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जेल में विचाराधीन बंदी खुद के मुचलके पर भी छोड़ा जा सकता है: मजिस्ट्रेट जगदल्ला

Bhaskar News Network | Oct 19, 2016, 02:30 AM IST

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि ऐसे बंदी, जिनकी विचाराधीन रहते हुए सजा आधी हो चुकी हो, उन्हें स्वयं के मुचलके पर भी छोड़ा जा सकता है। बंदी को भी विधि के समक्ष समानता व जीवन की स्वतंत्रता का अधिकार है। वे सिर्फ न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही बंदी बनाए जा सकते हैं। यह बातें मंगलवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के जिला सचिव मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कमलेश जगदल्ला ने कही।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जिला जेल में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जगदल्ला ने परिरुद्ध बंदियों को उनके विधिक अधिकारों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी से लेकर निराकरण तक मांग करने पर प्राधिकरण से कानूनी सहायता व अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाता है। हर कोर्ट में रिमांड अधिवक्ताओं की नियुक्ति की गई है। कोई भी व्यक्ति गिरफ्तारी के समय से ही अपने अधिकारों के बारे में सलाह ले सकता है। उन्होंने विधिक सहायता के संबंध में विभिन्न उपबंधों की भी जानकारी दी।

बंदियों के सवाल भी सुने

उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट बिलासपुर के आदेशानुसार ऐसे बंदी जिनकी प्रकरणों में जमानत हो चुकी है, वे जमानत बंधपत्र नहीं पेश करने के कारण जेल में है, तो वे खुद का मुचलका पेश कर सकते हैं। बंदियों ने अपने प्रकरणों के बारे में पूछताछ की, तो उन्होंने उसका भी निराकरण किया। इस अवसर पर जेल अधीक्षक एलके पांडे उपस्थित थे।

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Web Title: जेल में विचाराधीन बंदी खुद के मुचलके पर भी छोड़ा जा सकता है: मजिस्ट्रेट जगदल्ला
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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