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जमीन खोदी तो निकलने लगीं इंसान की हड्डियां, रोते हुए अपनों ने लगाई ये गुहार

Bhaskar news | Mar 04, 2017, 03:14 IST

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धरमपुरा में प्रशासन ने एक कब्रिस्तान ही खोद डाला। शुक्रवार को जब गांव के लोगों ने खुदाई स्थल पर अपने मृत परिजनों की हड्डियां बिखरी देखीं।

खैरागढ़/रायपुर. नई आबकारी नीति के तहत सरकारी शराब की दुकान बनाने के लिए प्रशासन ने एक कब्रिस्तान ही खोद डाला। शुक्रवार को जब गांव के लोगों ने खुदाई स्थल पर अपने मृत परिजनों की हड्डियां बिखरी देखीं, तो उनकी आंखें नम हो गई। जमीन में से निकल रही हड्डियां...
-उन्होंने मौके पर पहुंचकर मृतात्माओं की शांति के लिए पूजा-पाठ किया।
-खुदाई करने वाले मजदूरों से रुंधे गले से कहा- संभलकर खोदना, यहां हमारे अपनों की कब्र है।
-कबीरपंथी समाज के लोगों के विरोध के बावजूद प्रशासन ने सरकारी शराब की दुकान के लिए कब्रिस्तान की जमीन का चयन किया है।
-समाज के पार्षद शिव रजक का कहना है कि इस स्थान पर पिछले 60 वर्षों से समाज का कब्रिस्तान है। यहां मृतकों को दफनाया जाता रहा है।
-बुधवार को जब यहां शराब दुकान के लिए नींव खोदी जा रही थी, तब जमीन में से हड्डियां निकलने लगी तो समाज के लोगों ने विरोध दर्ज कराया था।
-प्रशासन ने मौके पर पुलिस बुलाकर विरोध करने वालों को थाने में बिठा लिया था।
-उन्हें धमकी दी गई कि यदि विरोध किया तो गिरफ्तार कर लेंगे। इस धमकी के बाद समाज के लोग डर गए।
-शुक्रवार को समाज के कुछ लोग यहां अपने परिजनों को अंतिम विदाई देने पहुंचे। कब्रों की पूजा की गई। फूलमाला और अगरबत्ती जलाकर प्रार्थना की गई।
नींव के गड्ढों से निकली हड्डियां भी बटोरी
-वहां पहुंची विमला ढीमर सात महीने पहले मृत अपने पति अशोक की कब्र तलाशती रही। कुछ देर बाद एक गड्‌ढे के पास ही उनकी कब्र मिली।
-इधर समाज के मनोज रजक ने नींव के गड्ढों से निकली मिट्‌टी में दबी हड्डियों को बटोरा। उन्हें थैले में रखा और नदी में विसर्जित करने चले गए।

खुदाई संभलकर करना, यहां मेरी नातिन की कब्र है
-भूतपूर्व सैनिक मनहरण निर्मलकर अपनी पत्नी सुशीला व परिजनों के साथ नातिन डॉली की कब्र पर पहुंचे।
-अगरबत्ती जलाकर जैसे ही फूल चढ़ाए, उनकी आंखें नम हो गईं।
-हाथ जोड़कर बोले- माफ करना बेटा। सरकार यहां शराब दुकान बनाना चाह रही है।
-फिर पास खड़े पुलिस वाले से कहा- विरोध नहीं कर रहा साहब! जरा इसे बचाकर खोदना।
-मनहरण ने बताया कि पांच साल की थी उनकी नातिन। सुन-बोल नहीं सकती थी। रोती थी तो उसकी पीड़ा महसूस करते थे।डेढ़ माह पहले वो हमें छोड़कर चली गई। यहीं तो मिट्‌टी देकर गए थे। अब अफसर कह रहे, यहां कोई कब्र नहीं।
-शराब दुकान बनाने की जिद देख उसकी दादी फफक पड़ी। इसलिए सोचा, अंतिम दर्शन कर आते हैं।
मेरी आपत्ति पर नहीं हुई सुनवाई
मैंने शुरू से ही आपत्ति दर्ज कराई थी और वहां 60 वर्षों से अंतिम संस्कार किए जाने की बात कही थी, लेकिन इसकी सुनवाई नहीं हुई। मैं शराब दुकान बनने के खिलाफ नहीं हूं। मैं खुद नगर पालिका के जिम्मेदार पद पर हूं, लेकिन समाज के प्रति भी मेरा दायित्व है। वहां से हड्डियों का निकलना सबूत है।
शिव रजक, पार्षद, वार्ड-6
रिकार्ड में वहां कब्रिस्तान नहीं
शासन के रिकार्ड में वहां कोई कब्रिस्तान नहीं है। जहां तक परंपरागत अंतिम संस्कार करने की बात है तो मुझे वहां कोई कब्र नहीं दिखी थी। मौका मुआयना करने के लिए मेरे साथ और भी अफसर थे।
पीएस ध्रुव, एसडीएम
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Web Title: Dug the ground to open liquor store Broke out of human bones
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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