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सुर्खियों में है ये हाईप्रोफाइल किन्नर, सीएम दंपती को बनाया बेटी-दामाद

सुर्खियों में है ये हाईप्रोफाइल किन्नर, सीएम दंपती को बनाया बेटी-दामाद

Last Updated: May 25 2016, 01:00 AM

उज्जैन सिंहस्थ में चर्चा में आए किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी सीएम दंपती (शिवराजसिंह व साधना चौहान) को बेटी-दामाद बनाकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। मुख्यमंत्री चौहान पत्नी साधनासिंह के साथ किन्नर अखाड़े के पंडाल पहुंचे थे। इससे उत्साहित अखाड़े के सदस्यों ने उनकी जमकर आवभगत की। चर्चा के दौरान लक्ष्मी ने सीएम को बताया कि देश के 12 राज्यों में किन्नर आयोग का गठन हो चुका है लेकिन मप्र में नहीं हुआ है। लक्ष्मी ने कहा कि इसका सर्कुलर मेरे पास है। इस पर सीएम ने १५ जून को सर्कुलर लेकर भोपाल आने को कहा। उनका कहना था कि भोपाल में सर्कुलर देख कर आयोग के गठन का काम शुरू करा देंगे। आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी ने साधनासिंह को भेंट देकर बेटी बना लिया। सीएम को दामाद मानते हुए उन्होंने दोनों को आशीर्वाद भी दिया। कौन है लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी? लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी लंबे समय से किन्नरों के हक के लिए काम कर रहे हैं। लक्ष्मी कई बिग बॉस के अलावा कई टीवी शोज में नजर आ चुकी हैं। समाज हित से जुड़े कई मुद्दों पर लक्ष्मी ने अपनी आवाज बुलंद की है। उज्जैन सिंहस्थ से अस्तित्व में आए किन्नर अखाड़े के गठन में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। सिंहस्थ के दौरान ही लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी को किन्नर अखाड़े का आचार्य महामंडलेश्वर भी बनाया गया। किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी की कुछ अन्य तस्वीरें देखने के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें-

फेसबुक-वॉट्सऐप पर वायरल हुए सिंहस्थ में आई सुंदर किन्नर के ये फोटो

फेसबुक-वॉट्सऐप पर वायरल हुए सिंहस्थ में आई सुंदर किन्नर के ये फोटो

Last Updated: May 23 2016, 17:56 PM

उज्जैन सिंहस्थ में अपनी सुंदरता के कारण एक किन्नर काफी चर्चित हुईं, उनका नाम है शैली राय। सिंहस्थ की शुरुआत में शैली राय किन्नर अखाड़े से जुड़ी हुई थीं, लेकिन आपसी विवाद के चलते उन्हें किन्नर अखाड़े से अलग कर दिया गया। किन्नर अखाड़े से अलग होने के बाद शैली राय परशुराम वेद विद्या प्रतिष्ठान से जुड़ गई थीं। सिंहस्थ में शैली राय के भक्तों ने उनके दर्शन किए और उनके साथ फोटो क्लिक किए। शैली के साथ क्लिक किए गए फोटो लोगों ने अपने-अपने फेसबुक अकाउंट और वॉट्सऐप पर भी शेयर किए, जिससे शैली राय के फोटो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुए। यहां देखिए शैली राय के वायरल हुए फोटो... सभी फोटो- शैली राय के फेसबुक अकाउंट से लिए गए हैं। आगे की स्लाइड्स पर देखिए शैली राय के कुछ और फोटो...

EXCLUSIVE: नागा साधुओं के ऐसे फोटो आपने कहीं नहीं देखे होंगे

EXCLUSIVE: नागा साधुओं के ऐसे फोटो आपने कहीं नहीं देखे होंगे

Last Updated: May 24 2016, 14:53 PM

मध्य प्रदेश के उज्जैन में 22 अप्रैल से चल रहे दुनिया के सबसे बड़े मेले सिंहस्थ महाकुंभ का कल (21 मई, शनिवार) समापन हो गया। शनिवार तड़के 3 बजे शुरू हुए अंतिम शाही स्नान में नागा साधुओं का उत्साह देखते ही बनता था। किसी नागा साधु ने फूलों का श्रंगार किया तो किसी ने भस्म को ही अपने पूरे शरीर पर लपेट लिया। नागा साधुओं का यह अद्भुत रूप देखकर आम जन भी उन्हें देखते ही रह गए। उज्जैन में अब ऐसा नजारा 12 साल बाद 2028 में लगने वाले सिंहस्थ महापर्व में ही देखने को मिलेगा। नागा साधुओं के एक्सक्लूसिव फोटो देखने के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें- सभी फोटो- काईद जौहर

सिंहस्थ में 400 महिलाएं बनीं नागा साध्वी, जानिए अब कैसा होगा इनका जीवन

सिंहस्थ में 400 महिलाएं बनीं नागा साध्वी, जानिए अब कैसा होगा इनका जीवन

Last Updated: May 21 2016, 12:47 PM

सिंहस्थ की पहली नागा दीक्षा 5 मई को हुई तो सातवीं 19 मई को। महिला साध्वियों की दीक्षा के तीन कार्यक्रम हुए। पहली बार 400 साध्वियां दीक्षित हुईं। इनमें एक आस्ट्रेलिया की भी शामिल हैं। पांच हजार साधु-साध्वियों को कठिन परीक्षा के बाद दीक्षित किया। मां क्षिप्रा के घाटों पर सभी ने पिछली तीन और आगामी तीन पीढ़ियों के नाम से 16 पिंड के तर्पण किए। 17वां पिंडदान अपने स्थूल शरीर और अपने नाम का भी कर दिया। गुरु से नया नाम मिला और अब यही सबकी पहचान भी बन गए हैं। यह सभी अब धर्म ध्वजा लेकर देशभर में निकलेंगे। इनमें देशभर से आई महिला साध्वियां थीं। आगे की स्लाइड्स में जानिए संन्यासिनों की कुछ और खास बातें...

नागाओं ने किया अंतिम शाही स्नान, अब 12 साल बाद दिखेंगे ये नजारे

नागाओं ने किया अंतिम शाही स्नान, अब 12 साल बाद दिखेंगे ये नजारे

Last Updated: May 21 2016, 15:43 PM

उज्जैन. शनिवार तड़के 3 बजे उज्जैन की क्षिप्रा नदी के दत्त और रामघाट पर नागा साधुओं ने सिंहस्थ 2016 का आखिरी शाही स्नान किया। एक महीने से चल रहा यह मेला इस शाही स्नान के साथ ही आज समाप्त हो जाएगा। इसके बाद 12 साल बाद 2028 में उज्जैन में सिंहस्थ लगेगा। आखिरी शाही स्नान के लिए करीब 20 लाख श्रद्धालू उज्जैन पहुंच चुके हैं। दिन में बढ़ेगी तादाद... - प्रशासन को उम्मीद है कि दिन में श्रद्धालुओं की तादाद काफी ज्यादा हो सकती है। हालांकि इसके लिए सारे अरेंजमेंट्स किए गए हैं। - सुबह नौ बजे करीब हल्की सी दिक्कत हुई जब आम लोगों के लिए स्नान की शुरूअात हुई। इससे पहले की हालात बिगड़ते। फौरन एक्शन लिया गया और सब ठीक हो गया। - मेला भले ही आज समाप्त हो रहा हो लेकिन 28 मई तक संतों और श्रद्धालुओं का जमावड़ा जारी रहेगा। प्रशासन ने इसके लिए व्यवस्था भी की है। - शनिवार को सबसे पहले जूना अखाड़े के साधुओं ने स्नान किया। दत्त घाट पर निशान भाले की पूजन के बाद नागाओं ने क्षिप्रा में डुबकी लगाई। इसके बाद आवाहन और अग्नि अखाड़े के नागाओं और महामंडलेश्वरों ने स्नान किया। इन तीन अखाड़ों के बाद सुबह करीब 4.30 बजे निरंजनी और आनंद अखाड़े के साधुओं ने स्नान किया। फिर महानिर्वाणी और अटल अखाड़े आए। - रामघाट पर तीनों वैष्णव अखाड़ों निर्मोही, निर्वाणी और दिगंबर ने स्नान किया। इनके साथ तीनों सिख अखाड़ों बड़ा उदासीन, नया उदासीन ने भी डुबकियां लगाईं। सबसे अंत में निर्मल अखाड़े के संतों ने स्नान किया। ये रहा हाल - 22 अप्रैल को पहले शाही स्नान के साथ शुरू हुआ सिंहस्थ महाकुंभ एक महीने तक चला। - इस सिंहस्थ में मध्य प्रदेश सरकार ने रिकार्डतोड़ खर्च किया। माना जा रहा है कि मेले पर करीब 3500 करोड़ रुपए खर्च किया गया। - इसमें 2500 करोड़ रुपए के स्थायी निर्माण उज्जैन शहर में किए गए थे। करीब 3 करोड़ लोग इस दौरान उज्जैन आए। सभी फोटो - काईद जौहर

परंपरा: कढ़ी पकौड़ा खाकर सिंहस्थ से विदा होते हैं नागा साधु

परंपरा: कढ़ी पकौड़ा खाकर सिंहस्थ से विदा होते हैं नागा साधु

Last Updated: May 22 2016, 08:31 AM

आज (21 मई, शनिवार) सिंहस्थ महापर्व का अंतिम शाही स्नान है। स्नान के बाद नागा साधु कढ़ी पकौड़ा खाकर अपने-अपने निर्धारित स्थान पर चले जाएंगे। बेसन के कढ़ी पकौड़ा अखाड़े की परंपरा है। अखाड़े में कढ़ी पकौड़ा बनने का मतलब है आज सिंहस्थ में साधुओं का अंतिम दिन है और उन्हें यहां से पलायन करना है। इसीलिए साधु समाज में कहते हैं कढ़ी पकौड़ा बेसन का, रास्ता पकड़ो स्टेशन का।     कुछ साधु रुकेंगे-कुछ चले जाएंगे साधु-संतों और श्रद्धालुओं की इच्छा है कि मेला कुछ दिन और रहे। प्रशासन ने भी 28 मई तक मेले की व्यवस्थाएं बरकरार रखने का फैसला लिया है। यही वजह है कि आधे से ज्यादा साधु-संन्यासी सिंहस्थ समाप्ति के बाद भी मेले में रहेंगे। कुछ बड़े पंडालों में 24 मई तक धार्मिक कार्यक्रम चलते रहेंगे। यहां श्रद्धालु भी ठहरे हुए हैं। अन्नक्षेत्र भी कुछ दिन और नियमित चलेंगे। ऐसे में मेले की रंगत 28 मई तक बनी रहेगी।    सिंहस्थ से जुड़े कुछ रोचक फैक्ट्स जानने के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें-  

साधु करते हैं इतनी कठिन तपस्या, जान कर दंग रह जाएंगे आप

साधु करते हैं इतनी कठिन तपस्या, जान कर दंग रह जाएंगे आप

Last Updated: May 21 2016, 01:00 AM

साधु-संत की अपनी अलग ही दुनिया है। बाहर से सामान्य दिखने वाले इन साधुओं के भी कई नाम व प्रकार होते हैं। कुछ साधु अपने हठयोग के लिए जाने जाते हैं कुछ अपने संप्रदाय के नाम से। उज्जैन में चल रहे सिंहस्थ महापर्व में ऐसे अनेक साधु-संतों का जमावड़ा लगा हुआ है जो अपने हठयोग के कारण लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। आज हम आपको साधुओं से जुड़ी कुछ ऐसी बाते बता रहे हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं- साधु-संतों के हठ योग के बारे में जानने के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें-

सिंहस्थ में साध्वी प्रज्ञा ने तोड़ा अनशन, शिवराज सरकार को कोसा

सिंहस्थ में साध्वी प्रज्ञा ने तोड़ा अनशन, शिवराज सरकार को कोसा

Last Updated: May 19 2016, 10:37 AM

2008 के मालेगांव धमाकों में NIA की ओर से क्लीनचिट मिलने के बाद साध्वी प्रज्ञा लगातार चर्चाओं में है। कुंभ में स्नान करने की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठी साध्वी प्रज्ञा की बात आखिरकार मान ली गई। देवास कोर्ट के आदेश के बाद भोपाल पुलिस बुधवार को साध्वी प्रज्ञा को लेकर उज्जैन सिंहस्थ में पहुंच चुकी हैं। साध्वी प्रज्ञा क्षिप्रा नदी में स्नान करेंगी। उज्जैन आकर उन्होंने एक बच्चे के हाथ से मिठाई खाकर अपना आमरण अनशन तोड़ दिया है। उज्जैन पहुंचने के बाद सबसे पहले साध्वी प्रज्ञा विश्व हिंदु परिषद के रुद्रसागर स्थित कैंप में गईं। यहां मीडिया के सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि शिवराज सरकार कोर्ट के आदेशों की लगातार अवहेलना कर रही थी, वो कब से सिंहस्थ आना चाहती थीं लेकिन सरकार इस मामले को लगातार टाल रही थी। अंततः कोर्ट को ही इसमें सख्त निर्णय लेना पड़ा। मकोका हटने और एनआईए की जांच में क्लिन चीट मिलने पर उन्होंने कहा कि आठ साल जेल में पीड़ा भोगी है, निर्दोष होने के बाद भी उन्हें आरोपी बनाया गया। जेल से रिहा होने के बाद वे इसे लेकर कड़ा कदम उठाएंगी और इस जांच में जो दोषी हैं उन्हें दंड दिलवाएंगी। क्या है पूरा मामला? 2008 में हुए मालेगांव बम ब्लास्ट में NIA ने साध्वी प्रज्ञा को आरोपी बनाया था। साथ ही उन पर मकोका के अतंर्गत भी मामला दर्ज किया था। 13 मई 2016 को NIA ने अदालत में दाखिल की गई सप्लीमेंट्री चार्जशीट में कहा कि साध्वी प्रज्ञा समेत 6 लोगों के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं। NIA से क्लीनचिट मिलने के बाद साध्वी प्रज्ञा ने मांग की थी उन्हें उज्जैन में चल रहे सिंहस्थ महापर्व में स्नान करने दिया जाए। शुरू में भोपाल पुलिस सुरक्षा कारणों के चलते साध्वी प्रज्ञा को उज्जैन लाने से बचती रही, लेकिन देवास कोर्ट के आदेश पर उन्हें यहां लाया गया है। साध्वी प्रज्ञा से जुड़ी कुछ खास बातें जानने के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें-

सिंहस्थ: चौथे पर्व स्नान में उमड़े लाखों भक्त, लगाई आस्था की डुबकी

सिंहस्थ: चौथे पर्व स्नान में उमड़े लाखों भक्त, लगाई आस्था की डुबकी

Last Updated: May 15 2016, 13:37 PM

उज्जैन के क्षिप्रा तट पर आज (15 मई, रविवार) सिंहस्थ महापर्व का चौथा पर्व स्नान किया जा रहा है। लाखों भक्त शनिवार की रात 12 बजे से अब तक क्षिप्रा नदी में आस्था की डुबकी लगा चुके हैं। गौरतलब है कि सिंहस्थ महापर्व के कुछ ही दिन शेष बचे हैं, ऐसे में श्रद्धालुओं का आना लगातार जारी है। 21 मई, शनिवार को अंतिम शाही स्नान के साथ ही सिंहस्थ महापर्व 2016 का समापन हो जाएगा। चौथे पर्व स्नान की एक्सक्लूसिव तस्वीरें देखने के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें- अब ये स्नान शेष 17 मई, मंगलवार (मोहिनी एकादशी) 19 मई, गुरुवार (प्रदोष व्रत) 20 मई, शुक्रवार (नृसिंह जयंती) 21 मई, शनिवार (प्रमुख शाही स्नान) चौथे पर्व स्नान की अन्य तस्वीरें देखने के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें- तस्वीरों का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। सभी फोटो- काईद जौहर

किन्नर नहीं फिर भी सिंहस्थ में बनवा दिया 'अखाड़ा', विवादों में रहता है ये संत

किन्नर नहीं फिर भी सिंहस्थ में बनवा दिया 'अखाड़ा', विवादों में रहता है ये संत

Last Updated: May 14 2016, 11:00 AM

भोपाल। उज्जैन सिहंस्थ मेले को सबसे जुदा कर रहा है यहां मौजूद किन्नरों का अखाड़ा। किसी भी कुंभ मेले में पहली बार किन्नरों का अखाड़ा भाग ले रहा है अौर पहली बार ही बकायदा कोई किन्नर महामंडलेश्वर बना है। किन्नरों के इस अखाड़े के पीछे की सोच है ऋषि अजय दास की। अजय दास भोपाल के रहने वाले हैं और कई बार विवादों में आए। वे राधे मां के साथ भी नजर आ चुके हैं। जानिए, कौन हैं अजय दास और कैसे किया किन्नर अखाड़े का गठन? अजय दास खुद किन्नर नहीं है, लेकिन उन्होंने उज्जैन सिहंस्थ मेले में किन्नर अखाड़े की न सिर्फ पैरवी की, बल्कि उनके अखाड़े की पेशवाई निकलवाई और सिहंस्थ मेले में किन्नर अखाड़े को जगह भी दिलवाई। अजय दास एक विवादित पुस्तक विवाह एक नैतिक बलात्कार लिख चुके हैं, जिसके विमोचन के दौरान लव गुरू मटुकनाथ और जूली और अजय दास के साथ कुछ हिंदुवादी संगठनों ने मारपीट की थी। उन्होंने अपने गुरू जगन्नाथ दास महामंडलेश्वर से दीक्षा ली। अजय दास बताते हैं कि धर्म में मौजूद आडंबर को खत्म करने के लिए उन्होंने प्रयास शुरू किए। वे बताते हैं कि कुछ समय किन्नरों के साथ होने वाले भेदभाव को उन्होंने देखा तो काफी बुरा लगा। इसके बाद उन्होंने किन्नरों के हित के लिए काम करना शुरू कर दिया। अजय दास अब किन्नर अखाड़े की व्यवस्था और प्रबंधन देखते हैं। - अजय दास बताते हैं कि किन्नरों को उनका सम्मान दिलाने के लिए अखाड़ा बनाना जरूरी था। - इस अखाड़े का शंकराचार्य समेत कई धार्मिक गुरुओं ने विरोध किया, फिर भी सरकार को किन्नरों को भी सिहंस्थ मेले में जगह देनी पड़ी। - अखाड़ा परिषद ने अभी भी किन्नर अखाड़ा को मान्यता नहीं दी है। - अजय दास बताते हैं कि सिहंस्थ मेले के आवंटन लेटर में सरकार ने किन्नर अखाड़ा शब्द लिखा है, इससे साबित होता है कि उन्होंने हमें अखाड़े के रूप में मान्यता दे दी है। - दरअसल, कुंभ मेले में साधु-संतों के 13 अखाड़े होते हैं, ये अखाड़े बेहद प्राचीन हैं और बहुत पुराने समय से इन अखाड़ों की स्नान पर्व की परंपरा चल रही है। इन्हीं अखाड़ों में एक नया अखाड़ा किन्नर अखाड़ा जुड़ा है। - अजय दास ने किन्नर-तृतीय प्रकृति शीर्षक से एक किताब भी लिखी, जिस पर भी काफी विवाद हुआ। कैसा है किन्नर अखाड़ा? - हर अखाड़े की अपनी परंपरा, तिलक, आरती, माला, शास्त्र, शस्त्र अलग-अलग होते हैं। अखाड़े का एक पूरा विधान होता है। अखाड़े का प्रमुख महामंडलेश्वर होते हैं। - किन्नर अखाड़े का महामंडलेश्वर किन्नर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी को बनाया गया है। - अखाड़े की आराध्य अर्धनारीश्वर व बहुतेरा माता होंगी। - अखाड़ा जगदंबा भवानी की आरती करेगा। - अखाड़े का तिलक त्रिपुंड होगा। जिसमें बीच में बिंदी होगी और ऊपर श्री लिखा होगा। - अखाड़े की माला वैजयंती की माला होगी, जिसमें तीन मुखी रुद्राक्ष होंगे। तीन मुखी रुद्राक्ष नर, नारी और किन्नर का प्रतीक रहेगा। - इस अखाड़े का शास्त्र शिव पुराण और शस्त्र तलवार होगी। - अखाड़े का ध्वज तिकोन सफेद रंग का होगा,जिसमें गोल्डन कलर की बॉर्डर होगी। - अखाड़े का वस्त्र सफेद और पीला होगा। सफेद शांति का प्रतीक अौर पीला शत्रु के नाश का प्रतीक होगा। आगे की स्लाइड में देखें अजय दास की राधे मां और किन्नर अखाड़े के साथ फोटोज...

सिंहस्थ: आवाहन अखाड़े में चली तलवारें- गोलियां, 10 साधु घायल

सिंहस्थ: आवाहन अखाड़े में चली तलवारें- गोलियां, 10 साधु घायल

Last Updated: May 13 2016, 10:59 AM

उज्जैन में चल रहे सिंहस्थ महापर्व में गुरुवार (12 मई) को आवाहन अखाड़े में वर्चस्व को लेकर साधु-संतों में विवाद हो गया। त्रिशूल, डंडे, तलवार, भाले, चिमटे लेकर वे एक-दूसरे पर टूट पड़े। गोली भी चली। संघर्ष में 10 साधु घायल हुए हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए इसे आपसी विवाद बता रहे हैं। ऐसे हुआ विवाद अखाड़े में चार श्रीमहंत और चार अष्टकौशल महंत के चुनाव हुए। वरिष्ठ महंतों और आचार्यों ने नाम तय कर दिए। तीन गादी पर हुए मनोनयन पर कोई विवाद नहीं हुआ, किंतु 16 मढ़ी की गादी पर श्रीमहंत महामंडलेश्वर रसराजपुरी व अष्टकौशल महंत राघवपुरी के मनोनयन को लेकर संतों का एक पक्ष नाराज हो गया। उनके 50 से अधिक समर्थकों ने सुबह 10 बजे के करीब अखाड़ा में पहुंचकर गादी के सामने विरोध करना शुरू कर दिया। इसी दौरान मारपीट हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तीन फायर भी हुए, तलवारें, त्रिशूल, भाले व लाठियां चलीं। पहले बोले आपसी विवाद बाद में बदला बयान मामले में अखाड़े के राष्ट्रीय महामंत्री व सिंहस्थ मेला प्रभारी महंत सत्यगिरि बोले यह आपसी मामला है। फिर बोले महामंडलेश्वर कृष्णानंद गिरि चुनौती देकर गए हैं, फिर आएंगे। हम विवाद नहीं चाहते, किंतु गुंडों को लेकर उत्पात मचाना ठीक नहीं। वहीं, कृष्णानंद गिरि का कहना है हम तो बात करने गए थे। माधवनगर अस्पताल में भर्ती ओमपुरी की जांघ पर गोली लगी है। राजेंद्र पुरी के गले व तेजपुरी के पैर में लगी है। महंत राघवपुरी, गुरु रसराज पुरी की शिकायत पर पुलिस ने महंत ब्रजेशपुरी, अमर सदानंदपुरी, कृष्णानंद पुरी और विवेकपुरी के खिलाफ जानलेवा हमले ओर जान से मारने की धमकी का दर्ज किया। ऋषिराजपुरी से गादी छुड़ाना चाहते हैं राघव पुरी का कहना है कि चुनाव हो चुका था, जिसमें ऋषिराज पुरी श्रीमहंत चुने गए। उनसे गादी छुड़ाना चाहते थे। कृष्णानंदपुरी महाराज अपने चेलों को पद दिलवाना चाहते थे। वे 10-12 हमलावर लेकर आए थे। विवाद की वजह से इस चुनाव प्रक्रिया को मान्य नहीं किया जाएगा। उक्त पदों के लिए फिर से चुनाव होंगे। अखाड़ा ही विवाद का हल निकालेगा। दूसरे पक्ष बोला श्री महंत के लिए अवधूतगिरि महाराज, अमरीश भारती महाराज, सोमगिरि महाराज, रसराजपुरी महाराज व अष्ट कौशल महंत के लिए सोमेश्वर गिरि, सत्यानंद भारती, अजय गिरि, राघव गिरि चुने गए। एक पक्ष का दावा श्री महंत के लिए ऋषिराज पुरी, अष्टकौशल महंत राघव पुरी, कारोबारी अवधेश पुरी, कोतवाल विद्यानंद व भंडारी के लिए सनातन पुरी को चुना गया। रुपए लिए पर गादी नहीं दी राहुल पुरी का आरोप है श्रीमहंत बनाने के लिए रुपए लिए जाते हैं। हमसे भी रुपए लिए लेकिन गादी नहीं दी गई। ब्रजेश पुरी श्रीमहंत बनने जा रहे थे। उनके लिए अखाड़े के अध्यक्ष अरमसबदानंदजी का समर्थन मिला था। उनके समर्थन को महामंत्री सत्य गिरि व श्रीमहंत नीलकंठ गिरि ने नहीं माना। उन्हीं के इशारे पर हमला हुआ है। ये घायल, जिला अस्पताल में भर्ती राघव पुरी, राजेश गिरि, भोला गिरि, सनातनपुरी, नागेंद्र पुरी, राहुल पुरी नागा बाबा, महेंद्र राव पुरी, राजेंद्र गिरि सहित 10 साधु घायल हुए हैं। इन्हें जिला अस्पताल में भर्ती किया है। सभी की हालत खतरे से बाहर है। राहुल पुरी को पैर पर त्रिशूल लगा है, बाकी को चिमटे व डंडे से चोट आई है। अन्य तस्वीरें देखने के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें- सभी फोटो- काईद जौहर

रात 3 बजे अघोर तांत्रिक ने क्षिप्रा तट पर की विशेष पूजा

रात 3 बजे अघोर तांत्रिक ने क्षिप्रा तट पर की विशेष पूजा

Last Updated: May 11 2016, 18:07 PM

मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात 3 बजे क्षिप्रा तट स्थित रामघाट पर अघोर तांत्रिक योगेश्वरानंद महाराज ने विशेष पूजा की। ये पूजा करीब 5 घंटे तक चली। वृंदावन से आए बाल योगेश्वरानंद महाराज ने बताया कि सिंहस्थ में जो भी दैवीय आपदा आई, वह यहां चले ढोंग के कारण हुई। तंत्र के नाम पर कोई मिर्च से साधना करने बैठा तो किसी ने कोई और ढोंग रचाया। बड़े-बड़े दावे किए कि गुरु चांडाल योग का असर अब खत्म हो गया। इन ढोंगी तांत्रिकों की हकीकत भी सब के सामने आ गई। चांडाल योग ऐसे खत्म नहीं होता। साधना गुप्त होती है, ढोल पीट-पीट कर बताई नहीं जाती। महाकाल से निवेदन किया है कि वे अपनी कृपा भक्तों पर बनाएं रखें। अन्य तस्वीरें देखने के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें- सभी फोटो- काईद जौहर

इस कैम्प में हर साधक है डिग्रीधारी, करियर व परिवार छोड़ लिया संन्यास

इस कैम्प में हर साधक है डिग्रीधारी, करियर व परिवार छोड़ लिया संन्यास

Last Updated: May 09 2016, 13:36 PM

सिंहस्थ 2016 के करीब 3000 कैम्पों में एक ऐसा भी कैम्प है जो सबसे अलग है। इस कैम्प की खासियत यहां का वैभव नहीं, साधक हैं। इस कैम्प से जुड़ा हर साधक कोई आम आदमी नहीं है, अच्छी-खासी डिग्री और करियर को छोड़ संन्यास की राह पर चलने वाले युवा है। कोई एमबीए, कोई डॉक्टर, कोई एम.टेक. तो कोई इंजीनियर। यहां आप जिससे मिलेंगे, उसके पास ऐसी ही कोई भारी-भरकम डिग्री होगी। ये कैम्प है दिव्य ज्योति जागृति संस्थान का। समाधिस्थ आशुतोष महाराज द्वारा 1983 में स्थापित इस संस्थान से इस समय लाखों युवा जुड़े हैं जो अपना परिवार, करियर सब कुछ छोड़कर समाज सेवा में लगे हैं। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, कन्या भ्रूण हत्या, पशु संरक्षण विकलांग पुनर्वास, चिकित्सा, ध्यान, योग जैसे क्षेत्रों में काम कर रहा है। इस संस्थान की सबसे बड़ी खूबी यहां के साधक और साध्वियां हैं। ये सभी युवावस्था में ही परिवार और करियर को छोड़कर आशुतोष महाराज के मिशन से जुड़े और संन्यासी जीवन जीते हुए युवाओं को सनातन धर्म, समाज सेवा आदि से जोड़ रहे हैं। साध्वी ओमप्रभा भारती कनाडा से आईँ साध्वी ओमप्रभा भारती 1995 से इस संस्थान से जुड़ी हैं और 2005 में उन्होंने संस्थान में पूर्णकालीन साध्वी बनीं। कनाडा में साइकोलॉजी में मास्टर डिग्री कर चुकी साध्वी कहती हैं कि उनका मिशन समाज को बेहतर बनाने के लिए है। वे ध्यान और योग की मदद से युवाओं को प्रेरित कर रही हैं। समाज को बेहतर बनाना उनका उद्देश्य है। इस कैम्प के अन्य डिग्रीधारी साधकों के बारे में जानने के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें-

उज्जैन में 'खूनी नागाओं' ने ली दीक्षा, किया खुद का पिंडदान

उज्जैन में 'खूनी नागाओं' ने ली दीक्षा, किया खुद का पिंडदान

Last Updated: May 06 2016, 17:59 PM

उज्जैन में चल रहे सिंहस्थ महापर्व में गुरुवार (5 मई) को जूना अखाड़ा में नागा दीक्षा हुई। एक हजार से अधिक नागा साधुओं को जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी ने दीक्षा दी। इनमें 8 साल से लेकर 60 साल तक के साधु शामिल हैं। शुक्रवार को इन सभी को नया नाम दिया जाएगा। सबसे पहले जूना अखाड़ा की छावनी में सभी नागा दीक्षार्थियों का मुंडन किया गया। इसके बाद उन्होंने क्षिप्रा नदी में अपना व अपने परिवार का पिंडदान किया। इसके बाद रात को गोपनीय प्रक्रिया को तहत सभी को शपथ दिलाई गई। क्यों कहते हैं खूनी नागा? देश में 4 स्थानों पर कुंभ मेला आयोजित किया जाता है। इसी मेले में नए नागा साधुओं को दीक्षा दी जाती है। हरिद्वार में जिन्हें नागा बनाया जाता है, उन्हें बर्फानी नागा कहते हैं। इसी तरह इलाहाबाद में दीक्षा लेने वाले नागा को राजराजेश्वर व नासिक में दीक्षा लेने वाले को खिचड़िया नागा कहते हैं। उज्जैन में दीक्षा लेने वाले साधुओं को खूनी नागा कहा जाता है, क्योंकि किसी समय यहां शैव व वैष्णव साधुओं में खूनी संघर्ष हुआ था। अन्य अखाड़ों में तैयारी निरंजनी अखाड़े में भी नए संन्यासियों को दीक्षा की तैयारी की जा रही है। श्रीमहंत नरेंद्र गिरि के अनुसार संभावना है कि दूसरे शाही स्नान के बाद दीक्षा का कार्यक्रम होगा। इसके लिए सूची बनाई जा रही है। अन्य अखाड़ों में भी तैयारी शुरू हो गई है। सूची के बाद दीक्षा के लिए मुहूर्त तय होंगे। नागा बनने की पूरी प्रक्रिया जानने के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें- सभी फोटो- काईद जौहर

राज्यसभा: BJP पहली बार 50 पार तो कांग्रेस 60 के अंदर सिमटी, हरियाणा में उलटफेर

राज्यसभा: BJP पहली बार 50 पार तो कांग्रेस 60 के अंदर सिमटी, हरियाणा में उलटफेर

Last Updated: June 12 2016, 11:43 AM

नई दिल्ली. राज्यसभा की सात राज्यों की 27 सीटों के लिए शनिवार को हुई वोटिंग के नतीजे आ गए। इनमें 11 सीटें बीजेपी ने जीत ली हैं। इसके साथ ही, उसने सदन में पहली बार 50 का आंकड़ा पार कर लिया। उसकी अब 53 सीटें हैं। कांग्रेस पहली बार 60 के अंदर सिमट गई है। अब राज्यसभा में उसके कुल 59 मेंबर हैं। यूपी से कांग्रेस के कपिल सिब्बल जीते तो बीजेपी समर्थित प्रीति महापात्रा हार गईं। वहीं, एमपी में भी बीजेपी तीन में से दो ही सीट जीत पाई। कांग्रेस के विवेक तन्खा की अपर हाउस में एंट्री हो गई। हरियाणा में उलटफेर हुआ। यहां एक सीट बीजेपी के खाते में गई। दूसरी सीट पर बीजेपी के सपोर्ट से खड़े हुए सुभाष चंद्रा कांग्रेस में फूट का फायदा उठा कर जीत गए। आरके आनंद को पार्टी की अंदरूनी कलह और 14 वोट रिजेक्ट होने के कारण हार का सामना करना पड़ा। किस राज्य से कौन जीता... - राज्यसभा के लिए 15 राज्यों से 57 सीटें खाली हुई थीं। इनमें से 14-14 सीटें बीजेपी और कांग्रेस की थीं। - 7 सपा की, 5 जदयू, 3-3 बीजेडी और एआईएडीएमके से थीं। - 2-2 सीटें बसपा, डीएमके, एनसीपी और टीडीपी और 1-1 वाइएसआर कांग्रेस, शिवसेना और शिरोमणि अकाली दल से खाली हुई थीं। - 8 राज्यों से 31 मेंबर निर्विरोध चुने गए। - 7 राज्यों की 27 सीटों पर चुनाव हुआ। - राजस्थान की चारों सीटें बीजेपी ने जीत ली। यहां कांग्रेस के सपोर्ट से खड़े निर्दलीय कैंडिडेट को हार मिली। - यूपी में 11 सीटों पर हुई वोटिंग में 7 सपा, 2 बीएसपी और 1-1 कांग्रेस और बीजेपी के खाते में गई। - यहां बीजेपी ने निर्दलीय प्रीति महापात्रा को खड़ा करके चुनाव रोचक बना दिया था। लेकिन वो उन्हें जिता नहीं पाई। - झारखंड में बीजेपी दोनों सीटें जीतने में सफल रही। - मध्य प्रदेश में 2 सीटें बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के खाते में गई।(<a href='http://www.bhaskar.com/news-ht/c-58-3039829-bp0851-NOR.html'>पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें</a>) ये बड़े चेहरे जीते कपिल सिब्बल, सुभाष चंद्रा, वेंकैया नायडू, चौधरी बीरेंद्र सिंह, मुख्तार अब्बास नकवी, निर्मला सीतारमण, जयराम रमेश, आस्कर फर्नांडीज, केसी राममूर्ति। बीजेपी को चार सीटों का हुआ फायदा - राज्य सभा की खाली हुई 57 सीटों में 14 बीजेपी के पास थीं। चुनावों के बाद उसके पास 17 सीटें हो गई हैं। यानी तीन सीटों का सीधा फायदा। - सुभाष चंद्रा भी बीजेपी के सपोर्ट से जीते हैं। उनको भी मिला लिया जाए तो बीजेपी 4 सीटों के मुनाफे में रही। कांग्रेस को हुआ नुकसान - चुनाव के बाद कांग्रेस की राज्यसभा में पांच सीटें कम हो गई हैं। - उसके 14 सांसद रिटायर हुए थे। लेकिन उसे केवल 9 सीटें ही मिलीं। इन राज्यों में वोटिंग राज्य राज्यसभा की सीटें किसे कहां कितनी सीटें मिलीं यूपी 11 7 SP, 2 BSP, 1 BJP, 1 कांग्रेस राजस्थान 4 4 BJP कर्नाटक 4 3 कांग्रेस, 1 BJP मध्य प्रदेश 3 2 BJP, 1 कांग्रेस झारखंड 2 2 BJP हरियाणा 2 1 BJP, 1 निर्दलीय(BJP के सपोर्ट से) उत्तराखंड 1 1 कांग्रेस किसके खाते में कितनी सीटें पार्टी सीटें जीतीं बीजेपी 11 सपा 7 कांग्रेस 6 बसपा 2 निर्दलीय 1 अब राज्यसभा में क्या है स्थिति? पार्टी / गठबंधन सीटें NDA (भाजपा, टीडीपी, अकाली, शिव सेना) 72 UPA (कांग्रेस, डीएमके, केरल कांग्रेस) 66 अन्य (सपा, बसपा, एडीएमके, टीएमसी, जेडीयू) 107 राज्यसभा : भाजपा की ताकत बढ़ी, लेकिन बिल पास कराने लायक नहीं - भाजपा को राज्यसभा चुनाव में चार सीटों का फायदा हुआ। वह पहली बार 50 का आंकड़ा पार करने में कामयाब रही। - लेेकिन इससे बिल पास कराने का समीकरण नहीं बदला है। - बहुचर्चित जीएसटी बिल के लायक तो बिल्कुल भी नहीं, जाे कॉन्स्टिट्यूशन बिल है। - इसे पास कराने के लिए तो 245 सदस्यीय सदन में दो-तिहाई वोट यानी कम से कम 164 सीटें चाहिए। - चुनाव नतीजों से साफ है कि राज्यसभा में कांग्रेस कमजोर हुई है। जबकि दूसरे दल मजबूत बन कर उभरे हैं। - सदन की दो सबसे बड़ी पार्टियां कांग्रेस और भाजपा हैं। इन दोनों की 59 आैर 53 सीटें मिला दें तो 112 ही होती हैं। - यानी किसी भी बिल को पास करने का समीकरण दूसरे दलों के पक्ष में हैं। - इनमें सपा (19), एडीएमके (13), जेडीयू (10), टीएमसी (12) और बसपा (6) प्रमुख हैं। - इन पांच पार्टियों के पास ही 60 सीटें हैं। ये पांचों एनडीए और कांग्रेस की अगुआई वाले यूपीए में भी शामिल नहीं हैं। - ऐसे में, किसी भी बिल को पास कराने के लिए ये पार्टियां निर्णायक साबित होंगी। संभाजी राजे राज्यसभा के लिए नॉमिनेट - राज्यसभा के लिए खाली एक नॉमिनेटेड मेंबर की सीट पर भी नए नाम का एलान हो गया है। - सोशल एक्टिविस्ट संभाजी राजे छत्रपति को राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया गया है। - राजे छत्रपति शिवाजी के वंशज हैं। - सरकार ने पहले प्रणब पांड्या को नॉमिनेट किया था। लेकिन उन्होंने इस प्रपोजल को ठुकरा दिया था। यूपी में क्यों हुआ बवाल... - सपा के बागी नेता गुड्डू पंडित ने आरोप लगाया कि सपा नेता पवन पांडेय ने बैलेट छीनने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि सपा नेताओं ने मुझे और मेरे भाई मुकेश शर्मा को जान से मारने की धमकी दी। इसके बावजूद हमने वोट डाला। - बीजेपी MLA संगीत सोम ने कहा है कि बीजेपी के वोटर्स से सपा नेताओं ने बैलेट पेपर छीनने की कोशिश की। - बीजेपी के कई नेताओं ने कहा कि उन्हें वोट देने से रोकने की कोशिश हुई। - पीस पार्टी के अध्यक्ष अयूब खान ने कहा है कि पीस पार्टी कांग्रेस को वोट कर रही है और जो विधायक पार्टी लाइन से हटकर वोट कर रहे हैं, उन पर कार्रवाई होगी। आगे की स्लाइड्स में देखें PHOTOS...

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