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55 सौ हेक्टेयर पर में लगी टमाटर की फसल चौपट ...

Bhaskar News Network | Oct 19, 2016, 02:35 AM IST

55 सौ हेक्टेयर पर में लगी टमाटर की फसल चौपट ...

टमाटर की फसल की बीमा के लिए संपर्क किया गया, तब अधिकारियों द्वारा यह कह कर टाल दिया गया कि टमाटर या सब्जी की खेती के लिए खरीफ में किसी प्रकार की बीमा करने की योजना नहीं है। रबी की फसल में टमाटर व अन्य सब्जी की फसलों की बीमा की योजना का जानकारी होना बताया गया।

किसानों की चिंता करने वाली सरकार के पास अब यह सवाल हैं कि टमाटर उत्पादक किसान के टमाटर में हुई नुकसान की भरपाई अब किसान किसके भरोसे करें। किसानों का कहना है कि इस सीजन में टमाटर की पहली खेप जो अब पिछले एक पखवाड़े से निकल रही है एवं अभी कुछ फसल जो दीपावली तक तैयार होती व बाजार में आती, वह पूरी फसल चौपट हो गई। अचानक आई बेमौसम बारिश से टमाटर की फसल को काफी नुकसान हुआ है। बारिश होने के कारण टमाटर की फसल सड़ने एवं कीट व्याधि की प्रकोप आ गया है, जिससे अब किसानों में अपने फसल की नुकसान से चिंता सताने लगी है।

किसानों का लाखों की नुकसान - किसानों द्वारा टमाटर की पहली सीजन का खेप निकल रहा है। इससे पहले बाजारों मे बाहर के कोल्ड स्टोरेज की टमाटर लोकल बाजारों में 40 से 50 रुपए प्रति किलो की दर से बिक रहा था, वहीं अब बाजार में लोकल टमाटर की खेप पहुंचने से कोल्ड स्टोरेज की टमाटर की मांग कम हो गई है।

ऐसे में किसानों के द्वारा अच्छी दामों में टमाटर की उत्पाद बेचा जाता है। मंगलवार को लुड़ेग का टमाटर बाजार में 500 से 600 रुपए प्रति भार के दर पर बेचा गया, इस कीमत पर किसानों को लाखों रुपए की नुकसान होने का दर्द खल रहा है।

अवार्ड पारित होने के डेढ़ साल बाद भी नहीं मिला जलाशय ...

ग्रामीणों की जमीन डुबान क्षेत्र में आ रही थी। जिसका भू-अर्जन प्रकरण कुनकुरी एसडीएम कोर्ट में चला था। इस प्रकरण में एसडीएम ने पतराटोली के डूबान क्षेत्र 15.371 हेक्टेयर के लिए 3 करोड़ 96 लाख 47 हजार 804 रुपए का मुआवजा अवार्ड पारित किया था।

इसी तरह वासुदेवपुर गांव के डूबान क्षेत्र 19.235 हेक्टेयर के लिए 4 करोड़ 31 लाख 31 हजार 459 रुपए का मुआवजा अवार्ड पारित किया, पर अवार्ड पारित होने के बाद भी प्रभावित करीब 60 परिवारों को अब तक मुआवजा राशि नहीं मिली है। किसान अपनी राशि पाने के लिए दफ्तरों व अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।

इसके लिए ग्रामीणों ने कई बार संबंधित अधिकारियों के चक्कर लगाए। ग्रामीणों ने बताया कि प्रभावित सभी किसान बीपीएल सर्वेक्षित काफी गरीब परिवार के हैं। उनके पास जो भी जमीन थी, वह जलाशय के डूबान क्षेत्र में चली गई है। अब उनके पास जीविकोपार्जन के लिए कोई दूसरा साधन नहीं है। इन किसानों ने जल्द से जल्द मुआवजा राशि दिलाने की गुहार लगाई है।

युवक ने भालू से लड़कर बचाई अपनी जान

रास्ते शाम 6 बजे विनायकपुर से अपने घर मरडीहाघाट पहुंचा था कि जंगल से निकलकर एक भालू ने उस पर हमला कर दिया।पंजो से भालू ने पहले सिर हाथ एवं छाती पर वार कर दिया।

युवक सामने साक्षात मौत देखकर कुछ पल सहम गया उसके बाद भालू से अपनी जान बचाने के लिए भीड़ गया।कुछ देर तक दोनों एक दूसरे पर भारी पड़ रहे थे। भालू जैसे ही चित गिरा युवक ने देर नहीं कि और उसके पीछे तरफ से पूरे रफ्तार से भागना शुरू कर दिया।भालू पलट कर देख नहीं पाया और इसका फायदा उठाते हुए युवक वहां से भागकर सीधा अपने घर पहुंचा।घर पहुंचने पर बदहवास शिवचरण को देखते हुए समीप के प्राथमिक चिकित्सा केंद्र सुलेसा ले जाया गया।जहां उसे प्राथमिक उपचार के बाद उसे उच्च उपचार के लिए बगीचा रेफर कर दिया है।जहां उसका उपचार जारी है।

त्योहारी सीजन में सिंथेटिक मावे की आवक ...

सीधे टनों की मात्रा में सप्लाई की जाती है। जन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ का यह खतरनाक खेल विगत कई वर्षों से जारी है। स्वास्थ्य एवं खाद्य विभाग द्वारा इस संबंध में किसी भी प्रकार की जांच एवं कार्यवाही न किए जाने के कारण यह खतरनाक व्यवसाय दिनो दिन फल फूल रहा है।

जानकारों के अनुसार अमानक स्तर के सामग्री से बनी इस खोवे की मिठाई जन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक है तथा इसके निर्माण एवं व्यवसाय पर जांच कर तत्काल रोक लगाने की आवश्यकता बताई जा रही है। इस नकली खोवे की आपूर्ति पिकअप के माध्यम से देर रात या फिर सुबह सबेरे कम भीड़ भाड़ के समय की जाती है।

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(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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