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आर्मी में आज भी बेहूदे नियम, इन्हें सुनकर चकराता है सिर

dainikbhaskar.com | Sep 13, 2013, 00:01 IST

  • सेनाएं में अनुशासन को सबसे आगे रखा जाता है। प्राचीन काल से ही सेनाओं में अनुशासन के नाम पर नियम और परंपराएं प्रचलित रहती हैं।

    वक्त के साथ बहुत सी चीजों में बदलाव आता है। इनके नियमों, रीति रिवाजों में बदलाव आया, लेकिन कुछ अजीब और बेहूदे नियम और परंपराएं हैं।

    इनके पीछे कोई तार्किक या लाभ हानि की वजह सामने नहीं आती है। सेनाओं में आज भी इन्हें अनुशासन, नियम और परंपरा के नाम पर ढोया जा रहा है।


    सेनाओं में कुछ ऐसी विचित्र परंपराएं अभी भी जारी हैं, जिन्हें जानकर आज भी हैरानी होती हैं।

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  • 1-भारी ठंड के बावजूद भी हाथ जैकेज या पैंट की जेब में नहीं डाल सकते :सेनाओं में आमतौर पर अधिकारियों और जवानों का पैंट या जैकेट की जेब में हाथ डालना उचित नहीं माना जाता है।
    इराक युद्ध के समय अमेरिकी मरीनों के हाथ ठंड के मारे कांप रहे थे,लेकिन कोई सैनिक पैंट या जैकेट की जेब के अंदर नहीं डाल रहा था। यह देख मरीन सैनिकों को सर्जेंट मेजर ने कहा, भूल जाइए इस नियम को, यदि हाथों को ठंड लगती है, तो उन्हें अपनी जेब के अंदर डालिए।

    अगर सच कहा जाए तो यह मूर्खता वाला नियम है, जिसे बीच के लोगों ने बना दिया और यह कहने लगे कि जेब में हाथ डालना गंदा और अनप्रोफेशनल दिखता है।
     

  • 2- चमकीली पट्टियां कितनी जरूरी :एक सैनिक के लिए सबसे जरूरी अनुशासन और ईमानदारी है, लेकिन क्या पीली और चमकीली पट्टियां वाकई में जरूरी हैं।

    यदि रोड में ट्रैफिक हो या लाइव फायर ट्रेनिंग हो तब तो यह समझा जा  सकता है, लेकिन सैनिकों में इतनी रिफलेक्टिव बेल्ट पहनाना तो बेहूदगी ही होगी। लेकिन अमेरिका में नए जवानों को ये पट्टियां पहनना जरूरी है।

  • 3- हर हफ्ते हेयर कटिंग :इस सैनिक को देखिए इसे हर हफ्ते ऐसी हेयर कटिंग करानी होती है। हर सप्ताह ऐसी विचित्र कटिंग क्या समय की बचत या पैसे बचाने के लिए की जाती है।

    दुनिया की अधिकांश सेनाओं में जूनियर सैनिक या रंगरूट जवानों को ऐसी कटिंग कराना जरूरी है। क्या इस वीकली कटिंग की बजाए जवानों के लिए महीने में एक बार लेकिन बेहतर कटिंग की व्यवस्था नहीं की जा सकती है। भारत में भी यह परंपरा प्रचलित है।

  • 4- सेना के जनरल, कर्नल और वरिष्ठ अफसरों के लिए विशेष पार्किंग अधिकार :यह एक तरह से स्वयं से सवाल पूछने वाला मुद्दा है जब किसी गर्भवती महिला या किसी विकलांग की बजाए सेना के वरिष्ठ अफसरों को पार्किंग के लिए प्राथमिकता दी जाए।

  • 5-सेना के जवान सीनियर अफसरों के बंगले की घास काट तो सकता है, लेकिन टहल नहीं सकता :सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के बंगले में लगी घास की कटाई तो सेना के जवान करते हैं लेकिन वे इस घास पर घूम नहीं सकते हैं।

    यह नियम सेनाओं में बड़े लंबे समय से चला आ रहा है। सैनिक सीनियर अफसर का गार्डन संवारते तो हैं, लेकिन वह इस घास पर चल नहीं सकते। यदि आपने इन नियमों की अनदेखी की तो फिर आपको उठाकर बाहर फेंक दिया जाएगा।
     

  • 6- परेड रेस्ट में सीनियर अधिकारियों से बात करनी है तो जूनियर सैनिक पीछे हाथ रखते हैं :सेना में कुछ वरिष्ठ अधिकारी जरूरत से ज्यादा कठोर होते हैं।

    परेड रेस्ट में जब सैनिक अपने दोनों पैरों के बीच विशेष दूरी बनाकर खड़े होते हैं तो उनके हाथ कुछ इस तरह पीठ के पीछे की ओर होते हैं। इस दौरान सीनियर उनसे बात करते हैं।

    यहां यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सेना के सीनियर अधिकारी अपने जूनियर से हर स्थिति में इसी तरह बात करते हैं।

  • 7- बॉस्केटबॉल खेलना है तो ऑपरेशनल रिस्क मैनेजमेंट (ओआरएम) का होगा बड़ा पेपरवर्क :अमेरिकी सेना के मुख्यालय पेंटागन को ऑपरेशनल रिस्क मैनेजमेंट करना बेहद पसंद हैं। यह लंबी कागजी प्रक्रिया है। यदि किसी सैनिक को बॉस्केट बॉल खेलनी है तो उसे पेपरवर्क पूरा होने के बाद ही मौका मिलेगा।

    अधिकतर लोग मानते हैं कि सेना ब्यूरोक्रेटिक और तमाम बेकार के अनावश्यक चीजों को पुराने ढर्रे पर चलाए रखती है। अगर सैनिक बॉस्केटबॉल खेलने के लिए जाना चाहते हैं, तो उन्हें सीधे मैदान जाने देना चाहिए, भला इसमें इतने बड़े पेपरवर्क की जरूर क्या है।

  • 8- किसी काम में व्यस्त हुए और सीनियर को नहीं किया सैल्यूट तो दोबारा देनी होगी सलामी :यदि कोई जूनियर अपने सेलफोन पर या किसी अन्य काम में व्यस्त है और इस दौरान वह किसी  सीनियर अफसर को सैल्यूट करना भूल गया तो इसे अनुशासनहीनता ही माना जाता है। सैनिक को दोबारा सैल्यूट करना होता है।

  • 9- चेकिंग इन और चेकिंग आउट :जब भी कोई सैनिक किसी यूनिट को छोड़कर जाता है या नई यूनिट ज्वाइन करता है तो उसे चेक इन और चेक आउट की प्रक्रिया से गुजरना होता है। सैनिक को इसके लिए कई जगह चक्कर लगाने पड़ते हैं। यह भी काफी विचित्र लगता है। अमेरिकी सेना में उसे इसके लिए 27 जगह वरिष्ठ अधिकारियों के सिग्नेचर करवाने होते हैं।

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: wiered Customs And Tradtions of armies
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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