे, दियारा में कम
    Last Updated: September 02 2016, 04:07 AM

    पटना. गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से काफी नीचे आ गया है। घाटों से गंगा उतर गई हैं। हालांकि पानी निकलने के बाद घाटों के किनारे बलुआही मिट्टी, कीचड़ और खरपतवार जमा हो गया है। दियारा के घरों से भी बहुत हद तक पानी निकल चुका है। लेकिन बाहर कीचड़ और बदबू से लोग परेशान हैं। गंगा के इस पार से दियारा जाने के लिए करीब एक-दो किलोमीटर पहले ही नाव से उतर कर पानी और कीचड़ से होते हुए घर जाना पड़ रहा है। गांधी घाट... तेजी से घट रहा गंगा का जल स्तर - 31 अगस्त को शाम चार बजे 90 के पास था गंगा का जलस्तर। - 01 सितंबर को दोपहर एक बजे 40 के पास था गंगा का जलस्तर।

  • नीतीश के इस मंत्री ने लड़कियों के बीच ऐसे बांटे सेनेटरी नैपकिन, खिंचवाई फोटो
    Last Updated: September 02 2016, 01:57 AM

    पटना/वैशाली. बिहार सरकार के कला एंव संस्कृति मंत्री ने बाढ़ पीड़ितों के बीच लड़कियों के बीच कुछ ऐसा बांटा जिसे लेते हुए भी लड़कियां खुद को असहज महसूस कर रही थी। इस दौरान मंत्री ने फोटोज भी क्लिक करवाए। इसके लिए पहले लड़कियों को लाइन में खड़ा किया गया। इसके बाद उन्हें मंत्री के हाथों वो मिला जिसका जिक्र वो अपने घर में पिता और भाई से भी करने में हिचकिचाती हैं। सोचा था कपड़ा या खाने को कुछ मिलेगा... - गुरुवार को मंत्री शिवचंद्र राम अपने विधानसभा क्षेत्र राजापाकड़ पहुंचे थे। - यहां मंत्री के पहुंचने के बाद लोगों में आस जगी कि उन्हें पहनने और खाने को कुछ न कुछ जरुर मिलेगा। - सबसे पहले मंत्री ने अपने कार्यकर्ताओं से क्षेत्र की लड़कियों को इकट्ठा करने को कहा। - इसके बाद सभी को एक लाइन में खड़ा किया गया और फिर मंत्री ने भीड़ के सामने लड़कियों को वो देना शुरू किया जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की होगी। - मंत्री ने सभी लड़कियों को एक-एक करके सेनेटरी नैपकिन हाथ में पकड़ाना शुरू किया। - इस दौरान लड़कियों के चेहरे से साफ पता चल रहा था कि वो असहज महसूस कर रही हैं। - उधर, इसके विपरीत मंत्री फोटोग्राफरों से बोलकर क्लिक कराने में बिजी रहे। बाद में बाढ़ पीड़ितों को खिलाया खाना - हालांकि इसकी बाद मंत्री ने विधानसभा क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों को खाना भी खिलवाया। - उन्होंने सभी के लिए बाढ़ राहित शिविर में खाना बनवाया था। खाना बनने के बाद खुद उन्होंने बाढ़ पीड़ितों को खाना परोसा। - इस दौरान उन्हें बाढ़ राहत शिविर में कुछ अव्यवस्था भी दिखी जिसके बाद उन्होंने संबंधित अधिकारी को फोन कर फटकार लगाई। आगे की स्लाइड्स में देखें बाढ़ पीड़ितों के बीच मंत्री शिवचंद्र राम की चुनिंदा फोटोज...

  • देखिए शहर में ऐसे झूमकर बरसे बदरा
    Last Updated: September 01 2016, 15:58 PM

    जोधपुर। शहर में मंगलवार दोपहर मौसम के अलग ही नजारे देखने को मिले। आधे शहर में बादल झूमकर बरसे वहीं आधे हिस्से में धूप निकली हुई रही। शहर में कलेक्ट्रेट से लेकर मंडोर तक के क्षेत्र में जोरदार बारिश से सड़कों पर पानी बहने लग गया। बहने लग गया पानी... - शहर में मंगलवार सुबह छाए घने बादलों के बरसे बगैर बिखर जाने से लोगों को निराशा हुई। दिन चढ़ने के साथ एक बार धूप निकल आई। - दोपहर को मंडोर क्षेत्र में काली घटाएं आसमान में छा गई। थोड़ी देर में जोरदार बारिश का दौर शुरू हो गया। - पावटा से लेकर मंडोर क्षेत्र में जोरदार बारिश से सड़कों पर पानी बहने लग गया। - एक तरफ आधे शहर में जोरदार बारिश हो रही थी वहीं शेष में बारिश तो दूर बादल तक नहीं छाए। - इस हिस्से में धूप निकली हुई थी और यहां के लोगों को अहसास ही नहीं हुआ कि शहर के कुछ हिस्से में जोरदार बारिश हो रही है। - बाद में बारिश पूरे शहर में फेल गई। पूर्व में वंचित रहे क्षेत्रों में भी बारिश का दौर शुरू हो गया। सभी फोटो एल देव जांगिड़ अगली स्लाइड्स में देखें बारिश के नजारे  

  • लौटते मॉनसून से दिल्ली NCR में बाढ़ जैसे हालात, पुलिस ने सलाह दी-सावधानी से करें ड्राइव
    Last Updated: September 01 2016, 14:22 PM

    फरीदाबाद। लौटता मॉनसून हरियाणा के कई जिलों में बेहद खतरनाक साबित होने लगा है। जलभराव की वजह से गुड़गांव और फरीदाबाद में तो हालात और भी बदतर हो चले हैं। यहां तक कि गुड़गांव पुलिस ने अपने ट्विटर हैंडलर पर लोगों को सावधानीपूर्वक ड्राइव करने की सलाह दी है। दिल्ली-NCR में तीसरी बार बिगड़े हालात, Ex MP के गांव में लोग पलायन को मजबूर... - बता दें दिल्ली-एनसीआर में बुधवार को भी भारी बारिश हुई थी। बारिश के चलते पूरे एनसीआर में ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई। इसी बीच गुरुवार को फिर से तेज बारिश शुरू हो गई। -तेज बारिश की वजह से गुड़गांव में बुधवार को गोल्फ कोर्स रोड, हीरो होंडा चौक, ओल्ड दिल्ली-गुड़गांव रोड, हुडा सिटी सेंटर और दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेस वे पर जाम लग गया। - एमजी रोड, सिकंदरपुर और डीएलएफ फेज 2 में भी हालात बदतर हो गए। - गुड़गांव पुलिस ने बुधवार को भी ट्वीट कर लोगों को डिसिप्लिन में रहने की सलाह दी थी। लिखा- गुड़गांव में भारी बारिश, कृपया सलाह मानें, सब्र रखें, और लेन में डिसिप्लिन बनाए रखें। हम ट्रैफिक को नॉर्मल करने में जुटे हैं। - दिल्ली-एनसीआर में बुधवार को तेज बारिश के बाद तीसरी बार हालात खराब हुए हैं। इससे पहले हरियाणा के गुरुग्राम (गुड़गांव) में 28 जुलाई की शाम करीब तीन घंटे बारिश हुई थी। 20.1 मिमी बारिश के कारण सड़कों पर 4 फीट तक पानी जमा हो गया था। NH-8 और सोहना रोड का हाल सबसे बुरा था। 23 घंटे तक दिल्ली-जयपुर रोड पर 20 किमी हिस्से में भारी जाम था। ऑफिस के बाद काफी लोग घर नहीं लौट पाए थे। उन्हें सड़क पर रात गुजारनी पड़ी थी। - ऐसे ही हालात 29 अगस्त को बने। शाम को एनसीआर में हुई एक घंटे की तेज बारिश के बाद दिल्ली-गुड़गांव में फिर ट्रैफिक थम गया। उन्हीं जगहों पर दोबारा ट्रैफिक जाम लगा, जहां 28 जुलाई को लोगों को परेशान होना पड़ा था। - वहीं फरीदाबाद में भी पिछले दो दिन बारिश कहर बनकर बरसी है। शहरी इलाके में विभिन्न सड़कों पर भारी जाम लगा हुआ है। एक आंकड़े के मुताबिक बुधवार को करीब 2 लाख वाहन घंटों तक जाम में फंसे रहे, मगर परेशानी का सिलसिला यहीं रुकने की बजाय जारी है। - गुरुवार सुबह करीब 8 बजे से हो रही भारी बारिश के चलते फरीदाबाद, बल्लभगढ़ व आसपास के इलाके जलमग्न हो गए हैं। नेशनल हाईवे, बदरपुर-फरीदाबाद सिक्सलेन हाईवे व तमाम रिहायशी इलाकों में हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। - सबसे बुरी हालत यहां से 4 बार सांसद रह चुके अवतार सिंह भड़ाना के गांव अनंगपुर की है, यहां लोग गांव छोड़ने के लिए मजबूर हो चुके हैं। फोटोज: राजेश पुंजानी आगे की स्लाइड्स में देखें और फोटोज............

  • यूं जान हथेली पर लेकर गांव से निकल रहे लोग, कहते हैं मजबूरी है साब
    Last Updated: August 31 2016, 09:47 AM

    बाली (पाली)। पाली के बाली में उफान पर आई बाली सुकड़ी नदी पार करते समय एक बीमार व्यक्ति की सोमवार को मौत हो गई। इस बार यहां बारिश का कहर बरपा है। पिछले 10 साल का रिकॉर्ड टूटा है। मुश्किल में भी लोग गांवों से बाहर नहीं जा पा रहे। जानिए क्या हैं हालात ... - जिले में हुई अच्छी बरसात से नदी-नाले उफान पर हैं। - बाली में 15 जून तक अभी तक 1075 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है। - जोरदार बरसात से यहां पिछले 10 दिन से चादर चल रही है। - चामंडेरी, कांगड़ी, धणी सहित चार गांव के लोगों को इस नदी को पार कर बाली आना पड़ता है। - इन गांवों के लोगों को नदी की चादर चलने के कारण बाहर अन्य गांवों में जाना मुश्किल हो गया है। इससे वे जान हथेली पर रखकर पुलिया पार करते हैं। - इस नदी पर 27 पुलिया हैं जो इन गांवाें को बाली कस्बे से जोड़ती हैं। - कांगड़ी, चामुंडेरी से करीब 200 स्टूडेंट्स बाली सुकड़ी नदी के तेज बहाव को पार कर रोज स्कूल आते हैं। - यहां हुई अच्छी बरसात से 10 दिन से ऐसे ही हालत बने हुए हैं। - रोज करीब 200 बच्चे स्कूल जाते हैं। यहां 10 साल बाद हुई इतनी बरसात - यहां बरसात ने पिछले 10 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है। - यहां 2006 में 1110 मिमी वर्षा हुई थी। - 2015 में 626 मिमी वर्षा रिकॉर्ड हुई थी। - और 2016 से अभी तक 1077 मिमी वर्षा हुई है। बाली से निकलकर जालौर जाती है यह नदी - बाली सुकड़ी नदी सेवाड़ी से बाली होकर 140 गांव पार करते हुए जालौर के गोरमा घाट जाती है। - यह नदी करीब 90 किमी का रास्ता तय करती है। कई लोग बाली में किराए पर रह रहे - जिन महिलाओं को डिलीवरी होनी है या जिनका ऑपरेशन होना है वे बाली में किराए पर कमरा लेकर रह रहे हैं। - ग्रामीणों ने बताया कि घुटनों तक चल रहा पानी कभी भी बढ़कर कमर तक आ जाता है। - बच्चों के लिए तो यह बेहद खतरनाक है। - ग्रामीणों का कहना है कि कोई एक-दो दिन की बात हो तो कोई बात नहीं यहां तो कई दिनों से यह हालत है। - ग्रामीणों का कहना है कि अगर बाहर नहीं जाएंगे तो घर में चूल्हा कैसे जलेगा। आगे की स्लाइड्स में देखिए और फोटोज फोटो व वीडियो प्रकाश पालीवाल

  • बिहार : बाढ़ वाले इलाकों में घट रहा पानी, नाव की आवाज पर दौड़ पड़ते हैं बच्चे
    Last Updated: August 31 2016, 07:04 AM

    आरा/पटना. सूबे की सभी नदियों के जलस्तर में तेजी से गिरावट हो रही है। इससे बाढ़ से राहत मिली है। हालांकि वाणसागर से पानी आने के बाद मंगलवार को सोन में अचानक उफान आ गया। हालांकि देर रात जलस्तर में फिर से कमी होने लगी थी। गंगा पटना समेत तमाम जगहों पर तेजी से नीचे आ रही है। बूढ़ी गंडक खगड़िया व कोसी कटिहार में लाल निशान से ऊपर है। पर इसके जलस्तर में कमी की संभावना है। उधर, प्रभावितों तक राहत सामग्री पहुंच रही है। हालांकि कहीं-कहीं से इसे समय से नहीं पहुंचने की भी खबर है। नाव की आवाज सुन दौड़ पड़ते हैं बच्चे... - भोजपुर जिला बाढ़ की त्रासदी से तेजी से उबरने का प्रयास कर रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पानी तेजी से घट रहा है। लोग रोजमर्रा के काम में लगने लगे हैं। - पानी घटने के कारण लोग अब अपने घरों में लौटने लगे हैं। जिला प्रशासन द्वारा आवागमन की सुविधा, प्रभावित क्षेत्रों की सफाई व्यवस्था, सड़कों की मरम्मति, बीमारी फैलने से रोकने के उपाय, फसल क्षति का सर्वेक्षण, पशुओं के चारा की व्यवस्था सहित अन्य कार्यो को तेजी से करने के प्रयास किये जा रहे हैं। - बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव, सड़कों की मरम्मति व बीमारियों के रोकथाम के लिए कार्रवाई शुरू हो गई है। - डीएम ने जिला कृषि पदाधिकारी को फसल क्षति का आंकलन कर 15 दिनों के अंदर भुगतान की कार्रवाई सुनिश्चित करें। फसल क्षति का सर्वेक्षण पारदर्शी व सही तरीके से करने की चेतावनी दी है। अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा - भोजपुर जिले में बाढ़ का पानी लगातार कम हो रहा है। गंगा मंगलवार को भी खतरे के निशान से 62 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है जबकि सोन का जलस्तर खतरे के निशान से 1.66 मीटर नीचे बह रहा है। - आरा-सिन्हा मुख्य पथ पर से पानी कम हो गया है। जगवलिया पुल के ऊपर दो फीट पानी बह रहा है। लोग पैदल व साइकिल से आजा रहे हैं। - फिर भी बड़हरा प्रखंड के करीब 100 गांव के लोगों के लिए आवागमन का एकमात्र साधन नाव है। बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार गंगा का जलस्तर बड़हरा में 53.70 मीटर व सोन कोइलवर में 53.35 मीटर दर्ज किया गया। नाव की अावाज पर दौड़ पड़ते हैं बच्चे - हाजीपुर में लगातार प्रशासन और सरकार बाढ़ राहत और नाव की व्यवस्था पुख्ता होने का दावा ठोक रही थी। - उनके दावों पर जब राघोपुर के लोगों से बात की गई तो उनका कहना था कि वे जब अखबारों और टीवी चैनलों पर राघोपुर में राहत के प्रशासनिक दावों की खबर देखते हैं तो गुस्सा आता था। - प्रशासन ने कई ऐसे दावे किए हैं, जिनकी हकीकत तलाशने दैनिक भास्कर टीम राघोपुर के कई पंचायतों में गई। जो हकीकत लोगों ने बताई उससे प्रशासनिक दावों की धज्जियां उड़ गईं। 29 साल बाद नवगछिया ने देखी ऐसी बाढ़ - भागलपुर के नवगछिया में एनएच-31 स्थित धर्मकांटा के पास बनाया गया भवरा नवगछिया के लोगों को भंवर में डाल दिया है। आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। - स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि नगर पंचायत की करीब 10 हजार की आबादी बाढ़ के पानी में हर पल जीवन और मौत से जूझ रही है। - 29 साल के बाद नवगछिया के लोगों ने एक बार फिर तबाही का ऐसा मंजर देखा है। इससे पहले 1987 में ऐसी बाढ़ देखी थी, लेकिन तबाही ऐसी नहीं थी। उस समय एनएच-31 के ऊपर से बाढ़ का पानी चल रहा था। - पर इस बार अनुमंडल में आई गंगा के बाढ़ ने नगर के कई मोहल्लों सहित अनुमंडल परिसर स्थित अनुमंडल मुख्यालय के सभी कार्यालय के साथ-साथ न्यायलय परिसर, जेल के अलावा प्रखंड, अंचल और बिजली कार्यालय परिसर सहित एसपी कार्यालय और आवास के साथ-साथ बिजली सबग्रिड सभी को डुबो दिया। स्थिति यह है कि दुकानें तो खुलती हैं लेकिन बोहनी पर भी आफत होती है। - चारों तरफ केवल पानी ही पानी नजर आता है। इसकी वजह से सभी दफ्तर विस्थापित हो चुके हैं। अत्यधिक बाढ़ का पानी भर जाने के कारण सभी अधिकारियों को अपना-अपना आवास खाली कर दिया है। - वहीं एसपी कार्यालय मुख्य बाजार में स्थापित मारवाड़ी धर्मशाला में ट्रांसफर कर दिया गया है और न्यायालय के कार्य के लिए एनएच स्थित मकंदपुर चौक के समीप राज पैलेस का चयन किया गया है। आगे की स्लाइड्स में देखें बाढ़ पीड़ितों को हेल्प की चुनिंदा फोटोज...

  • बाढ़ पीड़ितों से बिना मिले लौटे पासवान, लोगों ने स्कॉट पार्टी को बनाया बंधक
    Last Updated: August 30 2016, 04:49 AM

    हाजीपुर/महनार. महनार के हसनपुर में बाढ़ पीड़ितों का सोमवार को दर्द जानने पहुंचे केंद्रीय खाद्य उपभोक्ता मंत्री रामविलास पासवान को बाढ़ पीड़ितों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। बाढ़ पीड़ितों के आक्रोश को देखते हुए रास्ते से ही पासवान बैरंग लौट गए। मंत्री के हसनपुर से पहले बाढ़ पीड़ितों से बिना मुलाकात का लौट जाने के बाद सैकड़ों बाढ़ पीड़ितों ने पासवान की गाड़ी को खदेड़ दिया। नेताओं के खिलाफ किया गंदे शब्दों का यूज... - इस दौरान बाढ़ पीड़ितों ने पासवान व उनके साथ चल रहे नेताओं के विरुद्ध आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते किया। - पुलिस स्कॉट की गाड़ी सहित काफिले में शामिल पूर्व विधायक डॉ. अच्युतानंद सिंह सहित एनडीए गठबंधन के नेताओं की भी गाड़ी रोक महनार-मोहिउद्दीननगर पथ को हसनपुर तीन मुहानी के निकट जामकर दिया। - बाढ़ पीड़ितों का कहना था कि बाढ़ राजनेताओं के लिए मजाक बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप था कि अब तक कोई भी स्थानीय वरीय पदाधिकारी बाढ़ पीड़ितों का दर्द जानने नहीं आए हैं, साथ ही बाढ़ पीड़ितों को राहत के नाम पर ठगा जा रहा है। - मंत्री पासवान सोमवार को बाढ़ पीड़ितो का हाल जानने और सरकारी राहत शिविर में बाढ़ पीड़ितो को दी जा रही भोजन आदि का निरीक्षण करने महनार पहुंचे थे। गाड़ी के पीछे दौड़ पड़े ग्रामीण - मंत्री पासवान सहदेई बुजुर्ग के नयागांव पंचायत के गनियारी में चल रहे सरकारी राहत शिविर का जायज लेने पहुंचे, उसके बाद वे महनार के बालक उच्च विद्यालय में चल रहे सरकारी राहत शिविर का जायज लिया। - वहां के बाद पासवान महनार के अल्लिपुरहट्टा पंचायत के बाढ़ पीड़ितों का हाल जाना और वे हसनपुर की ओर आगे बढ़े, लेकिन हसनपुर के पांजा चौक पर ही उन्हें उनकी पार्टी के लोगों ने रोक लिया। - यहां से पासवान वापस लौटे। जैसे ही उनकी गाड़ी पंजा चौक से लौट रही थी उनके इंतजार में सड़क किनारे खड़े बाढ़ पीड़ित आक्रोशित हो उठे और उनकी गाड़ी के पीछे-पीछे दौर पड़े, लेकिन पासवान की गाड़ी नहीं रुकी। - इसके बाद बाढ़ पीड़ितों का गुस्सा फूट पड़ा और लोगों ने महनार -मोहिउद्दीन पथ को जाम कर पासवान के काफिले की अन्य गाड़ियों को रोक उग्र प्रदर्शन किया। वहीं हसनपुर से लौटने के बाद पासवान लोजपा नेता अल्लिपुरहट्टा निवासी नवल सिंह के यहां पहुंचे। मवेशी के लिए चारा लाने जा रहे दो सगे भाइयों की डूबने से मौत - सहदेई बुजुर्ग प्रखंड के नयागांव पश्चिमी पंचायत स्थित गनियारी गांव में आए बाढ़ के पानी को पार कर मवेशी के लिए चारा लाने जा रहे दो सगे भाईयों की डूबने से मौत हो गई। घटना सोमवार 11 बजे की है। - इस घटना के बाद से पूरे गांव में कोहराम मच गया। देखते ही देखते घटनास्थल पर हजारों ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठा हो गई। काफी मशक्कत के बाद दोनों भाईयों के शव को नदी से बरामद किया गया। - सहदेई बुजुर्ग प्रखंड के नयागांव पश्चिमी पंचायत स्थित बरियारपुर ब्रह्मस्थान निवासी छट्टू साह का पुत्र 19 वर्षीय रौशन कुमार व 15 वर्षीय दशरथ कुमार और टुनटुन कुमार गांव के ही एक दोस्त राजा कुमार के साथ गनियारी पुल के निकट बाढ़ के पानी को पार कर मवेशी के लिए चारा लाने जा रहा था तभी चारों अचानक गहरे पानी में चले गए। - बच्चे को डूबते देख स्थानीय लोगों ने नाव के सहारे पानी में डूब रहे टुनटुन कुमार व राजा कुमार को बचा लिया गया, लेकिन काफी कोशिश के बाद भी रौशन और दशरथ को बचाने में ग्रामीण नाकामयाब रहे। - इस घटना की सूचना स्थानीय लोगों ने डीएम को दी। डीएम ने एनडीआरएफ की टीम को घटना की जानकारी दी। इसके बाद एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंचकर काफी मशक्कत के बाद दोनों भाईयों के शव को बरामद किया। घटना के बाद से पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। वहीं, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बाढ़ में अबतक 7 लोगों की हुई मौत, 22 पशुओं की भी गई जान, 106 गांव बाढ़ प्रभावित - जिले के राघोपुर सहित पांच प्रखंडों में बाढ़ का कहर जारी है। पानी कमने के बाद भी लोगों की मुश्किलें कम नहीं हो रही है। बाढ़ के पानी से घिरे लोग तबाही का सामना कर रहे है। - इस उफनती बाढ़ में सात लोगों की मौत हो गई। वहीं 22 पशुओं की भी मौत गई। यह जानकारी सोमवार को अपर समाहर्ता ने दी है। - राघोपुर प्रखंड में बाढ़ का कहर सबसे ज्यादा है। इस प्रखंड का अधिकांश भाग पानी में डूबा है। इसके अलावा हाजीपुर, बिदुपुर, देसरी, सहदेई बुजुर्ग और महनार के गांव में बाढ़ का पानी जमा है। - सरकारी आकड़ों के अनुसार जिले के इन पांचों प्रखंडों के 37 पंचायतों के कुल 106 गांव बाढ़ प्रभावित है। बाढ़ के पानी से ये सभी गांव पूरी तरह घिरा हुआ है। - महनार और हाजीपुर के शहरी क्षेत्र के सात वार्ड भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित है। 3.29 लाख लोग बाढ़ के चपेट में बाढ़ के पानी के चपेट में 37 पंचायतों व 7 वार्डों के लगभग 3.29 लाख लोग आ गए है। ये सब लोग गांव में घिरे हुए हैं। ये सभी अपने घरों व प्रशासनिक कैम्प में शरण लिए हुए हैं। पिछले कई दिनों से बाढ़ के पानी में घिरे रहने के कारण लोग मुश्किल में हैं। किसानों की 15308.26 हेक्टयेर में लगी फसल नष्ट बाढ़ का पानी किसानों के लहलहाती फसल को बहा ले गई। बाढ़ के पानी में राघोपुर, हाजीपुर, महनार,सहदेई और देसरी के खेतों में लगे 15308.26 हेक्टयेर भूमि फसल बह गया। 13 सहायता कैंप खोले गए जिला प्रशासन का दावा है कि बाढ़ पीड़ितों के सहायतार्थ 13 सहायता कैम्प खोला गया। इस कैम्प में 12196 विस्थापितों को शरण दिया गया। इसी तरह हेल्थ कैम्प में 12196 लोगों का इलाज किया गया। खाद्य सामग्रियों और राहत सामग्रियों का वितरण किया गया। आगे की स्लाइड्स में देखें स्कॉट को बंधक बनाए ग्रामीण और बिहार में बाढ़ की चुनिंदा फोटोज...

  • बाढ़ का दर्द : किसी के पिता तो किसी के पति की मौत, अब श्राद्ध को भी नहीं हैं पैसे
    Last Updated: August 30 2016, 04:06 AM

    सबौर/ सुल्तानगंज/ नाथनगर​. बिहार में आई बाढ़ के बाद लाखों लोगों का सबकुछ बर्बाद हो चुका है। किसी का घर तो किसी की खेती सबकुछ बाढ़ ने छीन लिया। इसके अलावा कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके सिर से पिता, पति भाई का साया उठ गया। पीड़ितों ने कमरतोड़ मेहनत से एक-एक सामान जुटाया था, बाढ़ ने सब कुछ छीन लिया। शिविर में रह रहे बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि अब भगवान भरोसे उनकी लाइफ कट रही है। बाढ़ सब कुछ बहा ले गई... - भागलपुर के सबौर में बाढ़ प्रलय बनकर आई। किसी ने अपना बेटा खोया तो किसी ने पति। कई बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। - सबौर के रजंदीपुर की पिंकी की जिंदगी तबाह हो गई। तिनका-तिनका जोड़कर पिंकी के पति दिलीप रजक ने घर बनाया था... कमरतोड़ मेहनत से जरूरत के सामान जुटाए थे। - पिंकी ने बताया कि बाढ़ अपने साथ सब कुछ बहा ले गई... उसे भी। 20 अगस्त को भागलपुर जाने के दौरान बाढ़ के पानी में पिंकी के पति दिलीप रजक की डूबकर मौत हो गई। - अगले दिन दिलीप रजक की लाश मिली। दिलीप परिवार का इकलौता सहारा था। कोई कमानेवाला नहीं बचा। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें फुलन देवी की कहानी...

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