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Punjab Election 2017

अमरिंदर से ज्यादा पढ़े-लिखे हैं सिद्धू, जानें पंजाब के मंत्रियों की Qualification

अमरिंदर से ज्यादा पढ़े-लिखे हैं सिद्धू, जानें पंजाब के मंत्रियों की Qualification

Last Updated: March 17 2017, 10:22 AM

चंडीगढ़. गुरुवार को एक सादे समारोह में 9 मंत्रियों समेत कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब के 15वें सीएम के तौर पर शपथ ली। नई कैबिनेट में तीन मंत्री दसवीं पास हैंं। वहीं मुख्यमंत्री ने 12वीं पास करने के बाद डिप्लोमा इन कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का कोर्स किया है। चार मंत्री ग्रेजुएट है। कैप्टन अमरिंदर सिंह के मंत्रीमंडल में शामिल दो मंत्री पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं, दो ने एलएलबी भी किया है। dainikbhaskar.com बता रहा है पंजाब के नए मंत्रीमंडल में शामिल मंत्रियों की की योग्यता के बारे में। 1. कैप्टन अमरिंदर सिंह (मुख्यमंत्री) शिक्षा- 12वीं पास डिप्लोमा इन कंप्यूटर सॉफ्टवेयर आगे की स्लाइड्स में जानिए ऐसे ही अन्य नेताओं की शिक्षा के बारें में... फोटोः जसविंदर सिंह

ऐसी है पंजाब के नए CM  की महलनुमा कोठी, देखें- INSIDE PHOTOS

ऐसी है पंजाब के नए CM की महलनुमा कोठी, देखें- INSIDE PHOTOS

Last Updated: March 17 2017, 10:16 AM

चंडीगढ़। कैप्टन अमरिंदर सिहं ने गुरुवार को पंजाब के नए सीएम के रूप शपथ ली। कैप्टन अमरिंदर सिंह का ताल्लुक पटियाला रियासत से है जो आजादी से पहले हिमाचल तक फैली हुई थी। अमरिंदर की आज भी हिमाचल में पुश्तैनी संपति है जहां कैप्टन कभी कभार सुकून के कुछ पल बिताने जाते है। पढ़ें पूरी खबर... -उनकी शिमला के समीप दोची में छोटी सी महलनुमा कोठी है। जहां उनकी पाकिस्तानी महिला पत्रकार आरूसा आलम भी आ चुकी हैं। -शिमला स्थित मशहूर पर्यटन स्थल चायल कभी पटियाला रियासत की ग्रीष्मकालीन राजधानी हुआ करती थी। -इस राजधानी को पटियाला के महाराजा और कैप्टन अमरिंदर के दादा ने अपना हठ पूरा करने के लिए बनवाया था। -1892 में महाराजा पटियाला भूपिंदर सिंह पर अंग्रेजों ने अपनी ग्रीष्म कालीन राजधानी शिमला में आने पर बैन लगा दिया था। -जिसके बाद उन्होंने अंग्रेजों की ही तर्ज पर चायल को पटियाला की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया। -उस जमाने में पटियाला के महाराजाओं पहाड़ों में कई भवन और फार्म हाउस तैयार किए। -दोची गांव में कैप्टन अमरिंदर का कोठी भी पटियाला की ग्रीष्मकालीन राजधानी की ही देन है। -कोठी को कैप्टन अमरिंदर के शाही अंदाज के अनुरूप ही मेनटेन रखा जा है। -वहां पर कोठी की देखरेख एक चौकीदार करता है। आगे की स्लाइड्स में देखें फोटोज...

EVM से हमारा वोट अकालियों को चला गया: केजरीवाल; मायावती ने गड़बड़ी के पर्चे बांटे

EVM से हमारा वोट अकालियों को चला गया: केजरीवाल; मायावती ने गड़बड़ी के पर्चे बांटे

Last Updated: March 15 2017, 19:16 PM

नई दिल्ली. मायावती के बाद अरविंद केजरीवाल ने भी पंजाब के नतीजे और ईवीएम पर सवाल उठाए हैं। दिल्ली के सीएम ने बुधवार को मशीन से छेड़छाड़ का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हम पंजाब में हार स्वीकार करते हैं, लेकिन अकाली दल को 30% वोट कैसे मिल गए? हमारा वोट अकालियों को ट्रांसफर होने का शक है। हम मांग करते हैं कि एमसीडी इलेक्शन बैलट वोट से कराए जाएं। बता दें कि इस बार आप को पंजाब में 20 और गोवा में कोई सीट नहीं मिली। उधर, लखनऊ में मायावती ने ईवीएम में गड़बड़ी को लेकर पार्टी की मीटिंग में पर्चे बांटे। अकालियों के खिलाफ तो लोगों में गुस्सा था... - केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, पंजाब के नतीजे चौंकाने वाले हैं। अकालियों को 30% वोट कैसे मिले, ये बड़ा सवाल है। उनके खिलाफ तो जनता में गुस्सा था। सब लोग मान रहे थे कि आप स्वीप कर रही है पंजाब में। यूपी में इसके कई मामले सामने आए। उन सबकी जांच और कार्रवाई होनी चाहिए। - आप को 25% वोट और अकालियों को 30% कैसे मिले। मुझे एक भी ऐसा शख्स नहीं मिला, जिसने कहा हो कि कांग्रेस को दो-तिहाई बहुमत मिलेगा। ईवीएम से छेड़छाड़ होगी तो इलेक्शन का कोई मतलब नहीं रहा। सत्ता में बैठी पार्टी फिर तो अपने हिसाब से नतीजे घोषित करती रहेगी। - वेंकैया नायडू ने कहा, लोगों को हार स्वीकार करना चाहिए। जब आप जीतते हो तब ईवीएम सही होती है। जब हार जाओ तो ईवीएम में गड़बड़ी नजर आती है। बीएसपी ने पर्चे बांटे - यूपी में ईवीएम पर सवाल उठाने वाली बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने लखनऊ में पार्टी नेताओं के साथ मीटिंग कर हार पर मंथन किया। इस दौरान उन्होंने पर्चे भी बांटे। - माया ने कहा, केंद्र की सत्ता में बैठी बीजेपी ने घोटाला कर 325 सीटें हासिल की है। वोटिंग मशीनों में धांधली की गई। हम पर्चे बांटकर इसे बता रहे हैं। - अगर ये लोग उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश वाली बेईमानी गोवा, मणिपुर और पंजाब में भी करते तो इनको जवाब देना मुश्किल हो जाता और यह पकड़ा जाता। - बता दें कि बसपा सुप्रीमो ने यूपी इलेक्शन के नतीजे आने पर ईवीएम पर सवाल उठाए थे। बीएसपी को 19 सीटें मिली थीं। बैलट पेपर पर चुनाव करवाना समय को पीछे ले जाना है: अन्ना हजारे - समाजसेवी अन्ना हजारे ने आज ईवीएम मशीनों पर निशाना साधने वालों की आलोचना की। - उन्होंने कहा है, दुनिया तेजी से तरक्की कर रही है। ऐसे में हम बैलेट पेपर से चुनाव कराने की बात करके पीछे के समय में लौट जाने की बात करते हैं। - ईवीएम का ही इस्तेमाल होना चाहिए, साथ ही मतगणना में कोई गलती न हो इसके लिए एक टोटलाइजर मशीन का भी इस्तेमाल किया जाना चाहिए। जिससे की काउंटिंग में गड़बड़ी को रोका जा सके। <a href='http://www.bhaskar.com/news/MH-PUN-HMU-anna-hazare-slams-kejriwals-demand-of-ballot-papers-regressive-news-hindi-5551075-NOR.html'>(पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...)</a> कांग्रेस भी कर चुकी बैलट सिस्टम की मांग - मंगलवार को दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष अजय माकन ने भी अरविंद केजरीवाल और इलेक्शन कमीशन (ईसी) को लेटर लिखकर आने वाले नगर निगम चुनावों में बैलेट पेपर के इस्तेमाल की मांग की थी। - बाद में केजरीवाल के ऑर्डर पर दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी एमएम कुट्टी ने स्टेट ईसी को लेटर लिखकर निगम चुनाव बैलट पेपर सिस्टम से कराने की मांग की थी। हालांकि, उनकी यह मांग मंजूर नहीं हुई। - स्टेट इलेक्शन कमिश्नर एस.के. श्रीवास्तव ने मंगलवार को चुनाव की तरीखों का एलान करते हुए यह साफ किया कि एमसीडी इलेक्शन ईवीएम के जरिए ही होगा। - बता दें कि 22 अप्रैल को एमसीडी चुनाव होंगे और 24 अप्रैल को काउंटिंग।

UP में 15 साल बाद फिर बीजेपी काबिज, 5 साल में बढ़ीं 564% सीटें: एनालिसिस

UP में 15 साल बाद फिर बीजेपी काबिज, 5 साल में बढ़ीं 564% सीटें: एनालिसिस

Last Updated: March 12 2017, 16:49 PM

नई दिल्ली.   तीन साल बाद एक बार फिर जनता ने मोदी को और मोदी ने देश को चौंका दिया। 5 में से 2 राज्यों में ऐतिहासिक बहुमत और मणिपुर में पहली बार बहुमत तक पहुंचाकर साफ कर दिया कि देश में अब भी मोदी की लहर है। यूपी में जो जीत मिली है, वैसी तो 1991 की रामलहर (तब 221 सीट) और 1980 की इंदिरा लहर (कांग्रेस को 309 सीट) में भी नहीं मिली थी। बीजेपी और गठबंधन को यूपी में 325 सीटें मिलीं। कांग्रेस की खुशी का कारण सिर्फ पंजाब रहा। बीजेपी की 15 साल बाद यूपी में वापसी हुई है। 2012 में बीजेपी को 47 सीटें मिली थीं। 2017 में 312 मिलीं। यानी सीटों में 564% का इजाफा हुआ। सबसे सरप्राइजिंग खबरें...     - बीजेपी में शामिल हुए दूसरे दलों के 85% से ज्यादा बागी प्रत्याशी जीते। ऐसा पहली बार हुआ। - माया के गढ़ की दलित बहुल 67 सीट, अखिलेश के यादवलैंड की 52 सीटें बीजेपी को। - 67 ऐसी जगहों पर भी भाजपा जीती, जहां आजादी के बाद से वो दूसरे नंबर पर भी नहीं थी। - परिवारवाद बीजेपी में सफल। 12 नेताओं के परिजन को टिकट मिले थे, 10 जीत गए।    यूपी में मुस्लिम असर वाली 124 सीटें, बीजेपी 99 जीती - 2017 में बीजेपी ने 99 जीती। वहीं सपा ने 19 और बसपा ने 2 जीती। कांग्रेस और अन्य के खाते में सिर्फ 2-2 सीट गईं। जबकि 2012 में बीजेपी को 20, सपा को 59, बसपा को 28, कांग्रेस को 10 और अन्य को 7 सीट मिली थीं।   कितना असर है सीटें    मुस्लिम वोटर - 50   20 से 29%  - 32   30 से 39%  - 42   40% +  - इन 124 सीटों पर लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 109 सीटों पर, सपा को 10 और अन्य को 5 सीटों पर बढ़त थी।   रेप का आरोपी गायत्री और मुलायम की बहू हारी - दागी : रेप का आरोपी गायत्री प्रजापति अमेठी से हारा। बाहुबली अतीक अहमद, अजय राय हारे। लेकिन मुख्तार अंसारी, राजा भैया जीते।  - परिवारवाद : मुलायम की बहू और लालू का दामाद हारे। राजनाथ, लालजी टंडन के बेटे जीते।  - गढ़ में : भाजपा बनारस की सभी 8 सीटें जीती। कांग्रेस के अमेठी-रायबरेली में भाजपा 3-3 सीटें जीती। 5 साल बाद अयोध्या में फिर कमल खिला। - दलबदलू : यूपी में सपा के अंबिका बसपा में आकर हारे। कांग्रेस की रीता बहुगुणा भाजपा में आकर जीतीं। उत्तराखंड में कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए 14 नेता जीते। पंजाब में सिद्धू जीते।    जहां विकास की बातें, वहां सपा हारी; जहां कसाब-कब्रिस्तान का जिक्र, वहां बीजेपी को फायदा  - अखिलेश ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे को भुनाया। जहां से एक्सप्रेस-वे गुजरा वहां 60 सीटें आती हैं। सपा इनमें से 50 सीटें हारी। - मोदी-शाह ने फतेहपुर-गोरखपुर में कसाब-कब्रिस्तान का बयान दिया। इन इलाकों में 15 सीटें हैं। भाजपा 11 सीटें जीत गई।   गोवा में बीजेपी 17 साल पुराना ट्रेंड तोड़ने से चूकी, त्रिशंकु के आसार - बीजेपी दूसरी बार गोवा में बहुमत से चूकी। 2000 के बाद यहां ऐसा पहली बार होता कि कोई दल लगातार दूसरी बार सरकार बना लेता। यहां पर्रिकर की इमेज दांव पर थी।   मणिपुर में बीजेपी 250% बढ़ी - मणिपुर में भाजपा ने 21 सीटें जीतीं। इससे पहले उसके पास 2000 में 6 सीट थी। यानी 17 साल में 250% का इजाफा। इरोम शर्मिला को महज 90 वोट मिल पाए।   केजरी...पंजाब-गोवा में फेल - केजरीवाल के दावे तो पंजाब में 100 सीटों और गोवा में पूर्ण बहुमत के थे। लेकिन पंजाब में वो बमुश्किल दूसरे नंबर तक पहुंचे। गोवा में तो खाता भी नहीं खुला। अब इसका असर अगले महीने होने वाले दिल्ली एमसीडी चुनाव पर दिख सकता है।    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें: मोदी राजयोग, राहुल काल, अखिलेश की गृहशांति और माया की महादशा   ये भी पढ़ें:  - <a href='http://www.bhaskar.com/news/NAT-NAN-narendra-modi-strategy-analysis-for-up-win-news-and-update-news-hindi-5549091-NOR.html?ref=ht'>नोटबंदी, ट्रिपल तलाक से मुस्लिम महिलाओं के वोट मोदी को मिले: पढ़ें भास्कर एनालिसिस</a> <a href='http://www.bhaskar.com/news/NAT-NAN-upele-impact-of-bjp-win-on-national-politics-news-hindi-5548469-PHO.html?ref=eodli'>- WHAT NEXT: अपनी पसंद का राष्ट्रपति बना सकेगी BJP, राज्यसभा में होगी मजबूत</a> <a href='http://www.bhaskar.com/news/ABH-election-analysis-by-kalpesh-yagnik-news-hindi-5548898-NOR.html?ref=ht'>- उत्तरप्रदेश में यह क्या हुआ : 10 प्रश्न और उत्तर में पढ़ें कल्‍पेश याग्निक का विश्लेषण</a> - <a href='http://www.bhaskar.com/news/NAT-NAN-five-state-assembly-election-results-live-updates-2017-news-hindi-5547979-NOR.html?ref=ht'>UP में BJP को तीन चौथाई बहुमत, 37 साल बाद किसी पार्टी को 312+ सीटें</a>    

प्रिसेंस ने दादा के लिए छोड़ी थी लग्जरी Life, महलों से निकल घूमी गली-गली

प्रिसेंस ने दादा के लिए छोड़ी थी लग्जरी Life, महलों से निकल घूमी गली-गली

Last Updated: March 12 2017, 07:29 AM

पटियाला। पंजाब में जिस तरह से कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 10 साल बाद विधानसभा चुनाव में एक तरफा जीत दर्ज की है, उससे अगर कोई सबसे ज्यादा खुश है तो वो उनकी पोती सहरिंदर कौर हैं। प्रिसेंस अॉफ पटियाला सहरिंदर कौर उर्फ सहर सिंह ने अपने दादा कैप्टन के लिए जिस तरह से गलियों में घूम कर चुनाव कैंपेन किया था कि वह भूल गईं थी कि वे महलों में पली- बढ़ी हैं और कभी लग्जरी लाइफ जीती थी। अभी पढ़ाई पर फोकस करना चाहती हैं सहर.. - पेरिस में फैशन डिजाइनिंग का कोर्स करने वाली सहर चुनाव शुरू होने के कुछ दिन पहले ही पटियाला पहुंची थी। यहां उन्होंने अपने दादा के लिए जमकर चुनाव प्रचार किया। - 21 साल की सहर राजनीति में आने की बात से मना नहीं करती, लेकिन अभी पढ़ाई पर ध्यान दे रही हैं। - सहर ने दादा कैप्टन अमरिंदर के साथ पटियाला और लंबी में भी गली-गली जाकर वोट मागें थे। हलांकि वह लंबी से चुनाव नहीं जीत सके। - कैम्पेनिंग के दौरान पंजाब के अंदरूनी इलाकों में जाते वक्त सहर ट्रेडिशनल कपड़े ही पहनती थी, जो उनकी पर्सनल स्टाइल से काफी अलग है। - सहर को इलाके में लोग राजकुमारी कहकर बुलाते हैं। दो साल से विरासत को समझ रही हैं सहर... - कैप्टन अमरिंदर सिंह के बेटे रणइंदर सिंह की बेटी सहर अपने दादा के लिए जमकर मेहनत की है। - सहर को कैप्टन ने पॉलिटिकली ग्रूम किया है। दो साल से वे अपनी विरासत को समझ रही हैं। - कोडईकनाल के एक नामी बोर्डिंग स्कूल से ग्रैजुएशन के बाद सहर ने दिल्ली के फैशन एक्सपोर्ट हाउस रणिका एक्सपोर्ट्स में इंटर्नशिप की। - सहर ने एक साल तक पटियाला के शाही खानदान की विरासत और अपने दादा अमरिंदर सिंह के सियासी कामकाज पर गौर किया है। दस साल बाद फिर पंजाब में कांग्रेस - पंजाब में 77 सीटों पर कांग्रेस, 20 सीटों पर आप जीत चुकी है। जबकि शिअद ने 18 सीटों पर अपनी जीत दर्ज की है। - भाजपा 3 सीटों पर जीती है। जबकि दो अन्य कैंडीडेट भी जीत चुके हैं। दस साल बाद फिर से सत्ता में वापसी कर रही कांग्रेस पार्टी में खुशी की लहर है। कब, कितनी वोटिंग और किसकी सरकार - 2002 के चुनाव में 65.14% वोट पड़े और कांग्रेस की सरकार बनी। - 2007 में पंजाब में 75.45% वोट पड़े और अकाली की सरकार बनी। - 2012 में 78.20% वोट पड़े और अकाली ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। - 2017 में 78.62% वोट पड़े और कांग्रेस को दो-तिहाई सीट मिली हैं। आगे की स्लाइड में देखें प्रिसेंस अॉफ पटियाला की चुनिंदा फोटोज...

69 में से 40 सीटें कैप्टन के हाथ में, शिअद- न डेरा काम आया और न ही डेवलपमेंट

69 में से 40 सीटें कैप्टन के हाथ में, शिअद- न डेरा काम आया और न ही डेवलपमेंट

Last Updated: March 12 2017, 07:14 AM

बठिंडा। एक दशक के बाद पंजाब की सियासत में फिर उभरी कांग्रेस को जिस मालवा से उम्मीद नहीं थी, वहीं से उन्हें सबसे ज्यादा 40 सीटें मिलीं और इसी की बदौलत वह पंजाब में सरकार बनाने की मजबूत स्थिति में है। हालांकि डेरा सच्चा सौदा ने चुनाव से कुछ दिन पहले ही शिअद को खुला समर्थन दे दिया था, क्योंकि मालवा में डेरा का ज्यादा प्रभाव है। वहीं केंद्र की मदद से शिअद-भाजपा बठिंडा में एक हजार करोड़ का एम्स, 40 करोड़ का डोमेस्टिक एयरपोर्ट और 600 करोड़ का एथोनॉल प्लाट प्रोजेक्ट देने में कामयाब रही। मगर डेवलपमेंट का ये कार्ड भी नहीं चला और गठबंधन को मालवा से 9 सीटों पर ही सिमटना पड़ा। वहीं आप को भी मालवा से मात्र 18 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। भगवंत मान जैसे स्टार कंपेनर, दिल्ली के विधायक जरनैल सिंह को भी हार का मुंह देखना पड़ा। इन्होंने दोहराया इतिहास मुक्तसर ने फिर इतिहास दोहराया। हर बार की तरह यहां पर सरकार के उलट ही जनादेश आया। शिअद के कंवरजीत सिंह रोजीबरकंदी यहां से जीते, जबकि सरकार कांग्रेस की बनेगी। इससे पहले दो बार यहां से कांग्रेस के सन्नी बराड़ और उनकी पत्नी करण बराड़ विधायक बने तो सरकार शिअद-भाजपा की रही। इससे ये शहर पिछड़ा हुआ है। इन्होंने रचा इतिहास मालवा से कांग्रेस के दिग्गज नेता सुनील जाखड़ को अबोहर से भाजपा प्रत्याशी अरुण नारंग ने हराया, जबकि भाजपा अबोहर से काफी कमजोर मानी जाती है। शराब कारोबारी शिवलाल डोडा यहां से आजाद लड़े, उन्होंने नारंग को जेल से समर्थन दिया, जिससे जाखड़ हार गए। इनका टूट गया भ्रम हॉट सीट रही लंबी से सीएम पद के दोनों दावेदार बादल और कैप्टन आमने-सामने थे। बेशक पंजाब में कांग्रेस को बहुमत मिला, मगर पटियाला से जीते कैप्टन को लंबी में हार का मुंह देखना पड़ा। वहीं अपने जत्थेदारों के विरोध के बावजूद परकाश सिंह बादल अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे। आप; लोकसभा से भी बुरा परफॉर्म 2014 के लोकसभा चुनाव में आप को पंजाब की 13 सीटों में से 4 सीटें आई थी। यानी इसके अंतर्गत आती 36 विधानसभा सीटों पर आप को अन्य के मुकाबले बढ़त मिली थी। पंजाब में अरविंद केजरीवाल के दौरे, भगवंत मान की रैलियां और सत्तापक्ष के खिलाफ ड्रग्स और भ्रष्टाचार के मुद्दे को भुनाने से पैदा हुई आप की लोकप्रियता वोट बैंक में तब्दील नहीं हो पाई। संगरूर लोकसभा सीट जहां से खुद भगवंत मान ने दो लाख वोट की लीड ली थी, वहां की 7 विधानसभा सीटों में से भी आप को मात्र दो सुनाम और दिड़बा सीट ही आईं। आप को मिलीं सिर्फ 18 सीटें, विकास नहीं बदलाखोरी की बयानबाजी भारी पड़ी यहां पर लंबी... सीएम बादल की पारंपरिक सीट | यहां से कांग्रेस ने पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह तथा आप ने दिल्ली के विधायक जरनैल सिंह को चुनावी मैदान में उतारा। बादल की जीत के कारण | बादल की तरफ से इस हलके की लगातार अगुवाई करना। बतौर सीएम एरिया को िवकसित करना। जलालाबाद... - सुखबीर बादल की सीट | यहां से आप ने भगवंत मान को उतारा तो कांग्रेस ने एमपी रवनीत सिंह बिट्टू को। - सुखबीर की जीत का कारण | जहां डेरा सच्चा सौदा की हिमायत को माना जा रहा है वहीं ित्रकोणीय टक्कर में रवनीत बिट्टू का होना उनके लिए फायदेमंद साबित हुआ। - बठिंडा सिटी... - यहां से मनप्रीत बादल | सुखबीर के चचेरे भाई मनप्रीत सिंह बादल यहां से कांग्रेस के कैंडिडेट थे। शिअद के सरूप चंद सिंगला तथा आप के दीपक बांसल मैदान में थे। - जीत का कारण | लोकसभा चुनाव में मनप्रीत हरसिमरत से हारे थे। लोगों के लगातार टच में हैंै। वहीं एंटीइन्कमबेंसी भी इसका एक कारण है। - लहरागागा..., - यहां से थीं भट्ठल | पूर्व सीएम बीबी रजिंदर कौर भट्ठल कांग्रेस। वित्तमंत्री रहे परमिंदर सिंह ढींडसा अकाली दल के कैंडिडेट थे। - ढींडसा के जीतने का कारण व भट्ठल के हारने का कारण | बीबी के खिलाफ एंटीइन्कमबेंसी को ही माना जा रहा है क्योंकि वे यहां से लगातार विधायक चुनी जाती रही हैं। - रामपुरा फूल... - यहां से मलूका को मात | अकाली दल के कैंडिडेट पूर्व कैबिनेट मंत्री सिकंदर सिंह मलूका थे जोकि आम तौर पर विवादों में रहते हैं। वहीं कांग्रेस के कैंडिडेट गुरप्रीत िसंह कांगड़ थे। - कांगड़ की जीत का कारण | सरकार का एंटीइन्कमबेंसी फैक्टर के साथ मलूका का हलके में विरोध को भी माना जा रहा है। - आत्मनगर... - बैंस की सीट | छोटे बैंस सिमरजीत लोक इंसाफ पार्टी व आप के गठजोड़ की तरफ से मैदान में थे। कांग्रेस के कमलजीत सिंह कड़वल और शिअद के कैंडिडेट गुरमीत सिंह कुलार थे। - जीत का कारण | छोटे बैंस की जीत इसलिए तय थी क्योंकि उनका खुद का आधार होने के साथ साथ उन्हें आप का समर्थन भी प्राप्त था।

25 में से 22 सीटों पर कांग्रेस, अकाली दल गठबंधन सिर्फ तीन सीटों पर सिमटा

25 में से 22 सीटों पर कांग्रेस, अकाली दल गठबंधन सिर्फ तीन सीटों पर सिमटा

Last Updated: March 12 2017, 06:46 AM

अमृतसर। माझा के चार जिलों अमृतसर, पठानकोट, गुरदासपुर और तरनतारन की 25 सीटों में से सत्ताधारी अकाली दल बादल गठबंधन सिर्फ तीन सीटों पर सिमटकर रह गया, जबकि कांग्रेस ने 22 सीटों पर कब्जा जमाया है। राज्य में सरकार बनाने का सपना संजोकर पहली बार एंट्री करने वाली आम आदमी पार्टी यहां अपना खाता भी नहीं खोल सकी। शिरोमिण अकाली दल बादल व भाजपा गठबंधन की हार में सबसे बड़ा रोल प्ले किया ड्रग्स और बेरोजगारी ने। सरकार ने विकास भले ही किया लेकिन वह ड्रग्स और नशे पर रोक नहीं लगा सकी। इसके अलावा एंटीइन्कमबेंसी वोट ने भी कैप्टन और नवजोत सिंह सिद्धू पर भरोसा जताया। अमृतसर जिले की 11 सीटों में से मजीठा को छोड़कर 10 सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। खुद नवजोत सिद्धू करीब 43 हजार वोटों से जीते हैं। मतदान से करीब दो महीने पहले पूरे क्षेत्र में आम आदमी पार्टी की हवा बन चुकी थी। इसी वजह से केजरीवाल ने अपने युवा नेता हिम्मत सिंह शेरगिल को मोहाली से हटाकर मजीठा से लड़ाया। लेकिन प्रचार करने आए केजरीवाल का पूर्व आतंकी के घर रुकना पार्टी के लिए भारी साबित हुआ। शिअद में अपने पक्ष में जनता को करने के लिए प्रचार शुरू कर दिया कि आम आदमी पार्टी आई तो पंजाब का माहौल खराब हो जाएगा। इसके चलते आखिरी दिनों में जनता का झुकाव आप को छोड़कर कांग्रेस की तरफ हो गया क्योंकि लाेगों में अकाली दल के प्रति रोष था। इसी वजह से क्षेत्र में कांग्रेस को छप्पर फाड़ के वोट मिले। इन वजहों से कांग्रेस की राह हुई आसान - अकाली दल के खिलाफ एंटीइन्कमबेंसी - ड्रग्स, बेरोजगारी का मुद्दा सरकार के गले की फांस बना - माझा रीजन का अधिकतर कांग्रेस का फेवर करना - आप के स्टार प्रचारक भगवंत मान पर लगातार शराब पीने के आरोप - आप प्रमुख केजरीवाल के मोगा में एक एक्स टेरोरिस्ट के घर जाने का मुद्दा - कांग्रेसी व अकालियों की तरफ से लगातार ये आरोप लगाए गए कि अगर आप की सरकार आई तो पंजाब का माहौल खराब होगा, जिसके चलते आखिरी कुछ दिनों में लोगों का झुकाव आप की जगह कांग्रेस की तरफ हो गया। माझा की हॉट सीट्स अमृतसर ईस्ट यहां से पूर्व लोकसभा सदस्य व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू कांग्रेस के कैंडिडेट थे। अमृतसर होम टाउन होने का उन्हें फायदा मिला। बड़े मार्जिन से जीत के कारण सिद्धू को पार्टी में दूसरे नंबर का पद मिलने की संभावना है। अकाली दल की गुुंडागर्दी से परेशान जनता ने भी उनके ऊपर भरोसा जताया। अमृतसर नॉर्थ भाजपा के वरिष्ठ नेता व लोकल बाडीज मंत्री अनिल जोशी को इस सीट से उतारा गया। उन्होंने बेशक अपने हलके व शहर में काफी विकास करवाया। लेकिन शहर में उनका कई मुद्दों पर विरोध तथा अकाली दल के प्रति लोगों के गुस्से के कारण जोशी को हार का मंुह देखना पड़ा। पट्टी प्रकाश सिंह बादल के दामाद व कैबिनेट मंत्री आदेश प्रताप सिंह कैरों यहां से शिअद प्रत्याशी थे। आम लोगों से कैरों की दूरी तथा अकाली दल के खिलाफ एंटी इन्कमबेंसी व कांग्रेसी कैंडिडेट हरमिंदर सिंह गिल जोकि लगातार दो बार हार चुके थे के साथ लोगों की हमदर्दी कैरों की हार का कारण बनी। मजीठा सुखबीर सिंह बादल के साले और बादल सरकार में कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ भले ही कितने ही प्रचार किए गए लेकिन क्षेत्र के लोगों के लिए किए गए काम व लोगों के साथ पर्सनल टच के कारण आम आदमी पार्टी और कांग्रेस उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकीं। वे बड़े मार्जिन से जीत दर्ज करने में सफल रहे। बटाला आम आदमी पार्टी के कन्वीनर गुरप्रीत सिंह वड़ैच, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अश्विनी सेखड़ी अकाली दल के लखबीर सिंह लोधीनंगल तथा सेखड़ी के भाई इंद्र सेखड़ी अपणा पंजाब पार्टी से लड़े। यहां तीनों तगड़े कैंडिडेट थे जिस वजह से वोट बंट गई और अकाली दल के लोधीनंगल काडर वोट मिलने के कारण कांग्रेस की हवा के बावजूद जीत गए।

1991 की राम लहर से 91 सीटें ज्यादा  1980 की इंदिरा लहर से 3 सीटें ज्यादा

1991 की राम लहर से 91 सीटें ज्यादा 1980 की इंदिरा लहर से 3 सीटें ज्यादा

Last Updated: March 12 2017, 06:22 AM

नई दिल्ली. पहली बार किसी को 300+ सीटें, 37 साल पहले जनता पार्टी को 352 मिलीं थीं, तब उत्तराखंड यूपी का हिस्सा था। 25 साल में पहली बार सपा 50 सीटों से नीचे, 26 साल बाद माया 20 सीटों से नीचे पहुंची, बसपा के 97 में से 90 मुस्लिम हारे। जहां विकास की बातें, वहां सपा हारी, जहां कसाब-कब्रिस्तान का जिक्र, वहां भाजपा को फायदा -अखिलेश ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे को भुनाया। जहां से एक्सप्रेस-वे गुजरा वहां 60 सीटें आती हैं। सपा इनमें से 50 सीटें हारी। -मोदी-शाह ने फतेहपुर-गोरखपुर में कसाब-कब्रिस्तान का बयान दिया। इन इलाकों में 15 सीटें हैं। भाजपा 11 सीटें जीत गई। नोटबंदी सफल: अब आगे कौन सी सख्ती? 1. बेनामी संपत्ति: कानून पहले से पास है। अब अमल शुरू हो सकता है। मोदी इसे अगला गेमचेंजर मान रहे हैं। 2. सब्सिडी में कटौती: मोदी लोगों को सब्सिडी छोड़ने की अपीलें करते रहे हैं। अब एक निश्चित आय से ज्यादा वालों के लिए सब्सिडी खत्म कर सकते हैं। 3. बैंक रिफॉर्म: बैंक डिफॉल्टर के खिलाफ सख्ती संभव। स्टेट बैंक का मर्जर इसीलिए चल रहा है। कुछ ऐसी एजेंसियां भी खुद को सामने ला रही हैं जो बैंकों से उनको मिलने वाला कर्ज खरीद सकती हैं और फिर उसे वे अपने ढंग और मनमाने तरीके से वसूलेंगी। 4. नोटबंदी में गड़बड़ी वालों पर कार्रवाई: नोटबंदी के दौरान गड़बड़ी करने वाले प्राइवेट बैंकों पर सख्ती। खातों में बड़ी राशि जमा करने वालों पर कार्रवाई-जब्ती तेज होगी। 5. तीन तलाक: जिस तरह से यूपी मेें मुस्लिम महिलाओं ने खुलकर भाजपा को वोट दिए, उससे भाजपा अब तीन तलाक को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। मोदी राजयोग; यूपी में 132 सीटों पर रैली कर 96 जिताई, 5 साल में यूपी में 5 गुना सीटें बढ़ीं - साफ हो गया कि 3 साल बाद भी मोदी लहर जारी है। मोदी ने यूपी में दलित बहुल इलाकों में 64 सीटें, मुस्लिम प्रभाव वाली 71 सीटें जीतकर अभी से 2019 में मोदी रिटर्न्स का माहौल बना दिया। इसी साल गुजरात और आम चुनाव से पहले 15 राज्यों के चुनाव में भाजपा फायदे में दिख रही। - यूपी में मोदी 21 रैलियां कर 132 सीटों तक पहुंचे। 96 में जीत मिली। बनारस में तीन दिन बिताने, रोड शो करने से बनारस की 8 सीटों समेत पूर्वांचल की 108 सीटों पर जीते। - कुछ और सख्त फैसले लेंगे। भ्रष्टाचार के खिलाफ दिखने वाले कदम उठाएंगे। {विदेशी निवेशकों का भरोसा लौटेगा। इकोनॉमी बढ़ेगी। - क्षेत्रीय दल भाजपा के खिलाफ एक होंगे। वहीं भाजपा ओड़िशा, तमिलनाडु में वजूद बढ़ाएगी। अकेले चलने के लिए अकाली दल का साथ छोड़ सकती है। अखिलेश की ग्रहशांति: नतीजे देख बोले-परिवार की लड़ाई से हारे 235 रैलियों के बावजूद हार से अखिलेश पार्टी और परिवार में अलग-थलग पड़ेंगे। कुल की कलह तेज होगी। सपा फिर टूट सकती है। कई नेता अखिलेश का साथ छोड़ मुलायम-शिवपाल के साथ जा सकते हैं। राहुल काल; 5 साल में 24 चुनाव हारे, 28 राज्यों में 24% सीटों पर जमानत तक जब्त - राहुल की अगुवाई में कांग्रेस 63 महीने में 24 चुनाव हारी। राहुल ने 26 दिन की खाट यात्रा की। 48 जिले, 14 मंदिर, 3 मस्जिदें, 6 दरगाहें, 3 गुरुद्वारे और 1 चर्च में गए। - 60 साल में पहली बार कांग्रेस को इतनी कम सीटें मिलीं हैं। 5 साल में कांग्रेस ने 24% सीटों पर जमानत गंवाई। - कांग्रेस गठबंधन फॉर्मूले पर चलेगी। छोटे दलों को जोड़ेगी। लेकिन कमजोर होती कांग्रेस को नीतीश और ममता अब शायद ज्यादा महत्व ही न दें। - कई चुनावी राज्यों में नेतृत्व परिवर्तन संभव। मप्र-गुजरात, कर्नाटक में अध्यक्ष बदले जा सकते हैं। प्रियंका को फिर लाने की मांग दोहराई जाएगी। - राहुल ने यूपी में कुल 40 रैलियां कीं। अखिलेश के साथ 7 रोड शो और 10 जनसभाएं कीं। 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन जीते सिर्फ 7 सीटें। पिछली बार से 21 कम। माया की महादशा: माया ने कहा-वोटिंग मशीनों ने धोखा दिया पहले लोकसभा में शून्य पर सिमटीं, अब विधानसभा में 20 के नीचे पहुंचीं। एकमात्र कोर वोट बैंक दलित भी भाजपा में शिफ्ट हो गया। पार्टी में फूट का खतरा। माया ने हार के लिए ईवीएम में गड़बड़ी को दोषी बताया। भाजपा की 11 सीटें और बढ़ेंगी, बहुमत फिर भी दूर - 2019 से पहले राज्यसभा से 68 सांसद रिटायर होंगे। इनमें 10 सीटें उप्र से और 1 उत्तराखंड से खाली होगी। - यानी भाजपा की 11 सीटें और बढ़ जाएंगी। इस तरह उसके पास कुल संख्या 85 होगी। जबकि यूपीए की 65 होगी। पंजाब-मणिपुर से 2019 तक सीट खाली नहीं होगी। - इसलिए एनडीए को बहुमत तो नहीं मिलेगा, लेकिन यूपीए के कमजोर होने से जरूरी बिल पास कराने में अब उसे ज्यादा मुश्किलें नहीं आएंगी। जुलाई में भाजपा की पसंद का राष्ट्रपति बनना तय - भाजपा की पसंद का राष्ट्रपति बनना तय है। क्योंकि 5 राज्यों के नतीजों ने उसे जरूरी वोट उपलब्ध करा दिए हैं। भाजपा के लिए उप्र से मिले 67600 वोट वैल्यू उसके लिए निर्णायक साबित हुए। - उत्तराखंड समेत 5 राज्यों में जितनी सीटें भाजपा को मिली, उससे करीब 96508 वोट वैल्यू मिलेगी। यूपीए-थर्ड फ्रंट मिलकर भी एनडीए के बराबर नहीं होंगे। - लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, सुषमा स्वराज, वेंकैया नायडू राष्ट्रपति बनने की दौड़ में सबसे आगे।

सिर्फ पंजाब का सीएम तय; 4 राज्यों में 13 नेता दौड़ में

सिर्फ पंजाब का सीएम तय; 4 राज्यों में 13 नेता दौड़ में

Last Updated: March 12 2017, 05:15 AM

नई दिल्ली. चुनाव नतीजे आने के बाद पांचों राज्यों में मुख्यमंत्रियों के नामों पर मंथन शुरू हो गया है। हालांकि, सिर्फ पंजाब को छोड़कर बाकी 4 राज्यों में सीएम के लिए 13 नेता प्रमुख रूप से दौड़ में हैं। सबकी नजर उत्तरप्रदेश में बनने वाले सीएम पर है। उत्तर प्रदेश: महाराष्ट्र फॉर्मूला चला तो केशव प्रसाद, नहीं तो राजनाथ या दिनेश शर्मा हो सकते हैं मुख्यमंत्री - राजनाथ सिंह ठाकुर, सूबे के सबसे कद्दावर नेता, सीएम रह चुके हैं। संभाल सकते हैं। -दिनेश शर्मा ब्राह्मण, संघ से हैं, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, पार्टी में मोदी समर्थक माने जाते हैं। - केशव प्रसाद मौर्य ओबीसी, प्रदेश अध्यक्ष, महाराष्ट्र फाॅर्मूला से पहली दावेदारी इनकी। - योगी आदित्यनाथ दावेदारी रखते हैं। पूर्वी यूपी में पकड़, पर कई नेता खिलाफ। पंजाब : 10 साल बाद फिर से कमान - कै. अमरिंदर सिंह: चुनाव के दौरान ही कांग्रेस का घोषित चेहरा बन चुके थे कैप्टन अमरिंदर सिंह। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने जालंधर की रैली में कैप्टन के नाम की घोषणा की थी। उत्तराखंड: भाजपा के पास 4 पूर्व सीएम - बीसी खंडूरी पहले भी दो बार सीएम रह चुके हैं। पार्टी पर पकड़ है। संघ का भरोसा कम हुआ। - भगत सिंह कोशियारी पूर्व सीएम, जो अब सांसद हैं। - रमेश निशंक पूर्व सीएम, अभी लोकसभा में हैं। - विजय बहुगुणा पूर्व सीएम, जो कांग्रेस से आए।

हार गया ये करोड़पति कांग्रेसी नेता, विदेश से पढ़ा बेटा तो बहू है लंदन की

हार गया ये करोड़पति कांग्रेसी नेता, विदेश से पढ़ा बेटा तो बहू है लंदन की

Last Updated: March 11 2017, 17:57 PM

चंडीगढ़. राजनीति में आने के बाद सैकड़ों नेताओं की संपत्ति बढ़ जाती है। पंजाब में कांग्रेस के एक ऐसे विधायक हैं, जिनकी संपत्ति 5 साल में 6 करोड़ रुपए से 78 करोड़ यानी लगभग 1000 फीसदी ग्रोथ के साथ बढ़ी, लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में इन्हें हार मिली है। इन्हें बरनाल से आप के गुरमीत सिंह मीत ने 2432 वोटों से हराया है। जानिए, इन नेता से जुड़ी कई दिलचस्प बातें... - यह नेता हैं केवल सिंह ढिल्लो जो बरनाला से कांग्रेस के विधायक हैं। इन्होंने नामांकन के वक्त घोषणापत्र में बताया था कि इनके पास 2012 में कुल 78 करोड़ की संपत्ति है। - जबकि 2007 में इनकी संपत्ति 6 करोड़ रुपए थी। यानी पांच साल में 72 करोड़ रुपए बढ़ गई। - इन्होंने खुद के ऊपर 50 लाख और पत्नी पर 1 करोड़ का लोन बताया। इनके पास 23 लाख कीमत एक कार लेक्सस क्रूजर मोड है। - केवल सिंह ढिल्लो के पास 40 लाख की ज्वेलरी है और पत्नी के पास 54 लाख की ज्वेलरी है। - केवल सिंह के पास जो घड़ियां है उनकी कीमत लगभग 9 लाख घोषित की थी और पत्नी के पास जो घड़ियां हैं उनकी कीमत लगभग 4 लाख रुपए थी। पंजाब के बड़े बिजनेसमैन हैं ढिल्लो ... - केवल सिंह ढिल्लो बिजनेसमैन के तौर पर मशहूर हैं। इनका चंडीगढ़ में एक fun replic सिनेमाहॉल है। - सूत्रों के मुताबिक, इनका ट्रांसपोर्ट का कारोबार है। कई टैक्सियां चलती हैं। पेप्सी का प्लांट है और रियल स्टेट का कारोबार है। ऐसी है फैमिली लाइफ... - केवल सिंह ढिल्लो के दो बेटे हैं। कनवर सिंह और करण सिंह। - करण ढिल्लों, टेक्सास विश्वविद्यालय से प्रबंधन में स्नातक है। इनकी शादी दिसम्बर 2015 में लंदन के एक बिजनेसमैन की बेटी से हुई है। - इनकी बहू और करण की पत्नी का नाम अवरीतकौर है। अवरीत लॉ ग्रेजुएट हैं और इनके पिता ब्रिटेन के करोड़पति राणा सिंह हैं। - सेक्टर-9 चंडीगढ़ और बरनाला में इनकी कोठियां भी हैं। - सूत्रों के अनुसार, इनका एक भाई भी है। बाब ढिल्लो, कहा जाता है कि वह कनाडा का सबसे अमीर पंजाबी है। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...

पंजाब में हैट्रिक से चूक सकते हैं बादल, कांग्रेस बना सकती है सरकार: EXIT POLLs

पंजाब में हैट्रिक से चूक सकते हैं बादल, कांग्रेस बना सकती है सरकार: EXIT POLLs

Last Updated: March 11 2017, 12:20 PM

चंडीगढ़. जिस पंजाब में हंग <a href='http://www.bhaskar.com/news-campaign/punjab-election/'>असेम्बली</a> के कयास लगाए जा रहे थे, वहां एग्जिट पोल के नतीजे चौंकाने वाले हैं। प्रकाश सिंह बादल हैट्रिक लगाने से चूक सकते हैं। गुरुवार को आए एग्जिट पोल्स में कांग्रेस सरकार बनाती दिखाई दे रही है। वहीं, केजरीवाल की आप दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनती नजर आ रही है। खास बात ये है कि इन सर्वे में बीजेपी-अकाली दल गठबंधन 10 सीटों तक पहुंचता भी नहीं दिख रहा है। एग्जिट पोल में किसे कितनी सीटें... पंजाब- 117 सीटें पार्टी 2012 में सीटें इंडिया टीवी-C वोटर इंडिया टुडे-एक्सिस न्यूज 24-टुडेज चाणक्य इंडिया न्यूज-MRC Cong 46 41-49 62-71 54 55 SAD+BJP 68 5-13 4-7 9 7 AAP -- 59-67 42-51 54 55 OTH 3 0-3 0-2 0 -- नतीजे सही निकले तो किस पर क्या असर प्रकाश सिंह बादल: उम्र 90 पार। संभवत: आखिरी चुनाव। एग्जिट पोल के नतीजे सही रहे तो अकाली दल कमजोर होगा। भाजपा भी साथ छोड़ सकती है। कैप्टन अमरिंदर सिंह: पिछला चुनाव कांग्रेस इन्हीं के नेतृत्व में हारी थी। एग्जिट पोल के नतीजे सही हुए तो कांग्रेस का बड़ा चेहरा बनकर उभरेंगे। अरविंद केजरीवाल: कमजोर होते अकालियों का विकल्प बन सकते हैं। कब, कितनी वोटिंग और किसकी सरकार - 2002 के चुनाव में 65.14% वोट पड़े और कांग्रेस की सरकार बनी। - 2007 में पंजाब में 75.45% वोट पड़े और अकाली की सरकार बनी। - 2012 में 78.20% वोट पड़े और अकाली ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। - 2017 में 78.62% वोट पड़े हैं और एग्जिट पोल के नतीजों में कांग्रेस सरकार बनाती दिखाई पड़ रही है। 70 साल में पहली बार त्रिकोणीय मुकाबला - 117 सीटों के लिए बीजेपी-एसएडी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी चुनाव मैदान में हैं। - 1947 से बीजेपी, अकाली दल, कांग्रेस का ही पंजाब में दबदबा रहा है। - इस बार आम आदमी पार्टी की मौजूदगी के चलते मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।

पंजाब चुनाव: 48 बूथों पर दोबारा हुई वोटिंग, सरदूलगढ़ में 90 फीसदी दर्ज

पंजाब चुनाव: 48 बूथों पर दोबारा हुई वोटिंग, सरदूलगढ़ में 90 फीसदी दर्ज

Last Updated: February 09 2017, 18:33 PM

चंडीगढ़. पंजाब में 48 बूथों पर दोबारा मतदान हुआ है। जो शाम 5 बजे तक चला। मजीठा, मुक्तसर, संगरूर, मोगा और सरदुलगढ़ हलके में गुरुवार को वोट डाले गए। इसमें मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शाम 5 बजे तक मोगा में 81.26 प्रतिशत मतदान, सरदूलगढ़ में 90.33 प्रतिशत वोटिंग और मुक्तसर में 89.04 प्रतिशत मतदान हुआ। दोपहर 3 बजे तक मजीठा में 60 फीसदी वोटिंग हुई। दोपहर 1 बजे तक मजीठा में 48%, मुक्तसर में 60% संगरूर में 56%, मोगा में 39.53% और सरदुलगढ़ में 60% वोटिंग दर्ज। दोपहर 12 बजे तक मुक्तसर में 47%, संगरुर में 45% , मोगा में 33 और अमृतसर में 43 वोटिंग हुई। सुबह 10 बजे तक मजीठा में 19%, मुक्तसर में 24% संगरूर में 21%, मोगा में 17% और सरदुलगढ़ में 20% और अमृतसर में 19 प्रतिशत वोटिंग हुई। इसमें विधानसभा के कुल 32 और लोकसभा के 16 पोलिंग केंद्र शामिल हैं। -गौरतलब है कि पंजाब में 4 फरवरी को हुए मतदान में सुबह ही पोलिंग बूथों पर ईवीएम ने काम करना बंद कर दिया था। -बाद में जब ईवीएम मशीनों काम करने लगीं तो मतदान बहुत देरी से हुआ। -जिसके चलते अब दोबारा मतदान हो रहा है। -पंजाब में मतदान पर्ची देने वाली इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में कुछ तकनीकी गड़बड़ी और हिंसा की छिटपुट घटनाओं को छोड़कर मतदान कुल मिलाकर शांतिपूर्ण सम्पन्न हुआ है। -ईवीएम में तकनीकी गड़बड़ी के चलते कुछ समय के लिए मतदान विलंबित हुआ था। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...

वोटिंग से पहले रुपए बांटने का Video आया सामने, तीन को रंगे हाथ पकड़ा

वोटिंग से पहले रुपए बांटने का Video आया सामने, तीन को रंगे हाथ पकड़ा

Last Updated: February 09 2017, 11:17 AM

मजीठा. मजीठा हलके समेत 48 बूथों पर गुरुवार को दोबारा वोटिंग कराई जा रही है। इससे पहले ही मंगलवार रात मजीठा के ईदगाह इलाके की पांच नंबर वार्ड में वोटरों को पैसे बांटते हुए अकाली दल के जॉइंट सेक्रेटरी रणजीत सिंह राणा समेत तीन लोगों को कांग्रेसी वर्करों ने रंगे हाथ पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। इनके पास गाड़ी से 52 हजार रुपए नकद और एक डायरी भी मिली है। पूछताछ में बताई ये कहानी... पूछताछ के बाद पुलिस ने जालंधर के न्यू विनय नगर लम्मा पिंड निवासी रणजीत सिंह राणा समेत अर्जुन शर्मा और करणदीप सिंह के खिलाफ केस दर्ज गिरफ्तार कर लिया गया। एक युवक फरार है। हालांकि, रात को ही सभी को बेल मिल गई थी। इन युवकों का वीडियो वाट्स एप पर भी वायरल हुआ है। कांग्रेसी वर्कर जतिंदर सिंह ने बताया कि रात 7.30 बजे ईदगाह में चार लोगों को पैसे बांटते हुए देखा तो वार्ड के युवकों ने उन्हें फोन किया। उन्होंने चारों को रोक पूछताछ की। पहले तो उन्होंने खुद को मजीठा का ही बताया। सख्ती से पूछने पर ये सभी वहां से भागने लगे। युवकों ने तीन को पकड़ लिया, लेकिन एक भाग निकला। इसके बाद तीनों ने बताया कि वह जालंधर से हैं और अकाली दल के लिए पैसे बांटने आए थे। आरोपियों की सफेद रंग की अर्टिगा कार की जांच की तो वहां से एक डायरी मिली, जिस पर पैसे लेनदेन का हिसाब लिखा था। अकाली दल छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए पार्षद को किया गिरफ्तार... विधानसभा चुनाव से दो दिन पहले अकाली दल छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए पार्षद ओम प्रकाश गब्बर को बुधवार मजीठा पुलिस ने चुनाव प्रचार करते हुए गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने गब्बर के खिलाफ धारा 188 के अंतर्गत मामला दर्ज किया है। गब्बर हमेशा ही अपनी कार पर लाल बत्ती लगाकर घूमा करते थे और सरकारों के साथ दल बदलने को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। दस साल पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़ अकाली दल ज्वाइन किया था। अभी भी गब्बर वार्ड नंबर 62 से अकाली दल के पार्षद हैं, लेकिन विधानसभा चुनावों से पहले ही उन्होंने अपना दल बदलते हुए कांग्रेस को एक बार फिर ज्वाइन किया है। इस चुनावों में अब वह कांग्रेस के हक में प्रचार कर रहे थे। वीडियो- सतपाल

पंजाब विधानसबा चुनावः 48 बूथों पर दोबारा मतदान शुरू

पंजाब विधानसबा चुनावः 48 बूथों पर दोबारा मतदान शुरू

Last Updated: February 09 2017, 11:00 AM

चंडीगढ़. पंजाब में 48 बूथों पर दोबारा मतदान शुरू हो गया है। शाम 5 बजे तक लोग वोटिंग कर सकते हैं। मजीठा, मुक्तसर, संगरूर, मोगा और सरदुलगढ़ हलके में गुरुवार को वोट डाले जा रहे हैं। इसमें विधानसभा के कुल 32 और लोकसभा के 16 पोलिंग केंद्र शामिल हैं। -गौरतलब है कि पंजाब में 4 फरवरी को हुए मतदान में सुबह ही पोलिंग बूथों पर ईवीएम ने काम करना बंद कर दिया था। -बाद में जब ईवीएम मशीनों काम करने लगीं तो मतदान बहुत देरी से हुआ। -जिसके चलते अब दोबारा मतदान हो रहा है। -पंजाब में मतदान पर्ची देने वाली इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में कुछ तकनीकी गड़बड़ी और हिंसा की छिटपुट घटनाओं को छोड़कर मतदान कुल मिलाकर शांतिपूर्ण सम्पन्न हुआ है। -ईवीएम में तकनीकी गड़बड़ी के चलते कुछ समय के लिए मतदान विलंबित हुआ था।

मोदी से माया-राहुल से केजरी तक यहां टेक चुके हैं मत्था, ये हैं वो 7 कारण

मोदी से माया-राहुल से केजरी तक यहां टेक चुके हैं मत्था, ये हैं वो 7 कारण

Last Updated: February 08 2017, 09:35 AM

वाराणसी. 10 फरवरी को संत रविदास जयंती है। उनकी जन्मस्थली श्रीगोवर्धन सजने लगा है। मंदिर में 200 किलो से ज्यादा सोना है। राजनीतिक दृष्टि से दलित वोटरों को खींचने के लिए मायावती, राहुल गांधी, नरेंद्र मोदी और केजरीवाल यहां मत्था टेक चुके हैं। dainikbhaskar.com से बातचीत में बीएचयू के पूर्व प्रोफेसर और पॉलिटिकल एक्सपर्ट दीपक मलिक ने 7 प्वाइंट्स बताए, जिनकी वजह से यहां की आस्था, धर्म के साथ देश और स्टेट की राजनीती में महत्वपूर्ण योगदान है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें वो 7 बातें, जिस वजह से मोदी, राहुल मायावती और केजरीवाल ने टेका मत्था...

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