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क्या सचमुच भगवान बुद्ध मुस्कुरा रहे हैं?

अजय कुमार | Jan 05, 2013, 11:39 IST

  • पटना। एक ओर बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा बिहार को सत्य-अहिंसा का ऐतिहासिक केंद्र बता रहे है तो दूसरी ओर बिहार का प्रशासनिक तंत्र सत्य से कोसो दूर खड़ा हो गया लगता है। चार दिनों मे जहरीली शराब से हुई 17 लोगों की मौत पर न करूणा है न संवेदना। ताज्जुब यह कि अधिकारी इन मौतों पर लगातार छुपाने की कोशिश कर रहे हैं तो सरकार के किसी भी जिम्मेदार ने इस पर बोलना भी मुनासिब नहीं समझा।

    आगे की स्लाइड्स में जानें कैसा है आलम...

  • यह आम लोगों की मौत पर चौतरफा उदासी का आलम है। मरने वाले मरते रहें, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता वाला भाव सरकार ने ओढ़ लिया है। इस साल की पहली और दूसरी तारीख को राज्य के मधुबनी में सात लोगों की मौत हो गयी। सरकार जहां बैठती है, वहां के एक इलाके में दस लोग मर गये। पर कहीं कोई चिंता नहीं। अधिकारी कहते हैं: मौतों की जांच होगी। जहरीली शराब से लोग मरे या ठंड से? अगर थोड़ी देर के लिए यह मान भी लिया जाये कि ये मौतें ठंड से हुई हैं तो क्या वह हमारे लिए गौरव का विषय हो जाएगा? क्या इससे अधिकारियों की एकाउंटिब्लिटी खत्म हो जाएगी।

    हैरान करने की बात है कि सरकार और उसकी मशीनरी ने जहरीली शराब का जिक्र तक नहीं करने का इरादा बना लिया है। अवैध शराब माफियाओं के आगे पुलिस-प्रशासन की एक नहीं चल रही है। उनके खिलाफ आवाज उठाने वालों की सरेआम धुनाई की जा रही है और कहीं कुछ नहीं हो रहा है। मुजफ्फरपुर में पूर्व मंत्री हिंद केसरी यादव पर माफियाओं के हमले की बात अभी पुरानी नहीं हुई है। छपरा के अमौर में शराब माफियाओं ने वहां प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हमला बोल दिया। पुलिस चुप रही।

  • पिछले दिनों आरा, मुजफ्फरपुर, गया जैसी जगहों पर जहरीली शराब से हुई मौतों पर हंगामा हुआ तो इधर-उधर दारू बनाने वाली भट्टियों को तोड़कर कार्रवाई का दिखावा किया गया। इन कार्रवाईयांे को ऐसे प्रचारित किया गया जैसे सरकार अब शराब माफियाओं को बख्शने वाली नहीं है। मगर हकीकत कुछ दूसरी है। संगठित पैमाने पर अवैध शराब का कारोबार करने वालों पर हाथ डालने की हिम्मत किसी को नहीं हुई है। अगर कार्रवाई होती तो मधुबनी में एक ही मुहल्ले में सात लोगों की मौत कैसे हो जाती। पटना सिटी के मेहंदीगंज इलाके में एक साथ दस लोग कैसे मर जाते? यह जरूर है कि अवैध शराब माफियाओं क संपत्ति जप्त करने और इस मामले में पकड़े जाने वालों पर स्पीडी ट्रायल कराने का शिगूफा जरूर छोड़ा जाता रहा।

    ये मौतें तब हुई जब पटना में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध समागम में पूरी सरकार व्यस्त रही। भगवान बुद्ध ने सत्य, करूणा और दया का संदेश दिया था। बुद्ध स्मृति पार्क में भगवान बुद्ध की प्रतिमा का दलाई लामा ने अनावरण कर दिया। बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा ने बिहार सरकार की तारीफ भी कर दी। उनके तारीफ करने पर भला किसी को क्या ऐतराज हो सकता है। लेकिन इन मौतों पर सवाल तो उठेगा जिसकी ओर से सरकार ने अपनी आंखें मूंद ली है। और यह भी की क्या वाकई भगवान बुद्ध मुस्कुरा रहे हैं?

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Web Title: international budh sammelan and hooch death in bihar
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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