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STRANGE: 100 साल पहले अपनाए गए डाइटिंग के खतरनाक तरीके!

dainikbhaskar.com | Jan 05, 2013, 10:05 IST

  • डाइट शब्द ग्रीक के ‘डाइटिया’ से आया है यानी जिंदगी जीने का एक तरीका।
    ग्रीक और रोमन सदियों से डाइटिंग कर रहे हैं। मगर, असल में डाइटिंग की शुरुआत वक्टोरियन लोगों ने की थी। इसका इतिहास दो हजार साल पुराना है।
    आगे की स्लाइडों में जानिए दुनिया में अपनाए गए अजीब डाइट जो खतरनाक और जानलेवा थे...
  • टेपवर्म डाइट
    19वीं सदी की शुरुआत में टेपवर्म डाइट फॉक्सक्राफ्ट के नाम से मशहूर हुई। कई लोग छोटे टेपवर्म को गोली की तरह खाते थे। उनका मानना था कि यह बड़े होकर आंत में से भोजन को अब्जॉर्ब कर लेंगे। इससे उन्हें डायरिया, उल्टी की समस्या होती और उनका वजन घट जाता। जब उनकी इच्छा के मुताबिक वजन घट जाता तो वह एंटी पैरासिटिक पिल्स ले लेते, जिससे टेपवर्म मर जाए। यह कई तरह से खतरनाक था। टेपवर्म 9 फीट तक लंबा हो सकता है। वह सिरदर्द, आंखों में परेशानी, मेनिनजाइटिस और डिमेंशिया का कारण भी बनते थे। ओपेरा सिंगर मरिया कलास वजन कम करने के लिए पैरासाइट्स खाती थीं।
  • विनेगर
    लार्ड बैरन पहले थे, जिन्होंने लोगों में अमीरों के वजन कम करने के तरीकों को मशहूर किया। आजकल के सेलिब्रिटीज की तरह कवि बैरन ने अपने फिगर के लिए कड़ी मेहनत की। 19वीं सदी की शुरुआत में बैरन ने विनेगर यानी सिरके को वजन कम करने का तरीका बताया। वजन कम करने के लिए वे रोज सिरका पीते और उसमें डुबाकर आलू खाया करते थे। इससे उल्टी और डायरिया की समस्या होती थी। वह जिंदा होते तो डाइट पर लिखी गई उनकी किताब बेस्टसेलर होती।
  • चबाएं और थूक दें
    १९वीं सदी के अंत में वजन घटाने के लिए अमेरिकी होरेस फ्लेचर ने खाने को चबाकर थूक देने का तरीका निकाला। इसे फ्लेचरिज्म कहा जाता था। एक बार लिए गए कौर को 700 बार चबाना होता था। खाने को चबाते वक्त ध्यान रखा जाता कि खाने से रस निकलते ही फाइबर को थूक दिया जाए। इस तरीके को १९वीं सदी के मशहूर लेखक हेनरी जेम्स ने भी अपनाया था।
  • रबर
    1800 के मध्य में चार्ल्स गुडइयर ने खोजा कैसे रबर को उसके नेचुरल फॉर्म से वल्केनाइजेशन प्रक्रिया द्वारा बेहतर बनाया जाए। औद्योगिक क्रांति के बाद रबर के कोर्सेट और कपड़े बनाए गए। लोगों का मानना था इसे पहनने से पसीना बहेगा जिससे वजन घटेगा। पुरुष और महिलाएं दोनों इसका प्रयोग करते थे। वह इतने तंग होते कि त्वचा के अंदर मांस नर्म होकर टूटने लगता और संक्रमण हो जाता था।
  • आर्सेनिक
    19वीं सदी में डाइट ड्रग्स और गोली का व्यापार तेजी से बढ़ा। मगर, इन वंडर पिल्स में आर्सेनिक और स्ट्रायचनीन जैसे खतरनाक तत्व होते थे, जो जान ले सकते हैं। गोलियों में आर्सेनिक की मात्रा कम थी, लेकिन वह फिर भी बेहद खतरनाक थी। कई बार लोग इनकी बहुत ज्यादा मात्रा ले लेते थे। उन्हें लगता इससे वे ज्यादा तेजी से वजन कम कर लेंगे। लोगों को यह बताया नहीं जाता था कि इसमें आर्सेनिक मिला है।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: STRANGE: 100 years ago adopted dangerously dieting!
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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