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PHOTOS: इस शख्स ने दबंगों के गढ़ में सादगी से लिया लोहा, लोगों का मन मोहा!

DainikBhaskar.com | Jan 10, 2013, 00:01 IST

  • बिहार अपने बाहुबली प्रवृत्ति के नेताओं के लिए मशहूर रहा है, लेकिन कुछ नेता ऐसे भी हैं जिन्होंने बिना दबंगई किए जनता के दिलों में अपना राज कायम किया है। उन्हें समाजसेवा करने में जो खुशी होती है, शायद किसी और काम में नहीं होती है। ऐसा नहीं है कि इस तरह के नेताओं का विरोध नहीं होता या उनपर लांछन नहीं लगते, परंतु इसके बावजूद उनके कदम नहीं रुकते। ऐसे ही एक नेता हैं बिहार के काराकाट विधानसभा क्षेत्र के जद (यू) विधायक राजेश्वर राज।
    जनता को भगवान मानने वाले राजेश्वर राज को लोग प्यार से 'राजेश्वर बाबू' और 'राज बाबू' कहकर पुकारते हैं। वहीं, कई लोग इनके मजबूत इरादों के कारण राजनीति का 'टाइगर' कहते हैं, जो किसी काम को करने के लिए ठान लेता है तो फिर करके ही मानता है। किसान परिवार में जन्मा यह शख्स जहां पढ़ने में आगे था, वहीं खाने-पीने के साथ शौकीन था।
    निजी जिंदगी से जुड़ी उनकी बेहद खास तस्वीरों के जरिए जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें...
  • राजेश्वर राज का जन्म बिहार के आरा में 20 अगस्त 1969 को हुआ था। घर में अपने भाई-बहनों में सबसे बड़े राजेश्वर राज का सफरनामा एक टाइगर की तरह रहा है।
    (फोटो कैप्शन- शपथ ग्रहण करते राजेश्वर)
  • राजेश्वर राज मूलत: रोहतास जिले के मोरौना गांव के रहने वाले हैं। उनके करियर में उनके माता-पिता का अहम योगदान रहा। बचपन से राजेश्वर को शिक्षक पिता ने जहां शालीनता और ईमानदारी दी, वहीं मां ने कभी हार न मानने की शिक्षा दी। वे किसी भी क्षेत्र में कमजोर नहीं पड़े। पढ़ाई लिखाई की बात करें तो राजेश्वर हमेशा से ही अव्वल रहे। उन्होंने बिक्रमगंज के कृपाशंकर सिंह के स्कूल से प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की। छठवीं तक पढ़ाई करने के बाद वे सातवीं क्लास से रामरूप उच्च विद्यालय गोड़ारी में दाखिला लिया। 1984 में उन्होंने मैट्रिक एग्जाम 84 परसेंट के साथ पास कर अपने इलाके में तहलका मचा दिया। राजेश्वर ने पटना के एएन कॉलेज से इंग्लिश में एमए की डिग्री हासिल की। इसके अलावा उन्होंने एलएलबी और टीचर्स ट्रेनिंग भी की और बिहार में टॉप किया।
  • माता-पिता की चाहत थी बेटा आईएएस या आईपीएस बने, लेकिन राजेश्वर राज पर समाज सेवा की धुन सवार थी। उन्होंने माता-पिता की इच्छा के विरूद्ध समाजसेवा में कूद पड़े। (फोटो कैप्शन- परिवार के साथ राजेश्वर राज)

  • राजेश्वर के परिवार का राजनीति से दूर-दूर तक नाता नहीं था, लेकिन वे राजनीति में ही आगे बढ़ना चाहते थे। 1990 में उनकी मुलाकात उस समय के दिग्गज नेता ई. शंभू नाथ सिन्हा से हुई। उनसे प्रभावित होकर राजेश्वर ने उन्हें अपना गुरू बना लिया। तब श्री सिन्हा ऑल इंडिया तकनीकी कांग्रेस के अध्यक्ष थे। श्री सिन्हा वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी हैं। वे बिहार जदयू के प्रवक्ता भी रहे और हाल-फिलहाल किसानों को संगठित करने में जुटे हैं। राजेश्वर राज श्री सिन्हा के कहने पर कांग्रेस से जुड़ गए। ( फोटो कैप्शन- पूरे परिवार के साथ राजेश्वर)
  • 1990 में ही राजेश्वर राज को रोहतास जिला कांग्रेस तकनीकी सेल का अध्यक्ष बना दिया गया। राजनीति का सफर शुरू होते ही राजेश्वर राज के नेतृत्व में रोहतास जिले में दिग्गज कांग्रेसी नेताओं की सभाएं होने लगी। पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा, पूर्व मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद, सत्येन्द्र नाथ सिन्हा जैसे नेताओं का रोहतास में आगमन हुआ। राजेश्वर राज चर्चा में आये। इसी बीच 1996 में गुरू ई शंभूनाथ सिन्हा कांग्रेस छोड़ एनडी तिवारी के कांग्रेस में शामिल हो गए, उनके पीछे-पीछे राजेश्वर राज भी तिवारी कांग्रेस से जुड़ गए। इन्हें युवा तिवारी कांग्रेस का रोहतास जिलाध्यक्ष बनाया गया।
  • 1997-98 की बात है, तब समता पार्टी का गठन हुआ ही था। उसी दौरान ई शंभूनाथ सिन्हा की मुलाकात नीतीश कुमार से हुई और वे समता पार्टी से जुड़ गए। उन्होंने रोहतास के बिक्रमगंज में नीतीश कुमार की आम सभा कराई। सभा में अपार भीड़ देख नीतीश ने शंभूनाथ सिन्हा को गले लगा लिया। श्री सिन्हा ने तब राजेश्वर राज को आगे कर बताया कि ये सब इन्हीं की मेहनत का नतीजा है, सारा श्रेय इन्हीं को जाता है। फिर क्या था मंच पर ही भरी सभा में राजेश्वर राज को समता पार्टी में शामिल कर लिया गया। इस तरह राजेश्वर राज ने बुलंद इरादों के साथ राजनीति की एक और सीढ़ी चढ़ी।
  • अब चुनौतियां नई थीं। भाजपा-समता का गठबंधन था। रोहतास और आसपास के इलाके से कई दिग्गज नेता नीतीश कुमार के पॉलिसीमेकर वाली हैसियत में थे। राजेश्वर राज को सबका मुकाबला करना था। गुरू शंभू नाथ सिन्हा साथ तो थे ही। राजेश्वर राज ने अपनी शालीनता और ईमानदारी के साथ नेता के प्रति वफादारी को ताकत बनायी। तो ललन सिंह, रघुनाथ झा, अरूण कुमार जैसे कद्दावर नेताओं का भी साथ मिला। फिर क्या था, 2000 में काराकाट विधानसभा क्षेत्र से समता पार्टी से टिकट भी मिल गई। खुशी का ठीकाना नहीं। पर, माले ने बाजी मार ली। राजेश्वर राज समता की टिकट पर तीसरे स्थान पर रहे। राजेश्वर चुनाव तो हार गए पर 16 हजार वोट लाकर उन्होंने अपने नेता का दिल जीत लिया।
  • यही कारण रहा कि 2005 के विधानसभा चुनाव में जदयू के टिकट पर पार्टी के नेता नीतीश कुमार ने राजेश्वर राज पर ही भरोसा जताया। पर किस्मत इस बार भी दगा दे गयी। माले फिर बाजी मार ले गया। लेकिन, तब वे 26 हजार से अधिक वोट पा कर नेता का मान बढ़ाए रखा। हार के बाद भी राजेश्वर राज टूटे नहीं। हौसले को और बुलंद किया। 2009 में फिर चुनाव हुआ। इस बार टिकट तो नहीं मिला पर पार्टी की जीत के लिए जान फूंक दी। यह चुनाव भी जदयू हार गई। लेकिन कहते हैं न किस्मत में कुछ है तो फिर मिलेगा ही। 2010 में फिर विधानसभा चुनाव हुए और इसबार फिर नीतीश कुमार ने जदयू से राजेश्वर राज को ही टिकट दिया। इसबार सफलता हाथ लगी। 55 हजार से अधिक वोट और बड़े अंतर से राजद और माले को पटखनी दी। इस तरह राजेश्वर राज बन गए विधायक राजेश्वर राज।
  • विधायक बनने के बाद से ही राजेश्वर राज अपने जिले को पूर्ण साक्षर बनने की मुहिम में जुटे हुए हैं। ये बिहार के पहले ऐसे विधायक हैं जो अपने किये वादों में से क्या कार्य किया और क्या नहीं कर पाये, जनता का कौन से काम कहां अटका पड़ा है और किस वजह से? इन तमाम बातों का एक बुकलेट बनवाकर प्रतिवर्ष जनता के बीच बांटते हैं। ( फोटो कैप्शन- अपनी पत्नी के साथ राजेश्वर राज )
  • विधायक का मानना है कि जनता कुछ ज्यादा ही अपेक्षा करने लगी है जिससे शिकायतों की संख्या बढ़ी हैं। विधायक कहते हैं कि जो शिकायत हमारे स्तर से दूर होती है, दूर करता हूं, नहीं तो जनता दरबार में मुख्यमंत्री के समक्ष जनता की तरह ही रखता रहा हूं। विशेष दर्जा हमारा हक है, इसकी लड़ाई में भी काफी सक्रियता से भिड़े हैं। विधायक कहते हैं अगर मौका मिला तो शिक्षा मंत्री बनना पसंद करूंगा। शिक्षा को वे बड़ी ताकत मानते हैं। लिट्टी चोखा के शौकीन, अध्यात्म में गहरी रूची रखने वाले राजेश्वर राज को जातिवाद पर भरोसा नहीं। ( फोटो कैप्शन- बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री के साथ राजेश्वर राज)
  • रोहतास जिला के जोगनी गांव में 1995 में पूनम राज से उनकी शादी हुई। पुत्र विपुल राज, पुत्री कृति राज और श्रुति राज को पापा पे नाज है। जनता भी विधायक को बहुत प्यार से देखते हैं, उम्मीदों से देखते हैं। विदेश कभी नहीं गए।
  • ब्लू रंग और कुर्ता पाजामा के शौकीन विधायक राजेश्वर राज भोजपुरी गीतों के फैन हैं। उनके फेवरेट गायक भोजपुरी गीत सम्राट भरत शर्मा हैं। जब बातें की जाती है तो खुद गुनगुनाने लगते हैं। कहते हैं मैं विधायक नहीं होता तो भी समाज सेवा ही करता। ( भोजपुरी गायिका कल्पना के साथ राजेश्वर राज )
  • साइकिल के आलावा कोई वाहन नहीं चलाना जानते। हवाई यात्रा का शौक रखते हैं। शौक की बात चली तो बात फिल्मों की हुई। बोले अमिताभ का फैन हूं। बागबान फिल्म से अच्छी कोई नहीं लगी। आज के परिवार की पूरी तस्वीर है। हां, हंसते हुए कहते हैं कि हाल ही में एक फिल्म देखा था 'एक था टाइगर'। पूछा गया कैसी लगी तो, मुस्कुरा दिया। बोले मैं तो हूं विधायक। जिगर है टाइगर वाला।

    ( फोटो कैप्शन- अपनी पत्नी के साथ राजेश्वर राज)

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Web Title: Rare Photos of JD U Mla Rajeshwar Raj
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