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करोड़ों लगाकर बना टर्मिनल और.. सुविधाएं चवन्नी भर की भी नहीं

असगर खान | Jan 19, 2013, 06:30 IST

करोड़ों लगाकर बना टर्मिनल और.. सुविधाएं चवन्नी भर की भी नहीं
रायपुर।माना विमानतल में 164 करोड़ की नई इंटरनेशनल टर्मिनल बिल्डिंग में हवाई यात्रियों को अब भी जरूरी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। हवाई यात्री सीधे प्लेन में जाने की बजाय खुले मैदान में आधा किमी चल कर विमान में बैठ पाते हैं।
इतना ही नहीं, सामने वाला प्लेन टेक ऑफ होते तक उन्हें विमान में ही बैठकर अपनी उड़ान का इंतजार करना पड़ रहा है। इलेक्ट्रॉनिक डिस्पले चलते-चलते अचानक बंद हो जाता है। लोगों को फ्लाइट का समय जानने के लिए भी एयरलाइंस कंपनियों के पूछताछ केंद्र का सहारा लेना पड़ रहा है।
राज्योत्सव के समय नवंबर में राष्ट्रपति से उद्घाटन कराने के चक्कर में आधे-अधूरे टर्मिनल में फ्लाइट की आवाजाही जरूर शुरू करा दी गई लेकिन जरूरी सुविधाओं का ख्याल नहीं रखा गया। नए टर्मिनल में मुश्किलें कम होने की बजाय दिनों दिन बढ़ रही हैं।
एयरपोर्ट अथॉरिटी को फिलहाल लोगों की परेशानियों से कोई मतलब नहीं है। कई बार शिकायतें मिलने के बाद भी अफसर यात्रियों से बात तक नहीं करते। एयरपोर्ट अथॉरिटी की अनदेखी की वजह से निजी एयरलाइंस कंपनियों के अधिकारियों-कर्मचारियों के हौसले भी बुलंद हैं। वे यात्रियों के साथ बुरा सलूक कर विमानतल से बाहर निकलवाने की धमकी देते हैं।
एयरो ब्रिज का काम अब भी अधूरा
नया टर्मिनल बनने के साथ ही यात्रियों को विमानतल परिसर से सीधे प्लेन में जाने की सुविधा दी जानी थी, लेकिन एयरो ब्रिज का निर्माण अधूरा होने की वजह से यात्रियों को विमान तक पैदल जाना पड़ता है। कुछ विमान अब भी पुराने विमानतल पर ही लैंड करते हैं, इस वजह से यात्रियों को नए टर्मिनल से पुराने विमानतल तक का सफर भी पैदल तय करना पड़ता है। इसकी लंबाई आधा किमी से भी ज्यादा होती है। बरसात में यह मुसीबत और बढ़ेगी।
दो घंटे का सफर, आधा घंटा इंतजार
किसी भी विमान में रिवर्स गियर नहीं होता है। बड़े एयरपोर्ट में विमान को रनवे से हटाने या पीछे करने के लिए पुलर की व्यवस्था की जाती है। यह एक तरह की मोटी रस्सी होती है। रायपुर एयरपोर्ट में इंडिगो के अलावा किसी भी एयरलाइंस कंपनी के पास पुलर नहीं है। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। माना विमानतल में चार विमान एक साथ खड़े रहने की सुविधा है लेकिन पुलर न होने की वजह से एक फ्लाइट के टेक ऑफ करते तक दूसरी फ्लाइट को इंतजार करना पड़ता है। यात्रियों को मुंबई और दिल्ली के लिए भले ही दो घंटे लगते हैं, लेकिन उड़ान भरने से पहले उन्हें आधे घंटे से भी ज्यादा आगे के विमान के टेक ऑफ करने का इंतजार करना पड़ता है।
कैफेटेरिया भी बंद
टर्मिनल बिल्डिंग के बाहर स्थित कैफेटेरिया अब तक शुरू नहीं हो पाया है। इससे लोगों को खाने-पाने के लिए टर्मिनल बिल्डिंग के अंदर एक छोटी सी कैंटीन का ही सहारा है। इलेक्ट्रॉनिक डिस्पले खराब रहने की वजह से प्लेन की सही टाइमिंग की जानकारी भी यात्रियों को नहीं मिल पाती है। बाहर पार्किग में अब भी लोगों को पांच मिनट के लिए भारी शुल्क अदा करना पड़ रहा है।
कई बार शिकायतें
॥एयरपोर्ट अथॉरिटी और प्राइवेट एयरलाइंस दोनों ही यात्रियों की सुविधाओं का ख्याल नहीं रख रहे हैं। यही वजह है कि एयरपोर्ट पर आए दिन यात्री नाराज होकर हंगामा करते हैं। यात्रियों की सुविधाएं बढ़ाने के लिए राज्य सरकार और डीजीसीए से कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
-कीर्ति व्यास, अध्यक्ष, टीआरआई
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Web Title: terminal made by millions but no service
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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