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Selfie with Shiva: समुद्र की लहरों के बीच 196 सालों से विराजमान है शिवमंदिर

dainikbhaskar.com | Dec 02, 2016, 12:28 PM IST

प्रकृति का अद्भुत नजारा।

अहमदाबाद। अरब सागर के किनारे है प्रसिद्ध कोटेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर। यह तीर्थधाम भारत का एक विख्यात यात्राधाम की तरह पहचाना जाता है। इस मंदिर का इतिहास भी बहुत अनोखा है। कहा जाता है कि रावण ने घोर तपस्या कर शिवजी को प्रसन्न किया। इसमें वरदान स्वरूप उसे शंकर जी का लिंग अपने साथ लंका ले जाने का वरदान मिला। इसके साथ ही शिवजी ने यह शर्त रख दी कि इस लिंग को कहीं भी जमीन पर मत रखना, यदि रखोगे, तो उसकी प्राण प्रतिष्ठा वहीं करनी होगी। यहीं हुई उस शिवलिंग की प्रतिष्ठा...
इसके बाद रावण शिवलिंग लेकर लंका की तरफ निकल पड़ा। उधर रास्ते में नारायण सरोवर के पास ब्रह्माजी ने गड्ढे में फंसी हुई गाय का स्वरूप ले लिया। इससे गाय को बचाने के लिए रावण ने शिवलिंग को वहीं जमीन पर रख दिया। जमीन पर रखते ही उस शिवलिंग के एक करोड़ लिंग बन गए। अब रावण की दुविधा यह थी कि वह जिस लिंग को लाया था, वह कौन-सा था? इसलिए उसने शिवलिंग को वहीं प्रतिष्ठापित कर दिया। आज उसी शिवलिंग को कोटेश्वर महादेव के रूप में पहचाना जाता है। इस पवित्र तीर्थधाम में हजारों की संख्या में लोग दर्शन के लिए आते हैं। यहां के अद्भुत नजारे का आनंद उठाते हैं। दूसरी तरफ यह प्राचीन मंदिर अरब सागर के किनारे होने के कारण भक्त दर्शन के साथ-साथ सेल्फी लेना भी पसंद करते हैं। इसलिए आज इसे सेल्फी विथ शिवा के नाम से भी जाना जाता है।

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Web Title: History Of Koteswar Mahadev Temple At Bhuj City
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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