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नीतीश के खिलाफ बगावत: चार बड़े नेताओं ने पार्टी छोड़ी, बताया तानाशाह

Dainik Bhaskar.com | Feb 08, 2013, 09:30 IST

  • पटना। बिहार में मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ जद (यू) के बड़े नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है। वहीं मोदी को पीएम उम्‍मीदवार की खबरों पर जेडी (यू) अध्‍यक्ष शरद यादव ने कॉर्पोरेट घरानों को चेतावनी दे डाली है। शरद ने कहा है कि कॉर्पोरेट लॉबी पीएम उम्‍मीदवार के तौर पर नरेंद्र मोदी का नाम उछाल रही है। हालांकि उन्‍होंने साफ किया कि कुछ कॉर्पोरेट घराने ही ऐसा कर रहे हैं। उन्‍होंने ऐसे घरानों को चेतावनी देते हुए कहा- ऐसा करने वाले आग से खेल रहे हैं। परिणाम अच्‍छा नहीं होगा। शरद ने कहा, 'एनडीए की तरफ से अभी तक पीएम उम्‍मीदवार तय नहीं हुआ है। पीएम की खोज बंद होनी चाहिए। न्‍यूक्लियर बम की तरह पीएम की खोज हो रही है। देश का पीएम कौन होगा, यह चुनने का काम राजनेताओं का है और संसद देश का पीएम चुनने के लिए सक्षम है।'

    बिहार में शरद की पार्टी के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार खुले आम मोदी की पीएम उम्‍मीदवारी का विरोध करते रहे हैं। बिहार में सत्‍ताधारी जद(यू) को बड़ा झटका भी लगा है। पार्टी के प्रदेश महासचिव और प्रवक्‍ता शंभूनाथ सिन्हा ने नीतीश के खिलाफ बगावती तेवर दिखाते हुए गुरुवार को पद एवं पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। सिन्‍हा का कहना है कि नीतीश तानाशाह हो गए हैं। उन्‍होंने कहा, 'मुझ जैसे नेता को अपनी बात कहने के लिए उनसे मिलने के लिए साल भर से समय नहीं दिया गया। नीतीश के तानाशाह हो जाने का इससे बड़ा सुबूत नहीं हो सकता।' त्यागपत्र देने के बाद संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार जब से दोबारा सत्ता में आए हैं, पार्टी में लोकतंत्र खत्म हो गया है। कार्यकर्ता पूरी तरह से उपेक्षित हैं। लालू प्रसाद का भय दिखाकर सरकार आतंक, अत्याचार एवं भ्रष्टाचार को अधिकृत रूप से स्थापित करना चाहती है।

    समता पार्टी के जमाने से ही नीतीश के साथ जुड़े रहने वाले सिन्‍हा का यह भी दावा है कि पार्टी के 90 फीसदी कार्यकर्ताओं का जद(यू) में दम घुट रहा है। सिन्हा के साथ जद(यू) किसान प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष राजकिशोर सिंह, सचिव डा. संजय कुमार व रंजय कुमार सिंह और पार्टी के तकनीकी प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष सह प्रवक्ता राजेश सिन्हा ने भी इस्तीफा दिया है। जदयू के पूर्व सचिव प्रेमनाथ पासवान ने भी पार्टी छोड़ी है।

    संभावना जताई जा रही है कि ये सभी उपेंद्र कुशवाहा की नई पार्टी बिहार नवनिर्माण मंच में शामिल होंगे। जद(यू) से निलंबन के बाद अपनी पार्टी बनाने वाले कुशवाहा ने इस बात की पुष्टि की कि उनकी सिन्हा से बात हुई है। कई लोग जद(यू) छोड़ेंगे और वे सभी उनके संपर्क में हैं। (पढ़ें-नीतीश के विरोध के पीछे का सच)

    नीतीश के तानाशाह बन जाने संबंधी सिन्‍हा के आरोपों में दम हो न हो, लेकिन मुख्‍यमंत्री का उग्र रूप कई बार सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिख चुका है। पिछले अक्‍टूबर में उनकी अधिकार यात्राके दौरान नवादा में लड़कियों के काले दुपट्टे उतरवा दिए गए थे। काले कपड़ों पर रोक के मुख्यमंत्री के आदेश का पालन करते हुए पुलिसकर्मियों ने वृद्धजनों के छाते तक रखवा लिए थे। इसे महिलाओं की इज्जतसे खिलवाड़ बताया गया था। इसी यात्रा के दौरान नीतीश ने विरोध करने वाले 'कॉन्‍ट्रैक्‍ट टीचर्स' को मंच से कहा था कि अगर आपका यही रवैया रहा तो आपकी मांगें मानना तो दूर, उन पर विचार तक नहीं किया जाएगा। इस यात्रा के दौरान नीतीश का राज्‍य भर में विरोध(पढें- शिक्षकों ने फेंके अंडे तो विधायक पति ने तान दी बंदूक) हुआ था।

    आगे पढें- अपने ही क्यों कर रहे हैं नीतीश कुमार का विरोध?

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  • 'एको अहं, द्वितीयो नास्ति' का भाव


    सरकार में आने के बाद पुराने साथी किनारे लगे तो यह भाव तेजी से पनपा। दूसरी बार प्रचंड बहुमत मिला तो नीतीश कुमार में एको अहं, द्वितीय नास्ति वाला भाव स्थापित हो गया। उनके करीबी मित्रों का कहना है कि अपने नेता मे बदलाव को हमने महसूस किया। वे अब हमारी नहीं सुनते। अव्वल तो यह कि उन्हें हमसे सुनने का वक्त नहीं मिलता। उनके आसपास अ-राजनीतिकों की जमघट ने उनका ही नुकसान कर दिया। दरबारियों ने ऐसी फिजां बना दी कि नीतीश कुमार को लगता है कि उनके जैसा इस संसार में दूसरा कोई नहीं।

  • नीतीश को साथियों पर एतबार नहीं


    राज्य में अति पिछड़ों का सम्मेलन जदयू के बैनर पर चल रहा है। नीतीश कुमार को लगता है कि किन्हीं वजहों से अगड़ों की कुछ जातियां उनका समर्थन नहीं देंगी। लिहाजा, रणनीति के तहत पिछड़ों को गोलबंद करने के लिए सम्मेलन शुरू किया गया। इन सम्मेलनों के संचालन की जिम्मेदारी नीतीश कुमार ने ब्यूरोक्रेट से राजनीतिज्ञ बने अपने एक करीबी को दी है। जदयू के अति पिछड़े नेताओं की इसमें न कोई भागीदारी हो रही है और न उनकी कोई भूमिका है। इससे नाराजगी पैदा हुई है। पुराने लोगों से सलाह-मशविरे की परिपाटी भी लगभग खत्म हो गयी है।

  • पार्टी के ऊपर पार्टी

    कहने को शरद यादव राष्ट्रीय व वशिष्ठ नारायण सिंह प्रदेश जदयू के अध्यक्ष हों। पर सच्चाई यह है कि पार्टी के अंदर एक और पार्टी बन गयी है। इस पार्टी के प्रमुख खुद नीतीश कुमार बन गये हैं। यह पार्टी खुद फैसले लेती है और उसकी जानकारी दूसरों को नहीं दी जाती। नीतीश कुमार अपने नये साथियों के साथ कोई फैसला लेते हैं और उसे एक अणो मार्ग यानी मुख्यमंत्री आवास से लागू कराया जाता है। जबकि यह वीरचंद पटेल पथ अर्थात जदयू के प्रदेश कार्यालय से होना चाहिए था। यह स्थिति जिलों में भी बन गयी है।

  • पुराने चेहरों का बदल जाना

    1995 में लालू प्रसाद का विरोध करते हुए नीतीश कुमार की अगुवाई में समता पार्टी बनी। उस टीम के अमूमन सभी लोग आज बदल गये हैं। आज नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द मंडराने वाले लोग कौन है? ये राजनीतिज्ञ नहीं हैं। ये ऐसे लोग हैं जिनकी पहचान दूसरे कारणों से अधिक है। ये मन मोहने वाले लोग हैं। सत्ता मिलने के बाद इस तब्दीली ने पुराने लोगों को किनारे लगा दिया। अब ऐसे लोग भले जदयू या सरकार में हो, पर अंदर ही अंदर बेहद खुश भी हैं।

  • उम्मीदों का टूट जाना

    नीतीश कुमार के विरोध के पीछे उम्मीदों का टूटना भी एक वजह है। एक दौर में उनके खास रहे साहित्यकार प्रेम कुमार मणि मानते हैं कि जगह-जगह नीतीश कुमार का हो रहा विरोध प्राकृतिक है। लोग कितने साल सब्र करेंगे। अफसोस होता है कि तमाम खूबियों के बावजूद नीतीश कुमार रास्ता भटक गये। इसे बिहार की जनता देख रही है और विरोध भी कर रही है। समता पार्टी जब बन रही थी, तब हमलोगों ने दस सूत्री प्रोग्राम बनाया था। उसे नीतीश कुमार भूल गये। उनकी सभाओं में एक जाति के लोगों को पास दिये जा रहे हैं। यह कितनी शर्म की बात है।

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Web Title: Revolt against Nitish four top leaders left the party
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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