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राजकुमार

बायोपिक पर रणबीर का ट्रांसफॉर्मेशन देखकर कुछ ऐसा था संजू बाबा का REACTION

बायोपिक पर रणबीर का ट्रांसफॉर्मेशन देखकर कुछ ऐसा था संजू बाबा का REACTION

Last Updated: April 25 2017, 18:38 PM

मुंबई। राजकुमार हिरानी की नेक्स्ट संजय दत्त की बायोपिक के सेट से रणबीर कपूर की कुछ फोटोज इंटरनेट पर वायरल हो रही है। बता दें कि इस मूवी में रणबीर ने संजय दत्त का लुक अडॉप्ट करने में बहुत मेहनत की है। सोर्स की मानें तो रणबीर के रियलिस्टिक ट्रांसफॉर्मेशन के लिए हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है। डीएनए के मुताबिक, संजय दत्त ने भी रणबीर को खूब सराहा है। उनके किसी दोस्त ने उन्हें रणबीर के फोटोज भेजे थे तो वो खुद यकीन नहीं कर पा रहे थे कि उनके लुक को इतने अच्छे से कॉपी किया गया है। आगे की स्लाइड्स में देखें रणबीर का ट्रांसफॉर्मेशन...

चम्पारण सत्याग्रह की कहानी बापू की जुबानी : दुख ऐसा जाे देखा नहीं, दर्द ऐसा जाे कभी सुना नहीं

चम्पारण सत्याग्रह की कहानी बापू की जुबानी : दुख ऐसा जाे देखा नहीं, दर्द ऐसा जाे कभी सुना नहीं

Last Updated: April 10 2017, 05:06 AM

पटना. महात्मा गांधी के सत्याग्रह का पहला प्रयोग बिहार के चम्पारण जिले में हुआ था। बापू आज से ठीक सौ साल पहले 10 अप्रैल 1917 को बिहार आए थे। बुलावा था चम्पारण के किसान राजकुमार शुक्ल का। बापू इस दौरान चम्पारण में तीन दिन रुके, किसानों की पीड़ा जानी और उन्हें तीनकठिया प्रथा से मुक्ति दिलाई। बापू की डायरी और चिटि्ठयों से चम्पारण सत्याग्रह का ब्योरा... चम्पारण जाने से पहले मैं उसका नाम तक नहीं जानता था। वहां नील की खेती होती है, इसका ख्याल भी नहीं के बराबर था। नील की गोटियां मैंने देखी थीं, पर वे चम्पारण में होती हैं और उनके कारण हजारों किसानों को कष्ट भोगना पड़ता है, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं थी। जिस तरह चम्पारण में आम के वन हैं, उसी तरह सन् १९१७ में वहां नील के खेत थे। वहां के किसान अपनी ही जमीन के ३/२० भाग में नील की खेती उसके असल मालिकों के लिए करने को कानून से बंधे हुए थे। इसे वहां तिनकठिया कहा जाता था। बीस कट्ठे का वहां एक एकड़ था और उसमें से तीन कट्ठे जमीन में नील बोने की प्रथा को तिनकठिया कहते थे। चम्पारण के एक किसान थे राजकुमार शुक्ल। उन्हें इस प्रथा से कष्ट हो रहा था। यह उन्हें अखरता था। लेकिन अपने इस दुख के कारण उनमें नील के इस दाग को सबके लिए धो डालने की तीव्र लगन पैदा हो गई थी। जब मैं लखनऊ कांग्रेस (वर्ष १९१६,दिसंबर महीने का अंतिम सप्ताह) में गया, तो वहां इस किसान ने मेरा पीछा पकड़ा। वकील बाबू आपको सब हाल बतायेंगे, वे ऐसा कहते जाते और मुझे चम्पारण आने का निमंत्रण देते जाते थे। वकील बाबू से मतलब था- ब्रजकिशोर बाबू से। राजकुमार शु€क्ल उन्हें मेरे तम्बू में लाये। उन्होंने काले आलपाका की अचकन, पतलून वगैरह पहन रखी थी। मेरे मन पर उनकी कोई अ‘च्छी छाप नहीं पड़ी। मैंने मान लिया कि वे भोले किसानों को लूटने वाले कोई वकील साहब होंगे। मैंने उनसे चम्पारण की थोड़ी कथा सुनी। अपने रिवाज के अनुसार मैंने जवाब दिया, खुद देखे बिना इस विषय पर मैं कोई राय नहीं दे सकता। आप कांग्रेस में बोलिएगा। मुझे तो फिलहाल छोड़ ही दीजिए। राजकुमार शुक्ल को कांग्रेस की मदद की जरूरत थी ही। ब्रजकिशोर बाबू चम्पारण के बारे में कांग्रेस में बोले और सहानुभूति-सूचक प्रस्ताव पास हुआ। राजकुमार शुक्ल प्रसन्न हुए। पर उन्हें इतने से ही संतोष न हुआ। वे तो खुद मुझे चम्पारण के किसानों के दुख बताना चाहते थे। मैंने कहा, अपने भ्रमण में मैं चम्पारण को भी सम्मिलित कर लूंगा और एक-दो दिन वहां ठहरूंगा। उन्होंने कहा : एक दिन काफी होगा। खुद अपनी आंखों देख तो लीजिए। लखनऊ से मैं कानपुर (१ से ४ जनवरी) गया। राजकुमार शु€क्ल वहां भी हाजिर ही थे - यहां से चम्पारण बहुत नजदीक है। एक दिन दे दीजिए। अभी मुझे माफ कीजिए। पर मैं चम्पारण आने का वचन देता हूं। यह कहकर मैं …ज्यादा बंध गया। वहां से मैं आŸश्रम (अहमदाबाद) गया तो राजकुमार शुक्ल वहां भी मेरे पीछे लगे ही रहे - अब तो दिन मुकर्रर कीजिए। मैंने कहा, मुझे फलां तारीख को कलकत्ते जाना है, वहां आइए और मुझे ले जाइए। कहां जाना, या करना, €या देखना है, इसकी मुझे कोई जानकारी न थी। कलकˆत्ते में भूपेन बाबू के यहां मेरे पहुंचने के पहले उन्होंने वहां डेरा डाल दिया था। इस अपढ़, अनगढ़ परंतु निश्चयवान किसान ने मुझे जीत लिया। सन् 1917 के आरम्भ में कलकत्ते से हम दो व्यक्ति रवाना हुए। दोनों की एक-सी जोड़ी थी। दोनों किसान जैसे ही लगते थे। राजकुमार शु€क्ल जिस गाड़ी में ले गये, उस पर हम दोनों सवार हुए। सवेरे पटना उतरे। पटना की यह मेरी पहली यात्रा थी। वहां किसी के साथ मेरा ऐसा परिचय नहीं था कि उनके घर उतर सकूं। मैंने यह सोचा था कि राजकुमार शु€क्ल अनपढ़ किसान हैं, लेकिन उनका वसीला तो होगा ही। ट्रेन में मुझे उनकी कुछ अधिक जानकारी मिलने लगी। पटना में उनका परदा खुल गया। राजकुमार शुक्ल की बुद्धि निर्दोष थी। उन्होंने जिन वकीलों को अपना मित्र मान रखा था, वे वकील उनके मि˜त्र नहीं थे; बल्कि वे तो राजकुमार शु€क्ल को अपना आश्रित जैसा मानते थे। किसान मुवक्किल और वकीलों के बीच चौमासे की गंगा के चौड़े पाट के बराबर अंतर था। मुझे वे राजेंद्र बाबू के घर ले गये। राजेंद्र बाबू पुरी अथवा और कहीं गये थे। बंगले पर एक-दो नौकर थे। मेरे साथ खाने की कुछ सामग्री थी। मुझे थोड़ी खजूर की जरूरत थी। बेचारे राजकुमार शु€क्ल बाजार से ले आये। पर बिहार में तो छुआछूत का बहुत कड़ा रिवाज था। मेरी बालटी के पानी के छींटे नौकर को भ्रष्ट करते थे! नौकर को €क्या पता कि मैं किस जाति का हूं। राजकुमार शुक्ल ने अंदर के पाखाने का उपयोग करने को कहा। नौकर ने बाहर के पाखाने की ओर इशारा किया। मेरे लिए इसमें परेशान या गुस्सा होने का कोई कारण न था। इस प्रकार के अनुभव कर-करके मैं बहुत पक्का हो चुका था। नौकर तो अपने धर्म का पालन कर रहा था और राजेंद्र बाबू के प्रति अपना कˆर्तव्य पूरा कर रहा था। इन मनोरंजक अनुभवों के कार‡ण राजकुमार शुक्ल के प्रति मेरा आदर बढ़ा। उनके विषय में मेरा ™ज्ञान भी बढ़ा। सो पटना से लगाम मैंने अपने हाथ में ले ली। मोहनदास करमचंद गांधी 10 अप्रैल 1917 को पटना जंक्शन (तब का बांकीपुर जंक्शन) पर उतरे। बिहार में यह उनका पहला कदम था। तस्वीर उसी दिन की है। बिहार में हालात देखने के बाद बापू ने प्रण लिया था कि तीनकठिया प्रथा जब तक खत्म नहीं होगी, चैन से नहीं बैठूंगा।

कैटरीना का 'काला चश्मा' बना 'जगराता' सॉन्ग, Video में देख कैसे हुआ कमाल

कैटरीना का 'काला चश्मा' बना 'जगराता' सॉन्ग, Video में देख कैसे हुआ कमाल

Last Updated: March 31 2017, 18:27 PM

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मंत्री v/s अफसर: तीन मंत्रियों को बताए बिना अफसरों ने कर ली खानों को चारागाह भूमि देने की तैयार

मंत्री v/s अफसर: तीन मंत्रियों को बताए बिना अफसरों ने कर ली खानों को चारागाह भूमि देने की तैयार

Last Updated: March 27 2017, 06:57 AM

जयपुर. डेढ़ साल पहले खान घोटाले के खुलासे के बाद तत्कालीन वन,पर्यावरण और खान मंत्री राजकुमार रिणवा ने कहा था कि तत्कालीन प्रमुख सचिव अशोक सिंघवी उनके पास फाइलें नहीं भेजते थे। चर्चा के बिना ही फैसले ले लिए जाते थे। तब हैरत हुई थी। उसी तर्ज पर राज्य की ब्यूरोक्रेसी ने चारागाह की जमीन को खानों को आवंटित करने के लिए नियम में संशोधन करने के लिए फाइल चला दी। किसी भी जिम्मेदार मंत्री से चर्चा करने की बात तो दूर अफसरों ने उनको भनक तक नहीं लगने दी। दैनिक भास्कर ने जब राजस्व, खान एवं पर्यावरण मंत्रियों से एक-एक करके बातचीत की तो कुछ ऐसे ही तथ्य सामने आए। अफसरों के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए सबकुछ : प्रहलाद गुंजल विधानसभा में तीन मार्च को कोटा से भाजपा विधायक प्रहलाद गुंजल ने कहा था कि जब किसी विधेयक को ड्राफ्ट किया जाए तो विधायकों की समिति में डिस्कस होना चाहिए। सबकुछ अफसरों के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए। हमारे ब्यूरोक्रेट्स चित्रगुप्त नहीं हैं। उनसे ज्यादा तजुर्बा एक विधायक को होता है, जो रोज लोगों से मिलता है। उनका फील्ड का अनुभव, उनकी सोशल सर्विसेज, उनके सामाजिक सरोकार, उनके गांव के हालात, इस देश के हालात का अनुभव, चित्रगुप्तों से ज्यादा है। इसीलिए हम चित्रगुप्तों के रहमोकरम पर, उनके लिखे हुए ड्राफ्ट पर कानून बनाएंगे और चर्चा करेंगे तो फिर प्रताड़ना के शिकार होंगे। टिप्पणियां होंगी। हम अपने आचरण से विधायिका के काम में न्यायपालिका के हस्तक्षेप का निमंत्रण दे रहे हैं। मेरे पास अभी तक नहीं आई कोई फाइल : अमराराम राजस्व मंत्री अमराराम ने कहा कि फाइल मेरे पास अभी तक नहीं आई है। प्रस्ताव तैयार करने से पहले मेरे से किसी प्रकार की अफसरों ने चर्चा नहीं की। सामान्य तौर पर फाइल नीचे से चलती है। फाइल आखिर में मंत्री के पास आती है तब पता चलता है। यह जरूर है कि मेरे पास फाइल आएगी तो उसे गंभीरता से चैक किया जाएगा। अफसरों ने बिना पूछे फाइलें चलाने की परंपरा बना ली है : खींवसर वन एवं पर्यावरण मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर का कहना है कि सामान्य तौर पर एक ऐसी परंपरा बन गई है कि मंत्रियों से बिना चर्चा के ही अफसर फाइलें चला देते हैं। राज्य में चारागाह की जमीन खान ब्लाकों के लिए आवंटन करने का कोई प्रस्ताव चल रहा है तो इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। पर्यावरण के लिहाज से फाइल मेरे पास आनी चाहिए। किसी अफसर ने अभी तक न तो कोई चर्चा की है और न ही फाइल भेजी है। ऐसे किसी प्रस्ताव के बारे में पता नहीं : टीटी खान मंत्री सुरेंद्र पाल सिंह टीटी ने कहा कि चारागाह की जमीन खानों को देने के प्रस्ताव की सूचना मुझे नहीं है। भास्कर मेंं खबर आने के बाद ही ही मुझे पता चला। इसके बाद मैंने विभाग से पता कराया तो अफसरों ने बताया कि राजस्व विभाग के स्तर पर नियम में संशोधन करना है। ऐसे में इसकी सूचना राजस्व मंत्री के स्तर पर हो सकती है। जब उन्हें बताया गया कि मुख्य सचिव ओपी मीणा की अध्यक्षता में चारागाह की जमीन खानों को देने के लिए नियम में संशोधन कराने के लिए मीटिंग खान विभाग के अफसरों ने ही करायी थी तो मंत्री ने कहा कि इसकी भी मुझे कोई सूचना नहीं है कि मीटिंग उनके विभाग की ओर से कराई गई है। आगे की स्लाइड्स में देखें फोटोज

लाडपुरा विधायक भवानी सिंह और यूआईटी प्रमुख रामकुमार के तेवर हुए तीखे

लाडपुरा विधायक भवानी सिंह और यूआईटी प्रमुख रामकुमार के तेवर हुए तीखे

Last Updated: March 26 2017, 06:43 AM

कोटा. यूआईटी के लोकार्पण व शिलान्यास कार्यक्रमों को लेकर विधायक भवानीसिंह राजावत और यूआईटी अध्यक्ष रामकुमार मेहता के बीच की कड़वाहट कम नहीं हो पा रही है। शनिवार सुबह राजावत के आॅफिस में दोनों के बीच बात भी हुई। इसके बाद हुए यूआईटी के एक कार्यक्रम में विधायक ने कॉलोनाइजर्स को नोटिस देने की बात को गलत बताते हुए यूआईटी अधिकारियों को फटकार लगाई तो मेहता ने कहा-अधिकारियों की कार्रवाई पूरी तरह सही है। वे नियमों से काम कर रहे हैं। इस कार्यक्रम के बाद राजावत ने भास्कर से कहा कि मेहता ने सरेंडर कर दिया है। वहीं, मेहता ने कहा कि यह कहना गलत है कि मैंने सरेंडर कर दिया है। मुझे बुलाया गया था, इसलिए मैं उनके ऑफिस गया था। तब तय हुआ था कि मिलकर साथ चलेंगे। उल्लेखनीय है कि कृषि काॅलोनियों में सिर्फ 40 प्रतिशत राशि खर्च करने को लेकर राजावत व मेहता में विवाद शुरू हुआ। राजावत ढाई लाख लोगों का ट्रस्टी है, उसकी बात तो माननी ही होगी यूआईटी के कार्यक्रम में राजावत अधिकारियों को सुनाने से नहीं चूके। वे बोले-अधिकारी कॉलोनाइजर्स को नोटिस जारी कर रहे हैं। कहते हैं कि काॅलोनी अवैध है। उन्होंने मंच पर बैठे मेहता की ओर इशारा करते हुए कहा कि अधिकारियों को समझाओ। जमीन उनके बाप की नहीं किसानों की है। उन्होंने काॅलोनियां काटी हैं। नया मास्टर प्लान अप्रूव्ड हो जाएगा तो ये सभी काॅलोनियां नियमित हो जाएंगी। आपको (मेहता को) तो यहां सरकार ने रिसीवर बैठाया है, लेकिन राजावत तो ढाई लाख लोगाें का ट्रस्टी है, उसकी बात तो माननी ही होगी। कॉलोनाइजर्स के मामले में नियमों से काम किया है अधिकारियों ने उधर, मेहता ने कहा कि यह सही है कि न्यास के कामों का शिलान्यास और लोकार्पण हम ही करवाएं। इसमें गलत क्या है। कॉलोनाइजर्स के खिलाफ यूआईटी अधिकारियों की ओर से की गई कार्रवाई गलत नहीं है। सरकारी प्रक्रिया अपने तरीके से चलती है। हमने कई जगह बोर्ड लगाए हैं और आगे भी लगाएंगे। जब तक नया मास्टर प्लान अप्रूव्ड नहीं होता, तब तक को ये काॅलोनियां अवैध ही हैं। जनप्रतिनिधि की बात अपनी जगह सही हो सकती है, लेकिन काम तो नियमों से ही होगा।

तिकोना मुकाबला था, शुरू में डर था, फिर चुनाव प्रचार में दिखने लगी जीत

तिकोना मुकाबला था, शुरू में डर था, फिर चुनाव प्रचार में दिखने लगी जीत

Last Updated: March 18 2017, 04:53 AM

अमृतसर। इस बार त्रिकोणीय मुकाबला था, आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार भी मैदान में होने के कारण कई तरह की अटकलें चल रहीं थी। शुरूआत में तो जीत को लेकर संशय था लेकिन जब चुनाव प्रचार शुरू किया तो लोगों का रुझान देखते हुए जीत स्पष्ट दिखाई देने लगी थी। डाॅ. वेरका ने बतौर एससी-एसटी कमीशन वाइस चेयरमैन, भारत सरकार देश भर में काम किया, परिवार को वक्त पूरा नहीं दे पाते थे लेकिन उनकी जिम्मेदारियों को समझते हुए उनके किसी तरह का कभी कोई शिकवा नहीं रखा। ये विचार विधायक डाॅ. राजकुमार वेरका की पत्नी अल्का ने दैनिक भास्कर के साथ बातचीत के दौरान सांझा किए। सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक किया प्रचार उन्होंनेबताया कि टिकट मिलते ही वह अपनी टीम के साथ हलके के विभिन्न हिस्सों में सुबह 10 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक चुनाव प्रचार करती रहीं। इस दौरान कई लोगों के गिले-शिकवे भी थे लेकिन फिर भी कांग्रेस को ही वोट देने की बात कहते थे। हलके के लोगों का वेरका परिवार के सिर पर कर्ज चुनाव प्रचार मुहिम में समर्थक खाना खाने के बगैर नहीं जाने देते थे, कई हिस्सों में प्रचार करने नहीं पहुंच सके लेकिन जनता का प्यार भुलाया नहीं जा सकता। चुनाव प्रचार के साथ ही घर को भी मैनेज किया। डाॅ. वेरका के पास समय नहीं होने के कारण अकेले ही शाॅपिंग करनी पड़ती है लेकिन इसका मलाल कभी मन में नहीं रखा। विधानसभा चुनाव में उनकी भारी वोटों से हुई जीत की खुशी जाहिर नहीं की जा सकती, वेस्ट हलके के लोगों का वेरका परिवार के सिर पर कर्ज है, जिसे हर हालात में उतारेंगे। इसके लिए डा. वेरका ने अभी से काम करना भी शुरू कर दिया है, जिसके जल्द ही सकारात्मक परिणाम सबके सामने आएंगे। इसके लिए पूरा परिवार उन्हें स्पोर्ट करेगा ताकि वोटरों की उम्मीद के मुताबिक ही हलका के हर हिस्से में विकास करवाया जा सके।

एक्सपर्ट की राय : बुरे शहरी सपने की अल्टीमेट कहानी है फिल्म 'ट्रैप्ड'

एक्सपर्ट की राय : बुरे शहरी सपने की अल्टीमेट कहानी है फिल्म 'ट्रैप्ड'

Last Updated: March 17 2017, 16:02 PM

ट्रैप्ड रिलीज हो गई है। इसपर जानी-मानी फिल्म क्रिटिक अनुपमा चोपड़ा से dainikbhaskar.com ने जाना, कैसी है ये फिल्म... कैरेक्टर राजकुमार राव - फिल्म में राजकुमार राव ने शौर्य का कैरेक्टर प्ले किया है। जो कि ट्रैवल एजेंसी में काम करने वाला साधारण सा व्यक्ति होता है। डायरेक्शन एक एक्टर, एक लोकेशन और छोटा बजट.. जिसमें डायरेक्टर विक्रमादित्य मोटवानी ने ये सारी कहानी क्रिएट की है। ट्रैप्ड एक अचानक से डर जगाने वाली कहानी है जिसमें उन्होंने एक ब्यूटीफुल और निर्दयी मुंबई को दिखाया है। ट्रैप्ड इसलिए लोगों के कनेक्ट करेंगी, क्योंकि ये आज के सिनेरियो को बताती है। राइटर अमित जोशी और हार्दिक मेहता ने हमें जो कैरेक्टर दिया। उसका नाम शौर्य (राजकुमार राव) है। शौर्य एक ट्रेवल एजेंसी में काम करता है। जिसका फिल्म में थोड़ा रोमांस भी दिखाया गया है। शौर्य एक अपार्टमेंट की तलाश में रहता है। तभी एक संदेहपूर्ण ब्रोकर की एंट्री होती है। जो शौर्य को कोर्ट के लफड़े में फंसी एक बिल्डिंग में सस्ता अपार्टमेंट दिला देता है। जहां सिर्फ एक वॉचमैन रहता है जो मुश्किल से सुन पाता है। कहानी ट्रैप्ड एक बुरे शहरी सपने की अल्टीमेट कहानी है। जिसमें मुंबई के एक खाली अपार्टमेंट में शौर्य (राजकुमार राव) फंस जाता है। जहां ना तो पानी है ना ही इलेक्ट्रिसिटी। वहां कंपनी के लिए होते हैं तो सिर्फ चूहे और कॉकरोच जो कैसे खत्म होते हैं ये आप नहीं जानना चाहेंगे। फिल्म में विक्रम, सिनेमेटोग्राफर सिद्धार्थ दीवान, एडिटर नितिन वैद ने पूरी परिस्थिति को बखूबी बयान किया है। बैकग्राउंड म्यूजिक की बात करें तो आलोकनंदा दासगुप्ता ने बेहतरीन काम किया है। एक सीन में सूर्या अपने आपको काटता है ताकि वो अपने ब्लड से साइन क्रिएट कर सके। ये सीन आपको आंखें बंद करने पर मजबूर कर देगा। फिल्म में थोड़ी सी हॉलीवुड की झलक मिलती है लेकिन ये पूरी तरह से मुंबई मूवी है। जहां हर कोई हजारों लोग से घिरा हुआ है लेकिन फिर में अकेला है। ट्रैप्ड एक कड़क बिजली का तार है जो बिना राजकुमार राव के गिर जाता। शुरुआत में शौर्य एक साधारण सुलझा शख्स होता है जो वेजेटेरियन है और पाव भाजी उसका ड्रीम फूड है। लेकिन बाद में इस सिचुएशन के कारण शौर्य में आए बदलाव को राजकुमार राव ने परदे पर बखूबी उतारा है। रेटिंग मैं बहुत खुश हूं कि ट्रैप्ड बिना इंटरवल के रिलीज हुई। फिल्म की ड्यूरेशन 103 मिनिट है। फिल्म में ऐसा दौर दिखाया है जब आप पेशेंस हो देते हैं। लेकिन शौर्य की डरावनी कहानी इसे टाइमली रिकवर कर लेती है। मैं इस फिल्म को 3.5 स्टार देना चाहूंगी।

Movie Review: राजकुमार राव की परफॉर्मेंस पर टिकी है 'ट्रैप्ड'

Movie Review: राजकुमार राव की परफॉर्मेंस पर टिकी है 'ट्रैप्ड'

Last Updated: March 17 2017, 15:55 PM

क्रिटिक रेटिंग 3/5 स्टारकास्ट राजकुमार राव, गीतांजलि थापा डायरेक्टर विक्रमादित्य मोटवानी प्रोड्यूसर मधु मंतेना, विकास बहल, अनुराग कश्यप म्यूजिक आलोकानन्द दासगुप्ता जॉनर थ्रिलर ड्रामा जब भी विक्रमादित्य मोटवानी का जिक्र होता है तो उड़ान, लुटेरा जैसी फिल्में आंखों के सामने आ जाती हैं। अब क्या ट्रैप्ड का नाम भी उसी लिस्ट में जुड़ जाएगा? कैसी बनी है यह फिल्म, आइए पता करते हैं... कहानी फिल्म की कहानी मुंबई पर बेस्ड है जहां कंपनी में काम करने वाला शौर्य (राजकुमार राव) अपने ही ऑफिस की लड़की नूरी (गीतांजलि थापा) को फोन करके डेट पर मिलता है। दोनों के बीच प्रेम पनपता है और इस प्रेम को रिश्ते में बदलने की पहल भी होती है। जिसके लिए शौर्य के सामने घर लेने की जरूरत पड़ती है जहां शादी के बाद वो और नूरी रह सकें। जब रियल स्टेट के एजेंट से शौर्य बात करता है तो उसे ऐसा घर दिखाता है जो काफी परेशानी वाला मामला लगता है। एक अंडर कंस्ट्रक्शन वाली इमारत में ब्रोकर, शौर्य को घर दे देता है जहां एक ही रात में परेशानियां शुरु हो जाती हैं। उस घर में शौर्य आया तो अकेले था, लेकिन तरह तरह की परेशानियों से वो असहाय फील करने लगता है। पैंतीस वे माले पर मिला एक घर उसके लिए मुसीबत का सबब बन जाता है। अब इस घर से वो खुद को कैसे मुक्त कर पाएगा, इसका पता आपको थिएटर तक जाकर ही चलेगा। डायरेक्शन फिल्म का डायरेक्शन काफी अच्छा है। विक्रमादित्य की रियल लोकेशन की शूटिंग भी काफी अच्छी है। मुंबई के एक अपार्टमेंट में पैंतीस वे माले पर चल रही गाथा को बखूब दर्शाया गया है। फिल्म की कहानी भी कमाल की है। फिल्म की रफ्तार काफी धीमी है और धीरे धीरे चीजें आगे बढ़ती है। जिसे थोड़ा और बेहतर किया जा सकता था। साथ ही इस फिल्म में रेगुलर मसाला फिल्मों वाली बात नहीं हैं जहां गाने, डांस और कॉमेडी देखने को मिलती है। जिसकी वजह से शायद एक अलग तरह की ऑडियंस ही इसे देखना पसंद करे। परफॉर्मेंस फिल्म 102 मिनट की है और ये बहुमुखी प्रतिभा वाले अभिनेता राजकुमार की वजह से ही आपको बांधे रखती है। साथ ही राजकुमार के किरदार से आप कनेक्ट भी कर पाते हैं। उसके भीतर का भय किस तरह से उसकी मजबूती बनता है इसका पता भी फिल्म के साथ साथ चलता है। म्यूजिक फिल्म का म्यूजिक अच्छा है और खास तौर पर बैकग्राउंड स्कोर काफी अलग है जो समय समय पर कहानी को और मजबूत बनाता है। देखें या नहीं अगर आपको परफॉर्मेंस बेस्ड फिल्में पसंद आती हैं तो राजकुमार राव की ये फिल्म देख सकते हैं।

रणबीर कपूर ने कहा- संजय जैसी जिंदगी जीने में 100 जन्म लग जाएंगे

रणबीर कपूर ने कहा- संजय जैसी जिंदगी जीने में 100 जन्म लग जाएंगे

Last Updated: March 13 2017, 09:58 AM

भोपाल. संजय दत्त की बायोपिक के लिए भोपाल में शूटिंग पूरी करने के बाद रणबीर कपूर और राजकुमार हिरानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए फिल्म से जुड़े तमाम सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि संजय जैसी जिंदगी जीने में 100 जन्म लग जाएंगे। इस फिल्म के जरिए दोस्ती, पेरेंटिंग और रिश्ते निभाने की लर्निंग मिलेगी। मुन्ना भाई को लेकर डिस्कस करने गया था ... - निर्देशक राजकुमार हिरानी ने बताया कि जब संजय पैरोल पर 25 दिन के लिए बाहर आए थे, तब उनसे मुन्नाभाई सीरीज़ की अगली फिल्म के लिए बात करने गया था, लेकिन बातों बातों में जब उन्होंने अपनी जिंदगी के बारे में बताना शुरू किया तो मुन्नाभाई की बजाए उनकी बायोपिक बनाना ठीक लगा। ...तो नेता की जिंदगी पर भी बनाएंगे फिल्म किसी नेता पर बायोपिक बनाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह तभी बन सकती है, जबकि कोई अपनी जिंदगी के बारे में हकीकत बयां करे, लेकिन ऐसा मुश्किल लगता है। किसी नेता ने अपनी कहानी को ईमानदारी से कहा तो जरूर फिल्म बना सकते हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें, खबर से जुड़ीं फोटोज...

बेल पर बाहर हैं आमिर-सलमान के ये डायरेक्टर, बोले मुझे झूठे केस में फंसाया...

बेल पर बाहर हैं आमिर-सलमान के ये डायरेक्टर, बोले मुझे झूठे केस में फंसाया...

Last Updated: March 09 2017, 11:10 AM

मुंबई. सलमान खान और आमिर खान की फिल्म अंदाज अपना अपना के डायरेक्टर राजकुमार संतोषी पर फिल्म मेकर धनराज और अनिल जेठानी ने चेक बाउंस केस दर्ज कराया था। जिसके चलते उन्हें पुलिस ने अरेस्ट कर लिया था लेकिन फिलहाल वो बेल पर बाहर हैं। हाल ही में संतोषी ने इस मामले पर एक इंटरव्यू में अपना पक्ष रखा है। जिसके उन्होंने बताया कि उन्हें झूठा केस बनाकर फंसाया जा रहा है। ये बोले संतोषी... संतोषी ने अपना साइड रखते हुए कहा, यह मेरे खिलाफ रची गई साजिश है और पूरी तरह से झूठ है। पैसे उनके (जेठानी के) के हैं, सच जल्द ही सबके सामने आएगा और हम केस दर्ज कराने जा रहे हैं। वो सिर्फ पॉपुलैरिटी हासिल करने और मेरी इमेज खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। मामला कोर्ट में है फिर क्यों वो इस बारे में मीडिया से बात कर रहे हैं? यदि वे सच के लिए लड़ रहे हैं तो उन्हें पता होना चाहिए कि कानून उन्हें न्याय देगा न कि मीडिया। ये है मामला राजकुमार संतोषी के खिलाफ साल 2013 में दर्ज कराया गया था। संतोषी धनराज और अनिल से अपनी फिल्म के प्रोडक्शन के सिलसिले में मिले थे और उन्होंने करीब 150 करोड़ का बजट बताया था पर किसी कारण ने डील फाइनल नहीं हो सकी। जिसके बाद संतोषी ने उन्हें 17,50,000 रु. का चेक दिया था जो कि बाउंस हो गया था। धनराज और अनिल जेठानी ने अपना साइड रखते हुआ बताया, चेक बाउंस होने के बाद हमने उन्हें कई लीगल नोटिस भेजे, लेकिन उनका कोई रिस्पॉन्स नहीं आया। यही नहीं उन्होंने हमारा फोन उठाना भी बंद कर दिया। जिसके बाद हमने ये कदम उठाया है। इन फिल्मों को डायरेक्ट कर चुके संतोषी राजकुमार संतोषी फिल्म अंदाज अपना अपना को डायरेक्ट करने के अलावा दामिनी, घायल, बरसात, घातक, चाइना गेट, पुकार, लज्जा, द लीजेंड ऑफ भगत सिंह, खाकी, अजब प्रेम की गजब कहानी, फटा पोस्टर निकला हीरो जैसी फिल्मों को भी डायरेक्ट किया है। इनदिनों संतोषी बैटल ऑफ सारागढ़ी पर काम कर रहे हैं। जिसमें रणदीप हुड्डा लीड रोल में हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें PHOTOS...

अरेस्ट हुए डायरेक्टर राजकुमार संतोषी, बेल पर आए बाहर

अरेस्ट हुए डायरेक्टर राजकुमार संतोषी, बेल पर आए बाहर

Last Updated: March 08 2017, 11:46 AM

मुंबई. सलमान खान और आमिर खान की फिल्म अंदाज अपना अपना के डायरेक्टर राजकुमार संतोषी पर पुलिस केस दर्ज होने का मामला सामने आया है। दरअसल राजकुमार संतोषी ने साढ़े 17 लाख का चेक दिया था जो कि बाउंस हो गया था। जिसके चलते उनपर सेक्शन 138 के अंतर्गत निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के तहत मामला दर्ज कर, 17 जनवरी को अरेस्ट कर लिया गया था। हाल ही में 4 मार्च राजकुमार बेल पर बाहर आए हैं। ये है पूरा मामला... साल 2013 में प्रोड्यूसर धनराज और अनिल जेठानी ने राजकुमार संतोषी के खिलाफ कंपलेन फाइल की थी। धनराज और अनिल के मुताबिक, हमने राजकुमार संतोषी के साथ 1.5 करोड़ बजट की फिल्म को लेकर डिस्कशन किया था। लेकिन किसी कारण प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ। जिसके बाद संतोषी ने पैसे वापस करने के लिए साढ़े 17 लाख का चेक दिया, लेकिन वो बाउंस हो गया। इसके बाद हमने उन्हें लीगल नोटिस भेजे, लेकिन उनका कोई रिस्पॉन्स नहीं आया। यही नहीं उन्होंने हमारा फोन उठाना भी बंद कर दिया। जिसके बाद मुंबई के मजिस्ट्रेट कोर्ट ने साल 2015 में उनके खिलाफ वारंट इश्यू किया गया था। जिसके बाद उन्हें 17 जनवरी 2017 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

इस वेजिटेरियन एक्टर को मजबूरी में खाना पड़ा मीट, फिर बहाना पड़ा खून

इस वेजिटेरियन एक्टर को मजबूरी में खाना पड़ा मीट, फिर बहाना पड़ा खून

Last Updated: March 05 2017, 10:27 AM

जयपुर। किसी वेजिटेरियन शख्स को यदि अचानक मीट खाना पड़े तो ये एक्सपीरियंस वही बता सकता है। ऐसा ही हुआ बॉलीवुड एक्टर राजकुमार राव के साथ। इन्हें अपकमिंग फिल्म टेप्ड में एक सीन में मीट खाना पड़ा था। राजकुमार ने बताया कि ये काफी चैलेंजिंग था। जानिए फिल्म के किस किरदार में हैं राजकुमार& - अपनी बेहतरीन एक्टिंग के चलते राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार पा चुके एक्टर राजकुमार राव अपनी अपकमिंग फिल्म ट्रेप्ड के प्रमोशन के लिए जयपुर आए। - फिल्म के डायरेक्टर विक्रमादित्य मोटवानी और राजकुमार ने <a href='http://bhaskar.com/jaipur'>dainikbhaskar.com</a> के साथ खास बातचीत के दौरान फिल्म से जुड़े एक्सपीरियंस को शेयर किया। - राजकुमार ने बताया कि खून से चिट्ठियां लिखने के लिए नस काटनी पड़ी थी। ये अनुभव में अलग था। 20 दिन तक केवल गाजर और ब्लैक कॉफी पी - विक्रमादित्य ने बताया कि जहां सेट पर लोग तरह-तरह की चीजें खाते थे, वहीं राजकुमार केवल गाजर और ब्लैक कॉफी पीकर 20 दिन गुजार दिए। - इससे बड़ा चैलेंज और काम के प्रति डेडिकेशन क्या हो सकता है। - क्वीन फिल्म में राजकुमार के काम को देखकर ही विक्रमादित्य इनसे काफी प्रभावित थे। - ध्यान देने वाली बात है कि यह फिल्म जीवित रहने की जद्दोजहद करते हुए एक शख्स की कहानी है, जिसमें राजकुमार राव का किरदार एक कमरे में बंद हो जाता है। - उसके पास खाना, बिजली वगैरह नहीं होता है। यहां तक की बाहरी दुनिया से किसी तरह का कॉन्टैक्ट नहीं होता और इन सब परिस्थितियों के बावजूद वो खुद को जिंदा रखने की तमाम कोशिश करता है। - यह फिल्म 17 मार्च को रिलीज होगी। फोटो : मनोज श्रेष्ठ आगे की स्लाइड्स में क्लिक करके देखिए खबर की और Photos&

'ट्रैप्ड'

'ट्रैप्ड'

Last Updated: March 03 2017, 13:30 PM

राजकुमार राव स्टारर फिल्म ट्रैप्ड एक सस्पेंस थ्रिलर फिल्म हैं। जिसमें राजकुमार एक खाली फ्लैट में फंस जाते हैं और वहां से निलकने की जद्दोजहद के इर्दगिर्द पूरी फिल्म की कहानी है। बता दें, फिल्म का ट्रेलर रिलीज हो चुका है जो कि फुलऑन थ्रिलर है।

BJP MP ने तोड़ी नई पार्टी बनाने वाले आर्य की उम्मीद, ऑफर पर दिया ये रिएक्शन

BJP MP ने तोड़ी नई पार्टी बनाने वाले आर्य की उम्मीद, ऑफर पर दिया ये रिएक्शन

Last Updated: February 25 2017, 15:20 PM

कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र के भारतीय जनता पार्टी के सांसद राजकुमार सैनी ने शनिवार को अपने करीबी रोशन लाल आर्य की उम्मीदों को तोड़ डाला। रोशन लाल आर्य ने शुक्रवार को ही नई पार्टी का ऐलान करते हुए बीजेपी सांसद के लिए अध्यक्ष पद खाली छोड़ दिए जाने का ऐलान किया था। शनिवार को मीडिया से मुखातिब सांसद सैनी ने कहा कि रोशन लाल आर्य की पार्टी से अपना कोई भी संबंध नहीं है। बोले सैनी-यशपाल मलिक तोता हैं तो मैं बाज हूं... - बताते चलें कि पूर्व भाजपा नेता और हरियाणा बीज निगम के पूर्व चेयरमैन रोशनलाल आर्य ने शुक्रवार को ही अलग पार्टी बनाने का ऐलान किया है। उनकी पार्टी का नाम हरियाणा सर्वजन पार्टी होगा। आर्य ने कहा कि इस पार्टी के अध्यक्ष पद की कुर्सी सांसद राजकुमार सैनी के लिए खाली रहेगी। - रादौर के पूर्व विधायक आर्य के इस बयान से संकेत मिल रहे हैं कि देर-सबेर या तो सांसद सैनी खुद भाजपा को अलविदा कह सकते हैं या फिर गैर जाटों खासकर पिछड़ों की राजनीति करते हुए जाटों के विरुद्ध उग्र भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में भाजपा उन्हें पार्टी से निकाल सकती है। दोनों स्थितियों में सांसद सैनी के हाथों में लड्डू हैं। वैसे भी सांसद पहले ही ऐलान कर चुके कि वे अगला चुनाव विधानसभा का ही लड़ेंगे। आर्य मेरे मंच पर नजर नहीं आएंगे: सैनी - इसी बीच शनिवार को राजकुमार सैनी ने कहा कि रोशन लाल आर्य की पार्टी से अपना कोई भी संबंध नहीं है। - उन्होंने पार्टी का दावेदार होने से इनकार किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि आर्य मेरे मंच पे नजर नहीं आएंगे। जाट नेताओं को दी ये चेतावनी - दूसरी ओर सांसद सैनी ने यशपाल मलिक द्वारा तोता कहे जाने पर पलटवार करते हुए कहा कि हम बाज हैं और बाज 4 किलोमीटर ऊंचाई से भी सुई को देख लेता है। - मैं अब तक इसलिए चुप था कि प्रदेश के हालात खराब न हो। आरक्षण का मुद्दा शांत हो जाए। परन्तु ये मुद्दा शांत होने की बजाय भड़क रहा है। लोग प्रधानमंत्री का सिर काटने और मेरी जीभ काटने जैसी बयानबाजी कर रहे हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें और फोटोज......

'ट्रेप्ड' का ट्रेलर: कहीं फ्रीडम की जंग, तो कभी लेडी लव से रोमांस करते दिखे राजकुमार

'ट्रेप्ड' का ट्रेलर: कहीं फ्रीडम की जंग, तो कभी लेडी लव से रोमांस करते दिखे राजकुमार

Last Updated: February 22 2017, 16:47 PM

मुंबई. राजकुमार राव स्टारर फिल्म ट्रेप्ड का ट्रेलर रिलीज हो गया है। सस्पेंस से भरे ट्रेलर को काफी बेहतरीन तरीके से पिक्चराइज्ड किया गया है। ट्रेलर को देखकर साफ हो गया है कि फिल्म की पूरी की कहानी काफी मजेदार होने वाली है। वहीं पूरी कहानी सिर्फ राजकुमार राव के इर्दगिर्द है। हालांकि बीच में राजकुमार राव की जिंदगी की एक रोमांटिक झलक भी दिखाई जाती है लेकिन पूरी कहानी सिर्फ फ्लैट में ट्रेप्ड वाकए की है। ऐसी है कहानी... ट्रेलर में दिखाया गया है कि कैसे राजकुमार एक खाली फ्लैट में कुछ काम के लिए जाते हैं। लेकिन वो वहां से निकलते वक्त घर के अंदर ट्रेप्ड हो जाते हैं। जिसके बाद कहानी में दिखाया गया है कि कैसे राजकुमार फ्लैट से निकलने की हर कोशिश करते हैं लेकिन वो नाकामयाब रहते हैं। ऐसे में राजकुमार घर में रहते रहते मानसिक रूप से काफी परेशान हो जाते हैं। आजादी के तरसते दिखे राजकुमार ट्रेलर में राजकुमार राव फ्रीडम के लिए तरसते दिखते हैं। ट्रेलर में एक झलक राजकुमार राव के रोमांटिक साइड की भी देखने को मिलती हैं। हालांकि उनकी लेडी लब के बारे में ज्यादा कुछ नहीं दिखाया गया है। फिल्म को लुटेरा फेम विक्रमादित्य मोटवाने डायरेक्टर कर रहे हैं। फिल्म 17 मार्च को रिलीज होगी। आगे की स्लाइड्स में देखें PHOTOS... आखिरी स्लाइड में देखें ट्रेलर

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