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क्राउडफंडिंग ने दिलाई आइस हॉकी में पहली कामयाबी

हर्ष गुप्ता | Apr 03, 2017, 06:41 IST

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क्राउडफंडिंग ने दिलाई आइस हॉकी में पहली कामयाबी
‘चक दे इंडिया’ फिल्म में कोच शाहरुख खान की भारतीय महिला हॉकी टीम स्पॉन्सरशिप पाने के लिए पुरुषों की टीम के खिलाफ खेलती है। पूरा राष्ट्र इस भावनात्मक संघर्ष से द्रवित हो गया। हम जागे, अपनी लड़कियों पर गौर किया, उनका उत्साह बढ़ाया और उन पर गर्व महसूस किया। एक दशक बाद असली जिंदगी में हमारी महिला आइस हॉकी टीम के लिए परदे की हॉकी टीम के विपरीत कोई स्पॉन्सर नहीं है। बजाय फिल्मी नाटकबाजी करने के उन्होंने इंटरनेट पर डोनेशन के लिए अभियान चलाया।

भारतीय महिलाओं की आइस हॉकी टीम को स्पॉन्सरशिप नहीं मिल रही थी और वह बैंकॉक में होने वाले टू्र्नामेंट में शरीक होने के लिए संघर्षरत थी। टीम ने डोनेशन के लिए क्राउडफंडिंग साइट केट्‌टो का सहारा लिया। भारत में पहले भी गैर-परम्परागत टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट, कला, संगीत आदि के लिए क्राउडफंडिंग का सहारा लिया गया है लेकिन, शायद यह पहला मौका था जब किसी स्पोर्ट्स टीम ने ऐसा कोई अभियान चलाया।
3000 से ज्यादा भारतीय नागरिक 100 रुपए जैसी छोटी रकम से लेकर कुछ हजार रुपए लेकर 3000 से ज्यादा लोग आगे आए ताकि 30 लाख रुपए जुटाए जा सके। इसी पैसे से उनका वीज़ा, टिकट, प्रशिक्षण, उपकरणों आदि की व्यवस्था हुई और दानदाताओं को अपने निवेश पर क्या शानदार रिटर्न मिला! लड़कियों ने दो मैच जीते। भारतीय आइस हॉकी के इतिहास में पहली जीत। बहुत बड़ी उपलब्धि और उम्मीद है कि यह भारतीय खेलों के लिए निर्णायक मोड़ साबित होगा।

इसके पहले तो भारतीय बैडमिंटन स्टार और अब सेलेब्रिटी कोच गोपीचंद को अपनी अकेडमी खोलने के लिए घर गिरवी रखना पड़ा था। इस अकादमी ने बाद में साइना नेहवाल और सिंधु जैसे अोलिंपिक पदक विजेता दिए। दीपा और मैरीकॉम जैसी गैर-परम्परागत खेलों की कई खिलाड़ियों के लिए पैसा जुटाना बड़ी चुनौती रहा है। तो क्या क्राउडफंडिंग ही गैर-परम्परागत खेलों के लिए भविष्य की उम्मीद है? हम उम्मीद कर सकते हैं कि ऐसे और अभियान चलाए जाएंगे और भारतीय खिलाड़ियों को जरूरी मदद देंगे।
हर्ष गुप्ता, 22
आईआईटीयन, गांधीनगर
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Web Title: bhaskar editorial by harsh gupta
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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