Home »Abhivyakti »Knowledge Bhaskar» Knowledge Bhaskar By Dr Mahipal Sachdeve

ग्लूकोमा: अंधत्व का बड़ा कारण

डॉ. महिपाल सचदेव | Mar 15, 2017, 07:47 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
ग्लूकोमा: अंधत्व का बड़ा कारण
12 से 18 मार्च तक वर्ल्ड ग्लूकोमा सप्ताह है। लोगों की जानकारी बढ़ाने व उन्हें हमेशा अपने आंखों के प्रति सतर्क रहने के उद्देश्य से यह सप्ताह मनाया जाता है। दुनिया भर में प्रत्येक वर्ष ग्लूकोमा से प्रभावित होने वाले लगभग 68 प्रतिशत संख्या भारतीयों की है। दरअसल आंखों में असंतुलित दबाव का नतीजा ही ग्लूकोमा रोग है।
प्रत्येक वर्ष एक लाख से सवा लाख भारतीय इस बीमारी से दृष्टि खो रहे हैं। ग्लूकोमा को दृष्टि का खामोश चोर इसलिए कहा जाता है कि व्यक्ति को इसका पता जब लगता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। अक्सर इसका शिकार होने वालों की दृष्टि को बचाना मुश्किल हो जाता है। ग्लूकोमा को कालामोतिया भी कहते हैं।

कपिल जिंदल (42 वर्षीय) उच्च अधिकारी, अच्छी आय वाला व अच्छे स्वास्थ्य वाला, एक सुखी परिवार में रहने वाला व्यक्ति है। अचानक एक दिन बाईं आंख से दिखना बंद हो गया। वह तुंरत नेत्र रोग विशेषज्ञ के पास पहुंचे और उसने जल्दी ग्लूकोमा का निदान करवाना शुरू करवा दिया। उनके नेत्र का परीक्षण करने के बाद, एक लेजर प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया और उन्हें एंटी ग्लूकोमा बूंदें देना शुरू किया गया। वे जल्द ही सामान्य स्थिति में आ गए। डॉक्टर से बातचीत के दौरान कपिल ने पूरी तरह से इस बीमारी की प्रकृति को समझा। आज जिंदल पहले की तरह जिंदगी जी रहे हैं।

ग्लूकोमा क्या है?
ग्लूकोमा दृष्टि संबंधी ऐसा रोग है, जो अंधेपन का सबसे बड़ा मुख्य कारण है। इसके कभी भी किसी प्रकार के लक्षण नजर नहीं आते विशेषकर प्रथम अवस्था में। क्योंकि इसमें अपरिवर्तनीय रूप से दृष्टि के नष्ट होने के प्रमुख कारण या चिह्न प्रदर्शित नहीं होते। आंख की पौष्टिकता और आकार एक तरल पदार्थ की निकासी पर निर्भर करती है। इसे एक्यूअस हूमर के नाम से जाना जाता है। ग्लूकोमा के खुले कोण में यहां तरल पदार्थ के उत्पादन में या तो स्थायी वृद्धि होती है या तरल पदार्थ की निकासी में कमी होती है। इस असंतुलन के कारण आंख पर पड़ते दबाव में वृद्धि होती है कि रोशनी ग्रहण करने वाली नस के लिए खून की सप्लाई कम हो जाती है जिस से यह नस नष्ट हो जाती है और व्यक्ति को दिखाई देना कम होने से दृष्टि दोष व अंधेपन की प्रमुख समस्या उत्पन्न हो जाती है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें कि जीवनभर देखभाल और स्थायी उपचार करवाने की जरूरत होती है। जैसे कि यहां आंख के दबाव को नियंत्रण में रखने के लिए कोई स्थायी उपचार या देखभाल नहीं है। चाहे वह उपचार लेजर द्वारा किया गया हो या दवाइयों को सेवन कर के अथवा किसी भी तरीके से करवाया गया हो।

ग्लूकोमा की शुरुआती पहचान के लिए तीन तरह की जांच प्रक्रिया होती है-
- टोनोमीटर द्वारा नेत्र दबाव की माप
- आॅप्टिक डिस्क -नेत्र बिम्ब परीक्षण
- दृष्टि के बाहरी क्षेत्र की जांच के लिए विजुअल फील्ड्स

ग्लूकोमा के लक्षण
- थिएटर जैसे अंधकारमय जगह पर देखने में असहजता।
- आंखों के नंबर में जल्दी-जल्दी बदलाव।
- आंखों की बाहरी दृष्टि का कम होना
- सिरदर्द, आंखों में कुछ भाग से दिखाई न देना।
- प्रकाश के पास इंद्रधनुषी छवि दिखना।
- आंखों में तेज दर्द, चेहरे में भी दर्द।
- वमन व जी मचलना।
- दृष्टि पटल पर अंधेरे का अहसास।
- आंखों और चेहरे का तेज दर्द, आंखों में लाली।
- प्रकाश के चारों तरफ चमक के साथ धुंधली दृष्टि।
समय पर उपचार दृष्टि को और अधिक बिगड़ने या अंधेपन से बचा जा सकता है।

उपचार:आई ड्राॅप्स, दवाइयां, लेजर उपचार, एर्गोन लेजर ट्रेबेक्यूलोप्लास्टी, सेलेक्टिव लेजर ट्रेबेक्यूलोप्लास्टी, ड्रेनेज इंप्लांट सर्जरी आदि यह एक ऐसी बीमारी है, जिसके एक बार उभरने के बाद इसे पूरी तरह से ठीक कर पाना तो संभव नहीं है। आवश्यक उपचार के अंतर्गत लेसर द्वारा चिकित्सा प्रबंधन, शल्य चिकित्सा प्रबंधन या प्रबंधन किया जाते हैं। मेडिकल प्रबंधन आई ड्रॉप के साथ किया जाता है।
सर्जिकल प्रबंधन के अंतर्गत वे प्रक्रिया की जाती है जहां एक ऐसा आेपन एरिया बनाया जाता है, जिसमें आंख के तरल पदार्थ के लिए नया जल निकासी मार्ग बनाया जाता है। लेजर द्वारा प्रबंधन के अंतर्गत जो प्रक्रिया की जाती है वह प्रक्रिया है ट्रेबेकुलाॅप्लास्टि। इसमें लेजर का उपयोग ट्रेबेकुलर के जल निकासी क्षेत्र को खोलने के लिए किया जाता है। इसमें एक छोटा सा छेद बनाते हैं, जिससे बहाव आसानी से हो सके।
फैक्ट - इंट्राऑक्यूलर लेंस का प्रयोग मोतियाबिंद और मायोपिया के मरीजों में किया जाता है। इसे मोतियाबिंद की सर्जरी के दौरन आंखों में इम्प्लांट करते हैं।
डॉ. महिपाल सचदेव
चेयरमैन एंड मेडिकल डायरेक्टर सेंटर फाॅर साइट,
नई दिल्ली
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे! हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App
Web Title: knowledge bhaskar by dr mahipal sachdeve
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
पढ़ते रहिए 5.5 करोड़ + रीडर्स की पसंदीदा और विश्व की नंबर 1 हिंदी न्यूज़ वेबसाइट dainikbhaskar.com, जानो ख़बरों से ज़्यादा।
 

Stories You May be Interested in

      More From Knowledge Bhaskar

        Trending Now

        पाएं लेटेस्ट न्यूज़ एंड अपडेट्स

        दैनिक भास्कर के ट्रेंडिंग खबरों के नोटिफिकेशन रखेंगे आपको अपडेट..

        * किसी भी समय ब्राउजर सेटिंग्स बदलकर नोटिफिकेशंस ऑफ कर सकते हैं.
        Top