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देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र बाबू के बारे में जानें 'वो' सब, जो जानना चाहते हैं!

dainikbhaskar.com | Sep 14, 2013, 00:00 IST

  • देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद थे। उनके स्वतंत्रता आंदोलन में किए गए योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। राजेंद्र बाबू मेधावी छात्र थे, जो हमेशा से ही प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुए। उनका जन्म बिहार के सारण जिले के जीरादेई गांव में 3 दिसंबर, 1884 को हुआ था। उनके पिता महादेव सहाय संस्कृत एवं फारसी के विद्वान थे, एवं माता कमलेश्वरी देवी एक धर्मपरायण महिला थीं।
    आगे की तस्वीरों में जानें कैसा था राजेंद्र प्रसाद का प्रारंभिक जीवन, कैसे जुड़े स्वतंत्रता आंदोलन से, इसके अलावा अन्य तमाम बातें, जिससे शायद आप अंजान होंगे...
  • डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को हम देश के पहले राष्ट्रपति के रूप में जानते हैं, लेकिन ये आजादी के बाद की बात है। इससे पहले राजेंद्र बाबू भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से थे जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण में भी अपना योगदान दिया था जिसकी परिणति 26 जनवरी 1950 को भारत के एक गणतंत्र के रूप में हुई थी।

  • राजेंद्र बाबू देश के पहले राष्ट्रपति थे, लेकिन इससे पहले भारत की आजादी के बाद वे केंद्र में मंत्री भी रह चुके थे। पूरे देश में अत्यंत लोकप्रिय होने के कारण उन्हें राजेन्द्र बाबू या देशरत्न कहकर पुकारा जाता था।

  • बाबू राजेन्द्र प्रसाद के पूर्वज मूलरूप से कुआंगांव, अमोढ़ा (उत्तर प्रदेश) के निवासी थे। यह एक कायस्थ परिवार था। कुछ कायस्थ परिवार इस स्थान को छोड़ कर बलिया जा बसे थे। कुछ परिवारों को बलिया भी रास नहीं आया, इसलिये वे वहां से बिहार के जिला सारन के एक गांव जीरादेई में जा बसे।
  • इन परिवारों में कुछ शिक्षित लोग भी थे। इन्हीं परिवारों में राजेन्द्र प्रसाद के पूर्वजों का भी परिवार भी था। जीरादेई के पास ही एक छोटी सी रियासत थी - हथुआ। चूंकि राजेन्द्र बाबू के दादा पढ़े-लिखे थे, अतः उन्हें हथुआ रियासत की दीवानी मिल गई। पच्चीस-तीस सालों तक वे उस रियासत के दीवान रहे। उन्होंने स्वयं भी कुछ जमीन खरीद ली थी। राजेन्द्र बाबू के पिता महादेव सहाय इस जमींदारी की देखभाल करते थे। राजेन्द्र बाबू के चाचा जगदेव सहाय भी घर पर ही रहकर जमींदारी का काम देखते थे। अपने पांच भाई-बहनों में वे सबसे छोटे थे इसलिए पूरे परिवार में सबके प्यारे थे। उनके चाचा की कोई संतान नहीं थी इसलिए वे राजेन्द्र प्रसाद को अपने पुत्र की भांति ही समझते थे। दादा, पिता और चाचा के लाड़-प्यार में ही राजेन्द्र बाबू का पालन-पोषण हुआ।

  • बचपन में राजेन्द्र बाबू जल्दी सो जाते थे और सुबह जल्दी उठ जाते थे। उठते ही मां को भी जगा दिया करते और फिर उन्हें सोने ही नहीं देते थे। अतएव मां भी उन्हें प्रभाती के साथ-साथ रामायण महाभारत की कहानियां और भजन कीर्तन आदि रोजाना सुनाती थीं।
  • राजेन्द्र बाबू के पिता महादेव सहाय संस्कृत एवं फारसी के विद्वान थे एवं उनकी माता कमलेश्वरी देवी एक धर्मपरायण महिला थीं। पांच वर्ष की उम्र में ही राजेन्द्र बाबू ने एक मौलवी साहब से फारसी में शिक्षा शुरू किया। उसके बाद वे अपनी प्रारंभिक शिक्षा के लिए छपरा के जिला स्कूल गए। राजेंद्र बाबू का विवाह उस समय की परिपाटी के अनुसार बाल्य काल में ही, लगभग 13 वर्ष की उम्र में, राजवंशी देवी से हो गया। विवाह के बाद भी उन्होंने पटना की टीके घोष अकादमी से अपनी पढाई जारी रखी। उनका वैवाहिक जीवन बहुत सुखी रहा और उससे उनके अध्ययन अथवा अन्य कार्यों में कोई रुकावट नहीं पड़ी। 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा दी। उस प्रवेश परीक्षा में उन्हें प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था।
  • सन् 1902 में उन्होंने कोलकाता के प्रसिद्ध प्रेसिडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया। उनकी प्रतिभा ने गोपाल कृष्ण गोखले तथा बिहार-विभूति अनुग्रह नारायण सिन्हा जैसे विद्वानों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। 1915 में उन्होंने स्वर्ण पद के साथ विधि पारास्नातक (एलएलएम) की परीक्षा पास की और बाद में लॉ के क्षेत्र में ही उन्होंने डॉक्ट्रेट की उपाधि भी हासिल की। राजेन्द्र बाबू कानून की अपनी पढ़ाई का अभ्यास भागलपुर, बिहार में किया करते थे।
  • सन 1962 में अवकाश प्राप्त करने पर राष्ट्र ने उन्हें 'भारत रत्‍न' की सर्वश्रेष्ठ उपाधि से सम्मानित किया। यह उस पुत्र के लिये कृतज्ञता का प्रतीक था जिसने अपनी आत्मा की आवाज़ सुनकर आधी शताब्दी तक अपनी मातृभूमि की सेवा की थी।

  • अपने जीवन के आख़िरी महीने बिताने के लिये उन्होंने पटना के निकट सदाकत आश्रम को चुना। यहां पर 28 फ़रवरी 1963 में उनकी मौत हो गई।

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Web Title: Unknown facts about first president of India dr rajendra prasad
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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