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सरकार महुआ नीति वापस ले: विधायक मरकाम

Bhaskar News Network | Apr 21, 2017, 02:00 IST

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कोंडागांव | छत्तीसगढ़ की कुल जनसंख्या का लगभग 80 प्रतिशत कृषि और वनोपज पर आधारित है। बस्तरवासी प्रमुख रूप से महुआ वनोपज पर निर्भर रहते हैं, जहां आदिवासी समाज के साथ-साथ अन्य वर्गों के लोग भी हर साल महुआ फूल के मौसम में महुआ इकट्ठा करते हैं व प्रति परिवार लगभग 50 हजार से एक लाख रुपए महुआ बेचकर कमाते हैं। इस प्रकार बस्तर के ग्रामीणों के लिए महुआ आय का प्रमुख साधन है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने महुआ खरीदी के लिए जो अधिनियम बनाया गया है उसके कारण ग्रामीणों में आक्रोश है। इस नीति में सिर्फ आदिवासियों के लिए चार माह महुआ संग्रहण की छूट दी गई है जबकि अन्य वर्गों के लोग भी खून पसीना बहाकर रात 3-4 बजे से उठकर महुआ फूल इकट्ठा करते हैं और इसे बेचकर जीवन यापन करते हैं। जहां इस सीजन में 30 रुपए प्रति किलो महुआ का विक्रय किया जा रहा था वहीं इस अधिनियम के कारण बाजारों में 8 से 10 रुपए प्रति किलो में खरीदा जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

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Web Title: सरकार महुआ नीति वापस ले: विधायक मरकाम
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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