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चुनाव में वोट न देने वाले नागरिकों पर जुर्माना लगाएं

दिवाकर झुरानी | Mar 20, 2017, 07:35 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
चुनाव में वोट न देने वाले नागरिकों पर जुर्माना लगाएं
चुनाव आयोग को गैर-जिम्मेदार राजनीतिक दलों की ओर से ईवीएम को लेकर ऐसी आलोचना सुननी पड़ी, जिसका वह कतई हकदार नहीं था। इसमें तो कोई संदेह ही नहीं है कि भारत के चुनाव आयोग के पास दुनिया में सर्वश्रेष्ठ मशीनरी है। हर चुनाव में भारत मतदाताओं की भागीदारी की संख्या के आधार पर विश्व रिकॉर्ड बनाता है। दूसरा अच्छा संकेत यह है कि भारत में मतदाताओं की भागीदारी स्वस्थ होती है।
2014 के चुनाव में लगभग 66 फीसदी मतदाताओं ने भाग लिया (यह 2016 के अमेरिकी चुनाव में 58 फीसदी मतदान से आठ फीसदी ज्यादा है)। चुनाव आयोग इसे और भी बढ़ा सकता है ताकि मतदान करने के अधिकार व कर्तव्य का सारे लोग इस्तेमाल कर सकें। सिद्धांत यही है, ‘जो भी वोट दे सकता है, जरूरत वोट दे।’ अब ‘नोटा’ का विकल्प होने से कोई यह बहाना नहीं बना सकता कि उसके सामने विकल्प ही नहीं था। ये दो कदम मदद कर सकते हैं।

प्रवासियों के लिए आसान मतदान : अनुमान के मुताबिक करीब 90 लाख लोग हर साल विभिन्न राज्यों के बीच यात्रा करते रहते हैं। ज्यादातर वोटर ही होते हैं, क्योंकि प्रवासियों में 18 वर्ष से ऊपर की उम्र के वयस्कों का प्रभुत्व होता है। वर्तमान में डाक मतपत्र की व्यवस्था कुछ ही श्रेणियों में लागू है, जिसमें आम प्रवासी शामिल नहीं हैं। अब टेक्नोलॉजी और आधार कार्ड के जरिये सारे प्रवासियों को यह सुविधा देनी चाहिए। यह भारत के बाहर बसे मतदाताओं पर भी लागू होता है।

मतदान न करना कठिन बनाना होगा :चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि उचित कारण होने पर ही वोटर अनुपस्थित रहे। मतदान केंद्र पर न आने के कारण का स्पष्टीकरण पूछने की प्रक्रिया तय करनी होगी। बिना कारण वोट न देने वालों पर जुर्माना ठोंका जा सकता है या कुछ सरकारी सुविधाओं से वंचित किया जा सकता है। भारत एक जीवंत लोकतंत्र है। डाले गए मतों की संख्या से चुनी गई सरकार की गुणवत्ता तय होती है। हमारी आकांक्षा शत-प्रतिशत मतदान की होनी चाहिए ताकि हमारे लोकतंत्र को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ बनाया जा सके और देश अन्य देशों के लिए रोल मॉडल बनकर उभरे।
दिवाकर झुरानी, 27
द फ्लेचर स्कूल ऑफ लॉ एंड डिप्लोमेसी
टफ्ट यूनिवर्सिटी, अमेरिका
linkedin.com/in/diwakar-jhurani-14452717
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Web Title: bhaskar editorial by diwakar jhurani
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