» Delhi Gang Rape: The Delhi Police Criticized By International Organization

अंतरराष्ट्रीय संस्था ने भी की दिल्ली पुलिस के इस कदम की आलोचना

Bhaskar News | Jan 06, 2013, 04:09 IST

  • नई दिल्ली.16 दिसंबर की रात 'दामिनी' को शिकार बनाने से पहलेएक और लड़की इन 6 दरिंदों के निशाने पर थी और उनके चंगुल में फंसते-फंसते बच गई थी।

    सूत्रों के अनुसार, मामले के दो आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में बताया कि दामिनी से पहले उन्होंने एक अन्य लड़की को बस में खींचने की कोशिश की थी। लड़की ने काले कपड़े पहन रखे थे और वह आईआईटी फ्लाईओवर के नजदीक बस या ऑटो का इंतजार कर रही थी। लेकिन वह लड़की इनके जाल में नहीं फंसी। बताया जाता है कि आरोपी इस मकसद से ही छुट्टी के दिन बस लेकर निकले थे कि किसी लड़की को अगवा कर हवस का शिकार बनाना है। पुलिस ने मामले से जुड़ी चार्जशीटमें आरोपियों पर धारा 120(बी) के तहत भी मुकदमा दर्ज किया है।

    जांच से जुड़े करीबी सूत्रों ने बताया कि आरोपी ने एक लड़की को बस में खींचने का आइडिया दिया था और उसने बस चला रहे मुकेश को बस को लड़की के नजदीक ले जाने के लिए कहा था। हालांकि, लड़की भाग्यशाली थी, इससे पहले कि बस उसके नजदीक पहुंचती कि उसके पहले ही उसे एक ऑटो मिल गया। जबकि कुछ ही मीटर आगे दामिनी और उसका दोस्त भी खड़े थे और दुर्भाग्य से दोनों बस में सवार हो गए थे।

    वहीं, दिल्ली दुष्कर्म मामले में पीडि़त छात्रा के दोस्त का बयान सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस शनिवार को सफाई देती रही। उधर, गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि जांच-पड़ताल के बाद वे कुछ कह सकेंगे। इस बीच, छात्रा के भाई ने कहा है कि यदि बहन को समय पर मदद मिल गई होती तो उसकी जान बच सकती थी।

    दिल्ली पुलिस के जॉइंट कमिश्नर विवेक गोगिया ने कहा कि पीडि़त के दोस्त का बयान सही नहीं है। पुलिस का दावा है कि घटना की सूचना मिलते ही पीसीआर वैन मौके पर पहुंच गई थी। महज आधे घंटे के भीतर दोनों पीडि़तों को हॉस्पिटल पहुंचा दिया गया था।

    हालांकि, भाजपा समेत कई दल और सामाजिक संगठनों ने पुलिस और अस्पताल की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि दोनों महकमों से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने समाचार चैनल के खिलाफ केस दर्ज करने की कार्रवाई की भी आलोचना की।

    चार आरोपों पर पुलिस का जवाब :

    आरोप नंबर 1: पुलिस ने पीडि़त को हॉस्पिटल ले जाने में देरी की। मामला किस थाने का है, इस पर लड़ते रहे।
    जवाब:पीसीआर वैन को थाने के अधिकार क्षेत्र से कोई लेना-देना नहीं होता। वह किसी थाने के अधीन काम नहीं करती। इस मामले में पुलिस के पास 10.21 पर कॉल आया और 10.55 पर दोनों पीडि़तों को सफदरजंग हॉस्पिटल पहुंचा दिया गया था।

    आरोप नंबर 2:पीडि़त को निजी अस्पताल के बजाए सफदरजंग अस्पताल क्यों ले जाया गया?
    जवाब:सफदरजंग नामांकित मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल है। इसलिए पुलिस पीडि़तों को वहां ले गई।

    आरोप नंबर 3:पीडि़त को थाने में चार दिन रखा गया और उस वक्त इलाज भी नहीं कराया गया।
    जवाब:सफदरजंग हॉस्पिटल में फस्र्ट एड के बाद पुरुष पीडि़त को अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी। छानबीन में मदद और बयान दर्ज कराने के लिए पीडि़त को पुलिस थाने बुलाया गया था।

    आरोप नंबर 4:पुलिस ने अपनी कार्यवाही के दौरान वाहवाही लूटने की कोशिश की।
    जवाब:पुलिस ने पीडि़त को नियमित रूप से बताया है कि केस में क्या प्रगति हुई है। यह हमारी नीति है।

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  • चार्जशीट के कवर पर हत्या की धारा लिखना भूली पुलिस :

    दिल्ली पुलिस की एक और लापरवाही सामने आई है। कोर्ट में पेश चार्जशीट के कवर पर दिल्ली पुलिस दुष्कर्मियों के खिलाफ हत्या की धारा 302 लगाना भूल गई। शनिवार को सुनाई के दौरान कोर्ट में जज नम्रिता अग्रवाल ने इस ओर ध्यान दिलाया। इस पर पुलिस ने कहा कि टाइपिंग की गलती से ऐसा हुआ। दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता ने राजीव मोहन ने बाद में बताया कि गलती सिर्फ चार्जशीट के कवर पर रह गई थी। इसमें संशोधन के लिए कोर्ट को आवेदन देने की बात कही गई थी। लेकिन जज ने कहा कि इसकी कोई दरकार नहीं है।

  • अंतरराष्ट्रीय संस्था ने भी की दिल्ली पुलिस की आलोचना :

    अमेरिका में पत्रकारों की संस्था कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट (सीपीजे) ने भी समाचार चैनल के खिलाफ केस दर्ज करने की आलोचना की है। संस्था के एशिया प्रोग्राम कोआर्डिनेटर बॉब डाइज ने कहा कि मीडिया ने घटना का सच सामने लाने में मदद की है। उसके खिलाफ केस वापस लेना चाहिए।

  • दुष्कर्मियों को नपुंसक बनाने के पक्ष में नहीं कांग्रेस :

    कांग्रेस द्वारा महिलाओं के खिलाफ अपराधों के संबंध में बनी जस्टिस जेएस वर्मा कमेटी को सौंपे सुझावों में दुष्कर्मियों को नपुंसक बनाना शामिल नहीं है। पार्टी के महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि दिल्ली के दुष्कर्म के बाद देशभर में हुए प्रदर्शनों के मद्देनजर पैनल गठित की गई थी।

    इसे हमने अपने सुझाव दे दिए हैं। पार्टी ने कहा है कि दुष्कर्मियों को 30 साल की कैद हो। फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन किया जाए। किशोरों की आयु सीमा को घटाकर कानून को स्पष्ट करे।

    इससे पहले रेणुका चौधरी जैसे नेताओं ने दुष्कर्मियों को नपुंसक बनाने की मांग की थी। लेकिन पार्टी ने स्पष्ट किया कि इस तरह के सुझाव कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की ओर से नहीं आए हैं। उन्होंने हाल ही शीर्ष नेताओं के साथ इस मुद्दे पर बैठक की थी।

  • समन जारी, पेशी कल :

    कोर्ट ने दुष्कर्म के पांचों आरोपियों को शनिवार को समन जारी किया। सोमवार को पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। साकेत की मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट नम्रता अग्रवाल ने तीन जनवरी को दायर आरोप पत्र पर संज्ञान लिया। उन्होंने कहा कि चार्जशीट में सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या और दुष्कर्म समेत नौ धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। इससे पहले सरकारी वकील राजीव मोहन ने ई-चालान पेश किया।

  • कोर्ट में पीडि़त का नाम सार्वजनिक करने की अपील :

    दिल्ली की कोर्ट में स्वामी ओम जी नामक व्यक्ति ने पीडि़त का नाम और अन्य घटनाक्रम सार्वजनिक करने की मांग की है। अपने आपको दुष्कर्म पीडि़तों के संगठन का संस्थापक और अध्यक्ष बताने वाले इस शख्स ने नम्रता अग्रवाल की कोर्ट में कहा, 'मैं भारत का नागरिक हूं। जिसके साथ दुष्कर्म हुआ वह पूरे राष्ट्र की बेटी है। उसका पुरुष मित्र टीवी चैनल पर सामने आया है। ऐसे में छिपाने जैसा कुछ नहीं है।' सरकारी वकील राजीव मोहन ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि लड़की के पुरुष मित्र का इंटरव्यू दिखाने वाले चैनल के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। बाद में कोर्ट ने उस व्यक्ति को अपना आवेदन सत्र न्यायाधीश में पेश करने को कह दिया।

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(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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