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PHOTOS: बेहद असफल लोगों की 7 आदतें!

Dainikbhaskar.com | Dec 25, 2012, 15:55 IST

  • लेखक स्टीफन कवि ने ‘सफल लोगों की 7 आदतें’ किताब लिखी।
    अब डार्टमाउथ कॉलेज के मैनेजमेंट प्रोफेसर सिडनी फिनकेलस्टेन की लिखी ‘वाई स्मार्ट एक्जिक्यूटिव्स फेल’ किताब से जानें असफल एक्जिक्यूटिव में कौन सी आदतें एक जैसी होती हैं, जो उनकी असफलता का कारण बनती हैं।
    आगे की स्लाइडों में जानिए बेहद असफल लोगों की 7 आदतें...
  • परिस्थितियों पर प्रभुत्व बनाना।
    असफल लीडर्स अपनी क्षमताओं को ज्यादा आंकने लगते हैं। अपनी पिछली सफलता में वे परिस्थितियों और मौके की भूमिका को नजरअंदाज कर देते हैं। उदाहरण के लिए सैमसंग के सीईओ कॉन-ही ली ने इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट के क्षेत्र में कंपनी की सफलता से उत्साहित होकर सोचा कि वे ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में भी बेहतर प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने ओवर सैचुरेटेड ऑटोमोबाइल बाजार में पांच अरब डॉलर निवेश किए क्योंकि कारों के शौकीन ली इलेक्ट्रॉनिक्स के बाजार की तरह इस बिजनेस में भी स्थापित होना चाहते थे। जबकि उन्हें इस बिजनेस का अनुभव नहीं था।
  • निजी हित और कंपनी हितों के बीच अंतर न होना।
    हम कंपनी के लिए प्रतिबद्ध बिजनेस लीडर्स चाहते हैं, जो अपने हितों को कंपनी के हितों के साथ जोड़कर देखें। मगर, देखा गया है कि असफल लीडर कंपनी हितों का प्रयोग निजी महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए करते हैं। कई बार कंपनी में लंबे समय तक अच्छा काम करने वाले सीईओ सोचते हैं कि वे ही कंपनी को फायदे की स्थिति तक लाए हैं। ऐसे में वे अपने कंपनी से ले रहे लाभों को इस फायदे की तुलना में छोटा मानते हैं। उदाहरण टायको कंपनी के डेनिस कोजलोवेस्की, जो कार्पोरेट फंड का निजी उद्देश्यों के लिए प्रयोग करते थे।
  • वे सोचते हैं कि उन्हें सब पता है।
    एक प्रगतिशील लीडर एक मिनट में कई फैसले कर लेता है। फिर चाहे निर्णय कितना ही मुश्किल क्यों न हो। जिन परिस्थितियों को हल करने में लोग कई दिन लगाते हैं उन्हें चंद सेकेंड्स में हल कर लेता है। मगर, यह स्थिति भ्रम पैदा करती है। जो लीडर्स जल्दबाजी में मुद्दों का समाधान करते हैं वे उनके असर के बारे में नहीं सोच पाते। वे सोचते हैं कि उन्हें सब पता है। लेकिन इस तरह वे नई चीजें सीखने के लिए कभी तैयार नहीं होते। रबरमेड के सीईओ वोल्फगैंग शेमिट जटिल मुद्दों को हल करने की अपनी योग्यता को फ्लैश के जरिए लोगों को बताते थे। इसके चलते उनके मातहत मजाक में कहने लगे थे कि वोल्फ सबकुछ जानते हैं। जो लीडर ये सोचते हैं कि वे सब कुछ जानते हैं, वे दूसरों को विचार व्यक्त नहीं करने देते। यही वजह है कि 1993 में जहां फॉर्च्यून ने इस कंपनी की प्रशंसा की वहीं इसके कुछ साल बाद कॉन्गलोमेट न्यूवेल कंपनी ने उसका अधिग्रहण कर लिया।
  • जो उनके साथ नहीं आता, उसे हटा देते हैं।
    कुछ सीईओ अपने विजन के साथ दो विकल्प रखते हैं। उनके प्लान के साथ जुड़ें या कंपनी छोड़ दें। सीईओ को अपना दृष्टिकोण नहीं थोपना चाहिए। वास्तव में अपने मतों से सहमत न होने वाले कर्मचारियों को बाहर करने वाले सीईओ को समस्या के हल का बेहतर विकल्प नहीं मिलता। ये संस्थान के साथ खिलवाड़ है क्योंकि इससे काम का माहौल बिगड़ता है वहीं अन्य कर्मचारी भी नौकरी छोडऩे लगते हैं। रबरमेड में शैमिट ने ऐसा धमकीपूर्ण माहौल बना दिया कि कई बार वहां से अनावश्यक लोगों को निकाला गया। जब नए कर्मचारियों ने महसूस किया कि उन्हें सीईओ का सपोर्ट नहीं मिल रहा है तो उनमें से कई ने जल्द से जल्द कंपनी छोडऩा शुरू कर दिया। इन आत्मघाती सीईओ ने कंपनी में हर कर्मचारी को पीछे छोड़ दिया और वे कंपनी को मुसीबत की ओर ले गए। कंपनी में ऐसा कोई आदमी नहीं बचा था जो उन्हें, इसके बारे में चेतावनी दे पाता।
  • कंपनी की छवि से ज्यादा खुद की चिंता।
    आप ऐसे हाई प्रोफाइल एक्जिक्यूटिव्य को जानते हैं, जो लगातार लोगों की नजरों में बने रहते हैं। समस्या ये है कि मीडिया की वाह-वाही के बीच इन लीडर्स की क्षमताएं और प्रयास अप्रभावी हो जाते हैं। क्योंकि वे अपनी इमेज की चिंता में कंपनी के लिए कम समय निकाल पाते हैं। वे काम को पूरा करने के बजाय कई बार उसे बीच में ही छोड़कर चले जाते हैं। कई बार तो वे वित्तीय-रिपोर्टिंग को अपनी इमेज निखारने के लिए उपयोग करते हैं। वे वित्तीय खातों को कंट्रोल टूल के रूप में प्रयोग करने के बजाय वे मीडिया से संबंध बनाने के लिए यानी पब्लिक रिलेशन टूल की तरह उपयोग करते हैं। टायको कंपनी के कोजलोविस्की ने कंपनी की इमेज ब्रांडिंग के लिए लोगों को धोखा दिया। वे मानते थे कि कंपनी ये सब पब्लिक रिलेशन के लिए करती है।
  • वे बाधाओं को कम आंकते हैं।
    अपने विजन में अधिक विश्वास करने वाले सीईओ कंपनी की समस्याओं को कम आंकते हैं। समस्याओं के हल के लिए नए सिरे से उसका मूल्यांकन नहीं करते। उदाहरण इरिडियम और मोटोरोला के लीडर्स में देखा जा सकता है। ये जानते हुए कि लैंड बेस्ड सेलफोन अच्छा विकल्प है, वे सैटेलाइट लॉन्च के लिए अरबों डॉलर का निवेश करते रहे।
  • पुरानी नीतियों पर जमे रहना।
    कई सीईओ जांचे-परखे तरीकों पर ही भरोसा करके कंपनी को पतन की ओर ले जाते हैं। वे स्थिर बिजनेस मॉडल से चिपके रहकर बिजनेस में इनोवेशन लाने की बजाय उन चीजों पर जोर देते हैं, जिससे अतीत में सफलता मिली थी। उदाहरण के लिए मैटल कंपनी जिल बराड एजुकेशनल सॉफ्टवेयर के प्रमोशन में उन्हीं टेक्निक का प्रयोग कर रहीं थी, जो उन्होंने बार्बी डॉल के प्रमोशन के लिए अपनाईं थीं। यह जानते हुए कि सॉफ्टवेयर और बॉर्बी डॉल के वितरण का तरीका पूरी तरह अलग है।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: PHOTOS: 7 Habits of Highly Unsuccessful people!
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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