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Surgical Strike

सर्जिकल स्ट्राइक के लिए सेना के 3 अफसरों और 1 जवान को दिया गया शौर्य चक्र

सर्जिकल स्ट्राइक के लिए सेना के 3 अफसरों और 1 जवान को दिया गया शौर्य चक्र

Last Updated: April 06 2017, 22:18 PM

नई दिल्ली. राष्ट्रपति भवन में गुरुवार को हुए रक्षा सम्मान समारोह में सेना के तीन अफसरों और एक जवान को सर्जिकल स्ट्राइक के लिए शौर्य चक्र दिया गया। इस दौरान 1 कीर्ति चक्र, 13 शौर्य चक्र, 15 परम विशिष्ट सेवा मेडल और दो उत्तम युद्ध सेवा मेडल दिए गए। प्रेम बहादुर रेश्मी को मरणोपरांत कीर्ति चक्र... - गोरखा रायफल के लांस हवलदार प्रेम बहादुर रेश्मी मगर को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। - 13 शौर्य चक्रों में से 4 मरणोपरांत दिए गए। जम्मू कश्मीर पुलिस के हैड कांस्टेबल संजवान सिंह, राष्ट्रीय रायफल्स के नायब सूबेदार के. वी. सुब्बा रेडडी, नायक गावडे पांडुरंग महादेव और एनएसजी के लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन ई. के. को मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। कब हुआ था सर्जिकल स्ट्राइक - 18 सितंबर को सीमापार से आए 4 आतंकियों ने उड़ी में आर्मी हेडक्वार्टर पर हमला किया था। इसमें 19 जवान शहीद हो गए थे। - हमले के 10 दिन बाद (28 सितंबर की रात) आर्मी ने पहली बार LoC पार की। PoK में घुसकर 4 आतंकी ठिकाने तबाह किए थे। - इस ऑपरेशन में करीब 40 आतंकी मारे गए और कई जंगल में भाग गए थे। ऑपरेशन को आर्मी के पैरा कमांडो ने अंजाम दिया था। - इसे उड़ी हमले का जवाब माना गया। अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों ने आतंक के खिलाफ भारत के सर्जिकल स्ट्राइक को सपोर्ट किया।

दीवारों से सिर टकराता था, बोलता था मुझे मार दो: PAK से छूटकर आए सैनिक का बयान

दीवारों से सिर टकराता था, बोलता था मुझे मार दो: PAK से छूटकर आए सैनिक का बयान

Last Updated: March 25 2017, 13:32 PM

नई दिल्ली. भारत को सौंपे गए सैनिक चंदू बाबूलाल छवन (22) ने कहा कि पाकिस्तान में कैद के दौरान वो दीवारों से सिर टकराता था, उनसे कहता था कि मुझे मार दो। बाबूलाल ने कहा, एक दिन मुझे इस बात का अहसास हुआ कि ये मेरे जीवन का अंत है। चंदू पिछले साल 29 सितंबर को LoC क्रॉस कर पाकिस्तान चला गया था। बता दें कि ये वही वक्त था, जब पाकिस्तान पर इंडिया ने सर्जिकल स्ट्राइक की थी। 37 राष्ट्रीय रायफल्स का जवान चंदू पुंछ सेक्टर में LoC में पोस्टेड था, वो धुले के बोरविहिर गांव का रहने वाला है। मुझे अंधेरे कमरे में रखा जाता था- चंदू... - 1 जनवरी को पाकिस्तान ने उसे वाघा बॉर्डर पर बीएसएफ को सौंपा था। पाकिस्तान ने कहा था कि वो मानवीय आधार पर चंदू को छोड़ रहे हैं और LoC पर शांति बनाए रखना चाहते हैं। - न्यूज एजेंसी के मुताबिक, शुक्रवार को एक चैनल से बातचीत में चंदू ने बताया कि उसके चेहरे पर काला कपड़ा डालकर गाड़ी में कहीं ले जाया गया था। - उसने बताया, मुझे एक ऐसे कमरे में रखा गया था, जहां हमेशा अंधेरा रहता था। मुझे एक भी चीज का पता नहीं लगता था। बाथरूम और टॉयलेट भी उसी कमरे में थे। मुझे इंजेक्शन दिए जाते थे - चंदू ने कहा, जब मैं कमरों की दीवारों से सिर टकराता था और उन लोगों से कहता था कि मुझे मार डालो तो मुझे इंजेक्शन दिए जाते थे। मुझे पीटा जाता था। एक दिन ऐसा आ गया, जब मेरी आंखों में आंसू भी नहीं आते थे। - मैं ये भी नहीं जान पाता था कि दिन है या फिर रात। मैं उस डरावने वक्त में अपने परिवार को याद करता था और भगवान से प्रार्थना करता था कि मेरा जीवन खत्म कर दें। मैंने कहा कि उड़ी अटैक का बदला लेना आया हूं- चंदू - पाकिस्तानी जुल्म को बयां करते हुए चंदू बोला, वो मुझे इंजेक्शन के जरिए दर्द दूर करने वाली दवाएं देते थे। जब कान ले खून बहता था तो वो ड्रॉप डाल देते थे। - एक वक्त ऐसा भी आया, जब मैंने कैद करने वालों से कहा कि मैंने LoC इसलिए क्रॉस किया, ताकि उड़ी अटैक का बदला ले सकूं।

भारत पर हमलों की तैयारी में थे आतंकी, तभी हमने LoC पार सर्जिकल स्ट्राइक की: सरकार

भारत पर हमलों की तैयारी में थे आतंकी, तभी हमने LoC पार सर्जिकल स्ट्राइक की: सरकार

Last Updated: March 17 2017, 19:51 PM

नई दिल्ली. PoK में टेररिस्ट भारत में हमले के लिए तैयार बैठे थे, इस बात के पुख्ता सबूत मिलने के बाद इंडियन आर्मी ने LoC पार सर्जिकल स्ट्राइक की। केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री सुभाष भामरे ने शुक्रवार को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत के पास इन हमलों के बारे में स्पेसिफिक इंटेलिजेंस इनपुट था। उन्होंने कहा, सर्जिकल स्ट्राइक को बखूबी अंजाम दिया गया। इस ऑपरेशन में सभी दुश्मन टारगेट खत्म कर दिए गए। हमारे जवानों को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचा। बता दें कि 18 सितंबर 2016 को हुए उड़ी अटैक के 10 दिन बाद 28 और 29 सितंबर की दरमियानी रात इंडियन आर्मी ने LoC पारकर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। इसमें 40 से ज्यादा टेररिस्ट सेना ने मार गिराए थे। और क्या कहा रक्षा राज्यमंत्री ने... क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म और प्रॉक्सी वार में हमें घसीटा गया - सुभाष भामरे ने कहा, हम हमेशा ही अपने पड़ोिसयों के साथ शांति चाहते हैं। लेकिन, पिछले कई सालों से हमें जबरन क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म, प्रॉक्सी वार में घसीटा गया। हमारी सेनाएं बाहरी और अंदरूनी खतरों से देश की रक्षा करने के लिए तैयार हैं। किसी भी चुनौती का सामना करने को आर्मी तैयार - भामरे बोले, इंडिया आर्मी दुनिया की शानदार सेनाओं में से एक है। हमारी आर्मी किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान भी आर्मी ने क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म का सामना किया। PoK के लॉन्च पैड्स में टेररिस्ट टीम तैयार थी - जब हमें इस बारे में पुख्ता सुबूत मिले कि PoK के लॉन्च पैड्स पर कुछ टेररिस्ट टीमें इंडिया में हमले के लिए तैयार हैं। इसके बाद हमने सर्जिकल स्ट्राइक की। इन टेररिस्ट और उन्हें सपोर्ट करने वालों को खत्म कर दिया गया। 15 हमलों में शहीद हुए 68 जवान, 449 बार सीज फायर वॉयलेशन - सरकार ने संसद में यह भी बताया कि पिछले साल आर्मी पर 15 हमले किए गए। इस दौरान 68 जवान शहीद हुए। इस दौरान रिकॉर्ड 449 बार सीजफायर वॉयलेशन हुआ। 27 बार घुसपैठ की कोशिश की गई, इस दौरान 37 टेररिस्ट मारे गए। 2017 में 30 बार सीज फायर वॉयलेशन हुआ, घुसपैठ की 6 बार कोशिश की गई। सियाचिन बड़ा मसला, 13 बार बात हुई - भारत ने शुक्रवार को संसद में यह साफ कर दिया कि सियाचिन मुद्दा बड़ी समस्या है और इसमें PAK की ओर से टेररिज्म को किया जाने वाला सपोर्ट भी शामिल है। - सुभाष भामरे ने कहा, इस मसले को सुलझआने के लिए दोनों देशों के डिफेंस सेक्रेटरीज के बीच 13 बार बातचीत हो चुकी है। दुनिया के सबसे ऊंचे बैटल फील्ड पर भारत ने खतरे, जमीनी हालात और ऑपरेशन के नजरिए से पर्याप्त फोर्स तैनात कर रखी है। सियाचिन में निगरानी के लिए मॉडर्न टैक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें अनमैन्ड एरियल व्हीकल और रडार से निगरानी भी शामिल है।

पाकिस्तान में पहली बार छुट्‌टी मिलने पर मनी थी ऐसी होली, देखें PHOTOS

पाकिस्तान में पहली बार छुट्‌टी मिलने पर मनी थी ऐसी होली, देखें PHOTOS

Last Updated: March 13 2017, 00:06 AM

इंटरनेशनल डेस्क. भारत की तरह की पाकिस्तान में भी इस बार होली धूमधाम से मनाई जाएगी। पाकिस्तान के हिंदू सांसद डॉ. रमेश कुमार वंकवानी ने यह बात मीडिया से कही। बता दें कि पाकिस्तान के सिंध सूबे में पिछले साल ही पहली बार होली की ऑफिशियल छुट्टी डिक्लेयर की गई थी। इस दौरान बिलावल भुट्टो ने भी हिंदुओं के साथ होली खेली थी। संसद में पास हुआ था प्रपोजल... - पाकिस्तान में सिर्फ दो प्रतिशत हिंदू आबादी है। इसमें से सबसे ज्यादा सिंध सूबे में रहती है। - पहले ये छुट्टी सिर्फ हिंदुओं को दी जाती थी। लेकिन, अब गैरहिंदुओं को भी उनके त्योहारों पर छुट्टी दी जाती है। - हिंदू सांसद डॉ. रमेश कुमार वंकवानी ने माइनॉरिटी कम्युनिटीज के फेस्टिवल पर पब्लिक हॉलिडे की मांग वाला एक प्रपोजल संसद में रखा था। - वंकवानी कई सालों से पाकिस्तान के हिंदुओं के लिए हिंदू फेस्टिवल पर छुट्टी की डिमांड कर रहे थे, जिसे सदन ने पिछले साल मंजूर कर लिया गया था। कौन हैं रमेश कुमार वंकवानी? - सांसद डॉ. रमेश कुमार को 2013 के जनरल इलेक्शन में रिजर्व कोटा (माइनॉरिटीज) से नेशनल असेंबली में मेंबर के रूप में चुना गया था। - रमेश पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा, वे पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के चीफ भी हैं। पाकिस्तान में हिंदुओं की कितनी पॉपुलेशन? - पाकिस्तान में हिंदुओं की पॉपुलेशन लगातार घट रही है। - यहां 20 लाख से ज्यादा हिंदू हैं। पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान के सभी इलाकों से हिंदू दूसरे देशों में जाकर बस रहे हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें, पिछले साल की होली सेलिब्रेशन की PHOTOS...

यूपी में नहीं चला धर्म-जाति का गणित, युवा और महिला वोट बने जीत का फॉर्मूला

यूपी में नहीं चला धर्म-जाति का गणित, युवा और महिला वोट बने जीत का फॉर्मूला

Last Updated: March 12 2017, 12:45 PM

लखनऊ. यूपी विधानसभा की 403 में से बीजेपी गठबंधन को 325 सीटों पर जीत मिली। इस ऐतिहासिक जीत के पीछे मोदी की क्लास पॉलिटिक्स का फॉर्मूला सफल रहा। ऐसा पहली बार हुआ कि यूपी में धर्म और जाति की राजनीति हार गई। यहां युवाओं और महिलाओं के वोट का फायदा बीजेपी को मिला। मोदी सरकार के तीन महत्वपूर्ण फैसलों ने भी यहां के राजनीति की दिशा बदल दी। ये फैसले हैं- नोटबंदी, सर्जिकल स्ट्राइक, और पीएम उज्ज्वला योजना। कैसे क्या हुआ... नोटबंदी का फैसला - नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को 500 और 1000 रुपए के नोटों को क्रमबद्ध तरीके से बंद करने का सर्कुलर जारी किया। - इस आदेश के साथ ही ब्लैकमनी रखने वालों और आम लोगों का बंटवारा हो गया। - जिनके पास हिसाब-किताब के पैसे थे वे तो मोदी के फैसले से खुश दिखे। वहीं बेहिसाब पैसे (ब्लैकमनी वालों) में नाराजगी दिखी। - ब्लैकमनी वाले कम संख्या हैं और आम लोगों बड़ी संख्या में हैं। इसलिए मोदी के फैसले को बड़ी संख्या में लोगों ने स्वीकार किया। इसीलिए इसका विरोध नहीं हो सका। - इसके साथ ही करप्शन के खिलाफ भी लोगों में बड़े पैमाने पर जागरुकता आई और हर जगह करप्शन का विरोध शुरू हो गया। - यूपी में यह एक खास वर्ग मोदी का सपोर्टर बन गया। सर्जिकल स्ट्राइक - पाकिस्तानी आतंकवादियों और वहां की सेना के भारतीय सीमा में लगातार घुसपैठ और अटैक पर मोदी सरकार ने एक्शन लिया। - रातोंरात पाक सीमा में सेना भेजकर वहां आतंकियों के कैंप को तबाह करवा दिया। मोदी सरकार के सर्जिकल स्ट्राइक के इस कदम से जहां भारतीय सेना का मनोबल बढ़ा, वहीं फौजियों की फैमिली में खुशी की लहर दौड़ गई। - भारतीय फौज में यूपी के लोग बड़ी संख्या में हैं। इसलिए यहां उनकी फैमिली के लोग भी मोदी के सपोर्टर्स हो गए। पीएम उज्ज्वला योजना से हुआ फायदा - मोदी सरकार ने पीएम उज्ज्वला योजना यूपी के बलिया से लांच की। - देश में सबसे ज्यादा कनेक्शन यूपी में दिए गए। यहां करीब 46 लाख गरीब फैमिली को एलपीजी गैस के कनेक्शन फ्री में दिए गए। - यह कनेक्शन पाने वाले अधिकांश लोग मोदी के सपोर्टर्स हो गए। मोदी की क्लास पॉलिटिक्स हुई सफल - नरेंद्र मोदी की ये सारी योजनाएं साल 2016 में आईं। वहीं यूपी में साल 2017 में विधानसभा चुनाव होना था। यूपी बड़ा स्टेट था। मोदी सहित बीजेपी के 73 सांसद यूपी के ही हैं। जाहिर तौर पर मोदी के प्राइम टार्गेट पर यूपी था। लिहाजा यहां उनके क्लास पॉलिटिक्स के फॉर्मूले ने ज्यादा काम किया। - इससे पहले की सरकारें यहां केवल धर्म और जाति की राजनीति के बल पर चुनाव जीतती-हारती आई थीं। इस बार भी उन्होंने उसी फॉर्मूले पर फोकस किया। इस बार यूपी में क्लास पॉलिटिक्स की जगह कास्ट और रिलीजन पॉलिटिक्स हार गई। ट्रिपल तलाक के मुद्दे से मुस्लिम बहुल एरिया में भी जीती बीजेपी - बीजेपी को ट्रिपल तलाक मुद्दे में महिलाओं की फेवर करने की बात करने का फायदा भी बीजेपी को मिला - यूपी की 14 जिलों की 74 सीटों पर 30 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम वोटर्स हैं। यहां हर बार चुनाव में इनकी भूमिका निर्णायक होती है। - यहां भी मोदी की क्लास पॉलिटिक्स जीती क्योंकि बीजेपी को इन इलाकों से 53 सीटों पर जीत मिली। इसके पहले 2012 के चुनाव में बीजेपी को केवल 15 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। - जिन इलाकों में 50 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम वोटर हैं वहां 5 में से 2 सीट बीजेपी ने जीती जबकि 3 सीट सपा के खाते में गई। - 40 से 50 फीसदी मुसिलम बहुल आबादी में 37 सीट हैं। यहां 24 सीट बीजेपी को मिली। - 30 से 40 फीसदी मुस्लिम बहुल आबादी में 32 सीट हैं। यहां बीजेपी को 27 सीटों पर जीत मिली। कास्ट फैक्टर - सेंट्रल यूपी की यादव प्रभाव वाली 33 में से 28 और बुंदेलखंड की सभी 19 सीटें बीजेपी को मिलीं। पूर्वांचल के 10 जिलों में सिर्फ बीजेपी ही जीती। - यह क्षेत्र अति पिछड़ी जातियों वाला है। इस तरह 100 से ज्यादा सटों को फायदा इस एरिया से बीजेपी को हआ। युवाओं का योगदान - इस चुनाव में 29 साल से कम उम्र के 4 करोड़ 5 लाख 84 हजार 888 वोटर्स थे। वहीं 18 से 19 साल के वोटर्स की संख्या 24.53 लाख है। - फर्स्ट फेज की हर सीट पर 25 हजार से ज्यादा युवा वोटर्स बढ़े। इनके वोट ने जीत का अंतर बढ़ा दिया। महिलाओं की भूमिका - ऐसा पहली बार हुआ है कि यूपी विधानसभा चुनाव में इस बार 444 महिलाएं थीं। इनमें से 42 महिलाएं जीतीं। इनमें बीजेपी की 38, कांग्रेस की 2 बसपा और अपना दल की 1-1 कैंडिडेट जीतीं। - इस बार महिलाओं के वोटिंग परसेंटेज में भी बढ़ोतरी हुई। यह इस बार 63.26 फीसदी रहा। वहीं पिछली बार से इस बार यह 3 फीसदी से ज्यादा है। 50 जिलों में भी 60 फीसदी से ज्यादा वोटिंग हुई। इनमें 275 सीटें हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें फोटो...

होली की झांकी में दिखेगी नोटबंदी की परेशानी, देशद्रोहियों को भगाते दिखेंगे यमराज

होली की झांकी में दिखेगी नोटबंदी की परेशानी, देशद्रोहियों को भगाते दिखेंगे यमराज

Last Updated: February 28 2017, 00:45 AM

कोटा. शहर में होलिका दहन की तैयारियां चल रही है। होलिका दहन 12 मार्च को होगा और 13 मार्च को धुलंडी मनाई जाएगी। इसके चलते शहर में कई जगह होली का डांडा गढ़ चुका है। शहर की सबसे फेमस नयापुरा की होली में इस बार सर्जिकल स्ट्राइक और नोट बंदी के दौरान हुई परेशानी की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। आर्दश होली संस्था के अध्यक्ष राकेश शर्मा ने बताया कि वे 30 साल से नयापुरा में होलिका उत्सव मनाते आ रहे हैं। इस बार चार प्रकार की झांकियां होंगी। इसमें सर्जिकल स्ट्राइक की झांकी सेना को समर्पित होगी। इसमें सेना के जवान सर्जिकल स्ट्राइक करते नजर आएंगे। वहीं दूसरी झांकी नोट बंदी की होगी। इसमें नोट बंदी के दौरान बैंकों के बाहर परेशान होती भीड़ दिखाई जाएगी। वहीं तीसरी झांकी में भ्रष्टाचारी, देशद्रोही और व्याभिचारियों को यमराज भगाते हुए नजर आएंगे। चौथी झांकी गोपियों व कृष्ण भगवान की होगी। इन झांकियों के लिए 7 बंगाली कारीगर जुटे हुए हैं। 15 दिन में यह बनकर तैयार हाेंगी। 10 मार्च को शाम 7 बजे से झांकियों को दर्शकों के लिए खोला जाएगा। यह भी होंगे आयोजन 11 मार्च को रात 8 बजे से स्कूली बच्चों की नृत्य प्रतियोगिता होगी। 12 मार्च को सांस्कृतिक संध्या होगी। इसमें राजस्थानी सहित अन्य कलाकार शामिल होंगे। वहीं दिल्ली के छेदीलाल हनुमान की नृत्य नाटिका पेश करेंगे।

मैंने न‍िर्णय ल‍िया था क‍ि पाक को पाक में ही नंगा करके जाऊंगा: लखनऊ में बोले राजनाथ स‍िंह

मैंने न‍िर्णय ल‍िया था क‍ि पाक को पाक में ही नंगा करके जाऊंगा: लखनऊ में बोले राजनाथ स‍िंह

Last Updated: February 13 2017, 20:56 PM

लखनऊ. गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने यहां सोमवार को जनसभा करते हुए कहा, पाकिस्तान के साथ हमने बेहतर रिश्ते करने की कोशिश की। पाक के प्रधानमंत्री को भी बुलाया, लेकिन पाक अपनी हरकतों से बात नहीं आता है। इसी के बाद पीएम ने सर्जिकल स्ट्राइक के लिए कहा और हमने घुसकर मारा। जो कार्रवाई हमने की, उससे संदेश दिया कि किसी को छेड़ते नहीं। लेकिन जो छेड़ता है, उसे हम छोड़ते भी नहीं हैं। मैं पाकिस्तान गया। फिर इस्लामाबाद पहुंचा तो वहां अधिकारी ने कहा कि सड़क की हालत ठीक नहीं है। इसलिए हेलिकॉप्टर से गया। सड़क पर आतंकवादियों के साथ लोग प्रदर्शन कर रहे थे। उस समय मैंने निर्णय लिया कि पाक में ही पाक को नंगा करके जाऊंगा। सपा-कांग्रेस पर निशाना... - अमीनाबाद चौराहे पर बीजेपी कैंडिडेट बृजेश सिंह के समर्थन में सभा करने पहुंचे राजनाथ सिंह ने कहा, कांग्रेस, सपा और बसपा हमें बदनाम कर रही है। मैं 3 महीने इंतजार करता रहा कि कब राहुल बोलेंगे और भूकंप आएगा। - चुनाव के 4 महीने पहले ही खाट पकड़ ली। जब लगा कि कमजोर हो गए तो साइकिल के पीछे बैठ गए, लेकिन उस साइकिल को मुलायम ने पहले ही पंक्चर कर दिया। - इन दोनों लोगों को ये ध्यान रखना चाहिए कि जब कोई ज्यादा कमजोर हो जाता है, तो उसकी बैसाखी मजबूत होनी चाहिए। मोदी सरकार में बढ़ी विकास दर - राजनाथ सिंह ने कहा, ढाई साल में हमने बहुत काम किया है। आपने सभी सरकारों के काम को देखा है। कोई ये नहीं कह सकता है कि इस सरकार के मंत्रियों पर करप्शन का आरोप है। मोदी सरकार में विकास दर बढ़ी है। - दुनिया में आज सबसे ज्यादा तेजी से ग्रोथ करने वाली अर्थव्यवस्था हमारी है। 2014 में आपने जो प्रचंड बहुमत दिया है, उसकी वजह से मैं गृहमंत्री बना। उस समय यूपी की जनता ने करिश्माई काम किया था। - यूपी में वो ताकत है, जिसने देश को एक एतिहासिक मोड़ दिया। 70 साल में गैर कांग्रेस ने संसद में बहुमत पाया और वो यूपी की जनता की वजह से हुआ। यूपी में बिल आता है, बिजली नहीं - गृहमंत्री ने आगे कहा, यूपी में बिजली नहीं आ रही है, लेकिन बिल आ रहा है। ऐसे हालात बना दिए हैं कि जब किसान काम करके घर आता है, तो न पति, पत्नी का चेहरा देख पाता है, न पत्नी, पति का। - आजाद भारत में अगर नेताओं ने आश्वासन को सही कर दिया होता तो भारत विकसित हो गया होता।

गौरक्षा और दंगाइयों से निपटने के लिए UP में भी होगी सर्जिकल स्ट्राइक: योगी आद‍ित्यनाथ

गौरक्षा और दंगाइयों से निपटने के लिए UP में भी होगी सर्जिकल स्ट्राइक: योगी आद‍ित्यनाथ

Last Updated: February 13 2017, 19:49 PM

बराबंकी. जिले के टिकैतनगर कस्बे में सोमवार को विधानसभा दरियाबाद में बीजेपी प्रत्याशी सतीश शर्मा के पक्ष में जनसभा को संबोधित करते हुए बीजेपी के फायरब्रांड नेता और सांसद योगी आदित्यनाथ ने जनता को एक और सर्जिकल स्ट्राइक के लिए तैयात रहने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि जिस तरह पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक हुई तो पाकिस्तान खड़ा नहीं हो पाया, वैसे ही यूपी में भी एक और सर्जिकल स्ट्राइक के लिए तैयार रहने के लिए कहा। योगी ने कहा कि यह सर्जिकल स्ट्राइक गोरक्षा और दंगाइयों से निपटने के लिए होगी। आगे पढ़िए अखिलेश-राहुल के बारे में क्या कहा... -अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए योगी ने कहा कि अगर काम बोलता है तो कांग्रेस जैसे मरे हुए सांप को गले में क्यों लटकाया। -चुनाव में हार की साफ तस्वीर देखकर ही इन लोगों ने जन्मजात हार का तमगा लिए घूम रहे राहुल गांधी को साथ में लिया है। -राहुल गांधी के कदम जहां-जहां पड़े वहां-वहां कांग्रेस का सफाया हुआ है। गौरक्षा के लिए होगी सर्जिकल स्ट्राइक -योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हम जैसा कहते थे वैसा करते भी हैं। हमने कहा था कि अगर पकिस्तान आंख दिखाएगा तो उसकी आंखें निकाल ली जाएंगी। -एक सर्जिकल स्ट्राइक ने उसे उठने नहीं दिया। अब यूपी में एक और सर्जिकल स्ट्राइक होगी, इसके लिए तैयार रहिएगा। यह सर्जिकल स्ट्राइक गोरक्षा और दंगाइयों के खिलाफ होगी। कांग्रेस मरा हुआ सांप, राहुल गांधी जन्मजात हार के कारण -योगी ने अखिलेश यादव से सवाल करते हुए कहा कि अगर काम बोलता है तो 403 सीटों पर लड़ने वाली पार्टी 300 से कम सीटों पर क्यों लड़ रही है। -कांग्रेस जैसे मरे हुए सांप को गले में सपा ने क्यों लटकाया? -अखिलेश ने चतुराई के साथ चुनाव में अपनी स्पष्ट हार को देखते हुए जन्मजात हार का तमगा लेने वाले राहुल गांधी को साथ में ले लिया, क्योंकि राहुल गांधी के कदम जहां-जहां पड़े हैं, वहां-वहां से कांग्रेस का सफाया ही हुआ है। -अब सपा के पास बहाना रहेगा कि अगर राहुल गांधी न होते तो हम चुनाव जीत जाते।

इतने घोटालों में मनमोहन बेदाग रहे, रेनकोट पहनकर नहाना वे ही जानते हैं :मोदी

इतने घोटालों में मनमोहन बेदाग रहे, रेनकोट पहनकर नहाना वे ही जानते हैं :मोदी

Last Updated: February 09 2017, 10:38 AM

नई दिल्ली. नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा में हिस्सा लिया। मोदी ने इस दौरान कांग्रेस के घोटालों पर तंज कसा। कहा- इतने घोटालों में भी मनमोहन बेदाग रहे, रेनकोट पहनकर नहाने की कला वे ही जानते हैं। मोदी की इस टिप्पणी के बाद राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस ने वॉकआउट कर दिया। इसके बाद मोदी ने रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डी. सुब्बाराव की किताब Who Moved My Interest Rate; का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व फाइनेंस मिनिस्टर पी. चिदंबरम ने RBI के काम में दखल दिया था। उधर, मनमोहन पर मोदी के कमेंट से नाराज कांग्रेस अब बाकी बचे बजट सेशन में पीएम का बायकॉट करेगी। पीएम के स्पीच की बड़ी बातें... 1. मनमोहन के लिए कहा- बाथरूम में रेनकोट पहनकर नहाना, ये कला सिर्फ डॉक्टर साहब जानते हैं - मोदी ने कहा, पिछले सत्र में मनमोहन सिंहजी ने अपने विचार रखे थे। ये बात सही है कि अभी आप लोगों ने (कांग्रेस ने) एक किताब निकाली है। उसका फोरवर्ड (प्रस्तावना) डॉक्टर साहब ने लिखा है। हमें लगा किताब उन्हीं की है। लेकिन किताब किसी ने लिखी और फोरवर्ड उनका था। उनके भाषण में भी मुझे ऐसा लगा कि शायद...। - विपक्ष ने इस पर हंगामा किया। इस पर मोदी ने कहा- जो मैंने बोला नहीं, उसका अर्थ आप कैसे समझ गए? - मोदी ने आगे कहा, 35 साल तक इस देश में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा, जिसने आजादी के बाद आधा समय तक देश की अर्थव्यवस्था को देखा हो। लेकिन कितने घोटाले की बातें आईं। खासकर राजनेताओं के पास डॉक्टर साहब से बहुत कुछ सीखने जैसा है। इतना सब हुआ, उन पर एक दाग नहीं लगा। बाथरूम में रेनकोट पहनकर नहाना, ये कला सिर्फ डॉक्टर साहब (मनमोहन सिंह) जानते हैं। 2. पैरेलल इकोनॉमी का सबसे ज्यादा नुकसान गरीब को - मोदी ने कहा, ज्यादातर चर्चा नोटबंदी के आसपास रही है। इस बात से हम इनकार नहीं कर सकते कि हमारे देश में एक बुराई आई है। इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि इसने हमारी अर्थव्यवस्था में, समाज में जड़ें जमा दी हैं। और इसलिए भ्रष्टाचार-कालेधन के खिलाफ लड़ाई राजनीतिक निर्णय नहीं है। - पैरेलल इकोनॉमी के कारण सबसे ज्यादा नुकसान गरीब का हुआ। गरीब का हक छीना जाता है और उसका शोषण होता है। प्रयास पहले भी हुए होंगे। हम कब तक इन समस्याओं को कारपेट के नीचे डालकर गुजारा करते रहेंगे। 3. इसलिए मिले आतंकियों से जाली नोट - पीएम ने कहा, जाली नोट की बात होती है। जो आंकड़े प्रचारित हैं, वो आंकड़े जाली नोटों के बैंकों के पहुंचने तक है। ज्यादातर जाली नोट बैंक के दरवाजे तक न जाएं, इस व्यवस्था से चलाए जाते हैं। आतंकवाद-नक्सलवाद को बढ़ावा देने में इसका उपयोग होता है। - कुछ लोग उछल-उछलकर कह रहे हैं कि आतंकियों के पास दो हजार रुपए के नए नोट मिले। हमें पता होना चाहिए कि बैंक लूटने का प्रयास और नए नोट ले जाने का प्रयास जम्मू-कश्मीर में हुआ। जाली नोट बंद होने के बाद उनके सामने दिक्कत आई। नोटबंदी के कुछ ही दिन बाद जो आतंकी मारे गए, उनके पास से ये नोट मिले। मोदी का ये तंज राहुल गांधी पर था। राहुल ने कश्मीर में मारे गए आतंकियों के पास से 2 हजार के नोट मिलने का मुद्दा उठाया था। 3. जब किताब में वांचू कमेटी का जिक्र हुआ तो आप सो रहे थे क्या? - मोदी ने कहा, इन कदमों से ईमानदारों को बल मिलेगा, ऐसा हमारा स्पष्ट मत है। बहुत पहले वांचू कमेटी बनी थी। नोटबंदी की आर्थिक जरूरतों के संबंध में उन्होंने इंदिराजी के समय अपनी रिपोर्ट दी थी। यशवंतराव चह्वाण उससे सहमत थे। लेकिन इंदिराजी ने कहा था कि हम राजनीति में हैं और चुनाव लड़ने होते हैं। - इस पर कांग्रेस मेंबर्स ने हंगामा किया। तब मोदी ने कहा, ये गोडबोलेजी की किताब में है। अच्छा होता किताब जब छपी, तब आपने पढ़ी होती। आप सो रहे थे क्या? कहां थे आप? आपकी जगह मैं होता तो गोडबोलेजी के खिलाफ केस कर देता। लेकिन आपने नहीं किया। आज जब उनकी किताब की चर्चा हो रही है, तो आपको परेशानी हो रही है। 4. 700 माओवादियों ने सरेंडर किया - मोदी ने कहा, आज जाली नोट, हवाला कारोबार, आतंकवाद, ड्रग्स का कारोबार फैल चुका है। पहले ऐसा नहीं था। हमने जब फैसला किया तो जाली नोट तो उसी वक्त न्यूट्रिलाइज हो गए थे। आपने टीवी पर देखा होगा। दूसरे देश में जाली नोट का कारोबार करने वाले को आत्महत्या करनी पड़ी थी। - हमारे देश में नवंबर-दिसंबर के दरमियान 40 दिन में 700 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। ये नोटबंदी के बाद हुआ। अगर माओवादी सरेंडर करें और उसका संतोष में किसी को ना हो तो ऐसा हो नहीं सकता। और अगर संतोष नहीं हो रहा है तो मामला कुछ और है। 5. चाय बागानों में काम करने वालों को पूरा वेतन मिल रहा है - पीएम ने कहा, हजार के नोट छपने के बाद 500 के नोट कम मिल रहे थे। अब ऐसा नहीं है। पहली बार ऐसा हुआ कि ऐसे फैसले के बाद सभी बैंकों ने एक साथ ब्याज दर कम किया। यहां असंगठित कामगारों की बात हुई। कामगारों को सुरक्षा मिलनी चाहिए। समय रहते हम उन्हें ईपीएफ और ईएसआईसी स्कीम से जोड़ेंगे। असम का उदाहरण देना चाहूंगा। चाय बागान में काम करने वालों के लिए उन्होंने 7 लाख बैंक खाते खुलवाए। मोबाइल ऐप पर उन्हें कारोबार करना सिखाया। इससे चाय बागान के मजदूरों को पूरा वेतन मिलने लगा। वहां बहुत अच्छा एक्सपीरियंस मिला। 6. ज्योतिर्मय बसु ने कहा था- इंदिरा की सरकार कालेधन पर टिकी है - मोदी ने कहा, हमारी और सीतारामजी (येचुरी) की विचारधारा अलग है। लेकिन ये एक ऐसा विषय था कि हमें लगा था कि सीतारामजी का दल हमारे साथ होगा। इसका एक कारण था। कारण यह था कि आपकी ही पार्टी के सीनियर नेता ज्योतिर्मय बसु ने 1972 में वांचू कमेटी की रिपोर्ट सदन में रखने की मांग की थी और लड़ाई लड़ी थी। सरकार प्रस्तुत नहीं कर रही थी। वे खुद उस रिपोर्ट की कॉपी ले आए। उसे टेबल पर रखा। उनका उस दिन का भाषण आज भी याद रखने लायक है। - बसु ने कहा था कि 12 नवंबर 1970 को इस शक्तिशाली और प्राथमिक सिफारिशों में से एक था विमुद्रीकरण। श्रीमती इंदिरा गांधी कालेधन के दम पर ही बची हुई है। उनकी राजनीति कालेधन पर ही टिकी है। इसलिए इस रिपोर्ट को लागू नहीं किया गया और दबाए रखा गया। दोबारा 4 सितंबर 1972 को लोकसभा में बसु ने कहा था कि मैंने विमुद्रीकरण और अन्य उपायों की सिफारिश की है। मैं अब उन्हें दोहराना नहीं चाहता। सरकार को ईमानदारी के साथ लोगों का सहयोग करना चाहिए, लेकिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार का चरित्र कालेधन का है। उनकी सरकार कालेधन द्वारा है और कालेधन के लिए है। - हरकिशन सिंह सुरजीत ने भी कहा था कि क्या बड़े नोट बंद करने के फैसले लिए जा सकते हैं। ये सवाल उन्होंने 1981 में उठाया था। - लिहाजा, लेफ्ट से आग्रह है कि इस लड़ाई में हमारा साथ दीजिए। इस पर लेफ्ट के सीताराम येचुरी ने कहा कि हमारा विरोध तरीके से है, विचार से नहीं। 7. भीम ऐप पर कोई खर्च नहीं - मोदी ने कहा, किसी भी बच्चे को पूछो कि स्कूल नहीं जाते हो। वो कहेंगे कि रोज जाता हूं। ये उसे भी मालूम है और मुझे भी मालूम है कि वो संडे को नहीं जाता। इसी तरह कैशलेस का मतलब है कि धीरे-धीरे समाज को उस दिशा में ले जाना। दुनियाभर में आज भी बैलेट पेपर पर चुनाव होता है। यही वो देश है कि यहां बटन दबाकर वोट डाला जाता है। असुविधा है, तकलीफ है, इसलिए छोड़ देना ठीक नहीं होगा। - भीम ऐप में एक नए पैसे का खर्च नहीं। एक रुपए का कमीशन किसी बैंक को नहीं जाता। जब दुनिया इस तरफ बढ़ रही है तो भारत को पीछे रहने का कोई कारण नहीं है। - जनधन अकाउंट के साथ 21 करोड़ रुपे कार्ड दिए गए हैं। जेब में एक कार्ड होना एक वर्ग के लिए प्रेस्टिजियस विषय बन गया है। हमने समाज के लोगों की छोटी-छोटी उम्मीदों को पूरा किया है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए हमने हर साल 50 हजार करोड़ रुपए का लीकेज बचाया है। बिचौलियों की भूमिका खत्म कर दी है। - इस सरकार ने डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल बनाया। बैंकिंग में प्रोफेशनलिज्म लेकर आए। उसमें भर्ती के लिए बोर्ड बनाया। 8. आरबीआई गवर्नर का बचाव - मोदी ने कहा, मुझ पर हमला होना स्वाभाविक है। लेकिन रिजर्व बैंक को घसीटने और उनके गवर्नर को घसीटने का कोई कारण नहीं है। इनसे पहले भी जो गवर्नर थे, उस वक्त भी आवाजें उठी थीं। मैंने उसका भी विरोध किया था। आरबीआई की बड़ी भूमिका है अर्थव्यवस्था में। जो आरबीआई पर सवाल उठाते हैं और उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं, मैं उनसे एक बात कहना चाहता हूं। - आरबीआई के गवर्नर सुब्बाराव ने एक किताब लिखी है। इस किताब में उन्होंने लिखा है कि 2008 में तत्कालीन वित्त सचिव के तहत लिक्विडिटी मैनेजमेंट कमेटी नियुक्त करने से मैं परेशान था। चिदंबरम ने भारतीय बैंक के विषय में ओवरस्टेप किया था। लिक्विडिटी मैनेजमेंट पूरी तरह से आरबीआई का विषय है। उन्होंने न सिर्फ ओवरस्टेप किया, बल्कि मुझे बताया ही नहीं। मुझे नहीं पता था कि यह मेरे और उनके बीच मेरे आखिरी दिनों में संबंध असहज करने की टोन सेट करेगा। - मोदी ने रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डी. सुब्बाराव की बुक Who Moved My Interest Rate; को कोट करते हुए कहा कि पूर्व फाइनेंस मिनिस्टर पी. चिदंबरम ने आरबीआई के काम में दखल दिया था। वेल में कांग्रेस मेंबर्स का हंगामा - मोदी के मनमोहन पर दिए बयान पर राज्यसभा में हंगामा हुआ। कांग्रेस के मेंबर्स वेल तक आ गए। - सभापति डॉ. हामिद अंसारी को कहना पड़ा कि अपनी जगह पर लौट जाएं। - केंद्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि मोदी को हिटलर, मुसोलिनी कहा गया। तब ये विपक्ष कहां था। - रविशंकर प्रसाद ने भी कहा कि क्या आपने हमारे प्रधानमंत्री के बारे में बुरी-बुरी बातें नहीं कहीं? - इसके बाद कांग्रेस ने वॉकआउट कर दिया। - मोदी ने आगे कहा- इतने बड़े पद पर रहे व्यक्ति ने जब बंदर और लूट जैसे शब्द प्रयोग किए थे तो ये सोचना चाहिए था कि संविधान की मर्यादा क्या होती है। हम मर्यादा का आदर करते हैं। किसी भी रूप में पराजय स्वीकार ही नहीं करना, ये कब तक चलेगा? आगे की स्लाइड्स में पढ़ें: मोदी ने जब जवाब दिया तो लोकसभा में मौजूद नहीं थे राहुल गांधी... ये भी पढ़ें: 1. <a href='http://www.bhaskar.com/news/NAT-NAN-modi-rajya-sabha-speech-updates-and-highlights-news-hindi-5524062-NOR.html?ref=ht'>चिदंबरम ने RBI की ऑटोनॉमी में दखल दिया था: एक किताब के हवाले से बोले मोदी</a> 2. <a href='http://www.bhaskar.com/news/NAT-NAN-a-panic-button-come-soon-for-women-safety-says-modi-news-hindi-5524079-PHO.html?ref=ht'>महिलाओं की सिक्युरिटी के लिए सरकार जल्द पैनिक बटन लाएगी: नरेंद्र मोदी</a> 3. <a href='http://www.bhaskar.com/news/NAT-NAN-modi-remark-rajya-sabha-speech-manmohan-news-hindi-5524078-PHO.html?ref=ht'>मैं कुछ नहीं कहना चाहता: मनमोहन; मोदी के कमेंट्स पर रिएक्शन से किया इनकार</a>

नोटबंदी से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक तक पढ़ें मोदी की स्पीच की 10 बड़ी बातें

नोटबंदी से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक तक पढ़ें मोदी की स्पीच की 10 बड़ी बातें

Last Updated: February 08 2017, 13:44 PM

नई दिल्ली. नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के बजट अभिभाषण पर हुई चर्चा का मंगलवार को लोकसभा में जवाब दिया। संसद में यह उनका अब तक का सबसे लंबा स्पीच था। 88 मिनट की स्पीच की शुरुआत में ही उन्होंने राहुल गांधी पर चुटकी ली। उन्होंने कहा- धमकी तो बहुत पहले सुनी थी। लेकिन कल आखिर भूकंप आ ही गया। चर्चा के दौरान मोदी ने नोटबंदी का भी जिक्र किया। कहा- यह फैसला हड़बड़ी में नहीं लिया गया। यह नोटबंदी के लिए सही समय था। वहीं, सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में उन्होंने कहा कि पहले नेताओं ने कई बयान दिए। लेकिन बाद में देश का मिजाज देखकर अपने तेवर बदल दिए। अपनी स्पीच में मोदी ने चार्वाक के सिद्धांतों से लेकर महाभारत के श्लोकों और काका हाथरसी की पंक्तियों का जिक्र किया और विपक्ष पर निशाना साधा। पढ़ें मोदी की स्पीच की 10 बड़ी बातें... 1. मैं सोच रहा था कि भूकंप आया क्यों? - मोदी ने कहा, कल भूकंप आया। इस भूकंप के कारण जिन-जिन क्षेत्रों में असुविधा हुई है, मैं उनके प्रति भावना व्यक्त करता हूं। केंद्र सरकार राज्यों के संपर्क में है। कुछ टीमें वहां पहुंच गई हैं। लेकिन आखिर भूकंप आ ही गया। मैं सोच रहा था कि भूकंप आया कैसे? धमकी तो बहुत पहले सुनी थी। कोई तो कारण होगा कि धरती मां इतनी रूठ गई होगी? - मोदी के इतना कहते ही अपोजिशन की ओर से हंगामा होने लगा। बता दें कि पिछले सेशन में राहुल गांधी ने कहा था कि मोदी उन्हें बोलने नहीं दे रहे हैं। अगर वे बोलेंगे तो भूकंप आ जाएगा। - विरोध कर रहे सांसद कल्याण बनर्जी से मोदी ने कहा, कल्याणजी! आपका कल्याण होगा। - इसके बाद हंगामा और तेज हो गया। स्पीकर सुमित्रा महाजन ने बनर्जी को बीच में टोका और कहा कि कृपया प्रधानमंत्री की बात सुनें। - मोदी ने आगे कहा, अादरणीय अध्यक्षा जी, मैं सोच रहा था कि भूकंप आया क्यों? जब कोई स्कैम में भी सेवा का भाव देखता है, नम्रता का भाव देखता है तो सिर्फ मां नहीं, धरती मां भी दुखी हो जाती है। तब जाकर भूकंप आता है। ...अौर इसलिए राष्ट्रपतिजी ने अपने अभिभाषण में जनशक्ति का ब्योरा दिया है। 2. नोटबंदी में नहीं, सबसे ज्यादा 1035 बार मनरेगा में नियम बदले गए - मोदी ने कहा, जब हमने कहा कि 2 लाख से ज्यादा की ज्वैलरी खरीदने पर पैन नंबर देना होगा, तो मैं हैरान हूं कि कालेधन के खिलाफ भाषण देने वाले लोग मुझे चिट्ठियां लिखते रहे कि ये फैसला वापस लीजिए। मैं जानता हूं कि इससे कठिनाई हुई होगी, लेकिन देश के लिए यह जरूरी था। - हमने इनकम टैक्स डिक्लेरेशन स्कीम भी लाई। अब तक का सबसे ज्यादा पैसा इसमें डिक्लेयर हुआ। हमने 1100 से ज्यादा पुराने कानून खत्म किए। लेकिन यहां कहा गया कि आपने नोटबंदी में बार-बार नियम बदले। ये तो ऐसा काम था, जिसमें हमें जनता की तकलीफ तुरंत समझने के बाद रास्ता खोजना पड़ा था। - एक तरफ देश को लूटने वाले थे, दूसरी तरफ देश को ईमानदारी के रास्ते पर लाने वाले थे। लेकिन आप लोगों का जो बड़ा प्रिय कार्यक्रम है, उस पर आप पीठ थपथपा रहे हैं। देश आजाद होने के बाद 9 अलग-अलग नाम से योजना चली। आज उसे मनरेगा कहते हैं। - देश और आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इतने साल से चली योजना के बावजूद मनरेगा में 1035 बार नियम बदले गए। उसमें तो कोई लड़ाई नहीं थी। मनरेगा में भी क्यों 1035 बार परिवर्तन करने पड़े? एक्ट तो एक बार बन गया था। नियम बदले गए। - काका हाथरसी की कविता के शब्द सुनाता हूं। इसे यूपी के चुनाव से ना जोड़ें। काका हाथरसी ने कहा था- अंतरपट में खोजिए, छिपा हुआ है खोट, मिल जाएगी आपको बिल्कुल सत्य रिपोर्ट। - मोदी ने कहा- कई लोग सोच रहे थे मैंने नोटबंदी का यह फैसला इस वक्त क्यों लिया? मैं बताता हूं? उस वक्त हमारी इकोनॉमी मजबूत थी। कारोबार के लिए भी वक्त सही था। - हमारे देश में सालभर में जितना व्यापार होता है, उसका आधा दिवाली के समय ही हो जाता है। - यह सही समय था नोटबंदी के लिए। जो सरकार ने सोचा था, लगभग उसी हिसाब से सब चीजें चलीं। मैंने जो हिसाब-किताब कहा था, उसी प्रकार से गाड़ी चल रही है। - इसलिए मैं बता दूं कि यह फैसला मैं हड़बड़ी में नहीं लिया। 3. सर्जिकल स्ट्राइक पर क्या बोले मोदी? - मोदी ने कहा, अपने सीने पर हाथ रखकर पूछिए। सर्जिकल स्ट्राइक के पहले 24 घंटे में नेताओं ने क्या बयान दिए थे। जब उन्होंने देखा कि देश का मिजाज अलग है तो उन्हें अपनी भाषा बदलनी पड़ी। ये बहुत बड़ा निर्णय था। नोटबंदी में तो लोग पूछते हैं कि मोदीजी सीक्रेट क्यों रखा, कैबिनेट क्यों नहीं बुलाई। सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में कोई नहीं पूछ रहा। - हमारे देश की सेना के जितने गुण-गान करें, उतना कम है। इतनी सफल सर्जिकल स्ट्राइक की है। सर्जिकल स्ट्राइक आपको परेशान कर रही है, मैं जानता हूं। आपकी मुसीबत यह है कि पब्लिक में जाकर बोल नहीं पाते हो। अंदर पीड़ा महसूस कर रहे हो। आप मानकर चलिए कि ये देश और हमारी सेना सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी सक्षम है। 4. बेनामी संपत्ति का फिर जिक्र किया - मोदी ने कहा, हमारे खड़गेजी ने कहा कि कालाधन हीरे-जवाहरात, सोने-चांदी और प्रॉपर्टी में है। मैं आपकी बात से सहमत हूं। लेकिन ये सदन जानना चाहता है कि ये ज्ञान आपको कब हुआ? इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि भ्रष्टाचार की शुरुआत नकद से होती थी। परिणाम में प्रॉपर्टी-ज्वैलरी होती है। जरा बताइए कि 1988 में जब राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री थे, पंडित नेहरू से भी ज्यादा बहुमत दाेनों सदनों में आपके पास था। पंचायत से पार्लियामेंट तक सब कुछ आपके कब्जे था। - 1988 में आपने बेनामी संपत्ति का कानून बनाया। आपको जो ज्ञान आज हुआ है, क्या कारण था कि 26 साल तक उस कानून को नोटिफाई नहीं किया गया? क्यों उसे दबोच कर रखा गया? तब नोटिफाई कर देते तो 26 साल पहले की स्थिति ठीक थी। देश को साफ-सुथरा करने में योगदान हो जाता। वो कौन लाेग थे, जिन्हें कानून बनने के बाद लगा कि इससे तो नुकसान हो जाएगा। आपको देश को जवाब देना पड़ेगा। - हमने कानून बनाया है। मैं आज इस सदन के जरिए देशवासियों को कहना चाहता हूं कि आप कितने ही बड़े क्यों ना हो, गरीब के हक का आपको लौटाना पड़ेगा। मैं इस रास्ते से पीछे लौटने वाला नहीं हूं। इस देश में प्राकृतिक संपदा, मानव संसाधन की कमी नहीं थी, लेकिन एक ऐसा वर्ग पनपा जो लोगों का हक लूटता रहा। इसलिए देश ऊंचाई पर नहीं पहुंच पाया। - इस पर अपोजिशन ने कहा- जियो के बारे में बोलिए। इस पर मोदी ने जवाब दिया, जिनके पास एजेंसी है, वो बोलेंगे। 5. मोदी ने बताया- बजट की तारीख क्यों बदली? - मोदी ने कहा, एक चर्चा यह आई कि बजट जल्दी क्यों पेश किया गया। भारत कृषि प्रधान देश है। हमारा पूरा आर्थिक कारोबार कृषि पर आधारित है। कृषि की ज्यादातर स्थिति दीपावली तक पता चल जाती है। हमारे देश की कठिनाई है कि अंग्रेजों की छोड़ी विरासत को लेकर चल रहे हैं। हम मई में बजट की प्रक्रिया से पार निकलते हैं। एक जून के बाद बारिश आती है। तीन महीने बजट का इस्तेमाल नहीं हो पाता। काम करने का समय कब बचता है। जब समय आता है तो दिसंबर से मार्च तक जल्दबाजी में काम होते हैं। - बजट पहले शाम 5 बजे पेश होता था। ऐसा इसलिए होता था, क्योंकि यूके के टाइम के हिसाब से अंग्रेज यहां बजट पेश करते थे। घड़ी उलटी पकड़ते हैं तो लंदन का टाइम दिखता है। ऐसा इसलिए दिखाया, क्योंकि कई लोगों को कई चीजें समझ नहीं आतीं। मोदी की इस बात पर कांग्रेस के सदस्य भी हंसने लगे। - मोदी ने आगे कहा, जब अटलजी की सरकार आई तो समय बदला गया। जब आपकी (यूपीए) सरकार थी तो आपने भी कमेटी बनाई थी। आप भी चाहते थे कि वक्त बदलना चाहिए। आपके वक्त के प्रपोजल को ही हमने पकड़ा। आप नहीं कर पाए। आपकी प्रायाेरिटी अलग थी। आपको बड़े गर्व से कहना चाहिए। फायदा उठाइए ना कि ये हमारे समय हुआ था। - रेलवे में भी एक बात समझें कि 90 साल पहले जब रेल बजट आता था, तब ट्रांसपोर्टेशन का मोड रेलवे ही था। आज ट्रांसपोर्टेशन बड़ी अनिवार्यता है। इसके कई मोड हैं। पहले बजट में गौड़ाजी ने बताया था कि करीब 1500 घोषणाएं हुई थीं। लोगों को खुश रखने के लिए एलान होते थे। 1500 घोषणाओं को कागज पर ही मोक्ष प्राप्त हो गया था। ऐसी चीजें ब्यूरोक्रेसी को सूट करती थीं। हमने ये बंद किया। 6. मल्लिकार्जुन खड़गे के बहाने आपातकाल का जिक्र - मोदी ने कहा, हम ये जानते हैं कि जनशक्ति का मिजाज कुछ और ही होता है। कल हमारे मल्लिकार्जुनजी कह रहे थे कि कांग्रेस की कृपा है कि अब भी लोकतंत्र बचा है और आप प्रधानमंत्री बन पाए। वाह! क्या शेर सुनाया। - बहुत बड़ी कृपा की अापने देश पर कि लोकतंत्र बचाया। कितने महान लोग हैं आप। लेकिन उस पार्टी के लोकतंत्र को देश भली-भांति जानता है। एक परिवार के लिए पूरा लाेकतंत्र आहत कर दिया गया है। - 75 का कालखंड, तब देश पर आपातकाल थोप दिया गया था, हिंदुस्तान को जेलखाना बना दिया गया था। जयप्रकाश बाबू समेत लाखों नेताओं को जेल में बंद कर दिया गया था। अखबारों पर ताले लगा दिए गए थे। उन्हें अंदाज नहीं था कि जनशक्ति क्या होती है। लोकतंत्र को कुचलने के ढेर सारे प्रयासों के बावजूद यह जनशक्ति की सामर्थ्य थी कि लोकतंत्र स्थापित हुआ। ये उस सामर्थ्य की ताकत है कि गरीब मां का बेटा भी प्रधानमंत्री बन सका। 7. अपने ऊपर हुई आपत्तिजनक टिप्पणी का दिया जवाब - मोदी ने कहा, चंपारण सत्याग्रह शताब्दी का वर्ष है। इतिहास किताबों में रहे तो समाज को प्रेरणा नहीं देता। हर युग में इतिहास को जानने और जीने का प्रयास आवश्यक होता है। उस समय हम थे या नहीं थे, हमारे कुत्ते भी थे या नहीं थे... औराें के कुत्ते हो सकते हैं। ...हम कुत्तों वाली परंपरा में पले-बढ़े नहीं हैं। - लेकिन देश के कोटि-कोटि लोग थे, जब कांग्रेस पार्टी का जन्म नहीं हुआ था। 1857 का स्वतंत्रता संग्राम इस देश के लोगों ने जान की बाजी लगाकर लड़ा था। सभी ने मिलकर लड़ा था। संप्रदाय की भेद-रेखा नहीं थी। तब भी कमल था, आज भी कमल है। - बता दें कि कांग्रेस की ओर से मोदी के बारे में कल एक टिप्पणी की गई थी, जिसमें कुत्ते; शब्द का इस्तेमाल हुआ था। स्पीकर ने यह शब्द कार्यवाही से हटवा दिया था। - मोदी ने आगे कहा, हम भले ही उस वक्त नहीं थे, लेकिन हमें देश के लिए जीने का सौभाग्य मिला है। 8. लोगों ने छोड़ी सब्सिडी - मोदी ने कहा, शास्त्रीजी की अपनी गरिमा थी। युद्ध के दिन थे। भारत विजय का भाव था। शास्त्रीजी ने अन्न त्यागने की बात कही थी। ज्यादातर सरकारों ने जन सामर्थ्य को पहचानना छोड़ दिया है। लोकतंत्र के लिए यही सबसे बड़ा चिंता का विषय है। मुझ जैसे सामान्य व्यक्ति ने बातों-बातों में कह दिया था कि जो अफोर्ड कर सकते हैं, वे गैस की सब्सिडी छोड़ दें। - 2014 में एक दल इस मुद्दे पर चुनाव लड़ रहा था कि 9 सिलेंडर देंगे या 12 देंगे। हमने कहा कि अफोर्ड करने वाले सब्सिडी छोड़ दें। सिर्फ कहा था। इस देश के 1 करोड़ 20 लाख से ज्यादा लोग गैस सब्सिडी छोड़ने के लिए आगे आए। 9. कांग्रेस और भगवंत मान पर चुटकी - मोदी ने कहा, एक समानांतर अर्थव्यवस्था बनी थी। ये बात भी आपके (कांग्रेस) संज्ञान में थी। जब इंदिराजी थीं, तब यशवंतराव चह्वाण उनके पास गए थे। तब इंदिराजी ने कहा था कि चुनाव नहीं लड़ना है क्या। आपका निर्णय गलत नहीं था, लेकिन आपको चुनाव का डर था। आपने कैसे देश चलाया? - मोदी ने कहा, चार्वाक का सिद्धांत विपक्ष ने मान लिया। चार्वाक में कह था- यावत जीवेत, सुखम जीवेत। ऋणं कृत्वा, घृतं पीवेत। यानी जब तक जियो सुख से जियो, उधार लो और घी पियो। उस समय ऋषियों ने घी पीने की बात कही थी। शायद उस वक्त भगवंत मान नहीं थे। नहीं तो कुछ और पीने को कहते। 10. अधर्म आप जानते थे, उसे छोड़ने का सामर्थ्य नहीं था - मोदी ने कहा, नीतियों की ताकत नियम से जुड़ी होती है। इसलिए हमारे देश में उस कार्य संस्कृति को समझने की जरूरत है। हम कुछ भी कहते हैं तो आप कहते हैं कि ये हमारे समय था। इसलिए मैंने साेचा इसी पर खेलूं। आपके मैदान में आकर खेलने में मजा आता है। - मोदी ने महाभारत के एक श्लोक का जिक्र करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। कहा, धर्म क्या है, वो तो आप जानते हैं, लेकिन वह आपकी प्रवृत्ति नहीं थी। अधर्म क्या है, वो भी अाप जानते हैं, लेकिन उसे छोड़ने का आपका सामर्थ्य नहीं था। - 2007 के बाद मैंने जितनी चुनावी सभाएं सुनीं, आपके नेता कहते रहे कि राजीव गांधी कम्प्यूटर क्रांति लाए। जब आज मैं कह रहा हूं कि मोबाइल फोन का इस्तेमाल बैंकिंग नेटवर्क में किया जा सकता है तो आप कह रहे हैं कि मोबाइल ही कहां हैं। तो आप क्या समझाना चाहते हैं? - अगर 40 फीसदी के पास भी मोबाइल है तो क्या उन्हें आधुनिक व्यवस्था की दिशा से जोड़ने का प्रयत्न क्यों नहीं होना चाहिए? आज एक-एक ATM को संभालने के लिए एवरेज 5 पुलिसवाले लगते हैं। करंसी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए काफी खर्च होता है। इसलिए जो लोग डिजिटल करंसी से जुड़ सकते हैं, उन्हें जोड़ना चाहिए। - आप मोदी का विरोध करें, कोई बात नहीं। आपका काम भी है। करना चाहिए। लेकिन जो अच्छा काम हो रहा है, उसे तो बढ़ावा दें। 11 महीने बाद संसद में ऐसा भाषण - पिछली बार मोदी संसद में पिछले साल मार्च में बजट सेशन में बोले थे। - तब भी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने लोकसभा में राहुल पर तंज कसा था। कहा था- कुछ लोगों की उम्र तो बढ़ती है लेकिन समझ नहीं बढ़ती। उन्हें समझने में देर लगती है। कुछ लोग तो समय बीतने के बाद भी चीजें समझ नहीं पाते। - उस भाषण में उन्होंने 70 मिनट तक अपनी बात रखी थी। - मंगलवार को संसद में उन्होंने 88 मिनट स्पीच दिया। यह उनका संसद के अंदर अब तक का सबसे लंबा भाषण था। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें : और क्या बोले मोदी...

आखिर भूकंप आ ही गया: मोदी का राहुल पर तंज; घी पीने की बात पर भगवंत पर चुटकी

आखिर भूकंप आ ही गया: मोदी का राहुल पर तंज; घी पीने की बात पर भगवंत पर चुटकी

Last Updated: February 07 2017, 17:20 PM

नई दिल्ली. नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को लोकसभा में नोटबंदी, इकोनॉमी, आम बजट, रेल बजट, कालेधन, सर्जिकल स्ट्राइक और टैक्स जैसी सभी मुद्दों पर विपक्ष के सवालों के जवाब दिए। स्पीच की शुरुआत में ही उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसा। उन्होंने कहा- आखिर भूकंप आ ही गया। मैं सोच रहा था कि भूकंप आया कैसे? धमकी तो बहुत पहले सुनी थी। कोई तो कारण होगा कि धरती मां इतनी रूठ गई होगी। मोदी ने भगवंत मान पर भी चुटकी ली। राहुल ने कहा- पीएम संसद आने से डरते हैं... - राहुल ने 8 दिसंबर को कहा था- नोटबंदी हिंदुस्तान के इतिहास का सबसे बड़ा स्कैम है। मुझे बोलने नहीं दिया जा रहा है। मैं पूरी बात रखूंगा कि कैसे और किसे फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया। बोलूंगा तो मोदीजी बैठ नहीं पाएंगे वहां। देखिएगा कैसे भूकंप आता है। पीएम संसद आने से डरते हैं। मोदी का जवाब - कल भूकंप आया। इस भूकंप के कारण जिन-जिन क्षेत्रों में असुविधा हुई है, मैं उनके प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। केंद्र सरकार राज्यों के संपर्क में है। कुछ टीमें वहां पहुंच गई हैं। लेकिन आखिर भूकंप आ ही गया। मैं सोच रहा था कि भूकंप आया कैसे? धमकी तो बहुत पहले सुनी थी। कोई तो कारण होगा कि धरती मां इतनी रूठ गई होगी? - मोदी के इतना कहते ही अपोजिशन की ओर से हंगामा होने लगा। भगवंत मान पर चुटकी ली - मोदी ने कहा, चार्वाक का सिद्धांत विपक्ष ने मान लिया। चार्वाक में कहा गया है- यावत जीवेत, सुखम जीवेत। ऋणं कृत्वा, घृतं पीवेत। यानी जब तक जियो सुख से जियो, उधार लो और घी पियो। उस समय ऋषियों ने घी पीने की बात कही थी। शायद उस वक्त भगवंत मान नहीं थे। नहीं तो कुछ और पीने को कहते। विपक्ष ने आंकड़ों पर सवाल उठाए तो सुनाई काका हाथरसी की पंक्तियां - मोदी ने कहा, देश और आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इतने साल से चली योजना के बावजूद मनरेगा में 1035 बार नियम बदले गए। उसमें तो कोई लड़ाई नहीं थी। मनरेगा में भी क्यों 1035 बार परिवर्तन करने पड़े? एक्ट तो एक बार बन गया था। नियम बदले गए। - इस पर विपक्ष ने कहा कि मोदी जो आंकड़े बता रहे हैं, वो गलत हैं। - इस पर मोदी ने कहा, काका हाथरसी की कविता के शब्द सुनाता हूं। इसे यूपी के चुनाव से ना जोड़ें। काका हाथरसी ने कहा था- अंतरपट में खोजिए, छिपा हुआ है खोट, मिल जाएगी आपको बिल्कुल सत्य रिपोर्ट। वाह! क्या शेर कहा - मोदी ने कहा, हम ये जानते हैं कि जनशक्ति का मिजाज कुछ और ही होता है। कल हमारे मल्लिकार्जुनजी कह रहे थे कि कांग्रेस की कृपा है कि अब भी लोकतंत्र बचा है और आप प्रधानमंत्री बन पाए। वाह! क्या शेर सुनाया। - बहुत बड़ी कृपा की अापने देश पर कि लोकतंत्र बचाया। कितने महान लोग हैं आप। लेकिन उस पार्टी के लोकतंत्र को देश भली-भांति जानता है। एक परिवार के लिए पूरा लाेकतंत्र आहूत कर दिया गया है। अधर्म आप जानते थे, उसे छोड़ने का सामर्थ्य नहीं था - मोदी ने कहा, नीतियों की ताकत नियम से जुड़ी होती है। इसलिए हमारे देश में उस कार्य संस्कृति को समझने की जरूरत है। हम कुछ भी कहते हैं तो आप कहते हैं कि ये हमारे समय था। इसलिए मैंने साेचा इसी पर खेलूं। आपके मैदान में आकर खेलने में मजा आता है। - मोदी ने महाभारत के एक श्लोक का जिक्र करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। कहा, धर्म क्या है, वो तो आप जानते हैं, लेकिन वह आपकी प्रवृत्ति नहीं थी। अधर्म क्या है, वो भी अाप जानते हैं, लेकिन उसे छोड़ने का आपका सामर्थ्य नहीं था। मोदी ने विपक्ष के इन सवालों के जवाब भी दिए 1. बजट का वक्त क्यों बदला? मोदी का जवाब: एक चर्चा यह आई कि बजट जल्दी क्यों पेश किया गया। भारत कृषि प्रधान देश है। हमारा पूरा आर्थिक कारोबार कृषि पर आधारित है। कृषि की ज्यादातर स्थिति दीपावली तक पता चल जाती है। हमारे देश की कठिनाई है कि अंग्रेजों की छोड़ी विरासत को लेकर चल रहे हैं। हम मई में बजट की प्रक्रिया से पार निकलते हैं। एक जून के बाद बारिश आती है। तीन महीने बजट का इस्तेमाल नहीं हो पाता। काम करने का समय कब बचता है। जब समय आता है तो दिसंबर से मार्च तक जल्दबाजी में काम होते हैं। पहले क्या था- बता दें कि पहले आम बजट 28 और 29 फरवरी को आता था। पहली बार 1 फरवरी को पेश किया गया। 2. नोटबंदी के दौरान क्यों बदले नियम - मोदी का जवाब: कहा गया कि मैंने नोटबंदी में बार-बार नियम बदले। ये तो ऐसा काम था, जिसमें हम जनता की तकलीफ तुरंत समझने के बाद रास्ता खोजना पड़ा था। एक तरफ देश को लूटने वाले थे, दूसरी तरफ देश को ईमानदारी के रास्ते पर लाने वाले थे। लेकिन आप लोगों का जो बड़ा प्रिय कार्यक्रम है, उस पर आप पीठ थपथपा रहे हैं। देश आजाद होने के बाद 9 अलग-अलग नाम से योजना चली। आज उसे मनरेगा कहते हैं। - देश और आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इतने साल से चली योजना के बावजूद मनरेगा में 1035 बार नियम बदले गए। उसमें तो कोई लड़ाई नहीं थी। मनरेगा में भी क्यों 1035 बार परिवर्तन करने पड़े? एक्ट तो एक बार बन गया था। नियम बदले गए। 3. नोटबंदी से कितना ब्लैकमनी वापस आया - मोदी का जवाब: 2014 से पहले सदन में आवाज आती थी कि स्कैम में कितना गया, अब आवाज आती है कि मोदी कितना लाया। यही तो बदलाव है। 4. नोटबंदी पर पूछते हैं कि सीक्रेट क्यों रखा? - मोदी का जवाब- नोटबंदी में पूछते हैं कि सीक्रेट क्यों रखा, कैबिनेट को क्यों नहीं बताया? लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में नहीं पूछते। सर्जिकल स्ट्राइक आपको परेशान कर रही है। इसलिए आपकी मुसीबत यह है कि पब्लिक में जाकर बोल नहीं पा रहे। आपको पीड़ा हो रही है। यह आपकी मुसीबत है। 5. सर्जिकल स्ट्राइक क्यों की? - मोदी का जवाब- अपने सीने पर हाथ रखकर पूछिए। सर्जिकल स्ट्राइक के पहले 24 घंटे में नेताओं ने क्या बयान दिए थे? जब उन्होंने देखा कि देश का मिजाज अलग है तो उन्हें अपनी भाषा बदलनी पड़ी। ये बहुत बड़ा निर्णय था। 6. नोटबंदी का वक्त 8 नंवबर क्यों रखा? - मोदी का जवाब- कई लोग सोच रहे थे मैंने नोटबंदी का यह फैसला इस वक्त क्यों लिया? मैं बताता हूं? उस हमारी इकोनॉमी मजबूत थी। कारोबार के लिए भी वक्त सही था। हमारे देश में सालभर में जितना व्यापार होता है उसका आधा दिवाली के समय ही हो जाता है। यह सही समय था नोटबंदी के लिए। जो सरकार ने सोचा था लगभग उसी हिसाब से सब चीजें चलीं। मैंने जो हिसाब-किताब कहा था, उसी प्रकार से गाड़ी चल रही है। इसलिए मैं बता दूं कि यह फैसला हड़बड़ी में नहीं लिया। 7. डिजिटल इकोनॉमी क्यों लाए? - मोदी का जवाब- 2007 के बाद मैंने जितनी चुनावी सभाएं सुनीं, आपके नेता कहते रहे कि राजीव गांधी कम्प्यूटर क्रांति लाए। जब आज मैं कह रहा हूं कि मोबाइल फोन का इस्तेमाल बैंकिंग नेटवर्क में किया जा सकता है तो आप कह रहे हैं कि मोबाइल ही कहां हैं। तो आप क्या समझाना चाहते हैं? - अगर 40 फीसदी के पास भी मोबाइल है तो क्या उन्हें आधुनिक व्यवस्था की दिशा से जोड़ने का प्रयत्न क्यों नहीं होना चाहिए? आज एक-एक ATM को संभालने के लिए एवरेज 5 पुलिसवाले लगते हैं। करंसी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए काफी खर्च होता है। इसलिए जो लोग डिजिटल करंसी से जुड़ सकते हैं, उन्हें जोड़ना चाहिए।

115 दिन पाकिस्तान में कैद रहे सैनिक की दर्दनाक कहानी, शरीर पर चोटों के निशान

115 दिन पाकिस्तान में कैद रहे सैनिक की दर्दनाक कहानी, शरीर पर चोटों के निशान

Last Updated: January 30 2017, 01:22 AM

जोधपुर/नई दिल्ली. पाकिस्तानी सेना के चंगुल से 115 दिनों बाद छूटकर भारत लौटे सिपाही चंदू बाबूलाल चव्हाण (22) सुधबुध खो बैठे हैं। सेना की 37 राष्ट्रीय राइफल के इस सिपाही के दिल में पाकिस्तान में हुए जुल्म इस तरह घर कर गए हैं कि उनकी मानसिक हालत बिगड़ गई है। गर्दन में थे चोटों के निशान... - जब पाकिस्तान ने उन्हें लौटाया तब चंदू आधी बेहोशी की हालत में था। उसकी गर्दन पर चोटों के निशान थे। - टॉर्चर से वह अब तक उबर नहीं सके हैं। उन्हें नॉर्मल करने के लिए सेना के डॉक्टर्स ने पहले अमृतसर के हॉस्पिटल में इलाज किया। - अब दिल्ली में सेना के अफसर व एक्सपर्ट्स काउंसलिंग कर उन्हें दुबारा नॉर्मल करने की कोशिश कर रहे हैं। 115 दिन तक सोशल मीडिया में चलाया अभियान - जितना टॉर्चर चंदू ने पाकिस्तान में सहा उतना ही दुख उसके परिवार ने देश में सहा। - चंदू को भारत लाने के लिए उनके बड़े भाई फौजी भूषण चव्हाण बीते 115 दिन से सोशल मीडिया पर जंग लड़ रहे थे। खासकर ट्विटर पर। - भूषण बताते हैं -29 सितंबर की रात मेरा छोटा भाई चंदू जम्मू-कश्मीर के कृष्णा घाटी सेक्टर में गलती से एलओसी पारकर पीओके में चला गया। - वहां उसे पाकिस्तानी सेना ने पकड़कर बंधक बना लिया। उस दिन पूरा देश सर्जिकल स्ट्राइक की खुशी में डूबा था और इधर मेरे परिवार पर मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा था। गांव वालों ने कहा- सरबजीत जैसा होगा हाल - चंदू के पाकिस्तान जाने की खबर सुनते ही नानी लीला बाई पाटिल को ऐसा सदमा लगा कि हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। - भूषण बताते हैं बचपन से ही हमारे माता पिता की मौत हो गई थी। उसके बाद से महाराष्ट्र के धुले जिले के बोरविहिर गांव में नाना सीडी पाटिल ने ही हमारी परवरिश की। - खबर सुनकर मैं तुरंत ही गांव पहुंचा। वहां पूरा गांव निराशा व गम में डूबा हुआ था। गांव वाले कह रहे थे- अब चंदू का हाल भी सरबजीत जैसा होगा और वह भी पाकिस्तान की यातनाओं का शिकार हो जाएगा। - पूरे गांव को उसके लौटने की उम्मीद खत्म हो गई थी। वे बताते हैं, खबर सुनकर नाना की आंखें पथरा गई थी। उसके लौटने की उम्मीद धूमिल गई थी। - लेकिन मुझे विश्वास था कि चंदू सेना का सिपाही है, इसलिए पाकिस्तान उसे वहां नहीं रख सकता। - दो-तीन दिन बाद सबसे पहले पाकिस्तान टीवी पर ये बताया गया कि वह पाकिस्तानी सेना की हिरासत में है। वो जिंदा है यह सुनकर एक उम्मीद जगी। चंदू के दोस्त भी अभियान में शामिल - तीन-चार दिन तक उसके लिए हमारे सांसद व रक्षा राज्यमंत्री सुभाष भामरे को कॉल किए। सेना भी कोशिश कर रही थी, बावजूद रिहाई की खबर नहीं आई तो मैंने तुरंत ही उसके लिए सोशल मीडिया पर अभियान छेड़ने की ठानी। - 5 अक्टूबर को मैंने अपना ट्विटर हैंडल बनाया और सबसे पहला ट्वीट चंदू के नाम किया चंदू घर आ जाओ, बाबा की तबीयत खराब हो रही है, मिस यू;। - इसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री से लेकर सबको ट्वीट करने शुरू किए। इस अभियान में मेरे और चंदू के दोस्त भूषण बाघ, चेतन पाटिल, हितेष कछवे, मालदा की संगमित्रा दास सहित दस बारह लोग जुड़ गए। - सभी ने अपने ट्विटर हैंडल से रोजाना ट्वीट करने शुरू किए। इंग्लिश अच्छी नहीं होने के कारण मैं रोमन हिंदी में मैसेज करता था। बाद में अच्छी अंग्रेजी जानने वालों की मदद से ट्वीट करने लगा। - इस तरह कुल 1000 से ज्यादा संदेशों में हमने परिवार की पीड़ा बयां की। कुछ महीनों तक तो किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके साथ मैंने पीएम से लेकर सभी को पत्र लिखने शुरू किए।

क्या डिफेंस मिनिस्टर दूसरी सर्जिकल स्ट्राइक का सपना देख रहे थे? परेड में झपकी लेते दिखने पर यूजर्स ने पूछा

क्या डिफेंस मिनिस्टर दूसरी सर्जिकल स्ट्राइक का सपना देख रहे थे? परेड में झपकी लेते दिखने पर यूजर्स ने पूछा

Last Updated: January 28 2017, 13:13 PM

नई दिल्ली. सोशल मीडिया में एक फोटो वायरल हो रही है, जिसमें रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर रिपब्लिक डे की परेड के दौरान झपकी लेते नजर आ रहे हैं। इस फोटो पर चुटीले कमेंट भी आ रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, क्या रक्षा मंत्री दूसरी सर्जिकल स्ट्राइक का सपना देख रहे हैं? उन्हें डिस्टर्ब मत करो। बताया जा रहा है कि पर्रिकर की वायरल फोटो दूरदर्शन पर परेड के लाइव टेलिकास्ट से ली गई है। परेड के दौरान वह नरेंद्र मोदी और चीफ गेस्ट अबू धाबी के क्राउन प्रिंस के साथ पहली लाइन में बैठे थे। यूजर्स ने किए ऐसे कमेंट... - फोटो ट्वीट कर @yksingh ने लिखा- निश्चित रूप से सर @manoharparrikar सपने में एक बार फिर गोवा के सीएम पद की शपथ ले रहे हैं? - &rlm;@vinaydokania:- रिपब्लिक डे सेलिब्रेशन के दौरान रक्षा मंत्री #manoharparikar एक बार फिर #SurgicalStrike (सपने में) करते हुए। - एक यूजर ने कहा- क्या वे रक्षा मंत्री के लायक हैं? रिपब्लिक डे में झपकी लेने वाले मनोहर पर्रिकर हैं। शायद वे गोवा कैंपेन के चलते थक गए हैं। - &rlm;@officeofrs9: तारीफ करुं क्या मैं उसकी, जिसने तुम्हे रक्षा मंत्री बनाया। - @AshfaqueNabi: रक्षा मंत्री @manoharparrikar पॉवर नैप लेते हुए। रिपब्लिक डे पर दिन में ही दूसरी #surgicalstrikes का सपना देख रहे हैं! प्लीज डिस्टर्ब मत करना! - @i_me_my5elf: स्लीपिंग ब्यूटी @manoharparrikar, वे हमेशा ऐसे मौकों पर सोते नजर आते हैं। #SleepingBeautyParrikar - @skull_baba: @manoharparrikar उप्स आई डिड इट अगैन। पहले भी हो चुकी है खिंचाई - मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये तीसरा मौका है जब पर्रिकर किसी बड़े इवेंट में झपकी लेते कैमरे में कैद हुए। - इससे पहले मनोहर पर्रिकर पिछले इंडिपेंडेंस डे और 2014 में मोदी की मेक इन इंडिया स्पीच के दौरान भी झपकी लेते दिखाई दिए थे। - जब ये तस्वीरें सामने आई थीं, उस समय भी पर्रिकर की सोशल मीडिया पर काफी खिंचाई की गई थी। केजरीवाल भी दिख चुके हैं जम्हाई लेते हुए - 70th इंडिपेंडेंस डे पर मोदी के भाषण के दौरान दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भी जम्हाई लेते हुए दिखे चुके हैं। - इससे पहले राहुल गांधी की पार्लियामेंट में सोते हुए तस्वीरें वायरल हुई थीं। संसद में झपकी लेने पर राहुल की खिंचाई हुई थी।

PAK ने भारतीय जवान को छोड़ा, सर्जिकल स्ट्राइक के बाद क्रॉस की थी LoC

PAK ने भारतीय जवान को छोड़ा, सर्जिकल स्ट्राइक के बाद क्रॉस की थी LoC

Last Updated: January 21 2017, 21:30 PM

नई दिल्ली. सर्जिकल स्ट्राइक के कुछ ही घंटे बाद जम्मू-कश्मीर में गलती से एलओसी क्रॉस करने वाले भारतीय जवान चंदू बाबूलाल चव्हाण को पाकिस्तान ने शनिवार को रिहा कर दिया। दोपहर 2.30 बजे चंदू को वाघा बॉर्डर पर बीएसएफ को सौंपा गया। इसके बाद डॉक्टर्स की टीम ने जवान का मेडिकल चेकअप किया। चंदू के भाई भूषण ने कहा, मैं भारत सरकार को धन्यवाद देता हूं। रक्षा राज्यमंत्री और सभी अफसरों का शुक्रिया, जिनकी कोशिशों से मेरा भाई वापस घर लौट पाया। PAK का दावा- अफसरों से शिकायत पर जवान ने पोस्ट छोड़ी... - चंदू की रिहाई के बाद पाकिस्तान आर्म्ड फोर्सस के स्पोक्सपर्सन मेजर जनरल आसिफ गफूर ने ट्वीट में दावा किया कि, भारतीय जवान अपने कमांडर्स के बुरे बर्ताब के चलते अपनी पोस्ट छोड़ी थी। वह मर्जी से एलओसी क्रॉस कर पाकिस्तानी सरहद में आया था। - गफूर ने कहा, 29 सितंबर, 2016 को भारतीय जवान ने पाक आर्मी के सामने सरेंडर कर दिया था। बॉर्डर पर शांति कायम रखने और नेकनीयत के चलते हमने चंदू चव्हाण को उसके मुल्क भेजने का फैसला किया। - न्यूज एजेंसी के मुताबिक, पाक विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में भी कहा गया कि, भारतीय नागरिक होने के चलते पाकिस्तान ने जवान को अपने देश लौटने के लिए काफी समझाया। उससे कहा गया कि अगर कोई शिकायत है तो वह अपने देश के अफसरों से कहे। डीजीएमओ लेवल पर चल रही थी बातचीत - मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 37 राष्ट्रीय राइफल्स के जवान की घर वापसी के लिए भारत ने डीजीएमओ लेवल पर पड़ोसी देश से 20 ज्यादा बार बातचीत की थी। - 29 सितंबर को PoK में सर्जिकल स्ट्राइक के कुछ ही घंटे बाद चंदू गलती से पाक सीमा में चले गए थे। पाक रेंंजर्स ने उसे मानकोट के पश्चिम में झंडरूट में कब्जे में लिया था। - कहा जाता है कि इसके बाद चंदू को नियाकल के पाकिस्तानी आर्मी हेडक्वार्टर में रखा गया। तब इंडियन आर्मी ने कहा था कि चंदू सर्जिकल स्ट्राइक का हिस्सा नहीं था। वह गलती से सीमा पार कर गया था। डीजीएमओ लेवल पर चल रही थी टॉक - 12 जनवरी को रक्षा राज्यमंत्री सुभाष भाम्बरे ने कहा था कि चंदू की घर वापसी के लिए पाक के साथ डीजीएमओ लेवल पर 20 से ज्यादा बार बातचीत हुई। - पाकिस्तान जांच पूरी होने के बाद हमारे जवान को छोड़ने के लिए राजी भी हो गया है। महाराष्ट्र का रहने वाला है चंदू - चंदू महाराष्ट्र के धुले जिले का रहने वाला है। बचपन में माता-पिता की मौत हो गई थी। तब से तीनों भाई-बहन बोरविहिर में अपनी नानी के घर रह रहे थे। - चंदू के पाकिस्तान में पकड़े जाने की खबर सुनकर एक हफ्ते के भीतर ही उनकी नानी का हार्ट अटैक से निधन हो गया था। - भाई का नाम भूषण और बहन का नाम रुपाली है। दोनों भाई सेना में काम कर रहे हैं। भूषण चव्हाण 9th मराठा लाइट इन्फैंट्री गुजरात में पोस्टेड है। कब हुआ था सर्जिकल स्ट्राइक? - 18 सितंबर को उड़ी में सीमा पार से आए 4 आतंकियों ने आर्मी हेडक्वार्टर पर हमला किया था। जिसमें 19 जवान शहीद हुए थे। - हमले के 10 दिन बाद (28 सितंबर की रात) आर्मी के स्पेशल फोर्स के 125 कमांडो हेलिकॉप्टर से एलओसी के पास उतारे गए। - कमांडो रेंगते हुए PoK में घुसे और 4 इलाकों में आतंकियों के 7 कैंप तबाह कर दिए थे। इस दौरान 38 आतंकी मारे गए।

करेंसी चेंज ने निकाला किसानों का दम, बिचौलिए काट रहे मलाई, जाने कैसे?

करेंसी चेंज ने निकाला किसानों का दम, बिचौलिए काट रहे मलाई, जाने कैसे?

Last Updated: January 18 2017, 18:55 PM

कौशाम्बी. करेंसी बदलने के फैसले का असर अब सीधे किसानों पर पड़ने लगा है। यहां का किसान अपनी अगली फसल की बुआई के लिए बैंको की लाइन में लगा है या फिर धान फसल की कीमत लेने के लिए व्यापारियों के पास चक्कर लगा रहा है। सरकार के धान खरीद केंद्र से राहत ने मिलने पर उसे बिचौलियों के हाथों अपनी उपज बेचनी पड़ रही है। आगे पढ़िए पूरा मामला ... - सरकार के करेंसी बदलने के फैसले के बाद से ही सरकारी और निजी धान खरीद केन्द्रों पर सन्नाटा पसर गया है। - व्यापारी दिनेश कुमार और सुशील केसरवानी का कहना है, किसानों का धान खरीद तो ले, लेकिन उन्हें भुक्तान करने में बैंको की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। - 1000-500 के नोट कोई भी किसान लेने के तैयार नहीं है। इसके साथ ही किसान चेक के माध्यम से भी पेमेंट नहीं लेना चाहते हैं। - ऐसे में उनके सामने एक ही विकल्प है, जबतक सारी व्यवस्था सही नहीं हो जाती तब तक धान खरीद को बंद रखे। क्या कहते है किसान - कौशाम्बी में साल 2016-17 में धान का उत्पादन कृषि विभाग के अनुसार 1 लाख 16 हजार मीट्रिक टन के करीब आका गया है। - सरकार ने किसान के धान खरीदने के लिए जिले में 39 केंद्र बनांए है। जहां किसानों का धान मौजूदा समय में नहीं खरीदा जा रहा है। - किसान राम प्रकाश शुक्ल के मुताबिक, तमाम नियमों और कानून का हवाला देकर कर्मचारी सरकारी धान खरीद केंद्र में मनमानी करते है। - वहीं ज्ञान चन्द्र के मुताबिक, पिछले 4 दिन से धान बेचने के लिए केंद्र पर बैठे हैं। धान अभी तक बिका नहीं, एक रुपए भी जेब में नहीं है अब ऐसे में अगली फसल की बुआई कैसे करेंसमझ नहीं आ रहा। बिचौलियों को हुआ फायदा - धान के सरकारी समर्थन मूल्य 1470 प्रति कुंतल रेट से कम में धान बिक रहा है। मंडी में करीब 1250 रुपए और 1355 रुपए प्रति कुंतल के हिसाब से धान व्यापारी खरीद रहे हैं। - इसका खुलासा मंडी समिति से निकलने वाले बिल से हुआ है। जिसे मंडी की भाषा में नाइनार कहते है। - इसकी वजह से किसान को प्रदेश सरकार के निर्धारित रेट से कम दाम मिल रहा है। क्या कहते है खाद्य एवं विपरण अधिकारी - कौशाम्बी के किसानों की इन्ही परेशानियों पर जब dainikbhasakar.com की टीम ने जिले के खाद्य विपरण अधिकारी के दफ्तर पहुंचे तो वहां ताला ही लटकता मिला। - साल 2016-17 में प्रदेश सरकार ने पिछले साल की तुलना में 15 फीसदी ज्यादा 34,300 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। - इस लक्ष्य के सापेक्ष नवंबर महीने के 1 तारिख से शुरू हुई। अब तक 39 धान केन्द्रों में महज 33 कुंतल धान ही खरीदा जा सका है। - इसपर खाद्य एवं विपरण अधिकारी विनीता मिश्रा के मुताबिक, धान खरीद में धान का मानक तय है। किसान अभी मानक के अनुसार धान नहीं ला रहे हैं। - इसी कारण धान की खरीद कम हो सकी है। धान खरीद केन्द्रों में किसान को कोई दिक्कत न हो इसके लिए जिला स्तर पर भी जांच टीमे काम कर रही है। करेंसी एक्सचेंज का पड़ा बड़ा असर - करेंसी चेंज के बाद आज 20 दिन हो चुके है, लेकिन फिर भी यहां के बैंको में किसान और मजदूर तबका लाइन में ही अपना पूरा दिन बिता रहा है। - जिले के लीडिंग बैंक मैनेजर दिनेश मिश्रा ने बताया, किसान खेती का काम छोड़ कतारों में लगे हैं। आगे की स्लाइड्स में देखिए रिलेटेड PHOTOS...

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