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PHOTOS: एक ऐसा गांव... जहां रहते हैं फौज के दीवाने

संजय मिश्रा | Jan 26, 2013, 00:06 AM IST

बिलासपुर।कोटा के धौंराभाठा में बाबू, शिक्षाकर्मी या दूसरे पदों पर भर्ती की दौड़ में कम युवा ही शामिल होते हैं। उन्हें इंतजार होता है सेना की भर्ती रैली का। 2000 हजार की आबादी वाले इस गांव में दो दर्जन युवा सेना में हैं। कोई किसी मोर्चे पर तो कोई सरहद पर देशभक्ति का जज्बा लेकर गांव का नाम रौशन कर रहा है।
एक यही पीढ़ी नहीं, बाप-दादा भी सेना की सर्विस से रिटायर हो चुके हैं। 60 साल पहले नत्थूराम साहू सैनिक बने, तब उनकी प्रेरणा ने ही इस गांव से दर्जनों सैनिक बनाए।
शहर से 30 किमी दूर कोटा नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 15 धौंराभाठा में देशभक्ति का अनोखा जज्बा देखने को मिलता है। यह गांव (वार्ड) विकास से कोसों दूर है। नगर पंचायत के अधीन होने के बाद भी यहां गांव की जीवनशैली नजर आती है। इस गांव से सबसे पहले नत्थूराम फौज में भर्ती हुए।
वे जब भी गांव आते तो उनके रहन-सहन और देशसेवा का जज्बा देखकर युवा भी इससे प्रेरित होने लगे। धीरे-धीरे हर युवा के मन में फौज में जाने की ललक दिखाई देने लगी। वे कड़ी मेहनत कर सेना के लिए होने वाली भर्ती में अपनी किस्मत आजमाने लगे। कई युवाओं को देशसेवा करने का मौका भी मिला और कई युवाओं की उम्मीदें भी टूटीं। लगातार असफल होने के बाद भी वे फौज में जाने की अपनी चाहत रोक नहीं पा रहे हैं।
हर साल यहां से दो-चार युवा सेना में भर्ती हो जाते हैं। 15 साल से फौज में रहकर देशसेवा कर रहे सीआरपीएफ के जवान लव कुमार जायसवाल ने बताया कि यहां के अधिकतर युवाओं का रुझान फौज में है।
फौज में भर्ती होने की ये परंपरा गांव में लगभग 60 साल पहले शुरू हुई थी, जब यहां के चार नौजवान नत्थूराम साहू, चैतराम बिंझवार, अर्जुन साहू और बेचूलाल कैवर्त का चयन आर्मी में हुआ। इनमें से तीन फौजी नत्थूराम साहू, चैतराम पालके, अर्जुन साहू अब इस दुनिया में नहीं रहे।
धौराभांठा में शिक्षित वर्ग की संख्या भी काफी है। एक दशक पूर्व इस वार्ड से वकील गणोशराम साहू को नगर पंचायत अध्यक्ष भी चुना गया था। कोटा के पड़ावपारा निवासी संजीव शुक्ला इस वार्ड को पूरे नगर के लिए एक मिसाल बताते हैं।
नहीं हुआ विकास
धौंराभाठा में अभी भी विकास की बाट जोह रहा है। कोटा नगर पंचायत का वार्ड नंबर 15 का हिस्सा होना ही इसकी उपलब्धि है। इसके अलावा विकास कहीं नजर नहीं आता। कोटा शहर से 1 किलोमीटर दूर होने के बाद भी यहां पिछड़ापन है। यहां पिछड़ा वर्ग के जायसवाल व साहू समाज काफी संख्या में है।
क्या कहते हैं जवान
> पटियाला में पदस्थ पांचवीं बटालियन के हवलदार सुनेत जायसवाल 15 दिन की छुट्टी पर अपने घर आए हैं। सुनेत कहते हैं कि उन्हें फौज में जाने की प्रेरणा बड़े भाई और गांव से जा चुके फौजी भाइयों से मिली। इस वजह से वह जब भी घर आते हैं यहां के युवाओं को फौज में जाने के लिए प्रोत्साहित जरूर करते हैं।
> अमित साहू छुट्टियां पूरी कर वापस लौटने की तैयारी में है। अमित ने बताया कि गांव के युवाओं का जज्बा देखते हुए गर्व होता है। फौज की नौकरी में मान-सम्मान के साथ देशप्रेम का रंग भी घुला हुआ है। गांव के युवा फौजियों से जब कहीं ड्यूटी के दौरान मुलाकात होती है, तो गांव की याद जरूर आती है।
> रैपिड एक्शन फोर्स में कुछ समय के लिए रहे लव जायसवाल ने बताया कि श्रीनगर, जम्मू, मणिपुर के अलावा अन्य शहरों में भी उन्होंने ड्यूटी की है। मणिपुर के तमिलांग जिले में पदस्थापना के दौरान एक बार वे उग्रवादियों के एंबुश में फंस गए थे, इसी दौरान आसाम राइफल्स के जवान आ गए और बमुश्किल जान बच सकी। लेकिन ये तो सब तो होता रहता है, आखिर जिंदगी भी तो एक जंग ही है, तो फिर देशसेवा करते हुए चाहे मिट भी जाएं, क्या फर्क पड़ता है।
> सीआईएसएफ से अनिवार्य सेवानिवृत्त ले चुके प्रेमचंद जायसवाल बताते हैं कि मैंने पूरी ड्यूटी के दौरान ईमानदारी से सेवा की जिसका सिला मुझे मिला। मेरे एक पुत्र व एक पुत्री इंजीनियरिंग कर रहे हैं।
ये हैं गांव के वीर जवान
धौराभांठा से फौज में भर्ती होने वाले जवानों ने आर्मी सप्लाई कोर, सीआरपीएफ, राजपूत रेजीमेंट, सीआईएसएफ, ईएमई, एयरफोर्स आदि में सेवाएं दी हैं। नत्थूराम साहू, चैतराम बिंझवार, अर्जुन साहू, बेचू लाल कैवर्त, प्रेमचंद जायसवाल, दिलहरण यादव, कमल किशोर जायसवाल, दिनेश साहू, अरविंद जायसवाल, रविन्द्र कुमार जायसवाल, जुगलकिशोर जायसवाल, अश्विनी साहू, सुनेत जायसवाल, अतुल साहू, अमित कुमार साहू, शोभाराम पालके, लवकुमार जायसवाल, सूर्यकांत साहू, श्याम मनोहर जायसवाल आदि ऐसे नाम हैं, जिन्हें देखकर गांव के युवा फौज में जाने की प्रेरणा पा रहे हैं। इनमें से कुछ फौजी इस दुनिया में नहीं रहे और कुछ रिटायर हो चुके हैं।
देवरी में आजादी के 22 परवानों की महक
अविभाजित बिलासपुर जिले के देवरी महंत गांव में आजादी में हिस्सा लेने वाले 22 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की दास्तान है। विरासत की ऐतिहासिक मिसाल को देखते हुए राज्य सरकार ने इसे गौरव ग्राम तो बना दिया, लेकिन विकास का यह गौरव यहां से गायब है। लोरमी विकासखंड की ग्राम पंचायत देवरी में देश को स्वतंत्र कराने वाले 22 सेनानी अब भी गांव के गौरवपूर्ण इतिहास की याद दिलाते हैं। आजादी के इन परवानों में से कोई भी इस दुनिया में नहीं है। महात्मा गांधी ने जब देश में युवाओं को आजादी की मुहिम में हिस्सा लेने का आव्हान किया तो यहां से गोपीचंद सतनामी, सखाराम सेण्ड्रे, सदाशिव बंजारा, परसादीलाल कोसले, धनवा ओगरे, मेघवा गेंदले, लालदास दिवाकर, फतुवा राम, बादूराम कुर्रे, मुगेलिहा कुर्रे, मानिक कोसले, रामलाल बंजारा, गजाधर साव सहित 22 लोग आंदोलन में कूद पड़े थे। यहां के स्वतंत्रता सेनानी भी एक-एक कर दुनिया से विदा हो गए। देवरी महंत के इतिहास को देखते हुए सरकार ने दो वर्ष पूर्व इसे गौरव ग्राम घोषित किया, पर गांव का विकास गर्व करने लायक नहीं हो सका है। स्वतंत्रता सेनानी के एक परिजन ने बताया कि स्कूल में 8 शिक्षक हैं, लेकिन पढ़ाई का स्तर गुणात्मक नहीं है, जिससे नई पीढ़ी में साक्षर होने की उम्मीद जाग सके। इसके अलावा यहां 100 से अधिक पढ़े-लिखे बेरोजगार हैं, हर साल रोजी-रोटी कमाने के लिए कई लोग पलायन कर जाते हैं। देश को आजादी मिली, पूर्वजों का गौरव अब भी दिलों में कायम है, लेकिन बदहाल गांव की सूरत नहीं बदली।
॥मेरा बेटा लंबे समय से फौज में है। कभी-कभार ही घर आता है, लेकिन मुझे खुशी है कि वह देश की सेवा कर रहा है। छुट्टियों में घर आने पर लगता है कि वह थोड़ा दिन और रुक जाए पर यह उसके बस में नहीं होता। उसे समय पर ड्यूटी के लिए जाना होता है।
- शैलकुमारी जायसवाल, फौजी रविंद्र जायसवाल की मां
॥गांव में सद्भावना का माहौल है। अधिकतर घरों में पढ़े-लिखे लोग हैं। इसी वजह से यहां के युवाओं में एक-दूसरे को देखकर नौकरी पाने की लालसा होती है, खासकर फौज में भर्ती होने का जज्बा यहां के युवाओं में अधिक है।
- कमल किशोर जायसवाल, फौजी
॥बड़ा भाई काफी समय से घर नहीं आया। वह जब भी आता है, परिवार में खुशी का माहौल होता है। उनकी बातें हमें भी देशसेवा के लिए प्रेरित करती हैं, लेकिन क्या करें किसी एक को घर की देखभाल भी करनी है। हमें अपने भाई पर गर्व है।
- गुरुचरण साहू, फौजी दिनेश का भाई
अगली तस्वीरों में देखिए... धौंराभाठा के जवान, जो दे रहे हैं फौज में सेवा...
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Web Title: PHOTOS A village Where live the crazy people for army
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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