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देर रात जलती चिता पर की तंत्र साधना, फिर बताया PAK से युद्ध होगा या नहीं

देर रात जलती चिता पर की तंत्र साधना, फिर बताया PAK से युद्ध होगा या नहीं

Last Updated: December 18 2016, 16:44 PM

उज्जैन/इंदौर. नवरात्रि पर चक्रतीर्थ श्मशान में कापालिक भैरवानंद ने चिता स्थल पर तंत्र क्रिया करते हुए तीन भविष्यवाणियां की हैं। इनका कहना है भारत-पाक के बीच मौजूदा हालातों के बावजूद युद्ध नहीं होगा। पढ़ें, बाबा की दो और भविष्यवाणी... -बाबा ने दूसरी भविष्यवाणी है कि उत्तर प्रदेश चुनाव में सत्ता परिवर्तन होगा और केंद्र में जिस पार्टी की सरकार है वह काबिज होगी। - तीसरी भविष्यवाणी अमेरिकी चुनाव में हिलेरी क्लिंटन की जीत होगी। - श्मशान में करीब तीन घंटे चली तंत्र पूजा के दौरान बड़ी संख्या में उनके अनुयायी मौजूद थे। सिंहस्थ पर की थी श्मशान साधना कापालिक बाबा ने उज्जैन में हुई सिंहस्थ की सफलता के लिए भी उज्जैन के चक्रतीर्थ श्मशान पर अपनी विदेशी शिष्या के साथ श्मशान जगाया था। - आधी रात में जलती चिता के सामने बैठकर उन्होंने तंत्र साधना की थी। उनके मुताबिक़ उनकी इस साधना का उद्देश्य सिंहस्थ में बन रहे चांडाल योग से होने वाले अनिष्ट को टालना था। मिर्ची से किया था हवन - सिंहस्थ को सफल बनाने के लिए एक क्विंटल मिर्ची के हवन के बाद अमावस की रात चक्रतीर्थ पर कापालिक, अघोरी, तांत्रिक और साधकों ने विशेष पूजा की थी। - यहां 50 से अधिक तांत्रिकों और साधकों ने 52 भैरव, श्मशान भैरव, चिता साधना, श्मशान किंकरी, भैरव साधना, महाकाली, महाविद्या की साधना की थी। अघोर तांत्रिक शिवानी दुर्गा ने भी की थी साधना - मुंबई की अघोर तांत्रिक शिवानी दुर्गा ने भी सिंहस्थ की सफलता के लिए चक्रतीर्थ में मसानी काली पूजा की थी। - करीब दो घंटे तक शिवानी दुर्गा ने जलती चिता पर पूजा की थी। उन्होंने आते ही चिता स्थल पर भाला, गंडासा, चाकू आदि निकाल कर रखे। - प्याले में शराब का भोग लगाया। मंत्रोच्चारण करते हुए पूजन शुरू किया। - कुछ देर बाद उन्होंने तलवार से चिता और पूजन स्थल के चारों तरफ तलवार से लक्ष्मण रेखा खींच दी और किसी को भी उसे लांघने से मना कर दिया। आगे की स्लाइड्स पर देखें श्मशान में तंत्र पूजा

धार्मिक जुलूस के दौरान तनाव, भारी पुलिस बल तैनात

धार्मिक जुलूस के दौरान तनाव, भारी पुलिस बल तैनात

Last Updated: October 13 2016, 16:48 PM

दुमका (झारखंड)। यहां के जामा थाना क्षेत्र स्थित परगोडीह गांव में बीती रात धार्मिक जुलूस के दौरान एक समुदाय विशेष के लोगों ने प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया और पांच लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। इस दौरान दोनों समुदायों में जमकर मारपीट हुई। इसके बाद से इलाके में तनाव कायम हो गया। विरोध में दिया घटना को अंजाम... - इसके विरोध में दूसरे समुदाय के लोगों ने गुरुवार की सुबह गांव में घुसकर मस्जिद और ताजिया में आग लगा दी। पांच सौ की संख्या में बस्ती में घुसकर लोगों की पिटाई की। - सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम एसडीओ की अगुवाई में मौके पर पहुंची। पुलिस ने पूरे एरिया को सील कर दिया है। धारा 144 लागू कर दी गई है। - दोनों समुदाय से 12 लोगों को अबतक अरेस्ट किया जा चुका है। माहौल तनावपूर्ण लेकिन काबू में है। डीसी-एसपी पहुंचे मौके पर, किसी के भी प्रवेश पर रोक - घटना के बाद दुमका के डिप्टी कमिश्नर राहुल सिन्हा और एसपी प्रभात कुमार मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारी गांव में ही कैंप कर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। - गांव के अासपास के क्षेत्रों में किसी भी असमाजिक तत्वों के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। ग्रामीणों ने भी शांति सभाओं का आयोजन करके उसमें शिरकत की है। - दुमका के डीसी ने अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है। बीच-बचाव के क्रम में कुछ पुलिसकर्मी और ग्रामीण घायल हुए हैं। अागे की स्लाइड्स पर देखें संबंधित PHOTOS :

प्रिंसेस यशोधरा के साथ भक्तों ने माता को चढ़ाई 201 फीट लंबी चुनरी

प्रिंसेस यशोधरा के साथ भक्तों ने माता को चढ़ाई 201 फीट लंबी चुनरी

Last Updated: October 09 2016, 07:57 AM

ग्वालियर। तकरीबन 4-हजार भक्तों की करीब 3 किलोमीटर लंबी कतार, हाथों में मां को समर्पित करने के लिए 201 फीट लंबी चुनरी। भक्तों में खुद सिंधिया रियासत की प्रिंसेस यशोधरा भी शामिल हुईं। शिवपुरी के इस मंदिर में दिन भर हाथों में भगवा ध्वज थामे जयकारे लगाते भक्तों की भीड़ जुटी रही। मंदिर समिति ने लगातार दूसरी बार मां काली के दरबार में 201 मीटर की चुनरी शुक्रवार चढ़ाई। - शिवपुरी के राज राजेश्वरी मंदिर में शुक्रवार का दिन रहा। भक्तों ने लगातार दूसरी बार माता को 201 फीट लंबी चुनरी समर्पित की। - मां राजराजेश्वरी को सिंधिया रियासत की प्रिंसेज यशोधरा ने भी चुनरी समर्पित की। उनके साथ 201 फीट लंबी चुनरी थामे करीब 4 हजार भक्तों ने मां राज राजेश्वरी की आरती उतारी। - करीब 3 किलोमीटर तक भक्तों कतार लगी रही, राजराजेश्वरी मंदिर से शुरू हुई चुनरी काली माता मंदिर में पूजा अर्चना के बाद समर्पित कर दी गई। - प्राचीन राज राजेश्वरी मंदिर से प्रारंभ होकर अस्पताल चौराहा, कोर्ट रोड होत हुए माधव चौक पहुंची यहां से गुरुद्वारा चौक, नीलगर चौराहा होते हुए झांसी रोड स्थित काली माता मंदिर पहुंची। यशोधरा ने की मां राज राजेश्वरी की पूजा अर्चना - प्रदेश की खेल मंत्री यशोधरा राजे ने भी राज राजेश्वरी मंदिर में पूजा अर्चा ना की। - प्रिंसेस यशोधरा मां राज राजेश्वरी को चुनरी समर्पित कर आरती में शामिल हुईं। - इसके बाद यशोधरा ने शिवपुरी के प्राचीन काली मंदिर में भी दर्शन कर मां का आशीर्वाद लिया। स्लाइड्स में है राजराजेश्वरी मंदिर में पूजा करती प्रिंसेस यशोधरा, 201 फीट की चुनरी....

8 घंटे में 18 किमी चली 11 किमी लंबी मां की चुनरी, हेलिकॉप्टर से बरसाए फूल

8 घंटे में 18 किमी चली 11 किमी लंबी मां की चुनरी, हेलिकॉप्टर से बरसाए फूल

Last Updated: October 08 2016, 10:18 AM

भोपाल। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में गुरुवार को एक अनूठी चुनरी यात्रा निकली। इसमें रायसेन से 18 किमी दूर खंडेरा वाली मैया के दरबार तक 11000 हजार मीटर यानी 11 किमी लंबी चुनरी यात्रा निकाली गई। इसे वहां तक पहुंचने में करीब 8 घंटे लगे। आयोजकों का दावा है कि समूची दुनिया में अब तक इतनी बड़ी चुनरी यात्रा कहीं और नहीं निकाली गई। यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए है। यात्रा को खास बनाने के लिए श्रद्धालुओं पर हेलिकॉप्टर से गुलाब के फूल बरसाए गए। सांची रोड से शुरू हुई चुनरी यात्रा... -चुनरी यात्रा सांची रोड स्थित माता मंदिर से शुरू हुई। -जो महामाया चौक, सागर तिराहे से होकर करीब 18 किमी दूर खंडेरा वाली मैया के दरबार पहुंची। -इस चुनरी यात्रा में रायसेन और विदिशा जिले के ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। हेलिकाप्टर से कराई जा रही है फूल की वर्षा -चुनरी यात्रा के 18 किलोमीटर के रास्ते में हेलिकाप्टर से गुलाब की फूलों की पंखुडिय़ां बरसाई गई। -आसमान में उड़ता हुआ हेलिकाप्टर चुनरी यात्रा में पहली बार फूल बरसाता दिखाई दिया। -हेलिकाप्टर में उसकी क्षमता के हिसाब 80 किलो फूल एक बार में रखे गए थे। -पहले राउंड के लिए गुलाब के फूल भोपाल से लोड करके लाए गए थे। -रायसेन से हेलिकाप्टर ने पांच बार उड़ान भरी। ऊंट, हाथी और घोड़े भी हुए चुनरी यात्रा में शामिल चुनरी यात्रा के दौरान पंजाब का अखाड़ा, राजस्थान के नाचने वाले ऊंट और घोड़े, हाथी, रतलाम की मयूर पार्टी, मथुरा की रासलीला, झांसी की ढपला पार्टी के अलावा बेगमगंज, देहगांव और गैरतगंज के अखाड़े शामिल किए गए। इस यात्रा में जिले भर से हजारों लोग शामिल होते हैं। इस तरह से रही यातायात व्यवस्था यात्रा की वजह से सागर-भोपाल मार्ग को करीब दस घंटे तक के लिए बंद किया गया। इस मार्ग से निकलने वाले वाहनों को डायवर्ट किए गए मार्गों से होकर निकाला गया। यातायात व्यवस्था को बनाने के लिए सभी डायवर्ट रूटों पर 250 से अधिक पुलिस जवानों को भी तैनात किया गया है। यात्रा के आयोजक नगरपालिका अध्यक्ष जमुना सेन ने दावा किया है कि विश्व में अब तक इतनी लंबी चुनरी यात्रा नहीं निकाली गई। आगे की स्लाइड्स पर देखें तस्वीरें...

कहीं रोशनी से जगमगाया 'मैसूर पैलेस' तो कहीं दिखा पानी में प्रतिबिंब का जादू

कहीं रोशनी से जगमगाया 'मैसूर पैलेस' तो कहीं दिखा पानी में प्रतिबिंब का जादू

Last Updated: October 07 2016, 15:33 PM

रांची। झारखंड दुर्गा पूजा के रंग में रंगने लगा है। पंडाल सजकर तैयार हो गए हैं। रांची में गुरुवार को पंडालों का उद्घाटन होगा। इस दौरान रांची के अपर बाजार के बकरी बाजार में बनाया गया मैसूर पैलेस का प्रारूप रंग-बिरंगी रोशनी से नहाता दिखा। तो धनबाद में पंडाल की रोशनी तलाब के पानी में आकर्षक रूप से जगमगाती नजर आई। कहां क्या बना है... -मैसूर पैलेस के प्रारूप पंडाल में 20 हजार बल्ब लगाए गए हैं। पंडाल के निर्माण पर कुल 40 लाख रुपए का खर्च आया है। -गुरुवार को शाम पांच बजे इस पंडाल का उद्घाटन हुआ और श्रद्धालुओं के लिए पट खोल दिए गए। -धनबाद का रानी बांध तालाब जगमगा रहा है। तालाब के आसपास के 15 से अधिक वृक्षों ने लाल-पीली और हरी रोशनी की चादर ओढ़ ली है। -जब इन जगमगाते पेड़ों का प्रतिबिंब तालाब के पानी में बना तो सुंदरता में चार-चांद लग गए। तालाब के पानी में रंग-बिरंगी रोशनी उतर आई। पूरा तालाब रंगीन दिख रहा है। -वहीं, जमशेदपुर में ठाकुरप्यारा सिंह धुरंधर सिंह दुर्गापूजा कमेटी काशीडीह द्वारा बनाए गए मनोरम पंडाल को देखने के लिए भक्तों की भीड़ बुधवार (पंचमी) को ही उमड़ पड़ी। -यहां का पंडाल महिला सशक्तीकरण और भ्रूण हत्या पर रोक लगाने का संदेश दे रहा है। पंडाल में मां की आकर्षक प्रतिमा भक्तों को भाव विभोर कर रही है। -जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया इस पंडाल को देखने के लिए भक्तों की भीड़ बढ़ती चली गई। रात तीन बजे तक यहां भक्त टोलियों में आती रहीं। -कमेटी ने भक्तों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की है। कमेटी के स्वयंसेवक और पुलिस बल जगह-जगह तैनात हैं। आगे की स्लाइड्स में देखिए फोटोज...

400 साल पुराने इस देवी मंदिर में दर्शन करने आते थे शेर और डकैत भी

400 साल पुराने इस देवी मंदिर में दर्शन करने आते थे शेर और डकैत भी

Last Updated: October 07 2016, 08:34 AM

ग्वालियर। सांतऊ के शीतला माता पिछले करीब 400 सालों से भक्तों की मुराद पूरी करती चली आ रही हैं।मंदिर के आसपास हालांकि आज भी जंगल है, लेकिन जब यहां के घने जंगलों में शेर हुआ करते थे तब वह माता के दर्शन करने आते थे। इन शेरों ने कभी किसी ग्रामीण को नुकसान नहीं पहुंचाया, दर्शन कर चुपचाप जंगल में गायब हो जाते थे। शारदीय नवरात्रि की शुरुआत से ही माहौल देवी की भक्ति से परिपूर्ण हो गया है। इस मौके पर d<a href='http://ainikbhaskar.com/'>ainikbhaskar.com</a> पेश कर रहा है आसापस के विशेष देवी मंदिरों की अनछुई कहानियां.... - मंदिर के पुजारी महंत नाथूराम बताते हैं कि उनके पूर्वज महंत गजाधर मौजूदा मंदिर के पास ही बसे गांव सांतऊ में रहते थे। - वे गोहद के पास स्थित खरौआ में एक प्राचीन देवी मंदिर में वह नियमित रूप से गाय के दूध से माता का अभिषेक करते थे। - महंत गजाधर की भक्ति से प्रसन्न होकर देवी मां कन्या रूप में प्रकट हुईं और महंत से अपने साथ ले चलने को कहा। - गजाधर ने माता से कहा कि उनके पास कोई साधन नहीं है वह उन्हें अपने साथ कैसे ले जाएं। तब माता ने कहा कि वह जब उनका ध्यान करेंगे वह प्रकट हो जाएंगी। - गजाधर ने सांतऊ पहुंचकर माता का आवाहन किया तो देवी प्रकट हो गईं और गजाधर से मंदिर बनवाने के लिए कहा। - गजाधर ने माता से कहा कि वह जहां विराज जाएंगी वहीं मंदिर बना दिया जाएगा। सांतऊं गांव से बाहर निकल कर जंगलों इस पहाड़ी पर विराज गईं। - तब से महंत गजाधर के वंशज इस मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। महंत नाथूराम पांचवीं पीढ़ी के हैं। डकैत और पुलिस दोनों लगाते रहे हैं मां के दरबार में हाजिरी - शीतला माता को डकैत ही नहीं पुलिस वाले भी बहुत मानते थे। - यहां चंबल के कुख्यात डकैतों ने घंटे चढाए हैं। साथ ही उन्हें मारने या समर्पण कराने वाले पुलिस अफसरों के घंटे भी मंदिर में मौजूद हैं। - मंदिर में डकैत गिरोह आते रहे हैं, लेकिन कभी मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की ओर आंख तक नहीं उठाई। - कई बार पुलिस ने मंदिर में रातें बिता कर पास के जंगलों में डकैतों से एनकाउंटर भी किए हैं। स्लाइड्स में हैं शीतला माता मंदिर और पूजा करते श्रद्धालु.....

50 फोटो में आप भी देखें गरबा के ये नजारे, भक्ति के साथ फैशन का तड़का

50 फोटो में आप भी देखें गरबा के ये नजारे, भक्ति के साथ फैशन का तड़का

Last Updated: October 06 2016, 17:54 PM

इंदौर। अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव गरबों के साथ फैशन और स्टाइल के नए प्रयोग का एक प्लैटफार्म बन गया है। ड्रेसअप से लेकर मेकअप, हेयरस्टाइल से लेकर एक्सेसरीज और बालों से लेकर टैटू तक हर चीज में युवाओं का अलग अंदाज नजर आ रहा है। पढ़ें, भक्ति के साथ फैशन का तड़का...       - एमपी के सबसे बड़े गरबा महोत्सव अभिव्यक्ति में तीसरे दिन उत्साह चरम पर दिखा। - शाम होते ही वेन्यू, गुजराती स्कूल के सारे रास्तों पर लोगों की भीड़ उमड़ने लगी। - गरबा करने वालों की एनर्जी देख दर्शकों के पैर भी थिरकने लगे और हजारों दर्शक जनरल सर्कल में गरबा करने पहुंचे। - प्रतिभागी अलग-अलग तरीके से सज-संवरकर गरबा करने पहुंचे। किसी ने टेटू पर एक्सपेरिमेंट किया तो कोई ड्रेस में लाइट लगाकर पहुंचा। - किसी के हाथ में छतरी थी तो कोई पगड़ी पहनकर मतवाला बन रहा था। - कोई बाजीराव मस्तानी तो कोई जोधा-अकबर की ड्रेस में गरबा कर रहा है। इसके अलावा एक्सेसरीज़ के साथ भी खूबसूरत एक्सपेरिमेंट्स किए गए थे।   ग्रुप में पहुंच दे रहे संदेश केसरिया ग्रुप : दिया शांति का संदेश केसरिया ग्रुप के सभी मेम्बर 11 साल से अभिव्यक्ति गरबा से जुड़े हैं। इसमें 22 मेंबर हैं। ग्रुप मेम्बर्स इस बार देश में शांति का संदेश देते हुए गरबा कर रहे हैं। मालवा का रास है ट्रेडिशनल इस ग्रुप में 20 मेंबर हैं। सभी मालवा की संस्कृति की थीम पर बने ड्रेसेस पहनकर गरबा कर रहे हैं। सभी मेंबर्स दराती और टोकनी लेकर गरबा पंडाल पहुंच रहे हैं।   माझा रजवाड़ी : कांच से तैयार की ड्रेसेस इस ग्रुप में 11 मेंबर हैं। इसके मेंबर खासतौर पर रजवाड़ी और ग्लास थीम के साथ गरबा कर रहे हैं। इस बार इन्होंने ड्रेस पर कांच का स्पेशल वर्क करवाया है। इसमें टोपी से लेकर कमरबंद तक तक ग्लास के चमक रहे हैं। एलईडी लाइट की पगड़ी और गुड़ियों से सजी ड्रेस राजस्थानी लिबास के साथ एक ही थीम पर २० लोगों का सज कर आया था। यह ग्रुप लहरिया, पिंकपांकी ग्रुप था इसके मेंबर एलईडी लाइट, सजावटी छतरियां, मशालें व मटकियां के साथ गरबा कर रहे थे। इसमें एक पार्टिसिपेंट ने एलईडी लाइट्स की पगड़ी पहन रखी थी। आगे की स्लाइड्स पर देखें गरबे की रंगत...

गरबे के इस रंग ने उड़ाए देखने वालों के होश, देखें, धमाल मचाने वाले 26 फोटोज

गरबे के इस रंग ने उड़ाए देखने वालों के होश, देखें, धमाल मचाने वाले 26 फोटोज

Last Updated: October 06 2016, 17:53 PM

इंदौर। अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव के दूसरे दिन उल्लास की ऊंची लहर, उमंग का ज्वार और भक्ति का गहरा भाव नजर आया। सुर और ताल पर थिरकते हजारों कदमों को निहारने मानों पूरा शहर उमड़ पड़ा हो। प्रतिभागियों ने पारंपरिक गरबों के साथ ही हिट नंबर्स पर गरबे किए।   - हाथों में मशाल और दिए लेकर प्रतिभागियों ने  महाआरती से  गरबों की शुरुआत की।   - स्वस्तिक, ओम और फूलों के आकार की सुंदर फॉर्मेशंस बनाकर उन्होंने कलात्मकता और भक्ति को अभिव्यक्त किया। - आरती के बाद जैसे ही सिम्फनी बैंड ने संस्कृत के श्लोक के साथ गरबे की ओजपूर्ण शुरुआत की, पंडाल प्रतिभागियों के उत्साह से गूंज उठा। - डिज़ाइनर्स ड्रेसेस और खूबसूरत एसेसरीज़ के साथ स्टाइलिश अंदाज़ में गरबे किए । - लडके लड़कियों ने अलग-अलग थीम की ड्रेसेस में  दो और तीन ताली के साथ ही हिच में उत्साह के साथ गरबे किए। - जनरल सर्कल में भी उत्साह और उमंग चरम पर दिखा। ट्रेनिंग लिए बिना भी उन्होंने शानदार गरबा किया।   ब्रेक मिलते ही लिया ज़ायकों का लुत्फ़ - अभिव्यक्ति में अलग-अलग शहरों के फेमस फूड आइटम के स्टॉल्स भी लगे हैं। - इसमें उपवास के खिचड़ी, बड़ा तो था ही साथ ही राजस्थानी ढाणी के तहत ठेठ स्वाद भी था। - गरबा करने और देखने आए लोग मौका मिलते ही फूड स्टॉल पर पहुंच गए। इन्होंने यहां छोले कुलछे और दिल्ली की चाट के साथ ही राजस्थानी और गुजराती खाने का लुत्फ उठाया।   आगे की स्लाइड्स पर देखें गरबे की धूम...            

कमर में मोबाइल दोस्तों संग सेल्फी, ऐसा चढ़ा चौथे दिन गरबे का रंग

कमर में मोबाइल दोस्तों संग सेल्फी, ऐसा चढ़ा चौथे दिन गरबे का रंग

Last Updated: October 06 2016, 17:52 PM

इंदौर।अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव के चौथे दिन आस्था और उत्साह अपने चरम पर है।गरबे के बीच सेल्फी का जादू भी लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। कमर में मोबाइल लगाकर गरबा कर रही लड़कियां ब्रेक होते ही सेल्फी लेने में जुट जाते हैं। उधर बैंड सिम्फनी गरबों के साथ-साथ डिजीटल इंडिया, क्लीन इंडिया, बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का संदेश भी दे रहा है। - मंगलवार की रात अभिव्यक्ति गरबा परिसर में कुछ अलग ही माहौल था। - महाआरती के बाद जैसे ही गरबों का दौर शुरू हुआ वैसे ही जनरल व पार्टिसिपेंट दोनों ही सर्कल में लड़के-लड़कियां थिरकने लगे। - सर्कल के बाहर खड़े कई लोग भी छोटे-छोटे ग्रुप बनाकर गरबा कर रहे थे। - गरबा करते समय लड़कों ने अपने मोबाइल जैकेट या कुर्ते की जेब में रख लिए तो लड़कियां कमर में मोबाइल खोंसकर गरबा कर रहीं थीं। - गरबे के साथ-साथ सेल्फी का दौर भी चल रहा था। प्रतिभागी मौका मिलते ही मोबाइल निकालकर सेल्फी लेते नजर आए। - कुछ तो हाथों-हाथ सोशल मीडिया पर सेल्फी शेयर भी कर रहे थे। - सर्कल के बाहर खड़े दर्शक भी गरबा कलाकारों के साथ सेल्फी लेते नजर आए। -अलग-अलग ड्रेसअप और मेकअप में आए कलाकारों के साथ बच्चों ने भी शौक से सेल्फी ली और फोटोज भी बनाए। आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करके देखें फोटोज ...

इस देवी मंदिर को धोनी से मिली पहचान, कई क्रिकेटर भी आ चुके हैं यहां

इस देवी मंदिर को धोनी से मिली पहचान, कई क्रिकेटर भी आ चुके हैं यहां

Last Updated: October 06 2016, 17:51 PM

रांची। महेंद्र सिंह धोनी अपने होम टाउन रांची जब भी आते हैं वो कहीं जाए ना जाए पर एक मंदिर में जरूर हाजिरी लगाते हैं। हम बात कर रहे हैं रांची स्थित सोलहभुजा मां दुर्गा के दिवड़ी मंदिर की। रांची से करीब 60 KM दूर रांची-टाटा हाइवे पर बना यह दिवड़ी मंदिर की आज पहचान देश-विदेश में है। धोनी के क्रिकेट टीम में आने से पहले कुछ ही लोग इसे जानते थे। 1 अक्टूबर से नवरात्र की शुरुआत हो रही है। इस मौके पर dainikbhaskar.com आपको बता रहा दिवड़ी मंदिर के बारे में। - धोनी अपने हर महत्वपूर्ण मैच से पहले यहां सोलहभुजा मां दुर्गा के दिवड़ी मंदिर जरूर आते हैं। भारतीय क्रिकेट में सिलेक्शन से पहले से ही धोनी यहां पूजा करने आते रहे हैं। - रांची-टाटा हाइवे पर स्थित यह मंदिर धोनी की श्रद्धा के कारण देश-विदेश्ा में प्रसिद्ध हो चुका है। -कहा जाता है कि मंदिर में स्थित सोलहभुजा मां दुर्गा ने धोनी और उनके परिवार की हर कदम पर सहायता की है। -धोनी साक्षी के साथ शादी करने के बाद आशीर्वाद लेने इस मंदिर में आए थे। इसके बाद से इस मंदिर की चर्चा पूरे देश में होने लगी। कई क्रिकेटर आ चुके हैं यहां - रांची के दिवड़ी मंदिर में बड़े-बड़े खिलाड़ी आ चुके हैं। कुछ सालों पहले तक इस मंदिर को आसपास रहने वाले लोग ही जानते थे। - लेकिन भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के बार-बार यहां पहुंचने से यह मंदिर काफी प्रसिद्ध हो गया। - यहां इंडियन क्रिकेट टीम के हरभजन सिंह, शिखर धवन व उनकी पत्नी आयशा और बिहार के एक्स सीएम लालू प्रसाद यादव भी मां के दर्शन के लिए आ चुके हैं। आगे की स्लाइड्स में देखिए धोनी और दिवड़ी मंदिर से जुड़ी कुछ चुनिंदा फोटोज...

यहां फायरिंग कर माता को दी जाती है सलामी, राॅकेट लांचर की भी होती है पूजा

यहां फायरिंग कर माता को दी जाती है सलामी, राॅकेट लांचर की भी होती है पूजा

Last Updated: October 06 2016, 17:50 PM

रांची। झारखंड आर्म्ड पुलिस (जैप-वन) में नवरात्र पूजा का इतिहास काफी पुराना है। अंग्रेजों के जमाने से यानी 1880 से ही यहां पर मां का दरबार सज रहा है। इस पूजा की खासियत यह भी है कि मां को जैप के जवान शस्त्रों से सलामी देते हैं और फायरिंग करते हैं। नवरात्रि में यहां पिस्टल, यूबीजीएल, राकेट लांचर, इंसास, एके-47, एसएलआर, मशीन गन, एलएमजी, मोर्टार, गोला-बारूद व गोलियों की भी पूजा की जाती है। कलश के रूप में होती है पूजा... - कहा जाता है कि आजाजी से पहले यहां प्रतिमा स्थापित करने की कोशिश की गई। लेकिन हर ये नाकाम रही। जिन जवानों ने कोशिश की उनकी किसी न किसी वजह से मौत हो गई। -उनके घर के लोग बीमार होने लगे। इसके बाद सबने तय किया कि अब प्रतिमा नहीं बल्कि कलश के रूप में नवदुर्गा की पूजा होगी। -तब से लेकर आज तक कलश में ही मां नवदुर्गा विराजतीं हैं और भक्त बड़े ही उत्साह से मां की अराधना करते हैं। मंदिर में एक बड़ा-सा कलश रखा जाता है, जिसे चुनरी से सजाते हैं। -यहां पूरे नौ दिन तक मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। -पुलिस मेंस एसोसिएशन जैप-वन के महासचिव शशिकांत क्षेत्री ने बताया कि हमलोग शक्ति की पूजा करते हैं। इसलिए शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए फायरिंग करते हैं। -वे बताते हैं कि पहले इस बटालियन का नाम था न्यू रिजर्व फोर्स, जिसमें गोरखा जवान ही शामिल थे। बाद में इनका नाम गोरखा मिलिट्री और फिर बिहार मिलिट्री और राज्य बनने के बाद जैप-वन रखा गया। -शशिकांत क्षेत्री ने कहा कि महानवमी के दिन जैप-वन के शस्त्रागार में रखे गए हथियारों की पूजा-अर्चना की जाती है। -उनके अनुसार इन हथियारों से हम दुश्मनों से लड़ते हैं और मां के आशीष से जवानों को शक्ति मिलती है। इसलिए पूजा जरूरी है। फूलपाती यात्रा में फायरिंग के बीच नौ पेड़ों की पूजा -महासप्तमी के दिन भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है। इसे फूलपाती यात्रा कहा जाता है। इसमें सबसे आगे नव कन्याएं चलती हैं और पीछे-पीछे भक्तों का हुजूम। -आकर्षण का केंद्र होता है रास्ते में मिलने वाले नौ पेड़ों की पूजा। इन पेड़ों की व्रतधारी महिलाएं पूजन करती हैं और जवान फायरिंग करते हैं, सलामी देते हैं। आगे की स्लाइड्स में देखिए फोटोज... फोटो: पुष्पगीत।

गरबे की आखिरी रात सब भूल ऐसे थिरके लोग, आप भी देखें इस खुमारी को

गरबे की आखिरी रात सब भूल ऐसे थिरके लोग, आप भी देखें इस खुमारी को

Last Updated: October 06 2016, 17:50 PM

इंदौर। बुधवार यानी अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव की आखिरी रात यहां कुछ खास नजर आया। यहां गुजरात ही नहीं, देशभर का कल्चर दिखाई दिया। कंटेंस्टेंट्स ने कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी, गुजरात से गुवाहाटी औरअरुणाचल से हिमाचल तक देश के हर कोने की वेशभूषा, आभूषण और संस्कृति के रंग बिखेरे। - गुजराती स्कूल में आखिरी रात पार्टिसिपेंट्स और जनरल सर्कल में गरबे करने वालों का हुजूम उमड़ पता। - बैंड सिम्फनी के गायक-गायिकाओं के गरबों पर पार्टिसिपेंट्स ने पारंपरिक गरबा नृत्य और बॉलीवुड डांस के फ्यूज़न के साथ गरबे किए। - अभिव्यक्ति गरबा के दिन जैसे-जैसे बीतते गए। गरबा प्रेमियों का अंदाज भी बदलता गया। - इस बार प्रतिभागियों के साथ ही आम लोग भी अलग दिखने के लिए तरह-तरह के जतन कर पंडाल पहुंचे। - प्रतिभागी कत्थककली और मणिपुरी नृत्य की कॉस्ट्यूम में गरबा करने पहुंचे। - इस महोत्सव में पार्टिसिपेंट्स ने ड्रेेसेस, एसेसरीज़ और हेयर स्टाइल्स से लेकर मेकअप में यूनिक एक्सपेरिमेंट्स भी किए। - इस बार एलईडी लाइट्स के प्रति पार्टिसिपेंट्स में खासा क्रेज़ रहा। इसमें डिफरेंट पगड़ियों, कलश से लेकर सिर पर रखी टोकरियों कलरफुल एलईडी लाइट्स थी। -45 हज़ार स्क्वेयर फीट के मैदान पर अभिव्यक्ति सर्कल में 4 हजार पार्टिसिपेंट्स ने 5 दिनों तक गरबा किया। - 800 हेलोजन की दूधिया रोशनी और 40 हज़ार वॉट के म्यूज़िक सिस्टम पर पार्टिसिपेंट्स ने स्टाइलिश गरबे कर मां के प्रति भक्ति भाव प्रकट किया। - सिम्फनी बैंड की धुनों पर पार्टिसिपेंट्स ने एकल, कपल और सामूहिक गरबों में अपनी यूनिक स्टाइल में गरबे किए। इसमें गरबे बॉलीवुड डांस का फ्यू़ज़न था। आगे की स्लाइड्स पर देखें गरबा महोत्सव के फोटोज...

यहां होती है बिना सिर वाली देवी की पूजा, मन्नत पूरी करने के लिए बांधते हैं पत्थर

यहां होती है बिना सिर वाली देवी की पूजा, मन्नत पूरी करने के लिए बांधते हैं पत्थर

Last Updated: October 06 2016, 17:50 PM

रामगढ़। यहां के रजरप्पा, जिसे छिन्नमस्तिका मंदिर के नाम से भी जानते हैं। असम में कामाख्या मंदिर के बाद इसे दूसरे तीर्थस्थल के रूप में भी माना जाता है। मंदिर के अंदर जो देवी काली की प्रतिमा है, उसमें उनके दाएं हाथ में तलवार और बाएं हाथ में अपना ही कटा हुआ सिर है। मां के मंदिर में मन्नतें मांगने के लिए लोग लाल धागे में पत्थर बांधकर पेड़ या त्रिशूल में लटकाते हैं। इसीलिए नाम पड़ा छिन्नमस्तिका... - पौराणिक कथाओं के मुताबिक, कहा जाता है कि एक बार मां भवानी अपनी दो सहेलियों के साथ मंदाकिनी नदी में स्नान करने आई थीं। -स्नान करने के बाद सहेलियों को इतनी तेज भूख लगी कि भूख से बेहाल उनका रंग काला पड़ने लगा। उन्होंने माता से भोजन मांगा। माता ने थोड़ा सब्र करने के लिए कहा, लेकिन वे भूख से तड़पने लगीं। - सहेलियों ने माता से कहा, हे माता। जब बच्चों को भूख लगती है तो मां अपने हर काम भूलकर उसे भोजन कराती है। आप ऐसा क्यों नहीं करतीं। - यह बात सुनते ही मां भवानी ने खड्ग से अपना सिर काट दिया, कटा हुआ सिर उनके बाएं हाथ में आ गिरा और खून की तीन धाराएं बह निकलीं। - सिर से निकली दो धाराओं को उन्होंने अपनी सहेलियों की ओर बहा दिया। बाकी को खुद पीने लगीं। तभी से मां के इस रूप को छिन्नमस्तिका नाम से पूजा जाने लगा। रात में मां करती है यहां विचरण! - यहां प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में साधु, माहत्मा और श्रद्धालु नवरात्रि में शामिल होने के लिए आते हैं। 13 हवन कुंडों में विशेष अनुष्ठान कर सिद्धि की प्राप्ति करते हैं। - रजरप्पा जंगलों से घिरा हुआ है। जहां दामोदर व भैरवी नदी का संगम भी है। शाम होते ही पूरे इलाके में सन्नाटा पसर जाता है। लोगों का मानना है कि मां छिन्नमिस्तके यहां रात्रि में विचरण करती है। - इसलिए एकांत वास में साधक तंत्र-मंत्र की सिद्धि प्राप्ति में जुटे रहते हैं। दुर्गा पूजा के मौके पर आसाम, पश्चिम बंगाल, बिहार, छत्तिसगढ़, ओड़िशा, मध्य प्रदेश, यूपी समेत कई प्रदेशों से साधक यहां जुटते हैं। मां छिन्नमस्तिके की विशेष पूजा अर्चना कर साधना में लीन रहते हैं। लाल धागे में पत्थर बांधकर लटकाते हैं पेड़ पर - प्रतिमा में माता की तीन आंखें दिखती हैं। उनके गले में सर्प माला और मुंडमाला, दोनों सुसज्जित है। बाल खुले हैं, जिह्वा बाहर की ओर निकली है। -आभूषणों से सजी मां के दाएं हाथ में तलवार और बाएं में उनका अपना ही मस्तक है। इनके दोनों ओर डाकिनी और शाकिन खड़ी हैं, जिन्हें वह रक्त पान करा रही हैं और स्वयं भी ऐसा कर रही हैं। -मुख्य मंदिर में काले पत्थर की देवी की प्रतिमा है। मां के मंदिर में मन्नतें मांगने के लिए लोग लाल धागे में पत्थर बांधकर पेड़ या त्रिशूल में लटकाते हैं। -मन्नत पूरी हो जाने पर उन पत्थरों को दामोदर नदी में प्रवाहित करने की परंपरा है। यहां दामोदर और भैरवी नदी है। कहते हैं, यहां नहाने से चर्म रोग दूर हो जाते हैं। आगे की स्लाइड्स में पढ़िए देखिए संबंधित फोटोज...

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