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लड़कियों को फ्री एजुकेशन दे रहे रिटायर्ड प्रोफेसर, मिलती है वर्ल्ड क्लास एजुकेशन

पवन प्रकाश | Feb 27, 2017, 04:23 IST

  • 82 वर्ष के रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. सरस्वती प्रसाद सिंह।
    जगदीशपुर(भोजपुर).1857 में जब देश में आजादी की जंग शुरू हुई तो इसका बीड़ा बिहार में जगदीशपुर के 80 साल के बाबू वीर कुंवर सिंह ने उठाया था। अब डेढ़ सौ साल बाद एक बार फिर जगदीशपुर से ही देश की लड़कियों को शिक्षित करने के प्रयास में जुटे हैं 55 साल से विदेश में रह रहे, 82 वर्ष के रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. सरस्वती प्रसाद सिंह। रोज दो घंटे स्काइप पर अपडेट लेते हैं सिंह...
    - कनाडा में रह रहे डॉ. सिंह ने जगदीशपुर के दलीपपुर में एक ऐसे स्कूल, शक्ति प्रसाद सिंह गर्ल्स हाई स्कूल की स्थापना की है जहां बेटियों को सभ्य, शिक्षित समाज तैयार करने लायक बनाया जाता है।
    - गांव और आस-पास की 500 लड़कियां यहां पढ़ती हैं। पढ़ाई भी बेसिक स्तर की नहीं। फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायोलॉजी के प्रयोगशाला के साथ 50 लैपटॉप और कम्प्यूटर वाला वाईफाई इनेबल्ड लैब भी है।
    - एक वक्त का खाना पांचवीं तक के विद्यार्थियों के लिए मुफ्त है। इसके लिए डॉ. सिंह न सरकार से कोई मदद लेते हैं और न ही छात्राओं से कोई फीस।
    1985 में हुई थी स्कूल की शुरुआत
    - 1985 में जब डॉ. सिंह ने अपने गांव में इस स्कूल की शुरुआत की थी, तो वे कनाडा के यूनिवर्सिटी ऑफ अलबर्टा में प्रोफेसर थे।
    - डॉ. सिंह ने बताया कि अपने गांव से निकलने के बाद मैंने पहले इलाहाबाद से उच्च शिक्षा प्राप्त की और बाद में एमबीए और पीएचडी के लिए अमेरिका चला गया।
    - कनाडा में काम करते हुए मुझे अपने देश की उन बेटियों के लिए एक ऐसा स्कूल शुरू करने की इच्छा जगी, जो उन्हें बेहतर जीवन दे।
    - काम मुश्किल था क्योंकि बिहार में गांवों तक ऐसी सुविधा उन दिनों भी न थी और न आज है।
    - पहले छोटे स्तर पर स्कूल की शुरुआत हुई, बाद में इसे हायर सेकेंडरी स्तर तक ले गए।
    रोज दो घंटे कोर टीम से स्काइप पर अपडेट होते हैं डॉ. सिंह

    - 60-65 वर्ष की उम्र में रिटायरमेंट लेकर फॉर्म हाउस पर बाकी दिन बिताने वालों की भीड़ से अलग 82 वर्ष के डॉ. सरस्वती प्रसाद सिंह अपने गांव की बेटियों को पढ़ाने-बढ़ाने के प्रयास में जुटे हैं।
    - 55 साल उन्होंने विदेश में रहते, नौकरी करते हुए बिताए हैं। अभी भी वे कनाडा में ही रहते हैं। लेकिन स्काइप पर हर दिन अपने स्कूल की कोर टीम से पढ़ाई से लेकर खाने की क्वालिटी तक पर बात करते हैं।
    - हर साल एक या दो बार भारत आते हैं। हायर सेकेंडरी के बाद डॉ. अपने स्कूल को पहले कॉलेज में कन्वर्ट करना चाहते हैं और बाद में एक वर्ल्ड क्लास वीमेन यूनिवर्सिटी बनाने की योजना है।
  • स्कूल की फोटो।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: retired professor are Help in the education of girls in bihar
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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