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महासमुंद जिले के स

Bhaskar News Network | Mar 20, 2017, 03:10 IST

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महासमुंद जिले के स
घर-घर में बिकती थी अवैध शराब, भाभी को शराबी ने छेड़ा तो 11वीं की छात्रा ने सात सहेलियों की बनाई टीम, 80 प्रतिशत ने छोड़ दिया पीना


महासमुंद जिले के सिंंघनगढ़ गांव में अब शराब की बिक्री नहीं होती है। वहां के 80 फीसदी लोगों ने शराब पीना ही बंद कर दिया है। यह संभव कर दिखाया है गांव की सात लड़कियों ने।

एक साल पहले यहां सुबह से लेकर शाम तक हर गली-मोहल्ले में शराब बिकती थी। सड़क किनारे लोग महफिल लगा लेते थे। आने-जाने वालों के साथ गाली-गलौज और कमेंट्स करते थे। महिलाओं और लड़कियों को इससे ज्यादा परेशानी होती थी। पिछले साल जनवरी में 11वीं में पढ़ने वाली रुकमणि यादव की भाभी को शराबियों ने तालाब के पास रोककर उनके साथ बदतमीजी की। इस घटना ने छात्रा को अंदर तक झकझोर दिया। पहले तो उसने अकेले ही गांव में शराब बिकना बंद कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए। इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ तो कुछ सहेलियों को जोड़कर टीम बनाई। और एक साल के भीतर ही गांव के 80 फीसदी लोगों को शराब पीने की लत छुड़वा दी। साथ ही अवैध शराब की बिक्री भी पूरी तरह से बंद करा दी। महासमुंद के पटेवा से लगा सिंघनगढ़ गांव की जनसंख्या 465 है, लेकिन यहां की 7 बेटियों की चर्चा और सम्मान सभी के मन में है। एक साल की उनकी पहल और प्रयास से आज पूरे गांव के लोगों को सुकून है। कक्षा 9वीं से 12वीं तक में पढ़ने वाली गांव की लड़कियों की इस टोली ने असंभव को भी संभव कर दिखाया है।



इस टीम को बनाने वाली रुकमणि बताती हैं कि हमारे गांव की पहचान ही अवैध शराब से थी। महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटना भी आम हो गई थी। जब एक दिन भाभी के साथ शराबियों ने छेड़छाड़ किया तो काफी बुरा लगा। इसके बाद मैं पंचायत दफ्तर गई। वहां सचिव से मिलकर कहा कि मुझे अपने गांव में शराब बिकना रोकना है। इसके लिए क्या नियम है। इस पर वे कहने लगे कि पुलिस कार्रवाई करती है। गांव के सरपंच, पंच के साथ बड़े-बुजुर्गों को हस्ताक्षर करके देना होगा। इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया होगी। इसके बाद रुकमणि ने एक-दो दफ्तर के और चक्कर लगाए, लेकिन हर जगह सिर्फ नियम का हवाला देखकर कार्रवाई करने का आश्वासन ही दिया जाता था। इसके बाद उसने अपनी कुछ स्कूल की सहेलियों से कहा कि वे इसका विरोध करें।

गाली के साथ

धक्के खाए लेकिन हार नहीं मानी

रुकमणि के साथ गांव की आरती यादव (12वीं), नंदिनी यादव (9वीं), ऋतु यादव (9वीं), कांति पटेल (9वीं), महेश्वरी यादव (11 वीं) और हेमलता यादव (9वीं) जुड़ीं। अब गांव की ये 7 बेटियां पहले अपने घरों में शराब पीने वाले लोगों को टोकने लगीं। बेटियों की बात और रोज की टोका-टाकी से कुछ घर के लोगों ने शराब पीना छोड़ना शुरू किया। पहले तो घर के लोग ही रुकमणि का साथ देने पर अपनी लड़कियों को डांटते थे।

टीम ने पकड़वाई अवैध शराब

टीम की आरती और नंदिनी ने बताया कि अपने घरों में समझाने के बाद फिर वे दूसरों को भी समझाने लगीं। शराब पीने वालों को गांव का नाम खराब होने के साथ ही महिलाओं और बच्चों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव के बारे में भी बताया। कई बार तो लोग उन्हें देखकर दरवाजा ही बंद कर लेते थे। कुछ परिवारों ने तो बातचीत ही बंद कर दी थी। इसके बाद उन्होंने अवैध शराब बिक्री रोकने के लिए घर-घर जाकर पूरे गांव की बैठक बुलाई और अपनी समस्या बताई। इसके बाद गांव के बड़े-बुजुर्ग भी साथ देने लगे। टीम की लड़कियों ने शराब बेचने वालों के घर धावा बोलकर शराब भी पकड़वाई। प्रदेश में शराब बिक्री के खिलाफ मुहिम चलाने वाले महासमुंद के विधायक डॉ. विमल चोपड़ा ने गांव आकर इन लड़कियों का सम्मान किया।

गांव में युवाओं और महिलाओं को शराब से नुकसान के बारे में बतातीं लड़कियां।

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Web Title: महासमुंद जिले के स
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