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नए नेतृत्व से रूबरू

Bhaskar News | Dec 05, 2012, 00:09 IST

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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और चीन के साथ सीमा वार्ता में भारत के विशेष प्रतिनिधि शिवशंकर मेनन ने चीन जाकर वहां के नए नेतृत्व का मूड भांपा है।
यह घटनाक्रम इसलिए अहम है, क्योंकि सीमा विवाद हल करने के लिए 2005 में राजनीतिक कसौटियां एवं दिशा-निर्देश तय होने के बाद से चीन की तरफ से इस वार्ता में विशेष प्रतिनिधि रहे दाइ बिंगुओ रिटायर होने वाले हैं। मेनन के दाइ से मिलने का मकसद यही बताया गया है कि नया चीनी विशेष प्रतिनिधि नियुक्त होने के पहले दाइ और मेनन सीमा वार्ता के अब तक के 15 दौर में हुई प्रगति का साझा मूल्यांकन कर उसकी रिपोर्ट तैयार कर सकें।
संकेतों के मुताबिक भारत से सीमा विवाद को हल करना चीन के नए नेतृत्व की प्राथमिकता सूची में बहुत ऊपर नहीं है। यानी फिलहाल उसकी कोशिश शायद यही होगी कि यथास्थिति बनी रहे। वजह यह है कि 2005 में वार्ता के नए दौर में पहुंचने के बाद से इसमें कोई खास प्रगति नहीं हुई है। तब तय हुआ था कि सीमा विवाद को हल करते समय बसी आबादी से छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।
भारत में इसका अर्थ यह समझा गया कि चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा छोड़ रहा है। तब कहा गया कि दोनों देश अपने रुख में सार्थक एवं एक-दूसरे को स्वीकार्य समायोजन करेंगे, ताकि सीमा मसले का एकमुश्त हल निकाला जा सके। इसका अर्थ समझा गया था कि चीन पूरब में अपना दावा छोड़ देगा और भारत से अपेक्षा करेगा कि वह अक्साई चिन पर अपना दावा छोड़ दे।
उन्हीं कसौटियों का एक बिंदु यह था कि सीमा विवाद हल करते समय राष्ट्रीय भावनाओं का ख्याल रखा जाएगा। लेकिन 2008 में बीजिंग ओलिंपिक के समय तिब्बत को लेकर हुए प्रदर्शनों से भारत और चीन के रिश्तों में नया तनाव पैदा हुआ। तब से चीन इन तय सिद्धांतों की अपने नजरिये से ऐसी व्याख्या करता रहा है, जिसे स्वीकार करना भारत के लिए संभव नहीं है। इसके बावजूद यह संतोष की बात है कि सीमा पर शांति बनी रही है। अत: बातचीत का कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में वार्ता की समीक्षा और नए नेतृत्व से तार जोड़कर भारत ने उचित पहल की है।
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Web Title: National Security Adviser
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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