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पति ने मायके भेजा तो महिला के पिता से मांगा 17 हजार हर्जाना

संदीप राजवाड़े | Apr 21, 2017, 08:21 IST

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पति ने मायके भेजा तो महिला के पिता से मांगा 17 हजार हर्जाना
रायपुर.सामाजिक बहिष्कार के नाम पर राज्य में तुगलकी फरमान जारी हो रहे हैं। पीड़ित परिवार फरियाद लिए पुलिस और प्रशासन के अफसरों तक पहुंचते हैं, लेकिन किसी भी जिले में अब तक बहिष्कार करने वालों को सजा नहीं मिली। बहिष्कार के ज्यादातर केस धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, कोंडागांव और कांकेर जिले की पंचायतों में सामने आ रहे हैं। कुछ गांवों में तो खुद पंचायतों ने ही ऐसे तुगलकी फरमान दिए हैं।
पति-पत्नी एक-दूसरे के साथ रहने के लिए तैयार लेकिन समाज के ठेकेदार रिश्ते को तोड़ने पर अामादा
एक मंत्री के क्षेत्र में दो साल की बच्ची को अपने पिता से अलग रखने के लिए मजबूर किया जा रहा है। कुरुद से लगे खैरा गांव में रहने वाली एक महिला को शादी के कुछ साल बाद उसके पति ने वापस मायके भेज दिया। इसके बाद कथित समाज के पदाधिकारियों ने उसके परिवार को जोड़ने के बजाय महिला के पिता पर ही 17 हजार रुपए का जुर्माना लगा दिया। महिला ने कहा कि उसके ससुरालवालों पर भी 10 हजार का अर्थदंड लगाते हुए महिला को बच्ची और खुद के पालन-पोषण के लिए 500 रुपए प्रतिमाह हर्जाना देने का दबाव बनाने लगे। पति और पत्नी के एक-दूसरे के साथ रहने की रजामंदी के बाद भी चलाए जा रहे एक अलग कानून की वजह से वे एक नहीं हो पा रहे हैं। इतना ही नहीं, पैसे न देने पर महिला के परिवार वालों को गांव में होने वाले समाज के दुख-सुख के तमाम कार्यक्रमों से अलग करने का फैसला सुनाते हुए उनसे सभी तरह के रिश्ते तोड़ने का एलान कर दिया गया।
बेटी के पिता ने ससुरालवालों से इलाज का खर्च मांगा
मंत्री अजय चंद्राकर के गांव कुरुद से लगा हुआ है खैरा गांव। यहां के रामलाल साहू ने पिछले साल अक्टूबर में धमतरी एसपी से लिखित शिकायत की थी कि उसकी बेटी को ससुरालवालों ने घर वापस भेज दिया। बेटी किरण साहू सड़क हादसे में दुर्घटनाग्रस्त हो गई और इलाज के बाद उसे जब वापस भेजा गया तो उसकी हालत खराब बताते हुए ससुरालियों ने फिर लौटा दिया। बेटी के पिता ने ससुरालवालों से इलाज का खर्च मांगा और कोर्ट की शरण में गए। मौके पर मिली रामलाल की बेटी किरण ने बताया कि इसके बाद साहू समाज के परिक्षेत्र बानगर (सिंगलद्वीप) इकाई के पदाधिकारियों ने समाज की बैठक की और पिता से 17 हजार रुपए बतौर हर्जाना मांगा। पता ने हर्जाना देने से इनकार करते हुए बैठक छोड़ दी। इस पर समाज ने उस परिवार का ही बहिष्कार कर दिया। गांव में समाज के किसी भी घर में आने-जाने या सुख-दुख के आयोजन में शामिल होने पर पाबंदी लगा दी। अब लड़की के पिता अपने करीबियों के निधन होने पर भी शामिल नहीं हो पाते। कुछ समय पहले पुलिस के महिला सेल की समझाइश के बाद पति-पत्नी एक साथ रहने को तैयार हो गए। कुछ दिन बाद फिर समाज की दखलअंदाजी आड़े आ गई और पति अपनी पत्नी को मायके छोड़कर चला गया। शिकायत करने वाले रामलाल की बेटी किरण बताती है कि वे पिछले एक साल से समाज से अलग हैं। समाज के फैसले के विरोध की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा। किरण के पति तेजलाल का कहना है, वह पत्नी को वापस लाने को तैयार है। समाज ने उनसे कोई जुर्माना नहीं मांगा।
नहीं मांगा हर्जाना, वे समाज में ही हैं
हमारी ओर से कभी भी रामलाल केे परिवार का बहिष्कार नहीं किया गया। न ही कभी कोई हर्जाना मांगा गया। निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं। वे पहले की तरह समाज के हर दुख-सुख में शामिल हैं। वे बैठक में बुलाने पर नहीं आते। बेटी के इलाज के चार लाख रुपए उसके ससुरालवालों से मांगने का दबाव डालते हैं।
राधेश्याम साहू, अध्यक्ष, साहू समाज परिक्षेत्र बानगर (सिंगलद्वीप)
खुद के पेड़ काटे तो पंचायत ने 17 परिवार का बहिष्कार किया, बच्चों को दुकान से टॉफी भी नहीं खरीदने देते थे
धमतरी जिले का बकली गांव की झनियाबाई ने पिछले साल जून में एसपी और कलेक्टर से शिकायत की थी कि गांव में उसके परिवार की पैतृक जमीन और तालाब है। तालाब अब शासन के अधीन है। परिवार ने अपनी ही जमीन में लगे कुछ पेड़ काट दिए तो गांव की पंचायत सभा ने उनसे जुर्माना मांगा। उन्होंने बताया कि अपनी ही जमीन के पेड़ काटे हैं तो इसे पंचायत का विरोध माना गया। सभा ने इस परिवार और इससे जुड़े 17 परिवारों का बहिष्कार कर दिया, जिनमें 100 लोग शामिल हैं। फरमान सुनाया गया कि इनसे कोई भी गांव का व्यक्ति दुख-सुख में वास्ता नहीं रखेगा। इनके घर न तो खाना-पीना करेगा, न ही कोई इन्हें खिलाएगा। झनियाबाई के पति रामचंद साहू बताते हैं कि उनकी नाती-पोते गांव की दुकानों से टॉफी-बिस्किट खरीदने जाते तो उन्हें धक्का देकर भगा दिया जाता था। वे कुरुद जाकर राशन और जरूरत का सामान लाते थे। इसे लेकर जब पीड़ित परिवार ने प्रशासन से न्याय मांगा तो एक महीने बाद 3 हजार रुपए जुर्माना लेकर उन्हें शामिल किया गया। भास्कर टीम इनके पास पहुंची तो देखा कि अभी भी यह परिवार डरा-सहमा है। वे ज्यादा कुछ नहीं बोलना चाहते। रामचंद के बेटे शैलेंद्र ने बताया कि प्रशासन और पुलिस की मदद से हमारे परिवार और पंचायत के बीच समझौता हो गया। उन्होंने अपना केस वापस ले लिया।

समझाइश के बाद हुआ समझौता
अपनी जमीन पर लगे पेड़ के काटने पर गांव की सभा ने 17 परिवार को जुर्माना लगाने के साथ उन्हें गांव से अलग करने का फरमान सुनाया था। इसे लेकर शिकायत मिली थी। प्रशासन और पुलिस ने दोनों पक्षों की बात सुनी और उनके दस्तावेज देखे। इसके बाद समझाते हुए उन्हें गांव में शामिल करने के लिए कहा। अब सब ठीक है।
मनीष शर्मा, एसपी धमतरी
(अगर आपके आसपास ऐसी कोई कुरीति दिखाई दे, जिसका समाज पर विपरीत असर पड़ रहा हो तो हमें 94255 17666 पर जानकारी दें या वॉट्सएप करें।)
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Web Title: Husband sent mothers help,woman father demanded 17 thousand damages
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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