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PHOTOS: जॉब्स के जीवन से ले सकते हैं ये सीख!

dainikbhaskar | Jan 04, 2013, 11:32 IST

  • एपल कंपनी के भूतपूर्व सीईओ स्टीव जॉब्स जैसा कोई दूसरा नहीं होगा। वह रोज कुछ सीखते और बढ़ते थे।
    वे काम के साथ अपने परिवार का भी पूरा ख्याल रखते थे। वे हमेशा अपने मन की सुनते और खुद पर भरोसा करते थे।
    जॉब्स की इन बातों को अपनाकर हम भी उनकी तरह सफलता की राह पर आगे बढ़ सकते हैं।
    आगे की स्लाइडों में जानिए एपल कंपनी के भूतपूर्व सीईओ स्टीव जॉब्स के लाइफ के फंडे...
    source: forbes.com
  • कला और विज्ञान का साथ:
    एपल और अन्य कंप्यूटर कंपनियों में हमेशा बड़ा अंतर रहा है। एपल ने कला और विज्ञान को मिलाकर पेश किया। जॉब्स ने मैक कंप्यूटर बनाने वाली टीम में एंथ्रोपोलॉजी, आर्ट, हिस्ट्री और पोइट्री जैसे विषयों की पृष्ठभूमि वाले लोगों को शामिल किया। एपल को अद्वितीय बनाने में इसने बड़ी भूमिका निभाई। आईपैड हो या टैबलेट, यह उत्पाद के दिखने और उसे महसूस करने का अंतर है। मगर, कंप्यूटर साइंटिस्ट या इंजीनियर इसे नहीं समझ पाता।
  • दूसरों की राय से भविष्य नहीं रचा जाता : प्रबंधन की थ्योरी है कि उपभोक्ता आधारित इंडस्ट्री में हमें उपभोक्ता की सुननी होती है। लेकिन जॉब्स का मानना था उपभोक्ता नहीं जानते कि उन्हें क्या चाहिए। खासतौर पर जब उन्होंने उस तरह के उत्पाद को न तो पहले देखा, न छुआ हो। जब लोगों ने पहली बार आईपैड का नाम सुना तो मजाक उड़ाया। लेकिन वही आईपैड एपल के इतिहास में सबसे तेजी से बिकने वाला उत्पाद बना। जिन्होंने इसका इस्तेमाल किया, यह उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया। जॉब्स का विश्वास दूसरों की अपेक्षा खुद पर अधिक था।
  • नाकामी से मत डरो :
    जॉब्स ने जिसे चुना, उसी ने उन्हें कंपनी से बेदखल कर दिया। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। अपने जुनून को पूरा करने के लिए वह कंपनी में वापस गए और खुद को हमेशा ऊपर रखा। स्टैनफोर्ड में उन्होंने कहा था, स्वर्ग जाने की प्रबल इच्छा रखने वाला व्यक्ति भी मरना नहीं चाहता। मगर, मृत्यु तो हम सभी को आनी है। यह जीवन की एकमात्र सर्वोत्तम खोज है। आज आप नए हैं, कुछ दिनों बाद पुराने होंगे और रास्ते से हटा दिए जाएंगे। सीमित समय है। अपनी अंतरात्मा की आवाज को न मारें।
  • भविष्य में कडिय़ां नहीं जुड़ सकतीं :
    जॉब्स कहते थे कडिय़ां भविष्य में नहीं जुड़ सकतीं। इन्हें जोडऩे के लिए जिंदगी में पीछे देखना होगा। इसलिए आपको विश्वास करना होगा कि ये बिंदु मिलकर भविष्य में कोई न कोई तस्वीर जरूर बनाएंगे। अपने गुणों, भाग्य, जीवन, कर्म या किसी न किसी चीज पर विश्वास करना ही होगा। इस सोच ने मुझे कभी झुकाया नहीं, बल्कि मेरे जीवन में अंतर पैदा किया।
  • मन की आवाज सुनें:
    कई लोग वही करते हैं जो उनके माता-पिता कहते हैं। ऐसे वे दुनिया नहीं बदल सकते। जॉब्स ने जब पहली बार ग्राफिकल यूजर इंटरफेस देखा और समझ गए कि यही कंप्यूटिंग का भविष्य है। इसलिए वह मैकिंटोश बना पाए। वे कहते थे मन की सुनने के लिए आपको स्मार्ट बनना होगा।
  • दूसरों और खुद से अधिक अपेक्षा रखना :जॉब्स खुद से और उनके लिए काम करने वालों से उनका सर्वश्रेष्ठ चाहते थे। अपने आस-पास कुशल लोगों को रखते थे। क्यों? इससे उनको चुनौती मिलती थी। कहावत है कि यदि आप ‘बी’ प्लेयर हैं तो आप ‘सी’ प्लेयर को नौकरी में रखेंगे। क्योंकि आप नहीं चाहेंगे आपका अधीनस्थ आपसे स्मार्ट हो। यदि आप ‘ए’ प्लेयर हैं तो आप ‘ए प्लस’ कर्मचारियों की नियुक्त करेंगे क्योंकि आपको सर्वश्रेष्ठ परिणाम चाहिए होंगे।
  • सही की नहीं, सफलता की चिंता करो:एक इंटरव्यू में जॉब्स ने यह कहा था। अगर खुद को बेहतर बनाने के लिए दूसरों के महान विचारों को आपको चुराना पड़ता है, तो ऐसा करें। अगर जॉब्स लीजा पर ही अटके रहते तो एपल कभी मैकिंटोश तक नहीं पहुंच पाता।
  • कुशल लोगों से घिरे रहें:
    लोगों में गलत धारणा थी कि एपल का अर्थ स्टीव जॉब्स है। जबकि हकीकत में फिल शेलर, जॉनी ईव, पीटर ओपेनहीमर, टिम कुक और रॉन जॉनसन जैसे कुशल लोगों से जॉब्स घिरे रहते थे। ये वो लोग थे, जिन्हें उनके काम के हिसाब से क्रेडिट नहीं मिला। यही वजह है कि जॉब के सीईओ नहीं रहने पर भी एपल के शेयरों में मजबूती बनी रही, क्योंकि टीम में कुशल लोगों का योगदान था।
  • स्टे हंगरी, स्टे फूलिश:
    जॉब्स के भाषण से - जब मैं छोटा था हम सभी ‘द व्होल अर्थ कैटालॉग’ पढ़ा करते थे। मेरी पीढ़ी के लिए वह बाइबल की तरह थी। उसे स्टीवर्ट ब्र्रांड नामक व्यक्ति ने बनाया था। उन्होंने अपनी कविताओं से किताब को जीवंत कर दिया था। वह ऐसा था जैसे गूगल दस्तावेज के रूप में आ जाए। लेकिन गूगल के आने के 35 वर्ष पहले वह किताब महान विचारों और आदर्शों के साथ सबकी पसंदीदा थी। 70 के दशक के मध्य की बात है उन्होंने एक अंतिम अंक निकाला। उसके कवर पर एक फोटो छापी। उसके नीचे लिखा था स्टे हंगरी स्टे फूलिश। यह उनका अंतिम संदेश था। मैंने भी हमेशा ऐसी ही विदाई चाही।
  • विज़न, कठोर परिश्रम और दृढ़ निश्चय से सब संभव:
    बेहतरीन सीईओ,आधुनिक कंप्यूटर के पिता और एक महान इंसान थे जॉब्स। 1990 में जब वह दोबारा एपल लौटे तब कंपनी दिवालिया होने के करीब थी। लेकिन आज दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है। हम भी उनकी तरह खास बन सकते हैं अगर हम उनके जीवन से कुछ सबक ले सकें।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: learn from Jobs' life and we can achieve all targets of our life!
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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