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दिल्‍ली गैंगरेप : सेरिब्रल ऐडेमा बनी मौत की वजह, पहले से तय था कि लड़की का बचना नामुमकिन

dainikbhaskar.com | Dec 29, 2012, 12:08 IST

  • नई दिल्‍ली.16 दिसंबर की रात चलती बस में गैंगरेपऔर जानलेवा हमले की शिकार हुई लड़की की जान नहीं बचाईजा सकती, यह आशंका पहले से ही थी। 23 साल की इस लड़की की मौत की वजह सेरिब्रल ऐडेमा की वजह से हुई।
    सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्‍पताल में उसका इलाज करने वाले डॉक्‍टर का कहना था कि उसे जो अंदरूनी चोट आई थी, वह जानलेवा थी और उसे बचाया नहीं जा सकता था। (तस्‍वीरों में देखिए लड़की की मौत के बाद दिल्‍ली में पहरा और लोगों का आक्रोश)
    इसके बाद यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्‍या लड़की को सिंगापुर भेजा जाना महज दिखावा था या फिर दिल्‍ली में लोगों का गुस्‍सा शांत करने के लिए उठाया गया एक कदम था? लेखिका शोभा डे ने साफ कहा है कि लड़की को सिंगापुर ले जाना महज दिखावा था। बसपा नेता मायावती ने सवाल उठाया है कि उसे सिंगापुर ले जाने में देर क्‍यों की गई? भाजपा सांसद मेनका गांधी ने तो साफ शब्‍दों में शक जताया है कि लड़की की मौत दिल्‍ली में ही हो गई थी। इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा है कि लड़की को डॉक्‍टरों की सलाह पर सिंगापुर ले जाया गया था।
    लड़की जब सफदरजंग अस्‍पताल में भर्ती थी, तभी उसे दिल का दौरा पड़ा था और यही उसके दिमाग में सूजन (सेरिब्रल ऐडेमा) की वजह बना। सिंगापुर के अस्‍पताल में पहुंचते ही उसका सीटी स्‍कैन किया गया था। इसमें पता चला था कि महज तीन मिनट के वक्‍त में उसके मस्तिष्‍क में खून का काफी रिसाव हुआ था। उस दौरान सफदरजंग अस्‍पताल के डॉक्‍टर उसकी पल्‍स और ब्‍लड प्रेशर माप पाने में नाकाम रहे थे। इसी स्थिति के कारण उसे ब्रेन ऐडेमा हुआ। यह एक गंभीर स्थिति होती है। जब दिमाग में पानी की मात्रा बढ जाती है तो इस वजह से सिर में दबाव बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में रक्‍तवाहिकाएं (ब्‍लड वैसल) सिकुड जाती हैं और दिमाग तक ऑक्‍सीजन नहीं पहुंच पाता। सेरेब्रल या ब्रेन ऐडेमा में दिमाग की कोशिकाएं क्षतिग्रस्‍त हो जाती हैं या मर भी जाती हैं।

  • भारतीय जनता पार्टी की नेता और सांसद मेनका गांधी ने शक जताया है कि गैंगरेप की शिकार युवती की मौत दिल्ली में ही हो गई थी। उन्‍होंने कहा कि उसे बोरे की तरह प्लेन में डालकर कर सिंगापुर भेज दिया गया। मेनका गांधी ने कहा कि जिन हालात से लड़की गुजर रही थी, वैसे में बेहतर इलाज के नाम पर विदेश भेजना कहीं से भी तार्किक नहीं था।
    उन्होंने दिल्ली और केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इस घटना के बाद सरकार में जिस तरह की प्रतिबद्धता दिखनी चाहिए थी, वह अब तक नहीं दिखी। सरकार कुछ कड़े कदम उठाकर लोगों में भरोसा और सुरक्षा का माहौल कामय कर सकती थी, लेकिन ऐसा करने में वह नाकाम रही।
    कुछ डॉक्टरों ने भी लड़की को सिंगापुर भेजने पर हैरानी जतायी थी। डॉक्टरों का कहना था कि जब लड़की इस हालत में नहीं थी कि उसका आंत ट्रांसप्लांट किया जा सके तो सिंगापुर क्यों भेजा गया। एक्सपर्ट टीम के कुछ डॉक्टरों ने कहा था कि उन्हें बताया भी नहीं गया कि आखिर क्यों सिंगापुर लड़की को शिफ्ट किया जा रहा है। केवल इतना पूछा गया कि क्या लड़की वहां जाने की स्थिति में है। डॉक्टरों ने इस मेडिकल फैसला के बजाय राजनीतिक फैसला करार दिया था। लेकिन गृह मंत्री शिंदे इस फैसले का आधार डॉक्‍टरों की सलाह को बता रहे हैं। उनका कहना है कि डॉक्‍टरों की सलाह पर ही लड़की को सिंगापुर भेजा गया था और आगे जरूरत पड़ने पर कहीं और भेजे जाने के लिए भी सरकार तैयार थी।
  • पता यह भी चला है कि सिंगापुर ले जाते वक्‍त एक बार लड़की की जान खतरे में आ गई थी। 30000 फीट की ऊंचाई पर उसका ब्‍लड प्रेशर काफी गिर गया था, लेकिन डॉक्‍टरों ने किसी तरह उसे बचा लिया।
    दिल्‍ली गैंग रेप की पीडि़ता को जब सिंगापुर ले जा रहा था तो रास्‍ते में ही उसकी तबीयत इतनी अधिक बिगड़ गई थी कि डॉक्‍टरों तक के होश उड़ गए थे। तीस हजार की फीट की ऊंचाई पर पीडि़ता का ब्‍लड प्रेशर अचानक काफी अधिक गिर गया था। इसे नियंत्रित करने में डॉक्‍टरों को पसीना आ गया था। सफदरजंग हॉस्पिटल के डॉक्‍टर पीके वर्मा और मेंदाता अस्‍पताल के डॉक्‍टर यतीन मेहता ने इस नियंत्रण में किया। प्‍लेन में आईसीयू पर लगातार पीडि़ता के ब्‍लड प्रेशर पर नजर रखा जा रहा था। छह घंटे के लंबे सफर में डॉक्‍टरों के अलावा नर्स और पीडि़ता के परिवार के सदस्‍य भी प्‍लेन में मौजूद थे।
    एम्‍स के टॉमा सेंटर के प्रमुख डॉक्‍टर पी सी मिश्रा बताते हैं कि उन्होंने छात्रा की फैमिली को पहले ही बताया दिया था कि उसे दूसरे देश ले जाने में खतरा बना रहेगा। ब्‍लड प्रेशर गिरने से लेकर दिल के दौरे तक की आशंका बनी रह सकती है। लेकिन परिवार की सहमति के बाद उसे सिंगापुर ले जाने का निर्णय लिया गया। रिस्‍क तो था लेकिन हमने फैसला लिया।
  • दिल्ली में चलती बस में गैंगरेप की शिकार लड़की को इलाज के लिए सिंगापुर कैसे भेजा गया? इस बारे में अंदर की खबरें सामने आ रही हैं। बताया जाता है कि इसकी पहल दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने की। सरकारी सूत्रों के मुताबिक रविवार को शीला दीक्षित ने केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे से मुलाक़ात की और पीड़िता को सबसे अच्छी चिकित्सा सुविधा प्रदान करवाने की अपील की।अगले दिन वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलीं और पीड़िता को विदेश भेजने की बात कही। इस दौरान उन्होंने राजधानी में लोगों के बढ़ रहे गुस्से से भी प्रधानमंत्री को अवगत कराया।
    केंद्र सरकार से हरी झंडी मिल जाने के बाद पीड़िता को सिंगापुर शिफ्ट करने के संबंध में पहला बड़ा कदम मंगलवार को उठाया गया था। इस संबंध में मेदांता अस्पताल के प्रतिष्ठित हार्ट सर्जन नरेश त्रेहन से संपर्क किया गया। उनसे दो महत्वपूर्ण मसलों पर राय ली गई कि पीड़िता को किस देश में शिफ्ट किया जा सकता है और क्या हवाई यात्रा कर पाना उसके लिए संभव होगा।
    डॉटर त्रेहन द्वारा पीड़िता को सर्वोत्तम मेडिकल सुविधा दिलाने के आश्वासन के बाद सरकार ने उसे सिंगापुर भेजने का फैसला किया। बुधवार की शाम 5:30 पर गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव के के पाठक की औपचारिक स्वीकृति के बाद एयर एम्बुलेंस बुक किया गया और रात करीब 10:30 बजे पीड़िता को सफदरजंग अस्पताल से शिफ्ट कर दिया गया। गुरुवार सुबह उसे माउंट एलिजाबेथ अस्‍पताल में भर्ती कराया गया और शुक्रवार आधी रात के बाद उसकी मौत हो गई।

  • सिंगापुर भेजने में राजनीतिक फायदा नहीं : खुर्शीद
    दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म पीडि़त को सिंगापुर भेजने में केंद्र सरकार राजनीतिक फायदा नहीं उठा रही है। यह निर्णय युवती के बिगड़ते स्वास्थ्य को देखकर लिया गया।
    यह स्पष्टीकरण शुक्रवार को विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने सिर्फ जरूरी मदद की। इसमें उनके आने-जाने, ठहरने और इलाज का खर्चा है।
    पीडि़त और परिजनों का पासपोर्ट बनाया। केंद्र सरकार इस मामले का कोई राजनीतिक फायदा नहीं उठाना चाहती है, न ही उठा रही है। यह फैसला डॉक्टरों का था। उन्हीं के कहने पर सिंगापुर का अस्पताल चुना गया।

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Web Title: delhi gange rape
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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