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साधना के मार्ग में सगे-संबंधी बनते हैं बाधा

Bhaskar News Network | Oct 19, 2016, 02:15 AM IST

साधना के मार्ग में सगे-संबंधी बनते हैं बाधा
पटना | सुख-शांतिपाना ही मानव का अंतिम लक्ष्य है। जब उसकी प्राप्ति में कोई बाधा पड़ती है, तो व्यक्ति उसके कारण की खोज भौतिक जगत में करता है, पर सत्य यह है कि बाहर प्रकट होने वाले लक्ष्यों का मूल कारण तो व्यक्ति के भीतर होता है। साधारण व्यक्ति दृष्टि अभाव के कारण देख नहीं पाता।

पाटलिपुत्र गोलंबर स्थित उमंग हॉल में चल रहे मानस कथा के चतुर्थ दिवस दीदी मां मंदाकिनी ने श्रोताओं को सीता हरण के प्रसंग से अवगत कराया।

हनुमान जी के मार्ग में तीन बाधाएं सुरसा, सिंहिका और लंकिनी हनुमान को खाने के लिए तत्पर हैं। मैनाक और सुरसा तो देवताओं द्वारा भेजी गई बाधा है और सिंहिका और लंकिनी रावण द्वारा प्रेषित है, अर्थात देवता और दैत्य दोनों ही उच्च लक्ष्य की प्राप्ति के लिए तत्पर साधक के जीवन में अवरोध उत्पन्न करते हैं। ये भी कह सकते हैं कि साधना के मार्ग में केवल विपक्षी या शत्रु ही विरोधी के रूप में अवरोध उत्पन्न नहीं करते, बल्कि हमारे प्रिय सगे-संबंधी ईष्ट मित्र पहली बाधा बनते हैं।

प्रवचन करतीं दीदी मां मंदाकिनी।

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Web Title: साधना के मार्ग में सगे-संबंधी बनते हैं बाधा
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