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चीन से लेकर नेपाल तक फैला है भारत के चोरों का कारोबार, ऐसे देते हैं अंजाम

bhaskar news | Mar 07, 2017, 04:00 IST

  • गिरोहबाज हमेशा बड़े शहर की बड़ी मोबाइल शॉप को ही निशाना बनाकर कीमती हैंडसेट ही चुराते थे।
    रायपुर.मालवीय रोड की मोबाइल शॉप से एक करोड़ से ज्यादा के फोन चुराने वाले बिहार के मोतिहारी गिरोह के दो चोर पकड़े गए। नेपाल बार्डर पर पुलिस ने तगड़ी घेरेबंदी कर उन्हें पकड़ा। गिरोह का मास्टर माइंड और लीडर भाग निकला। चोरों से 10 मोबाइल फोन जब्त किए गए। बाकी हैंडसेट चोरों ने नेपाल में बेच दिया। वहीं से लौटते समय पुलिस के जाल में फंसे। चोर गिरोह बेहद शातिर है और देश के कई राज्यों में बड़ी चोरियां कर चुका है। महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा और कश्मीर में वांटेड बताए जा रहे हैं। चोरी के माल को ये चीन, नेपाल और बांग्लादेश तक खपाते थे। डीलर को बॉर्डर पर पहुंचाते थे चोरी का माल...
    - गिरोहबाज हमेशा बड़े शहर की बड़ी मोबाइल शॉप को ही निशाना बनाकर कीमती हैंडसेट ही चुराते थे। मोबाइल के अलावा वे कीमती घड़ी चोरी करते थे। चोरी के बाद मोबाइल और घड़ी छिपाकर ले जाना आसान होता है।
    - 14 फरवरी की रात इसी गिरोह ने मालवीय रोड की मोबाइल शॉप में सेंध लगाई। गिरोह का सरगना इम्तेयाज अली अपने 11 साथियों के साथ आया और वारदात के बाद यहां से फरार हो गया।
    - एसपी डॉ. संजीव शुक्ला ने बताया कि इम्तेयाज मूलत: नेपाल के बीरगंज का है। उसने बिहार में शादी की है और वहीं बस गया, लेकिन उसका पूरा कारोबार नेपाल तक फैला है। उसके गिरोह में 11 सदस्य हैं।
    - पुलिस ने उन्हीं में शामिल मो. हसन आलम और कुणाल शाह को गिरफ्तार किया है। दोनों नेपाल बॉर्डर के पास घोड़ासहन के रहने वाले है। वे नेपाल गए थे और वहां चोरी का मोबाइल खपाने के बाद लौटकर आ रहे थे।
    गांव के हर घर में चोर
    - पुलिस ने बताया कि पूछताछ में पता चला है कि बिहार के घोड़ासहन, साहेबगंज के हर घर में एक चोर है। वहां 15 बड़े गिरोह सदस्य सक्रिय हैं जो देश में इस तरह की घटना को अंजाम देते हैं।
    - इसमें चेलवा, बैला, ओशिया समेत कई नामी गिरोह है। वहां के थाने में 2000 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर है।
    विदेश में बेचे जाते हैं हैंडसेट
    - पुलिस की जांच में पता चला है कि आरोपी विदेश में भी मोबाइल खपाते हैं। पूरा गिरोह चेन सिस्टम में काम करता है।
    - बॉर्डर पर डीलर सक्रिय हैं। वे कमीशन पर दूसरे देश में मोबाइल बेचते हैं। डीलर को बॉर्डर पर मोबाइल दिया जाता है। जिन्हें वे दुकानदारों तक पहुंचाते हैं और पैसा लाकर देते हैं।
    - गिरोह एप्पल का मोबाइल चीन में बेचते हैं। सैमसंग और एचटीसी के मोबाइल नेपाल और बांग्लादेश में बेचा जाता है। आेप्पो मोबाइल देश में ही खपाते है।
    - आरोपियों ने मालवीय रोड की दुकान से एप्पल के 27, एचटीसी के 68 और सैमसंग के 156 स्मार्ट फोन चोरी किए थे। इसमें सिर्फ एचटीसी के 10 मोबाइल मिले है। उसे भी दिल्ली में बरामद किया गया है।
    आगे की स्लाइड्स में पढ़िए, कोडवर्ड में होती है बातचीत...
  • मोबाइल के अलावा वे कीमती घड़ी चोरी करते थे।
    लोहे की रॉड से शटर उठाकर दुकान में एंट्री

    - चोरों का गिरोह बेहद शातिर है। बड़ी दुकान चुनने के बाद वे आधी रात के बाद उसके आस-पास इकट्ठा होते थे। सारे सदस्यों को सब काम बंटे हैं। दो सदस्य शटर के पास जाकर दुकान के पाटे पर सोने की नौटंकी करते हैं।
    - इस दौरान चादर को उठाकर इस तरह पर्दा करते कि शटर का बड़ा हिस्सा रोड से छिप जाता। इसी दौरान लोहे की राड से शटर को उठाकर थोड़ा तिरछा किया जाता। शटर उठने के बाद गिरोह में शामिल दुबले पतले सदस्य या बच्चे को भीतर किया जाता।
    - बच्चे को भीतर भेजने के बाद दो लोग वहीं पाटे पर सो जाते। इससे रोड पर आने जाने वालों को शक नहीं होता।
    - पुलिस के हत्थे में चढ़े हसन और कुणाल गिरोह में निगरानी टीम के सदस्य है। सरगना भी उनके साथ बाहर रहकर नजर रखता है।
  • हिरासत में लिए गए शातिर चोर।
    कोडवर्ड में होती है बातचीत

    - गिरोह के सदस्य आपस में कोडवर्ड में बात करते हैं। इसमें सभी के लिए कोडवर्ड तय किया गया है।
    - पुलिस वालों को मास्टर कहकर पुकारा जाता है।
    - शटर उठाने वाले को संगम मरवा, काटने वाले को कटर, चादर फैलाने वाले को छप्परमैन, दुकान के अंदर जाने वाले को प्लेयर और बाहर नजर रखने वालों को लाइनमैन कहते हैं।
    - आरोपी मोबाइल को घंटी, घड़ी को बीट, लैपटॉप को किताब, सोना को पक्की और चांदी को कच्ची कहते हैं।
  • 14 फरवरी की रात इसी गिरोह ने मालवीय रोड की मोबाइल शॉप में सेंध लगाई।
    गिरोह के सदस्य दो लॉक वाली दुकान को बनाते हैं टारगेट

    - टीआई संजय सिंह ने बताया कि रेकी के दौरान गिरोह के सदस्य एक-एक चीज को देखते हैं।
    -दुकान के शटर में कितनी तरह का लॉक है। दुकान का दरवाजा अंदर खुलता है कि नहीं। वहां कितने कैमरे लगे हैं। आसपास कोई चौकीदार रहता है या नहीं। जहां शटर में दो लॉक होता है। वहीं चोरी करते हैं।
    - शटर के बीच में सेंट्रल लॉक होने की दशा में उसे उठाकर तिरछा करना संभव नहीं होता। आरोपी रेकी से लेकर घटना को अंजाम देने तक मोबाइल का उपयोग नहीं करते हैं।
    - घटना के दौरान पकड़े जाने पर किसी का नाम भी नहीं बताते हैं। आरोपी बैग में मोजा लेकर आते हैं। एक मोजे में 10 मोबाइल को डाला जाता है।
  • आरोपी विदेश में भी मोबाइल खपाते हैं। पूरा गिरोह चेन सिस्टम में काम करता है।
    पहले रेकी की, फिर बनाया निशाना

    - पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि 12 फरवरी को गिरोह के दो सदस्य रायपुर आए। उन्होंने दुकान की रेकी की। कितने कीमती मोबाइल हैं, यह जानने के लिए वहां जाकर 6 हजार का मोबाइल भी खरीदा।
    -उसके बाद स्टेशन से गिरोह के मास्टर माइंड इम्तियाज को फोन किया। वह 13 फरवरी को 8 सदस्यों के साथ रायपुर आया। उसके बाद पूरी योजना बनाई गई।
    - 14 फरवरी की रात 3 बजे वे लोग स्टेशन से मालवीय रोड पहुंचे। दो सदस्य चादर लेकर दुकान के बाहर लेट गए। थोड़ी देर बाद चादर लेकर खड़े हो गए।
    - उनके आड़ में दो लोगों ने शटर के एक हिस्से को उठा दिया। उसके बाद दो नाबालिग दुकान के अंदर भेजे गए। तीन बैग में मोबाइल रखा और 25 मिनट में बाहर निकल आए।
    - उसके बाद ऑटो बैठकर सभी बस स्टैंड गए। वहां से ऑटो बदला फिर स्टेशन गए। वहां ट्रेन में बैठकर महाराष्ट्र चले गए। वहां से दो सदस्य मोबाइल लेकर बिहार रवाना हो गए। बाकी नासिक चले गए। जहां एक और दुकान में चोरी की।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: raipur Police Arrests Vicious Thieves from nepal border
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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