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नारायण

  • नेहरू के खास थे ये MP, कहा-राहुल से तेज प्रियंका, इंदिरा के बारे में बताई ये बातें
    Last Updated: January 23 2017, 19:56 PM

    गोरखपुर. सांसद योगी आदित्यनाथ के गुरु और गोरक्षपीठाधीश्वर रहे ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ को करारी शिकस्त देकर 1971 में पार्लियामेंट पहुंचे नरसिंह नारायण पांडेय पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी इंदु के खास रहे हैं। उन्होंने इंदिरा गांधी को उनकी मौत के 2 दिन पहले अहम सलाह दी थी। यदि इनकी सलाह को उस समय इंदिरा गांधी मान ली होती तो शायद जिंदा होतीं। वहीं, प्रियंका गांधी को राहुल गांधी से इंटेलिजेंट बताया। आगे पढ़िए इंदिरा गांधी को नरसिंह नारायण पांडेय ने क्या दी थी सलाह... - नरसिंह नारायण पांडेय (88) ने dainikbhaskar.com से अपनी पुरानी स्मृतियों को ताजा करते हुए कुछ बातें शेयर की। -उन्होंने कहा कि स्वर्ण मंदिर ऑपरेशन के बाद कट्टरपंथी इंदिरा गांधी के पीछे हाथ धोकर पड़ गए थे। -इंदिरा गांधी भी इस बात को जानती थीं कि उनकी हत्या की साजिश रची जा रही है, लेकिन ये नहीं जानती थीं कि उनकी हत्या कौन कर सकता है। -नरसिंह के अनुसार, उन्हें केंद्र सरकार के एक उच्च अधिकारी ने बताया था कि इंदिरा गांधी को उनकी इंटरनल सिक्युरिटी से ख़तरा हो सकता है। -ऐसे में वे सीधे इंदु के सेंट्रल हॉल में पहुंचे, उस वक्त वो भुवनेश्वर जाने की तैयारी कर रही थीं। -उन्होंने कहा, मैंने इंदु बहन से कहा कि आपकी जान को सिख उग्रवादियों से ख़तरा है। अपने इंटरनल सिक्युरिटी से उन्हें अविलम्ब हटा दें। -इस पर इंदु ने कहा कि वो भुवनेश्वर से लौट कर आने के बाद इस बारे में सोचेंगी। -2 दिन बाद भुवनेश्वर से लौटते ही उन्हें उनके इन्टरनल 2 सिख सुरक्षा गार्डों ने गोली मारकर हत्या कर दी। -उस समय वे इंदु के निर्देश पर ही गोरखपुर एमपी सीट पर विचार करने के लिए गोरखपुर आए थे। -इतना ही कहते हुए नरसिंह नारायण पांडेय ने इंदु के पर्सनल पीएसओ को अपशब्द कहा। उनका गला रुंध गया और आंखें डबडबा गईं। नेहरु के बुलावे पर गए थे इलाहाबाद -नरसिंह नारायण पांडेय ने बताया कि वे एक बार पंडित जवाहरलाल नेहरू के बुलावे पर इलाहाबाद गए। -घर में पंडित जी और उनकी बेटी इंदु ही थीं। उन्होंने इंदु से कहा देखती हो इस गोरे-चिट्टे यंग लड़के को, जैसे लगता है कि कोई हमारा लड़का हो। -फिर दोनों हंसने लगे। तभी से इंदिरा गांधी उन्हें भाई मानती थीं। कांग्रेस के टिकट पर पोता कर रहा सहजनवां से चुनाव की तैयारी -सहजनवां क्षेत्र में आज भी नरसिंह नारायण पांडेयकी गहरी पैठ है। -इस विधानसभा क्षेत्र से इनका पोता एवं सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट विशाल पांडेय कांग्रेस के टिकट पर 2017 चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हैं। -हालांकि, कांग्रेस ने अभी विशाल का टिकट फाइनल नहीं किया है। -जिला कांग्रेस कमिटी ने अधिवक्ता विशाल पांडेय का नाम पीसीसी को भेजा है, जो वहां से एआईसीसी को भी भेज दी गई है। आगे की स्लाइड्स में पढ़िए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के बारे में क्या कहा...

  • कभी समय पर दफ्तर नहीं आते यह रजिस्ट्रार, 60 दिनों में से 47 दिन किया काम
    Last Updated: January 04 2017, 04:59 AM

    जोधपुर। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार भंवरसिंह सांदू कभी समय पर दफ्तर आते ही नहीं। दो महीने पहले 2 नवंबर को उन्हें रजिस्ट्रार बनाया गया था लेकिन 60 दिन की इस अवधि में वे ज्यादातर सुबह 11 बजे की जगह 1:30 बजे बाद ही दफ्तर पहुंचे। शुरू-शुरू में उनके देरी से आने की शिकायतें होने लगी तो भास्कर ने पूरे दिसंबर माह में उनके दफ्तर पहुंचने के समय की निगरानी रखी। दिसंबर में छह दिन सरकारी अवकाश था, 2 दिन वे ड्यूटी पर बाहर थे तथा एक दिन आकस्मिक अवकाश लिया। शेष बचे 22 दिनों में वे केवल एक दिन समय पर दफ्तर पहुंचे। ज्यादातर बार वे एक बजे के बाद ही आए जबकि कभी-कभार इससे कुछ पहले पहुंचे। खास बात यह है कि कुलपति प्रो. आरपी सिंह भी मानते हैं कि रजिस्ट्रार कभी समय पर दफ्तर नहीं पहुंचते, इस संबंध में छात्र नेताओं ने शिकायतें भी की है पर अभी तक वे इस संबंध में न तो रजिस्ट्रार पर कार्रवाई कर पाए और न ही कोई दिशा-निर्देश दिए। जब भास्कर ने सीधे रजिस्ट्रार भंवरसिंह सांदू से बात की तो वे बोले कि उनका फील्ड का काम भी रहता है जिससे वे देरी से आ रहे हैं। हालांकि वे ऑफिस समय के बाद रुकते हैं ताकि काम प्रभावित न हो। इधर, छात्रनेताओं का कहना है कि दो बजे के बाद रजिस्ट्रार के ऑफिस आने से स्टूडेंट्स के काम प्रभावित हो रहे हैं। एनएसयूआई के पारस गुर्जर का कहना है कि स्टूडेंट सुबह 11 बजे उनसे मिलने कोई काम लेकर आते हैं तो उन्हें दो-तीन घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। अफसरों की कोई मॉनिटरिंग ही नहीं हो रही जेएनवीयू ने राज्यपाल के दिशा-निर्देश पर सभी संकायों में बायोमैट्रिक्स सिस्टम से उपस्थिति लेना शुरू कर दिया है लेकिन यह सिस्टम केवल कर्मचारियों पर ही लागू है। इससे कुलसचिव व वित्तीय सलाहकार को नहीं जोड़ा गया है। इसलिए इनके देरी से आने पर कोई मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है। रजिस्ट्रार के कार्य - कुलपति द्वारा जारी निर्देशों की पालना के लिए आदेश जारी करना। - वीसी के विशेषाधिकार के तहत जारी डिग्री का पहले अनुमोदन। - वैधानिक समितियों के कुलपति नामित सदस्यों की नियुक्ति। - कॉलेजाें की मान्यता के आदेश जारी करना। - कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई अथवा स्थानांतरण। - रखरखाव के कार्य का संपादन व टेंडर्स के बाद उनके कार्य आदेश। - छात्रों की समस्याओं का समाधान। अक्टूबर की बजाय नवंबर में आए सांदू को रजिस्ट्रार के पद पर अक्टूबर के पहले सप्ताह में ही स्थानांतरित कर दिया था, लेकिन उन्होंने करीब एक माह देरी से 2 नवंबर को जॉइन किया। नवंबर-दिसंबर में उनका कार्यकाल कुल 60 दिवस रहा नवंबर में 5 दिन व दिसंबर में 6 दिन सरकारी अवकाश थे। दो दिन वे छुट्टी पर रहे,जबकि दो दिन ड्यूटी पर बाहर थे। सीधी बात कुलसचिव जेएनवीयू कारण पूछा तो बोले- कोर्ट और कानूनी काम से जाता हूं Q. कार्यालय में आने का आपका निर्धारित समय क्या है? A. जो सभी का है, वही मेरा है। Q. शिकायत है कि आप रोजाना देरी से ऑफिस आते हैं? A. केवल कार्यालय में ही थोड़े ही काम होता है। बाहर भी जाना पड़ता है। Q. दफ्तर के समय में बाहर कहां क्या काम करना पड़ रहा है? A. कभी कोर्ट तो कभी कानूनी कामकाज के लिए वकीलों के पास जाना पड़ता है। Q. दोपहर में आने से विवि या छात्रों का काम प्रभावित नहीं होता क्या? A. देर तक रुक कर काम करता हूं। Q. आपके देर तक रुकने पर कर्मचारियों को भी रुकना पड़ता है। क्या उन्हें ओवर टाइम देते हैं? A. मैं किसी को नहीं रोकता, इसीलिए ओवरटाइम नहीं देता। पोल कभी-कभार ही होता है बाहर का काम मैं डेढ़ वर्ष तक कुलसचिव रहा। कभी कभार फील्ड वर्क रहता है, बाकी तो कार्यालय में ही समय देना होता है। मैं समय पर ऑफिस आता था और जब कुलपति दफ्तर में मौजूद रहते तो कार्यालय समय के बाद भी रुकता था। जीएस चारण, पूर्व रजिस्ट्रार जेएनवीयू पाड़ी मांगें लेकर आते हैं सुनने वाला कोई नहीं स्टूडेंट्स की मांगें लेकर रजिस्ट्रार के पास जाते हैं तो वे मिलते नहीं। कई बार 2-3 घंटे इंतजार के बाद बिना मिले भी लौटे। इस संबंध में कुलपति से भी शिकायत की, लेकिन रजिस्ट्रार आदत नहीं सुधार रहे हैं। कुनालसिंह भाटी, छात्रसंघ अध्यक्ष हां, लेट आते हैं, मेरे पास शिकायत भी है रजिस्ट्रार ऑफिस लेट आ रहे हैं। कई बार शिकायतें आई हैं लेकिन व्यस्तता की वजह से उनसे बात नहीं हुई। कर्मचारियों की हाजरी बायो-मेट्रिक्स से होती है, लेकिन रजिस्ट्रार की नहीं। प्रो. आरपी सिंह, कुलपति, जेएनवीयू

  • राजस्थान में रेसर तैयार करेंगे फार्मूला वन रेस चैंपियन नारायण कार्तिकेयन
    Last Updated: December 12 2016, 06:11 AM

    उदयपुर. देश के पहले फॉर्मूला वन मोटर ड्राइविंग रेसर नारायण कार्तिकेयन जल्द ही राजस्थान में अपनी अकादमी का दूसरा फेज शुरू करेंगे। इसके माध्यम से वे युवाओं को कार रेसिंग का प्रशिक्षण देंगे। इससे पूर्व पहले फेेज में तीन साल तक उनकी अकादमी यहां चल चुकी है। उन्होंने कहा कि दूसरे फेज को भी जल्द शुरू करेंगे। नारायण रविवार को भारत पेट्रोलियम के नए प्रोडक्ट के प्रमोशन के लिए उदयपुर आए थे। इस दौरान उन्होंने भास्कर से विशेष बातचीत कर मोटर ड्राइविंग और कार रेसिंग से जुड़ी जानकारियां साझा की। उन्होंने बताया कि कार्तिकेयन महंगा स्पोर्ट है रेसिंग, इसलिए कम प्रचलित कार्तिकेयन ने कार रेसिंग में भारत का विशेष स्थान नहीं होने के पीछे इसे महंगा स्पोर्ट बताया। कार्तिकेयन ने कहा कि मोटर ड्राइविंग-कार रेसिंग बेहद महंगा स्पोर्ट है। इसलिए हमारे देश में हर स्तर पर इसे स्वीकारा नहीं जाता। गोल्फ की तरह इसमें आवश्यक संसाधन काफी महंगे रहते हैं। साथ ही खेलों के स्तर पर भी इसका विशेष प्रचार नहीं होता। भारत में रेसिंग ट्रैक्स की कमी है कार्तिकेयन ने बताया कि फार्मूला वन रेसिंग को सरकार ने डेढ़ वर्ष पूर्व ही खेल के रूप में अधिकृत किया है। देश में रेसिंग ट्रैक्स की भी कमी है। देशभर में कुल 4 रेसिंग ट्रैक हैं इसमें भी तीन दक्षिणी भारत में है। जबकि उत्तरी भारत में हाल ही में ग्रेटर नोएडा में एक रेसिंग ट्रैक बनाया गया है। देशभर में रेसिंग ट्रैक विकसित हों और स्पोर्ट के प्रति जागरुकता विकसित हो तभी यह स्पोर्ट प्रचलित होगा। अद्भुत शहर है उदयपुर, दोबारा आऊंगा : नारायण कार्तिकेयन फार्मूला वन रेसिंग के प्रचलित रेसर हैं उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। कार्तिकेयन को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। पहली बार राजस्थान आए नारायण ने उदयपुर की काफी तारीफ की। कार्तिकेयन ने उदयपुर को अदभुत शहर बताते हुए दोबारा आने की इच्छा जाहिर की। कार्तिकेयन ने स्पीड 97 काे किया लॉन्च भारत पेट्रोलियम के नए पेट्रोल प्रोडक्ट स्पीड-97 की लॉंचिंग रविवार को फॉर्मूला वन रेसर नारायण कार्तिकेयन ने की। शोभागपुरा स्थित भारत पेट्रोलियम के पेट्रोल पंप पर कार्तिकेयन और लक्ष्यराज सिंह ने ने प्रोडक्ट लॉन्च किया। सुपर बाइक्स और सुपर कार के लिए यह प्रोडक्ट लॉन्च किया गया। राजस्थान में सबसे पहले उदयपुर में प्रोडक्ट की लॉंचिंग की गई। इससे पूर्व लिजेंडरी राइडर्स ऑफ सिनिक मेवाड़ क्लब की ओर से सिटी पैलेस से रॉयल राइडर्स रैली निकाली गई। रैली उदयपुर शहर से होते 150 किमी का सफर तय कर शिकार बाड़ी पर संपन्न हुई। भारत पेट्रोलियम उदयपुर के टेरेटरी मैनेजर शांतनु पुरोहित ने बताया कि यह पेट्रोल हाई पावर कार और बाइक्स के लिए उपयोगी है।

  • 8 राज्य के आर्टिस्ट यहां दिखाएंगे एक भारत की झलक, पहुंचे एमडीएस यूनिवर्सिटी
    Last Updated: September 19 2016, 06:01 AM

    अजमेर. एमडीएस यूनिवर्सिटी में उत्तर-पूर्वी भारत को साकार करने के लिए 7-सिस्टर्स; के साथ सिक्किम के आर्टिस्ट शिरकत करने पहुंचे हैं। अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा आैर नागालैंड राज्यों का कुल कवर एरिया, भारत के कवर एरिया का सात फीसदी है, इसलिए इन्हें 7-सिस्टर्स; के नाम से भी जाना जाता है। जोधपुर की जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी के बाद अजमेर की एमडीएस यूनिवर्सिटी में आगामी 21 से 25 सितंबर कर आयोजित होने जा रहा ऑक्टेव; कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक भारत, श्रेष्ठ भारत; सपने को साकार करेगा। पांच दिवसीय इस कार्यक्रम में हमें उत्तर-पूर्वी आठ राज्यों के दुर्लभ आदिवासी नृत्य, कलाएं आैर संस्कृति देखने का अवसर मिलेगा। ऑक्टेव का शिल्प बाजार भी खास होगा, जिसमें इन आठों राज्यों की कलात्मक वस्तुएं आप खरीद सकेंगे। यूनिवर्सिटी ने ऑक्टेव की तैयारियों को रविवार को अंतिम रूप दे दिया। भव्य पंडाल में आकर्षक मंच बनाया गया है, 2000 लोगों के बैठने की माकूल व्यवस्था है। इसलिए कहलाते हैं 7-सिस्टर्स; अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड आैर त्रिपुरा, इन सातों राज्यों को लैंड ऑफ सेवन सिस्टर्स के नाम से भी जाना जाता है। इसका एक सबसे बड़ा कारण यह भी है कि जब भारत-पाक का विभाजन हुआ था, तब यह सभी राज्य एक साथ संघीय रूप से भारत में शामिल होने आए थे। इसके अलावा भारत के कुल कवर एरिया में यह सातों राज्य 2,55,511 स्क्वायर किमी एरिया कवर करते हैं, जो कि भारत के कुल एरिया का 7 फीसदी है। एक तीसरा कारण यह भी है कि 1972 में त्रिपुरा के पत्रकार ज्योति प्रसाद ने एक कवरेज में इन सातों राज्यों को लैंड ऑफ सेवन सिस्टर्स लिखा था। इसके पीछे तर्क यह था कि यह राज्य एक-दूसरे के कांप्लीमेंट्री हैं। यानी यहां की कला, संस्कृति, परिवहन, खान-पान, रहन-सहन सभी कुछ एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। यहां की जरूरतें ऐसी हैं कि यह राज्य एक दूसरे के बिना रह नहीं पाते हैं। उत्तर-पूर्वी कलात्मक वस्तुओं से निखरेगा शिल्प बाजार; ऑक्टेव में शिल्प बाजार भी लगेगा। रोजाना कला प्रदर्शनी होगी, जिसका समय दोपहर 2 बजे से शाम तक रहेगा। शिल्प बाजार में उत्तर-पूर्वी आठों राज्यों के शिल्पकारों द्वारा बनाई सजावटी वस्तुएं, बैंबू ट्री फर्नीचर, तीर-कमान, पहनावे, आचार-मुरब्बे सहित अन्य सामान मिलेगा। आठों राज्यों के शिल्पकारों के लिए आैर कलाकारों के लिए एमडीएस यूनिवर्सिटी द्वारा भोजन व आवास की व्यवस्था की गई है। कैंपस में इन मेहमानों के लिए हर सुविधा मुहैया करवाई गई है। ऐसी कलाएं, जिन्हें देख आप रह जाएंगे दंग वेस्ट जोन कल्चरल सेंटर के निदेशक फुरकान खान द्वारा ऑक्टेव कार्यक्रम काे डिजाइन किया गया है। इस कार्यक्रम में उत्तर-पूर्व के आठों राज्यों के ऐसे-ऐसे जिले व गांवों से कलाकारों का चयन किया गया है, जिनकी कला देख आप दंग रह जाएंगे। मुख्य उद्देश्य कलाकारों को कला प्रदर्शन का अवसर देकर राष्ट्रीय व अंतर राष्ट्रीय मंच प्रदान करना है। कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी के प्रयासों से इस तरह का सांस्कृतिक आयोजन अजमेर में पहली बार होने जा रहा है। ऑक्टेव का हर दिन होगा खास व यादगार; उदयपुर के वेस्ट जोन कल्चरल सेंटर आैर एमडीएस यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय ऑक्टेव का हर दिन खास होगा। शहर के कलाप्रेमियों को यह कार्यक्रम रोमांचित कर देगा। 21 सितंबर को शाम 6.30 बजे महामहिम राज्यपाल कल्याण सिंह कार्यक्रम का बतौर मुख्य अतिथि शुभारंभ करेंगे। आठों राज्यों के कलाकार अपने-अपने राज्यों की लोक कला की प्रस्तुतियां देंगे। 22 सितंबर को शाम 7 बजे असम का शास्त्रीय नृत्य सत्तरीया आैर लोक कलाओं की पेशकश होगी। इसी तरह 23 सितंबर को सुबह 10.30 बजे काव्य गोष्ठी, दोपहर 2 बजे साहित्य संगोष्ठी व परिसंवाद आैर सांय 7 बजे से लोक कला की प्रस्तुतियां होंगी। 24 सितंबर को शाम 7 बजे मणिपुर का शास्त्रीय नृत्य मणिपुरी रास आैर लोक कला की प्रस्तुतियां होंगी। कार्यक्रम का समापन 25 सितंबर को शाम 7 बजे कैरोल गायन आैर रॉक बैंड के साथ होगा। ये हैं आठ मुख्य उद्देश्य - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक भारत, श्रेष्ठ भारत के सपने को साकार करना। - उत्तर-पूर्वी राज्यों की कलाओं आैर संस्कृति को भारत के कोने-कोने तक फैलाना। - कलाकारों आैर शिल्पकारों को अन्य राज्यों के लोगों से रूबरू कराना, ताकि हर कोई अपने भारत की विविधता में एकता को करीब से समझ सके। - कलाकारों को मंच आैर शिल्पकारों को बाजार प्रदान करना। - युवाओं की सोच में एक व श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना के मोती पिरोना। - उत्तर-पूर्वी राज्यों के आदिवासी कलाकारों को अन्य राज्यों में ले जाकर वहां की मेहमान नवाजी आैर संस्कृति से अवगत करवाना। - अनेकता में एकता आैर भारत की अखंडता बनाए रखना। - संपूर्ण भारत के युवाओं में दोस्ताना माहौल बनाना।

  • नक्शा विवाद पर बोले रघुवर दास, नीतीश कुमार जैसा झूठा कभी नहीं देखा
    Last Updated: June 21 2016, 07:10 AM

    दुमका. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सोमवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, मैंने अपने राजनीतिक जीवन में नीतीश कुमार जैसा झूठा मुख्यमंत्री नहीं देखा। नीतीश ने दिल्ली में प्रधानमंत्री के सामने कहा था कि झारखंड का नक्शा अविलंब दे दिया जाएगा। पलटवार : झूठे नेताओं के सिरमौर हैं मोदी... - रघुवर दास ने कहा कि जब हमारे राजस्व मंत्री अमर बाउरी नक्शा लाने पटना गए तो वहां के मुख्य सचिव ने कहा कि हम नक्शा नहीं दे सकते। इसके लिए मुख्यमंत्री ने मना किया है। - जबकि झारखंड ने इसके लिए बाकायदा पैसे भी जमा कर दिया है।; रघुवर दास यहां इंडोर स्टेडियम में मीडिया से बात कर रहे थे। - उन्होंने कहा कि बिहार में नीतीश कुमार का देसी शराब माफिया से साठगांठ है। बिहार में गली-गली में खुलेआम शराब परोसी जा रही थी। - महिलाएं विधवा और बच्चे अनाथ हो रहे थे। दस साल तक चले इस खेल का जवाब कौन देगा। - नीतीश कुमार का अपना घर तो संभल नहीं रहा है और वे झारखंड व उत्तर प्रदेश को संभालने चले हैं। - नीतीश ड्रामा बंद करें। बिहार की जनता जल्दी ही उनका राजनीतिक नशा उतार देगी। रघुवर दास ने कहा कि जनजागरण अभियान चलाकर नशामुक्त किया जाना चाहिए। - पलामू व गुमला की महिलाओं द्वारा नशामुक्ति के लिए चलाए जा रहे आंदोलन को काफी सफलता मिली है। संथाल के विकास के लिए ब्लूप्रिंट बनेगा - सीएम ने कहा कि संथाल परगना के विकास के लिए एक साल की कार्ययोजना बनेगी। - इसमें आदिवासियों और गैर आदिवासियों में सामंजस्य स्थापित कर विकास की रूपरेखा बनाई जाएगी। - 2018 तक झारखंड को विकसित राज्य बनाना लक्ष्य है, ताकि 2019 में होने वाले चुनाव में सिर उठाकर जनता से वोट मांग सकें। - सीएम ने संथाल में झामुमो मुक्त और भाजपा युक्त करने का नारा भी दिया। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें वशिष्ठ नारायण सिंह का पलटवार...

  • राज्यसभा चुनाव: मीसा होंगी संसद में RJD का चेहरा, जेठमलानी ने भी पर्चा भरा
    Last Updated: May 30 2016, 14:36 PM

    नई दिल्ली. राज्यसभा के लिए बिहार में महागठबंधन के चार कैंडिडेट्स ने सोमवार को नॉमिनेशन फाइल कर दिए। इनमें लालू की बेटी मीसा भारती और जेडीयू नेता शरद यादव शामिल हैं। दूसरी ओर, बीजेपी ने राज्यसभा उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है। कौन कहां से पहुंचेगा अपर हाउस... - जदयू की ओर से शरद यादव और आरसीपी सिंह ने नॉमिनेशन फाइल किया। आरजेडी से राम जेठमलानी और मीसा ने नॉमिनेशन फाइल किया। - करीब तीन साल बाद लालू के परिवार से किसी मेंबर की संसद में एंट्री होगी। - लालू खुद 2002 से 2008 तक राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। - वहीं, जेठमलानी पहले निर्दलीय सांसद थे। वे बीजेपी के सपोर्ट से राज्यसभा सदस्य बने थे। - महागठबंधन के कैंडिडेट्स की तरफ से नॉमिनेशन फाइल किए जाने के दौरान नीतीश कुमार, लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, वशिष्ठ नारायण सिंह और केसी त्यागी मौजूद रहे। तेजस्वी ने कहा- मीसा के राज्यसभा जाने से पार्टी होगी मजबूत - डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने कहा कि मीसा भारती के राज्यसभा जाने से पार्टी मजबूत होगी। मीसा तेजस्वी की बड़ी बहन हैं। - लोकसभा चुनाव में मीसा पाटलिपुत्र क्षेत्र से चुनाव हार गईं थी। बीजेपी से कौन? - बीजेपी ने अपने स्टेट हेड गोपाल नारायण सिंह को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है। बीजेपी की लिस्ट में और कौन? - बीरेंद्र सिंह को हरियाणा, सीतारमण को कर्नाटक, पीयूष गोयल को महाराष्ट्र, मुख्तार अब्बास नकवी को झारखंड और पुरुषोत्तम रूपाला को गुजरात से टिकट मिला है। - बिहार से गोपाल नारायण सिंह, मध्य प्रदेश से अनिल माधव दवे और छत्तीसगढ़ से रामविचार नेताम का नाम डिक्लेयर किया गया है। - रेल मंत्री सुरेश प्रभु का बतौर राज्यसभा सदस्य टेन्योर खत्म हो रहा है। पार्टी महासचिव राम माधव और उपाध्यक्ष विनय सहस्रबुद्धे भी टिकट के दावेदारों में शामिल हैं। ये सीटें जून से अगस्त के बीच भरी जानी हैं। - मोदी ने 20 मई को राज्यसभा कैंडिडेट सिलेक्शन को लेकर अमित शाह और अरुण जेटली से मीटिंग की थी। बीजेपी इस बार 17 सीटों पर नजर रख रही है। इससे राज्यसभा में मेजॉरिटी का अंतर कम हो जाएगा। किसको होगा फायदा? - कांग्रेस कपिल सिब्बल और पी. चिंदबरम को राज्यसभा भेजने का एलान पहले ही कर चुकी है। - जानकारी के मुताबिक, कई राज्यों में चुनावी हार के बाद राज्यसभा में कांग्रेस के मेंबर्स 64 से 57 हो सकते हैं। - दूसरी ओर, बीजेपी को जयललिता की एआईएडीएमके से मदद मिल सकती है। उसके सपोर्टर बढ़ सकते हैं और इसका फायदा उसको जीएसटी समेत उन बिलों को अपर हाउस से पास कराने में मिल सकता है, जो लंबे वक्त से कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों ने लटका रखे हैं। राज्यसभा में क्या है सिचुएशन? - 245 मेंबर्स वाले हाउस में अभी एनडीए के 62 सांसद हैं। सात नॉमिनेटेड मेंबर्स को शामिल कर दें तो एनडीए के 69 सांसद हो जाते हैं। - कांग्रेस के 61 सांसद हैं। उसकी सहयोगी पार्टियों की संख्या मिला दें तो यूपीए के 80 सांसद हो जाते हैं। - इसमें भी एआईएडीएमके, बीजेडी, तृणमूल, सपा और बसपा को मिला दें तो गैर-एनडीए सांसदों की संख्या 90 हो जाती है। - 30 जून को राज्यसभा के एक-तिहाई सदस्य रिटायर होंगे। यहां सांसदों का टर्म 6 साल का होता है। हर दो साल में एक-तिहाई मेंबर रिटायर होते हैं। - नए मेंबर्स का इलेक्शन 11 जून को होगा। कौन-कितनी सीटें जीतेगा? - बीजेपी के 14 मेंबर रिटायर हो रहे हैं। 57 सीटों पर इलेक्शन के बाद उसे 18 सीटें मिल सकती हैं। यानी वह 4 सीटों के फायदे में रह सकती है। - 49 सीटों वाली बीजेपी राज्यसभा में 53 सीटों तक पहुंच जाएगी। - कांग्रेस के अभी 61 सांसद हैं। उसके भी 16 सांसद रिटायर हो रहे हैं। लेकिन उम्मीद है कि दोबारा इलेक्शन के बाद उसकी संख्या 60 बनी रहेगी। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें: मुलायम का साथ लेकर राज्यसभा जाएंगे अजित सिंह...

  • कॉर्डिनेशन कमेटी मनमर्जी से तय करती थी भत्ते, 10 अफसरों ने उठा लिए 3 करोड़
    Last Updated: March 22 2016, 04:08 AM

    जोधपुर। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय की ओर से 2008 से 2014 के बीच आयोजित पीटीईटी की परीक्षाओं में यूनिवर्सिटी प्रशासन, शिक्षकों व कर्मचारियों के बीच करोड़ों रुपए आपस में ही बांट लिए। भास्कर ने पीटीईटी से फंड उठाने के आंकड़े जुटाए गए तो पता चला कि समन्वयक से लेकर कर्मचारियों तक बंटे इस फंड में करोड़ों रुपए लुटाए गए। चौकाने वाला तथ्य तो यह है कि जेएनवीयू ने वर्ष 2014 में कुल 182 कर्मचारियों की टीम बनाकर पीटीईटी करवाई, जबकि 2015 में अजमेर की एमडीएस यूनिवर्सिटी ने केवल 12 कर्मचारियों की टीम से ही पीटीईटी करवा ली। कर्मचारियों पर बेतहाशा खर्च करने के कारण जेएनवीयू की शुद्ध आय भी कम रही। एमडीएस विवि ने 11 माह में कर्मचारियों व समन्वयक समिति पर केवल 20 लाख रुपए खर्च किए और 5.75 करोड़ रुपए में पूरी पीटीईटी करवा दी जबकि जेएनवीयू ने 2014 में 9.45 करोड़ रुपए खर्च किए थे।अजमेर यूनिवर्सिटी 17 करोड़ से अधिक की आय का दावा कर रही है। जबकि 2014 में जेएनवीयू ने महज 10.27 करोड़ रुपए ही शुद्ध आय अर्जित की थी। जेएनवीयू को पीटीईटी से सर्वाधिक आय 2008 में हुई जब शुद्ध आय 13 करोड़ रुपए से ज्यादा की थी। इसके बाद आय का आंकड़ा 7 से 11 करोड़ के बीच ही रहा। शीर्ष अफसरों में समन्वयक, कुलसचिव व वित्त नियंत्रक शामिल पीटीईटी की जिम्मेदारी जेएनवीयू को वर्ष 2008 में मिली। 2009 में प्रो. एके मलिक को पीटीईटी का समन्वयक बनाया गया। पीटीईटी का काम शाम पांच बजे के बाद शुरू होता तथा रात नौ बजे तक समाप्त हो जाता। यानि विवि की छुट्टी होने के बाद पीटीईटी का दफ्तर खुलता था। रोजाना 3 से 4 घंटे खुलने वाले इस दफ्तर में रेमुनरेशन के नाम पर पहले प्रति व्यक्ति 200 से 820 रुपए प्रतिदिन बांटा गया जो 2012 में बढ़कर 255 से 930 रुपए रोजाना हो गया। रेमुनरेशन तय करने के लिए केवल समन्वयक समिति की अनुशंसाओं पर विवि प्रशासन ने भी मुहर लगा दी। तत्कालीन कुलपति प्रो. बीएस राजपुरोहित के अनुसार रेमुनरेशन का निर्धारण पीटीईटी समन्वयक समिति ही करती थी और उनके निर्णय का अनुमोदन कुलपति की ओर से किया जाता था। आंकड़ों के अनुसार पीटीईटी 2009 से 2014 तक शीर्ष पदाधिकारियों में करीब 3 करोड़ का फंड बंटा। इनमें जिसमें समन्वयक, विवि कुलसचिव व विवि के वित्त नियंत्रक भी शामिल थे। समन्वयकों का रिपोर्ट कार्ड नाम परीक्षाएं आय खर्च शुद्ध आय प्रो. आरएल माथुर 1 19.54 6.14 13.4 प्रो. एके मलिक 5 15.35 5.38 9.97 प्रो. रमन दवे 1 19.72 9.45 10.27 बीपी सारस्वत (अजमेर) 1 22.75 5.75 17.00 नोट| प्रो. मलिक ने 5 परीक्षाएं आयोजित की इसलिए औसत आंकड़े लिए गए हैं। एमडीएस विवि के आंकड़े संभावित हैं। (आय, व्यय व शुद्ध आय करोड़ रुपए में) कन्वेंस के नाम पर भी उठाए हजारों रुपए जोधपुर में भत्ते और काउंसलिंग पारिश्रमिक में भी बेतहाशा बढ़ोतरी कर दी गई। 2008 से पहले जहां समन्वयक का दैनिक भत्ता 500 रुपए था जो 2012-14 में 780 रुपए कर दिया। समन्वयक व सह समन्वयक का काउंसलिंग भत्ता 2008 से पहले 1000 रुपए था जो 2012-14 में 1550 कर दिए गए। इसी तरह सह समन्वयक के दैनिक भत्ते 400 रुपए से बढ़ाकर 725 तक पहुंच गए। समिति सदस्य के भत्ते 400 से बढ़ाकर 620 हो गए। समिति सदस्य के काउंसलिंग भत्तों में भी पहले 140 रुपए तथा बाद में और 80 रुपए बढ़ा दिए गए। अधिकारियों ने कन्वेंस के नाम भी खूब पैसे उठाए। आंकड़ों के अनुसार 2009 व 2011 में 50-50 हजार, 2010 में 70 हजार, 2012 में 68 हजार, 2013 में 75 हजार रुपए ले लिए। 2014 में कितना कन्वेंस लिया, इसकी जानकारी अभी तक नहीं दी गई है। वे अधिकारी जिन्होंने उठाया सर्वाधिक पैसा वे अधिकारी जिन्होंने उठाया सर्वाधिक पैसावे अधिकारी जिन्होंने उठाया सर्वाधिक पैसा वे अधिकारी जिन्होंने उठाया सर्वाधिक पैसा वे अधिकारी जिन्होंने उठाया सर्वाधिक पैसा वे अधिकारी जिन्होंने उठाया सर्वाधिक पैसा वे अधिकारी जिन्होंने उठाया सर्वाधिक प्रो. चैनाराम चौधरी 29 लाख 77 हजार 410 प्रो. एके मलिक 27 लाख 69 हजार 380 सीएल सोलंकी 26 लाख 4 हजार 890 आरएस मीणा 22 लाख 64 हजार 960 जैताराम विश्नोई 17 लाख 96 हजार 620 निर्मला मीणा 16 लाख 76 हजार 190 रमन दवे 14 लाख 42 हजार 730 अरविंद परिहार 14 लाख 16 हजार 460 इरफान मेहर 12 लाख 76 हजार 380 रामनिवास ग्वाला 11 लाख 10 हजार

  • डॉक्‍टरों ने महि‍ला के पेट से नि‍काला 4 कि‍लो का ओवेरि‍यन ट्यूमर
    Last Updated: February 27 2016, 18:42 PM

    लखनऊ. लोकबंधु राजनारायण हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने एक महिला के पेट से 4 किलो का ओवेरियन ट्यूमर निकाला है। ऑपरेशन से पूर्व महिला को पेट दर्द की शिकायत थी। अब वह स्वस्थ बताई जा रही है। यह है पूरा मामला -रजनीखंड निवासी 36 वर्षीय बीनू सिंह को डेढ़ साल से पेट दर्द की शिकायत थी। -परिजनों ने पहले महिला मरीज को आस-पास के नर्सिंग होम में दिखाया। -फायदा न होने पर परिजन महिला को लेकर आरएलबी हॉस्पिटल पहुंचे। -वहां पर ओपीडी में डॉ. मंजू राठौर ने महिला की जांच कराई। -जांच रिपोर्ट में महिला के पेट में ट्यूमर होने का मामला प्रकाश में आया। -रिपोर्ट में पुष्टि होने के बाद ऑपरेशन में डॉ. मंजू राठौर, डॉ. आशीष सिंह, डॉ. मेहता, डॉ. खान, डॉ. वंश और संगीता की टीम ने सहयोग दिया। -दो घंटे तक चले ऑपरेशन के दौरान महिला के पेट से चार किलो का ट्यूमर निकाला गया। क्या होता है ओवेरियन ट्यूमर -हर तीन में से एक महिला अनियमित माहवारी का शिकार होती है। -इस समस्या के चलते गर्भाशय में सिस्ट या फाइब्रायड जमा होने लगते हैं। -फाइब्रायड मांस की परत होती है, जो गर्भाशय की दीवार पर हार्मोनल सक्रियता के चलते एकत्र होती है। -धीरे-धीरे यह ट्यूमर का रूप ले लेता है, इलाज न होने पर कैंसर का रूप ले लेता है।

  • सपा मुखिया मुलायम ने इशारों में कहा- राजनीति में चुगलखोरों से रहें सावधान
    Last Updated: January 01 2016, 09:05 AM

    लखनऊ. समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने कहा कि राजनीति में चुगलखोरों से सावधान रहना चाहिए। उन्होंने यह बयान राजनारायण की 39वीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान दिया। माना जा रहा है कि हाल ही में पार्टी की तरफ से उठाए गए कदम से नाखुश सीएम अखिलेश यादव के लिए यह बयान नसीहत है। वहीं, गुरुवार को पार्टी मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सीएम शामिल न होकर सैफई के लिए रवाना हो गए। आगे पढ़िए कार्यक्रम में नहीं शामिल हुए सीएम अखिलेश यादव। क्या हुआ कार्यक्रम में। > पार्टी कार्यालय पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान सपा सुप्रीमो ने कहा कि नौजवानों ने काफी संघर्ष के बाद सरकार बनाई है। > उन्होंने नौजवानों का धन्यवाद भी अदा किया। > इस कार्यक्रम में सपा सुप्रीमो के साथ ही सीएम को भी शामिल होना था। लेकिन, वह सैफई के लिए रवाना हो गए। > ऐसी चर्चा है कि सपा प्रमुख के निर्देश पर अपने करीबियों को पार्टी से निकाले जाने से सीएम नाराज चल रहे हैं। सैफई महोत्सव के उद्घाटन में भी नहीं पहुंचे थे सीएम > 26 दिसंबर से सैफई महोत्सव की शुरुआत सीएम के पैतृक गांव सैफई में हुई है। > यह महोत्सव हर साल होता है और इसमें बॉलीवुड सितारों का जमावड़ा होता है। > सीएम अखिलेश यादव को महोत्सव का उद्घाटन करना था, वो 26 दिसंबर को उद्घाटन करने नहीं पहुंचे थे, जबकि इस मौके पर मुलायम सिंह का पूरा परिवार मौजूद था। > प्रो. रामगोपाल यादव ने ढोल-नगाड़ा बजाकर महोत्सव का उद्घाटन किया था। > 28 दिसंबर को ग्रामीण क्रिकेट लीग (आईजीसीएल) टूर्नामेंट का उद्घाटन सीएम अखिलेश को करना था, लेकिन वह नहीं पहुंचे। > सीएम नहीं पहुंचे, तो बदायूं से सांसद और महोत्सव समिति के अध्यक्ष धर्मेंद्र यादव ने आईजीसीएल का शुभारंभ किया। पारिवारिक जलसा के समान है सैफई महोत्सव > मुलायम के पैतृक निवास सैफई में यह महोत्सव पिछले 17 सालों से मनाया जाता है। > एक तरह से यह यादव परिवार का पारिवारिक जलसा माना जाता है। > इसमें बॉलीवुड की कई बड़ी-बड़ी हस्तियां शामिल होती हैं। > इसके लिए यादव परिवार की कई बार आलोचना भी होती है। > इस बार सैफई महोत्सव 11 जनवरी तक चलेगा। > इसमें पाकिस्तानी गायक राहत फतेह अली खां, गजल गायक पिनाज मसानी और बॉलीवुड के कई सितारे शामिल होंगे। धर्मेंद्र यादव ने दी थी सफाई सीएम सैफई महोत्सव का उद्घाटन करने नहीं पहुंचे तो महोत्सव के आयोजक और सांसद धर्मेंद्र यादव ने सफाई दी थी कि अखिलेश सीएम हैं, ऐसे में वह कई कार्यक्रमों में व्यस्त रहते हैं। इस वजह से वह महोत्सव के उद्घाटन में नहीं पहुंच सके। जल्द ही वह महोत्सव में शामिल होने सैफई आएंगे। चर्चा है कि बयान के बाद सांसद धर्मेंद्र और सांसद तेज प्रताप ने राजधानी पहुंच कर सीएम को मनाने की कोशिश की थी। फोटो: कार्यक्रम में बैठे मुलायम सिंह यादव।

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