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सेना के चौपर पर नक्सली हमला, पायलट ने खेत में कराई इमरजेंसी लैंडिंग

भास्कर न्यूज | Jan 19, 2013, 05:42 IST

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सेना के चौपर पर नक्सली हमला, पायलट ने खेत में कराई इमरजेंसी लैंडिंग
जगदलपुर/सुकमा/रायपुर।सुकमा जिले में शुक्रवार शाम को हुई मुठभेड़ में घायल जवान को लेने जा रहे वायुसेना के एमआई-17 हेलिकॉप्टर पर नक्सलियों ने हमला कर दिया। जबर्दस्त फायरिंग से वायरलेस ऑपरेटर गंभीर रूप से घायल हो गया। चौपर पर लगी ढेर सारी गोलियों को देखते हुए पायलट ने उसकी खेत में इमरजेंसी लैंडिंग कराई।
चौपर पर सवार सभी जवान चिंतागुफा थाने में सुरक्षित पहुंच गए हैं। हमले के बाद सीआरपीएफ और जिला पुलिस बस की कई टुकड़ियों को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। अतिरिक्त फोर्स भी इलाके में भेजी जा रही है।
चिंतागुफा थाना के तेमेलवाड़ा कैंप से छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (सीएएफ) की 9वीं बटालियन और जिला पुलिस की संयुक्त टुकड़ी दोपहर करीब साढ़े तीन बजे रोड ओपनिंग के लिए निकली। वापसी में पुसवाड़ा से तीन किमी पहले घाटी में घात लगाए माओवादियों ने हमला कर दिया।
गोलाबारी में हवलदार बैसूराम मंडावी की मौके पर ही मौत हो गई और असिस्टेंट प्लाटून कमांडर नंदकिशोर भदौरिया गंभीर रूप से घायल हो गए। हेलिकॉप्टर में फ्लाइट लेफ्टिनेंट टीएस सिंह व आर रोहित के अलावा एस महावर, मनोज, गरुड़ कमांडो एस थापा, पीएस चौधरी और जिला पुलिस बल का वायरलेस ऑपरेटर सवार थे।
नक्सलियों के हमले में वायरलेस ऑपरेटर एमके साहू जख्मी हो गया। पायलट ने खतरे को भांपते हुए हेलिकॉप्टर को फिर से टेक ऑफ कर दिया और चिंतागुफा के करीब इमरजेंसी लैंडिंग की। इस बीच हेलिकॉप्टर का संपर्क भी कंट्रोल रूम से टूट गया। खबर है कि इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान हेलिकॉप्टर को नुकसान पहुंचा है।
पुलिस अधिकारियों को शक है कि नक्सलियों ने हेलिकॉप्टर पर हमला करने की योजना के तहत ही पुसवाड़ा में वारदात को अंजाम दिया। क्योंकि पेड़ या किसी पहाड़ी की चोटी पर बैठ नक्सलियों के लिए एमआई 17 जैसा बड़ा हेलिकॉप्टर आसान निशाना होता है, खासकर तब जब वह लैंडिंग या टेक ऑफ कर रहा हो।
नक्सलियों का गढ़ है इलाका: जिस इलाके में हमला हुआ है, वह नक्सलियों का गढ़ माना जाता है। इस इलाके में नक्सलियों की दो और आठ नंबर की मिलिटरी कंपनियों के अलावा नक्सलियों की पूरी बटालियन ऑपरेट कर रही है।
जगरगुंडा, केरलापाल, चिंतागुफा, चिंतलनार जैसे इलाकों से घिरा पोलमपल्ली इलाका सबसे संवेदनशील माना जाता है। नक्सली इस इलाके में काफी मजबूत हैं। माओवादियों ने इससे पहले वर्ष 2008 में विधानसभा चुनाव के दौरान बीजापुर के मारुड़बाका में वायुसेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर को निशाना बनाया था। इस हमले में वायुसेना के एक फ्लाइट सार्जेंट की मौत हो गई थी।
नई चुनौती
नक्सली एरिया में ऑपरेशन के लिए सबसे सुरक्षित माने जाने वाले एमआई 17 पर हुए हमले ने सीआरपीएफ के अलावा पुलिस को भी चिंता में डाल दिया है। क्योंकि दक्षिण बस्तर के एक बड़े इलाके में फोर्स को लाने- ले जाने के अलावा भेज्जी, पामेड़ जैसे दुर्गम थानों में तैनात जवानों के लिए राशन भी हेलिकॉप्टर से ही भेजा जा रहा है। हमले के बाद फोर्स रणनीति पर मंथन कर रही है।
फायरिंग में हवलदार शहीद, असिस्टेंट प्लाटून कमांडर गंभीर रूप से घायल
योजना बनाकर हमला
घायल जवान को लेने के लिए तेमेलवाड़ा से एम आई-17 हेलिकॉप्टर को जगदलपुर रवाना किया गया। इसमें पायलट समेत सात लोग सवार थे। चूंकि घायलों को लाने के लिए सेना हेलिकॉप्टर भेजती है, इसलिए इस बार भी माओवादियों को हेलिकॉप्टर आने की पूरी उम्मीद थी। इस कारण वे आसपास की पहाड़ियों पर भी छिप गए। तेमेलवाड़ा के करीब लैंडिंग के वक्त माओवादियों ने चौपर पर फायरिंग शुरू कर दी।
चौपर में सवार सभी सदस्य सुरक्षित
चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित चिंतागुफा थाना पहुंच गए हैं। घायल ऑपरेटर भी चिंतागुफा में है। हेलिकॉप्टर को सीआरपीएफ की टुकड़ी ने सुरक्षा के लिहाज से घेर रखा है।
-आरके विज, एडीजीपी (ऑपरेशन)
साथी जवान को बचाने के लिए लिया रिस्क
हमले में घायल सहायक प्लाटून कमांडर को लाने के लिए एमआई 17 हेलिकॉप्टर को भेजे जाने के फैसले से ही विमानन और नक्सल ऑपरेशन विशेषज्ञ हैरान हैं। यह फैसला नक्सल क्षेत्रों के हालात को देखते हुए बेहद जोखिम भरा व नियमों के खिलाफ था। ऐसे अशांत इलाकों में फ्लाइंग के लिए बेहद स्पष्ट नियम बने हुए हैं। इसके बावजूद घायल जवान को बचाने के लिए पुलिस और वायुसेना के पायलट ने जोखिम लिया।
क्या हैं नियम
> सूर्यास्त के कम से कम आधा घंटे पहले हेलिकॉप्टर लैंड हो जाना चाहिए। अनुभवी पायलट चाहे तो कुछ मिनटों का जोखिम ले सकता है।
> हेलिकॉप्टर जहां लैंड किया जाना है, उसके आसपास के कई सौ मीटर दूर के क्षेत्रों को सुरक्षित कर लिया जाए। ताकि उस पर हमला न हो पाए।
तेमेलवाड़ा में क्या हुआ
- नक्सली हमले की सूचना मिलने के बाद जिस समय हेलिकॉप्टर को रवाना किया गया, उस समय शाम के 4.20 बज चुके थे। 5.24 बजे के आसपास सूर्यास्त हो जाता है। जगदलपुर से घटनास्थल की दूरी करीब 100 से 105 नॉटिकल माइल्स है। वहां पहुंचने में ही हेलिकॉप्टर को एक घंटा लग जाता। ऐसे में हेलिकॉप्टर का स्पाट तक पहुंचना, जवान को लेकर वापस जगदलपुर आना बहुत मुश्किल था।
- हेलिकॉप्टर को उतारने के पहले आसपास के इलाके की सुरक्षा नहीं की गई। इससे नक्सलियों को हमले का मौका मिल गया।
नक्सलियों के पास हमले की पूरी ताकत
पिछले छह सालों से नक्सली लगातार हेलिकॉप्टरों पर हमले कर रहे हैं। उनके पास इसके लिए जरूरी हथियार भी हैं। ये हैं हथियार-
- देसी और आयातित रॉकेट लांचर
- लाइट मशीनगन/एसएलआर
एक्सपर्ट व्यू
वायु सेना ने नियमों का नहीं किया पालन
सुकमा में आज हुए हमले में पुलिस से रणनीतिक चूक हुई। हैरानी की बात तो यही है कि हेलिकॉप्टर की लैंडिंग के समय नक्सली कैंप के इतने करीब पहुंच कैसे गए। नक्सलियों ने हेलिकॉप्टरों पर हमले के लिए खुद के राकेट लांचरों के अलावा चीन और पाकिस्तान में बने लांचर भी हासिल किए हैं। मणिपुर के उग्रवादी संगठनों की मदद से उनको घातक हथियार मिल रहे हैं।
-प्रकाश सिंह, आंतरिक सुरक्षा विशेषज्ञ
गृहमंत्री कंवर का हेलिकॉप्टर भटका
रायपुरत्नसुकमा इलाके में सेना के हेलिकॉप्टर पर नक्सलियों की फायरिंग की सूचना के बीच ही गृहमंत्री ननकी राम कंवर का हेलिकॉप्टर भी भटक गया। फलत: वे जशपुर जिले के जारा ग्राम के स्कूल के शताब्दी समारोह में शामिल नहीं हो सके।
कंवर रायपुर से किराए के हेलिकॉप्टर से जारा जाने के लिए निकले थे, लेकिन लैंडिंग के लिए मिलने वाले अक्षांश-देशांश को गलत नोट करने के कारण पायलट ने हेलिकॉप्टर को जारा में उतारने के बजाय करीब 200 किलोमीटर दूर मैनपाट में उतार दिया। उसके बाद कंवर हेलिकॉप्टर लेकर अंबिकापुर लौट गए। वहां से वे सड़क मार्ग से कोरबा के लिए निकल गए। घटना दोपहर 3.30 बजे के बाद की है। कंवर ने कहा कि केवल लैंडिंग स्थान की गलत जानकारी की वजह से ऐसा हुआ।

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Web Title: Naxal attack on the army chopper pilot made ​​an emergency landing in the field
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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