» 2012 Delhi Gang Rape Case

दिल्‍ली गैंगरेप : पीडि़ता के खून में संक्रमण बढ़ा, पूरा देश कर रहा है दुआ

dainikbhaskar | Dec 22, 2012, 07:53 IST

  • नई दिल्‍ली। दिल्‍ली में रविवार को चलती बस में गैंगरेप पर बवाल मचा है और पीडि़त लड़की का हाल अब भी बुरा बना हुआ है। शनिवार को सफदरजंग अस्पताल के डॉक्‍टरों ने जो मेडिकल बुलेटिन जारी किया, उसके मुताबिक लड़की होश में है और बात कर पा रही है। लड़की ने पानी और जूस भी पिया है। लेकिन प्लेटलेट काउंट में गिरावट बनी है और संक्रमण अब भी दूर नहीं हुआ है।
    इस बीच, पता चला है कि रविवार को हई वारदात (पढि़ए, आज का अपडेट) के आरोपी से तिहाड़ जेल में बंद कैदी भी नफरत कर रहे हैं। यहां मुकेश की न सिर्फ पिटाई हुई बल्कि उसे मलमूत्र भी जबरन खिलाया गया। कैदियों ने जमकर उसकी पिटाई भी की। इसके बाद जेल प्रशासन ने उसे दूसरे बैरक में भेज दिया। मुकेश की की पहचान आइडेंटिफिकेशन परेड (टीआईपी) के दौरान पीडि़ता के दोस्त ने की थी। (देखें दिल्‍ली में प्रदर्शन की तस्‍वीरें)
    रेप में नाकाम रहने पर लड़की को चाकू मारा, सहरसा में हंगामा
    दिल्ली में गैंग रेप के खिलाफ देशव्यापी गुस्से के बीच बिहार में लड़कियों के साथ बदसलूकी की घटनाओं को बदमाश अंजाम देने से नहीं हिचक रहे हैं।
    शनिवार को राज्य के सहरसा में एक लड़की के साथ रेप में नाकाम रहने पर बदमाशों ने उसे चाकू मारकर घायल कर दिया। उसे अस्पताल में दाखिल कराया गया है। एसपी अजीत कुमार सत्यार्थी ने बताया कि इस सिलसिले में छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दायर की गयी है।
    घटना आज शाम उस वक्त की है जब लड़की जिला स्कूल से परीक्षा देकर घर जा रही थी। स्कूल के गेट के पास ही एक चार पहिया वाहन खड़ा था।
    लड़की को बताया गया कि गाड़ी पर उसका भाई गोलू बैठा हुआ है। लड़की उसे देखने गयी तो उसे जबरन गाड़ी में बैठा लिया गया। विरोध करने पर बदमाशों ने उसे चाकू मारकर घायल कर दिया। लड़की किसी तरह उनके चंगुल से भागी।
    शहर के भीड़भाड़ वाले पंचवटी इलाके में लड़की गाड़ी से कूदकर भागी। खून बहता देख उसे लोगों ने नर्सिग होम में दाखिल कराया।
    लड़की ने पुलिस को दिये बयान में एक अनिमेष नामक लड़के का नाम बताया। उसके अनुसार गाड़ी में कुल छह लोग बैठे थे। चार के चेहरे पर नकाब था। दो यवकों को वह पहचानती है। लड़की दसवीं में पढ़ती है।
    इस घटना की खबर जैसे ही लोगों को लगी, हंगामा शुरू हो गया। उग्र लोगों ने बदमाशों को पकड़ने की मांग करते हुए शहर में जुलूस निकाला। हंगामे को देख दुकानें बंद कर दी गयीं।
    अनिमेष मेरे साथ था: आनंद मोहन
    इस घटना में जिस अनिमेष का नाम प्राथमिकी में आया है, उसका बचाव आजीवन कारावास की सजा पाये पूर्व सांसद आनंद मोहन ने किया है। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर कोर्ट में उनकी पेशी के दौरान अनिमेष उनके साथ था। इस घटना में उसका नाम राजनीतिक वजहों से लिया जा रहा है।
    आगे पढ़ें- किस हाल में है पीडि़त लड़की
  • दिल्‍ली में चलती बस में गैंगरेपकी शिकार युवती की छोटी-बड़ी दोनों आंत पेट से बाहर निकाले जाने के बाद उसकी बाकी की जिंदगी को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इसमें सबसे बड़ी बात उसकी आंत के प्रत्यारोपण की है। राजधानी के जाने-माने गैस्ट्रो सर्जन का दावा है कि देश में इतनी तकनीक उपलब्ध है कि आंत का प्रत्यारोपण किया जा सके, लेकिन पूरी दुनिया में इसकी न्यूनतम सफलता दर यह इशारा कर रही है कि यह इलाज इतना आसान नहीं है। एम्स ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख डॉ. एमसी मिश्रा का कहना है कि आंत प्रत्यारोपण करने में एम्स भी सक्षम है। वहीं, राजधानी के निजी अस्पताल ने ऐसे एक प्रत्यारोपण का दावा किया है।
    जीबी पंत अस्पताल के गैस्ट्रो सर्जन डॉ. एके अग्रवाल ने कहा कि इस सर्जरी में काफी रिस्क होता है। कई बार दूसरे के शरीर की आंत प्रत्यारोपित शरीर स्वीकार नहीं करता और रिजेक्शन हो जाता है। लेकिन देश में इतनी तकनीक उपलब्ध है कि प्रत्यारोपण किया जा सके। किंतु इस मामले में पीड़िता की हालत इतनी खराब है कि उसकी दोनों आंत की जगह जितनी लंबाई में आंत चाहिए वह कैडेवर डोनर उपलब्ध होने पर ही संभव है।
    वहीं दूसरी डॉ. मिश्रा ने कहा कि अमेरिका में आंत प्रत्यारोपण ज्यादा होता है, लेकिन उसमें आंत में आए संक्रमण की वजह से कुछ हिस्सा प्रत्यारोपित किया जाता है। लेकिन इस मामले में बड़ी और छोटी दोनों आंत का प्रत्यारोपण किया जाना है, जिसके लिए अभी उचित समय नहीं है। हालांकि उनका दावा है कि भारत में यह तकनीक उपलब्ध है और उनका सेंटर भी यह सर्जरी करने में सक्षम है।
    टीपीएन भी बढ़ा सकता है संक्रमण :डॉ. अग्रवाल ने कहा कि टोटल पैरेंटल न्यूट्रिशियन (टीपीएन) ऐसी तकनीक है जिसमें नस के जरिए फीडिंग से इंसान को तरल पदार्थ के रूप में काबरेहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन, वसा आदि दी जाती है। इस युवती को भी टीपीएन दिया जा रहा है। लेकिन इसके लगातार प्रयोग से डम्पी सिंड्रोम होने की संभावना प्रबल हो जाती है। डम्पी सिंड्रोम में मरीज का कभी प्रोटीन बढ़ जाता है तो कभी ग्लूकोज बढ़ जाता है। लंबे समय तक इसका प्रयोग संक्रमण की वजह बन जाता है। यह संक्रमण लीवर को भी नुकसान पहुंचा सकता है। डॉ. मिश्रा के अनुसार ऐसे मरीज के साथ अमेरिका में होम पैरेंटल के जरिए फीडिंग की व्यवस्था होती है। लेकिन भारत में यह अभी तक यह संभव नहीं है। अगर उचित व्यवस्था हो तो इसके जरिए तीन महीने से एक साल तक मरीज को रखा जा सकता है।
    ..तो जिंदगी भर खाना नहीं खा सकेगी
    अगर पीड़िता की आंत का प्रत्यारोपण नहीं किया जाता है तो वह जिंदगी में कभी भी खाद्य पदार्थ नहीं खा सकेगी क्योंकि उसके शरीर में पाचन क्रिया को अंजाम देने के लिए छोटी आंत अब नहीं है।
  • गैस्ट्रोस्टोमी में लीकेज की संभावना
    युवती का आंत निकाल देने के बाद उसके पेट से एक पाइप बाहर निकाला गया है जिसे गैस्ट्रोस्टोमी कहा जाता है। लेकिन डॉक्टर का कहना है कि लंबे समय तक इसका प्रयोग पाइप में लिकेज उत्पन्न कर सकता है और शरीर के अंदर अल्सर भी हो सकता है। यही नहीं डॉक्टर का यह भी कहना था कि इस मामले में छोटी आंत डियोडेनम भी बाहर निकाल दिया गया है जिसकी कमी से पित्त और एंजाइम का स्तर भी शरीर में बढ़ेगा जो परेशानी की वजह हो सकती है। डॉक्टर का सीधे तौर पर कहना है कि ऐसी स्थिति में बेहतर जिंदगी की उम्मीद बेमानी है।
  • कैडेवर डोनर मिलने पर प्रत्यारोपण संभव
    डॉ. मिश्रा के अनुसार सामान्य आदमी की छोटी आंत की लंबाई करीब 600 सेंटीमीटर होती है जिसमें से 200 सेंटीमीटर आंत प्रत्यारोपण के लिए निकाली जा सकती है। इसका डोनर पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता। लेकिन इस मामले में मरीज को दोनों आंत नहीं है इसलिए उसे दो सौ सेंटीमीटर से ज्यादा की लंबाई की आंत की जरूरत है, जो ब्रेन डेड मरीज से ही मिल सकता है।
  • अब भी बोल नहीं पा रही गैंगरेप की शिकार लड़की
    दिल्‍ली में रविवार की रात गैंगरेप की शिकार लड़की अब खुद से सांस लेने में सक्षम है। इसके बावजूद डॉक्टरों का कहना है कि अभी खतरा टला नहीं है। एक तरफ जहां उसकी तबीयत में सुधार दिख रहा है, वहीं खून में जारी संक्रमण ने डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है। सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीडी अथानी ने कहा कि वेंटिलेटर से हटाया जाना सुखद है, लेकिन सेपसिस की वजह से लीवर तक संक्रमण का पहुंचना खतरनाक है। ऊपर से उसके डब्ल्यूबीसी में आई गिरावट की वजह से खतरा बढ़ गया है। जब तक युवती पूरी तरह इस संक्रमण से बाहर नहीं आती तब तक उसके बारे में कुछ भी कहना जल्दीबाजी होगी। हमारा सारा ध्यान उसकी तत्काल स्थिति में सुधार पर है और हर एक घंटा महत्वपूर्ण बना हुआ है।
  • रात से ले रही है खुद से सांस
    युवती का इलाज कर रहे डॉक्टरों की टीम में शामिल एनेस्थीसिया के डॉ. अनूप गोगिया ने कहा कि गुरुवार देर रात साढ़े बारह बजे पहली बार कुछ समय के लिए उसे वेंटिलेटर से हटाया गया। इसके बाद रात दो बजे तक कुछ-कुछ देर के लिए यह प्रक्रिया अपनाई गई। फिर शुक्रवार सुबह से दिन के पौने तीन बजे तक उसे पूरी तरह वेंटिलेटर से हटा कर रखा गया और उसे इस दौरान कोई दिक्कत महसूस नहीं हुई। हालांकि इसके बाद उसने बोलने की कोशिश की, लेकिन अभी केवल इशारे से बात कर रही है।
  • बढ़ रहा है प्लेटलेट्स
    युवती का इलाज कर रहे डॉ. सुनील जैन ने कहा कि सबसे अच्छी बात यह है कि युवती का प्लेटलेट्स काउंट बढ़ा है और 61 हजार तक पहुंच गया है। अच्छी बात यह है कि यह बढ़ोतरी उसकी अपनी शारीरिक क्षमता के बल पर हुआ है। पिछले एक दिन से उसे प्लेटलेट्स या प्लाजमा नहीं चढ़ाया गया है। यही नहीं उसका प्लस रेट भी अब सामान्य हो गया है।
    डब्ल्यूबीसी में कमी
    डॉक्टरों के अनुसार युवती के खून में डब्ल्यूबीसी में कमी आ गई है। यह घट कर 1500 तक पहुंच गया है, जबकि न्यूनतम संख्या 4000 तक होनी चाहिए थी। इस वजह से उसके अंदर की इम्यून सिस्टम पर असर हो रहा है और संक्रमण बढ़ रहा है।
  • मां से मिलने की इच्छा जताई
    वेंटिलेटर से हटाए जाने के बाद युवती ने बोलने की कोशिश की, लेकिन वह बोल नहीं पा रही है। उसने इशारे से पहले मां से मिलने की इच्छा जताई और फिर पानी भी मांगा। हालांकि डॉक्टर ने उसे बोलने से मना किया है। बेटी को वेंटिलेटर से हटाए जाने से परिजन बेहद खुश हैं।
    परिजनों ने मीडिया से पीछा नहीं करने की अपील की : डॉ. नथानी ने बताया कि पीडि़ता के परिजनों ने मीडिया से उनका पीछा नहीं करने की अपील की है। उनका कहना है कि हम पहले से काफी आहत हैं और आहत न करें।
  • डॉक्टर ने अस्पताल परिसर में प्रदर्शन न करने की अपील की
    डॉ. अथानी ने कहा कि जो लोग इस मामले को लेकर प्रदर्शन करना अच्छी बात है। लेकिन अस्पताल के अंदर उनके इस प्रदर्शन से मरीजों की परेशानी बढ़ रही है। इसलिए ऐसा न करें।
    हालत गंभीर, आंत प्रत्यारोपण की पेशकश :
    सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सामूहिक दुष्कर्म पीडि़त 23 वर्षीय लड़की की हालत गंभीर है। मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. बीडी अथानी ने कहा कि लड़की ठीक होती दिखती है। फिर उसकी तबीयत बिगड़ जाती है। उसके प्लेटलेट्स कम हो गए हैं। लिवर भी कम काम कर रहा है। उधर, सर गंगाराम अस्पताल ने पीडि़त लड़की की आंत का निशुल्क प्रत्यारोपण करने की पेशकश की है। अस्पताल के चेयरमैन डॉ. टीएस राणा ने बताया कि उनका अस्पताल यह काम करने को तैयार है। गंगाराम अस्पताल इकलौता संस्थान है जहां आंत के प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध है। इस ऑपरेशन पर लगभग 30 लाख रुपए खर्च आ सकता है।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: 2012 Delhi gang rape case
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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