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PICS: कामसूत्र से जुड़ी पांच बेहद खास बातें, जो हैं आज भी संपूर्ण समाधान!

dainikbhaskar.com | Feb 13, 2013, 00:01 IST

  • वात्स्यायन द्वारा लिखित 'कामसूत्र' एक ऐसा ग्रंथ है जो सेक्स विकारों को दूर करने में मदद तो करता ही है। साथ इस ग्रंथ में कई ऐसी कलाओं का वर्णन है, जो अन्यत्र कही नहीं मिलता। इस ग्रंथ को न सिर्फ भारत में, बल्कि विदेशों में भी काफी प्रसिद्धि प्राप्त है।
    पेश है 'कामसूत्र' से जुड़ी सात बेहद महत्वपूर्ण बातें...
  • "कामसुख मानव शरीर के लिए आहार के समान है।" - वात्स्यायन, कामसूत्र
    भारतीय चिंतन परंपरा में 'काम' (sex) को दुर्गुण या दुर्भाव न मान कर चतुर्वग - धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष में महत्त्वपूर्ण स्थान दिया गया है। 'काम' के बिना जीवन को अपूर्ण माना गया है, क्योंकि इसके बिना मोक्ष प्राप्त नहीं हो सकता जो ध्येय है।
    'धर्मो विरुद्धो भूतेषु कामोस्मि भरकर्षर्भ' (श्रीमद्भागवत गीता-7/11)
  • 'कामसूत्र' के रचनाकार वात्स्यायन को महर्षि का दर्जा दिया गया है, जबकि वे गणिका-पुत्र थे। प्रसिद्घ मनोविज्ञानवेत्ता और लेखक डॉ. सुधीर कक्कड़ ने उन पर एक बॉयोग्राफिकल नॉवेल लिखा है, जिसका हिंदी अनुवाद 'कामयोगी' के नाम से राजकमल प्रकाशन से आया है। इस उपन्यास में उनके जीवन, विज़न, उनके सांसारिक और आध्यात्मिक प्रेम का ग्राफिक चित्रण किया गया है। यह एकमात्र ऐसी कथाकृति है, जिसमें इस महान दार्शनिक के जीवन और विचारों की झलक मिलती है।
    उल्लेखनीय है कि वात्स्यायन ने ब्रह्मचर्य और परम समाधि का सहारा लेकर 'कामसूत्र' ग्रंथ की रचना की। उनका उद्देश्य किसी भी रूप में वासना को उत्तेजित करना नहीं था, ऐसा उनके बाद के कई टीकाकारों का मानना है।
  • महर्षि वात्स्यायन का जीवन काल स्पष्ट रूप में निर्धारित नहीं है, पर भारतीय और विदेशी शोधकर्ताओं ने उनका जीवन काल ईसा की पहली शताब्दी से पांचवीं शताब्दी तक माना है। अगर यह सच है तो वात्स्यायन उस दौर में पैदा हुए थे जिसे भारतीय इतिहास का स्वर्णकाल माना गया है। दर्शन, कला, साहित्य, शिल्प, विज्ञान, सौंदर्य शास्त्र आदि क्षेत्रों में उस ज़माने में श्रेष्ठ कृतियां सामने आईं।
  • वात्स्यायन के पूर्व कामशास्त्र पर कई विद्वानों ने ग्रंथों की रचना की। इनमें बाभ्रव, नंदी, औद्दालिक श्वेत केतु, गोणिकापुत्र एवं कुचुमार का महत्त्वपूर्ण स्थान है। वात्स्यायन ने इन सभी विद्वानों का उल्लेख किया है और यह स्वीकार किया है कि उन्होंने 'बाभ्रवीय' सिद्धांतों के अनुसार कामसूत्र ग्रंथ का प्रणयन किया।
  • 'कामसूत्र' पर सबसे महत्त्वपूर्ण टीका यशोधर रचित 'जयमंगला' है। कामशास्त्र पर संस्कृत में कई ग्रंथ हैं - 'अनंगरंग', 'कंदर्प चूड़ामणि', 'कुट्टिनीमत', 'नागर सर्वस्व', 'पंचसायक', 'रतिकेलि कुतूहल', 'रति मंजरी', 'रति रहस्य', 'रतिरत्न प्रदीपिका', 'स्मरदीपिका', 'श्रृंगारमंजरी' आदि। वात्स्यायन का कामसूत्र सर्वाधिक लोकप्रिय ग्रंथ है।

  • 'कामसूत्र' में वात्स्यायन ने यौन जीवन से जुड़े तमाम पहलुओं पर विस्तृत और गहरी विवेचना की है। इस ग्रंथ का अधिकांश भाग मनोविज्ञान से संबंधित है। इस ग्रंथ के एक हिंदी अनुवादक डॉ. गंगासहाय शर्मा ने लिखा है, "यह जान कर अत्यंत आश्चर्य होता है कि आज से दो हज़ार वर्ष से भी पहले विचारकों को स्त्री और पुरुषों के मनोविज्ञान का इतना सूक्ष्म ज्ञान था।"
  • 'कामसूत्र' में 36 अध्याय, 64 विषय और सात भाग हैं। श्लोकों की संख्या एक हज़ार दो सौ पचास है। इसे संक्षिप्त बताया गया है। समझा जा सकता है कि इसका विस्तार कितना होगा।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: five most important facts about kamasutra by vatsyayana
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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