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रेलवे में फरमान.. बीमार ही सही, चलानी पड़ेगी ट्रेन

भास्कर न्यूज | Nov 19, 2012, 03:46 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
रेलवे में फरमान.. बीमार ही सही, चलानी पड़ेगी ट्रेन
बिलासपुर.बीमार हैं तो बीमार ही सही, लेकिन ट्रेन तो चलानी ही पड़ेगी। प्राइवेट मेडिकल सर्टिफिकेट (पीएमसी) के आधार पर सिक लीव लिया तो सर्विस ब्रेक कर दी जाएगी।
बिलासपुर डिवीजन के सीनियर ऑपरेटिंग मैनेजर एके शमसी ने यही तुगलकी फरमान जारी किया है। 8 नवंबर से आगामी आदेश तक ट्रेन के गार्ड बीमार होने पर भी पीएमसी के आधार पर छुट्टी नहीं ले सकते। अधिक बीमार रहने पर छुट्टी ले भी ली तो उनकी सीनियारिटी एक झटके में खत्म हो जाएगी।
बिलासपुर रेल मंडल को इस वित्तीय वर्ष में 122 मिलियन टन लोडिंग का टारगेट मिला है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए रेल प्रशासन न सिर्फ परिचालन नियमों को ताक पर रख रहा है, बल्कि कर्मचारियों के प्रति तानाशाह रवैया भी अपना रहा है। इसी का एक और उदाहरण सामने आया है।
रेलवे स्टेशन के बगल में स्थित गार्ड-ड्राइवर लॉबी में एक नोटिस चस्पा किया गया है। नोटिस में लिखा गया है कि पीएमसी, यानी प्राइवेट मेडिकल सर्टिफिकेट बेन कर दिया गया है। दूसरी पंक्ति में लिखा गया है कि जो भी गार्ड पीएमसी के आधार पर छुट्टी में रहता है, उसे अनुपस्थित मानकर उसकी सर्विस ब्रेक मान ली जाएगी।
यानी कर्मचारी कितना ही पुराना क्यों न हो, छुट्टी के बाद ड्यूटी पर लौटेगा तो फ्रेशर माना जाएगा। यह फरमान डिवीजन के सीनियर ऑपरेटिंग मैनेजर एके शमसी ने जारी किया है। 8 नवंबर को जारी आदेश में इस बात का उल्लेख ही नहीं है कि यह कब तक प्रभावशील रहेगा। इस हिसाब से तुगलकी फरमान अगले आदेश तक प्रभावशील रहेगा।
समस्या कर्मचारियों की
इस फरमान के बाद बिलासपुर डिवीजन के गार्ड की समस्या बढ़ गई है। वे अस्वस्थ होने पर भी छुट्टी नहीं ले पा रहे हैं। कारण भी है कि मैदानी अमला अफसरों के लिए सॉफ्ट टारगेट होता है। कर्मचारी जैसे ही पीएमसी पर सिक लीव लेगा, उसे चार्जशीट थमा दी जाएगी।
यही कारण है कि गार्ड बीमार रहकर भी भयवश ड्यूटी कर रहे हैं। लॉबी में ऐसे कई गार्ड मिले, जिनकी स्थिति ऐसी नहीं है कि वे ड्यूटी कर सके, पर वे लाइन ड्यूटी पर जा रहे हैं। नौकरी की खातिर वे इस ‘अंग्रेजीयत’ विरोध नहीं कर पा रहे हैं।
मौन है संगठन
कर्मचारियों के साथ हो रहे अन्याय के मामले में कर्मचारी संगठन ने चुप्पी साध ली है। बिलासपुर डिवीजन में मेंस यूनियन का कब्जा है और डिवीजनल को-आर्डिनेटर निमई बनर्जी खुद गार्ड हैं। इसके बाद भी यूनियन ने तुगलकी फरमान का विरोध नहीं किया।
ऐसे मसलों के चलते ही मेंस यूनियन का जनाधार घटता नजर आ रहा है। दैनिक भास्कर ने डिवीजन को-आर्डिनेटर को मामले की जानकारी दी। श्री बनर्जी ने बताया कि पिछले पीएनएम में तय हो चुका था कि पीएमसी के आधार पर छुट्टी नहीं दी गई है, तब भी अवकाश के दिनों को अनुपस्थिति नहीं माना जाएगा। इसके बाद भी सीनियर डीओएम का यह निर्देश समझ से परे है। अफसर नियमों से बाहर जाकर काम नहीं कर सकते। संगठन इसका कड़ा विरोध करेगा।
क्या है नियम
सन् 1974 में हुए रेलवे के सबसे बड़े आंदोलन के बाद एक सर्कुलर जारी हुआ। इसमें डिवीजनल मैनेजर (डीआरएम) को पीएमसी पर बैन लगाने का अधिकार दिया गया। यह अधिकार हड़ताल या फिर आपातकाल के लिए दिया गया था, न कि सामान्य परिस्थितियों के लिए। उस पर भी पीएमसी पर बैन किया जा सकता है, लेकिन पीएमसी के कारण सेवा शून्य करने का अधिकार ही नहीं है।
सीनियर डीओएम ने अपने अधिकारों से परे जाकर यह आदेश जारी किया है। रहा सवाल पी एमसी का तो यह सुविधा उन कर्मचारियों को मिलती है, जो रेलवे अस्पताल से डेढ़-दो किलोमीटर दूर रहते हैं। तबीयत बिगड़ने की स्थिति में ऐसे कर्मचारी अपने नजदीकी डाक्टर से इलाज कराएंगे, चाहे वह प्राइवेट ही क्यों न हो। डाक्टर के सर्टिफिकेट के आधार पर कर्मचारी छुट्टी पर रह सकता है।
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Web Title: train Private Medical
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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