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PoK से RAW के 3 संदिग्ध एजेंट अरेस्ट, एंटी-टेररिस्ट एक्ट के तहत केस दर्ज: PAK

PoK से RAW के 3 संदिग्ध एजेंट अरेस्ट, एंटी-टेररिस्ट एक्ट के तहत केस दर्ज: PAK

Last Updated: April 15 2017, 13:48 PM

नई दिल्ली/इस्लामाबाद. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके ) की पुलिस ने रॉ के 3 संदिग्ध एजेंटों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। पाकिस्तान मीडिया की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। इसमें कहा गया है कि अरेस्ट किए शख्स पाक विरोधी गतिविधियों में शामिल थे। इनके खिलाफ एंटी टेररिज्म एक्ट (ATA) और एक्सप्लोसिव्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। मीडिया के सामने पेश किया गया... - न्यूज एजेंसी के मुताबिक पाकिस्तान के न्यूजपेपर डॉन ने शनिवार को अपनी एक रिपोर्ट में रॉ एजेंटों की गिरफ्तारी की बात कही है। इसमें यह भी बताया गया है कि इन एजेंटों को रावलकोट में मीडिया के सामने पेश किया गया। तीनों शख्स पीओके के अब्बासपुर में तरोटी गांव के रहने वाले हैं। इनके नाम मोहम्मद खलील, इम्तियाज और राशिद हैं। - बता दें कि पाकिस्तान ने इंडियन सिटिजन कुलभूषण जाधव पर जासूसी का आरोप लगाकर उसे फांसी की सजा सुनाई है। इस मामले को लेकर दोनों देशों के संबंधों में पहले से तनाव है। भारत ने आरोपों को नकारते हुए कहा है कि जाधव ईमानदार भारतीय है, उन्हें अगवा कर पाक ले जाया गया था, उनको फांसी दी गई तो इसे हत्या माना जाएगा। धमाके में शामिल होने का आरोप - मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पुंछ के DSP (डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस) साजिद इमरान ने कहा कि प्रमुख संदिग्ध खलील नवंबर 2014 में कश्मीर अपने एक रिश्तेदार के घर आया था, वहीं वह रॉ ऑफिशियल्स के कॉन्टैक्ट में आया। - DSP इमरान के मुताबिक तीनों संदिग्ध सितंबर में अब्बासपुर में एक पुलिस स्टेशन के बाहर हुए एक बम धमाके में शामिल थे। उन्होंने ही वहां IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) प्लांट किया था। डीएसपी ने दावा किया कि खलील को इस टास्क के लिए 5 लाख रुपए की पेशकश की गई थी। CPEC प्रोजेक्ट को टारगेट करने का मिला था जिम्मा - डीएसपी इमरान ने बताया कि खलील के पास से पुलों, देवबंदी स्कूल के तहत आने वाली मस्जिदों, आर्मी और पुलिस के दफ्तरों की फोटो बरामद हुई हैं। उससे 2 एक्टिव सिम भी मिले हैं। पुलिस पुंछ डिवीजन के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल चौधरी सज्जाद ने कहा, रॉ ने तीनों शख्स को कम्बाइन्ड मिलिट्री हॉस्पिटल्स (CMHs), CPEC (चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर) से जुड़े प्रोजेक्ट्स, चीन के इंजीनियरों और सेंसिटिव लोकेशंस को टारगेट करने का जिम्मा सौंपा था। लोकल शख्स ने तीनों को देखा था - मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एक लोकल शख्स ने तीनों संदिग्धों को ब्लास्ट से पहले की रात 26 सितंबर को मौके पर देखा था। तीनों शॉपिंग बैग लिए हुए थे। इसके बाद ही पुलिस को धमाके में तीन लोगों का हाथ होने का पता चला।

POK भी हमारा, भारत अपने किसी हिस्से को छोड़ने वाला नहीं है: सुषमा

POK भी हमारा, भारत अपने किसी हिस्से को छोड़ने वाला नहीं है: सुषमा

Last Updated: April 05 2017, 17:49 PM

नई दिल्ली. सुषमा स्वराज ने बुधवार को संसद में कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर यानी पीओके भी भारत का ही हिस्सा है। फॉरेन मिनिस्टर ने एक सवाल के जवाब में कहा कि भारत अपने हक वाली किसी भी जगह को छोड़ने वाला नहीं है। बता दें कि पाकिस्तान ने पिछले दिनों गिलगिट-बाल्टिस्तान के विवादित इलाके को अपना पांचवा प्रॉविंस बनाने की बात कही थी। भारत ने इस पर सख्त आपत्ति दर्ज कराई थी। और क्या कहा सुषमा ने... - लोकसभा में बुधवार को बीजू जनता दल के भतृहरि माहताब ने सरकार से जानना चाहा कि पाकिस्तान गिलगित-बाल्टिस्तान को पांचवा प्रॉविंस डिक्लेयर करने की तैयारी कर रहा है। सरकार पर इसका क्या रुख है? कुछ विदेशी सरकारों ने पाकिस्तान के इस रवैये को गलत बताया है? - इस पर सुषमा स्वराज ने कहा, जैसे ही मामला सामने आया, भारत सरकार ने पहले दिन ही विरोध दर्ज कराया। इस सरकार पर ये शक करना ही गलत है कि हम अपने हिस्से को किसी दूसरे देश के हाथों में जाने देंगे। - स्वराज ने कहा कि संसद पहले ही पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान मुद्दे पर रिजोल्यूशन पास कर चुकी है। पाकिस्तान का इन दोनों इलाकों पर कब्जा पूरी तरह से गैर कानूनी है। उन्होंने कहा कि बीजेपी के फाउंडर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने तो इसके लिए बलिदान भी दिया था। कहां से उठा मामला? - नवाज शरीफ सरकार में मंत्री रियाज हुसैन पीरजादा ने पिछले महीने जियो टीवी; को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि पाकिस्तान गिलगिट-बाल्टिस्तान को पांचवे प्रॉविंस का दर्जा दे सकता है। बता दें कि ये क्षेत्र वास्तव में पीओके का हिस्सा है और इसकी बॉर्डर भारत से लगती है। - पीरजादा ने ये भी कहा कि नवाज के फॉरेन एडवाइजर सरताज अजीज की लीडरशिप में एक टीम इस मसले की जांच के लिए बनाई गई थी। उसने भी अपनी रिपोर्ट में गिलगित-बाल्टिस्तान को प्रॉविंस का दर्जा देने की सिफारिश की है। - मिनिस्टर ने कहा कि अगर पाकिस्तान ऐसा करता है तो इसके लिए संविधान में बदलाव करने होंगे। इस हरकत की वजह क्या? - अब सवाल ये है कि पाकिस्तान आखिर ऐसा क्यों करना चाहता है। इसके पीछे बड़ी वजह चीन को खुश करना है। - दरअसल, चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) इसी इलाके से गुजरने वाला है। चूंकि, ये विवादित इलाका है, इसलिए चीन चाहता है कि CPEC के तैयार होने के पहले इसके तमाम कानूनी पहलू पूरे कर लिए जाएं। - पाकिस्तान में अभी चार प्रॉविंस बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, पंजाब और सिंध हैं। अगर गिलगित-बाल्टिस्तान को भी ये दर्जा दिया जाता है तो ये पांचवा प्रॉविंस बन जाएगा। - भारत के लिए दिक्कत ये होगी कि पाकिस्तान कानूनी तौर पर इस इलाके पर अपना दावा पुख्ता कर पाएगा और चीनी आर्मी की यहां मौजूदगी भी हो जाएगी।

CPEC को कॉम्पिटीशन की तरह देखता है भारत, छोटी सोच छोड़े: चीनी मीडिया

CPEC को कॉम्पिटीशन की तरह देखता है भारत, छोटी सोच छोड़े: चीनी मीडिया

Last Updated: March 30 2017, 17:40 PM

नई दिल्ली. चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) को लेकर चीनी मीडिया ने कहा है कि भारत इसे जियोपॉलिटिकल कॉम्पिटीशन के तौर पर देखता है। इसीलिए कश्मीर का गैर-जरूरी बहाना बनाकर विरोध कर रहा है। नई दिल्ली को इस छोटी सोच से बाहर निकलना चाहिए। बता दें कि चीन बीजिंग में सिल्क रोड समिट ऑर्गनाइज करने वाला है। इसके लिए भारत समेत 20 देशों को इनविटेशन दिया है। पिछले दिनों भारत ने इसमें शामिल होने को लेकर चीन से कहा था कि प्रोजेक्ट PoK से गुजर रहा है, जो भारत की सॉवरनिटी का वॉयलेशन है। बताएं कैसे हम इसमें शामिल हो सकते हैं। कॉरिडोर से भारत को मजबूती मिलेगी... - चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, हमारी सरकार ने भारत के सामने रोड प्रोजेक्ट को कश्मीर से निकाले जाने का डिजाइन रखा था। लेकिन बहाना बनाकर इसे रिजेक्ट कर दिया गया। यह हमारे अहम प्रोजेक्ट में शामिल है, जिसे बदला नहीं जा सकता है। - अखबार ने क्रिटिसाइज करते हुए लिखा कि, भारत करोड़ों के सिल्क रोड प्रोजेक्ट को जियोपॉलिटिकल कॉम्पिटीशन के तौर पर देखता है। जबकि यह प्रोजेक्ट चीन को साउथ एशिया में मजबूत बनाएगा। नई दिल्ली को इस प्रोजेक्ट को ज्वाइन करना चाहिए। ऐसा करके भारत खुद की मदद कर सकेगा। अगर भारत ने अपनी सोच बदली तो वह दुनिया में अपना अलग स्थान बना लेगा। चीन का दावा- 20 देशों के डेलिगेट्स शामिल होंगे - चीन के विदेश मंत्री वांग यी के मुताबिक, समिट में रूस, इंडोनेशिया और पाकिस्तान समेत 20 देशों से डिलिगेट्स शामिल होंगे। इसके अलावा 50 इंटरनेशनल लीडर समेत कुल 1200 लोग इसमें हिस्सा लेंगे। - चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग ने कुछ वक्त पहले अरबों डॉलर की वन बेल्ट वन रोड (OBOR) को लॉन्च किया था। उन्होंने इसे सिल्क रोड कनेक्टिविटी का नाम दिया था। बीजिंग यह समिट मई में करने जा रहा है। चीन से पूछा था- कैसे शामिल हो जाएं? - फरवरी में फॉरेन सेक्रेटरी एस. जयशंकर ने चीन से कहा था, नई दिल्ली इस साल बीजिंग में होने वाले सिल्क रोड समिट में कैसे शामिल हो सकता है। 46 बिलियन डॉलर का कॉरिडोर PoK से गुजर रहा है, जो भारत की सॉवरनिटी का वॉयलेशन है। आपको पहले इसका जवाब देना चाहिए। हम देखना चाहते हैं कि चीन के पास इस मामले में क्या प्रपोजल है। हमने अपनी चिंताएं उनके सामने रखी हैं और हम इसे पब्लिक भी कर रहे हैं। भारत सिल्क रोड कनेक्टिविटी का सपोर्टर - फरवरी में जयशंकर ने कहा, हमने चीन को बता दिया है कि भारत इस तरह की कनेक्टिविटी (सिल्क रोड) को सपोर्ट करता है। हमने सभी तरफ से कनेक्टिविटी बढ़ाने की पहल की है। हम इनमें से ज्यादातर में एक्टिव पार्टिसिपेंट रहे हैं। - जयशंकर ने म्यामांर के कालादान प्रोजेक्ट, ईरान के साथ चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट और रूस के साथ नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर का जिक्र किया, जिनका भारत हिस्सा है।

गिलगित-बाल्तिस्तान जम्मू-कश्मीर का हिस्सा, इस पर PAK का कब्जा गैरकानूनी: UK

गिलगित-बाल्तिस्तान जम्मू-कश्मीर का हिस्सा, इस पर PAK का कब्जा गैरकानूनी: UK

Last Updated: March 25 2017, 15:44 PM

नई दिल्ली/लंदन. ब्रिटिश पार्लियामेंट ने एक प्रस्ताव पास कर गिलगित-बाल्तिस्तान पर पाकिस्तान के कब्जे को गैरकानूनी करार दिया है। प्रस्ताव में इसे पाकिस्तान द्वारा अपना 5वां प्रोविन्स घोषित करने की तैयारी की भी आलोचना की गई है। पार्लियामेंट ने कहा है, गिलगित-बाल्तिस्तान भारत के जम्मू-कश्मीर का लीगल और कॉन्स्टिट्यूशनल पार्ट है। लोगों को फंडामेंटल राइट्स से महरूम कर रखा है पाक ने... - न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ब्रिटिश पार्लियामेंट में इस प्रस्ताव को 23 मार्च को पेश किया गया। कंजरवेटिव पार्टी के लीडर बॉब ब्लैकमैन ने इसका सपोर्ट करते हुए कहा, पाकिस्तान गिलगित-बाल्तिस्तान को 5वां प्रोविन्स घोषित करने की तैयारी कर पहले से विवादित एरिया को अपने में शामिल करने की कोशिश कर रहा है। जबकि उसने इस पर 1947 से गैरकानूनी ढंग से कब्जा कर रखा है। - प्रस्ताव में साफ तौर पर कहा गया है - पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्तिस्तान के लोगों को उनके फंडामेंटल राइट्स और राइट ऑफ फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन से महरूम कर रखा है। प्रस्ताव में और क्या? - ब्रिटिश पार्लियामेंट ने प्रस्ताव में यह भी कहा है कि गिलगित-बाल्तिस्तान की डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) में बदलाव की कोशिश को स्टेट ऑब्जेक्ट ऑर्डिनेंस का वॉयलेशन माना जाएगा। चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत वहां किसी भी कंस्ट्रक्शन को विवादित एरिया में हस्तक्षेप समझा जाएगा। ये हैं पाक के 4 प्रोविन्स - बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, पंजाब और सिंध पाकिस्तान के 4 प्रोविन्स हैं। पाकिस्तान में गिलगित-बाल्तिस्तान को एक अलग ज्योग्राफिक रीजन माना जाता है। वहां असेंबली और एक चुना हुआ सीएम भी है। पीएम नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज की अगुआई वाली कमेटी ने गिलगित-बाल्तिस्तान को 5वां प्रोविन्स घोषित करने का प्रस्ताव रखा है। भारत का क्या कहना है? - भारत के केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा था, पीओके और गिलगित-बाल्तिस्तान पर पाकिस्तान का कब्जा गैरकानूनी है। भारत की मांग है कि पाकिस्तान इन इलाकों को खाली कर दे। आज अगर दोनों देशों के बीच जम्मू और कश्मीर को लेकर कोई विवाद है तो वह सिर्फ पीओके और गिलगित-बाल्तिस्तान पाकिस्तान का अवैध कब्जा है। इन्हें किस तरह पाकिस्तान के कब्जे से मुक्त करा कर इंडियन डेमोक्रेसी का हिस्सा बनाया जाए, सिर्फ यही एक मुद्दा है। - सिंह ने कहा था, इस बारे में कई साल से भारत की स्थिति बेहद साफ रही है। इस बारे में 1994 में संसद में एक प्रस्ताव पास किया गया था, जिसका सभी राजनीतिक दलों ने सपोर्ट भी किया था। नई दिल्ली के लिए चिंता की वजह - 51.5 अरब डॉलर की कॉस्ट से बनने वाला चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) गिलगित-बाल्तिस्तान से होकर गुजरेगा। माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने यह कदम चीन की चिंताओं को देखते हुए उठाया है। पाक को इस क्षेत्र का दर्जा बदलने के लिए कॉन्स्टिट्यूशन में अमेंडमेंट करना होगा। - चूंकि यह इलाका पाकिस्तान के कब्जे वाले पीओके से सटा हुआ है, ऐसे में भारत के लिए पाकिस्तान का यह कदम चिंता की बड़ी वजह है। भारत CPEC प्रॉजेक्ट पर भी कई बार एतराज जता चुका है। नई दिल्ली ने कहा है कि यह कॉरिडोर पीओके और गिलगित-बाल्तिस्तान से गुजरने के चलते भारत की सॉवरनिटी का वॉयलेशन है। चीन का क्या कहना है? - चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन ने कहा है कि बीजिंग इस्लामाबाद के साथ इस मुद्दे पर काम करने को तैयार है कि CPEC का किस तरह दोनों देशों (भारत-पाक) के लोग फायदा उठा सकें।

एक पहाड़ जो बना है सिर्फ कब्र से, यहां अकेले जाने से डरते हैं लोग

एक पहाड़ जो बना है सिर्फ कब्र से, यहां अकेले जाने से डरते हैं लोग

Last Updated: March 20 2017, 10:48 AM

दुनियाभर में कई ऐसी अजीबोगरीब जगहें हैं, जिनके बारे में जानकर हैरानी होती है। ऐसी ही एक अजीब जगह हांगकांग में है। यहां पर एक ऐसा पहाड़ है, जिसके बारे में जानकर आप वहां जाने के बारे में सोचेंगे भी नहीं, क्योंकि यह पहाड़ इंसानों की कब्र से मिलकर बना है। कैसे बना इंसानों की कब्र से पहाड़... हांगकांग के पश्चिमी इलाके में पोख फू लाम नाम की एक जगह है, जिसके पास एक पहाड़ है। इस पहाड़ पर दूर दूर तक कब्र ही कब्र दिखाई देती है। दरअसल, यह पहाड़ कई कब्रो से मिलकर बना हुआ है। इस पहाड़ पर कई लाशों को दफन किया गया है। यहां पर अगर एक कब्र से दूसरी कब्र तक जाना होता है तो लोगों को सीढ़ियों का प्रयोग करना होता है। हालांकि, अकेले जाने की हिम्मत कम लोग ही जुटा पाते हैं। बता दें की इस स्थान को 1882 में बनाया गया था, तब से यहां पर कई लाशें दफनाई गई हैं। इसे पहले चाइनीज क्रिश्चियन सिमिट्री भी कहा जाता था। जब से यह सिलसिला शुरू हुआ है तब से आज तक खत्म नहीं हो पाया है। लोग आज भी इसी पर लाशें दफनाते हैं और यह कब्रों का पहाड़ और बढ़ता ही जा रहा है। आगे की स्लाइड्स में देखें इससे जुड़े कुछ और फोटोज...

भारत पर हमलों की तैयारी में थे आतंकी, तभी हमने LoC पार सर्जिकल स्ट्राइक की: सरकार

भारत पर हमलों की तैयारी में थे आतंकी, तभी हमने LoC पार सर्जिकल स्ट्राइक की: सरकार

Last Updated: March 17 2017, 19:51 PM

नई दिल्ली. PoK में टेररिस्ट भारत में हमले के लिए तैयार बैठे थे, इस बात के पुख्ता सबूत मिलने के बाद इंडियन आर्मी ने LoC पार सर्जिकल स्ट्राइक की। केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री सुभाष भामरे ने शुक्रवार को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत के पास इन हमलों के बारे में स्पेसिफिक इंटेलिजेंस इनपुट था। उन्होंने कहा, सर्जिकल स्ट्राइक को बखूबी अंजाम दिया गया। इस ऑपरेशन में सभी दुश्मन टारगेट खत्म कर दिए गए। हमारे जवानों को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचा। बता दें कि 18 सितंबर 2016 को हुए उड़ी अटैक के 10 दिन बाद 28 और 29 सितंबर की दरमियानी रात इंडियन आर्मी ने LoC पारकर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। इसमें 40 से ज्यादा टेररिस्ट सेना ने मार गिराए थे। और क्या कहा रक्षा राज्यमंत्री ने... क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म और प्रॉक्सी वार में हमें घसीटा गया - सुभाष भामरे ने कहा, हम हमेशा ही अपने पड़ोिसयों के साथ शांति चाहते हैं। लेकिन, पिछले कई सालों से हमें जबरन क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म, प्रॉक्सी वार में घसीटा गया। हमारी सेनाएं बाहरी और अंदरूनी खतरों से देश की रक्षा करने के लिए तैयार हैं। किसी भी चुनौती का सामना करने को आर्मी तैयार - भामरे बोले, इंडिया आर्मी दुनिया की शानदार सेनाओं में से एक है। हमारी आर्मी किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान भी आर्मी ने क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म का सामना किया। PoK के लॉन्च पैड्स में टेररिस्ट टीम तैयार थी - जब हमें इस बारे में पुख्ता सुबूत मिले कि PoK के लॉन्च पैड्स पर कुछ टेररिस्ट टीमें इंडिया में हमले के लिए तैयार हैं। इसके बाद हमने सर्जिकल स्ट्राइक की। इन टेररिस्ट और उन्हें सपोर्ट करने वालों को खत्म कर दिया गया। 15 हमलों में शहीद हुए 68 जवान, 449 बार सीज फायर वॉयलेशन - सरकार ने संसद में यह भी बताया कि पिछले साल आर्मी पर 15 हमले किए गए। इस दौरान 68 जवान शहीद हुए। इस दौरान रिकॉर्ड 449 बार सीजफायर वॉयलेशन हुआ। 27 बार घुसपैठ की कोशिश की गई, इस दौरान 37 टेररिस्ट मारे गए। 2017 में 30 बार सीज फायर वॉयलेशन हुआ, घुसपैठ की 6 बार कोशिश की गई। सियाचिन बड़ा मसला, 13 बार बात हुई - भारत ने शुक्रवार को संसद में यह साफ कर दिया कि सियाचिन मुद्दा बड़ी समस्या है और इसमें PAK की ओर से टेररिज्म को किया जाने वाला सपोर्ट भी शामिल है। - सुभाष भामरे ने कहा, इस मसले को सुलझआने के लिए दोनों देशों के डिफेंस सेक्रेटरीज के बीच 13 बार बातचीत हो चुकी है। दुनिया के सबसे ऊंचे बैटल फील्ड पर भारत ने खतरे, जमीनी हालात और ऑपरेशन के नजरिए से पर्याप्त फोर्स तैनात कर रखी है। सियाचिन में निगरानी के लिए मॉडर्न टैक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें अनमैन्ड एरियल व्हीकल और रडार से निगरानी भी शामिल है।

गिलगित-बाल्टिस्तान विवादित इलाका, प्रॉविंस के तौर पर बिल्कुल मंजूर नहीं: भारत

गिलगित-बाल्टिस्तान विवादित इलाका, प्रॉविंस के तौर पर बिल्कुल मंजूर नहीं: भारत

Last Updated: March 16 2017, 19:44 PM

नई दिल्ली. भारत ने गुरुवार को दो टूक शब्दों में कहा कि गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान पांचवे प्रॉविंस का दर्जा देने की कोशिश ना करे, क्योंकि ये पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का विवादित इलाका है। फॉरेन मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन गोपाल बागले ने यह बयान उन मीडिया रिपोर्टस पर रिएक्शन के तौर पर दिया जिनमें कहा गया था कि पाकिस्तान चीन को खुश करने के लिए गिलगित-बाल्टिस्तान को पांचवे प्रॉविंस का दर्जा दे सकता है। भारत ने और क्या कहा..... - बता दें कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि नवाज शरीफ ने फॉरेन अफेयर्स एडवाइजर सरताज अजीज की चेयरमैनशिप में एक कमेटी बनाई है जो गिलगित-बाल्टिस्तान को लेकर रिकमंडेशंस देगी। - गोपाल बागले ने कहा- इस तरह का कोई भी कदम जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे को छुपाने की कोशिश होगी। पाकिस्तान को इन हिस्सों को फौरन खाली करना चाहिए। ये भारत का हिस्सा है। भारत, पाकिस्तान के ऐसे किसी कदम को मंजूरी नहीं दे सकता। - स्पोक्सपर्सन ने कहा कि पाकिस्तान 70 साल से गिलगित और बाल्टिस्तान के लोगों पर जुल्म कर रहा है। क्या है मामला? - बुधवार को कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में नवाज शरीफ के मंत्री रियाज पीरजादा के हवाले से खबर आई कि चीन को खुश करने के लिए पाकिस्तान अपने विवादित इलाके गिलगित-बाल्टिस्तान को पांचवे प्रॉविंस का दर्जा दे सकता है। -पीरजादा ने जियो टीवी; को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान गिलगिट-बाल्टिस्तान को पांचवे प्रॉविंस का दर्जा दे सकता है। बता दें कि ये क्षेत्र वास्तव में पीओके का हिस्सा है और इसकी बॉर्डर भारत से लगती है। - पीरजादा ने ये भी कहा कि नवाज के फॉरेन एडवाइजर सरताज अजीज की लीडरशिप में एक टीम इस मसले की जांच के लिए बनाई गई थी। उसने भी अपनी रिपोर्ट में गिलगित-बाल्टिस्तान को प्रॉविंस का दर्जा देने की सिफारिश की है। - मिनिस्टर ने कहा कि अगर पाकिस्तान ऐसा करता है तो इसके लिए संविधान में बदलाव करने होंगे। इस हरकत की वजह क्या? - अब सवाल ये है कि पाकिस्तान आखिर ऐसा क्यों करना चाहता है। इसके पीछे बड़ी वजह चीन को खुश करना है। - दरअसल, चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) इसी इलाके से गुजरने वाला है। चूंकि, ये विवादित इलाका है, इसलिए चीन चाहता है कि CPEC के तैयार होने के पहले इसके तमाम कानूनी पहलू पूरे कर लिए जाएं। - पाकिस्तान में अभी चार प्रॉविंस बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, पंजाब और सिंध हैं। अगर गिलगित-बाल्टिस्तान को भी ये दर्जा दिया जाता है तो ये पांचवा प्रॉविंस बन जाएगा। - भारत के लिए दिक्कत ये होगी कि पाकिस्तान कानूनी तौर पर इस इलाके पर अपना दावा पुख्ता कर पाएगा और चीनी आर्मी की यहां मौजूदगी भी हो जाएगी।

आपके मुल्क में कभी माइनॉरिटी PM-प्रेसिडेंट, क्रिकेट कैप्टन रहा? भारत ने PAK से पूछा

आपके मुल्क में कभी माइनॉरिटी PM-प्रेसिडेंट, क्रिकेट कैप्टन रहा? भारत ने PAK से पूछा

Last Updated: March 16 2017, 09:15 AM

जिनेवा/नई दिल्ली. भारत ने पाकिस्तान से कहा है कि वह उसके खिलाफ जबर्दस्ती की दुश्मनी वाला माहौल खत्म करे और कश्मीर से अपना कब्जा हटा ले। भारत ने बुधवार को जिनेवा में यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स काउंसिल के एक सेशन में कहा- पाकिस्तान दुनियाभर में आतंकवाद की फैक्ट्री बन गया है। वो हमारे यहां माइनॉरिटीज की हालत पर सवाल उठाता है। लेकिन क्या उसके मुल्क में कभी प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, फिल्म स्टार्स या क्रिकेट कैप्टन माइनॉरिटी कम्युनिटी से निकलकर आए? पाकिस्तान की किस बात पर भारत ने दिया जवाब... - दरअसल, पाकिस्तान ने बुधवार को UNHRC में भारत में माइनॉरिटी कम्युनिटी के लोगों की हालत का जिक्र किया था और उनके ह्यूमन राइट्स वॉयलेशन का आरोप लगाया था। - जवाब देने के अपने हक का इस्तेमाल करते हुए भारत के डिप्लोमैट्स ने कहा, पाकिस्तान दुनियाभर में आतंकवाद की फैक्ट्री तो बन ही गया है, इसके अलावा उसने हिंदुओं, ईसाइयों, शिया, अहमदिया और अन्य अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव कर अपने ही लोगों को अलग-थलग कर दिया है। - भारतीय डिप्लोमैट्स ने कहा कि यूएन की इस काउंसिल में पाकिस्तान ने भारत में अल्पसंख्यकों के हालात का जिक्र किया। हम बताना चाहेंगे कि भारत में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सीनियर कैबिनेट मिनिस्टर्स, सीनियर सिविल सर्वेंट्स, क्रिकेट कैप्टन्स, बॉलीवुड सुपरस्टार्स माइनॉरिटी कम्युनिटी से आते हैं। क्या पाकिस्तान में हमें इसकी कोई छोटी-सी छाप भी नजर आ सकती है? आपके पास तो बस ईशनिंदा कानून हैं। आपके यहां सिर्फ ह्यूमन राइट्स का वॉयलेशन होता है। भारत के कश्मीर और PoK में ये है फर्क - यूएन में भारत के डिप्लोमैट्स ने कहा- हम यह भी मांग करते हैं कि पाकिस्तान तुरंत कश्मीर से अपना अवैध कब्जा हटाए। अफसाेस की बात है कि हाल ही के दिनों में यह देखने में आया है कि पाक के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी वारदातें बढ़ी हैं। वहां काफी ज्यादा आर्थिक दिक्कतें हैं। पाक की भेदभाव वाली नीतियों के चलते वहां के लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। - भारत ने कहा कि हमारे हिस्से वाले जम्मू कश्मीर में सेकुलर डेमोक्रेसी है। वहां एक इंडिपेंडेंट ज्यूडिशियरी है। वहां एक्टिव मीडिया है और वाइब्रेंट सिविल सोसायटी है। इसके उलट पाक के कब्जे वाला हिस्सा दुनियाभर में आतंक को एक्सपोर्ट करने का ठिकाना बन गया है। हम कभी भी जम्मू कश्मीर के लोगों की डेमोक्रेटिक आवाज को दबाने की पाकिस्तान की कोशिशों को मंजूर नहीं करेंगे। हमारे मामले में दखल ना दें - डिप्लोमैट्स ने कहा कि हम पाकिस्तान से कहना चाहते हैं कि वह भारत के किसी भी हिस्से में आतंक और हिंसा को भड़काना और उसे बढ़ावा देना बंद करे। वह हमारे देश के अंदरूनी मामलों में दखल देना भी बंद करे। - उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने एक बार फिर जम्मू कश्मीर से जुड़े हमारे अंदरूनी मामलों में दखल देने के लिए इस काउंसिल का गलत इस्तेमाल किया है। जम्मू कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है। वहां ह्यूमन राइट्स का वॉयलेशन हो रहा है। ऑब्जर्वर्स को यह बात माननी होगी। पाकिस्तान का दोहरा रवैया - डिप्लोमैट्स ने कहा कि जम्मू कश्मीर में मौजूद आतंकी समूहों को पाकिस्तान का सपोर्ट ही वहां रहने वाले लोगों के ह्यूमन राइट्स को बचाए रखने के सामने सबसे बड़ा चैलेंज है। पाकिस्तान अपने देश के बाहर और अंदर मौजूद आतंकी समूहों से निपटने के मामले में दोहरी सोच रखता है। कई वादों के बावजूद वह सचाई को नहीं मानता।

लश्कर आतंकी बहादुर अली को PAK से मिलते थे ऑर्डर, NIA ने दाखिल की चार्जशीट

लश्कर आतंकी बहादुर अली को PAK से मिलते थे ऑर्डर, NIA ने दाखिल की चार्जशीट

Last Updated: January 06 2017, 17:22 PM

नई दिल्ली. एनआईए (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) ने लश्करे-तैयबा के आतंकी बहादुर अली के खिलाफ शुक्रवार को चार्जशीट दाखिल कर दी। अली पाकिस्तानी नागरिक है। उस पर लश्कर के इशारे पर भारत में दिल्ली समेत अन्य जगहों पर आतंकी हमले की साजिश रचने का आरोप है। अली को पिछले साल 24 जुलाई को नॉर्थ कश्मीर के सीमाई गांव यहामा से अरेस्ट किया गया था। एनआईए के आईजी आलोक मित्तल ने कहा, अली को पाकिस्तान में ट्रेनिंग दी गई थी। उसे हथियारों के अलावा GPS डिवाइस भी दिया गया था जिसके जरिए वह अपने पाकिस्तानी आकाओं के कॉन्टेक्ट में रहता था। एनआईए ने क्या कहा चार्जशीट में... - न्यूज एजेंसी के मुताबिक एनआईए के आईजी आलोक मित्तल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, हमारे पास इसके ठोस सबूत हैं कि लश्कर किस तरह आतंकियों की भारत में घुसपैठ कराने में जुटा है। - एनआईए ने अली के खिलाफ केस दर्ज किया है। चार्जशीट डिस्ट्रिक्ट जज अमर नाथ के कोर्ट में दाखिल की गई। - चार्जशीट के मुताबिक, अली 2 अन्य आतंकियों के साथ पिछले साल 12-13 जून की दरमियानी रात एलओसी से भारत में घुसा था और ठिकाने तक पहुंचने से पहले 7 दिनों तक वहां छिपा रहा था। - तीनों आतंकी 20 जून को अपने ठिकाने पर पहुंचे थे। जांच से यह पता चला है कि अली लाहौर के रायविंड में जिया बग्गा गांव का रहने वाला है। - इस बीच, पीएमओ में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, अगर पाकिस्तान ऐसे सबूतों के बावजूद आतंकी हमलों में अपना हाथ होने से इनकार करता रहेगा तो इससे उसे ही नुकसान होगा। नक्शे, GRs, GPS और डायरी हुई थी बरामद - गिरफ्तारी के बाद अली के पास से जम्मू-कश्मीर और पीओके के नक्शे पाए गए थे। उसे ग्रिड रिफरेंसेज (GRs) भी मुहैया कराए गए थे। - GRs और मैप शीट को देहरादून में सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया के पास भेजा गया, जहां से यह कन्फर्म हुआ कि अली ने सटीक साजिश रची थी। - इससे यह साबित होता है कि अली नक्शे के इस्तेमाल का अच्छा जानकार है जिसकी उसे ट्रेनिंग मिली थी। - इसके अलावा उसके कब्जे से एक GPS डिवाइस भी बरामद हुई थी। GPS में मिले डाटा से पता चला है कि अली लश्कर के मांदाकुली लॉन्चिंग पैड से कॉन्टेक्ट में था। - उससे एक डायरी भी मिली थी, जिसमें दिल्ली समेत जम्मू-कश्मीर के कई शहरों जैसे राफियाबाद, कुंजर, तंगमार्ग, बडगाम, पुंछ, जम्मू और उधमपुर के नाम दर्ज हैं। भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आरोप - चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि अली लश्कर का एक ट्रेंड कैडर है। उसकी डायरी में दर्ज शहरों के नाम से यह पता चलता है कि वह उन जगहों पर आतंकी हमले करने की फिराक में था। - एनआईए ने जनरल एग्जामिनर ऑफ क्वेश्चंड डॉक्युमेंट (GEQD) की भी राय ली, जिसने कहा कि GRs, गूगल मैप और टोपोग्राफिक शीट्स को लेकर अली को महारत हासिल है। - इसके बाद एनआईए ने अली पर भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आरोप भी लगाया है। उस पर आईपीसी की कई धाराओं के तरह चार्ज लगाए गए हैं। - बहादुर अली पिछले साल अगस्त से ही न्यायिक हिरासत में है। 19 दिसंबर को एक स्पेशल कोर्ट ने उसकी न्यायिक हिरासत 18 जनवरी तक बढ़ा दी थी।

आर्मी चीफ के बाद अब वीके सिंह बोले- PAK को बताना था आतंकवाद बर्दाश्त नहीं, इसलिए की सर्जिकल स्ट्राइक

आर्मी चीफ के बाद अब वीके सिंह बोले- PAK को बताना था आतंकवाद बर्दाश्त नहीं, इसलिए की सर्जिकल स्ट्राइक

Last Updated: January 04 2017, 17:50 PM

नई दिल्ली. वीके सिंह ने कहा है कि सर्जिकल स्ट्राइक का मकसद पाकिस्तान को ये बताना था कि आतंकवाद अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विदेश राज्य मंत्री सिंह ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक का मकसद पाकिस्तान को ये संदेश देना था कि भारत अब लगातार जारी टेररिज्म को नॉर्मल नहीं समझेगा। बता दें कि सेना प्रमुख बिपिन रावत ने भी कहा था कि सर्जिकल स्ट्राइक पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए की गई थी। रावत का बयान-आगे भी होगी सर्जिकल स्ट्राइक... - एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में आर्मी चीफ बिपिन रावत ने कहा था कि आने वाले वक्त में भी सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाई की जाएगी। - रावत ने कहा था, अगर सीमा पार से टेररिस्ट LOC के हालात बिगाड़ेंगे तो ऐसे एक्शन लिए जाते रहेंगे। हालांकि, इसका तरीका अलग हो सकता है। - सेना को टेररिस्ट के खिलाफ एक्शन लेने का पूरा अधिकार है। ताकत दिखाने से नहीं चूकेगी सेना - 27वें आर्मी चीफ रावत ने पद संभालने के बाद कहा था कि सेना बॉर्डर पर शांति बनाए रखने के लिए है। - रावत ने कहा था, जरूरत पड़ी तो सेना अपनी ताकत का इस्तेमाल करने से नहीं चूकेगी। - रावत ने सर्जिकल स्ट्राइक का क्रेडिट पूर्व आर्मी चीफ दलबीर सिंह सुहाग को दिया था। - रावत ने 31 दिसंबर 2016 को आर्मी चीफ की पोस्ट संभाली थी।

मोदी ने ट्वीट कर शरीफ को दी जन्मदिन की बधाई, पिछले साल लाहौर गए थे PM

मोदी ने ट्वीट कर शरीफ को दी जन्मदिन की बधाई, पिछले साल लाहौर गए थे PM

Last Updated: December 25 2016, 16:52 PM

नई दिल्ली. भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच नरेंद्र मोदी ने नवाज शरीफ को उनके जन्मदिन पर बधाई दी है। मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा, पाकिस्तान के पीएम मिस्टर नवाज शरीफ को जन्मदिन की शुभकामनाएं, मैं उनके लंबे और स्वस्थ जीवन के लिए प्रार्थना करता हूं। शरीफ रविवार को 67 साल के हो गए। बता दें कि पिछले साल इसी दिन मोदी ने अचानक लाहौर का दौरा कर शरीफ से मिलकर उन्हें जन्मदिन की बधाई दी थी। मोदी के दौरे के तुरंत बाद ही हुआ था आतंकी हमला... - न्यूज एजेंसी के मुताबिक, पाकिस्तान सपोर्टेड आतंकवाद के चलते भारत से उसके रिश्ते खराब दौर में पहुंच चुके हैं। इसके बावजूद मोदी ने शरीफ को जन्मदिन की बधाई दी है। - पिछले साल मोदी इसी दिन बिना किसी तय शेड्यूल के काबुल से लाहौर पहुंचे थे और शरीफ से मिलकर न सिर्फ उन्हें जन्मदिन की बधाई दी थी बल्कि उनकी नातिन की मैरिज सेरेमनी में भी शामिल हुए थे। - मोदी के उस कदम को बायलैटरल रिलेशन सुधारने की दिशा में बेहद अहम माना गया था। हालांकि उसके बाद 1 जनवरी को ही पंजाब के पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमला हुआ था। जिसके बाद से ही रिश्ते बिगड़ने शुरू हो गए और तनाव पैदा हो गया। कैसे और क्यों बढ़ा तनाव? - इस साल पाकिस्तान सपोर्टेड आतंकियों ने भारत में 3 बड़े हमले किए। - 1 जनवरी को पंजाब के पठानकोट एयरबेस पर 4 आतंकियों ने हमला किया था। 7 जवान शहीद, चारो आतंकी भी मारे गए थे। - 18 सितंबर को जम्मू-कश्मीर के उड़ी में आर्मी बेस पर हमला हुआ था। 19 जवान शहीद, 4 आतंकी मारे गए थे। - नवंबर के आखिर में आतंकियों ने जम्मू के नगरोटा में आर्मी ब्रिगेड हेडक्वार्टर पर हमला बोला। 2 अफसर और 5 जवान शहीद, 3 आतंकी मारे गए। - हमलों से आजिज आकर 29 सितंबर को पीओके में इंडियन आर्मी ने सर्जिकल स्ट्राइक की, जिसमें 40 आतंकी मारे गए। - जम्मू-कश्मीर में इंटरनेशनल बॉर्डर और एलओसी पर पाक की तरफ से 300 से ज्यादा बार सीजफायर वॉयलेशन किया गया। पाक ने की है बातचीत के जरिए समझौते की पेशकश - 8 दिसंबर को पाकिस्तान ने बातचीत के जरिए समझौते की बात की थी। - नई दिल्ली में पाक के हाई कमिश्नर अब्दुल बासित ने कहा था, हम भारत के साथ लगातार दुश्मनी के माहौल में जीना नहीं चाहते। - 70 साल का वक्त हमने बर्बाद कर दिया। अब समय आ गया है कि दोनों पड़ोसी यह तय करें कि उन्हें मौजूदा हालात में ही रहना है या एक नई शुरुआत करनी है। - अब्दुल बासित ने दोनों देशों के बीच लगातार और बगैर बाधा के बायलेटरल रिलेशन पर जोर दिया। कहा, दोनों देशों को आपसी मतभेदों को इस तरह दू्र करना चाहिए, ताकि वे को-ऑपरेटिव रिलेशनशिप के रास्ते पर बिना किसी दिक्कत के आगे बढ़ सकें। - बासित ने कहा था, दोनों देशों के बीच कुछ गंभीर प्रॉब्लम्स हैं, लेकिन हम उनसे दूर नहीं भाग सकते, हमें उन्हें खत्म करना होगा। हम इनका अंत सोच-समझकर अपनाई गई कूटनीति के जरिए कर सकते हैं।

जिस कश्मीर पर है पाकिस्तान का कब्जा, वहां ऐसे खतरनाक ब्रिज से गुजरते हैं लोग

जिस कश्मीर पर है पाकिस्तान का कब्जा, वहां ऐसे खतरनाक ब्रिज से गुजरते हैं लोग

Last Updated: December 22 2016, 16:24 PM

दुनियाभर में एक से बढ़कर एक खतरनाक ब्रिज हैं, जिन पर गुजरने से लोगों को डर लगता है। ऐसा ही एक खतरनाक ब्रिज पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हैं, जिसका नाम आलम ब्रिज है। गिलगिट नदी पर बना ये ब्रिज गिलगिट को बाल्टिस्तान से जोड़ता है। इसके बाद ये रास्ता सिंधु नदी से होता हुआ हिंदुकुश और काराकोरम तक जाता है। कैसे लकड़ी से बने ब्रिज से गुजरती हैं बड़ी-बड़ी गाड़ियां... 300 मीटर लंबा ये सस्पेंशन ब्रिज लकड़ी और वायर से बना है। इसे 1978 में चीनी और पाकिस्तानी इंजीनियर्स ने बनाया था। लकड़ी से बने होने की वजह से ये सस्पेंशन ब्रिज बेहद ही खतरनाक दिखाई देती है। छोटी-मोटी गाड़ियां भी गुजरती हैं, तो ये ब्रिज हिलने लगता है। जब तक गाड़ियां क्रॉस नहीं कर जातीं, तब तक गाड़ी में बैठे लोगों की सांस हलक में अटकी रहती है। इस कारण से लोकल अथॉरिटी ने यहां चलने की स्पीड लिमिट रखी है। वहीं, 20 टन से भारी ट्रकों को गुजरने की इजाजत नहीं है।

LoC पार करने के लिए PAK देता है हर आतंकी को एक करोड़: PoK नेता का खुलासा

LoC पार करने के लिए PAK देता है हर आतंकी को एक करोड़: PoK नेता का खुलासा

Last Updated: December 12 2016, 17:10 PM

नई दिल्ली. पाकिस्तान के कब्जे वाले संगठन जम्मू एंड कश्मीर अमन फोरम ने खुलासा किया है कि पाकिस्तान एलओसी पार करने वाले आतंकवादी को एक करोड़ रुपए देता है। फोरम के नेता सरदार रईस इंकलाबी ने आरोप लगाया कि जिन आतंकी संगठनों को पाकिस्तान में बैन किया जाता है, उन्हें पीओके में फ्री हैंड मिलता है। बता दें कि पिछले कुछ महीनों से यहां के नागरिकों में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है और वे विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पीओके में लोग कर रहे हैं विरोध प्रदर्शन... - रईस इंकलाबी ने बताया- पाकिस्तान 1 करोड़ रुपए देकर लोगों का मर्डर करवा रहा है। इन्हें यह पैसा एलओसी पार करने के लिए दिया जाता है। - बता दें कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कुछ महीनों से विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। # आरोप- लोगों को परेशान कर रही है पाकिस्तान आर्मी - 10 दिसंबर को पीओके के तात्रिनोट में लोगों ने पाकिस्तान के खिलाफ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया। - पीओके में रहने वाले लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान ह्यूमन राइट्स का वॉयलेशन कर रहा है। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि पाकिस्तान की सेना और पैरा मिलिट्री पुलिस पीओके के नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को बुरी तरह परेशान कर रही है। - प्रदर्शन कर रहे लोगों को हटाने के लिए पाक सिक्युरिटी फोर्सेस ने सख्ती दिखाई। इसमें कई लोग बुरी तरह से घायल हो गए थे।

LoC पर तनाव से डरा POK, देखें लोग जान बचाने के लिए कर रहें क्या-क्या

LoC पर तनाव से डरा POK, देखें लोग जान बचाने के लिए कर रहें क्या-क्या

Last Updated: December 02 2016, 10:54 AM

इंटरनेशनल डेस्क. भारत और पाकिस्तान की सीमा पर तनाव की स्थिति बरकरार है। इसकी वजह से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में लोग डरे हुए हैं। उरी अटैक और सर्जिकल स्ट्राइक के बाद कई बार क्रॉस बॉर्डर फायरिंग की घटनाएं हुईं। कई महीनों से ऐस हालात के चलते लोग यहां अंडरग्राउंड बंकर बना रहे हैं, ताकि हालात और बिगड़ने पर खुद को इन हमलों से सुरक्षित रख सकें। बंकर बनाने में 2 लाख से 5 लाख रुपए हो रहे खर्च... - पीओके के लोगों की कुछ फोटोज सामने आई हैं, जिसमें लोग बंकर दिखाते और बनवाते नजर आ रहे हैं। - लोगों का कहना है कि 1990 के बाद पहली बार सीमा पर ऐसे बुरे हालात हैं। इसमें दर्जनों लोग जान गंवा चुके हैं। - पीओके की नीलम वैली में रह रहे लोगों का कहना है कि हफ्ते में एक से दो बार ये हमले होते हैं। - ऐसे में खुद को सुरक्षित रखने के लिए बंकर का ही सहारा लेना पड़ता है। - एलओसी पर अथमुकम गांव की रहने वाली चांद बीबी ने कॉन्क्रीट के स्लैब और स्टील रॉड की मदद से बंकर तैयार कर लिया है। - गोलीबारी के दौरान उनका बीस लोगों वाला परिवार अपनी सुरक्षा के लिए यहां शरण ले लेता है। - चांद बीबी के मुताबिक, गोलीबारी की आवाज इतनी भयानक होती है कि लगता है मौत आने वाली है। - इस बंकर को बनाने के लिए उन्होंने करीब 2 लाख रुपए खर्च किए, जिसमें एक मिट्टी का घर तैयार हो जाए। - नीलम वैली के ही रहने वाले सुल्तान अहमद ने पांच लाख रुपए खर्च कर 10 फुट बाई 14 फुट का बंकर बनवा रहे हैं। - पेशे से टीचर सुल्तान के मुताबिक, गोलीबारी के वक्त इस बंकर के अंदर करीब 25 लोग शरण ले सकते हैं। कारीगरों का बढ़ा बिजनेस - लोकल कारीगर गुलाम हुसैन का कहना है कि बॉर्डर पर तनाव के चलते उसका बिजनेस बढ़ गया है। - गुलाम के मुताबिक, यहां भारत की ओर से होने वाली जवाबी कार्रवाई की रेंज में लाखों लोग आते हैं। - इससे बचने के लिए लोग बंकर बनवा रहे हैं और उसे एक के बाद एक लगातार काम मिल रहे हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें फोटोज...

सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने वाले जनरल रणवीर सिंह संभालेंगे स्ट्राइक-1 कोर की कमान

सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने वाले जनरल रणवीर सिंह संभालेंगे स्ट्राइक-1 कोर की कमान

Last Updated: November 30 2016, 12:58 PM

मथुरा. पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने के लिए हरी झंंडी दिखाने वाले ले. जनरल रणवीर सिंह देश की 3 हमलावर फौजों में सबसे महत्वपूर्ण स्ट्राइक 1 कोर की कमान संभालेंगे। वर्तमान कमांडर-इन-चीफ शौकीन चौहान असम रायफल्स के नए कमांडर होंगे। प्रमोशन देकर दी गई अहम जिम्मेदारी... - बता दें, रणवीर सिंह सैन्य मुख्यालय में डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) के पद पर कार्यरत थे। - अब उन्हें प्रमोशन देते हुए मथुरा स्थित स्ट्राइक 1 कोर का नया कमांंडर अप्वाइंट किया गया है। - ये अप्वाइंटमेंट पीएम की अध्यक्षता में गठित मंत्रिमंंडलीय नियुक्ति समिति द्वारा किया गया है। सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका - बता दें, ले. जनरल सिंह ही वो अधिकारी हैं, जिन्होंने पाक के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। - सैन्य मुख्यालय में शिकायत और सलाहकार परिषद के अलावा महानिदेशक के पद पर कार्यरत गोरखा रेजिमेंट के अधिकारी ले. जनरल एके भट्ट अब रणवीर सिंह की जगह सैन्य अभियान निदेशालय के महानिदेशक (डीजीएमओ) होंगे। स्ट्राइक 1 कोर की अहमियत - लेफ्टिनेंट जनरल रणवीर सिंह को प्रमोशन देकर स्ट्राइक 1 कोर का जनरल ऑफिसर कमांडिंग यानी कोर कमांडर बनाया गया है। - बता दें, सेना की स्ट्राइक 1 कोर देश के तीन हमलावर बलों में से एक है। इसका हेडक्वार्टर यूपी के मथुरा में है। - सेना की ये कोर शॉर्ट नोटिस में पाकिस्तान के भीतर घुसकर हमला करने के लिए 24x7 तैयार रहती है। - इंडियन आर्मी के इस कोर का गठन 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान किया गया था। इस कोर ने 1965 की जंग में पाकिस्तान के खिलाफ जमकर लड़ाई लड़ी थी। - पाकिस्तान के खिलाफ 1971 के युद्ध में भी इस कोर ने बसंतर की लड़ाई में हिस्सा लिया था। - सेना की ये कोर दक्षिण पश्चिमी कमान के तहत आती है, जिसका मुख्यालय जयपुर में है। - स्ट्राइक 1 कोर के तहत आर्मी के तीन डिवीजन हैं- इलाहाबाद स्थित चौथी इंफ्रैंट्री डिवीजन, बरेली स्थित छठी माउंटेन डिवीजन और हिसार में 33वीं आर्मर्ड डिवीजन। कौन हैं नए डीजीएमओ? - नए डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल भट्ट गोरखा राइफल्स से हैं और अभी आर्मी हेडक्वार्टर में एडिशनल डायरेक्टर जनरल (शिकायत और सलाहकार परिषद) के पद पर तैनात हैं। - इससे पहले वो असम में सेना की 21वीं डिविजन के कमान अधिकारी रह चुके हैं। लेफ्टिनेंट जनरल भट्ट मिलिट्री ऑपरेशंस डायरेक्टरेट में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। - उस वक्त उनकी रैंक ब्रिगेडियर की थी। 1981 बैच के अफसर भट्ट भी उसी गोरखा राइफल्स से हैं, जिस रेजिमेंट से मौजूदा सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग हैं। - बता दें, नए डीजीएमओ की नियुक्ति ऐसे समय हो रही है, जब सरहद पर माहौल तनावपूर्ण है और पाकिस्तान में नए आर्मी चीफ जनरल ककमर जावेद बाजवा की ताजपोशी हो रही है।

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