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नवजात की मौत पर सेंट्रल लैब और वार्ड एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी

Bhaskar News Network | Mar 21, 2017, 03:10 IST

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सिम्स में नवजात बच्ची की मौत के मामले में सेंट्रल लैब और एनआईसीयू वार्ड के डॉक्टर अलग- अलग बयान दे रहे हैं। सेंट्रल लैब के डॉक्टरों का कहना है कि मां के ब्लड को बच्ची के नाम से जांच करवाने लैब भेजा गया था। जन्म के बाद बच्ची के ब्लड ग्रुप की जांच एक बार भी नहीं करवाई गई थी। सिर्फ उसके हीमोग्लोबिन की जांच करवाई गई थी। बच्ची के मां का ब्लड ग्रुप ए पॉजीटिव था। दूसरी ओर शिशु रोग विभाग के डॉक्टर का कहना है कि शुरू से बच्ची का ब्लड ग्रुप जांच करवाने की जरूरत नहीं पड़ती। लैब से पहले जांच रिपोर्ट आई थी, उसे ही फार्म में भरकर भेजा गया था। बच्ची के ब्लड ग्रुप की जांच के लिए मां के खून का सैंपल कैसे भेज सकते हैं?

तखतपुर क्षेत्र के बीजागढ़ निवासी दिलचंद सूर्यवंशी की प|ी सलमा बेगम व नवजात बच्ची का इलाज एक महीने से एनआईसीयू वार्ड में चल रहा था। डॉक्टरों का कहना है कि समय से दो महीने पहले बच्ची का जन्म होने से अंग पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाए थे। 11 फरवरी की जांच में सलमा का हीमोग्लोबिन 4.8 ग्राम रजिस्टर में दर्ज है। फिर वार्ड के डॉक्टरों ने 13 फरवरी को बच्ची की हीमोग्लोबिन जांच करवाने सेंट्रल लैब भेजा, जिसमें हीमोग्लोबिन 18.6 ग्राम था। उस दिन बच्ची की ब्लड ग्रुप की जांच नहीं करवाई गई। डॉक्टरों ने आठवें दिन फिर जांच करवाई तो हीमोग्लोबिन 16.8 रिपोर्ट आया। इसके सातवें दिन बाद डॉक्टरों ने फिर हीमोग्लोबिन जांच के लिए लैब भेजा था, इसमें 13.6 ग्राम आया था। 18 मार्च शाम को बच्ची का ब्लड ग्रुप ए पॉजीटिव और हीमोग्लोबिन 5.6 था। इस रिपोर्ट को सेंट्रल लैब के डॉक्टर ने कहा कि मां के ब्लड की जांच बच्ची के नाम से करवाई गई थी।

क्या कहते हैं जिम्मेदार :डीन डॉ. विष्णु दत्त का कहना है कि इस मामले में किसकी गलती है, केस की जांच कराई जाएगी। शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कोसाम के मुताबिक सेंट्रल लैब से ही ए पॉजीटिव रिपोर्ट भेजी गई थी। रिपोर्ट भी हमारे पास है। इसमें हमारा कोई रोल नहीं है। सेंपल भेजने में हमारी तरफ से गलती नहीं हुई है।

बचती रही सेंट्रल लैब प्रभारी

एचओडी ने दिया नोटिस

इस मामले में सेंट्रल लैब प्रभारी डॉ. रश्मि गुप्ता ने कोई जवाब नहीं दिया है। उनका कहना है कि इस मामले में कुछ भी नहीं बता सकती। पीआरओ इससे संबंधित जानकारी देंगी। जानकारी के लिए आप पीआरओ से संपर्क करें।

ब्लड ग्रुप की दो-दो रिपोर्ट आने के कारण पैथोलैब एचओडी ने जांच शुरू कर दी है। उन्होंने ब्लड बैंक और सेंट्रल लैब प्रभारी को नोटिस जारी किया है। 24 घंटे में जवाब देने के लिए कहा है। साथ ही दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

ब्लड बैंक से सही ग्रुप का पता चलता है

बच्ची के ब्लड ग्रुप को लेकर वार्ड और सेंट्रल लैब में से किसी एक जगह गड़बड़ी हुई है। सबसे पहले जांच के लिए ब्लड का सैंपल सेंट्रल लैब भेजा जाता है। वहां ब्लड की जांच होती है। रिपोर्ट के अनुसार वार्ड के डॉक्टर ब्लड फार्म में ग्रुप भरकर ब्लड बैंक भेजते हैं। ब्लड बैंक के डॉक्टर ब्लड देने से पहले सेंपल की रि चेकिंग करते हैं। यही स्पष्ट होती है कि ब्लड ग्रुप क्या है। इसमें किसकी गलती है, यह जांच से सामने आएगी।

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Web Title: नवजात की मौत पर सेंट्रल लैब और वार्ड एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी
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