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PHOTOS: इन दबंगों के बूते चलती है बिहार की राजनीति

Dainikbhaskar.com | Jun 15, 2013, 00:05 IST

  • वैसे तो पूरे देश की राजनीति में ही दबंगों यानी बाहुबलियों को बोलबाला है, पर बिहार इस मामले में कुछ खास ही है। बिहार में शायद ही ऐसी कोई पार्टी हो, जिसमें दबंगों का सिक्का न चलता हो। बिहार की राजनीति में बाहुबलियों का इतिहास बहुत ही पुराना है। जब राज्य में कांग्रेस का राज था, तब भी बाहुबली पार्टी और सत्ता तंत्र पर अच्छा-खासा प्रभाव रखते थे। जब कांग्रेस का पराभव हो गया और जनता दल सत्ता में आया और लालू प्रसाद यादव मुख्यमंत्री बने तो बाहुबली, माफिया और गुंडे-मवाली राजनीति में खुल कर खेलने लगे।
    लालू प्रसाद ने बाहुबलियों को जमकर संरक्षण दिया, पर सिर्फ इनके बारे यह कहना गलत होगा। आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी बाहुबलियों को संरक्षण देने के मामले में पीछे नहीं हैं। कहा तो यहां तक जा ता है कि अगर बाहुबली इनका साथ न दें तो चुनाव जीतना तक इनके लिए मुश्किल हो जाए।
    dainikbhaskar.com बता रहा है बिहार के कुछ ऐसे बाहुबली नेताओं के बारे में जिनका खौफ़ अभी भी कायमहै। देखें आगे की स्लाइड...
  • मुहम्मद शहाबुद्दीन -
    एक समय लालू प्रसाद का दायां हाथ माना जाने वाला यह माफिया आज सीवान में जेल की सलाखों के पीछे है। यह सीपीआई (माले) नेता और जेएनयू के छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष चंद्रशेखर की
    हत्या के आरोप में आजीवन कैद की सजा भुगत रहा है। एक समय सीवान और आस-पास के इलाकों में इसी का राज चलता था। प्रशासनिक अधिकारी तक इससे खौफ खाते थे। इस पर न जाने कितनी हत्याओं और अन्य
    संगीन अपराधों के आरोप हैं। लगभग एक दशक पहले एक पत्रिका ने इस पर कवर स्टोरी प्रकाशित की थी और
    लिखा था कि यह आदमी है या हैवान। खास बात यह है कि इस दुर्दांत अपराधी ने डॉक्टरेट की डिग्री भी हासिल कर रखी है। जेल में बंद होने के बावजूद इसके प्रभाव में कोई कमी नहीं आई है। कुछ समय पहले सीवान जेल में इसके पास से कई मोबाइल फोन और सिम बरामद किये गए थे। कहते हैं कि जेल के भीतर से ही यह अपने अपराध के साम्राज्य का संचालन करता है।
  • आनंद मोहन सिंह -
    बिहार की राजनीति में इस अपराधी का एक समय वर्चस्व था। यह बिहार के सहरसा जिले का रहने वाला है। एक जमाने में यह कई तरह के छोटे-बड़े अपराधों में लगा रहता था। इसका बाकायदा एक गिरोह था। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने इसे राजनीति में लाने का काम किया। यह कई दलों में रहा और बाद में इसने अपनी बिहार पीपुल्स पार्टी बना ली। इस पार्टी में इसने पूरे बिहार से चुन-चुन कर छंटे हुए गुंडों और बदमाशों को शामिल किया। इसकी बीवी लवली आनंद भी राजनीति में आई और 1994 में वैशाली संसदीय क्षेत्र से चुनाव जीत कर संसद में पहुंची। आनंद मोहन पर भीड़ को उकसा कर एक आईएएस अफसर की हत्या कराने का आरोप है। फिलहाल, वह सहरसा जेल में आजीवन कैद भुगत रहा है। जेल में इस अपराधी के व्यक्तित्व का एक और पहलू सामने आया। जनवरी, 2012 में इसने अपनी कविताओं का एक संकलन 'कैद में आज़ाद कलम' रिलीज किया। इस मौके पर जसवंत सिंह, भीम सिंह और राजीव प्रताप रूडी जैसे नेता भी आए थे।
  • तस्लीमुद्दीन -
    बिहार की राजनीति का एक खूंखार चेहरा तस्लीमुद्दीन भी है। कहते हैं कि इसके क्षेत्र किशनगंज में इसका आतंक इतना ज्यादा है कि विरोधी दलों के कार्यकर्ता भी इसके खिलाफ मुंह खोलने से बचते हैं। इस पर दर्दनों हत्या और बलात्कार के मामले हैं। इसे कमसिन लड़कियों का शौकीन बताया जाता है। यह लालू की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल का नेता रहा और किशनगंज लेकसभा क्षेत्र से कई बार लोकसभा का सदस्य रहा। सन्
    1996 में देवगौड़ा जब देश के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने लालू प्रसाद के कहने पर उसे गृह राज्य मंत्री बना
    दिया। ऐसे खूंखार अपराधी को इतना बड़ा पद देने से लोगों का गुस्सा भड़क उठा और मीडिया में भी उसके खिलाफ एक अभियान-सा चल पड़ा। आखिरकार, देवगौड़ा को उसे मंत्री पद से हटाना पड़ा। अब यह खूंखार अपराधी पाला बदल कर नीतीश कुमार के साथ है।
  • सूरजभान सिंह-
    यह अपराधी भी संसद सदस्य रह चुका है। यह लोकजनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान का दायां हाथ माना जाता है। इस पर कई हत्याओं के आरोप हैं। यह कोयले के अवैध व्यापार और तस्करी से भी जुड़ा रहा है। अब इसका प्रभाव कुछ कम हो गया है, लेकिन आपराधिक मामलों से यह पहले की तरह ही जुड़ा है। इसके गिरोह के गुंडे रामविलास पासवान के लिए वोट लूटने का काम करते हैं।
  • किंग महेन्द्र -
    जब बिहार की राजनीति में लालू-नीतीश का नाम कोई नहीं जानता था और राज्य में कांग्रेस का एक छत्र राज था, जहानाबाद का महेंद्र प्रताप सिंह उर्फ किंग महेन्द्र का राजनीति में बड़ा दबदबा था। यह कई बार लोकसभा और राज्यसभा का सदस्य रहा। साथ ही, कई उच्च अधिकार संपन्न कमिटियों का भी सदस्य रहा। आज के बाहुबलियों की तरह तो इसे नहीं कह सकते, पर यह तस्करी से जुड़ा बताया जाता है। बाद में इसने अरिस्टो फार्माक्यूटिकल्स नाम से दवा कंपनी बनी ली। राजनीति पर इसका दबदबा था।
  • रामा सिंह -
    रामा सिंह भी बिहार का जाना-माना डॉन पॉलिटिशियन है। यह भी रामविलास पासवान से जुड़ा है। यह पासवान के क्षेत्र वैशाली जिले का ही है। इस पर भी हत्या और अन्य कई संगीन अपराधों को आरोप हैं। कहते हैं कि इसका नाम सुन विरोधी एक बार कांप जाते हैं। वैसे, रामविलास पासवान की राजनीतिक स्थिति कमजोर हो जाने से राजनीति में इसका कोई खास प्रभाव नहीं रहा।
  • पप्पू यादव -
    राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव भी बिहार के अपराधी राजनीतिबाजों में अहम स्थान रखता है। यह लालू की राजद, मुलायम की समाजवादी पार्टी और रामविलास पासवान की लोजपा से जुड़ा रहा है। यह तीन बार लोकसभा का सदस्य रह चुका है। इसका भी बिहार में काफी आतंक रहा। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक अजित सरकार की हत्या के मामले में इसे आजीवन कारावास की सजा मिली और यह जेल में बंद रहा। मई, 2013 में अदालत ने इसे निर्दोष घोषित कर दिया। अब यह कांग्रेस के नजदीक है। इसकी पत्नी रंजीता रंजन भी कांग्रेस के टिकट पर चुनाल लड़ कर एमपी रह चुकी है।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: criminal politicians in bihar
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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