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बचत और निवेश... शेयर ट्रेडिंग करना संपत्ति के लिए घातक इसलिए है

मधुपम कृष्णा | Mar 21, 2017, 07:22 IST

बचत और निवेश... शेयर ट्रेडिंग करना संपत्ति के लिए घातक इसलिए है
यह आम धारणा है कि शेयरों में यदि पैसा लगाया जाता है तो वह अन्य असेट क्लास के मुकाबले ज्यादा रिटर्न देता है। ऐसे में कई निवेशक इसमें बिना सोचे-समझें पैसा लगाते हैं और हाथ जला बैठते हैं। 100 में से केवल एक ऐसा निवेशक होता है, जो इसमें सफल होता है, बाकि अपने रिटर्न को ही खाते रहते हैं। जानिए विस्तार से-
यह आम धारणा है कि शेयर बाजार में पैसा लगाने से रिटर्न अन्य इन्वेस्टमेंट की बजाय बेहतर मिलता है लेकिन, शेयर बाजार में इन्वेस्टमेंट तभी बेहतर है, जब आप लगातार ट्रेडिंग कर रहे हों। कुछ लोग डे ट्रेडर होते हैं। यानी वे शेयर खरीदते हैं और उसी दिन उसे बेचते हैं। एक ही ट्रेडिंग सेशन में वे कई तरह की ट्रेडिंग करते हैं। जबकि कुछ स्विंग ट्रेडर्स होते हैं। ऐसे ट्रेडर शेयर खरीदने के कुछ दिन बाद तक शेयर संभालकर रखते हैं। कुछ लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर होते हैं, जो शेयर काफी रिसर्च के बाद खरीदते हैं और कुछ समय तक शेयर अपने पास रखते हैं। ये लॉन्ग टर्म के टार्गेट प्राप्त करते हैं। बाजार की घट-बढ़ या खबरों के कारण ये प्रभावित नहीं होते हैं और न ही इसके हिसाब से खरीदी बेचान करते हैं।

इक्विटी की ट्रेडिंग को आपकी संपत्ति के लिए खतरनाक बताया गया है। अमेरिका के एक अध्ययन के अनुसार जो परिवार लगातार ट्रेडिंग करते हैं, उन्हें सालाना स्तर पर 11.4 फीसदी का रिटर्न मिल पाता है, जबकि जो परिवार कभी-कभी ट्रेडिंग करते हैं, उनका वार्षिक रिटर्न 18.5 फीसदी तक का होता है। कुछ परिवारों ने भी ब्रोकर के यहां अपना अकाउंट बना रखा है, जिससे शेयरों की खरीदी-बिक्री होती है। इन दलालों का कहना है कि जो परिवार लगातार ट्रेडिंग करते रहते हैं, उनको पेनल्टी भी कई बार देना पड़ती है। वे बड़े पैमाने पर ट्रेडिंग का खर्च तो उठाते ही है, साथ ही भारी-भरकम कमीशन भी देते हैं। यहां तक कि उन शेयरों का भी जो किसी काम के नहीं रह जाते हैं।

एक वास्तविक घटना है, जिसे अध्ययन में लिया गया। इसमें 400 लोगों के एक समूह ने ट्रेडिंग शुरू की। इसमें से मात्र 14 को ही फायदा हुआ। वह भी लंबे समय में और वे नियमित रूप से ट्रेडिंग करने लगे। यह 3.5 से 4.5 फीसदी तक की ही सफलता दर आंकेंगे। केवल 7 ट्रेडर जो पहले वर्ष में विफल रहे थे, उन्होंने एक वर्ष के बाद भी ट्रेडिंग जारी रखी। अन्य ने ट्रेडिंग बंद कर दी, क्योंकि वे नुकसान नहीं झेल सकते थे।

जो लोग ज्यादा ट्रेडिंग करते हैं, वे ज्यादा से ज्यादा निगाह शेयर पर रखते हैं। वे बाजार और शेयर की खबरों में ज्यादा ध्यान देते हैं। इस कारण से बाजार और इकोनॉमी को लेकर उनकी जानकारी बहुत ज्यादा होती है। वे बढ़-चढ़कर पूर्वानुमान लगाते हैं और घाटे की सीमा को भी बहुत ऊपर तक ले जाकर आंक लेते हैं। इसी कारण से वे ज्यादा ट्रेडिंग कर भी पाते हैं, जो उनके पोर्टफोलियो से जांचा जा सकता है।

कई बार ये लोग अपने ही स्तर पर शेयर बेच देते हैं और नए खरीद लेते हैं। फिर भी यदि आप ज्यादा ट्रेडिंग करते हैं तो आपका पोर्टफोलियो कभी भी संतुलित नहीं कहा जा सकता। एक संतुलित पोर्टफोलियो वह होता है, जो कुछ शेयर के कारण न तो ज्यादा भारी होता है न ही कुछ सेक्टर के कारण जोखिम के एवज में हेजिंग करता हो। साथ ही इस तरह के पोर्टफोलियो में रिटर्न अधिक होता है। ज्यादा ट्रेडिंग की बजाय एक संतुलित पोर्टफोलियो होना ज्यादा जरूरी और बेहतर है। यदि पैसा ज्यादा है तो शेयरों की ट्रेडिंग की बजाय किसी अन्य सेक्टर में पैसा लगाना चाहिए।

पोर्टफोलियो मैनेजर आपको यह भली-भांति समझा सकते हैं। ट्रेडिंग को जीरो सम गेम भी कहा जाता है। जैसे जैसे बाजार की चाल बढ़ती है किसी ट्रेडर द्वारा अर्जित पैसा उसकी जेब से निकलकर दूसरे ट्रेडर की जेब में चला जाता है। कोई भी ट्रेडर दूसरे ट्रेडर से प्रतिस्पर्धा ही करते रहता है। बाजार ऐसे ही चलता भी है, जबकि लंबी अवधि के लिए पैसा लगाने वाले लोग इस तरह की प्रतिस्पर्धा में नहीं रहते हैं। इसी कारण से पैसा एक जेब से- दूसरी जेब में आता-जाता है। हो सकता है कि आप हमेशा सफल हो, लेकिन यह बेहद असंभव है यानी सौ में से केवल एक।

अनेक मामलों में इस तरह के ट्रेडर अपने रिटर्न को ही हजम करते जाते हैं, क्योंकि कई शेयर खराब रिटर्न दे देते हैं। यदि इस तरह की ट्रेडिंग कर रहे हैं तो इस जोखिम से रूबरू तो होना ही पड़ता है। इसलिए शेयर बाजार में युक्तिसंगत फैसले लेने पर ही सफल होंगे।
फैक्ट- म्युचुअल फंड के टोटल असेट में छोटे शहरों (बी-15 के बाहर) का शेयर फरवरी 2016 के 2.13 लाख करोड़ रु. से बढ़कर फरवरी 2017 में 3.07 लाख करोड़ रु. पहुंच गया है।
मधुपम कृष्णा
सदस्य, फाइनेंशियल प्लानर्स गिल्ड ऑफ इंडिया
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Web Title: knowledge bhaskar by madhupam krishna
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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