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'चुलबुल पांडेय' के नाम से फेमस था ये पुलिस अफसर, 1 गलती से ऐसे हुई मौत

Bhaskar News | Mar 23, 2017, 06:30 IST

  • तिलकामांझी थानेदार विजय चंद्र शर्मा की एंटी क्रिमिनल छवि ने उन्हें शहर का चुलबुल पांडेय बना दिया था।
    भागलपुर (बिहार).तिलकामांझी थानेदार विजय चंद्र शर्मा की एंटी क्रिमिनल छवि ने उन्हें शहर का चुलबुल पांडेय बना दिया था। शहरवासी विजय चंद्र को उनके असली नाम से ज्यादा चुलबुल पांडेय नाम से जानते थे। यहां तक तत्कालीन डीआईजी वरुण कुमार सिन्हा भी विजयचंद्र को चुलबुल पांडेय नाम से ही बुलाते थे। बता दें कि रविवार देर रात विजय स्कॉर्पियो से 100 की स्पीड में पेट्रोलिंग पर जा रहे थे, इसी दौरान उन्होंने अचानक गाड़ी ब्रेक लगा दिया जिससे दो टायर फट गए। इसके बाद उनकी गाड़ी कई बार पलटी जिसमें दबने से उनकी मौत हो गई। बेटा को प्यार से कहते थे छोटका चुलबुल पांडेय...
    - जानकारी के मुताबिक, सात माह के अपने बेटे को विजय छोटका चुलबुल पांडेय कह कर बुलाते थे। सप्ताह भर पहले विजयचंद्र अपने बेटे को थाना लेकर भी आए थे।
    - सबसे पहले पीएसआई के रूप में विजय की पोस्टिंग मोजाहिदपुर थाने में की गई। पीएसआई में विजय को हनक और काम को देखते हुए उन्हें अमडंडा का थानेदार बनाया गया।
    - अमडंडा से विजय की बदली कर दी गई और उन्हें बरारी थानेदार बनाया गया। बरारी में विजय ने काफी बढ़िया काम किया।
    - दस माह के कार्यकाल में क्राइम और क्रिमिनल के खिलाफ बड़ा अभियान चला कर कई वारदात को टाला। बरारी से विजय को कोतवाली थाने में जेएसआई बनाया गया।
    - कुछ दिन कोतवाली में रहने के बाद पुन: उन्हें गोराडीह थानेदार बनाया गया। गोराडीह थानेदार रहते हुए इनकी बदली तिलकामांझी थानेदार के रूप में कर दी गई।
    - तिलकामांझी में क्राइम का ग्राफ काफी बढ़ गया था। इस कारण आईजी-डीआईजी से मशविरा कर एसएसपी ने विशेष रूप से विजय की पोस्टिंग तिलकामांझी में कराई।
    तिलकामांझी : पलटू, हीरू मियां, बेनी यादव को पकड़ा

    - तिलकामांझी थानेदार रहते हुए विजय ने क्षेत्र में क्राइम कंट्रोल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपराधी पलटू साह, हीरू मियां से तिलकामांझी क्षेत्र तबाह था।
    - सरेशाम डकैती और गोलीबारी की घटनाएं घट रही थी। तत्कालीन थानेदार स्वयंप्रभा पर अपराधी भारी पड़ रहे थे। इस कारण स्वयं प्रभा को 16-17 दिनों में ही हटा दिया गया।
    - विजय ने तिलकामांझी थाने की कमान संभाली और लगातार झोपड़पट्टी गैंग पर दबिश दी। पलटू साह और उसके साथियों को गिरफ्तार किया।
    - गैंग के सरगना हीरू मियां को उसके चार साथियों केस साथ पकड़ा। हाल में जेल गेट से गोराडीह थाने शातिर अपराधी बेनी यादव को हथियार के साथ गिरफ्तार किया।
    गोराडीह : मिनीगन फैक्ट्री पकड़ी, इनामी को दबोचा

    - गोराडीह थानेदार रहते हुए विजयचंद्र ने पुलिस विभाग को कई उपलब्धि दी। भैगांव-नया टोला में मो साहाब के घर छापेमारी विजय ने गन फैक्ट्री पकड़ी थी।
    - पुलिस ने गन फैक्ट्री के संचालक साहाब को गिरफ्तार भी किया था। साहाब के घर से भारी मात्रा में निर्मित और अर्द्धनिर्मित हथियार, हथियार बनाने का औजार बरामद किया था।
    - यहां से तैयार हथियार को विधानसभा चुनाव में खपाने की योजना थी। 50 हजार के इनामी अपराधी को को विश्वविद्यालय के गेट से गिरफ्तार किया।
    - सबौर के बाबूपुर मोड़ कारतूस की बड़ी खेप के साथ सप्लायर को गिरफ्तार किया था।
    बरारी : अभय यादव गैंग पर कसा नकेल

    - बरारी थानेदार के तौर पर विजयचंद्र का कार्यकाल सबसे बेहतर रहा। विजय के कार्यकाल में पिपलीधाम इलाके में अपराधियों ने महादलित युवक चंदन चौधरी की हत्या कर उसकी लाश को बाइक में बांध कर जला दिया था।
    - इस वारदात के दूसरे दिन शहर में तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी का आगमन होने वाला था। पुलिस के लिए महादलित युवक की इस तरह से नृशंस हत्या हो जाना बड़ी चुनौती बन गई।
    - विजय ने 24 घंटे के भीतर आठ आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। यहीं नहीं, अभय यादव, नकुल यादव, श्रवण यादव जैसे अपराधियों पर नकेल कसा।
    आगे की स्लाइड्स में देखें फोटोज...
  • शहरवासी विजय चंद्र को उनके असली नाम से ज्यादा चुलबुल पांडेय नाम से जानते थे।
  • यहां तक तत्कालीन डीआईजी वरुण कुमार सिन्हा भी विजयचंद्र को चुलबुल पांडेय नाम से ही बुलाते थे।
  • सबसे पहले पीएसआई के रूप में विजय की पोस्टिंग मोजाहिदपुर थाने में की गई।
  • पीएसआई में विजय को हनक और काम को देखते हुए उन्हें अमडंडा का थानेदार बनाया गया।
  • अमडंडा से विजय की बदली कर दी गई और उन्हें बरारी थानेदार बनाया गया। बरारी में विजय ने काफी बढ़िया काम किया।
  • दस माह के कार्यकाल में क्राइम और क्रिमिनल के खिलाफ बड़ा अभियान चला कर कई वारदात को टाला।
  • बरारी से विजय को कोतवाली थाने में जेएसआई बनाया गया।
  • कुछ दिन कोतवाली में रहने के बाद पुन: उन्हें गोराडीह थानेदार बनाया गया।
  • गोराडीह थानेदार रहते हुए इनकी बदली तिलकामांझी थानेदार के रूप में कर दी गई।
  • तिलकामांझी में क्राइम का ग्राफ काफी बढ़ गया था। इस कारण आईजी-डीआईजी से मशविरा कर एसएसपी ने विशेष रूप से विजय की पोस्टिंग तिलकामांझी में कराई।
  • तिलकामांझी थानेदार रहते हुए विजय ने क्षेत्र में क्राइम कंट्रोल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपराधी पलटू साह, हीरू मियां से तिलकामांझी क्षेत्र तबाह था।
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Web Title: Vijay Chandra Sharma was known as Chulbul Pandey
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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